प्रमुख खबरें

भारत-जापान की बड़ी रणनीतिक साझेदारी! समुद्री सुरक्षा और Indo-Pacific सहयोग पर हुआ अहम समझौता

नई दिल्ली: भारत और जापान ने अपनी रणनीतिक और रक्षा साझेदारी को नई मजबूती देते हुए समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए Memorandum of Arrangement (MoA) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता 20 अगस्त को नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी के बीच हुई वार्ता के दौरान हुआ। दोनों देशों ने स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित Indo-Pacific को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। भारतीय नौसेना और जापानी Maritime Force के बीच बढ़ेगा सहयोग नए समझौते के तहत Indian Navy और Japan Maritime Self-Defense Force (JMSDF) के बीच सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। इसमें समुद्री क्षेत्र की जानकारी साझा करना, समुद्री गतिविधियों की निगरानी, खोज एवं बचाव और मानवीय सहायता तथा आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में सहयोग शामिल है। इससे दोनों देशों की समुद्री स्थितियों को समझने और संभावित खतरों पर तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। Indo-Pacific में Freedom of Navigation पर जोर भारत और जापान ने Free and Open Indo-Pacific के अपने साझा दृष्टिकोण को दोहराया। दोनों देशों ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा, स्वतंत्र नौवहन और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप वैध समुद्री व्यापार को बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। यह सहयोग ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब Indo-Pacific क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। Joint Naval Shipbuilding पर भी बातचीत रक्षा सहयोग सिर्फ समुद्री निगरानी तक सीमित नहीं रहेगा। भारत और जापान ने नौसैनिक जहाजों के संयुक्त विकास और निर्माण की संभावनाओं पर भी चर्चा की है। जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की उत्पादन क्षमता को साथ लाकर Make in India के तहत रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। दोनों देशों ने जहाजों की मरम्मत और maintenance facilities के पारस्परिक इस्तेमाल पर भी आगे काम करने की बात कही है। Defence Technology में भी बढ़ेगा सहयोग भारत और जापान ने उन्नत रक्षा तकनीक में सहयोग तेज करने पर सहमति जताई है। दोनों पक्ष co-development और co-production के नए अवसर तलाशेंगे, जिससे भारत के defence manufacturing ecosystem और Japanese technology के बीच साझेदारी बढ़ सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जापानी कंपनियों को भारतीय defence companies और startups के साथ Make in India के तहत co-development और co-production में भागीदारी के अवसर तलाशने की बात कही है। Maritime Security में Piracy के खिलाफ भी सहयोग समुद्री सुरक्षा समझौते में piracy, armed robbery और अन्य transnational crimes से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने की दिशा भी शामिल है। इससे Indian Ocean और Indo-Pacific के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा में दोनों देशों के बीच coordination मजबूत हो सकता है। चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच समझौता अहम भारत-जापान का यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब Indo-Pacific में चीन की बढ़ती सैन्य और समुद्री गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा का बड़ा मुद्दा बनी हुई हैं। हालांकि दोनों देशों ने समझौते को किसी एक देश के खिलाफ गठबंधन के रूप में पेश नहीं किया है, लेकिन freedom of navigation, rules-based order और maritime security पर उनका साझा जोर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत-जापान रिश्तों में नया अध्याय भारत और जापान के बीच पहले से ही Special Strategic and Global Partnership है। अब नए maritime security framework, defence technology cooperation और संभावित joint shipbuilding के जरिए यह साझेदारी अधिक operational और practical दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच नौसैनिक अभ्यास, information sharing, ship repair, defence manufacturing और Indo-Pacific security में सहयोग और बढ़ने की उम्मीद है। स्रोत: PIB, DD India, PTI, Economic Times, Prime Minister’s Office Jai Rashtra News

आगे और पढ़ें

भारत और न्यूज़ीलैंड ने रणनीतिक साझेदारी को दिया नया विस्तार, रक्षा, व्यापार और समुद्री सुरक्षा सहयोग होगा मजबूत

