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स्वतंत्रता दिवस से पहले देशभर में सुरक्षा कड़ी, 80वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां अंतिम चरण में

नई दिल्ली: भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले देशभर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। 15 अगस्त को होने वाले राष्ट्रीय समारोहों को देखते हुए दिल्ली समेत कई राज्यों में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी बढ़ा दी है। राजधानी दिल्ली में लाल किले के आसपास सुरक्षा के साथ-साथ यातायात व्यवस्था को भी सख्त किया गया है। लाल किले पर फुल ड्रेस रिहर्सल स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले दिल्ली के लाल किले पर फुल ड्रेस रिहर्सल आयोजित की गई। रिहर्सल के दौरान सुरक्षा बलों और विभिन्न टुकड़ियों ने मुख्य समारोह की तैयारियों को अंतिम रूप दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करेंगे। समारोह में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। दिल्ली में बढ़ाई गई सुरक्षा दिल्ली पुलिस ने राजधानी के महत्वपूर्ण स्थानों, सार्वजनिक क्षेत्रों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है। रेलवे स्टेशन, बाजार, परिवहन केंद्र और अन्य प्रमुख स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी की जा रही है। लाल किले और आसपास के इलाकों में सुरक्षा जांच भी बढ़ाई गई है। सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए लगातार निगरानी कर रही हैं। ट्रैफिक पर भी रहेगी पाबंदी 15 अगस्त को लाल किले में होने वाले समारोह के कारण दिल्ली के कई हिस्सों में ट्रैफिक डायवर्जन और सड़क प्रतिबंध लागू रहेंगे। कुछ मार्गों पर सामान्य यातायात को सीमित किया जाएगा और बसों तथा व्यावसायिक वाहनों के संचालन में भी बदलाव रहेगा। लोगों को समारोह वाले इलाकों में जाने से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी देखने और वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी गई है। सुबह 4 बजे से चलेगी दिल्ली मेट्रो स्वतंत्रता दिवस के दिन यात्रियों की सुविधा के लिए दिल्ली मेट्रो सेवाएं सुबह 4 बजे से शुरू की जाएंगी। इसका उद्देश्य विशेष मेहमानों, आम लोगों और समारोह में शामिल होने वाले लोगों की आवाजाही को आसान बनाना है। हालांकि, सुरक्षा कारणों से लाल किले और आसपास के इलाकों में कुछ प्रतिबंध लागू रहेंगे। देश के अन्य हिस्सों में भी तैयारियां तेज दिल्ली के अलावा देश के विभिन्न राज्यों में भी स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। कई जगहों पर फुल ड्रेस रिहर्सल आयोजित की गई है, जिसमें पुलिस, सुरक्षा बलों, एनसीसी और स्कूली छात्रों ने हिस्सा लिया। ओडिशा के भुवनेश्वर में भी 51 टुकड़ियों ने फुल ड्रेस रिहर्सल में भाग लिया। वहीं पंजाब और अन्य राज्यों में भी प्रशासनिक अधिकारियों ने समारोह की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। भारत-पाक सीमा पर भी चौकसी स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे इलाकों में भी सुरक्षा और निगरानी बढ़ाई गई है। सीमा क्षेत्रों में अतिरिक्त जवानों की तैनाती, गश्त और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। इस बार खास होगा स्वतंत्रता दिवस समारोह 2026 का स्वतंत्रता दिवस कई मायनों में खास है। इस वर्ष ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर लाल किले से इसे विशेष रूप से प्रस्तुत किए जाने की योजना है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर यानी 14 अगस्त को राष्ट्र को संबोधित करेंगी। इसकी जानकारी राष्ट्रपति सचिवालय/PIB की ओर से जारी की गई है। सुरक्षा के साथ सफाई और व्यवस्थाओं पर भी जोर लाल किले के आसपास नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए भी प्रशासनिक एजेंसियां सक्रिय हैं। जलभराव वाले स्थानों को ठीक करने, सड़कों की मरम्मत, नालियों की सफाई और सार्वजनिक सुविधाओं को दुरुस्त करने का काम तेज किया गया है। निष्कर्ष 80वें स्वतंत्रता दिवस के लिए देश तैयार है और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। दिल्ली में लाल किले के आसपास सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण और निगरानी बढ़ाई गई है, जबकि देश के अलग-अलग राज्यों में भी फुल ड्रेस रिहर्सल और समारोह की तैयारियां पूरी की जा रही हैं। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से देश को संबोधित करेंगे और पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किए जाएंगे। Source: PIB, NDTV, Indian Express, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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यही है भाजपा का दलितों के प्रति असली चरित्र! — विपक्ष का तीखा हमला

