चंडीगढ़ में BRICS स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक, डिजिटल हेल्थ और महामारी तैयारी पर विशेष फोकस

चंडीगढ़: भारत की अध्यक्षता में आयोजित BRICS स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों ने डिजिटल हेल्थ, महामारी से निपटने की तैयारी और वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग को मजबूत बनाने पर व्यापक चर्चा की। बैठक में भारत, ब्राज़ील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका सहित BRICS देशों के स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक के दौरान भारत ने डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) और तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के अपने अनुभव साझा किए। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के लिए डिजिटल तकनीक, डेटा साझाकरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करना आवश्यक है। बैठक के प्रमुख एजेंडे बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई, जिनमें शामिल हैं— भारत ने साझा किया डिजिटल हेल्थ मॉडल भारत ने अपने डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म और स्वास्थ्य रिकॉर्ड प्रणाली का अनुभव साझा करते हुए बताया कि तकनीक की मदद से मरीजों को बेहतर, तेज और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। कई सदस्य देशों ने भारत के डिजिटल हेल्थ मॉडल में रुचि दिखाई और सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। महामारी से मिले सबक पर चर्चा बैठक में कोविड-19 सहित अन्य वैश्विक स्वास्थ्य संकटों से मिले अनुभवों की समीक्षा की गई। सदस्य देशों ने महामारी के दौरान सामने आई चुनौतियों और भविष्य में बेहतर समन्वय, सूचना साझा करने तथा संयुक्त अनुसंधान की आवश्यकता पर जोर दिया। स्वास्थ्य सहयोग को मिलेगा बढ़ावा BRICS देशों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य, वैक्सीन अनुसंधान, डिजिटल स्वास्थ्य और चिकित्सा नवाचार के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भविष्य की वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। निष्कर्ष चंडीगढ़ में आयोजित BRICS स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक ने डिजिटल हेल्थ, महामारी तैयारी और वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग को नई दिशा देने का प्रयास किया है। भारत ने अपने डिजिटल स्वास्थ्य मॉडल और स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचारों के माध्यम से सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने का संदेश दिया। Source: Ministry of Health & Family Welfare | BRICS | PIB | WHO जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत ने BRICS स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक की मेजबानी की, वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग और डिजिटल हेल्थ पर दिया जोर

नई दिल्ली: भारत ने BRICS स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक की सफल मेजबानी करते हुए वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग, महामारी से निपटने की तैयारी और डिजिटल हेल्थ सिस्टम को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया। बैठक में BRICS सदस्य देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में साझा चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। बैठक के दौरान भारत ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Universal Health Coverage), सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना और दवाओं तक समान पहुंच को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया। भारत ने यह भी कहा कि भविष्य की वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना केवल अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझा प्रयासों से ही संभव है। बैठक के प्रमुख मुद्दे BRICS स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई, जिनमें शामिल हैं— भारत ने रखा डिजिटल हेल्थ मॉडल भारत ने बैठक में अपने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) और डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म से जुड़े अनुभव साझा किए। भारत ने बताया कि तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुलभ और प्रभावी बनाया जा सकता है। कई सदस्य देशों ने भारत के डिजिटल हेल्थ मॉडल में रुचि दिखाई। महामारी से मिले सबक पर चर्चा बैठक में कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी से मिले अनुभवों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सदस्य देशों ने भविष्य में किसी भी स्वास्थ्य आपदा से निपटने के लिए बेहतर समन्वय, सूचना साझा करने की व्यवस्था और संयुक्त अनुसंधान को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। भारत का संदेश भारत ने कहा कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा केवल किसी एक देश की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह सामूहिक प्रयास का विषय है। भारत ने विकासशील देशों के लिए सस्ती दवाओं, वैक्सीन उत्पादन और स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। निष्कर्ष BRICS स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक की मेजबानी के माध्यम से भारत ने वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी सक्रिय भूमिका को एक बार फिर मजबूत किया है। डिजिटल हेल्थ, महामारी तैयारी और स्वास्थ्य सहयोग पर भारत का जोर आने वाले समय में BRICS देशों के बीच साझेदारी को नई दिशा दे सकता है। Source: Ministry of Health & Family Welfare | BRICS | PIB | WHO जय राष्ट्र न्यूज़

