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भारत-ऑस्ट्रेलिया ने लॉन्च किया नया Sports Collaboration Roadmap, 2036 ओलंपिक मेजबानी के लिए भारत को मिला समर्थन

नई दिल्ली/कैनबरा, 11 जुलाई। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने खेल क्षेत्र में अपने सहयोग को नई दिशा देते हुए Sports Collaboration Roadmap लॉन्च किया है। दोनों देशों के नेताओं की उच्चस्तरीय बैठक के दौरान इस पहल की घोषणा की गई, जिसका उद्देश्य खिलाड़ियों के विकास, खेल विज्ञान, कोचिंग, खेल अवसंरचना और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी में सहयोग बढ़ाना है। इसी दौरान ऑस्ट्रेलिया ने भारत की 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की महत्वाकांक्षा का समर्थन भी व्यक्त किया। खेल साझेदारी को मिलेगा नया आयाम नए रोडमैप के तहत दोनों देश खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, कोचों के आदान-प्रदान, खेल विज्ञान, स्पोर्ट्स मेडिसिन, खेल प्रबंधन और युवा प्रतिभाओं के विकास में मिलकर काम करेंगे। अधिकारियों का मानना है कि इससे दोनों देशों के खिलाड़ियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सहायता मिलेगी। 2036 ओलंपिक बोली को मिला समर्थन बैठक के दौरान ऑस्ट्रेलिया ने भारत की 2036 ओलंपिक मेजबानी की आकांक्षा का समर्थन करते हुए कहा कि वह आयोजन क्षमता विकसित करने, तकनीकी सहयोग और अनुभव साझा करने के लिए तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समर्थन भारत की ओलंपिक मेजबानी की संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती प्रदान कर सकता है। खिलाड़ियों और कोचों को होगा लाभ रोडमैप के अंतर्गत दोनों देशों के खिलाड़ियों और कोचों के लिए संयुक्त प्रशिक्षण शिविर, खेल अकादमियों के बीच सहयोग, अनुसंधान परियोजनाएं और खेल तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे युवा खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय अनुभव का लाभ मिलेगा। खेल विज्ञान और तकनीक पर फोकस भारत और ऑस्ट्रेलिया ने खेल प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए डेटा विश्लेषण, स्पोर्ट्स साइंस, पोषण, फिटनेस और चोट प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। आधुनिक तकनीक का उपयोग खिलाड़ियों की तैयारी और प्रदर्शन सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। खेल अवसंरचना में सहयोग दोनों देशों ने स्टेडियम विकास, हाई-परफॉर्मेंस सेंटर, खेल प्रबंधन और बड़े खेल आयोजनों के संचालन में अनुभव साझा करने की योजना बनाई है। इससे भारत की खेल अवसंरचना को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। खेल कूटनीति को मिलेगा बढ़ावा विश्लेषकों का कहना है कि यह पहल केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करेगी। खेल सहयोग के माध्यम से दोनों देशों के युवाओं और संस्थानों के बीच संपर्क और विश्वास बढ़ेगा। भविष्य की दिशा विशेषज्ञों के अनुसार Sports Collaboration Roadmap आने वाले वर्षों में दोनों देशों के खेल संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा। यदि प्रस्तावित कार्यक्रम समयबद्ध तरीके से लागू किए जाते हैं, तो भारत के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन और 2036 ओलंपिक की तैयारियों में बड़ा लाभ मिल सकता है। स्रोत:भारत सरकार, ऑस्ट्रेलिया सरकार तथा दोनों देशों द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी। मूल रिपोर्ट:11 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक वक्तव्यों एवं विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई गति, निवेश और शिक्षा साझेदारी पर विशेष जोर

