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लॉरेंस बिश्नोई को ‘साहब’ कहने पर अभिजीत दीपके ने उठाए सवाल, दिल्ली पुलिस बोली—पुराना वीडियो, जुबान फिसली थी

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026: CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस की एक पुरानी प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो साझा कर सवाल उठाए हैं। इस क्लिप में एक DCP गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को कथित तौर पर “साहब” कहते सुनाई देते हैं। दीपके ने इस टिप्पणी को कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार से जोड़ते हुए कथित दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाए हैं। अभिजीत दीपके ने क्या सवाल उठाए? अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए सवाल किया कि एक कुख्यात गैंगस्टर के लिए सम्मानसूचक शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर सख्ती बरती जाती है। उन्होंने पुलिस की भाषा और व्यवहार में इस अंतर को लेकर सवाल उठाए। दिल्ली पुलिस ने क्या सफाई दी? दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा वीडियो एक साल से भी अधिक पुराना है। पुलिस के मुताबिक, DCP के मुंह से लॉरेंस बिश्नोई के नाम के साथ “साहब” शब्द निकलना केवल जुबान फिसलने का मामला था। पुलिस ने इस टिप्पणी को किसी विशेष सम्मान या तरजीही व्यवहार के तौर पर देखे जाने से इनकार किया। पुराना वीडियो अब क्यों चर्चा में है? टाइगर श्रॉफ के वाहन पर कथित गोलीबारी के मामले के बाद लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हुई है। इसी बीच दीपके द्वारा पुराना वीडियो साझा किए जाने के बाद पुलिस की भाषा और उसके व्यवहार को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। साबरमती जेल में बंद है लॉरेंस बिश्नोई लॉरेंस बिश्नोई गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है। उसके खिलाफ कई आपराधिक मामलों में आरोप हैं। उसके कथित गिरोह के नेटवर्क को लेकर विभिन्न राज्यों की जांच एजेंसियां भी जांच करती रही हैं। पुलिस के व्यवहार को लेकर फिर उठी बहस यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब CJP और दिल्ली पुलिस के बीच हालिया विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी तनाव की खबरें सामने आई हैं। अभिजीत दीपके को हाल ही में कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च के दौरान हिरासत में लिए जाने की खबर भी सामने आई थी। फिलहाल, इस मामले में दीपके की आलोचना और दिल्ली पुलिस की सफाई दोनों चर्चा में हैं। वीडियो में इस्तेमाल किए गए शब्द को लेकर उठे सवालों के बीच पुलिस ने इसे पुरानी रिकॉर्डिंग और जुबान फिसलने की घटना बताया है। स्रोत: द टाइम्स ऑफ इंडिया, द इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली के सीमापुरी में इमारत ढही, 4 की मौत; कई घायल, मलबे में दबे लोगों की तलाश जारी

नई दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली के न्यू सीमापुरी इलाके में एक बहुमंजिला इमारत गिरने से बड़ा हादसा हो गया। घटना में अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। मृतकों में एक गर्भवती महिला और बच्चे भी शामिल हैं। हादसे के बाद Delhi Fire Service, Police और rescue teams ने मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने और फंसे लोगों को निकालने का अभियान शुरू किया। दोपहर करीब 3:30 बजे ढही इमारत यह हादसा बुधवार दोपहर करीब 3:30 बजे न्यू सीमापुरी की संकरी गलियों में हुआ। Delhi Fire Service को collapse की सूचना मिलने के बाद कई fire tenders और rescue teams मौके पर भेजी गईं। 11 लोग मलबे में फंसे थे प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक collapse के बाद करीब 11 लोग मलबे में फंस गए थे। स्थानीय लोग भी firefighters के साथ debris हटाने और लोगों को निकालने में मदद करते नजर आए। गर्भवती महिला की भी मौत मृतकों में 21 वर्षीय Gulafsa भी शामिल थीं, जो करीब चार महीने की गर्भवती थीं। परिवार के अनुसार मलबे में दबे रहने के दौरान उन्होंने फोन कर पानी मांगा और सांस लेने में परेशानी की बात कही थी। बाद में उन्हें बाहर निकाला गया, लेकिन उनकी मौत हो गई। बच्चों की भी गई जान इस हादसे में बच्चों की मौत की भी पुष्टि हुई है। अलग-अलग शुरुआती reports में मृतकों की संख्या तीन बताई गई थी, लेकिन बाद में death toll बढ़कर चार हो गई। 