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कनॉट प्लेस में प्रदर्शनकारियों से मारपीट का आरोप, IYC ने तस्वीरें साझा कर मांगी संदिग्धों की पहचान

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट के वीडियो सामने आए हैं। इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि युवाओं और महिलाओं को निशाना बनाया गया, जबकि मौके पर पुलिस की मौजूदगी थी। संगठन ने वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान से जुड़ी जानकारी मांगी है। (द टाइम्स ऑफ इंडिया) वीडियो में प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट के दृश्य मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सामने आए वीडियो में कुछ पुरुष प्रदर्शनकारियों को धक्का देते, थप्पड़ मारते और लात-घूंसे चलाते दिखाई दे रहे हैं। एक वीडियो में काली, फटी हुई टी-शर्ट पहने एक युवक को कई लोगों से घिरा हुआ देखा गया। वहीं, एक अन्य क्लिप में एक पुरुष और महिला के साथ कथित मारपीट के दृश्य सामने आए। इन वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। (द टाइम्स ऑफ इंडिया) महिला को जमीन पर गिराने का आरोप इंडियन यूथ कांग्रेस की ओर से साझा किए गए एक वीडियो में एक महिला को कथित तौर पर धक्का देकर जमीन पर गिराते और उसके साथ मारपीट करते हुए दिखाया गया है। IYC ने सवाल उठाया कि भारी पुलिस तैनाती के बावजूद ऐसी घटना कैसे हुई। हालांकि, घटना की पूरी परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। IYC ने तस्वीरें साझा कर मांगी पहचान इंडियन यूथ कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर कुछ संदिग्ध व्यक्तियों की तस्वीरें साझा करते हुए लोगों से उनकी पहचान के संबंध में जानकारी देने की अपील की। संगठन ने कथित हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की। (फ्री प्रेस जर्नल) दिल्ली पुलिस ने शुरू की जांच मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों और कथित पीड़ितों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने शिकायत मिलने पर आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही थी। (द टाइम्स ऑफ इंडिया) वायरल वीडियो से जुड़े मामले में चार लोग पकड़े गए फ्री प्रेस जर्नल की एक बाद की रिपोर्ट के अनुसार, वायरल वीडियो से जुड़े कथित हमले के मामले में दिल्ली पुलिस ने चार लोगों को पकड़ा था। पुलिस ने घटनास्थल को डीडीयू मार्ग के उस हिस्से से जोड़ा, जो कमला मार्केट पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आता है। शुरुआती रिपोर्टों में यह भी कहा गया था कि उस समय कथित पीड़ित या किसी संगठन की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। इसके बावजूद, वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। (फ्री प्रेस जर्नल) सुरक्षा के लिए 35 हजार से अधिक कर्मियों की तैनाती की रिपोर्ट 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस, अर्धसैनिक बलों और उत्तर प्रदेश तथा हरियाणा पुलिस सहित 35,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। ऐसे में कथित मारपीट के वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठाया गया कि सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद ऐसी घटनाएं कैसे हुईं। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को एहतियातन हिरासत में लिए जाने और जंतर-मंतर पर बड़ी सभा को रोकने की खबरें सामने आई थीं। अधिकारियों ने सुरक्षा प्रतिबंधों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उपाय बताया, जबकि विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। (रॉयटर्स) 12 अक्टूबर को भी दिल्ली में प्रदर्शन 12 अक्टूबर को इंडियन यूथ कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बाराखंभा रोड से मार्च निकाला। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, कनॉट प्लेस से मंडी हाउस जाने वाले मार्ग पर छात्र और राजनीतिक कार्यकर्ता बैठकर विरोध प्रदर्शन करते दिखाई दिए। (अमर उजाला) कथित मारपीट के मामले में जांच अहम IYC और कुछ प्रदर्शनकारियों ने इन घटनाओं को सुनियोजित हिंसा बताया है। हालांकि, इस व्यापक आरोप की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मारपीट से जुड़े वीडियो सामने आए और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। कुछ लोगों को पकड़े जाने की भी खबर है। घटना की वास्तविक परिस्थितियों, कथित पीड़ितों के बयानों और आरोपित व्यक्तियों की भूमिका के संबंध में जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। स्रोत: द टाइम्स ऑफ इंडिया, फ्री प्रेस जर्नल, रॉयटर्स, अमर उजाला जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रकाश राज का सरकार पर निशाना—“आखिर कब तक नदी को रोकोगे?” CJP आंदोलन के समर्थन में उठाई आवाज

नई दिल्ली: अभिनेता प्रकाश राज ने CJP आंदोलन के दौरान दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत और पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। 10 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में उन्होंने सवाल किया, “Fraand… how long will you stop a river?” यानी, “दोस्त, आखिर कब तक एक नदी को रोकोगे?” उनकी यह टिप्पणी विरोध प्रदर्शनों और उन्हें रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों के संदर्भ में सामने आई। (हिंदुस्तान) प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर जताई नाराजगी प्रकाश राज ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस की भारी तैनाती की आलोचना की। अपने वीडियो संदेश में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, पुलिस कार्रवाई और प्रतिबंधों के बावजूद विरोध की आवाज को रोकना आसान नहीं होगा। “आखिर कब तक नदी को रोकोगे?” प्रकाश राज ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के कैप्शन में लिखा, “Fraand… how long will you stop a river…” इस रूपक के जरिए उन्होंने आंदोलन को रोकने की कोशिशों पर सवाल उठाया। उनका संदेश इस विचार को व्यक्त करता है कि लगातार बढ़ते जनविरोध को केवल पुलिस कार्रवाई और प्रतिबंधों के जरिए दबाना मुश्किल हो सकता है। सरकार पर डरने का लगाया आरोप प्रकाश राज ने अपने वीडियो में सत्ता पक्ष पर डरने का आरोप भी लगाया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस, बैरिकेडिंग और हिरासत जैसी कार्रवाई का जिक्र किया। हालांकि, सरकार की मंशा को लेकर उनकी टिप्पणियां राजनीतिक आरोप हैं, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य। Bengaluru में भी CJP प्रदर्शन में हुए थे शामिल प्रकाश राज इससे पहले बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित CJP प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने SIR प्रक्रिया को समाप्त करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया था। (जनसत्ता) ध्रुव राठी और अभिजीत दिपके भी थे मौजूद बेंगलुरु में हुए प्रदर्शन में प्रकाश राज के साथ YouTuber ध्रुव राठी और CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके भी मौजूद थे। यह कार्यक्रम 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शन से पहले चलाए जा रहे CJP अभियान का हिस्सा था। (जनसत्ता) “पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा” दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के बाद प्रकाश राज ने एक अन्य वीडियो संदेश में कहा कि यदि लोगों को जंतर-मंतर पर अपनी आवाज उठाने से रोका जाएगा, तो “पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा।” उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार आखिर किसे बचाने की कोशिश कर रही है—चुनाव आयोग को या अपनी सत्ता को। यह बयान उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया। (जनसत्ता) कई शहरों तक फैला CJP आंदोलन CJP और उससे जुड़े समूहों के प्रदर्शन दिल्ली के अलावा मुंबई, पुणे और बेंगलुरु सहित कई शहरों में भी हुए। इन प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। 