कैनबरा, 10 जुलाई। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच जारी उच्चस्तरीय वार्ताओं में दोनों देशों ने आर्थिक, रणनीतिक और शैक्षणिक सहयोग को नई गति देने पर विशेष जोर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के नेतृत्व में हुई बैठकों में व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को भविष्य की साझेदारी का प्रमुख आधार बताया गया। व्यापार और निवेश पर बढ़ेगा सहयोग दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निवेश के अवसरों का विस्तार करने पर सहमति व्यक्त की। बुनियादी ढांचे, हरित ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), डिजिटल अर्थव्यवस्था, विनिर्माण और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया। शिक्षा और कौशल विकास बने प्रमुख विषय बैठकों में उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच साझेदारी, छात्र एवं शोधार्थी विनिमय कार्यक्रमों और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। दोनों देशों का मानना है कि शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग भविष्य की आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण भारत और ऑस्ट्रेलिया ने स्वतंत्र, सुरक्षित और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। समुद्री सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, साइबर सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। रक्षा सहयोग को मिलेगा विस्तार दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा उद्योग सहयोग, समुद्री निगरानी और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत बनाने की इच्छा व्यक्त की। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन को भी मजबूती देगा। स्वच्छ ऊर्जा और तकनीकी सहयोग वार्ता के दौरान हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, डिजिटल अवसंरचना और उभरती प्रौद्योगिकियों में संयुक्त निवेश और अनुसंधान पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। भारतीय समुदाय की अहम भूमिका ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के योगदान की दोनों नेताओं ने सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के लोग शिक्षा, विज्ञान, उद्योग और व्यापार सहित अनेक क्षेत्रों में दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भविष्य की दिशा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ता सहयोग केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह रक्षा, शिक्षा, तकनीक और क्षेत्रीय स्थिरता के क्षेत्रों में भी दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देगा। दोनों देशों ने नियमित उच्चस्तरीय संवाद जारी रखने और सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने पर सहमति व्यक्त की। स्रोत:भारत सरकार, ऑस्ट्रेलिया सरकार तथा दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के आधिकारिक वक्तव्य। मूल रिपोर्ट:10 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी एवं विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा में रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती, कई अहम द्विपक्षीय बैठकों पर रहा फोकस

मेलबर्न, 10 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी आधिकारिक ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान लगातार उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकों और विभिन्न कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। यात्रा का प्रमुख उद्देश्य भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) को और मजबूत करना, व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा देना तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देना है। प्रधानमंत्री अल्बनीज़ के साथ व्यापक वार्ता प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी प्रयास, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। दोनों पक्षों ने नियमित उच्चस्तरीय संवाद जारी रखने और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। व्यापार और निवेश पर विशेष जोर वार्ता के दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने तथा निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कई पहल पर चर्चा की। ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों ने भारत के बुनियादी ढांचा, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्रों में बढ़ती संभावनाओं में रुचि दिखाई। दोनों सरकारों ने व्यापारिक समुदाय के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग भारत और ऑस्ट्रेलिया ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त, सुरक्षित और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था के समर्थन को दोहराया। दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा उद्योग सहयोग, समुद्री निगरानी और सूचना साझाकरण को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। शिक्षा और सांस्कृतिक संबंध बैठक में उच्च शिक्षा, विश्वविद्यालयों के बीच साझेदारी, छात्र विनिमय कार्यक्रम तथा संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने लोगों के बीच संपर्क (People-to-People Connectivity) को भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बताया। उद्योग जगत से संवाद प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ भी बैठक की। उन्होंने भारत में तेज़ी से विकसित हो रहे विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), फिनटेक और डिजिटल अवसंरचना क्षेत्रों में निवेश के अवसरों को रेखांकित किया। इंडो-पैसिफिक सहयोग पर साझा दृष्टिकोण दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाए रखने के महत्व पर सहमति व्यक्त की। समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग को भविष्य की रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। विशेषज्ञों की राय विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। रक्षा, व्यापार, शिक्षा, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग में हुई प्रगति दोनों देशों के दीर्घकालिक रणनीतिक हितों को और मजबूत करेगी। स्रोत:भारत सरकार, ऑस्ट्रेलिया सरकार तथा दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के आधिकारिक वक्तव्य। मूल रिपोर्ट:10 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी एवं विश्वसनीय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-ऑस्ट्रेलिया ने सांस्कृतिक और शैक्षणिक सहयोग को नई गति देने पर दिया जोर