8 लोग घायल पुलिस के मुताबिक कम से कम 8 लोगों को घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें एक तीन साल का बच्चा भी शामिल था। घायलों का इलाज आसपास के hospitals में किया जा रहा है। इमारत की मंजिलों को लेकर अलग-अलग जानकारी शुरुआती reports में इसे पांच मंजिला building बताया गया, जबकि MCD के बयान में structure को ground-plus-three-floor बताया गया है। MCD के मुताबिक इमारत करीब 20-25 साल पुरानी थी और लगभग 25 square yards DUSIB land पर बनी थी। भूकंप के बाद cracks आने का दावा कुछ स्थानीय लोगों ने दावा किया कि हाल में आए tremors के बाद building में cracks दिखाई दिए थे। हालांकि collapse का वास्तविक कारण अभी official investigation से तय होना बाकी है। पास की इमारत भी demolition के लिए चिन्हित थी ताजा reports में यह भी सामने आया कि इलाके की एक nearby building पहले से demolition के लिए marked थी। इससे पूरे इलाके में पुराने और कमजोर structures की safety को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। संकरी गलियों ने rescue operation किया मुश्किल हादसे वाली जगह densely populated area में है। संकरी गलियों की वजह से heavy rescue equipment और ambulances को घटनास्थल तक पहुंचने में मुश्किल हुई, जिससे operation चुनौतीपूर्ण बना रहा। जांच के बाद पता चलेगा collapse का कारण Authorities अब यह जांच कर रही हैं कि building में structural weakness, unauthorized construction या अन्य किसी कारण से collapse हुआ। Structural safety और civic approvals की भी जांच की जा सकती है। इलाके में traffic advisory हादसे के बाद आसपास की सड़कों पर traffic restrictions भी लगाई गईं। लोगों को rescue operation पूरा होने तक affected area से बचने की सलाह दी गई। Source – The Indian Express, Hindustan Times, NDTV, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर विवाद के बाद महिला पत्रकार समेत 17 लोग हिरासत में, पत्रकारों की शिकायत Crime Branch को ट्रांसफर

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हालिया प्रदर्शन की कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों द्वारा पुलिस अधिकारियों पर लगाए गए कथित दुर्व्यवहार और यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर विवाद बढ़ गया है। 5 अक्टूबर को Parliament Street Police Station के बाहर कार्रवाई की मांग करने पहुंचे लोगों में से 17 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया, जिनमें एक महिला पत्रकार भी शामिल थीं। दिल्ली पुलिस ने महिला पत्रकारों की शिकायतों को जांच के लिए Crime Branch को ट्रांसफर कर दिया है। Parliament Street Police Station के बाहर जुटे प्रदर्शनकारी प्रदर्शनकारी महिला पत्रकारों की शिकायतों पर FIR और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर थाने के बाहर पहुंचे थे। मौके पर पुलिस ने बैरिकेडिंग की और भीड़ को आगे बढ़ने से रोका। इसके बाद कई लोगों को हिरासत में लिया गया। 17 लोगों को हिरासत में लिया गया रिपोर्टों के अनुसार कुल 17 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें एक महिला पत्रकार और प्रदर्शन से जुड़े अन्य लोग शामिल थे। पुलिस ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई। महिला पत्रकारों ने लगाए गंभीर आरोप मामला जंतर-मंतर पर CEC ज्ञानेश कुमार और SIR के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन की कवरेज से जुड़ा है। तीन महिला पत्रकारों ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके साथ कथित यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार हुआ। ये आरोप फिलहाल शिकायत और जांच के स्तर पर हैं। शिकायत Crime Branch को सौंपी गई दिल्ली पुलिस ने महिला पत्रकारों की शिकायतों को New Delhi District से Crime Branch को ट्रांसफर कर दिया है। पुलिस का कहना है कि इससे जांच अधिक स्वतंत्र तरीके से की जा सकेगी और उपलब्ध वीडियो, बयान तथा अन्य साक्ष्यों की समीक्षा होगी। पत्रकार रोजी का मामला भी चर्चा में इस पूरे विवाद में स्वतंत्र पत्रकार रोजी का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। उन्होंने एक पुलिस अधिकारी पर कथित अनुचित स्पर्श और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था तथा on-camera apology और कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। आरोपों की पुष्टि अभी जांच में होनी बाकी है। Press Club में भी उठा मामला महिला पत्रकारों के आरोपों के बाद पत्रकार संगठनों और स्वतंत्र मीडिया समूहों ने भी प्रतिक्रिया दी। Press Club of India में भी इस मामले को लेकर चर्चा और कार्रवाई की मांग सामने आई। पत्रकारों ने कहा कि protest coverage के दौरान media professionals की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। दिल्ली पुलिस ने कहा- जांच जारी दिल्ली पुलिस ने कहा है कि शिकायतों की जांच Crime Branch करेगी और उपलब्ध material के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। पुलिस ने यह भी साफ किया कि केवल आरोप लगाए जाने से किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय नहीं हो जाती; जांच के बाद ही निष्कर्ष निकलेगा। Jantar Mantar Protest से जुड़ा बड़ा विवाद यह विवाद उस व्यापक राजनीतिक और छात्र आंदोलन से जुड़ा