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अमित शाह का बड़ा ऐलान: 2029 तक नशामुक्त भारत का लक्ष्य, न्याय व्यवस्था में 3 साल की समयसीमा पर जोर

भोपाल: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नशे के खिलाफ केंद्र सरकार की मुहिम और नए आपराधिक कानूनों को लेकर बड़ा बयान दिया है। भोपाल में उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश को 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि नए criminal laws के पूरी तरह लागू होने के बाद FIR दर्ज होने से लेकर Supreme Court के फैसले तक न्याय प्रक्रिया को करीब तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है।

31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त मध्य प्रदेश का लक्ष्य

अमित शाह ने कहा कि मध्य प्रदेश में narcotics के खिलाफ अभियान को और मजबूत किया जाएगा।

उन्होंने लक्ष्य रखा कि 31 दिसंबर 2029 तक राज्य में नशीले पदार्थों के कारोबार और उनकी उपलब्धता को खत्म करने की दिशा में कठोर कार्रवाई की जाए।

केंद्र का लक्ष्य 2029 तक ‘नशामुक्त भारत’

मध्य प्रदेश के लक्ष्य के साथ केंद्र सरकार ने देशव्यापी स्तर पर भी 2029 तक नशामुक्त भारत के लिए एक roadmap तैयार किया है।

इस roadmap में जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक का तीन वर्षीय action plan शामिल है, जिसमें enforcement, drug supply chains, demand reduction, rehabilitation और inter-agency coordination पर जोर दिया गया है।

200 से ज्यादा action points पर काम

केंद्र सरकार के Vision Document 2026-29 में 200 से ज्यादा action points तय किए गए हैं।

इनमें drug sources और trafficking routes की पहचान, synthetic drugs पर नियंत्रण, money trails की जांच, rehabilitation capacity बढ़ाना और राज्यों की anti-narcotics machinery मजबूत करना शामिल है।

युवाओं को नशे से बचाने पर खास जोर

अमित शाह ने कहा कि drug abuse का सबसे गंभीर असर युवा पीढ़ी पर पड़ता है।

सरकार का कहना है कि enforcement के साथ-साथ awareness, treatment और rehabilitation भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे।

‘तारीख पर तारीख’ वाली व्यवस्था बदलने का दावा

न्याय व्यवस्था पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि देश की पुरानी criminal justice system को अक्सर ‘तारीख पर तारीख’ से जोड़ा जाता था।

उनका दावा है कि नए आपराधिक कानूनों के पूर्ण implementation के बाद criminal cases में अधिक स्पष्ट और समयबद्ध प्रक्रिया लागू होगी।

FIR से Supreme Court तक तीन साल का लक्ष्य

शाह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य FIR दर्ज होने से लेकर Supreme Court के अंतिम फैसले तक criminal justice process को तीन साल के भीतर पूरा करना है।

उन्होंने इसे नए criminal laws के बड़े objectives में से एक बताया।

BNS, BNSS और BSA पर भरोसा

नई न्याय व्यवस्था भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत संचालित हो रही है।

सरकार का कहना है कि इन कानूनों में investigation, forensic evidence, digital procedures और trial timelines को ज्यादा व्यवस्थित करने की कोशिश की गई है।

‘मूल मंत्र न्याय है, दंड नहीं’

अमित शाह ने कहा कि नए कानूनों का उद्देश्य सिर्फ punishment देना नहीं, बल्कि समय पर न्याय सुनिश्चित करना है।

उनके मुताबिक दंड का प्रावधान अपराध रोकने के लिए है, जबकि पूरी व्यवस्था का केंद्रीय उद्देश्य न्याय है।

Anti-Narcotics Task Force को मजबूत करने की योजना

राष्ट्रीय roadmap के तहत प्रत्येक राज्य में मार्च 2027 तक fully equipped Anti-Narcotics Task Force तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके साथ drug samples की forensic testing reports 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।

केंद्र और राज्यों के coordination पर जोर

नशे के खिलाफ अभियान में केंद्र सरकार राज्यों के साथ coordination बढ़ाने की तैयारी कर रही है।

Home Ministry quarterly reviews के जरिए progress monitor करने और measurable targets के आधार पर accountability तय करने की योजना पर काम कर रहा है।

बड़े reform agenda का हिस्सा

अमित शाह के ये दोनों संदेश—नशामुक्त भारत और समयबद्ध न्याय—केंद्र सरकार के broader governance reform agenda का हिस्सा हैं।

हालांकि तीन साल में FIR से Supreme Court तक न्याय का लक्ष्य व्यवहार में कितना सफल होगा, यह courts, police, prosecution, forensic infrastructure और pending cases की स्थिति पर निर्भर करेगा।

source – PIB / Hindustan Times / The Times of India / The Indian Express / Live Hindustan

जय राष्ट्र न्यूज़

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