नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला पिछले कई महीनों से चर्चा में है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर ऐसा तर्क देता नजर आ रहा है जिसने नई बहस छेड़ दी है।
सोशल मीडिया पोस्ट में इस व्यक्ति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थक बताया जा रहा है। हालांकि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान और उसके किसी राजनीतिक दल से औपचारिक जुड़ाव की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
वीडियो में व्यक्ति कथित चोरी को भगवान कृष्ण द्वारा बचपन में मक्खन चुराने की पौराणिक कथाओं से जोड़कर समझाने की कोशिश करता दिखाई देता है। उसके इसी बयान पर सोशल मीडिया यूजर्स अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
वायरल VIDEO में क्या कहता दिख रहा है शख्स?
सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप में एक व्यक्ति से अयोध्या राम मंदिर में सामने आए चढ़ावा चोरी मामले के बारे में सवाल पूछा जाता है।
जवाब में वह कथित तौर पर कहता है कि इसे सामान्य चोरी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। इसके बाद वह आरोपी के ‘यादव’ सरनेम का जिक्र करते हुए भगवान कृष्ण और उनकी बाल लीलाओं का उदाहरण देता दिखाई देता है।
वीडियो में दिए गए इस तर्क को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग सवाल उठा रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि किसी आपराधिक मामले को धार्मिक कथा से जोड़कर सही ठहराना उचित नहीं है।
हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि वायरल वीडियो में मौजूद व्यक्ति का बयान उसकी व्यक्तिगत राय है। इसका किसी सरकारी संस्था, BJP या राम मंदिर ट्रस्ट की आधिकारिक प्रतिक्रिया के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
क्या सच में राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला है?
वायरल वीडियो से अलग, अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ा कथित चोरी का मामला वास्तविक पुलिस और न्यायिक जांच के दायरे में है।
जून 2026 में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। आरोपों में मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए गए नकद और अन्य चढ़ावे में कथित हेराफेरी शामिल है।
मामले में नामजद आरोपियों में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, मनीष कुमार यादव, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, रामशंकर मिश्रा, करुणेश पांडे और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं।
CCTV फुटेज में क्या सामने आया?
जांच के दौरान CCTV फुटेज भी अहम सबूत के तौर पर सामने आया।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस जांच में करीब 45 दिनों की CCTV recording खंगाली गई थी। जांच से जुड़े सूत्रों ने दावा किया कि फुटेज में आठ गिरफ्तार आरोपियों में से कम से कम पांच लोग cash counting के दौरान नोटों की गड्डियां निकालकर अपने कपड़ों या मोजों में छिपाते दिखाई दिए।
यह मामला सामने आने के बाद मंदिर में donation counting और उसके management system को लेकर भी गंभीर सवाल उठे।
करीब 80 लाख रुपये की रिकवरी की खबर
जांच के शुरुआती चरण में पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से कथित रूप से चोरी से जुड़ी बड़ी रकम बरामद करने की जानकारी भी दी थी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार आरोपियों से कुल करीब ₹79.85 लाख नकद बरामद किए गए थे।
इसके बाद मामला केवल स्थानीय पुलिस जांच तक सीमित नहीं रहा और देश की राजनीति से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।
SIT की Final Report भी आई
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित पहली Special Investigation Team ने अगस्त में अपनी final report राज्य सरकार को सौंप दी।
इसके बाद Home Department ने रिपोर्ट को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया। रिपोर्ट में donation counting process में administrative और supervisory lapses का भी जिक्र सामने आया था।
पहली SIT की रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा के खिलाफ चोरी में संलिप्तता का सबूत नहीं मिलने की जानकारी सामने आई।
Supreme Court भी कर रहा मामले की निगरानी
राम मंदिर donation case अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी है।
17 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच कर रही एक अन्य SIT को जांच जल्द पूरी करने और status report दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में मंदिर में आने वाले donations के management और transparency को बेहतर बनाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
इससे साफ है कि मामला केवल सोशल मीडिया का दावा नहीं बल्कि गंभीर जांच और न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।
आठों आरोपी न्यायिक हिरासत में
इस मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत को अगस्त में आगे बढ़ाया गया था।
अयोध्या की विशेष अदालत ने सभी आठ आरोपियों की judicial custody को 24 अगस्त 2026 तक बढ़ाया था। बचाव पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ लगाई गई धाराओं पर आपत्ति जताते हुए उन्हें गलत तरीके से फंसाए जाने का दावा किया है।
इसलिए आरोपियों को दोषी मानने का अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
वायरल बयान पर क्यों हो रही चर्चा?
इस पूरे मामले के बीच वायरल हुआ नया वीडियो मुख्य रूप से व्यक्ति के असामान्य तर्क के कारण चर्चा में आया है।
सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो में कथित चोरी को भगवान कृष्ण की मक्खन चोरी से जोड़ने की कोशिश पर कई लोगों ने आलोचना की है, जबकि कुछ लोग इसे केवल उस व्यक्ति की निजी और धार्मिक व्याख्या बता रहे हैं।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि सोशल मीडिया पर वीडियो के साथ व्यक्ति को “मोदी समर्थक” बताया जा रहा है, लेकिन उसकी राजनीतिक पहचान की विश्वसनीय मीडिया या आधिकारिक स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है।
ऐसे में वीडियो में कही गई बातों को BJP, केंद्र सरकार या किसी हिंदू धार्मिक संस्था का आधिकारिक रुख मानना गलत होगा।
चढ़ावा चोरी मामले की जांच अभी महत्वपूर्ण मोड़ पर
राम मंदिर चढ़ावा मामले में पुलिस कार्रवाई, गिरफ्तारियां, CCTV फुटेज, रकम की बरामदगी और SIT जांच जैसे कई तथ्य आधिकारिक जांच प्रक्रिया का हिस्सा बन चुके हैं।
वहीं वायरल वीडियो से पैदा हुई बहस इससे अलग सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया है।
अब नजर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही जांच और SIT की आगामी status report पर रहेगी। जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्यों पर सुनवाई के बाद ही यह अंतिम रूप से तय होगा कि किस आरोपी की क्या भूमिका थी और किन लोगों पर कानूनी जिम्मेदारी तय होती है।
नोट: वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान और उसे “मोदी समर्थक” बताए जाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। राम मंदिर चढ़ावा मामले में गिरफ्तार लोग आरोपी हैं; उनके दोषी या निर्दोष होने का अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।
स्रोत – द इंडियन एक्सप्रेस, हिन्दुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
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