है जिसमें SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में जंतर-मंतर और आसपास कई लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ा है। महिला पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल इस घटना ने protest coverage के दौरान महिला पत्रकारों की सुरक्षा और पुलिस व्यवहार पर भी सवाल खड़े किए हैं। मीडिया संगठनों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में शिकायतों की पारदर्शी और समयबद्ध जांच की जाए। जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी फिलहाल मामला Crime Branch के पास है और जांच जारी है। महिला पत्रकारों के आरोपों, पुलिस अधिकारियों के पक्ष और उपलब्ध वीडियो तथा अन्य साक्ष्यों की समीक्षा के बाद ही यह तय होगा कि किसी तरह की कानूनी या विभागीय कार्रवाई बनती है या नहीं। Source – The Indian Express / Delhi Police / PTI / Press Club of India जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली के मॉडल टाउन में हल्दीराम वाली इमारत में लगी भीषण आग, 30 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

नई दिल्ली: उत्तर-पश्चिम दिल्ली के मॉडल टाउन इलाके में हल्दीराम आउटलेट वाली एक बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग के बाद इमारत और आसपास के परिसरों से करीब 30 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। आग बुझाने के लिए दिल्ली फायर सर्विस की 23 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी के घायल होने या जान जाने की सूचना नहीं है। The New Indian Express दूसरी मंजिल पर लगी आग घटना 25 सितंबर 2026 की दोपहर की है। अधिकारियों के मुताबिक मॉडल टाउन की बहुमंजिला इमारत की दूसरी मंजिल पर आग लगी, जहां हल्दीराम का आउटलेट भी मौजूद है। कुछ ही देर में आग और धुएं ने बड़ा रूप ले लिया। इमारत से घना काला धुआं निकलता दिखाई दिया, जिसके बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। The Times of India दमकल की 23 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं दिल्ली फायर सर्विस को दोपहर में आग लगने की सूचना मिली। शुरुआत में चार दमकल गाड़ियों को भेजा गया था, लेकिन आग की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त गाड़ियां बुलाई गईं। बाद में कुल 23 दमकल वाहनों को आग बुझाने के अभियान में लगाया गया। करीब 4 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया, जिसके बाद कूलिंग ऑपरेशन शुरू किया गया। The Print Hindi पुलिस ने 30 लोगों को सुरक्षित निकाला आग की सूचना मिलने के बाद मॉडल टाउन थाने के हेड कॉन्स्टेबल पवन शुरुआती responders में शामिल रहे। इसके बाद SHO और अन्य पुलिसकर्मी भी घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने प्रभावित इमारत के साथ आसपास की इमारतों में मौजूद लोगों को भी बाहर निकालना शुरू किया। अधिकारियों के मुताबिक इस अभियान में करीब 30 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। The New Indian Express कोई हताहत नहीं इतनी बड़ी आग के बावजूद घटना में किसी व्यक्ति की मौत या घायल होने की खबर नहीं है। पुलिस का कहना है कि समय रहते इमारत को खाली करा लिए जाने से बड़ा हादसा टल गया। आसपास की इमारतों से भी लोगों को एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थान पर भेजा गया था। The Print शॉर्ट सर्किट की आशंका पुलिस की शुरुआती जानकारी के मुताबिक आग लगने के पीछे शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है। हालांकि आग लगने का अंतिम कारण विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। दमकल विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां घटना की परिस्थितियों की जांच कर रही हैं। The New Indian Express VIDEO में दिखा काले धुएं का गुबार घटना के वीडियो और तस्वीरें भी सामने आई हैं। इनमें इमारत से बड़ी मात्रा में काला धुआं निकलता दिखाई देता है, जबकि सड़क पर दमकल कर्मी आग बुझाने में जुटे नजर आते हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद घटना तेजी से चर्चा में आ गई। Times Now Hindi समय रहते रेस्क्यू से टला बड़ा हादसा मॉडल टाउन जैसे व्यस्त इलाके में स्थित बहुमंजिला इमारत में आग लगने से स्थिति गंभीर हो सकती थी। लेकिन पुलिस और फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई के कारण अंदर मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। फिलहाल आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है और संबंधित एजेंसियां नुकसान तथा आग के वास्तविक कारण का आकलन कर रही हैं। source – PTI / The New Indian Express / ThePrint / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में 7 की मौत, 5 DU छात्र शामिल; PG Operator भी गिरफ्तार

