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6 महीने के निचले स्तर के करीब शेयर बाजार, महंगे कच्चे तेल से Sensex-Nifty पर दबाव

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार पर महंगे कच्चे तेल, US-Iran तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का दबाव बना हुआ है। सोमवार की भारी गिरावट के बाद Sensex और Nifty करीब छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए। 29 सितंबर को भी बाजार की शुरुआत से पहले संकेत कमजोर रहे, जबकि Brent crude करीब $106-$107 प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। Sensex में 1,124 अंकों की बड़ी गिरावट 28 सितंबर को BSE Sensex 1,124.02 अंक यानी 1.52% गिरकर 72,771.72 पर बंद हुआ। दिनभर बाजार में बिकवाली का दबाव रहा और बैंकिंग, फाइनेंशियल, इंफ्रा, एनर्जी और रियल्टी समेत लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। Nifty 22,800 के नीचे बंद NSE Nifty 50 भी 360.25 अंक यानी 1.56% टूटकर 22,780.25 पर बंद हुआ। इस गिरावट के साथ Nifty करीब छह महीने के निचले स्तर के आसपास पहुंच गया। बाजार पिछले सात सप्ताह से लगातार दबाव में बना हुआ है। महंगा कच्चा तेल बना सबसे बड़ी चिंता भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की तेजी से आ रहा है। Brent crude सोमवार को एक समय $108 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था। 29 सितंबर के शुरुआती कारोबार में भी Brent करीब $106.7 प्रति बैरल पर बना रहा। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमत बढ़ने से देश के import bill, inflation और कंपनियों की लागत पर दबाव पड़ सकता है। US-Iran तनाव का बाजार पर असर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। Strait of Hormuz की स्थिति और दोनों देशों के बीच बातचीत में गतिरोध के कारण निवेशक जोखिम वाले assets से दूरी बना रहे हैं। इसका असर भारत समेत एशियाई शेयर बाजारों पर दिखाई दे रहा है। सभी प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली सोमवार के कारोबार में सभी प्रमुख sectoral indices गिरावट के साथ बंद हुए। PSU Bank index में करीब 3%, Telecom में लगभग 2.3% की गिरावट दर्ज हुई। Energy, Infrastructure, FMCG, Realty, Private Bank, Metal और Oil & Gas indices भी 1% से ज्यादा कमजोर हुए। Midcap-Smallcap पर भी दबाव बिकवाली केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। Nifty Midcap index करीब 1.6% और Smallcap index लगभग 1.8% गिरा। 190 से ज्यादा शेयरों ने 52-week low को छुआ, जिससे broader market में भी कमजोरी साफ दिखाई दी। विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी Foreign Institutional Investors यानी FIIs की बिकवाली भी बाजार पर दबाव बढ़ा रही है। 28 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने करीब ₹5,353 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग ₹5,189 करोड़ की खरीदारी की। घरेलू निवेशकों की खरीदारी के बावजूद विदेशी फंडों की लगातार निकासी बाजार की धारणा को कमजोर कर रही है। बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयर टूटे सोमवार की गिरावट में banking और financial stocks का बड़ा योगदान रहा। Bank Nifty करीब 1,108 अंक गिरकर 54,471 के आसपास बंद हुआ। HDFC Bank, ICICI Bank और दूसरे heavyweight शेयरों में कमजोरी से प्रमुख indices पर दबाव बढ़ा। रुपया भी ₹96 प्रति डॉलर के करीब कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय रुपये पर भी दिखाई दिया। सोमवार को रुपया कमजोर होकर करीब ₹95.98 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। डॉलर की मजबूती और महंगा crude भारतीय मुद्रा के लिए दोहरी चुनौती बन रहे हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने भी बढ़ाई चिंता US Treasury yields में तेजी से emerging markets पर दबाव बढ़ा है। अमेरिकी 10-year Treasury yield 5.2% से ऊपर पहुंच गई है। ऊंची bond yields के कारण विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी assets ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं, जिससे भारत जैसे emerging markets से capital outflow बढ़ने का खतरा रहता है। 