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FSSAI ने Nestlé के Baby Food Sample को पाया Substandard; Company के खिलाफ Legal Action शुरू

नई दिल्ली: Food Safety and Standards Authority of India यानी FSSAI ने Nestlé India के एक infant nutrition product के sample को laboratory testing में substandard पाया है। Regulator के मुताबिक एक follow-up formula sample में तय मानकों के मुकाबले Biotin (Vitamin B7) की मात्रा कम मिली। इसके अलावा दो अन्य infant nutrition products से जुड़े promotional claims को लेकर भी कार्रवाई की गई है। FSSAI ने Nestlé India के खिलाफ कुल तीन adjudication cases शुरू किए हैं। Follow-up Formula में Biotin Level पर सवाल FSSAI के अनुसार Nestlé India द्वारा निर्मित एक follow-up formula का sample जांच के लिए laboratory भेजा गया था। Testing में sample prescribed Biotin requirement पर खरा नहीं उतरा। Reports के मुताबिक दूसरी laboratory जांच में भी sample आवश्यक biotin level को पूरा नहीं कर पाया, जिसके बाद regulator ने इसे substandard माना। तीन अलग-अलग Adjudication Cases FSSAI ने Nestlé India के खिलाफ तीन separate adjudication cases शुरू किए हैं। इनमें follow-up formula के nutritional composition से जुड़ा मामला और NAN Excella Pro Stage 1 तथा Lactogen Pro 1 के promotional claims से संबंधित मामले शामिल हैं। Regulator का कहना है कि ये proceedings Food Safety and Standards Act तथा उससे जुड़े regulations के कथित उल्लंघनों को लेकर शुरू की गई हैं। NAN Excella Pro Stage 1 के Claims पर आपत्ति FSSAI ने NAN Excella Pro Stage 1 से जुड़े promotional material में किए गए “5 HMOs” और “Whey Protein” संबंधी claims पर सवाल उठाए हैं। Regulator ने e-commerce platforms पर उपलब्ध product information और promotional material की भी जांच की। इसके बाद इन claims को applicable infant nutrition और food safety regulations के संदर्भ में adjudication के लिए भेजा गया। Lactogen Pro 1 के ‘Easy to Digest’ Claim की जांच दूसरे product Lactogen Pro 1 में whey protein को “easy to digest” बताए जाने वाले claim को FSSAI ने flag किया है। Infant food products के promotion और labelling पर भारत में कड़े नियम लागू हैं। Regulator अब adjudication process के जरिए यह तय करेगा कि इन claims से संबंधित regulatory provisions का उल्लंघन हुआ है या नहीं। Nestlé India से मांगा गया Clarification Reports के मुताबिक FSSAI ने Nestlé India से इन मुद्दों पर clarification भी मांगा है। Adjudication proceedings के बाद यह तय होगा कि company पर आगे क्या regulatory action या penalty लागू होती है। Reuters की report के समय तक Nestlé ने इस मामले पर comment के request का तत्काल जवाब नहीं दिया था। Shares में भी दिखा असर FSSAI की कार्रवाई की खबर सामने आने के बाद Nestlé India के shares intraday trade में करीब 2.8% तक गिर गए। Regulatory scrutiny के चलते company के infant nutrition portfolio पर investors की नजर बनी हुई है। Product Recall पर अभी स्पष्टता नहीं FSSAI ने legal proceedings शुरू कर दी हैं, लेकिन उपलब्ध जानकारी के मुताबिक regulator ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि संबंधित product के लिए recall किया जाएगा या नहीं। मामला अब adjudication process में है और आगे की regulatory कार्रवाई उसके निष्कर्ष पर निर्भर करेगी। Source – FSSAI / Reuters / Business Standard / Economic Times / India Today जय राष्ट्र न्यूज़

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Packaged Food Warning Labels पर Supreme Court सख्त, सरकार से 10 दिन में Implementation Timeline मांगी