नई दिल्ली, 9 सितंबर 2026: दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG building गिरने के हादसे में 7 लोगों की मौत हुई, जिनमें 5 Delhi University के छात्र शामिल थे। हादसा 6 सितंबर को DU South Campus के पास हुआ था। मामले में जांच तेज करते हुए Delhi Police ने अब PG operator Sudhanshu को भी गिरफ्तार कर लिया है। इन 5 DU छात्रों की हुई मौत हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों की पहचान Abhishek Kumar (20), Yuvraj Soni (20), Pawan Kumar (17), Arpit Jahaj (18) और Akshat Singh Yadav (18) के रूप में हुई है। इसके अलावा दो मजदूरों की भी मौत हुई। अलग-अलग DU Colleges में पढ़ते थे छात्र 18 वर्षीय Arpit Jahaj Atma Ram Sanatan Dharma College में second-year student थे और Chartered Accountancy की तैयारी कर रहे थे। Yuvraj Soni Motilal Nehru College के second-year student और CA aspirant थे। हादसे में मारे गए अन्य छात्र भी Delhi University के अलग-अलग colleges में पढ़ाई कर रहे थे। Satya Niketan DU South Campus के छात्रों के लिए एक प्रमुख PG accommodation hub है। पांच मंजिला PG Building हुई थी धराशायी 6 सितंबर को करीब दोपहर 1:30 बजे Satya Niketan में Hostel Daze नाम से चल रही पांच मंजिला PG building अचानक गिर गई। मलबे में कई छात्र और अन्य लोग दब गए थे। Rescue operation अगले दिन शाम तक चला। Building में कथित Illegal Construction की जांच Police FIR के मुताबिक लगभग 50 साल पुरानी इमारत में अतिरिक्त floors और construction किए जाने की जांच की जा रही है। Police का आरोप है कि building की load-bearing capacity को लेकर जोखिम के बावजूद construction किया गया। इन आरोपों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद तय होगा। Owner और Family Members भी गिरफ्तार Delhi Police ने building owner Hariram Bansal, उनकी पत्नी Urmila Gupta और बेटे Mahesh Gupta को भी गिरफ्तार किया था। Hariram और उनकी पत्नी को 14 दिन की judicial custody में भेजा गया, जबकि बेटे को police custody मिली। अब PG Operator Sudhanshu गिरफ्तार मामले में 9 सितंबर को Police ने private hostel चलाने वाले Sudhanshu को गिरफ्तार किया। Police उससे building operations, accommodation और हादसे से पहले की परिस्थितियों को लेकर पूछताछ कर रही है। MCD के 5 Officials पर कार्रवाई हादसे के बाद Municipal Corporation of Delhi के पांच अधिकारियों को suspend किया गया। घटना ने Delhi में private PG और student hostels की structural और fire safety को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। PGs को Regulate करने की तैयारी हादसे के बाद Delhi government ने PG accommodations के लिए licensing, police clearance, structural और fire-safety NOC तथा public registration portal जैसी व्यवस्थाओं वाला regulatory framework तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। सत्य निकेतन हादसे ने DU के हजारों outstation students के लिए सुरक्षित और affordable accommodation की कमी को फिर उजागर कर दिया है। Delhi University में 2.5 लाख से ज्यादा conventional-mode students के मुकाबले hostel capacity करीब 9,000 beds ही बताई गई है। source – Hindustan Times / The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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नई UNEP Report: Air-Quality Norms पूरे हुए तो Delhi का PM2.5 Exposure Burden 2040 तक 20% घट सकता है

नई दिल्ली, 8 सितंबर 2026: दिल्ली में वायु प्रदूषण से जूझ रहे लोगों के लिए नई UNEP report में महत्वपूर्ण संभावना सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक अगर Delhi मौजूदा national air-quality standards को 2026 से तय समय पर हासिल और लागू करता है, तो 2040 तक PM2.5 exposure burden करीब 20% कम किया जा सकता है। वहीं implementation में लगभग आठ साल की देरी होने पर यह फायदा घटकर करीब 10% रह सकता है। क्या है नई UNEP Report? United Nations Environment Programme (UNEP) और Climate and Clean Air Coalition (CCAC) ने “Hidden Assets: The Economic and Health Case for Climate and Clean Air Action” नाम से नया global assessment जारी किया है। UNEP इसे climate change और air pollution पर integrated action के economic benefits का अब तक का सबसे comprehensive global assessment बताता है। Delhi के लिए 20% Reduction का अनुमान Report के Delhi-specific assessment के मुताबिक अगर मौजूदा national air-quality standards को समय पर लागू किया जाता है, तो 2040 तक लोगों का PM2.5 exposure burden करीब 20% कम हो सकता है। लेकिन अगर implementation में global average के मुताबिक लगभग 7.5 से 8 साल की देरी होती है, तो reduction सिर्फ करीब 10% रह सकता है। देरी से आधा हो सकता है फायदा UNEP assessment में कहा गया है कि institutional, economic, technological और social barriers की वजह से clean-air solutions लागू करने में औसतन कई साल की देरी हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब आठ साल की delay 2035 तक हासिल की जा सकने वाली emissions reduction को लगभग आधा कर सकती है। 