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गुवाहाटी, 6 जुलाई। असम की राजधानी गुवाहाटी में आज से BRICS देशों की एंटी-ड्रग एजेंसियों की उच्चस्तरीय बैठक शुरू हो रही है। बैठक में भारत, ब्राज़ील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका तथा BRICS के नए सदस्य देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। मुख्य एजेंडा सिंथेटिक ड्रग्स की बढ़ती तस्करी पर रोक लगाने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने और सीमा पार अपराध से प्रभावी ढंग से निपटने का है। सिंथेटिक ड्रग्स पर विशेष चर्चा बैठक में सिंथेटिक मादक पदार्थों के उत्पादन, अवैध तस्करी और इनके वैश्विक नेटवर्क पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी अंतरराष्ट्रीय कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। खुफिया जानकारी साझा करने पर जोर बैठक के दौरान सदस्य देशों की एजेंसियां खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, संयुक्त अभियानों और आधुनिक जांच तकनीकों पर सहयोग बढ़ाने के उपायों पर विचार करेंगी। इससे अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क के खिलाफ समन्वित कार्रवाई को और मजबूत बनाने की उम्मीद है। सीमा पार अपराध से निपटने की रणनीति प्रतिनिधिमंडल सीमा पार मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध वित्तीय नेटवर्क और संगठित अपराध से जुड़े मामलों पर भी चर्चा करेंगे। डिजिटल तकनीक और आधुनिक निगरानी प्रणालियों के उपयोग पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। भारत की अहम भूमिका भारत इस बैठक की मेजबानी करते हुए क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि साझा रणनीति और बेहतर समन्वय से ड्रग तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई संभव होगी। विशेषज्ञों की राय सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार सिंथेटिक ड्रग्स का अवैध कारोबार लगातार नया स्वरूप ले रहा है। ऐसे में विभिन्न देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग, तकनीकी क्षमता और रियल-टाइम सूचना साझा करना इस चुनौती से निपटने के लिए अत्यंत आवश्यक है। आगे की राह बैठक के समापन पर संयुक्त सहयोग को मजबूत करने, क्षमता निर्माण, सूचना आदान-प्रदान और भविष्य की कार्ययोजना से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की संभावना है। इससे BRICS देशों के बीच मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ समन्वित कार्रवाई को नई दिशा मिल सकती है। स्रोत:भारत सरकार की संबंधित एजेंसियां, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) एवं BRICS बैठक से संबंधित आधिकारिक जानकारी। मूल रिपोर्ट:6 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक कार्यक्रम और विश्वसनीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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वाराणसी में BRICS देशों ने सांस्कृतिक विरासत संरक्षण पर बढ़ाया सहयोग

वाराणसी भारत की सांस्कृतिक राजधानी मानी जाने वाली वाराणसी में BRICS देशों के प्रतिनिधियों ने सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में सदस्य देशों ने ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण, डिजिटल दस्तावेजीकरण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और विरासत स्थलों की सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। बैठक में भारत सहित BRICS समूह के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। सांस्कृतिक विरासत संरक्षण पर विशेष जोर बैठक के दौरान प्रतिनिधियों ने कहा कि दुनिया भर में कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरें प्राकृतिक आपदाओं, शहरीकरण और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऐसे में इन धरोहरों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद आवश्यक हो गया है। विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर धरोहर स्थलों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने और संरक्षण प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर भी चर्चा की। डिजिटल तकनीक बनेगी संरक्षण का आधार बैठक में 3D स्कैनिंग, डिजिटल आर्काइव, GIS मैपिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित संरक्षण तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक की मदद से ऐतिहासिक स्मारकों और सांस्कृतिक स्थलों की सटीक जानकारी सुरक्षित रखी जा सकती है, जिससे भविष्य में संरक्षण कार्यों को बेहतर ढंग से संचालित किया जा सकेगा। वाराणसी क्यों है खास? वाराणसी दुनिया के सबसे प्राचीन जीवित शहरों में से एक माना जाता है। इसकी सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत भारत की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गंगा नदी के किनारे बसे इस शहर में अनेक प्राचीन मंदिर, घाट और सांस्कृतिक स्थल मौजूद हैं, जो देश-विदेश के लाखों पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। इसी वजह से BRICS बैठक के लिए वाराणसी को एक महत्वपूर्ण स्थल माना गया। सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मिलेगा बढ़ावा बैठक में सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रमों, शोध परियोजनाओं और संग्रहालय सहयोग को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान से विभिन्न देशों के लोगों के बीच आपसी समझ और सहयोग मजबूत होगा। इससे वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा मिल सकती है। पर्यटन क्षेत्र को होगा लाभ BRICS देशों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक सहयोग का सकारात्मक प्रभाव पर्यटन क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि विरासत स्थलों का संरक्षण बेहतर तरीके से किया जाए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका प्रचार किया जाए, तो पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो सकती है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा। भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूती विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय बैठकों से भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूती मिलती है। भारत लंबे समय से अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करता रहा है। वाराणसी में आयोजित यह बैठक भारत की सांस्कृतिक नेतृत्व क्षमता को भी दर्शाती है। निष्कर्ष वाराणसी में आयोजित BRICS देशों की बैठक सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। डिजिटल तकनीक, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से सदस्य देशों ने धरोहर संरक्षण को नई दिशा देने की प्रतिबद्धता जताई है। इससे न केवल ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि वैश्विक सांस्कृतिक सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। FAQs 1. BRICS क्या है? BRICS प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें कई सदस्य देश शामिल हैं। 2. बैठक कहाँ आयोजित हुई? यह बैठक उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में आयोजित की गई। 3. बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था? सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना। 4. किन तकनीकों पर चर्चा हुई? 3D स्कैनिंग, डिजिटल आर्काइव, GIS मैपिंग और AI आधारित संरक्षण तकनीकों पर। 5. इससे भारत को क्या लाभ होगा? सांस्कृतिक कूटनीति, पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूती मिलेगी।

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