नई दिल्ली: संसद और देश की राजनीति में दलित अधिकारों और सामाजिक न्याय को लेकर एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर दलितों के प्रति कथित भेदभावपूर्ण रवैये का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए हैं। इसी क्रम में “यही है भाजपा का दलितों के प्रति असली चरित्र!” जैसी तीखी टिप्पणी सामने आई है। हालांकि, इस बयान के संदर्भ में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह विपक्ष की राजनीतिक टिप्पणी/आरोप है, भाजपा का आधिकारिक बयान नहीं। दलित मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को घेरा विपक्ष लंबे समय से केंद्र सरकार पर दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल उठाता रहा है। संसद में आरक्षण, प्रतिनिधित्व, सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों को लेकर भी अलग-अलग मौकों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली है। विपक्ष का आरोप है कि दलित समुदाय से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को अधिक स्पष्ट जवाब देना चाहिए। भाजपा का क्या कहना है? भाजपा की ओर से कई मौकों पर विपक्ष के ऐसे आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताया गया है। पार्टी का कहना रहा है कि केंद्र सरकार ने दलित कल्याण, गरीबों के आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। भाजपा नेता यह भी दावा करते रहे हैं कि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के कमजोर वर्गों तक पहुंचा है। आरक्षण और सामाजिक न्याय फिर चर्चा में दलित राजनीति के संदर्भ में आरक्षण और सामाजिक न्याय हमेशा से महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण के साथ-साथ राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक संस्थाओं में भागीदारी को लेकर भी बहस होती रही है। विपक्ष का कहना है कि इन मुद्दों पर केवल राजनीतिक बयानबाजी के बजाय ठोस नीतिगत कदमों और उनके प्रभाव पर चर्चा होनी चाहिए। सोशल मीडिया पर भी बयान चर्चा में “यही है भाजपा का दलितों के प्रति असली चरित्र!” जैसी टिप्पणी सोशल मीडिया पर भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है। समर्थक और विरोधी दोनों पक्ष इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। ऐसे बयानों के बीच किसी भी दावे को उसके मूल वीडियो, बयान और पूरे संदर्भ के साथ देखना जरूरी है। निष्कर्ष दलित अधिकारों और सामाजिक न्याय को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच भाजपा पर विपक्ष का यह हमला सियासी बयानबाजी को और तेज करता है। विपक्ष जहां भाजपा पर दलित हितों के खिलाफ रवैया अपनाने का आरोप लगा रहा है, वहीं भाजपा ऐसे आरोपों को खारिज करते हुए अपनी कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक न्याय से जुड़े कदमों को सामने रखती रही है। जय राष्ट्र न्यूज़

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संसद परिसर में गृहमंत्री अमित शाह का बदला अंदाज़, स्वतंत्रता दिवस से पहले दिखा अलग रंग