11 अक्टूबर को भी दिल्ली में चुनाव प्रमुख के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रहने की सूचना दी गई। (रॉयटर्स) दिल्ली में प्रदर्शन और मार्च की कोशिश 12 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन जारी रहे। विपक्षी दलों और छात्र संगठनों से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर कुछ मेट्रो स्टेशन बंद करने और यातायात पर प्रतिबंध लगाने की भी खबरें आईं। (रॉयटर्स) CJP ने दिल्ली पुलिस को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम CJP से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रंका ने दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय करने की मांग की है। संगठन ने 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि पुलिस की ओर से कोई तारीख तय नहीं की गई, तो वह दोबारा प्रदर्शन की घोषणा करेगा। (जनसत्ता) SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल CJP और विपक्षी दलों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने पक्षपात और मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों से इनकार किया है। आयोग के अनुसार, यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हट गया है, तो वह दोबारा पंजीकरण करा सकता है। (रॉयटर्स) प्रकाश राज की टिप्पणी राजनीतिक प्रतिक्रिया प्रकाश राज का “नदी को कब तक रोकोगे?” वाला बयान CJP आंदोलन और प्रदर्शन पर लगाई जा रही पाबंदियों के संदर्भ में उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया है। इसे उनके विचार और आंदोलन के समर्थन के रूप में देखा जाना चाहिए। स्रोत: हिंदुस्तान, रॉयटर्स, जनसत्ता जय राष्ट्र न्यूज़

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नेहा बोरा की हिरासत पर उठे सवाल, महिला प्रदर्शनकारियों से पुलिस के व्यवहार का वीडियो वायरल

नई दिल्ली | 12 अक्टूबर: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लेने के तरीके पर सवाल उठे हैं। दिल्ली में अलग-अलग स्थानों पर हुई पुलिस कार्रवाई के वीडियो सामने आने के बाद प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार और हिरासत की परिस्थितियों को लेकर बहस तेज हो गई है। नेहा बोरा और अन्य कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने और हिरासत के दौरान असुविधाजनक परिस्थितियों में रखने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कई पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को बस तक पहुंचाया 11 अक्टूबर को आरके आश्रम और मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों को एक साथ कई पुलिसकर्मियों ने पकड़कर बसों तक पहुंचाया। इन घटनाओं के दृश्य सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई के तरीके और प्रदर्शनकारियों को संभालने में इस्तेमाल किए गए बल की आवश्यकता को लेकर सवाल उठे। नेहा बोरा दोबारा हिरासत में ली गईं नेहा बोरा को 10 अक्टूबर को दिल्ली हाट के पास हुए मार्च के दौरान हिरासत में लिया गया था। अगले दिन विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें फिर से हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों की प्रमुख आवाजों में शामिल हैं। हिरासत की परिस्थितियों पर नेहा बोरा के आरोप 11 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने के बाद नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को पुलिस बसों में बेहद तंग परिस्थितियों में रखा गया था। उन्होंने दावा किया कि बस के भीतर लोगों के लिए सांस लेने तक की पर्याप्त जगह नहीं थी। ये आरोप नेहा बोरा की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन विशिष्ट दावों पर दिल्ली पुलिस का विस्तृत जवाब स्पष्ट नहीं है। महिला पुलिसकर्मियों की भूमिका पर भी सवाल सोशल मीडिया पर प्रसारित दृश्यों में महिला पुलिसकर्मियों को महिला प्रदर्शनकारियों को पकड़कर ले जाते देखा गया। कुछ कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया। वहीं, पुलिस का पक्ष है कि बिना अनुमति आयोजित सभाओं को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई। वायरल वीडियो के आधार पर किसी घटना की पूरी परिस्थितियों या बल प्रयोग की आवश्यकता के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है। पहले की हिरासत में भी प्रक्रिया पर विवाद 4 अक्टूबर को नेहा बोरा की एक अन्य हिरासत के दौरान AISA ने आरोप लगाया था कि उन्हें जिस वाहन में ले जाया गया, उसमें कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। संगठन ने इसे निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन बताया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उस आरोप को निराधार बताया था। इस प्रकार, घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग रहे हैं। फोन और बैग को लेकर भी सामने आए दावे AISA ने पहले की हिरासत के बाद आरोप लगाया था कि नेहा बोरा का फोन और बैग उन्हें वापस नहीं किया गया। दिल्ली पुलिस ने इस दावे से इनकार किया था। इस मामले में भी आरोप और पुलिस के जवाब को अलग-अलग देखना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर सामान को लेकर विवाद का स्वतंत्र निष्कर्ष स्थापित नहीं होता। महिला कंटेंट क्रिएटर ने भी लगाया था आरोप नेहा बोरा की पहले की हिरासत का वीडियो बना रही एक महिला कंटेंट क्रिएटर ने दिल्ली पुलिस के एक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) पर मारपीट और अनुचित तरीके से छूने का आरोप लगाया था। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने शिकायत दर्ज होने की पुष्टि की थी। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और मामले की अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस घटना ने प्रदर्शन के दौरान महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस के व्यवहार को लेकर चिंताएं बढ़ाईं। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बस को घेरा 10 अक्टूबर को नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने उस पुलिस बस को घेर लिया, जिसमें उन्हें ले जाया जा रहा था। प्रदर्शनकारी उनकी रिहाई की मांग करते हुए नारे लगाने लगे, जिससे इलाके में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी। पुलिस ने अनुमति नहीं मिलने का दिया हवाला दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी गई थी और प्रतिबंधित या संवेदनशील क्षेत्रों में भीड़ एकत्र होने से रोकना जरूरी था। अधिकारियों ने सुरक्षा तैनाती, बैरिकेडिंग और हिरासत की कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उपायों के रूप में बताया। ‘गलत नेहा’ को हिरासत में लेने का मामला 11 अक्टूबर को पुलिस कार्रवाई के दौरान पहचान को लेकर भ्रम की घटना भी सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार, आरके आश्रम इलाके में पुलिस ने पहले नेहा बोरा जैसी दिखने वाली दूसरी महिला को हिरासत में ले लिया। बाद में पता चला कि नेहा बोरा उस समय कनॉट प्लेस में प्रदर्शन कर रही थीं। उन्हें बाद में विजय चौक के पास हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। पुलिस की प्रदर्शन-प्रबंधन रणनीति पर बढ़ी निगरानी लगातार हिरासत, बसों में प्रदर्शनकारियों को रखे जाने की परिस्थितियों और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर उठे सवालों ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित किया है। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी प्रतिबंधों और बैरिकेडिंग के बावजूद एकत्र होने की कोशिश कर रहे थे, जिसके चलते एहतियाती कार्रवाई आवश्यक थी। निष्पक्ष जांच की मांग कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने सामने आए वीडियो तथा पुलिस के व्यवहार से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। मामले में निष्पक्ष निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए संबंधित वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और पुलिस का पक्ष महत्वपूर्ण होंगे। जब तक किसी आधिकारिक या स्वतंत्र जांच में निष्कर्ष सामने नहीं आते, हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग से जुड़े दावों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, द प्रिंट, द ट्रिब्यून, इंडिया टुडे जय राष्ट्र न्यूज़

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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में अभिनेता इमरान खान हिरासत में, मुंबई में 400 से अधिक प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई

मुंबई | 12 अक्टूबर: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के विरोध में 10 अक्टूबर को मुंबई में हुए प्रदर्शन के दौरान बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। उनके साथ उनकी पार्टनर लेखा वॉशिंगटन और अभिनेत्री जायन मैरी भी अगस्त क्रांति मैदान के बाहर प्रदर्शन में शामिल थीं। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी, जिसके बाद शहर के अलग-अलग हिस्सों में 400 से अधिक लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया गया। अगस्त क्रांति मैदान पहुंचे थे इमरान खान अभिनेता इमरान खान मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में CJP के समर्थन में आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे। यह प्रदर्शन दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन के समर्थन में आयोजित किया गया था। पुलिस ने अनुमति नहीं होने का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू किया। इस कार्रवाई के दौरान इमरान खान समेत कई अन्य लोग भी पुलिस की कार्रवाई की चपेट में आए। लेखा वॉशिंगटन और जायन मैरी भी हिरासत में इमरान खान के साथ लेखा वॉशिंगटन और जायन मैरी को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। रिपोर्टों के अनुसार, जायन मैरी ने बाद में पुलिस वैन के अंदर से एक वीडियो साझा किया, जिसमें हिरासत के दौरान की स्थिति दिखाई गई। मुंबई में 400 से अधिक प्रदर्शनकारी हिरासत में मुंबई में विभिन्न स्थानों पर हुई पुलिस कार्रवाई के दौरान 400 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक, अगस्त क्रांति मैदान से ही करीब 200 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि हुतात्मा चौक और अन्य स्थानों पर एकत्र हुए समूहों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। तुषार गांधी भी लिए गए हिरासत में महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी को भी 10 अक्टूबर को बांद्रा से हिरासत में लिया गया था। वह ‘हम भारत के लोग’ के माध्यम से लोगों से अगस्त क्रांति मैदान में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील कर रहे थे। पुलिस ने अनुमति नहीं मिलने का दिया हवाला मुंबई पुलिस के अनुसार, अगस्त क्रांति मैदान को निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं माना गया था और वहां प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं दी गई थी। अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अनधिकृत जमावड़े को रोकने के लिए एहतियाती कार्रवाई की बात कही। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग CEC का इस्तीफा प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा था। CJP और उसके समर्थकों ने SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और हेरफेर को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, ये आरोप विवादित हैं। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। रिहाई के बाद इमरान खान ने कहा ‘जय हिंद’ रिपोर्टों के अनुसार, कुछ घंटों की हिरासत के बाद इमरान खान, लेखा वॉशिंगटन और जायन मैरी को रिहा कर दिया गया। बाहर निकलने के बाद इमरान खान ने मीडिया के सामने संक्षेप में “जय हिंद” कहा और वहां से चले गए। जायन मैरी ने चोट लगने का दावा किया 12 अक्टूबर को जायन मैरी ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें साझा करते हुए दावा किया कि हिरासत के दौरान उन्हें चोटें आईं। यह उनका आरोप है। उपलब्ध रिपोर्टों में चोट लगने की परिस्थितियों पर पुलिस का विस्तृत जवाब स्पष्ट नहीं था। फिल्मी हस्तियों ने भी दी प्रतिक्रिया प्रदर्शनकारियों की हिरासत के बाद फिल्म जगत की कई हस्तियों ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। रिपोर्टों के अनुसार, विजय वर्मा, हुमा कुरैशी, सोनाक्षी सिन्हा और फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप समेत कई लोगों ने प्रदर्शन और असहमति जताने के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर पोस्ट साझा किए। मुंबई के कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई अगस्त क्रांति मैदान के अलावा शिवाजी पार्क समेत कई स्थानों पर अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य अनधिकृत जमावड़े को रोकना और यातायात तथा सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना था। दिल्ली से कई शहरों तक फैला आंदोलन 10 अक्टूबर का विरोध प्रदर्शन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। मुंबई के अलावा बेंगलुरु, चेन्नई, जयपुर और चंडीगढ़ समेत अन्य शहरों में भी प्रदर्शनों और हिरासत की खबरें सामने आईं। हिरासत में लिया जाना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं इमरान खान और अन्य प्रदर्शनकारियों को एहतियाती हिरासत में लिया गया था और बाद में रिहा कर दिया गया। किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया जाना अपने आप में किसी आपराधिक मामले में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, इंडिया टुडे, हिंदुस्तान टाइम्स, NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP Protest के चलते दिल्ली से जुड़ी 245 ट्रेनें रद्द, राजधानी-शताब्दी समेत कई प्रीमियम सेवाएं प्रभावित

