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रुपये पर फिर दबाव, डॉलर के मुकाबले 96 के करीब पहुंचने की आशंका; कच्चे तेल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का असर

मुंबई: भारतीय रुपया एक बार फिर दबाव में है और 1 अक्टूबर 2026 के कारोबार में डॉलर के मुकाबले 95.96 से 95.98 के आसपास खुलने का अनुमान जताया गया। एक दिन पहले रुपया 95.83 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। ऊंची कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेजी और मजबूत डॉलर रुपये पर दबाव बढ़ा रहे हैं। बाजार की नजर इस बात पर भी है कि Reserve Bank of India यानी RBI 96 के स्तर के आसपास कितनी मजबूती से हस्तक्षेप करता है। 96 के स्तर के करीब पहुंच सकता है रुपया फॉरेक्स बाजार के अनुमान के अनुसार गुरुवार को रुपया 95.96 से 95.98 प्रति डॉलर के दायरे में खुल सकता है। बुधवार को भारतीय मुद्रा ने कुछ सुधार दिखाते हुए 95.83 पर कारोबार बंद किया था, लेकिन वैश्विक संकेत फिर इसके खिलाफ जाते दिखाई दे रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतें बनी सबसे बड़ी चिंता भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर डॉलर की मांग और रुपये पर पड़ता है। Brent crude में बुधवार को करीब 2 फीसदी की तेजी आई, जबकि सितंबर में तेल की कीमतों में लगभग 14 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऊंचा तेल आयात बिल रुपये पर अतिरिक्त दबाव पैदा करता है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल अमेरिका की 10 साल की Treasury yield 2007 के बाद के उच्च स्तरों के करीब पहुंच गई है। ऊंची अमेरिकी यील्ड से डॉलर आधारित assets निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं, जिससे emerging markets की currencies पर दबाव बढ़ता है। डॉलर इंडेक्स भी तीन महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। Fed से राहत की उम्मीद भी रुपये को नहीं संभाल पा रही अमेरिकी Federal Reserve द्वारा अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना पिछले एक सप्ताह में घटी है। इसके बावजूद रुपये को ज्यादा राहत नहीं मिली क्योंकि बाजार का फोकस फिलहाल तेल की कीमतों और लंबी अवधि की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर अधिक है। 29 सितंबर को 96 के पार गया था रुपया भारतीय मुद्रा हाल ही में 96 प्रति डॉलर का स्तर पार कर चुकी है। 29 सितंबर को रुपया कारोबार के दौरान 96.1450 प्रति डॉलर तक गिरा था, जो लगभग दो महीने का निचला स्तर था। बाद में RBI के संभावित हस्तक्षेप से नुकसान कुछ कम हुआ। RBI के हस्तक्षेप पर बाजार की नजर मार्केट डीलर्स के अनुसार सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर की बिक्री को RBI के संभावित हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है। हाल के सत्रों में 96 के आसपास रुपये की गिरावट सीमित होती दिखाई दी है, जिससे बाजार में धारणा बनी है कि केंद्रीय बैंक इस स्तर पर अत्यधिक उतार-चढ़ाव नहीं चाहता। हालांकि RBI आमतौर पर किसी निश्चित exchange-rate level को आधिकारिक लक्ष्य घोषित नहीं करता। एक दिन पहले रुपये ने की थी वापसी 30 सितंबर को रुपये ने कमजोरी से वापसी करते हुए 95.83 प्रति डॉलर पर कारोबार बंद किया था। उस दिन कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, एशियाई मुद्राओं में सुधार और संभावित RBI intervention ने भारतीय मुद्रा को समर्थन दिया था। विदेशी निवेश की निकासी भी बढ़ा रही दबाव भारतीय बाजारों से विदेशी पूंजी की निकासी भी रुपये के लिए चुनौती बनी हुई है। तेल की ऊंची कीमतें, मजबूत डॉलर और वैश्विक बॉन्ड बाजार में बढ़ती यील्ड विदेशी निवेशकों के risk appetite को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे emerging markets से पूंजी बाहर जाने का खतरा बढ़ता है। भारत के आयात बिल पर पड़ सकता है असर अगर रुपया कमजोर रहता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो भारत का आयात बिल महंगा हो सकता है। इसका असर पेट्रोलियम उत्पादों, औद्योगिक कच्चे माल और डॉलर में भुगतान किए जाने वाले अन्य आयात पर पड़ सकता है। इससे महंगाई और चालू खाते पर भी दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। RBI की अगली मौद्रिक नीति भी अहम बाजार की नजर अब RBI की आगामी Monetary Policy Committee बैठक पर भी है। कुछ वित्तीय संस्थानों का अनुमान है कि ऊंची तेल कीमतों और महंगाई जोखिम को देखते हुए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों पर सख्त रुख अपना सकता है। हालांकि अंतिम फैसला RBI की MPC ही करेगी। रुपये की आगे की चाल इन संकेतों पर निर्भर आने वाले दिनों में रुपये की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर इंडेक्स, विदेशी निवेश प्रवाह और RBI की बाजार में गतिविधियों पर निर्भर करेगी। फिलहाल 96 प्रति डॉलर का स्तर बाजार के लिए अहम बना हुआ है और इसमें होने वाली हलचल पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। source – Reuters / The Economic Times / Financial Times जय राष्ट्र न्यूज़

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6 महीने के निचले स्तर के करीब शेयर बाजार, महंगे कच्चे तेल से Sensex-Nifty पर दबाव