25 Solutions सुझाए गए Report ने climate change और air pollution दोनों से एक साथ निपटने के लिए 25 solutions चिन्हित किए हैं। इनमें प्रमुख रूप से: जैसे उपाय शामिल हैं। Air Pollution का Health Burden बेहद बड़ा UNEP के मुताबिक 2025 में human-caused outdoor air pollution यानी PM2.5 और ozone exposure से दुनिया भर में अनुमानित 6.4 million premature deaths जुड़ी थीं। Household air pollution से अलग से करीब 2 million premature deaths जुड़ी थीं, जिनमें लगभग 300,000 बच्चे शामिल थे। Integrated Action से 60–70% Health Burden घट सकता है Global level पर UNEP का अनुमान है कि सभी 25 clean-air और climate solutions पूरी तरह लागू किए जाएं तो air pollution के annual health burden में 60 से 70% तक कमी लाई जा सकती है। इसके साथ 2050 तक carbon dioxide emissions लगभग आधी और methane emissions करीब 60% तक कम हो सकती हैं। हर $1 Investment पर $15 Benefit UNEP assessment का बड़ा economic finding यह है कि climate और clean-air action में लगाया गया हर $1 लगभग $15 तक economic benefit दे सकता है। इसमें healthcare costs में कमी, बेहतर labour productivity, कम premature deaths और healthier population जैसे benefits शामिल हैं। हर साल की देरी से $1.5 Trillion का नुकसान Report में चेतावनी दी गई है कि clean-air और climate measures लागू करने में हर साल की देरी से दुनिया $1.5 trillion से अधिक के संभावित annual benefits गंवा सकती है। 2035 तक इन measures से मिलने वाला annual economic benefit global GDP के करीब 2.8% के बराबर हो सकता है। Delhi के लिए क्यों महत्वपूर्ण है Report? Delhi लंबे समय से PM2.5 pollution की गंभीर समस्या का सामना कर रहा है। नई UNEP analysis यह दिखाती है कि केवल नए pollution targets घोषित करना पर्याप्त नहीं होगा—implementation की speed भी health benefits तय करने में बेहद महत्वपूर्ण होगी। अगर existing standards समय पर हासिल किए गए तो 2040 तक exposure burden में संभावित 20% reduction लाखों residents के लिए बेहतर air quality और health outcomes की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है। source – UNEP / Climate and Clean Air Coalition / India Todayजय राष्ट्र न्यूज़

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सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG इमारत भरभराकर गिरी, 7 की मौत; मलबे में अब भी लोगों की तलाश

नई दिल्ली, 7 सितंबर 2026: दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में छात्रों के PG के रूप में इस्तेमाल की जा रही पांच मंजिला इमारत के ढहने से बड़ा हादसा हो गया। रविवार दोपहर अचानक पूरी इमारत कुछ ही सेकंड में जमींदोज हो गई। आज तक हादसे में 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 11 लोगों को बचाया गया है। राहत एवं बचाव टीमें मलबे में फंसे अन्य लोगों की तलाश कर रही हैं। दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ हादसा Delhi Police को 6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे Satya Niketan में building collapse की PCR call मिली थी। सूचना मिलते ही Delhi Police, Delhi Fire Services, NDRF, DDMA और ambulance teams मौके पर पहुंचीं और बड़े स्तर पर rescue operation शुरू किया गया। CCTV में कैद हुआ इमारत गिरने का खौफनाक मंजर हादसे का CCTV footage भी सामने आया है। वीडियो में इमारत से पहले मलबा गिरता दिखाई देता है और कुछ ही सेकंड बाद पूरी building भरभराकर नीचे आ जाती है। पास मौजूद एक दुकानदार खतरा देखकर समय रहते भागता हुआ भी दिखाई देता है। Basement और Ground Floor पर चल रहा था काम पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि लगभग 40 से 50 साल पुरानी इमारत में renovation और basement से जुड़ा काम चल रहा था। अधिकारियों को आशंका है कि structural pillar या walls से छेड़छाड़ के कारण building कमजोर हुई होगी। हादसे के सही कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा। PG में रहते थे Delhi University के छात्र इस building का इस्तेमाल student PG के रूप में किया जा रहा था। Satya Niketan Delhi University के South Campus के नजदीक है और यहां बड़ी संख्या में छात्र PG और hostels में रहते हैं। हादसे के समय इमारत के अंदर कई छात्रों के मौजूद होने की आशंका जताई गई थी। Building Owner के खिलाफ FIR Delhi Police ने कथित building owner Hariram Bansal और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। मामला