‘सियांग बचाओ, बांध हटाओ’ के नारों के साथ दिल्ली पहुंचे अरुणाचल के प्रदर्शनकारी, 11,200 मेगावाट परियोजना का विरोध
नई दिल्ली/ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश की सियांग घाटी में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट के खिलाफ विरोध अब दिल्ली तक पहुंच गया है। 31 अक्टूबर को सैकड़ों छात्रों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नई दिल्ली स्थित अरुणाचल भवन के बाहर प्रदर्शन किया और ‘सियांग बचाओ, बांध हटाओ’ जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने परियोजना वापस लेने, गिरफ्तार आंदोलनकारियों को रिहा करने और सियांग घाटी से अतिरिक्त सुरक्षा बल हटाने की मांग की। दिल्ली में अरुणाचल भवन के बाहर प्रदर्शन दिल्ली में हुआ प्रदर्शन ‘हिमखंड’ और ‘यूथ फॉर चेंज’ जैसे संगठनों के बैनर तले आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों में अरुणाचल के छात्र, युवा और आदिवासी अधिकारों से जुड़े कार्यकर्ता शामिल थे। उनका कहना था कि सियांग नदी केवल जल संसाधन नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों की संस्कृति, आजीविका और पहचान का हिस्सा है। 11,200 मेगावाट की है प्रस्तावित परियोजना सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट एक प्रस्तावित 11,200 मेगावाट जलविद्युत परियोजना है। इसे सियांग नदी पर विकसित करने की योजना है। सरकार के अनुसार परियोजना का उद्देश्य बिजली उत्पादन के साथ बाढ़ नियंत्रण और जल भंडारण क्षमता बढ़ाना है। इसे चीन द्वारा तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर प्रस्तावित बड़े बांध के संदर्भ में रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों को किस बात का डर? सियांग घाटी के आदिवासी समुदायों का कहना है कि इतने बड़े बांध और जलाशय से उनकी पुश्तैनी जमीन, गांव और खेती प्रभावित हो सकती है। प्रदर्शनकारियों को आशंका है कि परियोजना से लोगों का विस्थापन होगा, आजीविका प्रभावित होगी और सियांग नदी के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंच सकता है। भूकंपीय क्षेत्र को लेकर भी चिंता विरोध करने वाले संगठनों ने यह सवाल भी उठाया है कि पूर्वोत्तर भारत भूकंपीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र में आता है। उनका कहना है कि इतने बड़े बांध की सुरक्षा और संभावित आपदा जोखिम का स्वतंत्र और विस्तृत आकलन होना चाहिए। हालांकि परियोजना अभी निर्माण चरण में नहीं है और सरकार इसे पूर्व व्यवहार्यता रिपोर्ट से जुड़ी प्रक्रिया में बता रही है। प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी से बढ़ा तनाव सियांग क्षेत्र में परियोजना से जुड़े सर्वेक्षणों और प्रारंभिक जांच का विरोध कई सप्ताह से चल रहा है। अक्टूबर में कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया और कुछ के खिलाफ अरुणाचल प्रदेश के विशेष कानून के तहत मामले दर्ज किए गए। 29 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन में भी आंदोलनकारियों ने गिरफ्तार लोगों की बिना शर्त रिहाई की मांग की थी। दिल्ली पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया 31 अक्टूबर को अरुणाचल भवन के बाहर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई के दौरान दुर्व्यवहार का आरोप भी लगाया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं है। बाद में हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा किए जाने की खबर सामने आई। मुख्यमंत्री पेमा खांडू का क्या कहना है? अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा है कि स्थानीय लोगों की सहमति के बिना कोई बांध नहीं बनाया जाएगा। राज्य सरकार का कहना है कि परियोजना अभी पूर्व व्यवहार्यता रिपोर्ट के चरण में है और विस्तृत अध्ययन के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी। चीन के बांध से जुड़ा है रणनीतिक पहलू सियांग नदी तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो के नाम से बहती है। चीन इस नदी पर एक विशाल जलविद्युत परियोजना की योजना बना रहा है। भारत में नीति निर्माताओं का एक वर्ग मानता है कि सियांग पर जल भंडारण क्षमता विकसित करने से ऊपरी हिस्से में चीन द्वारा पानी के प्रवाह में किसी संभावित बदलाव से निपटने में मदद मिल सकती है। लेकिन स्थानीय समुदायों का कहना है कि रणनीतिक चिंताओं के नाम पर उनकी जमीन और अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। आज कांग्रेस ने परियोजना रद्द करने की मांग की 2 नवंबर 2026 को अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी परियोजना के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया। कांग्रेस ने 11,200 मेगावाट की परियोजना को रद्द करने, गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने और उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की है। पार्टी ने कहा कि कोई भी विकास परियोजना स्थानीय समुदायों की पुश्तैनी जमीन, पहचान, संस्कृति और आजीविका की कीमत पर लागू नहीं होनी चाहिए। ‘Stop SUMP, Save Siang’ का नारा अरुणाचल कांग्रेस ने विभिन्न छात्र संगठनों, युवा समूहों, सामाजिक संस्थाओं और पारंपरिक आदिवासी संस्थाओं से एकजुट होने की अपील की है। पार्टी ने आंदोलन के संदेश को ‘Stop SUMP, Save Siang’ के रूप में सामने रखा है। विकास बनाम स्थानीय अधिकार की बड़ी बहस सियांग परियोजना का विवाद अब केवल बिजली उत्पादन का मुद्दा नहीं रह गया है। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, चीन से जुड़ी रणनीतिक चिंताएं, स्थानीय आदिवासी अधिकार, पर्यावरण और विस्थापन जैसे कई सवाल जुड़े हैं। आने वाले दिनों में परियोजना के सर्वेक्षण और गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर आंदोलन और तेज होने की संभावना है। स्रोत – पीटीआई, इंडियन एक्सप्रेस, एनडीटीवी, द वीक, स्थानीय अरुणाचल मीडिया जय राष्ट्र न्यूज़