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार पर महंगे कच्चे तेल, US-Iran तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का दबाव बना हुआ है। सोमवार की भारी गिरावट के बाद Sensex और Nifty करीब छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए। 29 सितंबर को भी बाजार की शुरुआत से पहले संकेत कमजोर रहे, जबकि Brent crude करीब $106-$107 प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। Sensex में 1,124 अंकों की बड़ी गिरावट 28 सितंबर को BSE Sensex 1,124.02 अंक यानी 1.52% गिरकर 72,771.72 पर बंद हुआ। दिनभर बाजार में बिकवाली का दबाव रहा और बैंकिंग, फाइनेंशियल, इंफ्रा, एनर्जी और रियल्टी समेत लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। Nifty 22,800 के नीचे बंद NSE Nifty 50 भी 360.25 अंक यानी 1.56% टूटकर 22,780.25 पर बंद हुआ। इस गिरावट के साथ Nifty करीब छह महीने के निचले स्तर के आसपास पहुंच गया। बाजार पिछले सात सप्ताह से लगातार दबाव में बना हुआ है। महंगा कच्चा तेल बना सबसे बड़ी चिंता भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की तेजी से आ रहा है। Brent crude सोमवार को एक समय $108 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था। 29 सितंबर के शुरुआती कारोबार में भी Brent करीब $106.7 प्रति बैरल पर बना रहा। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमत बढ़ने से देश के import bill, inflation और कंपनियों की लागत पर दबाव पड़ सकता है। US-Iran तनाव का बाजार पर असर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। Strait of Hormuz की स्थिति और दोनों देशों के बीच बातचीत में गतिरोध के कारण निवेशक जोखिम वाले assets से दूरी बना रहे हैं। इसका असर भारत समेत एशियाई शेयर बाजारों पर दिखाई दे रहा है। सभी प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली सोमवार के कारोबार में सभी प्रमुख sectoral indices गिरावट के साथ बंद हुए। PSU Bank index में करीब 3%, Telecom में लगभग 2.3% की गिरावट दर्ज हुई। Energy, Infrastructure, FMCG, Realty, Private Bank, Metal और Oil & Gas indices भी 1% से ज्यादा कमजोर हुए। Midcap-Smallcap पर भी दबाव बिकवाली केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। Nifty Midcap index करीब 1.6% और Smallcap index लगभग 1.8% गिरा। 190 से ज्यादा शेयरों ने 52-week low को छुआ, जिससे broader market में भी कमजोरी साफ दिखाई दी। विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी Foreign Institutional Investors यानी FIIs की बिकवाली भी बाजार पर दबाव बढ़ा रही है। 28 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने करीब ₹5,353 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग ₹5,189 करोड़ की खरीदारी की। घरेलू निवेशकों की खरीदारी के बावजूद विदेशी फंडों की लगातार निकासी बाजार की धारणा को कमजोर कर रही है। बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयर टूटे सोमवार की गिरावट में banking और financial stocks का बड़ा योगदान रहा। Bank Nifty करीब 1,108 अंक गिरकर 54,471 के आसपास बंद हुआ। HDFC Bank, ICICI Bank और दूसरे heavyweight शेयरों में कमजोरी से प्रमुख indices पर दबाव बढ़ा। रुपया भी ₹96 प्रति डॉलर के करीब कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय रुपये पर भी दिखाई दिया। सोमवार को रुपया कमजोर होकर करीब ₹95.98 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। डॉलर की मजबूती और महंगा crude भारतीय मुद्रा के लिए दोहरी चुनौती बन रहे हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने भी बढ़ाई चिंता US Treasury yields में तेजी से emerging markets पर दबाव बढ़ा है। अमेरिकी 10-year Treasury yield 5.2% से ऊपर पहुंच गई है। ऊंची bond yields के कारण विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी assets ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं, जिससे भारत जैसे emerging markets से capital outflow बढ़ने का खतरा रहता है। 29 सितंबर को भी सतर्क शुरुआत के संकेत 29 सितंबर की सुबह GIFT Nifty ने भारतीय बाजार के लिए लगभग सपाट से कमजोर शुरुआत के संकेत दिए। विश्लेषकों की नजर Nifty के 22,700-22,800 के दायरे पर बनी हुई है। इस स्तर से नीचे कमजोरी बढ़ने पर बाजार में आगे और बिकवाली देखने को मिल सकती है। आगे किन चीजों पर रहेगी नजर? शेयर बाजार की आगे की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमत, US-Iran तनाव, विदेशी निवेशकों की गतिविधि और अमेरिकी bond yields पर निर्भर करेगी। यदि Brent crude लंबे समय तक $100 से ऊपर बना रहता है तो भारतीय बाजार के लिए inflation और corporate margins से जुड़ी चिंताएं बनी रह सकती हैं। source – Reuters / Moneycontrol Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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US-Iran तनाव से कच्चा तेल फिर चढ़ा, Brent $106 के करीब; वैश्विक बाजारों की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं ने वैश्विक बाजारों की चिंता फिर बढ़ा दी है। 29 सितंबर 2026 को Brent crude लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूत होकर करीब 106 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। वहीं WTI crude भी 93 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता दिखा। लगातार दूसरे दिन महंगा हुआ कच्चा तेल मंगलवार के शुरुआती कारोबार में Brent crude करीब 105.91 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि बाद के कारोबार में यह 106 डॉलर से ऊपर चला गया। US West Texas Intermediate यानी WTI crude भी बढ़कर करीब 93.32 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बाजार में तेल की आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता कीमतों को सहारा दे रही है। US-Iran तनाव से बढ़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव तेल बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन अभी तक किसी स्थायी समाधान पर सहमति नहीं बन पाई है। हालिया घटनाक्रम के बाद निवेशकों को आशंका है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो मध्य पूर्व से कच्चे तेल की आपूर्ति फिर प्रभावित हो सकती है। Strait of Hormuz पर टिकी दुनिया की नजर वैश्विक ऊर्जा बाजार की नजर Strait of Hormuz पर बनी हुई है। यह समुद्री मार्ग मध्य पूर्व से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक तेल पहुंचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। क्षेत्र में किसी भी तरह की बाधा या सैन्य तनाव से shipping costs बढ़ सकती हैं और crude oil supply पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि इस इलाके से जुड़ी हर नई खबर का असर तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। Middle East से निर्यात में सुधार सितंबर में मध्य पूर्व के प्रमुख तेल उत्पादकों से crude exports बढ़कर करीब 12.8 million barrels per day पहुंचने के शुरुआती आंकड़े सामने आए हैं। सऊदी अरब और UAE से बढ़ी सप्लाई ने बाजार को कुछ राहत दी है, लेकिन वैकल्पिक shipping arrangements की ऊंची लागत के कारण स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। वैश्विक बाजारों में बढ़ी बेचैनी महंगा तेल केवल energy market तक सीमित नहीं है। इससे दुनिया भर के शेयर बाजारों, currencies और bond markets पर भी दबाव बढ़ रहा है। अमेरिकी 10-year Treasury yield करीब 5.24% तक पहुंच गई है। तेल की बढ़ती कीमतों से inflation फिर तेज होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। डॉलर हुआ मजबूत मध्य पूर्व में तनाव और अमेरिकी bond yields में तेजी के बीच डॉलर भी मजबूत बना हुआ है। Dollar Index करीब दो महीने के उच्च स्तर के आसपास पहुंच गया है। निवेशक अब अमेरिका के आने वाले inflation और employment data पर नजर रख रहे हैं, क्योंकि इनके आधार पर Federal Reserve की आगे की ब्याज दर नीति का संकेत मिल सकता है। भारत पर भी पड़ सकता है असर भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल विदेश से आयात करता है। ऐसे में crude oil की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने पर देश के import bill, inflation और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। तेल महंगा होने से transport, aviation, logistics और manufacturing कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है। ₹96 प्रति डॉलर के करीब रुपया कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच भारतीय रुपया भी दबाव में है। सोमवार को रुपया करीब ₹95.98 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था और बाजार की नजर अब ₹96 के महत्वपूर्ण स्तर पर है। रुपये में तेज गिरावट रोकने के लिए RBI की संभावित दखल पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। महंगाई बढ़ने का भी खतरा अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं तो इसका असर ईंधन से लेकर परिवहन और उत्पादन लागत तक दिखाई दे सकता है। इससे कई देशों में inflation पर दबाव बढ़ सकता है और केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। अब बातचीत के नतीजों पर नजर तेल बाजार की आगे की दिशा काफी हद तक अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत तथा Strait of Hormuz की स्थिति पर निर्भर करेगी। अगर तनाव कम होता है और तेल की सप्लाई सामान्य होती है तो कीमतों में नरमी आ सकती है। वहीं किसी नए टकराव की स्थिति में crude oil में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल सकता है। source – Reuters Investing.com Australia जय राष्ट्र न्यूज़