BNS की धारा 105, 290 और 125(a) सहित संबंधित provisions के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस ने मालिक की तलाश के लिए कई teams बनाई हैं और उसके खिलाफ Look Out Circular भी जारी किया गया है। पांच MCD अधिकारी Suspended आज Delhi government ने हादसे के बाद बड़ी administrative कार्रवाई करते हुए MCD के पांच अधिकारियों को suspend कर दिया। इनमें South Zone के Deputy Commissioner और building department से जुड़े engineering officials शामिल हैं। आसपास की unsafe buildings की जांच और demolition की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। PM Modi ने जताया दुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। PMO ने कहा कि authorities मौके पर राहत और सहायता उपलब्ध करा रही हैं। Rescue Operation जारी NDRF और अन्य agencies मलबा हटाकर search operation चला रही हैं। आसपास की कमजोर इमारतों को भी खाली कराया जा रहा है ताकि किसी और हादसे का खतरा न रहे। हादसे ने Satya Niketan में चल रहे student PGs की building safety और construction norms पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। source – India Today / Aaj Tak / PIBजय राष्ट्र न्यूज़

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स्वतंत्र भारद्वाज के इंटरव्यू में गंभीर दावे, वायरल वीडियो के बाद उठे नए सवाल; पुलिस ने राजनीतिक दबाव के आरोप नकारे

नई दिल्ली, 5 सितंबर 2026: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज के एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के वीडियो सामने आने के बाद जंतर-मंतर पर हुई मारपीट का मामला फिर चर्चा में आ गया है। इंटरव्यू में भारद्वाज ने एक प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला करने और राजनीतिक संपर्कों को लेकर कई गंभीर दावे किए। इसके बाद विपक्षी नेताओं और Cockroach Janta Party (CJP) ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारी के पिता पर हमले को लेकर दावा वायरल पॉडकास्ट में भारद्वाज ने दावा किया कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान उन्होंने छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार को मारा था। उन्होंने चोट की गंभीरता को लेकर भी बड़ा दावा किया, जिसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। राजनीतिक संरक्षण को लेकर भी कही बातें इंटरव्यू में भारद्वाज ने कुछ राजनीतिक नेताओं के साथ अपने संबंधों का दावा किया और कथित तौर पर कहा कि इन संपर्कों के कारण उन्हें जेल नहीं जाना पड़ा। इन्हीं बयानों के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ा और कई नेताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। दिल्ली पुलिस ने दावों को बताया बेबुनियाद दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों से साफ इनकार किया है। पुलिस के मुताबिक जांच कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की गई और किसी नेता के दबाव में कार्रवाई रोकने का दावा तथ्यों पर आधारित नहीं है। पुलिस ने यह भी कहा कि medical reports में संजय कुमार की skull fracture की पुष्टि नहीं हुई और चोट को simple injury बताया गया। भारद्वाज ने बाद में कहा—Self Defence में किया था हमला विवाद बढ़ने के बाद भारद्वाज ने NDTV को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि वह भीड़ से घिर गए थे और उन्होंने जो किया, वह self-defence में किया था। उन्होंने अपने ऊपर लगाए जा रहे कई आरोपों से भी इनकार किया। गिरफ्तारी की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन शुक्रवार को CJP समर्थकों और अन्य प्रदर्शनकारियों ने Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन कर भारद्वाज के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया। आरोप और पुलिस के बयान में बड़ा अंतर मामले में सबसे बड़ा सवाल भारद्वाज के वायरल इंटरव्यू में किए गए दावों और दिल्ली पुलिस के आधिकारिक version के बीच अंतर को लेकर है। जहां भारद्वाज ने गंभीर चोट और राजनीतिक संरक्षण जैसी बातें कहीं, वहीं पुलिस ने skull fracture और political interference—दोनों दावों को नकार दिया है। अब आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया से ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। source – The Indian Express / Delhi Police / NDTVजय राष्ट्र न्यूज़

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केंद्रीय मंत्रियों के दिल्ली स्थित सरकारी घरों की मरम्मत पर 2025-26 में ₹92 करोड़ खर्च: RTI में खुलासा