ऑकलैंड, 11 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आधिकारिक न्यूज़ीलैंड यात्रा के दौरान भारत और न्यूज़ीलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के उद्देश्य से व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों देशों के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ताओं में रक्षा सहयोग, व्यापार, निवेश, समुद्री सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा, कृषि और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समन्वय को भविष्य की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया। रणनीतिक संबंधों में नया अध्याय प्रधानमंत्री मोदी और न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हुई बैठक में दोनों नेताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों, नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था और मुक्त एवं सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों ने नियमित उच्चस्तरीय संवाद जारी रखने और दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग को संस्थागत रूप देने पर सहमति जताई। रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर विशेष जोर बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता, आपदा प्रबंधन और समुद्री कानूनों के पालन को लेकर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। दोनों देशों ने रक्षा संस्थानों के बीच संपर्क बढ़ाने, संयुक्त अभ्यासों की संभावनाओं और समुद्री सुरक्षा से जुड़े अनुभव साझा करने पर भी चर्चा की। व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा भारत और न्यूज़ीलैंड ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को नई गति देने के लिए आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश के अवसरों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया। दोनों पक्षों ने निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने और व्यापारिक प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बनाने पर भी जोर दिया। विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शिक्षा में सहयोग दोनों देशों ने अनुसंधान, नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल तकनीक, उच्च शिक्षा और छात्र विनिमय कार्यक्रमों में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया। विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के बीच साझेदारी को मजबूत करने तथा संयुक्त परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने पर सहमति बनी। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर साझा दृष्टिकोण वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और आर्थिक समृद्धि के लिए सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी क्षेत्रीय संतुलन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भारतीय समुदाय की सराहना प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूज़ीलैंड में भारतीय समुदाय की भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रवासी भारतीय दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों के मजबूत सेतु हैं। उन्होंने समुदाय के योगदान को द्विपक्षीय संबंधों की बड़ी ताकत बताया। भविष्य की संभावनाएं विदेश नीति विशेषज्ञों के अनुसार भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच यह विस्तारित रणनीतिक साझेदारी आने वाले वर्षों में रक्षा, व्यापार, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा करेगी। दोनों देशों ने नियमित वार्ताओं और साझा परियोजनाओं के माध्यम से सहयोग को और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। स्रोत:भारत का विदेश मंत्रालय (MEA), न्यूज़ीलैंड सरकार तथा दोनों देशों द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी। मूल रिपोर्ट:11 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक संयुक्त वक्तव्य एवं विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

PM मोदी और ऑस्ट्रेलियाई PM एंथनी अल्बनीज़ की बैठक, रक्षा, व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर कई अहम समझौते

मेलबर्न, 9 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने मेलबर्न में आयोजित भारत–ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन में व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक में रक्षा सहयोग, व्यापार एवं निवेश, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), स्वच्छ ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को नई गति देने पर सहमति बनी। रक्षा सहयोग को मिलेगा नया विस्तार दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा उद्योग सहयोग और रक्षा तकनीक के आदान-प्रदान को और मजबूत करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही Maritime Security Collaboration Roadmap पर भी सहमति बनी, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों का रणनीतिक समन्वय और मजबूत होगा। व्यापार और निवेश पर बड़ा फोकस बैठक के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया ने द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने तथा व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। ऑस्ट्रेलिया ने भारत में 500 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के नए निवेश की घोषणा की, जिसका उपयोग बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में किया जाएगा। साथ ही दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटल अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) सहयोग को भी प्राथमिकता देने पर सहमति जताई। यूरेनियम और स्वच्छ ऊर्जा में नई साझेदारी शिखर वार्ता की प्रमुख उपलब्धियों में शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के लिए ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम आपूर्ति समझौता शामिल रहा। इसके अलावा हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा और कम-कार्बन तकनीकों में संयुक्त निवेश एवं अनुसंधान बढ़ाने पर भी सहमति बनी। AI और उन्नत तकनीकों पर सहयोग दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक और उभरती डिजिटल तकनीकों में संयुक्त अनुसंधान तथा औद्योगिक सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की तेज़ी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों के लिए दीर्घकालिक निवेश के बड़े अवसर प्रदान करती है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण दोनों नेताओं ने स्वतंत्र, सुरक्षित और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के समर्थन को दोहराया। उन्होंने समुद्री मार्गों की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। व्यापारिक समुदाय से भी संवाद शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने Australia–India CEOs Forum को भी संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने विनिर्माण, अवसंरचना, स्वच्छ ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, AI, फिनटेक, खाद्य प्रसंस्करण और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में निवेश के व्यापक अवसरों को रेखांकित किया। रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा विशेषज्ञों का मानना है कि इस वार्षिक शिखर सम्मेलन से भारत और ऑस्ट्रेलिया की Comprehensive Strategic Partnership को नई मजबूती मिलेगी। रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, तकनीक और निवेश जैसे क्षेत्रों में हुए समझौते आने वाले वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक और सामरिक संबंधों को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. स्रोत:भारत सरकार, ऑस्ट्रेलिया सरकार एवं दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के आधिकारिक कार्यालय। मूल रिपोर्ट:9 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी, प्रेस विज्ञप्तियों तथा विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया पहुंचे, रक्षा, व्यापार और समुद्री सहयोग को मिलेगी नई गति