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Crude Oil महंगा होने से Rupee 95.80/$ के करीब; RBI Intervention पर नजर, Brent $107 के आसपास

मुंबई, 15 सितंबर 2026: Indian Rupee पर मंगलवार को फिर दबाव बढ़ गया है। Rising crude oil prices, मजबूत US Dollar और higher US Treasury yields के बीच Rupee 95.80 प्रति Dollar के महत्वपूर्ण स्तर के करीब पहुंचने की आशंका है। Currency traders की नजर Reserve Bank of India (RBI) पर है, जिसने हाल के sessions में इसी zone के आसपास dollar selling के जरिए Rupee की तेज गिरावट को रोकने की कोशिश की थी। 95.80 बना Rupee के लिए Critical Level Forex market participants के मुताबिक ₹95.80/$ Rupee के लिए महत्वपूर्ण technical level माना जा रहा है। अगर currency इस level के पार लगातार कमजोर रहती है, तो Dollar demand बढ़ सकती है और Rupee ₹96 प्रति Dollar की ओर जा सकता है। RBI इससे पहले 95.70–95.80 zone में market intervention करता रहा है। 95.79 का Level Friday को छुआ था 11 September को Rupee 95.70 पर open हुआ था और intraday 95.79/$ तक गिरा, लेकिन suspected RBI intervention और crude prices में कुछ नरमी से losses कम हुए। उस session के अंत में currency करीब 95.55–95.57/$ के स्तर पर बंद हुई थी। Brent Crude करीब $107 प्रति Barrel Tuesday Asian trade में Brent crude करीब $106.93–$107.20 प्रति barrel तक पहुंच गया। Saudi Arabia के energy infrastructure पर attacks और East-West oil pipeline में disruption से global crude supply को लेकर चिंता बढ़ी है। महंगा Crude Rupee के लिए क्यों है चिंता? India अपनी crude oil जरूरतों का बड़ा हिस्सा imports के जरिए पूरा करता है। Oil prices बढ़ने पर Indian refiners और importers को ज्यादा Dollars खरीदने पड़ते हैं। इससे Dollar demand बढ़ती है और Rupee पर depreciation pressure आता है। महंगा crude India के import bill और domestic inflation को भी प्रभावित कर सकता है। RBI पहले कर चुका है Dollar Selling Recent sessions में traders ने RBI की ओर से spot market में Dollar sales और forex swaps की सूचना दी थी। इन interventions का उद्देश्य Rupee में disorderly volatility को रोकना और market liquidity manage करना था। हालांकि RBI आम तौर पर daily forex intervention की तत्काल आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है। US Fed Decision पर भी नजर Currency market की नजर अब US Federal Reserve की 15–16 September meeting पर है। Markets में 25 basis points rate hike की संभावना काफी मजबूत हो गई है। Higher US interest rates Dollar को और मजबूत कर सकते हैं, जिससे emerging-market currencies including Rupee पर अतिरिक्त pressure पड़ सकता है। source – Reuters / Business Standard / RBI Market Data जय राष्ट्र न्यूज़