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के लुटियंस जोन में केंद्रीय मंत्रियों को आवंटित सरकारी बंगलों की मरम्मत, renovation और furnishing पर होने वाला खर्च रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। RTI के जरिए सामने आई जानकारी के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में इन आधिकारिक आवासों पर ₹92.35 करोड़ खर्च किए गए। यह 2014-15 में दर्ज ₹27.47 करोड़ के मुकाबले तीन गुना से भी अधिक है। यह जानकारी समाचार एजेंसी PTI द्वारा दायर Right to Information यानी RTI आवेदन के जवाब से सामने आई है। इन सरकारी आवासों की देखरेख और मरम्मत का काम Central Public Works Department (CPWD) करता है। 12 साल में ₹547 करोड़ से ज्यादा खर्च RTI के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच केंद्रीय मंत्रियों के आधिकारिक आवासों की मरम्मत, renovation और maintenance पर कुल ₹547.68 करोड़ खर्च किए गए। इस अवधि में 2025-26 का ₹92.35 करोड़ का आंकड़ा सबसे ज्यादा बताया गया है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में इन सरकारी बंगलों के maintenance पर होने वाला सालाना खर्च काफी तेजी से बढ़ा है। 2014-15 में खर्च था ₹27.47 करोड़ RTI में उपलब्ध year-wise data के मुताबिक 2014-15 में केंद्रीय मंत्रियों के आवासों पर ₹27.47 करोड़ खर्च हुए थे। इसके बाद खर्च इस प्रकार रहा: इस तरह पिछले वित्त वर्ष में खर्च 2014-15 के मुकाबले तीन गुना से ज्यादा हो गया। क्यों बढ़ रहा सरकारी बंगलों की मरम्मत का खर्च? अधिकारियों ने इस बढ़ते खर्च के पीछे कई कारण बताए हैं। लुटियंस दिल्ली के कई बंगले करीब 80 से 100 साल पुराने हैं। इनमें समय के साथ seepage, termites, पुरानी electrical wiring, plumbing और structural wear-and-tear जैसी समस्याएं सामने आती रहती हैं। एक अधिकारी के मुताबिक इनमें से कुछ बंगलों की स्थिति ऐसी भी रही है कि उन्हें बड़े स्तर पर upgrade करने की जरूरत पड़ी। इसके अलावा construction materials और labour की बढ़ती कीमत यानी inflation को भी खर्च बढ़ने की एक वजह बताया गया है। Fans, LED Lights और Plumbing पर भी होता है खर्च एक केंद्रीय मंत्री के staff member ने PTI को बताया कि सरकारी आवासों में बार-बार आने वाली maintenance requests में electrical और plumbing से जुड़े काम प्रमुख होते हैं। इनमें fans, LED lights, plumbing repairs और कुछ वर्षों के अंतराल पर floor tiles बदलने जैसे काम शामिल हो सकते हैं। यानी ₹92.35 करोड़ का पूरा खर्च केवल बड़े renovation projects पर नहीं, बल्कि नियमित repair और furnishing जैसे अलग-अलग कामों को मिलाकर है। 2019 के बाद तेजी से बढ़ा Average खर्च आंकड़ों में एक और महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई देता है। 2014 से 2019 के बीच केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी आवासों की repair और upgradation पर औसत सालाना खर्च करीब ₹26.78 करोड़ रहा। वहीं 2019 से 2024 के बीच यह औसत लगभग दोगुना होकर ₹50 करोड़ सालाना के करीब पहुंच गया। इसके बाद 2024-25 में ₹71.98 करोड़ और 2025-26 में रिकॉर्ड ₹92.35 करोड़ खर्च हुआ। करीब 70 से 72 Ministers के लिए Official Residences केंद्र की Council of Ministers में अलग-अलग समय पर करीब 70 से 72 Cabinet Ministers और Ministers of State शामिल रहे हैं। ₹92.35 करोड़ के कुल सालाना खर्च को केवल गणितीय औसत में देखें तो यह करीब ₹1.2 करोड़ प्रति मंत्री बैठता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर मंत्री के घर पर ₹1.2 करोड़ खर्च हुए। वास्तविक खर्च हर bungalow की उम्र, स्थिति और वहां कराए गए काम के आधार पर काफी अलग हो सकता है। RTI में किन खर्चों की जानकारी नहीं मिली? RTI में केंद्रीय मंत्रियों के आधिकारिक residences पर हुए खर्च की जानकारी उपलब्ध कराई गई है। लेकिन CPWD ने इस अवधि के दौरान ऐसे Lok Sabha और Rajya Sabha MPs जो मंत्री नहीं हैं, उनके सरकारी आवासों पर हुए खर्च का data उपलब्ध नहीं कराया। इसी तरह Union Ministers और Ministers of State के official offices पर हुए maintenance expenditure की जानकारी भी इस RTI response में शामिल नहीं है। इसलिए ₹547.68 करोड़ का आंकड़ा सभी सांसदों और सरकारी कार्यालयों के कुल maintenance खर्च को नहीं दर्शाता। Lutyens Delhi के बंगले ऐतिहासिक भी हैं दिल्ली का Lutyens Bungalow Zone ब्रिटिश काल में नई दिल्ली को राजधानी के रूप में विकसित किए जाने के दौरान बनाया गया था। इस क्षेत्र का अधिकांश विकास 1912 से 1930 के बीच हुआ। आजादी के बाद इन बंगलों का इस्तेमाल देश के वरिष्ठ मंत्रियों और अन्य सरकारी पदाधिकारियों के आधिकारिक निवास के रूप में होने लगा। कई इमारतें अब लगभग एक सदी पुरानी हो चुकी हैं, जिसके चलते उनका maintenance आधुनिक residential buildings की तुलना में अधिक जटिल हो सकता है। 