जकार्ता/नई दिल्ली, 7 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी आधिकारिक विदेश यात्रा के तहत सोमवार को इंडोनेशिया पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं ने रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति व्यक्त की। हालिया बैठकों के दौरान दोनों देशों ने कई क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण समझ और समझौतों को अंतिम रूप दिया। रक्षा सहयोग को नई मजबूती वार्ता में रक्षा क्षेत्र प्रमुख विषयों में शामिल रहा। दोनों देशों ने सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग सहयोग, संयुक्त अभ्यास, रक्षा प्रौद्योगिकी और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षित एवं नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धता भी दोहराई गई। व्यापार और निवेश बढ़ाने पर सहमति भारत और इंडोनेशिया ने द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। दोनों पक्षों ने निवेश को प्रोत्साहित करने, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत बनाने तथा फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, विनिर्माण, डिजिटल सेवाओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। व्यापारिक समुदाय के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए भी नई पहल पर सहमति बनी। समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक रणनीति इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों को देखते हुए दोनों देशों ने समुद्री सहयोग को प्राथमिकता देने पर बल दिया। नौवहन की स्वतंत्रता, समुद्री डकैती की रोकथाम, मानवीय सहायता, आपदा राहत और समुद्री निगरानी के क्षेत्र में सहयोग को और व्यापक बनाने की दिशा में चर्चा हुई। डिजिटल और तकनीकी सहयोग बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल भुगतान, साइबर सुरक्षा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। दोनों देशों ने नवाचार, स्टार्टअप और डिजिटल अर्थव्यवस्था में साझेदारी को भविष्य के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया। ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर चर्चा ऊर्जा सुरक्षा, हरित ऊर्जा, जैव ईंधन, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा भी वार्ता के प्रमुख विषय रहे। दोनों देशों ने दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग के लिए इन क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं और निवेश की संभावनाओं पर विचार किया। विशेषज्ञों की राय विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत की ‘Act East Policy’ और इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण को और मजबूती प्रदान करेगी। दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की बढ़ती भागीदारी से आर्थिक, सामरिक और समुद्री सहयोग के नए अवसर खुलने की संभावना है। साथ ही यह क्षेत्रीय स्थिरता और बहुपक्षीय सहयोग को भी बढ़ावा दे सकता है। आगे की राह प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान हुई सहमतियों के आधार पर दोनों देशों के संबंधित मंत्रालय अब विभिन्न परियोजनाओं और समझौतों के क्रियान्वयन पर काम करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत और इंडोनेशिया के संबंध रक्षा, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में और अधिक मजबूत होंगे। स्रोत:भारत का विदेश मंत्रालय (MEA), इंडोनेशिया सरकार की आधिकारिक जानकारी एवं संयुक्त आधिकारिक वक्तव्य। मूल रिपोर्ट:7 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

भारत-जापान ने रक्षा एवं इंडो-पैसिफिक सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई

नई दिल्ली, 3 जुलाई। भारत और जापान ने रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को और गहरा करने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। दोनों देशों ने स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की तथा क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर दिया। रक्षा सहयोग को मिलेगा नया विस्तार उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान दोनों देशों ने रक्षा संबंधों को और मजबूत बनाने, नियमित सैन्य संवाद जारी रखने तथा संयुक्त सैन्य अभ्यासों के दायरे को बढ़ाने पर सहमति जताई। रक्षा तकनीक, क्षमता निर्माण और सुरक्षा सहयोग को भी नई दिशा देने पर बल दिया गया। समुद्री सुरक्षा पर विशेष जोर भारत और जापान ने समुद्री सुरक्षा, सुरक्षित नौवहन और समुद्री डोमेन जागरूकता (Maritime Domain Awareness) को मजबूत बनाने के लिए सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त और सुरक्षित समुद्री मार्गों के महत्व को रेखांकित किया। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण बैठक में दोनों पक्षों ने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता वैश्विक आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान, संप्रभुता की रक्षा और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया। रक्षा उद्योग और तकनीकी सहयोग दोनों देशों ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास (R&D), उन्नत रक्षा तकनीकों, रक्षा विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग को बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। इससे भविष्य में संयुक्त परियोजनाओं और तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों की राय रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और जापान के बीच बढ़ता सहयोग इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक संतुलन को मजबूत करेगा। साथ ही समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) और क्षेत्रीय सहयोग को भी नई गति मिलेगी। रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई विशेषज्ञों के अनुसार दोनों देशों के बीच मजबूत होते रक्षा संबंध केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तकनीकी नवाचार, रक्षा उद्योग, समुद्री सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। इससे दोनों देशों की दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी। आगे की राह भारत और जापान ने नियमित उच्चस्तरीय संवाद, संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा तकनीक सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समन्वय को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी आने वाले वर्षों में दोनों देशों के सामरिक और रक्षा संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। स्रोत:भारत सरकार, जापान सरकार तथा दोनों देशों द्वारा जारी आधिकारिक संयुक्त बयान। मूल रिपोर्ट:3 जुलाई 2026 को भारत-जापान उच्चस्तरीय वार्ता और रक्षा सहयोग से संबंधित आधिकारिक जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें
Translate »