भारत-ऑस्ट्रेलिया ने सांस्कृतिक और शैक्षणिक सहयोग को नई गति देने पर दिया जोर

मेलबर्न, 9 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा और व्यापार के साथ-साथ सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक सहयोग को भी विशेष महत्व दिया गया। दोनों देशों ने छात्र विनिमय कार्यक्रमों, विश्वविद्यालयों के बीच साझेदारी, संयुक्त अनुसंधान और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और व्यापक बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। शिक्षा क्षेत्र में सहयोग होगा मजबूत बैठक में दोनों नेताओं ने उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने, संयुक्त शोध परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने और नई तकनीकों के क्षेत्र में अकादमिक साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों देशों का उद्देश्य छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराना है। छात्र विनिमय कार्यक्रमों को मिलेगा बढ़ावा भारत और ऑस्ट्रेलिया ने छात्र एवं शिक्षक विनिमय कार्यक्रमों का विस्तार करने पर भी जोर दिया। दोनों देशों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को वैश्विक अनुभव प्रदान करने के साथ-साथ नवाचार और कौशल विकास को भी बढ़ावा देंगे। सांस्कृतिक संबंध होंगे और मजबूत बैठक के दौरान भारतीय कला, योग, आयुर्वेद, संगीत और सांस्कृतिक विरासत के प्रचार-प्रसार के लिए संयुक्त कार्यक्रम आयोजित करने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने संग्रहालयों, सांस्कृतिक संस्थानों और कलाकारों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। भारतीय समुदाय की भूमिका की सराहना प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री अल्बनीज़ ने ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय की भूमिका की प्रशंसा की। दोनों नेताओं ने कहा कि भारतीय मूल के लोग दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। अनुसंधान और नवाचार पर फोकस दोनों देशों ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वच्छ ऊर्जा और स्वास्थ्य अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। इससे शिक्षा और उद्योग के बीच सहयोग को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है। इंडो-पैसिफिक साझेदारी का मानवीय आयाम विशेषज्ञों का मानना है कि सांस्कृतिक और शैक्षणिक सहयोग केवल द्विपक्षीय संबंधों को ही नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में लोगों के बीच संपर्क (People-to-People Connectivity) को भी मजबूत करेगा। यह दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। भविष्य की दिशा भारत और ऑस्ट्रेलिया ने आने वाले वर्षों में शिक्षा, संस्कृति, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। दोनों देशों का मानना है कि मजबूत सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंध भविष्य की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती प्रदान करेंगे। स्रोत:भारत सरकार, ऑस्ट्रेलिया सरकार एवं दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के आधिकारिक वक्तव्य। मूल रिपोर्ट:9 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी एवं विश्वसनीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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PM मोदी और ऑस्ट्रेलियाई PM एंथनी अल्बनीज़ की बैठक, रक्षा, व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर कई अहम समझौते

मेलबर्न, 9 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने मेलबर्न में आयोजित भारत–ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन में व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक में रक्षा सहयोग, व्यापार एवं निवेश, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), स्वच्छ ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को नई गति देने पर सहमति बनी। रक्षा सहयोग को मिलेगा नया विस्तार दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा उद्योग सहयोग और रक्षा तकनीक के आदान-प्रदान को और मजबूत करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही Maritime Security Collaboration Roadmap पर भी सहमति बनी, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों का रणनीतिक समन्वय और मजबूत होगा। व्यापार और निवेश पर बड़ा फोकस बैठक के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया ने द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने तथा व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। ऑस्ट्रेलिया ने भारत में 500 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के नए निवेश की घोषणा की, जिसका उपयोग बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में किया जाएगा। साथ ही दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटल अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) सहयोग को भी प्राथमिकता देने पर सहमति जताई। यूरेनियम और स्वच्छ ऊर्जा में नई साझेदारी शिखर वार्ता की प्रमुख उपलब्धियों में शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के लिए ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम आपूर्ति समझौता शामिल रहा। इसके अलावा हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा और कम-कार्बन तकनीकों में संयुक्त निवेश एवं अनुसंधान बढ़ाने पर भी सहमति बनी। AI और उन्नत तकनीकों पर सहयोग दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक और उभरती डिजिटल तकनीकों में संयुक्त अनुसंधान तथा औद्योगिक सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की तेज़ी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों के लिए दीर्घकालिक निवेश के बड़े अवसर प्रदान करती है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण दोनों नेताओं ने स्वतंत्र, सुरक्षित और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के समर्थन को दोहराया। उन्होंने समुद्री मार्गों की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। व्यापारिक समुदाय से भी संवाद शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने Australia–India CEOs Forum को भी संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने विनिर्माण, अवसंरचना, स्वच्छ ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, AI, फिनटेक, खाद्य प्रसंस्करण और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में निवेश के व्यापक अवसरों को रेखांकित किया। रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा विशेषज्ञों का मानना है कि इस वार्षिक शिखर सम्मेलन से भारत और ऑस्ट्रेलिया की Comprehensive Strategic Partnership को नई मजबूती मिलेगी। रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, तकनीक और निवेश जैसे क्षेत्रों में हुए समझौते आने वाले वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक और सामरिक संबंधों को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. स्रोत:भारत सरकार, ऑस्ट्रेलिया सरकार एवं दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के आधिकारिक कार्यालय। मूल रिपोर्ट:9 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी, प्रेस विज्ञप्तियों तथा विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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