नई दिल्ली, 28 जून। भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement-FTA) के क्रियान्वयन की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं। सरकार, उद्योग संगठनों और निर्यातकों ने समझौते से मिलने वाले संभावित अवसरों का लाभ उठाने के लिए अपनी रणनीतियों पर काम शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
निर्यातकों की बढ़ीं उम्मीदें
एफटीए लागू होने के बाद भारतीय वस्त्र, आभूषण, चमड़ा, कृषि उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। कई निर्यातक कंपनियों ने यूके बाजार के लिए अपने उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। उद्योग जगत का कहना है कि इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में भी सुधार होगा।
निवेश को मिलेगा बढ़ावा
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में भी वृद्धि हो सकती है। भारतीय और ब्रिटिश कंपनियां विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं, फार्मास्यूटिकल्स और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की संभावनाओं पर काम कर रही हैं।
उद्योग संगठनों ने शुरू की तैयारियां
देश के प्रमुख उद्योग संगठनों ने सदस्य कंपनियों के साथ बैठकें शुरू कर दी हैं ताकि उन्हें एफटीए के नए नियमों, टैरिफ में बदलाव और निर्यात प्रक्रियाओं की जानकारी दी जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते तैयारी करने वाली कंपनियां नए अवसरों का बेहतर लाभ उठा सकेंगी।
MSME क्षेत्र को भी होगा लाभ
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए भी यह समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कम शुल्क और बेहतर बाजार पहुंच मिलने से छोटे उद्योगों के निर्यात में वृद्धि हो सकती है। सरकार भी MSME क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए तैयार करने पर विशेष ध्यान दे रही है।
सरकार ने जताया भरोसा
केंद्र सरकार का कहना है कि भारत-यूके एफटीए देश की आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और वैश्विक व्यापार में भारत की भागीदारी को मजबूत करेगा। वाणिज्य मंत्रालय संबंधित विभागों के साथ मिलकर समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारियों की समीक्षा कर रहा है।
विशेषज्ञों की राय
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार यह समझौता भारतीय उद्योगों के लिए एक बड़ा अवसर है, लेकिन वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए गुणवत्ता, उत्पादकता और आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत करना होगा। उनका मानना है कि यदि उद्योग समय पर आवश्यक बदलाव करते हैं तो भारतीय निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
आगे की राह
समझौते के औपचारिक क्रियान्वयन से पहले दोनों देशों के संबंधित विभाग तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। उद्योग जगत को उम्मीद है कि समझौते के लागू होने के बाद भारत और यूके के बीच आर्थिक साझेदारी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी और दोनों देशों के व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे।
स्रोत:
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार
मूल रिपोर्ट:
वाणिज्य मंत्रालय, उद्योग संगठनों एवं राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के आधार पर
जय राष्ट्र न्यूज़