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र समाप्त होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक बार फिर चर्चा में हैं। संसद परिसर से सामने आई उनकी तस्वीरों और वीडियो में उनका अंदाज सामान्य राजनीतिक बैठकों से कुछ अलग नजर आया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा तेज हो गई। हालांकि, उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में उनके इस बदले अंदाज को लेकर किसी खास राजनीतिक फैसले या आधिकारिक कारण की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को तथ्य मानने से पहले सावधानी जरूरी है। मानसून सत्र के दौरान अमित शाह रहे सुर्खियों में संसद के हालिया मानसून सत्र में अमित शाह कई राजनीतिक मुद्दों को लेकर विपक्ष के निशाने पर रहे। खासतौर पर छात्रों से जुड़े मुद्दे पर विपक्ष लगातार गृह मंत्री से सदन में बयान देने की मांग कर रहा था। अमित शाह ने अंततः सदन में चर्चा और जवाब देने की इच्छा जताई थी। भाजपा की ओर से भी कहा गया कि गृह मंत्री संसद में विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। सत्र खत्म होने के बाद भी राजनीतिक चर्चा जारी 13 अगस्त को मानसून सत्र समाप्त होने के बाद भी अमित शाह के बयान को लेकर राजनीतिक बहस जारी रही। विपक्ष ने सवाल उठाया कि गृह मंत्री ने सत्र के अंतिम चरण में चर्चा की पेशकश क्यों की, जबकि इससे पहले भी उनसे बयान की मांग की जा रही थी। वहीं सरकार और भाजपा ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। संसद परिसर में बदला अंदाज क्यों चर्चा में आया? अमित शाह की संसद परिसर में सामने आई तस्वीरों को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ यूजर्स इसे 15 अगस्त और स्वतंत्रता दिवस से जुड़े माहौल से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे सिर्फ सामान्य सार्वजनिक उपस्थिति मान रहे हैं। फिलहाल किसी आधिकारिक बयान से यह पुष्टि नहीं हुई है कि उनके पहनावे या अंदाज में बदलाव के पीछे कोई विशेष राजनीतिक संदेश था। 15 अगस्त से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल देश 15 अगस्त को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। ऐसे समय में केंद्र सरकार के शीर्ष नेताओं की गतिविधियों पर स्वाभाविक रूप से लोगों की नजर बनी हुई है। अमित शाह गृह मंत्री के साथ-साथ केंद्र सरकार के प्रमुख रणनीतिक नेताओं में शामिल हैं। गृह मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट भी उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में सूचीबद्ध करती है। निष्कर्ष संसद परिसर में अमित शाह का अलग अंदाज सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय जरूर बना है, लेकिन इसके पीछे कोई विशेष राजनीतिक कारण या आधिकारिक संदेश होने की पुष्टि अभी नहीं हुई है। वहीं मानसून सत्र के दौरान छात्रों के मुद्दे और विपक्ष की मांगों को लेकर अमित शाह पहले ही राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहे हैं। Source: संसद से जुड़े ताजा समाचार, NDTV, Jansatta, गृह मंत्रालय जय राष्ट्र न्यूज़

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15 अगस्त से पहले स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां तेज, देश मना रहा है 80वां स्वतंत्रता दिवस

नई दिल्ली: देशभर में 15 अगस्त 2026 को मनाए जाने वाले स्वतंत्रता दिवस को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। इस वर्ष भारत अपनी आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है। राजधानी दिल्ली से लेकर देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में सरकारी संस्थानों, स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियां राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह लाल किले पर आयोजित किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करेंगे और राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। समारोह को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। लाल किले और आसपास के इलाकों में सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं। देशभर में तिरंगा अभियान और कार्यक्रम स्वतंत्रता दिवस से पहले देश के विभिन्न हिस्सों में तिरंगा यात्राएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम, देशभक्ति कार्यक्रम और जागरूकता अभियान आयोजित किए जा रहे हैं। स्कूलों और कॉलेजों में भी स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियां चल रही हैं। छात्र भाषण, देशभक्ति गीत, नृत्य, नाटक और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। सरकारी इमारतों पर तिरंगे की सजावट कई राज्यों में सरकारी कार्यालयों और प्रमुख सार्वजनिक इमारतों को तिरंगे की रोशनी और सजावट से सजाया जा रहा है। बाजारों और प्रमुख स्थानों पर भी स्वतंत्रता दिवस की थीम दिखाई देने लगी है। कई शहरों में स्थानीय प्रशासन की ओर से नागरिकों को राष्ट्रीय पर्व में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था पर खास नजर 15 अगस्त को देखते हुए दिल्ली समेत देश के प्रमुख शहरों में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती, वाहनों की जांच और निगरानी बढ़ाई जा रही है। राजधानी दिल्ली में लाल किले के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को विशेष रूप से मजबूत किया जाता है, क्योंकि यहां देश का मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित होता है। 80वां स्वतंत्रता दिवस क्यों खास है? भारत ने 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता हासिल की थी। वर्ष 2026 में आजादी के 79 वर्ष पूरे होने के बाद देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। यह अवसर देश की स्वतंत्रता यात्रा, लोकतांत्रिक उपलब्धियों और भविष्य की चुनौतियों पर विचार करने का भी मौका देता है। ‘हर घर तिरंगा’ को लेकर भी उत्साह स्वतंत्रता दिवस से पहले देशभर में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत लोगों को अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज लगाने और स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग स्वतंत्रता दिवस से जुड़े संदेश, तिरंगे की तस्वीरें और देशभक्ति से जुड़े पोस्ट साझा कर रहे हैं। 15 अगस्त को क्या होगा? स्वतंत्रता दिवस के दिन देशभर में ध्वजारोहण और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले से संबोधन के बाद विभिन्न क्षेत्रों में देश की उपलब्धियों और भविष्य की दिशा को लेकर संदेश दिए जाएंगे। स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और स्थानीय संस्थानों में भी ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित होंगे। निष्कर्ष 15 अगस्त 2026 से पहले देशभर में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां तेज हो गई हैं। भारत इस वर्ष अपनी आजादी का 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। दिल्ली के लाल किले से होने वाला मुख्य समारोह देशभर के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा। तिरंगा यात्राओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और ‘हर घर तिरंगा’ जैसी गतिविधियों के जरिए देशभर में स्वतंत्रता दिवस का उत्साह दिखाई दे रहा है। Source: भारत सरकार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और संबंधित सरकारी अपडेट जय राष्ट्र न्यूज़