29 सितंबर को भी सतर्क शुरुआत के संकेत 29 सितंबर की सुबह GIFT Nifty ने भारतीय बाजार के लिए लगभग सपाट से कमजोर शुरुआत के संकेत दिए। विश्लेषकों की नजर Nifty के 22,700-22,800 के दायरे पर बनी हुई है। इस स्तर से नीचे कमजोरी बढ़ने पर बाजार में आगे और बिकवाली देखने को मिल सकती है। आगे किन चीजों पर रहेगी नजर? शेयर बाजार की आगे की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमत, US-Iran तनाव, विदेशी निवेशकों की गतिविधि और अमेरिकी bond yields पर निर्भर करेगी। यदि Brent crude लंबे समय तक $100 से ऊपर बना रहता है तो भारतीय बाजार के लिए inflation और corporate margins से जुड़ी चिंताएं बनी रह सकती हैं। source – Reuters / Moneycontrol Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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US-Iran तनाव से कच्चा तेल फिर चढ़ा, Brent $106 के करीब; वैश्विक बाजारों की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं ने वैश्विक बाजारों की चिंता फिर बढ़ा दी है। 29 सितंबर 2026 को Brent crude लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूत होकर करीब 106 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। वहीं WTI crude भी 93 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता दिखा। लगातार दूसरे दिन महंगा हुआ कच्चा तेल मंगलवार के शुरुआती कारोबार में Brent crude करीब 105.91 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि बाद के कारोबार में यह 106 डॉलर से ऊपर चला गया। US West Texas Intermediate यानी WTI crude भी बढ़कर करीब 93.32 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बाजार में तेल की आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता कीमतों को सहारा दे रही है। US-Iran तनाव से बढ़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव तेल बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन अभी तक किसी स्थायी समाधान पर सहमति नहीं बन पाई है। हालिया घटनाक्रम के बाद निवेशकों को आशंका है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो मध्य पूर्व से कच्चे तेल की आपूर्ति फिर प्रभावित हो सकती है। Strait of Hormuz पर टिकी दुनिया की नजर वैश्विक ऊर्जा बाजार की नजर Strait of Hormuz पर बनी हुई है। यह समुद्री मार्ग मध्य पूर्व से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक तेल पहुंचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। क्षेत्र में किसी भी तरह की बाधा या सैन्य तनाव से shipping costs बढ़ सकती हैं और crude oil supply पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि इस इलाके से जुड़ी हर नई खबर का असर तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। Middle East से निर्यात में सुधार सितंबर में मध्य पूर्व के प्रमुख तेल उत्पादकों से crude exports बढ़कर करीब 12.8 million barrels per day पहुंचने के शुरुआती आंकड़े सामने आए हैं। सऊदी अरब और UAE से बढ़ी सप्लाई ने बाजार को कुछ राहत दी है, लेकिन वैकल्पिक shipping arrangements की ऊंची लागत के कारण स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। वैश्विक बाजारों में बढ़ी बेचैनी महंगा तेल केवल energy market तक सीमित नहीं है। इससे दुनिया भर के शेयर बाजारों, currencies और bond markets पर भी दबाव बढ़ रहा है। अमेरिकी 10-year Treasury yield करीब 5.24% तक पहुंच गई है। तेल की बढ़ती कीमतों से inflation फिर तेज होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। डॉलर हुआ मजबूत मध्य पूर्व में तनाव और अमेरिकी bond yields में तेजी के बीच डॉलर भी मजबूत बना हुआ है। Dollar Index करीब दो महीने के उच्च स्तर के आसपास पहुंच गया है। निवेशक अब अमेरिका के आने वाले inflation और employment data पर नजर रख रहे हैं, क्योंकि इनके आधार पर Federal Reserve की आगे की ब्याज दर नीति का संकेत मिल सकता है। भारत पर भी पड़ सकता है असर भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल विदेश से आयात करता है। ऐसे में crude oil की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने पर देश के import bill, inflation और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। तेल महंगा होने से transport, aviation, logistics और manufacturing कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है। ₹96 प्रति डॉलर के करीब रुपया कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच भारतीय रुपया भी दबाव में है। सोमवार को रुपया करीब ₹95.98 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था और बाजार की नजर अब ₹96 के महत्वपूर्ण स्तर पर है। रुपये में तेज गिरावट रोकने के लिए RBI की संभावित दखल पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। महंगाई बढ़ने का भी खतरा अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं तो इसका असर ईंधन से लेकर परिवहन और उत्पादन लागत तक दिखाई दे सकता है। इससे कई देशों में inflation पर दबाव बढ़ सकता है और केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। अब बातचीत के नतीजों पर नजर तेल बाजार की आगे की दिशा काफी हद तक अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत तथा Strait of Hormuz की स्थिति पर निर्भर करेगी। अगर तनाव कम होता है और तेल की सप्लाई सामान्य होती है तो कीमतों में नरमी आ सकती है। वहीं किसी नए टकराव की स्थिति में crude oil में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल सकता है। source – Reuters Investing.com Australia जय राष्ट्र न्यूज़

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आज Petrol-Diesel Rates ज्यादातर शहरों में स्थिर; Brent Crude $104 से नीचे आने से Fuel Market को राहत

नई दिल्ली, 20 सितंबर 2026: India में आज petrol और diesel के rates ज्यादातर major cities में स्थिर बने हुए हैं। Delhi, Mumbai, Kolkata और Chennai समेत बड़े शहरों में पिछले दिन के मुकाबले कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा। वहीं global market में Brent crude $104 प्रति barrel से नीचे आने से fuel market पर कुछ दबाव कम हुआ है। Delhi में Petrol ₹102.12, Diesel ₹95.20 आज के latest city-wise rates के मुताबिक: इन cities में rates broadly stable बने हुए हैं। Brent Crude $103–104 Range में Friday के global trading session में Brent crude करीब $103.87 per barrel पर था। इससे पहले Middle East tensions के कारण crude $105–107 range तक पहुंच गया था। Oil prices में हालिया नरमी Saudi Arabia की ओर से additional crude supply और Middle East supply disruptions को लेकर कुछ easing expectations से जुड़ी है। Retail Fuel Prices में अभी बड़ा Cut नहीं Brent crude नीचे आने के बावजूद India में petrol-diesel retail rates में आज कोई major nationwide reduction नहीं हुआ है। Retail prices पर global crude के अलावा rupee-dollar exchange rate, central और state taxes, transportation cost और oil marketing companies की pricing strategy का भी असर पड़ता है। Rupee की कमजोरी अभी भी चिंता India अपनी crude oil जरूरतों का बड़ा हिस्सा imports से पूरा करता है। ऐसे में Rupee कमजोर होने पर imported crude की landed cost बढ़ जाती है। हाल के sessions में Rupee ₹96 प्रति Dollar के आसपास दबाव में रहा है, जिससे crude prices में गिरावट का पूरा फायदा domestic fuel prices तक पहुंचने में समय लग सकता है। Middle East Tension अभी खत्म नहीं Crude prices में फिलहाल कुछ नरमी आई है, लेकिन Strait of Hormuz, Saudi oil infrastructure और Houthi attacks को लेकर geopolitical risks अभी बने हुए हैं। इसलिए global oil prices में आगे भी volatility देखने को मिल सकती है। Consumers को फिलहाल राहत आज के rates में major hike नहीं होने से daily commuters को immediate राहत है। हालांकि Hyderabad, Kolkata और Mumbai जैसे cities में petrol अभी भी ₹110 प्रति litre से ऊपर बना हुआ है। source – Business Today / Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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Crude Oil महंगा होने से Rupee 95.80/$ के करीब; RBI Intervention पर नजर, Brent $107 के आसपास