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Nifty लगातार 5 हफ्ते की गिरावट के बाद Crucial Support Zone पर; Crude Oil और Fed Policy तय करेंगे Market की चाल

मुंबई, 13 सितंबर 2026: Indian stock market लगातार पांचवें हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ है और Nifty 50 अब महत्वपूर्ण support zone के करीब पहुंच गया है। शुक्रवार को Nifty 23,398.10 पर बंद हुआ, जबकि Sensex 74,781.76 पर रहा। आने वाले सप्ताह में crude oil prices, US Federal Reserve की policy meeting और foreign investor flows market की दिशा तय करने वाले प्रमुख factors रहेंगे। 5 हफ्तों से लगातार गिर रहा Nifty पिछले सप्ताह Nifty करीब 2.09% गिरा, जबकि Sensex में लगभग 2.26% की कमजोरी दर्ज हुई। दोनों benchmark indices तीन महीने के निचले स्तर तक पहुंचे। Nifty Bank लगातार तीसरे सप्ताह और Midcap index लगातार दूसरे सप्ताह गिरा। Realty sector पर सबसे ज्यादा दबाव रहा, जबकि healthcare और pharma stocks ने comparatively बेहतर प्रदर्शन किया। 23,000–23,300 बना अहम Support Zone Market analysts के मुताबिक Nifty के लिए 23,000 से 23,300 का zone बेहद महत्वपूर्ण है। Index फिलहाल कई key moving averages के नीचे कारोबार कर रहा है। अगर यह support zone बना रहता है तो lower levels पर buying देखने को मिल सकती है, लेकिन इसके नीचे sustained fall market में और weakness बढ़ा सकता है। Brent Crude $104 के ऊपर Indian market के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में elevated crude oil prices शामिल हैं। Brent crude शुक्रवार को $104.61 प्रति barrel पर settle हुआ और सप्ताह के दौरान $110 के करीब भी पहुंचा था। Crude prices लंबे समय तक $100 के ऊपर रहने से India का import bill, inflation और rupee पर दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर corporate margins और stock market sentiment पर पड़ सकता है। 15-16 September को US Fed Meeting इस सप्ताह investors की सबसे ज्यादा नजर US Federal Reserve की 15–16 September FOMC meeting पर रहेगी। Policy decision 16 September को जारी होगा और इसके साथ नए economic projections भी सामने आएंगे। Market में rate hike की संभावना को लेकर uncertainty बनी हुई है। Fed का decision dollar, global bond yields, emerging markets और foreign investment flows पर सीधा असर डाल सकता है। Foreign Investors की Selling भी चिंता September के शुरुआती दो हफ्तों में foreign portfolio investors ने Indian equities से करीब ₹13,138 करोड़ निकाले हैं। Rising crude prices, higher US bond yields और strong dollar को इस selling के प्रमुख कारणों में माना जा रहा है। Monday को Market रहेगा बंद आने वाला trading week holiday-shortened रहेगा। Ganesh Chaturthi के कारण सोमवार को Indian stock market बंद रहेगा और trading मंगलवार से शुरू होगी। इसलिए Tuesday session में crude oil, global bond yields और Fed meeting से पहले की expectations का असर एक साथ देखने को मिल सकता है। source – The Economic Times / Moneycontrol / Federal Reserve जय राष्ट्र न्यूज़

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Brent Crude $100 के ऊपर, Middle East Tension से Indian Market पर दबाव

मुंबई, 10 सितंबर 2026: Middle East में बढ़ते तनाव और oil shipping पर हमलों के बीच Brent crude लगातार दूसरे दिन $100 प्रति barrel के ऊपर बना हुआ है। गुरुवार को Brent करीब 0.7% नीचे $100.50 प्रति barrel पर कारोबार कर रहा था, जबकि WTI crude करीब $95.58 पर था। Sensex-Nifty में सतर्क कारोबार ऊंचे crude prices के कारण Indian equity market में investor sentiment कमजोर बना हुआ है। सुबह करीब 9:36 बजे Nifty 50 0.01% गिरकर 23,429.25 और Sensex 0.01% नीचे 74,759.54 पर था। दोनों indices पिछले session में तीन महीने के निचले स्तर पर बंद हुए थे और पिछले आठ sessions में से सात में गिरावट दर्ज कर चुके हैं। Middle East Conflict ने बढ़ाई Oil Supply की चिंता Oil market में tension तब और बढ़ी जब Iran ने Strait of Hormuz के पास 10 ships पर हमले का दावा किया। यह कार्रवाई US द्वारा पांच Iranian oil tankers को निशाना बनाए जाने के बाद हुई। इस escalation ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण oil shipping routes में supply disruption का risk बढ़ा दिया है। Strait of Hormuz पर नजर Conflict से पहले Strait of Hormuz से दुनिया के oil और gas trade का करीब 20% हिस्सा गुजरता था। मौजूदा तनाव के कारण इस route से traffic काफी कम हुआ है। Red Sea route पर Houthi attacks ने alternative shipping routes को लेकर भी चिंता बढ़ाई है। India के लिए महंगा Crude क्यों चिंता? India दुनिया के सबसे बड़े crude oil importers में शामिल है। लंबे समय तक oil prices $100 के ऊपर रहने से: Reuters के मुताबिक यही वजह है कि high crude prices Indian market sentiment के लिए बड़ा risk बने हुए हैं। Rupee भी ₹95.30/$ तक कमजोर ऊंचे oil prices का असर rupee पर भी दिखाई दिया। आज Indian rupee करीब 0.2% गिरकर ₹95.30 प्रति dollar तक पहुंचा, जो करीब 10 दिनों का सबसे कमजोर स्तर है। Traders के मुताबिक RBI की ओर से संभावित dollar selling ने currency पर दबाव को कुछ हद तक सीमित किया। ONGC और Oil India में तेजी जहां high crude prices broader market के लिए चिंता हैं, वहीं upstream oil companies को इसका फायदा मिला। ONGC करीब 2% और Oil India करीब 2.4% ऊपर रहे, क्योंकि higher crude prices इनके revenue और margins को support कर सकते हैं। आगे Middle East Developments पर नजर Market की दिशा अब Middle East conflict, Strait of Hormuz shipping, crude oil prices और global inflation data पर निर्भर रहेगी। अगर oil supply disruption और बढ़ता है तो Brent पर फिर upward pressure आ सकता है और इसका असर Indian rupee, inflation और equities पर भी पड़ सकता है। source – Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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Brent Crude आज $99.5 के करीब, Sensex-Nifty में गिरावट; Middle East Tension से Indian Market पर दबाव