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संसद का मानसून सत्र समाप्त, FCRA संशोधन विधेयक JPC के पास भेजा गया; हंगामे के बीच कई अहम फैसले

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त 2026 को समाप्त हो गया। पूरे सत्र के दौरान कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामा देखने को मिला। सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा हुई, जबकि विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक, 2026 को विस्तृत जांच और विचार के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया गया। FCRA संशोधन विधेयक JPC के पास भेजा गया सत्र के अंतिम चरण में FCRA संशोधन विधेयक सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले मुद्दों में शामिल रहा। लोकसभा ने विधेयक को दोनों सदनों की संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य विदेशी योगदान से जुड़े नियमों को मजबूत करना और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। वहीं विपक्ष और कुछ नागरिक संगठनों ने विधेयक के कई प्रावधानों पर गंभीर आपत्ति जताई है। विधेयक को लेकर विपक्ष ने जताई आपत्ति विपक्षी दलों ने FCRA संशोधन विधेयक के कुछ प्रावधानों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना है कि प्रस्तावित बदलावों से विदेशी सहायता प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं के कामकाज पर सरकार की निगरानी और नियंत्रण बढ़ सकता है। कुछ संगठनों ने विशेष रूप से उन प्रावधानों पर चिंता जताई है जिनके तहत FCRA पंजीकरण रद्द या समाप्त होने की स्थिति में विदेशी योगदान से खरीदी गई संपत्तियों को लेकर सरकार को अधिक अधिकार मिल सकते हैं। सरकार ने सुरक्षा और पारदर्शिता को बताया आधार सरकार की ओर से विपक्ष की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा गया कि विधेयक का उद्देश्य किसी विशेष समुदाय या संगठन को निशाना बनाना नहीं है। सरकार का तर्क है कि विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है तथा यदि विदेशी योगदान का इस्तेमाल नियमों के विपरीत होता है तो उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की व्यवस्था होनी चाहिए। JPC में अब होगी विस्तृत जांच विधेयक को JPC के पास भेजे जाने के बाद अब समिति इसके विभिन्न प्रावधानों की विस्तार से जांच करेगी। समिति संबंधित मंत्रालयों, विशेषज्ञों, संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव ले सकती है। इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट संसद के सामने रखेगी। रिपोर्ट में विधेयक को मौजूदा रूप में आगे बढ़ाने या उसमें बदलाव करने की सिफारिशें की जा सकती हैं। मानसून सत्र में कई विधेयक आगे बढ़े मानसून सत्र के दौरान संसद में कई विधायी कार्य हुए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सत्र में 10 महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुए, जबकि कुछ प्रस्तावित कानूनों को आगे की जांच के लिए संसदीय समितियों के पास भेजा गया। सत्र के दौरान FCRA के अलावा खनन, सहकारी क्षेत्र और अन्य प्रशासनिक विषयों से जुड़े विधेयकों पर भी महत्वपूर्ण कार्रवाई हुई। सत्र में हंगामा भी रहा प्रमुख मुद्दा मानसून सत्र के दौरान कई दिनों तक विपक्ष और सरकार के बीच अलग-अलग मुद्दों को लेकर टकराव देखने को मिला। विपक्ष ने कई विषयों पर चर्चा की मांग की, जबकि कई मौकों पर सदन की कार्यवाही बाधित भी हुई। इसके बावजूद सरकार ने अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी रखी और सत्र के अंतिम दिनों में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर कार्रवाई हुई। महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक भी चर्चा में रहे सत्र के दौरान संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, केंद्रशासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक भी लोकसभा में पेश किए गए। इन प्रस्तावों का संबंध लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन से जुड़ी व्यवस्था से था। हालांकि संविधान संशोधन विधेयक को आवश्यक बहुमत नहीं मिल सका और उससे जुड़े अन्य विधेयकों पर भी आगे कार्रवाई नहीं हुई। अब आगे क्या होगा? संसद का सत्र समाप्त होने के बाद अब सबसे ज्यादा नजर FCRA संशोधन विधेयक की JPC जांच पर रहेगी। समिति की रिपोर्ट आने के बाद सरकार विधेयक को दोबारा संसद में आगे बढ़ा सकती है। इस दौरान विपक्ष और संबंधित संगठनों की ओर से दिए जाने वाले सुझावों और आपत्तियों का भी महत्व रहेगा। निष्कर्ष 13 अगस्त 2026 को संसद का मानसून सत्र समाप्त हो गया, लेकिन सत्र के दौरान उठे कई मुद्दों पर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है। इनमें FCRA संशोधन विधेयक सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल है, जिसे अब संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया है। अब JPC की जांच और उसकी रिपोर्ट यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगी कि FCRA संशोधन विधेयक किस रूप में आगे बढ़ता है। वहीं संसद के अगले सत्र में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच फिर से तीखी बहस देखने को मिल सकती है। Source: संसद/संसदीय कार्य मंत्रालय से संबंधित जानकारी, PTI, Indian Express और अन्य ताजा रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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“CJP को मिली पूरी फंडिंग PM CARES Fund से!”—आशुतोष रांका का दावा, ऑडिट की मांग

