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क्या आप जानते हैं? भारत का सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग NH-44 है, जिसकी लंबाई लगभग 3,745 किलोमीटर है।

नई दिल्ली, 26 जून। भारत का सड़क नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े सड़क नेटवर्कों में से एक माना जाता है। इसी नेटवर्क का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highways) हैं, जो देश के विभिन्न राज्यों को आपस में जोड़ते हैं। इन्हीं में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) भारत का सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग है। श्रीनगर से कन्याकुमारी तक का सफर NH-44 जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से शुरू होकर तमिलनाडु के कन्याकुमारी तक जाता है। इसकी कुल लंबाई लगभग 3,745 किलोमीटर है। यह राजमार्ग उत्तर भारत से दक्षिण भारत तक सीधा सड़क संपर्क उपलब्ध कराता है। कई राज्यों से होकर गुजरता है यह राष्ट्रीय राजमार्ग जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान (कुछ हिस्सों से जुड़ाव), मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु सहित कई राज्यों से होकर गुजरता है। इसके माध्यम से देश के प्रमुख शहर और औद्योगिक क्षेत्र एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। पुराने कई राष्ट्रीय राजमार्गों का हिस्सा वर्ष 2010 में राष्ट्रीय राजमार्गों की नई नंबरिंग प्रणाली लागू होने के बाद NH-44 का गठन किया गया। इसमें पुराने NH-1A, NH-1, NH-2, NH-3, NH-7 और NH-75 के कुछ हिस्सों को मिलाकर एक लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग बनाया गया। व्यापार और परिवहन की जीवनरेखा NH-44 देश के व्यापार, उद्योग और माल परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों मालवाहक वाहन और लाखों यात्री सफर करते हैं। कृषि उत्पादों से लेकर औद्योगिक सामान तक की आपूर्ति में इस राजमार्ग की अहम भूमिका है। पर्यटन को भी मिलता है बढ़ावा यह राजमार्ग देश के अनेक प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों को जोड़ता है। इसके कारण घरेलू और विदेशी पर्यटकों के लिए यात्रा आसान होती है तथा विभिन्न राज्यों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक संपर्क भी मजबूत होता है। क्या आप जानते हैं? NH-44 केवल एक सड़क नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह देश के उत्तर और दक्षिण को जोड़ते हुए विकास और संपर्क का मजबूत माध्यम बना हुआ है। स्रोत:सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) मूल रिपोर्ट:सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, NHAI तथा सार्वजनिक जानकारी के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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क्या आप जानते हैं? भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान ‘जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान’ 1936 में स्थापित किया गया था

भारत प्राकृतिक संपदा और जैव विविधता से समृद्ध देशों में गिना जाता है। देश में सैकड़ों वन्यजीव अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यान मौजूद हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान कौन सा था? इसका उत्तर है – जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान। जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना वर्ष 1936 में की गई थी। उस समय इसका नाम “हैली नेशनल पार्क” रखा गया था। बाद में इसका नाम प्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमी, लेखक और वन्यजीव संरक्षक जिम कॉर्बेट के सम्मान में बदलकर जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान कर दिया गया। यह राष्ट्रीय उद्यान उत्तराखंड के नैनीताल और पौड़ी गढ़वाल जिलों में स्थित है। यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, नदियों और विविध वन्यजीवों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक हर वर्ष घूमने आते हैं। जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान विशेष रूप से बंगाल टाइगर के संरक्षण के लिए जाना जाता है। वर्ष 1973 में भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए “प्रोजेक्ट टाइगर” की शुरुआत भी इसी राष्ट्रीय उद्यान से हुई थी। इस परियोजना का उद्देश्य देश में बाघों की घटती संख्या को बचाना और उनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण करना था। राष्ट्रीय उद्यान में बाघों के अलावा हाथी, तेंदुआ, हिरण, सांभर, जंगली सूअर, मगरमच्छ और पक्षियों की सैकड़ों प्रजातियां पाई जाती हैं। जैव विविधता की दृष्टि से यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्रों में से एक माना जाता है। आज जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान न केवल वन्यजीव संरक्षण का प्रतीक है, बल्कि पर्यावरण जागरूकता और इको-टूरिज्म का भी एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। यह स्थान प्रकृति प्रेमियों, वन्यजीव फोटोग्राफरों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र है। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से भी यह जानकारी महत्वपूर्ण मानी जाती है कि भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान है और इसकी स्थापना वर्ष 1936 में हुई थी। स्रोत:वन एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित सार्वजनिक जानकारी मूल रिपोर्ट:सामान्य ज्ञान एवं ऐतिहासिक अभिलेखों के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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