मुंबई, 9 सितंबर 2026: Middle East में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच international crude oil prices बुधवार को $100 प्रति barrel के बेहद करीब पहुंच गए। Brent crude futures करीब $99.50 प्रति barrel तक चढ़ गए, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty दोनों में गिरावट दर्ज की गई। Sensex करीब 620 अंक नीचे सुबह करीब 10:01 बजे BSE Sensex 0.83% गिरकर 74,954.33 पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 करीब 0.67% गिरकर 23,474.40 पर पहुंच गया। Market में 16 प्रमुख sectoral indices में से 12 नुकसान में कारोबार कर रहे थे। Brent Crude $99.5 तक पहुंचा Middle East conflict बढ़ने से Brent crude futures करीब 1.5% उछलकर $99.5 प्रति barrel तक पहुंच गए। दूसरे market update में Brent ने $99.49 का level छुआ, जो late June के बाद सबसे ऊंचे स्तरों में शामिल है। US West Texas Intermediate यानी WTI crude भी बढ़कर करीब $94.63 प्रति barrel पर पहुंच गया। Middle East में नए हमलों से बढ़ी चिंता Oil prices में तेजी की बड़ी वजह Middle East में conflict का और विस्तार होना है। Iran-backed Houthis ने Saudi Arabia के कई शहरों पर हमले किए, जबकि US forces ने कई Iranian oil tankers को निशाना बनाया। इसके जवाब में Iran ने Jordan स्थित एक अमेरिकी military base पर हमला किया। इन घटनाओं ने broader regional conflict और oil supply disruption की आशंका बढ़ा दी है। Strait of Hormuz में Shipping Traffic कम Global energy market की चिंता Strait of Hormuz को लेकर भी बढ़ी है। Preliminary Kpler data के मुताबिक मंगलवार को केवल 6 commodity vessels Strait of Hormuz से गुजरे, जबकि पिछले 10 दिनों का average करीब 12 vessels था। एक दिन पहले 9 vessels ने इस strategic waterway को पार किया था। हालांकि कुछ ships tracking transponders बंद कर सकती हैं, इसलिए final traffic figures बदल सकते हैं। India के लिए महंगा Crude क्यों बड़ी चिंता? India दुनिया के सबसे बड़े crude oil importers में शामिल है और अपनी oil requirement का बड़ा हिस्सा imports से पूरा करता है। अगर crude prices लंबे समय तक $100 के आसपास बने रहते हैं तो इससे: Reuters के मुताबिक यही कारण है कि crude में तेजी Indian equities के लिए एक बड़ा negative trigger बनी हुई है। Rupee पर भी बढ़ा दबाव Crude की तेजी के कारण Indian rupee पर भी pressure बढ़ा है। Traders के मुताबिक rupee के dollar के मुकाबले 94.84–94.86 के आसपास खुलने की संभावना थी, जबकि पिछले session में यह 94.8175 पर बंद हुआ था। Market participants अब यह भी देख रहे हैं कि Reserve Bank of India currency को support करने के लिए कितनी aggressive intervention करता है। IT Sector में बड़ी गिरावट Indian market में Nifty IT index करीब 3% गिरा। Coforge के shares करीब 6% टूटे, जब Chairman Om Prakash Bhatt ने company के board evaluation process को लेकर internal audit concerns के बाद इस्तीफा दिया। Mid-cap और small-cap indices में भी करीब 0.6–0.7% की गिरावट दर्ज की गई। Adani Enterprises में तेजी कमजोर market के बीच Adani Enterprises करीब 3.6% ऊपर कारोबार कर रहा था। Company ने अपने airport business में 5.54% तक stake Temasek, BlackRock, Premji Invest और Alpha Wave जैसे investors को बेचकर लगभग $1 billion जुटाने का agreement किया है। अब $100 का Psychological Level अहम Brent crude अब $100 प्रति barrel के psychological level के बेहद करीब है। अगर Middle East conflict और Strait of Hormuz disruption बढ़ता है तो oil prices पर further upward pressure आ सकता है। फिलहाल Indian market की दिशा crude prices, Middle East developments, rupee movement और global interest-rate expectations से प्रभावित रहने की संभावना है। source – Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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Strait of Hormuz तनाव के बीच Brent Crude $97 के पार, Global Oil Supply को लेकर चिंता बढ़ी