नई दिल्ली: 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन और मध्य दिल्ली में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच भारतीय रेलवे ने दिल्ली से शुरू होने या दिल्ली में समाप्त होने वाली कुल 245 ट्रेनों को रद्द कर दिया। इनमें 75 मेल/एक्सप्रेस और 170 यात्री ट्रेनें शामिल हैं। रद्द की गई सेवाओं में राजधानी, शताब्दी, तेजस और हमसफर जैसी प्रीमियम ट्रेनें भी शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, रेलवे ने यह फैसला दिल्ली के रेलवे स्टेशनों के आसपास संभावित भारी यातायात जाम और यात्रियों की आवाजाही में आने वाली दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए लिया। इस कदम से दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुईं। 245 ट्रेनों की सेवाएं रद्द रेलवे के फैसले के तहत 10 अक्टूबर को कुल 245 ट्रेन सेवाएं रद्द की गईं। इनमें नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन और दिल्ली के अन्य प्रमुख स्टेशनों से चलने वाली या यहां पहुंचने वाली ट्रेनें शामिल हैं। बड़े पैमाने पर सेवाएं रद्द होने से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को भी वैकल्पिक इंतजाम करने पड़े। राजधानी, शताब्दी, तेजस और हमसफर भी प्रभावित ट्रेनों को रद्द करने का असर केवल सामान्य यात्री सेवाओं तक सीमित नहीं रहा। कई राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस सेवाओं के साथ तेजस और हमसफर एक्सप्रेस भी प्रभावित हुईं। इन प्रीमियम ट्रेनों के रद्द होने से विभिन्न शहरों से दिल्ली आने और राजधानी से दूसरे शहरों की ओर जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। 75 मेल/एक्सप्रेस और 170 यात्री ट्रेनें रद्द रिपोर्ट के मुताबिक, रद्द की गई 245 ट्रेनों में 75 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें तथा 170 यात्री ट्रेनें शामिल हैं। यह फैसला दिल्ली से जुड़े रेल परिचालन पर अस्थायी रूप से बड़े पैमाने पर असर डालने वाला कदम रहा। सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे तक की सेवाएं प्रभावित रेलवे की योजना के तहत 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच दिल्ली पहुंचने या दिल्ली से रवाना होने वाली कई ट्रेनें रद्द की गईं। इस अवधि में रेलवे स्टेशनों के आसपास भारी यातायात, भीड़ और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां पैदा होने की आशंका जताई गई थी। केरल एक्सप्रेस जैसी कुछ ट्रेनें चालू रहीं हालांकि, सभी ट्रेन सेवाएं बंद नहीं की गईं। रिपोर्ट के अनुसार, केरल एक्सप्रेस जैसी कुछ चुनिंदा ट्रेनें निर्धारित योजना के तहत परिचालन में रहीं। ऐसे में यात्रियों को सलाह दी गई कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की पुष्टि जरूर करें, क्योंकि अलग-अलग सेवाओं पर अलग-अलग फैसले लागू किए गए थे। दो ट्रेनें रीशेड्यूल, नौ सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित ट्रेनों को रद्द करने के अलावा रेलवे ने कुछ सेवाओं के समय और संचालन में भी बदलाव किया। रिपोर्ट के अनुसार, दो ट्रेनों को रीशेड्यूल किया गया, जबकि नौ सेवाओं को उनके निर्धारित गंतव्य से पहले समाप्त करने या शुरुआती स्टेशन में बदलाव के साथ चलाने का निर्णय लिया गया। इन बदलावों के कारण संबंधित यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना में संशोधन करना पड़ा। कई राज्यों से दिल्ली आने वाले यात्रियों पर असर ट्रेनों के रद्द होने से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों से दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों पर असर पड़ा। गुजरात के अहमदाबाद से दिल्ली आने वाली स्वर्ण जयंती राजधानी एक्सप्रेस भी प्रभावित सेवाओं में शामिल रही। रेलवे स्टेशनों के आसपास जाम की आशंका बनी वजह रिपोर्टों के मुताबिक, रेलवे ने ट्रेनों को रद्द करने के पीछे संभावित भारी सड़क यातायात और यात्रियों की आवाजाही में आने वाली दिक्कतों को प्रमुख कारण बताया। मध्य दिल्ली में बैरिकेडिंग, यातायात प्रतिबंध और बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती के चलते यात्रियों के लिए रेलवे स्टेशनों तक पहुंचना मुश्किल होने की आशंका थी। CJP ने ट्रेनें रद्द करने के फैसले पर उठाए सवाल CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बड़े पैमाने पर ट्रेनें रद्द किए जाने की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम से प्रदर्शन में शामिल होने के इच्छुक लोगों की भागीदारी सीमित हो सकती है। हालांकि, यह CJP की ओर से लगाया गया आरोप है। रेलवे के फैसले को लेकर सामने आई रिपोर्टों में परिचालन संबंधी परिस्थितियों और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं का उल्लेख किया गया है। सुप्रीम कोर्ट में भी उठा परिवहन प्रतिबंधों का मुद्दा दिल्ली में लगाए गए प्रतिबंधों और परिवहन व्यवस्था पर उनके असर का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने सुरक्षा उपायों में आनुपातिकता बनाए रखने और आम लोगों को होने वाली असुविधा कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मेट्रो और नमो भारत सेवाओं पर भी असर रेलवे के अलावा दिल्ली मेट्रो और नमो भारत सेवाओं पर भी प्रतिबंधों का असर पड़ा। रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली मेट्रो के कुछ स्टेशनों पर प्रवेश और निकास संबंधी पाबंदियां लगाई गईं। इसके साथ ही सराय काले खां और न्यू अशोक नगर स्थित नमो भारत स्टेशनों को भी 10 अक्टूबर को बंद रखने का फैसला किया गया। यात्रियों को ट्रेन का ताजा स्टेटस जांचने की सलाह ट्रेनों के रद्द होने, समय बदलने और कुछ सेवाओं के आंशिक रूप से संचालित होने के कारण यात्रियों को यात्रा से पहले अपनी ट्रेन का ताजा स्टेटस जांचने की सलाह दी गई है। यात्रियों को स्टेशन के लिए निकलने से पहले रेलवे की आधिकारिक जानकारी से अपनी ट्रेन की स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए, ताकि अंतिम समय में होने वाली परेशानी से बचा जा सके। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस / हिंदुस्तान टाइम्स / भारतीय रेलवे जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP Protest से पहले गृह मंत्रालय का अलर्ट, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय के निर्देश

नई दिल्ली: 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने आशंका जताई है कि इस प्रदर्शन के “गंभीर कानून-व्यवस्था संबंधी प्रभाव” हो सकते हैं। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों को दिल्ली पुलिस के साथ रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करने और किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए समन्वय मजबूत करने को कहा है। गृह मंत्रालय के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद CJP समर्थक अलग-अलग राज्यों से दिल्ली पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में संभावित भीड़, यातायात बाधित होने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। गृह सचिव ने राज्यों के पुलिस प्रमुखों को लिखा पत्र केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों को पत्र भेजकर CJP के प्रदर्शन से संबंधित खुफिया जानकारी तत्काल दिल्ली पुलिस के साथ साझा करने को कहा है। साथ ही, किसी भी संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या को रोकने के लिए आपसी समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने जताई कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका मंत्रालय ने 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन के सार्वजनिक व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई है। उपलब्ध खुफिया सूचनाओं का हवाला देते हुए कहा गया है कि बड़ी संख्या में समर्थक दिल्ली पहुंचने का प्रयास कर सकते हैं। इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होने, बिना अनुमति भीड़ जुटने और सार्वजनिक सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका जताई गई है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिल्ली पुलिस