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प्रशांत किशोर का चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप, बोले- ‘पक्षपात से BJP को मिला अनुचित फायदा’

मुजफ्फरपुर: जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के कथित “पक्षपातपूर्ण रवैये” से भारतीय जनता पार्टी को चुनावों में अनुचित लाभ मिला है। किशोर ने चुनावी खर्च, प्रशासनिक मशीनरी के इस्तेमाल और मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों को लेकर भी सवाल उठाए। ये प्रशांत किशोर के राजनीतिक आरोप हैं; चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को संस्थागत प्रक्रिया और सर्वसम्मति से लिया गया बताया है। SIR विवाद के बीच आया प्रशांत किशोर का बयान प्रशांत किशोर ने 25 सितंबर 2026 को मुजफ्फरपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान चुनाव आयोग पर ये आरोप लगाए। उनसे हाल में सामने आई उस रिपोर्ट को लेकर सवाल किया गया था, जिसमें Special Intensive Revision यानी SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर चुनाव आयोग के भीतर अलग-अलग टिप्पणियों और आपत्तियों का दावा किया गया था। ‘2021 में ही उठाया था आयोग की निष्पक्षता का सवाल’ प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर पहली बार सवाल अब नहीं उठाया है। उन्होंने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस समय भी BJP को चुनाव आयोग के कथित पक्षपात का फायदा मिला था। किशोर उस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि यदि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष होते तो पश्चिम बंगाल में BJP का प्रदर्शन अलग हो सकता था। यह किशोर का राजनीतिक आकलन है और इसे किसी आधिकारिक जांच ने स्थापित नहीं किया है। बांकीपुर उपचुनाव का भी दिया उदाहरण किशोर ने हाल के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का उदाहरण भी दिया, जहां उन्होंने जीत दर्ज की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान प्रशासनिक मशीनरी के कथित दुरुपयोग और BJP द्वारा बड़े पैमाने पर चुनावी खर्च की अनदेखी की गई। किशोर ने दावा किया कि ऐसी परिस्थितियां न होतीं तो उनकी जीत का अंतर और बड़ा होता। इससे पहले उन्होंने पटना के SSP की कथित “पक्षपातपूर्ण भूमिका” को लेकर बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सामने शिकायत भी दर्ज कराई थी। पैसे, नौकरशाही और वोटर लिस्ट पर उठाए सवाल प्रशांत किशोर ने कहा कि उनके अनुसार चुनाव प्रक्रिया केवल एक स्तर पर नहीं, बल्कि कई मोर्चों पर प्रभावित हो रही है। उन्होंने चुनाव में धन के इस्तेमाल, सरकारी अधिकारियों की भूमिका और मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि करीबी मुकाबलों में आयोग का कथित पक्षपात परिणाम पर असर डाल सकता है। इन आरोपों को चुनाव आयोग या किसी अदालत ने प्रमाणित तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया है। ज्ञानेश कुमार को लेकर भी दिया बयान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद पर प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव आयोग में कथित समस्याएं केवल मौजूदा CEC के कार्यकाल से शुरू नहीं हुई हैं। उन्होंने पूर्व चुनाव अधिकारियों की नियुक्तियों और पद छोड़ने के बाद मिली जिम्मेदारियों पर भी सवाल उठाए। हालांकि किसी व्यक्ति के खिलाफ quid pro quo का उनका आरोप प्रमाणित तथ्य नहीं है। चुनाव आयोग में कथित मतभेद की रिपोर्ट क्या है? The Indian Express की जांच में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में SIR समेत विभिन्न प्रक्रियाओं को लेकर कई लिखित टिप्पणियां या आपत्तियां दर्ज की थीं। इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों और कुछ NDA सहयोगियों ने भी चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी? चुनाव आयोग ने कहा कि किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग विचार, सुझाव और लिखित टिप्पणियां निर्णय लेने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार SIR से संबंधित अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। आयोग ने कहा कि सदस्यों द्वारा दिए गए सुझाव चुनाव प्रक्रिया को बेहतर बनाने के उद्देश्य से थे। SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी पूछ चुका है सवाल दिल्ली में SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं को “logical discrepancy” से जुड़े नोटिस जारी किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने कुछ नोटिसों के लगभग “mechanical” तरीके से जारी होने पर चिंता जताते हुए आयोग से उनकी प्रक्रिया और आधार समझाने को कहा। चुनाव आयोग पर राजनीतिक बहस तेज प्रशांत किशोर का बयान ऐसे समय आया है जब SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज है। एक ओर प्रशांत किशोर और विपक्ष के कई नेता आयोग पर निष्पक्षता से जुड़े सवाल उठा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि उसकी प्रक्रियाएं कानून और संस्थागत नियमों के तहत संचालित हो रही हैं। फिलहाल किशोर के आरोप राजनीतिक दावे हैं और उनकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। source – PTI / The Indian Express / Times of India / The Federal जय राष्ट्र न्यूज़