लंदन, 8 सितंबर 2026: Middle East में बढ़ते US-Iran तनाव और Strait of Hormuz से oil shipments में संभावित disruption की चिंता के बीच international crude prices में आज फिर तेजी दर्ज की गई। Global benchmark Brent crude करीब $97.34 प्रति barrel तक पहुंच गया, जबकि US West Texas Intermediate (WTI) लगभग $92.63 प्रति barrel पर कारोबार कर रहा था। लगातार तीसरे दिन Crude Oil में तेजी Oil prices में मंगलवार को लगातार तीसरे session में बढ़त देखने को मिली। Markets में geopolitical risk premium बढ़ा है क्योंकि traders को आशंका है कि Gulf region में सैन्य तनाव और बढ़ने पर crude shipments बाधित हो सकती हैं। Strait of Hormuz में धीमा हुआ Shipping Traffic Kpler data के मुताबिक सोमवार को Strait of Hormuz से केवल 7 commodity vessels गुजरते रिकॉर्ड किए गए, जबकि इससे एक दिन पहले यह संख्या 8 थी। हालांकि कुछ ships अपने tracking transponders बंद करके भी गुजर सकती हैं, इसलिए वास्तविक traffic इससे अलग हो सकता है। फिर भी shipping activity में कमजोरी ने market की चिंता बढ़ा दी है। Iran ने Gulf Energy Infrastructure को लेकर दी चेतावनी Iran ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका उसके खिलाफ नए military attacks करता है, तो Gulf region में अमेरिकी energy infrastructure retaliation के दायरे में आ सकता है। हालिया US-Iran military actions और tankers तथा naval assets से जुड़े incidents ने crude market में uncertainty और बढ़ा दी है। Hormuz क्यों है Global Oil Market के लिए इतना अहम? Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण energy transit routes में शामिल है। Persian Gulf के कई बड़े oil exporters अपने crude और petroleum products को international markets तक पहुंचाने के लिए इसी narrow waterway पर निर्भर हैं। इसी वजह से यहां prolonged disruption का असर Asia, Europe और दूसरी प्रमुख economies की energy supply और prices पर पड़ सकता है। Supply घटी, लेकिन Oil अभी $100 से नीचे क्यों? Middle East से crude shipments में बड़ी गिरावट के बावजूद Brent अभी $100 के नीचे है। Reuters analysis के मुताबिक regional crude shipments करीब 18 million barrels per day से घटकर 11 million bpd रह गई हैं, लेकिन कुछ supply अब भी Hormuz से गुजर रही है। इसके अलावा Saudi Arabia और Iraq alternative export routes इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि US, Canada और Guyana जैसे non-OPEC producers की बढ़ती production global shortage का कुछ हिस्सा offset कर रही है। Goldman Sachs ने बढ़ाया Oil Price Forecast Middle East shipping disruptions लंबे समय तक जारी रहने की आशंका के बीच Goldman Sachs ने December 2026 के लिए Brent और WTI forecasts में $5 की बढ़ोतरी की है। Analysts का मानना है कि अगर Hormuz में disruption और geopolitical tension लंबे समय तक बने रहते हैं, तो crude prices elevated रह सकते हैं। $120 तक जाने का भी Risk Scenario Market में extreme upside scenario को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा रहा है। Reuters के मुताबिक कुछ forecasts में गंभीर और prolonged supply disruption की स्थिति में Brent crude के $120 प्रति barrel तक पहुंचने की संभावना बताई गई है। हालांकि यह base-case forecast नहीं है और कीमतों की आगे की दिशा military developments और shipping flows पर निर्भर करेगी। भारत पर भी बढ़ सकता है दबाव भारत अपनी crude oil जरूरतों का बड़ा हिस्सा imports से पूरा करता है, इसलिए international oil prices में sustained तेजी import bill, inflation और rupee पर दबाव बढ़ा सकती है। आज Indian markets पर भी rising crude prices का असर देखा गया, जबकि rupee पर oil importers की dollar demand और hedging pressure बढ़ने की संभावना बनी हुई है। अब Hormuz और Iran-US तनाव पर नजर Oil market की अगली दिशा इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगी कि Strait of Hormuz में shipping traffic सामान्य होता है या नहीं और US-Iran confrontation आगे कितना बढ़ता है। फिलहाल Brent का $97 के पार पहुंचना दिखाता है कि traders global supply disruption के risk को एक बार फिर गंभीरता से price-in कर रहे हैं। source – Reutersजय राष्ट्र न्यूज़

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Sensex-Nifty आज गिरावट के साथ खुले; Crude Oil $90 के पार, US-Iran तनाव से बाजार पर दबाव