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रांका का PM CARES Fund को लेकर दिया गया एक बयान चर्चा में है। एक लाइव डिबेट के दौरान CJP आंदोलन की फंडिंग को लेकर सवाल पूछे जाने पर रांका ने दावा किया कि CJP को मिलने वाली पूरी फंडिंग PM CARES Fund से मिली है। इसके साथ ही उन्होंने PM CARES Fund के ऑडिट की मांग भी उठाई। फंडिंग के सवाल पर आशुतोष रांका का जवाब मामला उस समय चर्चा में आया जब एक पत्रकार ने आशुतोष रांका से CJP के आंदोलन के लिए फंडिंग के स्रोत को लेकर सवाल किया। रिपोर्ट के अनुसार, रांका ने जवाब में दावा किया कि आंदोलन की पूरी फंडिंग PM CARES Fund से हुई है और इसी के साथ उन्होंने फंड की जांच और ऑडिट कराने की मांग रखी। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में आया है और इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। PM CARES Fund के ऑडिट की मांग आशुतोष रांका ने अपने बयान में केवल फंडिंग का दावा ही नहीं किया, बल्कि PM CARES Fund के ऑडिट की मांग भी उठाई। CJP की ओर से पहले भी PM CARES Fund को लेकर सार्वजनिक ऑडिट और पारदर्शिता की मांग की जाती रही है। संगठन की वेबसाइट पर आंदोलन की प्रमुख मांगों में PM CARES Fund का सार्वजनिक ऑडिट शामिल है। CJP आंदोलन पहले से चर्चा में CJP का आंदोलन पिछले कुछ समय से परीक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चा में रहा है। संगठन ने NEET और अन्य परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। संगठन की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी आंदोलन का प्रमुख हिस्सा रही है। PM CARES Fund को लेकर पहले से उठते रहे हैं सवाल PM CARES Fund की स्थापना कोविड-19 महामारी के दौरान मार्च 2020 में की गई थी। इसके संचालन, पारदर्शिता और सूचना उपलब्धता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। फंड को एक public charitable trust के रूप में स्थापित किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसकी ऑडिटिंग के लिए एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म नियुक्त की गई थी। इसलिए CJP की ओर से अब जिस तरह के सार्वजनिक ऑडिट की मांग की जा रही है, वह इसी पारदर्शिता की बहस से जुड़ी हुई है। क्या वास्तव में CJP की फंडिंग PM CARES से हुई? यहां एक महत्वपूर्ण बात ध्यान देने वाली है। आशुतोष रांका का PM CARES Fund से CJP की पूरी फंडिंग होने वाला बयान एक दावा है। उपलब्ध रिपोर्टिंग में इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि या ऐसा कोई आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि CJP आंदोलन को वास्तव में PM CARES Fund से फंडिंग मिली। इसलिए इस दावे को तथ्य के रूप में नहीं बल्कि रांका के बयान/दावे के रूप में देखना उचित होगा। सोशल मीडिया पर भी बयान की चर्चा रांका के बयान का वीडियो और उसके अंश सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं। कई यूजर्स इस बयान को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे PM CARES Fund की पारदर्शिता पर बहस से जोड़ रहे हैं। हालांकि सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं को किसी वित्तीय लेनदेन या फंडिंग के आधिकारिक प्रमाण के तौर पर नहीं देखा जा सकता। CJP की मुख्य मांगों में PM CARES ऑडिट भी शामिल CJP की आधिकारिक वेबसाइट पर आंदोलन से जुड़ी मांगों में PM CARES Fund के सार्वजनिक ऑडिट की मांग भी दर्ज है। संगठन ने इसके साथ बेरोजगारी, NEET जवाबदेही, प्रधानमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस और अन्य मुद्दों को भी अपनी मांगों में शामिल किया है। निष्कर्ष CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका के PM CARES Fund से आंदोलन की पूरी फंडिंग मिलने वाले दावे ने नई चर्चा शुरू कर दी है। रांका ने इसी के साथ PM CARES Fund के ऑडिट की मांग भी उठाई है। हालांकि, CJP को PM CARES Fund से फंडिंग मिलने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे रांका के बयान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अब इस मुद्दे पर सबसे अहम सवाल यही है कि क्या भविष्य में इस दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक वित्तीय दस्तावेज या प्रमाण सामने आता है। Source: Patrika / CJP official website / Latest reports जय राष्ट्र न्यूज़