मुंबई, 15 सितंबर 2026: Indian Rupee पर मंगलवार को फिर दबाव बढ़ गया है। Rising crude oil prices, मजबूत US Dollar और higher US Treasury yields के बीच Rupee 95.80 प्रति Dollar के महत्वपूर्ण स्तर के करीब पहुंचने की आशंका है। Currency traders की नजर Reserve Bank of India (RBI) पर है, जिसने हाल के sessions में इसी zone के आसपास dollar selling के जरिए Rupee की तेज गिरावट को रोकने की कोशिश की थी। 95.80 बना Rupee के लिए Critical Level Forex market participants के मुताबिक ₹95.80/$ Rupee के लिए महत्वपूर्ण technical level माना जा रहा है। अगर currency इस level के पार लगातार कमजोर रहती है, तो Dollar demand बढ़ सकती है और Rupee ₹96 प्रति Dollar की ओर जा सकता है। RBI इससे पहले 95.70–95.80 zone में market intervention करता रहा है। 95.79 का Level Friday को छुआ था 11 September को Rupee 95.70 पर open हुआ था और intraday 95.79/$ तक गिरा, लेकिन suspected RBI intervention और crude prices में कुछ नरमी से losses कम हुए। उस session के अंत में currency करीब 95.55–95.57/$ के स्तर पर बंद हुई थी। Brent Crude करीब $107 प्रति Barrel Tuesday Asian trade में Brent crude करीब $106.93–$107.20 प्रति barrel तक पहुंच गया। Saudi Arabia के energy infrastructure पर attacks और East-West oil pipeline में disruption से global crude supply को लेकर चिंता बढ़ी है। महंगा Crude Rupee के लिए क्यों है चिंता? India अपनी crude oil जरूरतों का बड़ा हिस्सा imports के जरिए पूरा करता है। Oil prices बढ़ने पर Indian refiners और importers को ज्यादा Dollars खरीदने पड़ते हैं। इससे Dollar demand बढ़ती है और Rupee पर depreciation pressure आता है। महंगा crude India के import bill और domestic inflation को भी प्रभावित कर सकता है। RBI पहले कर चुका है Dollar Selling Recent sessions में traders ने RBI की ओर से spot market में Dollar sales और forex swaps की सूचना दी थी। इन interventions का उद्देश्य Rupee में disorderly volatility को रोकना और market liquidity manage करना था। हालांकि RBI आम तौर पर daily forex intervention की तत्काल आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है। US Fed Decision पर भी नजर Currency market की नजर अब US Federal Reserve की 15–16 September meeting पर है। Markets में 25 basis points rate hike की संभावना काफी मजबूत हो गई है। Higher US interest rates Dollar को और मजबूत कर सकते हैं, जिससे emerging-market currencies including Rupee पर अतिरिक्त pressure पड़ सकता है। source – Reuters / Business Standard / RBI Market Data जय राष्ट्र न्यूज़

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Houthis ने Red Sea के Greater और Lesser Hanish Islands पर कब्जा किया; Global Oil Supply को लेकर नई चिंता

काहिरा/सना, 14 सितंबर 2026: Yemen के Iran-backed Houthi rebels ने Red Sea के रणनीतिक Greater Hanish और Lesser Hanish Islands पर कब्जा कर लिया है। Yemeni government और Houthi officials के मुताबिक government-allied forces के पीछे हटने के बाद Houthis ने दोनों islands पर fighters तैनात कर दिए। इससे Bab el-Mandeb Strait और global shipping routes की security को लेकर चिंता और बढ़ गई है। Hanish Islands पर Fighters तैनात Greater और Lesser Hanish Islands, Bab el-Mandeb Strait से करीब 160 km उत्तर में स्थित हैं। Officials के मुताबिक government-aligned forces के archipelago से हटने के बाद Houthi fighters ने इन islands पर control स्थापित किया। इससे पहले Houthis ने Mokha port city और Mayun (Perim) Island पर भी कब्जा किया था, जो Bab el-Mandeb के भीतर रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण location है। Bab el-Mandeb पर बढ़ी पकड़ Bab el-Mandeb Strait Red Sea को Gulf of Aden और Indian Ocean से जोड़ता है और Asia-Europe maritime trade के सबसे महत्वपूर्ण corridors में शामिल है। Houthis की Red Sea coastline और nearby islands पर बढ़ती पकड़ से commercial vessels और oil tankers के लिए security risks बढ़ सकते हैं। Saudi Oil Exports के लिए अहम Route Strait of Hormuz में disruption के बीच Bab el-Mandeb और Red Sea route की अहमियत और बढ़ गई है, क्योंकि Saudi Arabia समेत Gulf producers इसे alternative export corridor के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इस route पर खतरा बढ़ने से shipping costs, insurance premiums और global crude supply पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है। Brent Crude $107 के पार Middle East में बढ़ते तनाव के बीच सोमवार को Brent crude करीब 3% बढ़कर $107.81 प्रति barrel तक पहुंच गया, जबकि US crude करीब $102.94 पर था। Saudi oil infrastructure पर हालिया attacks और Red Sea shipping से जुड़े risks ने global energy market की चिंता बढ़ा दी है। Yemen Conflict फिर तेज होने का खतरा Houthis की नई territorial gains ने Yemen में लंबे समय से चल रहे conflict के फिर बड़े स्तर पर भड़कने की आशंका बढ़ा दी है। हाल के हफ्तों में fighting के कारण हजारों लोगों के displaced होने की reports सामने आई हैं और humanitarian situation को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। Global Trade पर भी पड़ सकता है असर अगर Bab el-Mandeb में shipping और ज्यादा risky होती है, तो vessels को Africa के Cape of Good Hope के रास्ते divert करना पड़ सकता है। इससे journey लंबी होने के साथ freight और fuel costs भी बढ़ सकती हैं। इसी कारण Houthi advances को सिर्फ regional military development नहीं, बल्कि global trade और energy security से जुड़े बड़े risk के तौर पर देखा जा रहा है। source – Associated Press / Reuters / Financial Times जय राष्ट्र न्यूज़

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Brent Crude $100 के ऊपर, Middle East Tension से Indian Market पर दबाव

मुंबई, 10 सितंबर 2026: Middle East में बढ़ते तनाव और oil shipping पर हमलों के बीच Brent crude लगातार दूसरे दिन $100 प्रति barrel के ऊपर बना हुआ है। गुरुवार को Brent करीब 0.7% नीचे $100.50 प्रति barrel पर कारोबार कर रहा था, जबकि WTI crude करीब $95.58 पर था। Sensex-Nifty में सतर्क कारोबार ऊंचे crude prices के कारण Indian equity market में investor sentiment कमजोर बना हुआ है। सुबह करीब 9:36 बजे Nifty 50 0.01% गिरकर 23,429.25 और Sensex 0.01% नीचे 74,759.54 पर था। दोनों indices पिछले session में तीन महीने के निचले स्तर पर बंद हुए थे और पिछले आठ sessions में से सात में गिरावट दर्ज कर चुके हैं। Middle East Conflict ने बढ़ाई Oil Supply की चिंता Oil market में tension तब और बढ़ी जब Iran ने Strait of Hormuz के पास 10 ships पर हमले का दावा किया। यह कार्रवाई US द्वारा पांच Iranian oil tankers को निशाना बनाए जाने के बाद हुई। इस escalation ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण oil shipping routes में supply disruption का risk बढ़ा दिया है। Strait of Hormuz पर नजर Conflict से पहले Strait of Hormuz से दुनिया के oil और gas trade का करीब 20% हिस्सा गुजरता था। मौजूदा तनाव के कारण इस route से traffic काफी कम हुआ है। Red Sea route पर Houthi attacks ने alternative shipping routes को लेकर भी चिंता बढ़ाई है। India के लिए महंगा Crude क्यों चिंता? India दुनिया के सबसे बड़े crude oil importers में शामिल है। लंबे समय तक oil prices $100 के ऊपर रहने से: Reuters के मुताबिक यही वजह है कि high crude prices Indian market sentiment के लिए बड़ा risk बने हुए हैं। Rupee भी ₹95.30/$ तक कमजोर ऊंचे oil prices का असर rupee पर भी दिखाई दिया। आज Indian rupee करीब 0.2% गिरकर ₹95.30 प्रति dollar तक पहुंचा, जो करीब 10 दिनों का सबसे कमजोर स्तर है। Traders के मुताबिक RBI की ओर से संभावित dollar selling ने currency पर दबाव को कुछ हद तक सीमित किया। ONGC और Oil India में तेजी जहां high crude prices broader market के लिए चिंता हैं, वहीं upstream oil companies को इसका फायदा मिला। ONGC करीब 2% और Oil India करीब 2.4% ऊपर रहे, क्योंकि higher crude prices इनके revenue और margins को support कर सकते हैं। आगे Middle East Developments पर नजर Market की दिशा अब Middle East conflict, Strait of Hormuz shipping, crude oil prices और global inflation data पर निर्भर रहेगी। अगर oil supply disruption और बढ़ता है तो Brent पर फिर upward pressure आ सकता है और इसका असर Indian rupee, inflation और equities पर भी पड़ सकता है। source – Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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Strait of Hormuz से Shipping Traffic आज भी 10-Day Average से काफी नीचे, Global Oil Supply को लेकर चिंता बढ़ी