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार, 31 अगस्त 2026 को कमजोर शुरुआत की। बढ़ते US-Iran तनाव, crude oil की कीमतों में तेजी और अमेरिकी Federal Reserve से interest rate hike की बढ़ती आशंका के कारण निवेशकों ने शुरुआती कारोबार में सतर्क रुख अपनाया। सुबह 9:40 बजे BSE Sensex करीब 301 अंक गिरकर 76,963.74 पर कारोबार कर रहा था, जबकि Nifty 50 करीब 125 अंक टूटकर 24,050.85 पर पहुंच गया। बाजार में गिरावट broad-based रही। Reuters के मुताबिक शुरुआती कारोबार में सभी 16 major sectoral indices लाल निशान में थे, जबकि IT, midcap और smallcap shares पर ज्यादा दबाव देखने को मिला। US-Iran तनाव से बिगड़ा Global Sentiment बाजार पर सबसे बड़ा दबाव West Asia में फिर बढ़े geopolitical tensions का रहा। US forces द्वारा Iranian targets पर strikes और उसके बाद Iran की जवाबी कार्रवाई की खबरों ने global investors की चिंता बढ़ा दी। इसका सीधा असर Asian equity markets और crude oil prices पर दिखाई दिया। Asian markets में भी सोमवार को कमजोरी रही, जिससे भारतीय बाजार को negative global cues मिले। Brent Crude $90 प्रति Barrel के पार India जैसे बड़े crude importer के लिए oil prices में तेजी चिंता का प्रमुख कारण है। सोमवार को Brent crude करीब 2.7% बढ़कर $90.51 प्रति barrel तक पहुंच गया। US crude भी मजबूत हुआ। Crude oil महंगा होने से India के import bill, inflation और rupee पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसी कारण oil prices में तेज उछाल अक्सर domestic equity sentiment को प्रभावित करता है। US Fed Rate Hike की आशंका बढ़ी Global markets पर दूसरा बड़ा pressure US monetary policy को लेकर है। Federal Reserve Chair Kevin Warsh की inflation पर सख्त टिप्पणियों के बाद markets ने September में US rate hike की संभावना करीब 57% तक price-in करनी शुरू कर दी है। इससे US Treasury yields भी बढ़ी हैं। Higher US interest rates emerging markets के लिए negative माने जाते हैं, क्योंकि इससे foreign investors के लिए अमेरिकी assets ज्यादा attractive हो सकते हैं। IT Stocks पर सबसे ज्यादा दबाव Reuters के मुताबिक शुरुआती कारोबार में Nifty IT index करीब 2% गिरा, जबकि midcap और smallcap indices लगभग 1% नीचे थे। Infosys, Reliance Industries, Larsen & Toubro, Bajaj Finance और NTPC जैसे बड़े stocks Sensex पर दबाव डालते दिखाई दिए। सुबह 9:24 बजे उपलब्ध market data में Infosys और Reliance Sensex के प्रमुख draggers में शामिल थे। HDFC Bank ने गिरावट को कुछ हद तक रोका कमजोर बाजार के बीच HDFC Bank के shares में तेजी देखने को मिली। Reuters के मुताबिक stock शुरुआती कारोबार में करीब 1.5% ऊपर था। CEO Sashidhar Jagdishan द्वारा अपने मौजूदा term के बाद reappointment नहीं मांगने के फैसले के बाद governance-related uncertainty कम होने की उम्मीद से stock को support मिला। HDFC Bank की तेजी ने Sensex की overall गिरावट को कुछ हद तक सीमित किया। Reliance Industries पर MSCI Rejig का असर Reliance Industries के shares भी दबाव में रहे। Reuters के मुताबिक MSCI Global Standard Index में Reliance का weight घटने के कारण संभावित passive fund outflows की आशंका बनी हुई है। Stock शुरुआती कारोबार में करीब 1% नीचे था। आज का session इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि MSCI index rebalancing के कारण closing के आसपास institutional flows और volatility बढ़ सकती है। FIIs ने शुक्रवार को ₹5,000 करोड़ से ज्यादा बेचा Foreign institutional investors की selling भी sentiment पर दबाव बना रही है। पिछले trading session में FIIs ने Indian equities में ₹5,000 करोड़ से ज्यादा की net selling की थी। दूसरी ओर domestic institutional investors यानी DIIs ने करीब ₹5,183 करोड़ की buying कर foreign selling को काफी हद तक absorb किया। अगर global risk sentiment कमजोर रहता है तो foreign fund flows पर बाजार की नजर बनी रहेगी। इस हफ्ते GDP और US Jobs Data पर नजर Investors के लिए आगे macroeconomic data भी महत्वपूर्ण रहेगा। इस सप्ताह markets की नजर India के Q1 FY27 GDP data, manufacturing और services PMI तथा US non-farm payrolls जैसे आंकड़ों पर रहेगी। ये data domestic growth और global interest-rate outlook को लेकर अगला संकेत दे सकते हैं। Oil prices और West Asia tensions में होने वाला कोई भी नया development बाजार में volatility बढ़ा सकता है। 31 August की Latest Market Situation आज सुबह तक प्रमुख स्थिति: इसलिए सबसे accurate headline होगी: Sensex-Nifty आज गिरावट के साथ खुले; Crude Oil $90 के पार, US-Iran तनाव और Fed Rate Hike की चिंता से बाजार दबाव में नोट: शेयर बाजार के स्तर पूरे trading session में लगातार बदलते रहते हैं। यहां दिए गए Sensex-Nifty levels 31 अगस्त के शुरुआती कारोबार के हैं, closing figures नहीं। स्रोत – Reuters, Moneycontrol, Business Standard जय राष्ट्र न्यूज़

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Iran-Oman के बीच Strait of Hormuz के लिए Temporary Shipping Corridor पर बातचीत; Crude Oil 2% से ज्यादा गिरा