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राष्ट्रीय | छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में हंगामा, अमित शाह के बयान की मांग पर लोकसभा फिर स्थगित

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को छात्रों के प्रदर्शन पर कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया। विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले पर सदन में बयान देने की मांग की। लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्ष ने उठाया छात्र प्रदर्शन का मुद्दा लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे शुरू हुई। जैसे ही अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल शुरू करने की कोशिश की, विपक्षी सांसदों ने छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया। विपक्ष की मांग थी कि गृह मंत्री अमित शाह स्वयं सदन में आकर इस पूरे मामले पर जवाब दें। लगातार नारेबाजी के कारण प्रश्नकाल सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सका। अमित शाह के बयान पर अड़ा विपक्ष विपक्षी सांसदों का मुख्य जोर गृह मंत्री अमित शाह के व्यक्तिगत बयान पर है। विपक्ष का आरोप है कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर सरकार को सदन में स्पष्ट जवाब देना चाहिए। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, विपक्ष 20 जुलाई को परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित तौर पर पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर चर्चा और शाह के बयान की मांग कर रहा है। सरकार ने कहा—गृह मंत्री जवाब देने को तैयार संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू की ओर से पहले ही कहा गया था कि सरकार इस मुद्दे पर सदन में चर्चा के लिए तैयार है और अमित शाह भी छात्रों से जुड़े पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सदन में विपक्षी सांसदों को यही जानकारी दी और उनसे प्रश्नकाल को चलने देने की अपील की। स्पीकर ओम बिरला ने की बार-बार अपील हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों से सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है और सांसदों को सदन में चर्चा तथा बहस के जरिए अपनी बात रखनी चाहिए। बिरला ने सदस्यों से पोस्टर और बैनर दिखाने के बजाय संसदीय प्रक्रिया के तहत चर्चा करने की अपील की। इसके बावजूद नारेबाजी जारी रही। कुछ ही मिनट में लोकसभा स्थगित विपक्ष के लगातार विरोध के चलते लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के लगभग चार मिनट बाद ही स्थगित कर दी गई। अब सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे दोबारा शुरू होने के लिए निर्धारित की गई है। राज्यसभा में भी इसी मुद्दे को लेकर हंगामा हुआ। वहां की कार्यवाही भी बाधित हुई और सदन को दोपहर 12 बजे तक स्थगित किया गया। दो सप्ताह से जारी है संसद में गतिरोध छात्र प्रदर्शन से जुड़े इस मुद्दे को लेकर संसद में पिछले करीब दो सप्ताह से राजनीतिक गतिरोध बना हुआ है। विपक्ष लगातार पुलिस कार्रवाई पर चर्चा और गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहा है। वहीं, सरकार का कहना है कि वह इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है और गृह मंत्री सदन में जवाब देने को तैयार हैं। इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। 