2004 से 2009 में खर्च हुए थे ₹93.50 करोड़ RTI से जुड़े पुराने आंकड़े भी खर्च में आए बदलाव की तस्वीर दिखाते हैं। सितंबर 2009 के एक RTI response के मुताबिक 2004 से 2009 के पांच साल के दौरान MPs और Union Ministers के बंगलों की maintenance और renovation पर कुल ₹93.50 करोड़ खर्च हुए थे। इसके मुकाबले केवल 2025-26 में केंद्रीय मंत्रियों के आवासों पर खर्च ₹92.35 करोड़ तक पहुंच गया है। हालांकि दोनों आंकड़ों की category और coverage पूरी तरह समान नहीं है, इसलिए सीधे तुलना करते समय सावधानी जरूरी है। RTI के आंकड़ों ने बढ़ाई सरकारी खर्च पर चर्चा ₹92.35 करोड़ का आंकड़ा सामने आने के बाद सरकारी आवासों पर होने वाले सार्वजनिक खर्च को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। एक तरफ पुराने और ऐतिहासिक बंगलों के रखरखाव, electrical safety, plumbing और structural repair की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ इतनी बड़ी राशि खर्च होने के कारण transparency और cost efficiency को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल RTI से सामने आया मुख्य तथ्य यह है कि 2025-26 में केंद्रीय मंत्रियों के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवासों की repair, renovation और furnishing पर ₹92.35 करोड़ खर्च हुए, जो पिछले 12 वर्षों में सबसे ऊंचा सालाना आंकड़ा है। स्रोत – पीटीआई, एनडीटीवी, बिजनेस स्टैंडर्ड जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर प्रदर्शन पर फिर सियासत तेज! घायल छात्र के साथ राहुल गांधी दिल्ली पुलिस स्टेशन पहुंचे

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर शुक्रवार, 21 अगस्त 2026, को राजनीतिक विवाद फिर तेज हो गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी घायल छात्र साहिल लोचब को साथ लेकर दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे और मामले में FIR दर्ज करने की मांग की। घायल छात्र को साथ लेकर थाने पहुंचे राहुल गांधी राहुल गांधी शुक्रवार को DCP कार्यालय पहुंचे। उनके साथ साहिल लोचब भी मौजूद थे, जिन्हें 20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट जैसी चोटें लगी थीं। रिपोर्टों के मुताबिक राहुल गांधी ने पुलिस अधिकारियों से मामले की शिकायत दर्ज करने और कथित बल प्रयोग की जांच कराने की मांग की। FIR दर्ज नहीं होने पर धरने पर बैठे राहुल राहुल गांधी ने पुलिस स्टेशन के बाहर धरना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि जब तक शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की जाती, तब तक वह वहां से नहीं हटेंगे। इस दौरान घायल छात्र और उसका परिवार भी उनके साथ मौजूद रहा। राहुल गांधी पहले भी इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और गृह मंत्री से जवाब मांग चुके हैं। पैलेट गन के इस्तेमाल पर आमने-सामने दावे इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा प्रदर्शन के दौरान कथित पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर है। कांग्रेस का आरोप है कि छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया और कुछ प्रदर्शनकारियों को पैलेट जैसी चोटें आईं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार कर चुकी है और कह चुकी है कि उसके पास ऐसी हथियार प्रणाली मौजूद नहीं है। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक और सीमित बल इस्तेमाल करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट की जांच भी जारी मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की परिस्थितियों और कथित अत्यधिक बल प्रयोग की जांच के लिए हाई-पावर विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। इससे यह मामला सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब न्यायिक निगरानी में भी जांच का विषय बन गया है। जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन को लेकर पुलिस अलर्ट इसी बीच दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर किसी नए विरोध प्रदर्शन या जुलूस की अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस ने लोगों से बिना अनुमति किसी सार्वजनिक सभा में शामिल न होने की अपील की है। इससे राजधानी में प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा और राजनीतिक तनाव दोनों बढ़ गए हैं। राहुल गांधी के कदम से बढ़ी राजनीतिक हलचल घायल छात्र को लेकर सीधे पुलिस स्टेशन पहुंचना राहुल गांधी की ओर से मामले को दोबारा राजनीतिक केंद्र में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस इसे छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती और जवाबदेही का मुद्दा बना रही है, जबकि पुलिस अपने ऊपर लगे पैलेट गन के आरोपों से इनकार कर रही है। अब सबकी नजर FIR, पुलिस जांच और सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट पर है। इन्हीं के जरिए यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान वास्तव में किस तरह के बल का इस्तेमाल हुआ था। स्रोत: Delhi Police, PTI, India Today, Outlook India, Times of India Jai Rashtra News

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