दुबई, 9 सितंबर 2026: Middle East में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण energy shipping routes में शामिल Strait of Hormuz से गुजरने वाले commodity vessels की संख्या सामान्य स्तर से काफी नीचे बनी हुई है। Ship-tracking firm Kpler के preliminary data के मुताबिक मंगलवार को केवल 6 commodity vessels ने Strait पार किया, जबकि पिछले 10 दिनों का average करीब 12 vessels per day था। एक दिन पहले 9 Vessels ने किया था Transit Kpler data के अनुसार सोमवार को 9 commodity vessels ने Strait of Hormuz पार किया था, लेकिन मंगलवार को यह संख्या घटकर केवल 6 रह गई। इनमें 5 vessels inbound और केवल 1 outbound था। हालांकि कुछ ships अपने AIS transponders बंद करके भी transit कर सकती हैं, इसलिए final numbers preliminary data से अलग हो सकते हैं। US-Iran Conflict से बढ़ा Shipping Risk Shipping traffic में गिरावट ऐसे समय आई है जब US-Iran conflict एक बार फिर तेजी से escalate हुआ है। Reuters के मुताबिक US forces ने Iranian oil tankers को निशाना बनाया, जबकि Iran ने Jordan में स्थित एक अमेरिकी military base पर ballistic missiles दागे और Strait of Hormuz के पास कई ships पर हमले किए। इन घटनाओं ने commercial shipping के लिए risk काफी बढ़ा दिया है। Oil Prices $100 के करीब Strait of Hormuz में disruption और Middle East escalation का सीधा असर crude oil prices पर भी दिखाई दे रहा है। Brent crude बुधवार को बढ़कर करीब $99.49 per barrel तक पहुंच गया, जबकि WTI करीब $94.63 per barrel रहा। Market में अब $100 per barrel का psychological level बेहद करीब है। Global Oil Supply के लिए क्यों अहम है Hormuz? Strait of Hormuz Persian Gulf को Arabian Sea से जोड़ता है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण crude oil और LNG transit routes में शामिल है। Saudi Arabia, UAE, Kuwait, Iraq और Qatar जैसे बड़े energy exporters की significant supply इस route से international markets तक पहुंचती है। इसी वजह से यहां shipping में prolonged disruption global oil prices और energy security दोनों पर असर डाल सकता है। पिछले कुछ दिनों से लगातार कम है Traffic Hormuz में shipping traffic पिछले कई दिनों से दबाव में है। 6 सितंबर को Reuters ने बताया था कि 10-day average daily commodity traffic घटकर करीब 10 ships रह गया था, जो May के बाद सबसे निचला स्तर था। एक दिन ऐसा भी रहा जब केवल 2 commodity ships ने Strait पार किया। Bab el-Mandeb पर भी Traffic कमजोर Middle East का एक और महत्वपूर्ण maritime chokepoint Bab el-Mandeb Strait भी सामान्य से कमजोर traffic देख रहा है। मंगलवार को यहां करीब 25 vessels गुजरे, जबकि 10-day average लगभग 27 था। इससे Red Sea और Gulf दोनों major maritime routes पर बढ़ते geopolitical pressure की तस्वीर सामने आती है। Iran ने Ships पर कार्रवाई तेज की Iranian Revolutionary Guard ने बुधवार को Strait of Hormuz के पास 10 ships पर attacks का दावा किया, जिनमें दो अमेरिकी vessels शामिल बताई गईं। यह कार्रवाई US द्वारा पांच Iranian oil tankers को नष्ट किए जाने के बाद हुई। Escalation के कारण commercial shipping companies के लिए insurance, routing और operational costs बढ़ने का खतरा है। Crude Supply अभी पूरी तरह बंद नहीं हालांकि traffic काफी कम हुआ है, लेकिन Strait of Hormuz से oil flow पूरी तरह रुका नहीं है। Reuters analysis के मुताबिक Gulf producers alternative export routes का इस्तेमाल कर रहे हैं और US, Canada तथा Guyana जैसे non-OPEC producers की बढ़ी output भी global supply को कुछ support दे रही है। इसी वजह से Brent अभी तक decisively $100 से ऊपर नहीं गया है। आगे भी बना रह सकता है दबाव अगर US-Iran conflict और shipping attacks जारी रहते हैं तो Strait of Hormuz से traffic और कम हो सकता है। इसका असर crude oil prices, shipping insurance, freight costs और global inflation पर पड़ सकता है। फिलहाल market की नजर इस बात पर है कि अगले कुछ दिनों में vessel traffic recover करता है या regional conflict इसे और प्रभावित करता है। source – Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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Iran-Oman के बीच Strait of Hormuz के लिए Temporary Shipping Corridor पर बातचीत; Crude Oil 2% से ज्यादा गिरा