तेहरान/मस्कट: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण energy shipping routes में से एक Strait of Hormuz को दोबारा खोलने की उम्मीद बढ़ गई है। Iran और Oman ने जलडमरूमध्य में “Joint Temporary Navigational Corridor” बनाने और समुद्री mines हटाने के लिए संयुक्त व्यवस्था पर बातचीत आगे बढ़ाई है। इस diplomatic progress के बाद बुधवार, 26 अगस्त 2026 को international crude oil prices में 2% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। Brent crude futures $2.30 यानी 2.6% गिरकर $86.28 प्रति barrel पर आ गए, जबकि U.S. West Texas Intermediate (WTI) crude $2.08 यानी 2.53% टूटकर $80.29 पर कारोबार कर रहा था। इससे एक दिन पहले मंगलवार को भी दोनों benchmarks में 3% से ज्यादा की गिरावट आई थी। 25 August को Tehran में हुई Iran-Oman की बड़ी Meeting Oman के Foreign Minister Badr al-Busaidi ने 25 अगस्त को Tehran में Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi से मुलाकात की। दोनों देशों ने meeting के बाद कहा कि Strait of Hormuz में shipping traffic को चरणबद्ध तरीके से सामान्य करने के लिए एक framework पर चर्चा हुई है। इसमें सबसे पहले temporary joint navigation corridor बनाना और waterway से mines हटाना शामिल है। Oman के Foreign Minister ने उम्मीद जताई कि दोनों देश जल्द ही temporary corridor की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं। Temporary Corridor कैसे काम कर सकता है? Iranian Deputy Foreign Minister Kazem Gharibabadi के मुताबिक दोनों पक्ष temporary route को लेकर एक understanding पर पहुंचे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत Gulf of Oman से Persian Gulf में प्रवेश करने वाले जहाज पूरी तरह Iranian waters से गुजर सकते हैं, जबकि बाहर जाने वाले vessels का route आंशिक रूप से Iranian और आंशिक रूप से Omani territorial waters से गुजरने का प्रस्ताव है। हालांकि यह व्यवस्था अभी स्थायी समझौता नहीं है। Iran और Oman अगले 30 से 60 दिनों में negotiations जारी रखकर एक permanent और sustainable shipping route पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे। Mines हटाने पर भी बनी सहमति दोनों देशों की joint statement में Strait of Hormuz से mines हटाने के लिए joint mine-clearing project शुरू करने की बात कही गई है। इसके साथ navigation traffic management, information sharing और maritime security services को लेकर भी technical negotiations जारी रहेंगी। Strait में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए mine-clearing बेहद अहम है, क्योंकि किसी भी tanker या cargo ship को नुकसान global energy supply को तुरंत प्रभावित कर सकता है। Crude Oil में अचानक क्यों आई गिरावट? Oil market ने Iran-Oman talks को संभावित supply relief के रूप में देखा। Reuters के मुताबिक traders को उम्मीद है कि अगर Hormuz से vessels की normal movement धीरे-धीरे बहाल होती है, तो Middle East से global oil और LNG shipments पर लगा बड़ा constraint कम हो सकता है। इसी optimism के कारण crude futures में selling बढ़ी। Fujitomi Securities के analyst Mitsuru Muraishi के मुताबिक market का focus फिलहाल Strait of Hormuz navigation से जुड़े developments पर है और Iran-Oman talks में progress की उम्मीद ने oil prices पर downward pressure बनाया है। Brent $86.28, WTI $80.29 पर 26 अगस्त की सुबह international market में: रहा। Brent ने कारोबार के दौरान 13 अगस्त के बाद का अपना lowest level भी छुआ, जबकि WTI 10 अगस्त के बाद के निचले स्तर तक पहुंचा। हालांकि Middle East conflict को लेकर uncertainty अभी खत्म नहीं हुई है, इसलिए prices में आगे volatility बनी रह सकती है। Strait of Hormuz इतना महत्वपूर्ण क्यों है? Strait of Hormuz Iran और Oman के बीच मौजूद एक संकरा समुद्री मार्ग है, जो Persian Gulf को Gulf of Oman और आगे Arabian Sea से जोड़ता है। युद्ध से पहले दुनिया के traded oil और LNG का करीब पांचवां हिस्सा इसी route से गुजरता था। Saudi Arabia, UAE, Kuwait, Iraq और Iran जैसे बड़े oil-producing देशों के exports के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है। Qatar का LNG export भी इस route पर काफी हद तक निर्भर करता है। इसलिए Hormuz में किसी भी disruption का असर केवल Gulf countries पर नहीं बल्कि India, China, Japan, South Korea और Europe जैसे बड़े energy importers पर भी पड़ सकता है। अभी भी बेहद कम है Ship Traffic Diplomatic progress के बावजूद Strait में normal shipping अभी बहाल नहीं हुई है। Kpler के preliminary tracking data के मुताबिक मंगलवार को केवल 5 commodity vessels ने Hormuz से transit किया। इनमें दो LPG tankers, एक bitumen tanker और दो खाली product tankers शामिल थे। यह हाल के 10-day average 15 vessels से भी काफी कम है और pre-war levels के मुकाबले बेहद नीचे है। इससे साफ है कि corridor पर बातचीत शुरू होने और full-scale commercial shipping normal होने के बीच अभी बड़ा अंतर है। February से प्रभावित है Hormuz Shipping Reuters और AP के मुताबिक February के अंत में U.S.-Israel और Iran के बीच conflict शुरू होने के बाद Strait of Hormuz की सामान्य shipping बुरी तरह प्रभावित हुई। इसके बाद Iran ने waterway पर नियंत्रण कड़ा किया और U.S. की तरफ से Iranian ports को लेकर भी naval pressure बढ़ा। तब से energy markets में crude oil, LNG और shipping insurance costs पर बड़ा असर पड़ा है। Iran ने पूरी तरह Strait खोलने के लिए रखी हैं शर्तें Temporary corridor पर बातचीत का मतलब यह नहीं है कि Iran ने Strait of Hormuz को पूरी तरह खोलने पर सहमति दे दी है। Iranian officials का कहना है कि full reopening के लिए Tehran की कुछ मांगें पूरी होनी चाहिए, जिनमें U.S. naval blockade हटाना, oil sanctions में राहत और frozen Iranian assets से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। इसलिए temporary navigation corridor को फिलहाल एक interim confidence-building arrangement के रूप में देखा जा रहा है। US की मंजूरी भी अहम एक और बड़ा सवाल यह है कि emerging Iran-Oman arrangement पर United States का क्या रुख होगा। AP के मुताबिक यह अभी स्पष्ट नहीं है कि Washington proposed corridor को स्वीकार करेगा या नहीं। U.S. President Donald Trump की administration ने हाल में Iran के खिलाफ नए economic sanctions भी घोषित किए हैं। Reuters के मुताबिक Washington ने सोमवार को Iran की आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से sanctions expand…

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