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CEC ज्ञानेश कुमार को CJP का 48 घंटे का अल्टीमेटम, इस्तीफा नहीं तो देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग करते हुए उन्हें 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। पार्टी ने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर देशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा। यह अल्टीमेटम 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया गया था। 26 सितंबर को समयसीमा समाप्त होने के बाद CJP ने अब 2 अक्टूबर से मुंबई से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। SIR विवाद को लेकर CJP ने खोला मोर्चा CJP ने यह कदम मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच उठाया है। पार्टी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। CJP का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में मतदाता अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। ये CJP के आरोप हैं और इन्हें किसी स्वतंत्र जांच में स्थापित तथ्य नहीं माना गया है। 48 घंटे में इस्तीफा देने की रखी मांग 24 सितंबर को CJP ने कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के भीतर पद नहीं छोड़ते हैं तो संगठन देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगा। अभिजीत दिपके ने दिल्ली में फिर से बड़े प्रदर्शन की चेतावनी देते हुए इसे ‘Jantar Mantar 2.0’ तक ले जाने की बात कही थी। आगामी चुनाव रोकने की भी मांग CJP ने केवल CEC के इस्तीफे की मांग नहीं की। संगठन ने आगामी राज्य विधानसभा चुनावों को फिलहाल रोकने, SIR प्रक्रिया को वापस लेने और मतदाता सूची को पहले की स्थिति में बहाल करने जैसी मांगें भी रखीं। India Today के मुताबिक संगठन ने SIR से जुड़े रिकॉर्ड को स्वतंत्र निगरानी में रखने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून में बदलाव की मांग भी की। चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद यह अल्टीमेटम उस रिपोर्ट के बाद आया जिसमें कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में विभिन्न मामलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इन आपत्तियों में मतदाता सूची, Form 6, electoral database तक पहुंच और SIR प्रक्रिया से जुड़े विषय शामिल बताए गए। चुनाव आयोग ने क्या कहा? चुनाव आयोग ने इस विवाद पर कहा है कि एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय और लिखित टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। 26 सितंबर को जारी स्पष्टीकरण में आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजे गए कुछ पत्र किसी नीति विवाद से नहीं, बल्कि एक अधिकारी के कामकाज से जुड़े थे। SIR प्रक्रिया पर आयोग ने दी सफाई चुनाव आयोग के अनुसार 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR कराने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया था। बाद में अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए जारी चरणबद्ध कार्यक्रमों को भी आयोग ने सामूहिक रूप से मंजूरी दी। आयोग ने यह भी कहा कि SIR के दौरान नागरिकों को दस्तावेज जमा करने और मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए अतिरिक्त सुविधाएं दी जा रही हैं। 48 घंटे की समयसीमा खत्म, अब 2 अक्टूबर से आंदोलन CJP का दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम 26 सितंबर को खत्म हो गया। इसके बाद संगठन ने 2 अक्टूबर, गांधी जयंती से मुंबई में आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मुंबई का आजाद मैदान संभावित स्थल है, हालांकि प्रदर्शन के लिए पुलिस अनुमति अभी अंतिम रूप से सुनिश्चित नहीं हुई है। CJP का कहना है कि मुंबई से शुरू होने वाला आंदोलन बाद में देश के अन्य शहरों तक ले जाया जाएगा। चुनाव आयोग विवाद पर राजनीतिक बहस तेज SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर CJP के अलावा कई विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए हैं। वहीं चुनाव आयोग ने प्रक्रिया में अनियमितता के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और अपने फैसलों को कानून और तय प्रक्रिया के अनुरूप बताया है। फिलहाल CJP का आंदोलन 2 अक्टूबर से शुरू करने की घोषणा की गई है। आगे इस विवाद का असर चुनावी और राजनीतिक बहस में किस तरह दिखाई देता है, इस पर नजर रहेगी। source – India Today / Hindustan Times / The Economic Times / The Statesman जय राष्ट्र न्यूज़

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