नई दिल्ली | 12 अक्टूबर: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लेने के तरीके पर सवाल उठे हैं। दिल्ली में अलग-अलग स्थानों पर हुई पुलिस कार्रवाई के वीडियो सामने आने के बाद प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार और हिरासत की परिस्थितियों को लेकर बहस तेज हो गई है। नेहा बोरा और अन्य कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने और हिरासत के दौरान असुविधाजनक परिस्थितियों में रखने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कई पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को बस तक पहुंचाया
11 अक्टूबर को आरके आश्रम और मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों को एक साथ कई पुलिसकर्मियों ने पकड़कर बसों तक पहुंचाया।
इन घटनाओं के दृश्य सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई के तरीके और प्रदर्शनकारियों को संभालने में इस्तेमाल किए गए बल की आवश्यकता को लेकर सवाल उठे।
नेहा बोरा दोबारा हिरासत में ली गईं
नेहा बोरा को 10 अक्टूबर को दिल्ली हाट के पास हुए मार्च के दौरान हिरासत में लिया गया था। अगले दिन विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें फिर से हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई।
वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों की प्रमुख आवाजों में शामिल हैं।
हिरासत की परिस्थितियों पर नेहा बोरा के आरोप
11 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने के बाद नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को पुलिस बसों में बेहद तंग परिस्थितियों में रखा गया था। उन्होंने दावा किया कि बस के भीतर लोगों के लिए सांस लेने तक की पर्याप्त जगह नहीं थी।
ये आरोप नेहा बोरा की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन विशिष्ट दावों पर दिल्ली पुलिस का विस्तृत जवाब स्पष्ट नहीं है।
महिला पुलिसकर्मियों की भूमिका पर भी सवाल
सोशल मीडिया पर प्रसारित दृश्यों में महिला पुलिसकर्मियों को महिला प्रदर्शनकारियों को पकड़कर ले जाते देखा गया। कुछ कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया।
वहीं, पुलिस का पक्ष है कि बिना अनुमति आयोजित सभाओं को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई। वायरल वीडियो के आधार पर किसी घटना की पूरी परिस्थितियों या बल प्रयोग की आवश्यकता के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है।
पहले की हिरासत में भी प्रक्रिया पर विवाद
4 अक्टूबर को नेहा बोरा की एक अन्य हिरासत के दौरान AISA ने आरोप लगाया था कि उन्हें जिस वाहन में ले जाया गया, उसमें कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। संगठन ने इसे निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन बताया था।
हालांकि, दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उस आरोप को निराधार बताया था। इस प्रकार, घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग रहे हैं।
फोन और बैग को लेकर भी सामने आए दावे
AISA ने पहले की हिरासत के बाद आरोप लगाया था कि नेहा बोरा का फोन और बैग उन्हें वापस नहीं किया गया। दिल्ली पुलिस ने इस दावे से इनकार किया था।
इस मामले में भी आरोप और पुलिस के जवाब को अलग-अलग देखना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर सामान को लेकर विवाद का स्वतंत्र निष्कर्ष स्थापित नहीं होता।
महिला कंटेंट क्रिएटर ने भी लगाया था आरोप
नेहा बोरा की पहले की हिरासत का वीडियो बना रही एक महिला कंटेंट क्रिएटर ने दिल्ली पुलिस के एक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) पर मारपीट और अनुचित तरीके से छूने का आरोप लगाया था।
रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने शिकायत दर्ज होने की पुष्टि की थी। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और मामले की अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस घटना ने प्रदर्शन के दौरान महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस के व्यवहार को लेकर चिंताएं बढ़ाईं।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बस को घेरा
10 अक्टूबर को नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने उस पुलिस बस को घेर लिया, जिसमें उन्हें ले जाया जा रहा था। प्रदर्शनकारी उनकी रिहाई की मांग करते हुए नारे लगाने लगे, जिससे इलाके में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी।
पुलिस ने अनुमति नहीं मिलने का दिया हवाला
दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी गई थी और प्रतिबंधित या संवेदनशील क्षेत्रों में भीड़ एकत्र होने से रोकना जरूरी था। अधिकारियों ने सुरक्षा तैनाती, बैरिकेडिंग और हिरासत की कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उपायों के रूप में बताया।
‘गलत नेहा’ को हिरासत में लेने का मामला
11 अक्टूबर को पुलिस कार्रवाई के दौरान पहचान को लेकर भ्रम की घटना भी सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार, आरके आश्रम इलाके में पुलिस ने पहले नेहा बोरा जैसी दिखने वाली दूसरी महिला को हिरासत में ले लिया।
बाद में पता चला कि नेहा बोरा उस समय कनॉट प्लेस में प्रदर्शन कर रही थीं। उन्हें बाद में विजय चौक के पास हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई।
पुलिस की प्रदर्शन-प्रबंधन रणनीति पर बढ़ी निगरानी
लगातार हिरासत, बसों में प्रदर्शनकारियों को रखे जाने की परिस्थितियों और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर उठे सवालों ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित किया है।
दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी प्रतिबंधों और बैरिकेडिंग के बावजूद एकत्र होने की कोशिश कर रहे थे, जिसके चलते एहतियाती कार्रवाई आवश्यक थी।
निष्पक्ष जांच की मांग
कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने सामने आए वीडियो तथा पुलिस के व्यवहार से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। मामले में निष्पक्ष निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए संबंधित वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और पुलिस का पक्ष महत्वपूर्ण होंगे।
जब तक किसी आधिकारिक या स्वतंत्र जांच में निष्कर्ष सामने नहीं आते, हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग से जुड़े दावों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, द प्रिंट, द ट्रिब्यून, इंडिया टुडे
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