ने CJP को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, आयोजकों ने 7 अक्टूबर को प्रदर्शन के लिए अनुरोध किया था, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्तावित सभा से कम से कम 10 दिन पहले आवेदन देना आवश्यक बताया गया है। पुलिस ने पहले हुए प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर शर्तों और आश्वासनों का उल्लंघन किए जाने को भी अनुमति नहीं देने के कारणों में शामिल किया है। राज्यों को समर्थकों की आवाजाही पर नजर रखने के निर्देश गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से उन समूहों की आवाजाही पर नजर रखने को कहा है, जो प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना हो सकते हैं। अधिकारियों को आयोजकों, यात्रा योजनाओं, ठहरने की व्यवस्था और प्रदर्शन के लिए जुटाए जा रहे लोगों से संबंधित जानकारी दिल्ली पुलिस के साथ साझा करने के निर्देश दिए गए हैं। रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करने पर जोर मंत्रालय के निर्देशों में तत्काल खुफिया जानकारी साझा करना प्रमुखता से शामिल है। यदि किसी राज्य से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली के लिए रवाना होते हैं या प्रदर्शन से जुड़ी असामान्य गतिविधियां सामने आती हैं, तो इसकी जानकारी तुरंत दिल्ली पुलिस तक पहुंचाने को कहा गया है। इसका उद्देश्य संभावित भीड़ और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों के बारे में समय रहते जानकारी जुटाना और संबंधित एजेंसियों के बीच तालमेल बनाए रखना है। निवारक कार्रवाई करने के भी निर्देश गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत आवश्यक निवारक कदम उठाने को कहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसमें नोटिस जारी करना, गतिविधियों की निगरानी करना और परिस्थितियों के अनुसार अन्य कानूनी कार्रवाई करना शामिल हो सकता है। 4 अक्टूबर की बैठक में भी हुई थी चर्चा द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, 4 अक्टूबर को गृह मंत्रालय की समन्वय बैठक में भी CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन और समर्थकों की लामबंदी को लेकर चर्चा हुई थी। रिपोर्ट में राज्यों को नोटिस देने, संभावित हिरासत और संगठन की फंडिंग से जुड़े पहलुओं की जांच जैसे मुद्दों पर चर्चा किए जाने का उल्लेख किया गया है। दिल्ली पुलिस ने तैयार किया व्यापक सुरक्षा प्लान प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक योजना तैयार की है। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें कई स्थानों पर नाकेबंदी, हिरासत केंद्रों की व्यवस्था और विभिन्न जिलों के बीच समन्वय बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं। नई दिल्ली जिले में बैरिकेडिंग और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है, ताकि किसी संभावित भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखी जा सके। नई दिल्ली में BNSS की धारा 163 लागू नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू किए जाने की भी रिपोर्ट है। इस प्रावधान के तहत सक्षम अधिकारी सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए परिस्थितियों के अनुसार सभाओं, जुलूसों और लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा सकते हैं। CJP की समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील दूसरी ओर, CJP ने अपने समर्थकों के लिए एडवाइजरी जारी कर शांतिपूर्ण व्यवहार करने की अपील की है। संगठन ने बैरिकेड तोड़ने, प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करने, हिंसा करने और सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से बचने को कहा है। अभिजीत दीपके समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया 10 अक्टूबर को CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका समेत कई नेताओं को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन को रोकने के लिए राजधानी में व्यापक सुरक्षा तैनाती की गई और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। सुरक्षा और विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर बहस गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस का पक्ष है कि सुरक्षा संबंधी कदम सार्वजनिक व्यवस्था, यातायात और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे हैं। वहीं, CJP और उसके समर्थक इन प्रतिबंधों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार पर अत्यधिक रोक के रूप में देख रहे हैं। यह मामला अब सार्वजनिक सुरक्षा और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के बीच संतुलन को लेकर बहस का विषय बन गया है। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(b) नागरिकों को शांतिपूर्वक और बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार देता है, हालांकि सार्वजनिक व्यवस्था सहित संवैधानिक आधारों पर इस अधिकार पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस / हिंदुस्तान टाइम्स / रॉयटर्स जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP प्रदर्शन से पहले दिल्ली में बड़ा सुरक्षा अभियान, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका हिरासत में

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के विरोध में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले दिल्ली में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए। इस दौरान CJP के प्रमुख नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। वहीं, मध्य दिल्ली के कई इलाकों में मेट्रो सेवाओं तक पहुंच, यातायात और मोबाइल इंटरनेट पर भी प्रतिबंध लगाए गए। दिल्ली पहुंचते ही हिरासत में लिए गए CJP नेता रिपोर्टों के मुताबिक, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान उतरने के बाद हिरासत में लिया गया। CJP नेताओं ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आए थे। इस कार्रवाई के बाद प्रस्तावित प्रदर्शन और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई। कई अन्य प्रदर्शनकारी भी हिरासत में दिल्ली पुलिस ने CJP समर्थकों के अलावा अन्य प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिया। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में अनधिकृत जमावड़े को रोकने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई थी। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से किया इनकार दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के लिए आवेदन निर्धारित 10 दिन की समयसीमा के बजाय केवल तीन दिन पहले दिया गया था। अधिकारियों ने पिछले प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़ी कथित समस्याओं का भी हवाला दिया। इसके बाद प्रदर्शन की अनुमति और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठे। 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद सुरक्षा संबंधी निर्देशों के बाद दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने की घोषणा की थी। यह प्रतिबंध 9 अक्टूबर रात 9 बजे से 10 अक्टूबर शाम 6 बजे तक लागू रखने की जानकारी दी गई थी। हालांकि, प्रभावित स्टेशनों में से अधिकांश पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रहने की बात कही गई। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य संवेदनशील इलाकों में लोगों की आवाजाही नियंत्रित करना बताया गया। पहले 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध की योजना शुरुआत में 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाने की योजना सामने आई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में इस व्यवस्था को चुनौती दी गई और व्यापक परिवहन प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई गई। रिपोर्टों के अनुसार, बाद में प्रतिबंधित स्टेशनों की संख्या घटाकर 45 कर दी गई। इस घटनाक्रम ने सुरक्षा व्यवस्था और आम यात्रियों की सुविधा के बीच संतुलन का सवाल खड़ा किया। मध्य दिल्ली में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित प्रदर्शन से पहले जनपथ-कर्तव्य पथ चौराहे के आसपास करीब चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 24 घंटे के लिए निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। यह प्रतिबंध 9 अक्टूबर रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक लागू रखने की घोषणा की गई थी। अधिकारियों ने इस कदम को सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के संदर्भ में बताया। मध्य दिल्ली में यातायात पर भी प्रतिबंध दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने मध्य दिल्ली के करीब 30 स्थानों पर यातायात डायवर्जन और आवाजाही संबंधी प्रतिबंधों की व्यवस्था की थी। धौला कुआं से मंडी हाउस तक कई प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त जांच और बैरिकेडिंग की गई। यात्रियों को संभावित जाम और असुविधा को देखते हुए गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह भी दी गई थी। हजारों सुरक्षाकर्मी किए गए तैनात जंतर-मंतर, संसद मार्ग और निर्वाचन आयोग के मुख्यालय के आसपास पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों की व्यापक तैनाती की गई। मीडिया रिपोर्टों में सुरक्षा बलों की संख्या करीब 25,000 तक बताई गई। नई दिल्ली जिले को अलग-अलग सुरक्षा क्षेत्रों में बांटकर निगरानी और आवाजाही नियंत्रण की व्यवस्था की गई थी। BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध संवेदनशील इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू किए जाने की भी खबरें सामने आईं। इस प्रावधान के तहत निर्धारित परिस्थितियों में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए जा सकते हैं। इन आदेशों का उल्लंघन करने पर लागू कानून के अनुसार कार्रवाई हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक प्रतिबंधों पर जताई चिंता सुप्रीम कोर्ट में मेट्रो और रेल सेवाओं पर व्यापक प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान चिंता जताई गई। अदालत ने सुरक्षा संबंधी जरूरतों और आम लोगों की आवाजाही के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। सुनवाई में यह सवाल भी उठा कि संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए परिवहन सेवाओं को बड़े पैमाने पर प्रभावित करना कितना आवश्यक और आनुपातिक है। CJP की प्रमुख मांग क्या है? CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर विरोध कर रही है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिससे चुनावी निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। वहीं, निर्वाचन आयोग और भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में मतदाता सूची में बदलाव और उसकी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। अभिजीत दीपके ने आंदोलन जारी रखने की बात कही रिपोर्टों के मुताबिक, हिरासत से पहले अभिजीत दीपके ने कहा था कि प्रतिबंधों और गिरफ्तारियों के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने की अपील भी की थी। CJP के नेताओं का रुख है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को सार्वजनिक रूप से उठाया जाना चाहिए। सुरक्षा कार्रवाई पर नागरिक अधिकारों की बहस तेज CJP प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए जाने, मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध, मोबाइल इंटरनेट सेवाओं के निलंबन और व्यापक सुरक्षा तैनाती ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन पर बहस तेज कर दी है। प्रशासन इन कदमों को सुरक्षा संबंधी एहतियाती कार्रवाई के रूप में देख रहा है, जबकि CJP और उसके समर्थक इन्हें लोकतांत्रिक असहमति पर जरूरत से ज्यादा प्रतिबंध बता रहे हैं। इस विवाद में प्रतिबंधों की आवश्यकता, उनका दायरा और आम…

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जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले सुरक्षा व्यवस्था पर प्रशांत भूषण के सवाल, बोले—पूरी दिल्ली को बंद नहीं किया जा सकता

नई दिल्ली: 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा प्रतिबंधों को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान उन्होंने अन्य वकीलों के साथ मेट्रो स्टेशनों को बंद करने, ट्रेनों को रद्द करने और शहर में व्यापक बैरिकेडिंग किए जाने पर आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के आधार पर पूरे शहर की आवाजाही को प्रभावित करना उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में उठा दिल्ली की आवाजाही पर प्रतिबंधों का मुद्दा 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिकाओं का मुद्दा उठाया गया। कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और प्रशांत भूषण समेत कई वकीलों ने मेट्रो स्टेशनों को बंद करने, ट्रेन सेवाओं को प्रभावित करने और व्यापक बैरिकेडिंग को लेकर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर लगाए गए प्रतिबंधों का असर केवल प्रदर्शनकारियों पर नहीं, बल्कि आम नागरिकों पर भी पड़ सकता है। प्रशांत भूषण ने पूछा—पूरी दिल्ली को बंद क्यों किया जा रहा है? प्रशांत भूषण ने प्रतिबंधों की व्यापकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए लक्षित और सीमित कदम उठाए जाने चाहिए। उनका तर्क था कि किसी एक स्थान पर प्रदर्शन की आशंका के कारण पूरे शहर की आवाजाही प्रभावित करना जरूरत से ज्यादा सख्त कदम हो सकता है। उन्होंने सुरक्षा संबंधी चिंताओं और नागरिकों की सामान्य आवाजाही के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध को लेकर चिंता सुनवाई के दौरान बताया गया कि अधिकारियों ने 57 दिल्ली मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध या बंदी की योजना बनाई थी। इस व्यवस्था को लेकर याचिकाकर्ताओं ने चिंता जताई। उनका कहना था कि ऐसे प्रतिबंधों से छात्रों, कर्मचारियों, कारोबारियों और रोजाना मेट्रो से यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी हो सकती है। याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या इतने व्यापक प्रतिबंध जरूरी थे। दिल्ली आने वाली ट्रेनों पर भी उठे सवाल प्रदर्शन से पहले कुछ दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने या उनके समय में बदलाव किए जाने का मुद्दा भी अदालत के सामने रखा गया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि किसी प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए अंतरशहरी परिवहन सेवाओं को बड़े स्तर पर प्रभावित करने से आम यात्रियों को अनावश्यक परेशानी हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंधों की व्यापकता पर जताई चिंता सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आवाजाही पर व्यापक प्रतिबंध लगाने को लेकर चिंता जताई। अदालत की टिप्पणियों में आवाजाही पूरी तरह रोकने और उसे नियंत्रित करने के बीच अंतर पर जोर दिया गया। अदालत ने