20 जुलाई के प्रदर्शन पर है विवाद विवाद का मुख्य केंद्र 20 जुलाई का छात्र प्रदर्शन है। यह प्रदर्शन परीक्षा में कथित अनियमितताओं और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुआ था। विपक्ष का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। इसी कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री से संसद में जवाब मांगा जा रहा है। सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ता टकराव सोमवार को सरकार की ओर से छात्रों से जुड़े मुद्दे और पुलिस कार्रवाई पर चर्चा कराने की पेशकश की गई थी। हालांकि विपक्ष ने केवल सामान्य चर्चा के बजाय गृह मंत्री अमित शाह से सीधे जवाब की मांग पर जोर दिया। इसी मुद्दे पर मंगलवार को भी संसद की कार्यवाही प्रभावित हुई और दोनों पक्षों के बीच गतिरोध जारी रहा। मानसून सत्र पर भी असर लगातार हंगामे का असर संसद के मानसून सत्र के कामकाज पर भी पड़ रहा है। सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर पहले से मतभेद हैं और छात्र प्रदर्शन का मुद्दा अब इस राजनीतिक टकराव का प्रमुख केंद्र बन गया है। संसदीय कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने को लेकर लोकसभा अध्यक्ष लगातार दोनों पक्षों से सहयोग की अपील कर रहे हैं। निष्कर्ष छात्र प्रदर्शन पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में जारी गतिरोध मंगलवार को भी खत्म नहीं हो सका। विपक्ष अमित शाह से सदन में स्पष्ट बयान की मांग पर अड़ा रहा, जबकि सरकार का कहना है कि गृह मंत्री इस मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार हैं। लगातार नारेबाजी के कारण लोकसभा को कुछ ही मिनटों में दोपहर 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा। अब नजर इस बात पर है कि दोपहर बाद सदन की कार्यवाही सुचारु हो पाती है या छात्र प्रदर्शन का मुद्दा एक बार फिर संसद में हंगामे का कारण बनता है। Source: News On AIR / Hindustan Times / Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन से पहले कांटेदार तारों की बैरिकेडिंग पर सवाल

10 जुलाई 2026 को झारखंड में छात्रों का शांतिपूर्ण आंदोलन प्रस्तावित है। अपने अधिकारों और भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर छात्र सड़क पर उतरने की तैयारी में हैं। वहीं, प्रदर्शन स्थल पर कांटेदार तारों से की गई बैरिकेडिंग की तस्वीर सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं—क्या शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन के लिए ऐसी बैरिकेडिंग जरूरी है? सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन लोकतंत्र में छात्रों के सवालों का जवाब कांटों से नहीं, संवाद से होना चाहिए। छात्र सवाल लेकर आए हैं… सामने कांटेदार तार क्यों? #Jharkhand#StudentProtest#JPSC#JSSC#StudentVoice Democracy JayRashtraNews

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एथेनॉल विवाद पर भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा का बयान—“शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा?”

मध्य प्रदेश के रीवा से भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। रीवा एयरपोर्ट पर एक कार्यक्रम के दौरान एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का विरोध करने वालों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा—“आंदोलन हो रहा है एथेनॉल नहीं चलेगा, शुद्ध पेट्रोल चलेगा। शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा?” सांसद मिश्रा रीवा से भोपाल और कोलकाता के लिए शुरू हुई नई उड़ानों के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने देश की आर्थिक स्थिति और एथेनॉल नीति पर भी अपनी बात रखी। #JanardanMishra#RewaNews#MadhyaPradesh#Ethanol#BJPNews BreakingNews JayRashtraNews

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झारखंड में छात्र आंदोलन उग्र, विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस ने की पानी की बौछार और लाठीचार्ज; भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता को लेकर प्रदर्शन

रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्र आंदोलन सोमवार को और तेज हो गया। बड़ी संख्या में छात्र रांची में विधानसभा की ओर मार्च करने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने कई बैरिकेड तोड़ते हुए विधानसभा की तरफ आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पानी की बौछार और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। छात्रों का यह आंदोलन कई दिनों से जारी है। प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच, भर्ती प्रक्रिया में सुधार और अपनी अन्य मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। आंदोलनकारियों की ओर से मामले में सीबीआई जांच की मांग भी उठाई जा रही है। हजारों छात्र विधानसभा की ओर बढ़े सोमवार को रांची में बड़ी संख्या में छात्र अलग-अलग माध्यमों से पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार कई छात्र ट्रेन और बसों के जरिए राजधानी पहुंचे और विधानसभा मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तिरंगे और मांगों से जुड़े पोस्टर-बैनर दिखाई दिए। छात्रों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विधानसभा की ओर बढ़ने की कोशिश की। कई स्तर पर लगाए गए थे बैरिकेड छात्रों के विधानसभा मार्च को देखते हुए प्रशासन ने विधानसभा के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। रास्ते में कई स्तरों पर बैरिकेड लगाए गए थे और कुछ स्थानों पर कांटेदार तारों की भी व्यवस्था की गई थी। प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ते हुए कई बैरिकेड पार कर लिए। इसके बाद पुलिस और छात्रों के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस ने पानी की बौछार से छात्रों को रोका जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। इसके बावजूद कई छात्र पीछे हटने के बजाय आगे बढ़ते रहे। स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने की कोशिश की। घटनास्थल से सामने आए वीडियो में पुलिस द्वारा पानी की बौछार और बल प्रयोग किए जाने के दृश्य दिखाई दिए हैं। भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता का आरोप छात्रों का मुख्य आरोप झारखंड में आयोजित विभिन्न भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो और जिन मामलों में गड़बड़ी के आरोप हैं, उनकी जिम्मेदारी तय की जाए। छात्रों की ओर से परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और कथित अनियमितताओं की जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग भी प्रमुखता से उठाई जा रही है। आंदोलन कई दिनों से जारी यह प्रदर्शन अचानक शुरू नहीं हुआ है। छात्र संगठन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक सोमवार को आंदोलन का 17वां दिन था। छात्रों ने सरकार पर अपनी मांगों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाते हुए विधानसभा घेराव का आह्वान किया था। विधानसभा के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई प्रदर्शन को देखते हुए विधानसभा परिसर के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को निर्धारित क्षेत्र से आगे बढ़ने से रोकने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा घेरा बनाया। प्रदर्शनकारियों के बैरिकेड पार करने के बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछार और लाठीचार्ज का सहारा लिया। छात्रों और सरकार के बीच बढ़ा टकराव छात्रों की मांगों और सरकार की कार्रवाई को लेकर अब टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। आंदोलनकारी लगातार परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, विधानसभा की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन प्रदर्शनकारियों को परिसर के नजदीक पहुंचने से रोक रहा है। प्रदर्शन का राजनीतिक असर भी संभव झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर युवाओं के बीच नाराजगी का यह आंदोलन अब राजनीतिक चर्चा का विषय भी बनता जा रहा है। छात्रों की संख्या बढ़ने और राजधानी रांची में आंदोलन तेज होने के कारण सरकार पर इस मामले में जल्द समाधान निकालने का दबाव बढ़ सकता है। आगे क्या होगा? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है। यदि परीक्षा संबंधी शिकायतों की स्वतंत्र जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है, तो आंदोलन आगे भी जारी रहने की संभावना है। वहीं, छात्रों की ओर से विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए जा सकते हैं। निष्कर्ष झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्र आंदोलन सोमवार को उस समय और उग्र हो गया, जब हजारों प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर बढ़े। कई बैरिकेड पार करने के बाद पुलिस ने छात्रों को रोकने के लिए पानी की बौछार की और बाद में लाठीचार्ज किया। छात्र परीक्षा व्यवस्था में सुधार, कथित अनियमितताओं की जांच और सीबीआई जांच समेत अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। अब सरकार की अगली कार्रवाई और छात्रों की प्रतिक्रिया पर पूरे राज्य की नजर रहेगी। Source: NDTV, The Tribune, The Federal, भाषा/द प्रिंट जय राष्ट्र न्यूज़

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