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भारत ने EU से स्क्रैप निर्यात प्रतिबंधों में राहत की मांग की, स्टील और एल्युमिनियम उद्योग की चिंताएं बढ़ीं

नई दिल्ली, 29 जून। भारत ने यूरोपीय संघ (EU) से स्क्रैप धातु के निर्यात पर प्रस्तावित प्रतिबंधों में राहत देने का आग्रह किया है। सरकार का कहना है कि यदि इन प्रतिबंधों को लागू किया गया तो भारत के स्टील और एल्युमिनियम उद्योग के लिए आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ने और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर असर पड़ने की आशंका है। क्यों महत्वपूर्ण है स्क्रैप धातु? स्टील और एल्युमिनियम उद्योग में पुनर्चक्रित (रीसाइकिल) स्क्रैप धातु का व्यापक उपयोग किया जाता है। इससे उत्पादन लागत कम होती है, ऊर्जा की बचत होती है और कार्बन उत्सर्जन भी अपेक्षाकृत कम रहता है। भारत अपनी औद्योगिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में स्क्रैप धातु का आयात करता है, जिसमें यूरोपीय संघ एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है। भारत ने EU के समक्ष रखी चिंता वाणिज्य अधिकारियों ने यूरोपीय संघ के समक्ष यह मुद्दा उठाते हुए कहा है कि स्क्रैप निर्यात पर कड़े प्रतिबंध या अतिरिक्त शर्तें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकती हैं। भारत ने सुझाव दिया है कि ऐसे उपाय अपनाए जाएं, जिनसे यूरोपीय उद्योगों की जरूरतें भी पूरी हों और साझेदार देशों को भी पर्याप्त आपूर्ति मिलती रहे। स्टील और एल्युमिनियम उद्योग पर संभावित असर उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्क्रैप की उपलब्धता कम होती है तो स्टील और एल्युमिनियम उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। इसका असर निर्माण, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, बुनियादी ढांचा और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है, जहां इन धातुओं का व्यापक उपयोग होता है। व्यापार वार्ता पर भी नजर यह मुद्दा ऐसे समय सामने आया है जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापक व्यापार और निवेश सहयोग को लेकर बातचीत जारी है। दोनों पक्ष मुक्त व्यापार समझौते (FTA) सहित कई आर्थिक मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। ऐसे में स्क्रैप निर्यात का विषय भी वार्ता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। उद्योग जगत की प्रतिक्रिया भारतीय स्टील और धातु उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि स्थिर और किफायती कच्चे माल की उपलब्धता घरेलू विनिर्माण को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए आवश्यक है। उद्योग ने वैकल्पिक स्रोतों के विकास और घरेलू स्क्रैप संग्रह प्रणाली को भी मजबूत करने पर जोर दिया है। पर्यावरणीय दृष्टि से भी अहम स्क्रैप आधारित धातु उत्पादन को पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है, क्योंकि इससे नई धातु के उत्पादन की तुलना में कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है और कार्बन उत्सर्जन भी घटता है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए स्क्रैप की निर्बाध उपलब्धता महत्वपूर्ण है। आगे क्या? भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस मुद्दे पर आगे भी चर्चा जारी रहने की संभावना है। दोनों पक्ष ऐसा समाधान तलाशने का प्रयास कर रहे हैं जिससे व्यापारिक हितों का संतुलन बना रहे और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। उद्योग जगत की नजर अब आगामी वार्ताओं और यूरोपीय संघ के अंतिम निर्णय पर बनी हुई है। स्रोत:वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार मूल रिपोर्ट:भारत-यूरोपीय संघ व्यापार वार्ता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से संबंधित आधिकारिक जानकारी एवं समाचार एजेंसियों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते के क्रियान्वयन को लेकर उद्योग जगत की तैयारियां तेज

नई दिल्ली, 28 जून। भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement-FTA) के क्रियान्वयन की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं। सरकार, उद्योग संगठनों और निर्यातकों ने समझौते से मिलने वाले संभावित अवसरों का लाभ उठाने के लिए अपनी रणनीतियों पर काम शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। निर्यातकों की बढ़ीं उम्मीदें एफटीए लागू होने के बाद भारतीय वस्त्र, आभूषण, चमड़ा, कृषि उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। कई निर्यातक कंपनियों ने यूके बाजार के लिए अपने उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। उद्योग जगत का कहना है कि इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में भी सुधार होगा। निवेश को मिलेगा बढ़ावा व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में भी वृद्धि हो सकती है। भारतीय और ब्रिटिश कंपनियां विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं, फार्मास्यूटिकल्स और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की संभावनाओं पर काम कर रही हैं। उद्योग संगठनों ने शुरू की तैयारियां देश के प्रमुख उद्योग संगठनों ने सदस्य कंपनियों के साथ बैठकें शुरू कर दी हैं ताकि उन्हें एफटीए के नए नियमों, टैरिफ में बदलाव और निर्यात प्रक्रियाओं की जानकारी दी जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते तैयारी करने वाली कंपनियां नए अवसरों का बेहतर लाभ उठा सकेंगी। MSME क्षेत्र को भी होगा लाभ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए भी यह समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कम शुल्क और बेहतर बाजार पहुंच मिलने से छोटे उद्योगों के निर्यात में वृद्धि हो सकती है। सरकार भी MSME क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए तैयार करने पर विशेष ध्यान दे रही है। सरकार ने जताया भरोसा केंद्र सरकार का कहना है कि भारत-यूके एफटीए देश की आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और वैश्विक व्यापार में भारत की भागीदारी को मजबूत करेगा। वाणिज्य मंत्रालय संबंधित विभागों के साथ मिलकर समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारियों की समीक्षा कर रहा है। विशेषज्ञों की राय आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार यह समझौता भारतीय उद्योगों के लिए एक बड़ा अवसर है, लेकिन वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए गुणवत्ता, उत्पादकता और आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत करना होगा। उनका मानना है कि यदि उद्योग समय पर आवश्यक बदलाव करते हैं तो भारतीय निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। आगे की राह समझौते के औपचारिक क्रियान्वयन से पहले दोनों देशों के संबंधित विभाग तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। उद्योग जगत को उम्मीद है कि समझौते के लागू होने के बाद भारत और यूके के बीच आर्थिक साझेदारी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी और दोनों देशों के व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे। स्रोत:वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार मूल रिपोर्ट:वाणिज्य मंत्रालय, उद्योग संगठनों एवं राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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