तेहरान/मस्कट: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण energy shipping routes में से एक Strait of Hormuz को दोबारा खोलने की उम्मीद बढ़ गई है। Iran और Oman ने जलडमरूमध्य में “Joint Temporary Navigational Corridor” बनाने और समुद्री mines हटाने के लिए संयुक्त व्यवस्था पर बातचीत आगे बढ़ाई है। इस diplomatic progress के बाद बुधवार, 26 अगस्त 2026 को international crude oil prices में 2% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। Brent crude futures $2.30 यानी 2.6% गिरकर $86.28 प्रति barrel पर आ गए, जबकि U.S. West Texas Intermediate (WTI) crude $2.08 यानी 2.53% टूटकर $80.29 पर कारोबार कर रहा था। इससे एक दिन पहले मंगलवार को भी दोनों benchmarks में 3% से ज्यादा की गिरावट आई थी। 25 August को Tehran में हुई Iran-Oman की बड़ी Meeting Oman के Foreign Minister Badr al-Busaidi ने 25 अगस्त को Tehran में Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi से मुलाकात की। दोनों देशों ने meeting के बाद कहा कि Strait of Hormuz में shipping traffic को चरणबद्ध तरीके से सामान्य करने के लिए एक framework पर चर्चा हुई है। इसमें सबसे पहले temporary joint navigation corridor बनाना और waterway से mines हटाना शामिल है। Oman के Foreign Minister ने उम्मीद जताई कि दोनों देश जल्द ही temporary corridor की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं। Temporary Corridor कैसे काम कर सकता है? Iranian Deputy Foreign Minister Kazem Gharibabadi के मुताबिक दोनों पक्ष temporary route को लेकर एक understanding पर पहुंचे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत Gulf of Oman से Persian Gulf में प्रवेश करने वाले जहाज पूरी तरह Iranian waters से गुजर सकते हैं, जबकि बाहर जाने वाले vessels का route आंशिक रूप से Iranian और आंशिक रूप से Omani territorial waters से गुजरने का प्रस्ताव है। हालांकि यह व्यवस्था अभी स्थायी समझौता नहीं है। Iran और Oman अगले 30 से 60 दिनों में negotiations जारी रखकर एक permanent और sustainable shipping route पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे। Mines हटाने पर भी बनी सहमति दोनों देशों की joint statement में Strait of Hormuz से mines हटाने के लिए joint mine-clearing project शुरू करने की बात कही गई है। इसके साथ navigation traffic management, information sharing और maritime security services को लेकर भी technical negotiations जारी रहेंगी। Strait में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए mine-clearing बेहद अहम है, क्योंकि किसी भी tanker या cargo ship को नुकसान global energy supply को तुरंत प्रभावित कर सकता है। Crude Oil में अचानक क्यों आई गिरावट? Oil market ने Iran-Oman talks को संभावित supply relief के रूप में देखा। Reuters के मुताबिक traders को उम्मीद है कि अगर Hormuz से vessels की normal movement धीरे-धीरे बहाल होती है, तो Middle East से global oil और LNG shipments पर लगा बड़ा constraint कम हो सकता है। इसी optimism के कारण crude futures में selling बढ़ी। Fujitomi Securities के analyst Mitsuru Muraishi के मुताबिक market का focus फिलहाल Strait of Hormuz navigation से जुड़े developments पर है और Iran-Oman talks में progress की उम्मीद ने oil prices पर downward pressure बनाया है। Brent $86.28, WTI $80.29 पर 26 अगस्त की सुबह international market में: रहा। Brent ने कारोबार के दौरान 13 अगस्त के बाद का अपना lowest level भी छुआ, जबकि WTI 10 अगस्त के बाद के निचले स्तर तक पहुंचा। हालांकि Middle East conflict को लेकर uncertainty अभी खत्म नहीं हुई है, इसलिए prices में आगे volatility बनी रह सकती है। Strait of Hormuz इतना महत्वपूर्ण क्यों है? Strait of Hormuz Iran और Oman के बीच मौजूद एक संकरा समुद्री मार्ग है, जो Persian Gulf को Gulf of Oman और आगे Arabian Sea से जोड़ता है। युद्ध से पहले दुनिया के traded oil और LNG का करीब पांचवां हिस्सा इसी route से गुजरता था। Saudi Arabia, UAE, Kuwait, Iraq और Iran जैसे बड़े oil-producing देशों के exports के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है। Qatar का LNG export भी इस route पर काफी हद तक निर्भर करता