प्रमुख खबरें

श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO की नियुक्ति अंतिम दौर में; 3 सदस्यीय कमेटी ने तीन नामों की रिपोर्ट सौंपी

अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक Chief Executive Officer (CEO) की नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। CEO के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय Search Committee ने 5,585 आवेदनों की जांच और 16 उम्मीदवारों के interview के बाद तीन नामों का अंतिम panel तैयार कर मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को ट्रस्ट को सौंप दिया। अब CEO के नाम पर अंतिम फैसला ट्रस्ट करेगा। तीनों shortlisted candidates के नाम फिलहाल सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। Reports के मुताबिक retired bureaucrats भी अंतिम दावेदारों में शामिल हैं। 5,585 Applications से चुने गए तीन नाम CEO पद के लिए देशभर से 5,585 applications प्राप्त हुए थे। शुरुआती screening के बाद उम्मीदवारों की संख्या घटाकर 16 की गई। इन candidates के साथ 3 से 6 अगस्त के बीच online interactions हुए और फिर 11 तथा 12 अगस्त को Ayodhya में face-to-face interviews लिए गए। Selection Committee ने leadership ability, administrative experience, integrity और management skills सहित कई parameters के आधार पर candidates का मूल्यांकन किया। कौन-कौन था Search Committee में? CEO चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय committee में: Retired Justice Permod Kohli, Lt Gen (Retd) V K Chaturvedi और Dr Suresh Haware शामिल थे। Committee के secretary के रूप में Sameer Panda को जिम्मेदारी दी गई थी। Committee का कहना है कि selection process में manual assessment के साथ technology और AI-enabled screening का भी इस्तेमाल किया गया। CEO बनने के लिए रखी गई थीं कड़ी शर्तें CEO पद के लिए applicants की उम्र 50 से 70 वर्ष के बीच और कम से कम 20 साल का administrative experience होना जरूरी रखा गया था। इसके साथ candidate का practising Hindu होना, भगवान राम में आस्था रखना, Hindi और English में दक्ष होना तथा नियुक्ति के बाद Ayodhya में रहने के लिए तैयार होना भी eligibility conditions में शामिल था। 2 सितंबर की बैठक पर टिकी नजर अब सभी की नजर 2 सितंबर को Ayodhya में होने वाली Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust की महत्वपूर्ण बैठक पर है। इसी meeting में shortlisted names पर चर्चा कर CEO के नाम पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। बैठक में CEO appointment के अलावा Trust के administrative structure, vacant positions, annual accounts और temple management से जुड़े दूसरे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। CEO संभालेगा मंदिर प्रबंधन की अहम जिम्मेदारी नए CEO से Ram Mandir और Trust के day-to-day management को अधिक professional और व्यवस्थित बनाने की उम्मीद है। CEO की exact powers और General Secretary के साथ responsibilities का division भी Trust स्तर पर तय किया जाना है। पहले full-time CEO की नियुक्ति को मंदिर के बढ़ते administrative operations और management structure में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल Search Committee की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और तीन नाम Trust के पास पहुंच गए हैं। अंतिम नाम की घोषणा अब Trust के फैसले के बाद होगी। स्रोत – श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, The Indian Express, India Today, Amar Ujala जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर ‘मोदी समर्थक’ बताए जा रहे शख्स का बयान चर्चा में; VIDEO वायरल

नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला पिछले कई महीनों से चर्चा में है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर ऐसा तर्क देता नजर आ रहा है जिसने नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पोस्ट में इस व्यक्ति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थक बताया जा रहा है। हालांकि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान और उसके किसी राजनीतिक दल से औपचारिक जुड़ाव की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो में व्यक्ति कथित चोरी को भगवान कृष्ण द्वारा बचपन में मक्खन चुराने की पौराणिक कथाओं से जोड़कर समझाने की कोशिश करता दिखाई देता है। उसके इसी बयान पर सोशल मीडिया यूजर्स अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। वायरल VIDEO में क्या कहता दिख रहा है शख्स? सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप में एक व्यक्ति से अयोध्या राम मंदिर में सामने आए चढ़ावा चोरी मामले के बारे में सवाल पूछा जाता है। जवाब में वह कथित तौर पर कहता है कि इसे सामान्य चोरी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। इसके बाद वह आरोपी के ‘यादव’ सरनेम का जिक्र करते हुए भगवान कृष्ण और उनकी बाल लीलाओं का उदाहरण देता दिखाई देता है। वीडियो में दिए गए इस तर्क को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग सवाल उठा रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि किसी आपराधिक मामले को धार्मिक कथा से जोड़कर सही ठहराना उचित नहीं है। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि वायरल वीडियो में मौजूद व्यक्ति का बयान उसकी व्यक्तिगत राय है। इसका किसी सरकारी संस्था, BJP या राम मंदिर ट्रस्ट की आधिकारिक प्रतिक्रिया के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। क्या सच में राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला है? वायरल वीडियो से अलग, अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ा कथित चोरी का मामला वास्तविक पुलिस और न्यायिक जांच के दायरे में है। जून 2026 में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। आरोपों में मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए गए नकद और अन्य चढ़ावे में कथित हेराफेरी शामिल है। मामले में नामजद आरोपियों में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, मनीष कुमार यादव, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, रामशंकर मिश्रा, करुणेश पांडे और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। CCTV फुटेज में क्या सामने आया? जांच के दौरान CCTV फुटेज भी अहम सबूत के तौर पर सामने आया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस जांच में करीब 45 दिनों की CCTV recording खंगाली गई थी। जांच से जुड़े सूत्रों ने दावा किया कि फुटेज में आठ गिरफ्तार आरोपियों में से कम से कम पांच लोग cash counting के दौरान नोटों की गड्डियां निकालकर अपने कपड़ों या मोजों में छिपाते दिखाई दिए। यह मामला सामने आने के बाद मंदिर में donation counting और उसके management system को लेकर भी गंभीर सवाल उठे। करीब 80 लाख रुपये की रिकवरी की खबर जांच के शुरुआती चरण में पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से कथित रूप से चोरी से जुड़ी बड़ी रकम बरामद करने की जानकारी भी दी थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार आरोपियों से कुल करीब ₹79.85 लाख नकद बरामद किए गए थे। इसके बाद मामला केवल स्थानीय पुलिस जांच तक सीमित नहीं रहा और देश की राजनीति से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। SIT की Final Report भी आई उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित पहली Special Investigation Team ने अगस्त में अपनी final report राज्य सरकार को सौंप दी। इसके बाद Home Department ने रिपोर्ट को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया। रिपोर्ट में donation counting process में administrative और supervisory lapses का भी जिक्र सामने आया था। पहली SIT की रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा के खिलाफ चोरी में संलिप्तता का सबूत नहीं मिलने की जानकारी सामने आई। Supreme Court भी कर रहा मामले की निगरानी राम मंदिर donation case अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी है। 17 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच कर रही एक अन्य SIT को जांच जल्द पूरी करने और status report दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में मंदिर में आने वाले donations के management और transparency को बेहतर बनाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। इससे साफ है कि मामला केवल सोशल मीडिया का दावा नहीं बल्कि गंभीर जांच और न्यायिक प्रक्रिया का विषय है। आठों आरोपी न्यायिक हिरासत में इस मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत को अगस्त में आगे बढ़ाया गया था। अयोध्या की विशेष अदालत ने सभी आठ आरोपियों की judicial custody को 24 अगस्त 2026 तक बढ़ाया था। बचाव पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ लगाई गई धाराओं पर आपत्ति जताते हुए उन्हें गलत तरीके से फंसाए जाने का दावा किया है। इसलिए आरोपियों को दोषी मानने का अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा। वायरल बयान पर क्यों हो रही चर्चा? इस पूरे मामले के बीच वायरल हुआ नया वीडियो मुख्य रूप से व्यक्ति के असामान्य तर्क के कारण चर्चा में आया है। सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो में कथित चोरी को भगवान कृष्ण की मक्खन चोरी से जोड़ने की कोशिश पर कई लोगों ने आलोचना की है, जबकि कुछ लोग इसे केवल उस व्यक्ति की निजी और धार्मिक व्याख्या बता रहे हैं। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि सोशल मीडिया पर वीडियो के साथ व्यक्ति को “मोदी समर्थक” बताया जा रहा है, लेकिन उसकी राजनीतिक पहचान की विश्वसनीय मीडिया या आधिकारिक स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में वीडियो में कही गई बातों को BJP, केंद्र सरकार या किसी हिंदू धार्मिक संस्था का आधिकारिक रुख मानना गलत होगा। चढ़ावा चोरी मामले की जांच अभी महत्वपूर्ण मोड़ पर राम मंदिर चढ़ावा मामले में पुलिस कार्रवाई, गिरफ्तारियां, CCTV फुटेज, रकम की बरामदगी और SIT जांच जैसे कई तथ्य आधिकारिक जांच प्रक्रिया का हिस्सा बन चुके हैं। वहीं वायरल वीडियो से पैदा हुई बहस…