अधिकारियों को ऐसा समाधान तलाशने की आवश्यकता बताई, जिससे सुरक्षा व्यवस्था भी बनी रहे और आम जनता को कम से कम असुविधा हो। सुरक्षा के नाम पर अत्यधिक प्रतिबंधों पर सवाल सुनवाई के दौरान प्रतिबंधों की आनुपातिकता का मुद्दा प्रमुखता से उठा। अदालत ने संकेत दिया कि किसी संभावित गड़बड़ी से निपटने के लिए उठाए जाने वाले कदम परिस्थिति के अनुरूप होने चाहिए। मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय नियंत्रित आवाजाही की संभावनाओं पर विचार करने का मुद्दा भी सामने आया। प्रदर्शन के मद्देनजर 20 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मध्य दिल्ली समेत कई इलाकों में 20 हजार से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए। कुछ रिपोर्टों में तैनाती की संख्या लगभग 23 हजार से 25 हजार तक बताई गई। प्रशासन का उद्देश्य संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटना और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बनाए रखना था। सैकड़ों बसें और बॉडी कैमरे भी सुरक्षा योजना में शामिल रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने संभावित हिरासत की स्थिति से निपटने के लिए सैकड़ों बसों की व्यवस्था की थी। पुलिसकर्मियों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरों के इस्तेमाल की योजना भी सुरक्षा प्रबंधों का हिस्सा थी। इसके अलावा, शहर के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में तैनाती की गई। प्रशांत भूषण पहले भी प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए थे 3 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान प्रशांत भूषण भी हिरासत में लिए गए लोगों में शामिल थे। रिपोर्टों के अनुसार, उनके साथ योगेंद्र यादव, नेहा बोरा और अन्य प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिया गया था। इस घटनाक्रम के बाद प्रदर्शनकारियों की आवाजाही और पुलिस की कार्रवाई को लेकर बहस तेज हुई थी। शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार और कानून-व्यवस्था इस मामले में प्रमुख सवाल शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन का है। एक ओर प्रशासन को संभावित गड़बड़ी रोकने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभानी होती है। दूसरी ओर, शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण अधिकार हैं। ऐसे मामलों में प्रतिबंधों की आवश्यकता, उनका दायरा और आम नागरिकों पर पड़ने वाले प्रभाव पर विचार करना जरूरी होता है। व्यापक प्रतिबंधों के बजाय नियंत्रित आवाजाही पर जोर सुप्रीम कोर्ट में उठाए गए मुद्दों ने इस बहस को केंद्र में ला दिया कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान आवश्यक सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह बाधित किए बिना कैसे किया जा सकता है। प्रशांत भूषण और अन्य वकीलों ने प्रतिबंधों की व्यापकता पर सवाल उठाए, जबकि अधिकारियों की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के उपाय के रूप में देखा गया। नागरिक स्वतंत्रता को लेकर बढ़ी बहस जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले लगाए गए सुरक्षा प्रतिबंधों ने नागरिक स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण विरोध और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन पर बहस तेज कर दी है। प्रशांत भूषण का मुख्य सवाल यही रहा कि किसी निर्धारित स्थान पर होने वाले प्रदर्शन की आशंका के कारण पूरे शहर की आवाजाही को किस हद तक प्रभावित किया जाना चाहिए। इस मामले ने सुरक्षा उपायों की आवश्यकता के साथ-साथ उनके दायरे और आम लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव की समीक्षा को भी महत्वपूर्ण बना दिया है। स्रोत: The Indian Express / Supreme Court proceedings /…

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अभिजीत दीपके का सत्ता को संदेश—“सत्ता आपकी, लेकिन सड़क हमारी”; बोले, लोकतंत्र वापस हासिल करेंगे

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2026: जंतर-मंतर पर प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता भले ही सरकार के पास हो, लेकिन सड़कें भारत के लोगों की हैं। उन्होंने कहा कि जनता लोकतांत्रिक अधिकारों और संस्थाओं की जवाबदेही के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी। यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है और राजधानी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। “सत्ता आपकी, लेकिन सड़क हमारी” अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकार के पास सत्ता और संस्थागत ताकत हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकार भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने अपने आंदोलन को लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही और मतदान के अधिकारों से जुड़ा बताया। उनका कहना है कि जनता की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए। “लोकतंत्र वापस हासिल करेंगे” दीपके ने कहा कि CJP का आंदोलन किसी एक दिन या स्थान तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यह लोकतंत्र की रक्षा और नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोका गया, तो वे उस स्थान पर भी अपना विरोध दर्ज कराएंगे जहां उन्हें रोका जाएगा। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को वापस लेने की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। संगठन ने मतदाता सूची के संशोधन के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया को मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने की कवायद बताता रहा है। दिल्ली पुलिस ने नहीं दी अनुमति दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति के लिए निर्धारित प्रक्रिया और समयसीमा का पालन नहीं किया गया। इसी बीच, नई दिल्ली और मध्य दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई तथा आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए गए। मेट्रो स्टेशनों और परिवहन पर असर प्रदर्शन को देखते हुए मध्य दिल्ली में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए। कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद किए जाने की सूचना भी सामने आई। CJP ने इन प्रतिबंधों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से लोगों को रोकने की कोशिश बताया, जबकि प्रशासन की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने को प्राथमिकता दी गई। दीपके बोले—“गिरफ्तार करना है तो करिए” पुलिस कार्रवाई की आशंका के बीच दीपके ने कहा था कि वह गिरफ्तारी से नहीं डरते। उन्होंने समर्थकों से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहने की अपील की। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध और अपनी मांगें उठाना नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है। दिल्ली पहुंचते ही हिरासत में लिए गए CJP नेता 10 अक्टूबर को अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद कथित तौर पर विमान के अंदर ही हिरासत में ले लिया गया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया, जिसमें CJP के नेता पुलिस कार्रवाई का विरोध करते और हिरासत में लिए जाने की बात कहते दिखाई दिए। इस घटनाक्रम ने प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर जारी तनाव को और बढ़ा दिया। हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के आसपास पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा उपायों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। दूसरी ओर, प्रदर्शन आयोजकों ने इन कदमों पर सवाल उठाते हुए इन्हें विरोध प्रदर्शन को रोकने की कोशिश बताया है। SIR को लेकर CJP के आरोप CJP का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। संगठन ने इसे चुनावी पारदर्शिता और मतदान के अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है। हालांकि, इन आरोपों और उनसे जुड़े आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया का बचाव किया है। आंदोलन जारी रखने का ऐलान हिरासत और प्रतिबंधों के बावजूद CJP ने अपना आंदोलन जारी रखने की बात कही है। दीपके का कहना है कि यदि उन्हें जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोका जाता है, तो भी संगठन लोकतांत्रिक अधिकारों और अपनी मांगों को लेकर विरोध जारी रखने के अन्य तरीके तलाशेगा। लोकतांत्रिक अधिकार बनाम कानून-व्यवस्था की बहस इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और प्रशासन की कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच बहस को फिर से सामने ला दिया है। एक ओर CJP अपने प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई बता रही है, वहीं पुलिस सुरक्षा व्यवस्था और अनुमति संबंधी नियमों का हवाला दे रही है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन और प्रदर्शन आयोजक इन परिस्थितियों से कैसे निपटते हैं। स्रोत: Reuters, The Indian Express, Hindustan, Jansatta, NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर पर धारा 163 लागू, अब 10 अक्टूबर के प्रदर्शन का क्या होगा? पुलिस ने साफ किया रुख

नई दिल्ली: 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर CJP, AISA और अन्य छात्र संगठनों के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 लागू है। इसके तहत बिना पूर्व लिखित अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने, प्रदर्शन करने, धरना देने और पिकेटिंग पर रोक लगाई जा सकती है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी गई है। ऐसे में बिना अनुमति सभा आयोजित करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। 10 अक्टूबर का प्रदर्शन अभी आधिकारिक रूप से मंजूर नहीं CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने Parliament Street Police Station में प्रस्तावित प्रदर्शन की औपचारिक सूचना दी थी। हालांकि, उन्होंने कहा था कि उन्होंने अनुमति नहीं मांगी, बल्कि केवल पुलिस को सूचना दी है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि धारा 163 लागू होने के कारण केवल सूचना देना पर्याप्त नहीं है और प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति जरूरी है। Section 163 में क्या-क्या प्रतिबंधित है? धारा 163 के तहत जारी आदेश के अनुसार, बिना लिखित अनुमति निम्न गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है: इन प्रतिबंधों का सटीक दायरा संबंधित आदेश की शर्तों पर निर्भर करता है। प्रदर्शन होने पर पुलिस रोक सकती है जमावड़ा अगर आयोजक 10 अक्टूबर को अनुमति के बिना जंतर-मंतर पहुंचते हैं, तो दिल्ली पुलिस उन्हें वहां एकत्र होने से रोक सकती है। स्थिति के अनुसार पुलिस बैरिकेडिंग, लोगों को हिरासत में लेने और भीड़ को तितर-बितर करने जैसी कार्रवाई कर सकती है। इससे पहले भी प्रदर्शनों के दौरान प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन को लेकर FIR दर्ज होने की खबरें सामने आई हैं। 40 Metro stations तक बंद करने की तैयारी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान जरूरत पड़ने पर 40 मेट्रो स्टेशनों तक अस्थायी रूप से बंद करने पर विचार किया जा सकता है। इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में ऐप आधारित कैब की आवाजाही पर प्रतिबंध, ट्रैफिक डायवर्जन और भीड़ नियंत्रण के उपाय भी लागू किए जा सकते हैं। इन व्यवस्थाओं का वास्तविक क्रियान्वयन प्रशासन के फैसलों पर निर्भर करेगा। 10 detention centres तैयार संभावित बड़े जमावड़े और हिरासत की स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस ने 10 डिटेंशन सेंटर तैयार किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्रीय सुरक्षा बलों को भी तैनाती के लिए तैयार रखा गया है। पुलिस को आशंका है कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी दिल्ली पहुंच सकते हैं। दिल्ली के प्रवेश मार्गों पर निगरानी पुलिस उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान से दिल्ली आने वाले मार्गों पर भी नजर रख रही है। बड़े समूहों की आवाजाही को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों में बैरिकेडिंग और जांच बढ़ाई जा सकती है। CJP का दावा—प्रदर्शन होकर रहेगा CJP ने कहा है कि वह 10 अक्टूबर के कार्यक्रम को वापस नहीं ले रहा है। अभिजीत दिपके ने दावा किया है कि हिरासत और पुलिस कार्रवाई के बावजूद समर्थक दिल्ली पहुंचेंगे। संगठन ने देशभर में बड़ी संख्या में समर्थकों को हिरासत में लिए जाने का भी दावा किया है, हालांकि इन सभी आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नेहा बोरा और सौरव दास ने क्या कहा? नेहा बोरा और सौरव दास ने कहा है कि आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR पर रोक और चुनावी सुधारों की मांग को लेकर जारी रहेगा। आयोजकों का कहना है कि जंतर-मंतर निर्धारित प्रदर्शन स्थलों में शामिल है और लोगों को शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है। हालांकि, प्रदर्शन के लिए लागू प्रशासनिक आदेशों और अनुमति संबंधी शर्तों का पालन करना भी जरूरी है। मामला Delhi High Court भी पहुंचा Indian Youth Congress ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन संबंधी प्रतिबंधों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है। इस मामले में होने वाली सुनवाई और आदेश प्रदर्शन की अनुमति से जुड़े घटनाक्रम को प्रभावित कर सकते हैं। अगर Court या Police से अनुमति मिली तो? अगर 10 अक्टूबर से पहले अदालत या दिल्ली पुलिस प्रदर्शन को सीमित अनुमति देती है, तो कार्यक्रम निर्धारित शर्तों के साथ आयोजित किया जा सकता है। इन शर्तों में भीड़ की सीमा, निश्चित समय, निर्धारित स्थान और मार्च निकालने पर रोक जैसी व्यवस्थाएं शामिल हो सकती हैं। हालांकि, वास्तविक शर्तें संबंधित आदेश में स्पष्ट होंगी। अनुमति नहीं मिली तो क्या होगा? अगर प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं मिलती और कोई न्यायिक राहत भी नहीं मिलती, तो आयोजकों के लिए जंतर-मंतर पर सभा करना कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसी स्थिति में पुलिस लोगों को निर्धारित स्थल तक पहुंचने से रोक सकती है, उन्हें हिरासत में ले सकती है और लागू आदेशों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई कर सकती है। 10 अक्टूबर पर टिकी नजर फिलहाल स्थिति यह है कि आयोजकों ने प्रदर्शन वापस लेने की घोषणा नहीं की है, लेकिन पुलिस की ओर से अनुमति नहीं मिलने की बात सामने आई है। इसलिए 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर क्या स्थिति बनेगी, यह पुलिस की कार्रवाई, अदालत के संभावित आदेश और आयोजकों के अगले कदम पर निर्भर करेगा। Source – The Indian Express, The New Indian Express, Reuters, The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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