है। इसलिए Hormuz में किसी भी disruption का असर केवल Gulf countries पर नहीं बल्कि India, China, Japan, South Korea और Europe जैसे बड़े energy importers पर भी पड़ सकता है। अभी भी बेहद कम है Ship Traffic Diplomatic progress के बावजूद Strait में normal shipping अभी बहाल नहीं हुई है। Kpler के preliminary tracking data के मुताबिक मंगलवार को केवल 5 commodity vessels ने Hormuz से transit किया। इनमें दो LPG tankers, एक bitumen tanker और दो खाली product tankers शामिल थे। यह हाल के 10-day average 15 vessels से भी काफी कम है और pre-war levels के मुकाबले बेहद नीचे है। इससे साफ है कि corridor पर बातचीत शुरू होने और full-scale commercial shipping normal होने के बीच अभी बड़ा अंतर है। February से प्रभावित है Hormuz Shipping Reuters और AP के मुताबिक February के अंत में U.S.-Israel और Iran के बीच conflict शुरू होने के बाद Strait of Hormuz की सामान्य shipping बुरी तरह प्रभावित हुई। इसके बाद Iran ने waterway पर नियंत्रण कड़ा किया और U.S. की तरफ से Iranian ports को लेकर भी naval pressure बढ़ा। तब से energy markets में crude oil, LNG और shipping insurance costs पर बड़ा असर पड़ा है। Iran ने पूरी तरह Strait खोलने के लिए रखी हैं शर्तें Temporary corridor पर बातचीत का मतलब यह नहीं है कि Iran ने Strait of Hormuz को पूरी तरह खोलने पर सहमति दे दी है। Iranian officials का कहना है कि full reopening के लिए Tehran की कुछ मांगें पूरी होनी चाहिए, जिनमें U.S. naval blockade हटाना, oil sanctions में राहत और frozen Iranian assets से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। इसलिए temporary navigation corridor को फिलहाल एक interim confidence-building arrangement के रूप में देखा जा रहा है। US की मंजूरी भी अहम एक और बड़ा सवाल यह है कि emerging Iran-Oman arrangement पर United States का क्या रुख होगा। AP के मुताबिक यह अभी स्पष्ट नहीं है कि Washington proposed corridor को स्वीकार करेगा या नहीं। U.S. President Donald Trump की administration ने हाल में Iran के खिलाफ नए economic sanctions भी घोषित किए हैं। Reuters के मुताबिक Washington ने सोमवार को Iran की आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से sanctions expand…

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शेयर बाजार में गिरावट! कच्चा तेल $91 के पार पहुंचा, Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को गिरावट देखने को मिली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 250-300 अंक तक गिरा, जबकि निफ्टी 24,250 के स्तर से नीचे चला गया। बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का रहा। ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम की अवधि खत्म होने और तनाव बढ़ने से वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। महंगा कच्चा तेल भारत के लिए खास तौर पर चिंता का विषय है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल की कीमत बढ़ने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव आ सकता है और महंगाई का जोखिम भी बढ़ सकता है। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 77,418.97 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी 50 ने 24,223.85 के आसपास शुरुआत की। बाद में निफ्टी 24,177 के करीब आ गया और बाजार में गिरावट और गहरी हुई। आईटी शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में आईटी सेक्टर प्रमुख गिरने वाले क्षेत्रों में रहा। ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कमजोर रुपया और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। बाजार विशेषज्ञों की नजर अब पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल आपूर्ति की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है। अगर तेल की कीमतों में तेजी आगे भी जारी रहती है, तो भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। फिलहाल निवेशकों के लिए वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की चाल बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख संकेत बने हुए हैं। स्रोत: Reuters, NDTV, IIFL Jai Rashtra News

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