आगे और पढ़ें

अयोध्या राम मंदिर कथित दान गबन मामला: SIT जांच तेज, ट्रस्ट में बड़े प्रशासनिक बदलाव

अयोध्या, 7 जुलाई। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के कथित गबन मामले की जांच अब और तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) वित्तीय रिकॉर्ड, दान संग्रह प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्थाओं की विस्तृत जांच कर रहा है। इस बीच मंदिर ट्रस्ट ने प्रशासनिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण बदलाव भी किए हैं। जांच में कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आए SIT की प्रारंभिक जांच में दान की गणना और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है। जांच अधिकारियों के अनुसार दान संग्रह, नकदी प्रबंधन, CCTV निगरानी और कर्मचारियों की जिम्मेदारियों से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तार से पड़ताल की जा रही है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। ट्रस्ट में प्रशासनिक बदलाव मामले के सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में महत्वपूर्ण प्रशासनिक परिवर्तन किए गए हैं। ट्रस्ट ने नए प्रशासनिक ढांचे की दिशा में कदम उठाते हुए अंतरिम व्यवस्थाएं लागू की हैं तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। सुरक्षा व्यवस्था होगी और मजबूत जांच के साथ-साथ मंदिर परिसर में दान प्रबंधन प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नई सुरक्षा व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं। नकदी गणना कक्ष की निगरानी, CCTV कवरेज, कर्मचारियों की जांच और दान प्रक्रिया में अतिरिक्त नियंत्रण जैसे उपायों पर काम चल रहा है। आठ आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी पुलिस इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसियां आरोपियों के बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं। साथ ही कथित गबन की वास्तविक राशि और पूरे नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच जांच एजेंसियों ने मंदिर ट्रस्ट के पिछले पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड और बैंकिंग दस्तावेजों की दोबारा समीक्षा का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं पहले भी किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता तो नहीं हुई। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज मामले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। वहीं ट्रस्ट ने भरोसा दिलाया है कि जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा और यदि किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। जांच पूरी होने तक किसी भी व्यक्ति को दोषी मानना उचित नहीं होगा। आगे की राह SIT आने वाले दिनों में अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकती है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित अनियमितताओं की वास्तविक प्रकृति क्या थी और यदि किसी स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी हुई है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है। फिलहाल जांच जारी है और संबंधित एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। स्रोत:उत्तर प्रदेश पुलिस, विशेष जांच दल (SIT), श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट तथा आधिकारिक सार्वजनिक जानकारी। मूल रिपोर्ट:7 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें
Translate »