मेलबर्न, 9 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा और व्यापार के साथ-साथ सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक सहयोग को भी विशेष महत्व दिया गया। दोनों देशों ने छात्र विनिमय कार्यक्रमों, विश्वविद्यालयों के बीच साझेदारी, संयुक्त अनुसंधान और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और व्यापक बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। शिक्षा क्षेत्र में सहयोग होगा मजबूत बैठक में दोनों नेताओं ने उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने, संयुक्त शोध परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने और नई तकनीकों के क्षेत्र में अकादमिक साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों देशों का उद्देश्य छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराना है। छात्र विनिमय कार्यक्रमों को मिलेगा बढ़ावा भारत और ऑस्ट्रेलिया ने छात्र एवं शिक्षक विनिमय कार्यक्रमों का विस्तार करने पर भी जोर दिया। दोनों देशों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को वैश्विक अनुभव प्रदान करने के साथ-साथ नवाचार और कौशल विकास को भी बढ़ावा देंगे। सांस्कृतिक संबंध होंगे और मजबूत बैठक के दौरान भारतीय कला, योग, आयुर्वेद, संगीत और सांस्कृतिक विरासत के प्रचार-प्रसार के लिए संयुक्त कार्यक्रम आयोजित करने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने संग्रहालयों, सांस्कृतिक संस्थानों और कलाकारों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। भारतीय समुदाय की भूमिका की सराहना प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री अल्बनीज़ ने ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय की भूमिका की प्रशंसा की। दोनों नेताओं ने कहा कि भारतीय मूल के लोग दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। अनुसंधान और नवाचार पर फोकस दोनों देशों ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वच्छ ऊर्जा और स्वास्थ्य अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। इससे शिक्षा और उद्योग के बीच सहयोग को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है। इंडो-पैसिफिक साझेदारी का मानवीय आयाम विशेषज्ञों का मानना है कि सांस्कृतिक और शैक्षणिक सहयोग केवल द्विपक्षीय संबंधों को ही नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में लोगों के बीच संपर्क (People-to-People Connectivity) को भी मजबूत करेगा। यह दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। भविष्य की दिशा भारत और ऑस्ट्रेलिया ने आने वाले वर्षों में शिक्षा, संस्कृति, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। दोनों देशों का मानना है कि मजबूत सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंध भविष्य की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती प्रदान करेंगे। स्रोत:भारत सरकार, ऑस्ट्रेलिया सरकार एवं दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के आधिकारिक वक्तव्य। मूल रिपोर्ट:9 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी एवं विश्वसनीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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PM मोदी और ऑस्ट्रेलियाई PM एंथनी अल्बनीज़ की बैठक, रक्षा, व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर कई अहम समझौते

मेलबर्न, 9 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने मेलबर्न में आयोजित भारत–ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन में व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक में रक्षा सहयोग, व्यापार एवं निवेश, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), स्वच्छ ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को नई गति देने पर सहमति बनी। रक्षा सहयोग को मिलेगा नया विस्तार दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा उद्योग सहयोग और रक्षा तकनीक के आदान-प्रदान को और मजबूत करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही Maritime Security Collaboration Roadmap पर भी सहमति बनी, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों का रणनीतिक समन्वय और मजबूत होगा। व्यापार और निवेश पर बड़ा फोकस बैठक के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया ने द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने तथा व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। ऑस्ट्रेलिया ने भारत में 500 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के नए निवेश की घोषणा की, जिसका उपयोग बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में किया जाएगा। साथ ही दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटल अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) सहयोग को भी प्राथमिकता देने पर सहमति जताई। यूरेनियम और स्वच्छ ऊर्जा में नई साझेदारी शिखर वार्ता की प्रमुख उपलब्धियों में शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के लिए ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम आपूर्ति समझौता शामिल रहा। इसके अलावा हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा और कम-कार्बन तकनीकों में संयुक्त निवेश एवं अनुसंधान बढ़ाने पर भी सहमति बनी। AI और उन्नत तकनीकों पर सहयोग दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक और उभरती डिजिटल तकनीकों में संयुक्त अनुसंधान तथा औद्योगिक सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की तेज़ी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों के लिए दीर्घकालिक निवेश के बड़े अवसर प्रदान करती है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण दोनों नेताओं ने स्वतंत्र, सुरक्षित और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के समर्थन को दोहराया। उन्होंने समुद्री मार्गों की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। व्यापारिक समुदाय से भी संवाद शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने Australia–India CEOs Forum को भी संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने विनिर्माण, अवसंरचना, स्वच्छ ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, AI, फिनटेक, खाद्य प्रसंस्करण और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में निवेश के व्यापक अवसरों को रेखांकित किया। रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा विशेषज्ञों का मानना है कि इस वार्षिक शिखर सम्मेलन से भारत और ऑस्ट्रेलिया की Comprehensive Strategic Partnership को नई मजबूती मिलेगी। रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, तकनीक और निवेश जैसे क्षेत्रों में हुए समझौते आने वाले वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक और सामरिक संबंधों को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. स्रोत:भारत सरकार, ऑस्ट्रेलिया सरकार एवं दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के आधिकारिक कार्यालय। मूल रिपोर्ट:9 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी, प्रेस विज्ञप्तियों तथा विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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