नई दिल्ली, 11 सितंबर 2026: Supreme Court ने packaged food products पर front-of-pack warning labels लागू करने में हो रही देरी पर सख्त रुख अपनाया है। Court ने Centre और Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) से 10 दिनों के भीतर स्पष्ट implementation timeline पेश करने को कहा है। Sugar, Salt और Fat पर होंगे Warning Labels FSSAI ने ऐसे packaged food products पर red hexagonal warning labels लगाने का प्रस्ताव दिया है जिनमें added sugar, salt या saturated fat तय सीमा से ज्यादा हो। इसका उद्देश्य consumers को packet के front पर ही यह जानकारी देना है कि product में unhealthy nutrients की मात्रा ज्यादा है। Two-Phase Plan पर Court ने जताई चिंता FSSAI ने warning labels को दो phases में लागू करने का proposal दिया था। शुरुआती phase में दो या उससे अधिक specified nutrients की अधिक मात्रा वाले products पर warning लगाने की योजना थी। Supreme Court ने चिंता जताई कि अगर implementation की निश्चित timeline नहीं दी गई तो दूसरा phase अनिश्चित समय तक टल सकता है। Industry की आपत्तियों से Court सहमत नहीं Food industry ने नए labels लागू करने के लिए additional transition time और products reformulate करने का मौका देने की मांग की है। हालांकि Court ने consumer acceptability और reformulation से जुड़ी चिंताओं को public health measure में लंबी देरी का पर्याप्त आधार नहीं माना। बच्चों की Health को लेकर Court चिंतित Bench ने कहा कि इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा लोगों और खासकर growing children की health है। Court ने इसे national interest से जुड़ा विषय बताते हुए regulators से प्रभावी और समयबद्ध व्यवस्था तैयार करने को कहा है। 28 September को अगली सुनवाई मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को तय की गई है। इससे पहले सरकार और FSSAI को warning label system लागू करने की timeline और आगे की प्रक्रिया Court के सामने रखनी होगी। source – Reuters / Supreme Court Proceedings / FSSAI जय राष्ट्र न्यूज़

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कानपुर में एक्सपायर्ड चॉकलेट के लिए लोगों की भीड़! कचरे से कार्टन भरकर ले गए लोग, पुलिस ने शुरू की जांच

कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक हैरान करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। शहर के पनकी इंडस्ट्रियल एरिया में हाईवे किनारे बड़ी मात्रा में फेंकी गई चॉकलेट और टॉफियां देखकर लोगों की भीड़ जमा हो गई। कई लोग थैले, बोरे और यहां तक कि पूरे कार्टन भरकर इन्हें अपने साथ ले जाते दिखाई दिए। स्थानीय लोगों का दावा है कि ये खाद्य उत्पाद 2024 में ही एक्सपायर हो चुके थे। पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। घटना का वीडियो 24-25 अगस्त के दौरान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जबकि 26 अगस्त 2026 तक पुलिस की जांच जारी है। फिलहाल यह भी पता लगाया जा रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में confectionery किस कंपनी या कारोबारी ने खुले में फेंकी और उनका सही तरीके से disposal क्यों नहीं किया गया। Panki Industrial Area में दिखा हैरान करने वाला नजारा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला कानपुर के पनकी इंडस्ट्रियल एरिया में फर्टिलाइजर फैक्ट्री और लोहिया चौराहे के आसपास हाईवे किनारे का है। यहां सड़क किनारे बड़ी मात्रा में रंग-बिरंगे packets, cartons, chocolates और toffees पड़ी थीं। जैसे ही वहां से गुजर रहे लोगों को इसकी जानकारी मिली, देखते ही देखते भीड़ जुट गई। वायरल वीडियो में लोग जमीन और कचरे के बीच से chocolates के packets उठाते हुए दिखाई देते हैं। कोई उन्हें bag में भर रहा है तो कोई पूरा carton बाइक या दूसरे वाहन पर रखकर ले जाता नजर आता है। आधे घंटे में साफ हो गया Stock? प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से Times of India ने रिपोर्ट किया कि कथित तौर पर एक truckload confectionery products वहां उतारे गए थे और करीब आधे घंटे के भीतर लोग ज्यादातर stock उठाकर ले गए। कुछ लोग पैदल cartons लेकर जाते दिखे, जबकि कई लोग motorcycles और cars में सामान भरकर ले गए। इस दृश्य के कारण सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि लोगों ने products की expiry date और उन्हें खुले कचरे में फेंके जाने की वजह की जांच किए बिना इन्हें क्यों उठा लिया। क्या सच में 2024 में Expire हुई थीं Chocolates? स्थानीय निवासियों और वायरल वीडियो से जुड़ी रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कुछ products की expiry 2024 में ही हो चुकी थी। हालांकि इस पूरे stock की expiry status और manufacturer की पहचान को लेकर प्रशासनिक जांच अभी पूरी नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल यह कहना ज्यादा सही है कि ये एक्सपायर्ड बताई जा रही chocolates और toffees थीं, जिनका बड़ा stock खुले में पड़ा मिला। Police पहुंची मौके पर, जांच शुरू वीडियो और घटना की जानकारी मिलने के बाद Kanpur Police मौके पर पहुंची। DCP West S.M. Qasim Abidi के मुताबिक Panki Police Station के प्रभारी को मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस को मौके पर कुछ फटे हुए wrappers मिले, जिन पर मौजूद labels से products का connection Gujarat से होने का संकेत मिला है। हालांकि केवल wrappers के आधार पर किसी specific company को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि stock किसने फेंका और क्या food products के disposal से जुड़े नियमों का उल्लंघन हुआ। जांच के बाद FIR की बात DCP West ने यह भी कहा कि expired food items का सेवन health के लिए खतरा पैदा कर सकता है और investigation पूरी होने के बाद जरूरत के मुताबिक FIR दर्ज की जाएगी। इसका मतलब अभी तक किसी specific factory या व्यक्ति के खिलाफ जिम्मेदारी अंतिम रूप से तय नहीं हुई है। इसलिए सोशल मीडिया पर circulating claims के आधार पर किसी particular company को दोषी बताना उचित नहीं होगा। खुले में क्यों नहीं फेंकने चाहिए Expired Food Products? इस घटना ने expired food के disposal को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे food products जिन्हें बिक्री या consumption के लिए unsuitable माना गया हो, उन्हें इस तरह destroy या dispose किया जाना चाहिए कि वे दोबारा supply chain या आम लोगों तक न पहुंचें। सड़क किनारे cartons या packets के रूप में food waste फेंकने से: इसी वजह से घटना के बाद manufacturer और waste-disposal process की जांच की मांग उठ रही है। लोगों की सेहत को लेकर बढ़ी चिंता Expired date का मतलब हर product उसी दिन जहरीला हो जाना नहीं होता, लेकिन expiry/use-by अवधि पार कर चुके और खासकर कचरे में पड़े food products को खाना सुरक्षित नहीं माना जा सकता। यहां खतरा केवल expiry का नहीं है। Products सड़क किनारे और garbage के संपर्क में थे। ऐसे में packets damaged होने, moisture, dirt, insects या bacteria contamination का भी risk हो सकता है। इसी वजह से पुलिस अधिकारियों ने भी लोगों को ऐसे products का सेवन न करने को लेकर सतर्क किया है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक पहुंचे वायरल तस्वीरों और वीडियो में अलग-अलग उम्र के लोग chocolates लेने पहुंचे दिखाई देते हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों तक ने discarded products उठाए। कई लोगों ने packets की जानकारी या expiry date check किए बिना उन्हें bags में भर लिया। इस पूरे दृश्य ने food-safety awareness को लेकर भी बहस छेड़ दी है। किस Factory ने फेंका Stock? यही इस मामले का सबसे बड़ा अनसुलझा सवाल है। कुछ शुरुआती reports में किसी chocolate factory द्वारा stock dump किए जाने की बात कही गई है, लेकिन पुलिस ने अभी संबंधित manufacturer की आधिकारिक पहचान सार्वजनिक नहीं की है। मौके से मिले wrappers पर Gujarat से संबंधित labeling मिलने की सूचना है। अब police investigation के जरिए supply chain और stock के source की पहचान की जाएगी। किस कंपनी ने stock manufacture किया और किसने इसे Kanpur में dump किया—ये दोनों एक ही entity हों, यह भी अभी स्थापित नहीं है। Viral Video ने उठाए दो बड़े सवाल इस पूरे मामले में दो अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारी का सवाल उठ रहा है। पहला, अगर products वास्तव में expired और disposal के लिए थे, तो उन्हें इस तरह खुले public area में क्यों फेंका गया कि कोई भी उन्हें उठा सके? दूसरा, लोगों ने कचरे में पड़े और expiry पार कर चुके food products को…

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Karnataka में ‘Analogue Paneer’ पर एक साल का Ban, सरकार ने Public Health का दिया हवाला

बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने राज्य में Analogue या Non-Dairy Paneer को सामान्य ‘Paneer’ के नाम से बनाकर, स्टोर करके, सप्लाई या बेचने पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। खाद्य सुरक्षा विभाग के मुताबिक यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा और ग्राहकों को भ्रामक तरीके से बेचे जा रहे उत्पादों से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्रतिबंध से संबंधित आदेश 17 अगस्त 2026 को जारी किया गया था। Analogue Paneer आखिर होता क्या है? सामान्य पनीर दूध से बनाया जाता है। वहीं Analogue या Non-Dairy Paneer ऐसा उत्पाद है जिसमें दूध की वसा या milk solids को पूरी तरह या आंशिक रूप से vegetable oil, vegetable fat या अन्य non-dairy ingredients से बदल दिया जाता है। ऐसे उत्पाद अपने आप में हर स्थिति में प्रतिबंधित खाद्य पदार्थ नहीं होते, लेकिन उन्हें असली दूध से बने पनीर की तरह पेश करना या उपभोक्ता को बिना जानकारी दिए ‘Paneer’ के नाम से बेचना नियमों का उल्लंघन हो सकता है। किन गतिविधियों पर लगाया गया प्रतिबंध? Karnataka Food Safety and Drug Administration की ओर से जारी अधिसूचना के तहत analogue/non-dairy paneer को ‘Paneer’ के नाम से बेचने से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन पर एक साल की रोक लागू की गई है। आदेश में इसके: पर रोक शामिल है, जब ऐसा उत्पाद सामान्य paneer के नाम से बाजार में पेश किया जा रहा हो। 17 अगस्त से लागू हुआ आदेश राज्य के खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार यह अधिसूचना 17 अगस्त 2026 से प्रभावी है और एक साल तक लागू रहेगी। Food Safety and Drug Administration Commissioner Srinivas K ने कहा कि कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना है कि non-dairy substitutes को असली paneer बताकर न बेचा जाए। Public Health का क्यों दिया गया हवाला? सरकार ने इस कार्रवाई के पीछे public health और consumer protection को प्रमुख वजह बताया है। समस्या मुख्य रूप से तब पैदा होती है जब ग्राहक को यह बताए बिना non-dairy या analogue product असली paneer के रूप में परोसा या बेचा जाता है। इससे उपभोक्ता उत्पाद की वास्तविक सामग्री और गुणवत्ता को लेकर भ्रमित हो सकता है। कर्नाटक सरकार का कहना है कि बाजार में बेचे जाने वाले paneer को निर्धारित food standards के अनुरूप होना चाहिए और ग्राहक को यह साफ पता होना चाहिए कि वह dairy product खरीद रहा है या उसका analogue substitute। FSSAI भी पहले जारी कर चुका है चेतावनी यह मामला केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं है। Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) ने अप्रैल 2026 में cheese analogues की सही labeling को लेकर सार्वजनिक नोटिस जारी किया था। FSSAI ने साफ किया था कि किसी cheese analogue को ‘paneer’ के नाम से बेचना कानून का गंभीर उल्लंघन है। Food businesses और restaurants को निर्देश दिया गया था कि यदि किसी dish में analogue product का इस्तेमाल हो रहा है तो इसकी जानकारी ग्राहकों को स्पष्ट रूप से दी जाए। उदाहरण के तौर पर अगर किसी restaurant में असली dairy paneer की जगह analogue product इस्तेमाल किया जा रहा है, तो menu पर उसका वास्तविक स्वरूप स्पष्ट करना जरूरी है, ताकि ग्राहक informed choice कर सके। दूसरे राज्यों में भी हो चुकी है कार्रवाई Analogue paneer और अन्य dairy substitutes को लेकर पिछले कुछ समय से कई राज्यों में food safety authorities सक्रिय हुई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी ऐसे उत्पादों की बिक्री और गलत labeling के खिलाफ कार्रवाई देखने को मिली है। इससे साफ है कि analogue dairy products की सही पहचान और labeling अब देशभर में food regulators के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनता जा रहा है। क्या Analogue Paneer पूरी तरह अवैध है? यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। कार्रवाई का मुख्य केंद्र non-dairy या analogue product को असली ‘paneer’ बताकर बेचने की प्रथा है। FSSAI के नियम analogue products के लिए स्पष्ट labeling और disclosure की मांग करते हैं। यानी ग्राहक को यह भ्रम नहीं होना चाहिए कि वह milk-based paneer खरीद रहा है, जबकि उत्पाद में milk fat या milk solids की जगह दूसरे ingredients का इस्तेमाल किया गया हो। इसलिए इसे केवल “हर तरह के analogue food पर प्रतिबंध” के रूप में समझना सही नहीं होगा। Restaurants और दुकानदारों पर बढ़ेगी निगरानी नए आदेश के बाद कर्नाटक में food safety officials के restaurants, hotels, caterers, manufacturers और retailers की जांच बढ़ाने की संभावना है। अधिकारियों का फोकस यह सुनिश्चित करने पर रहेगा कि असली paneer के नाम से कोई non-dairy substitute ग्राहक को न दिया जाए और food businesses product की सही पहचान तथा labeling से जुड़े नियमों का पालन करें। कर्नाटक सरकार का यह फैसला food adulteration और misleading labeling के खिलाफ बढ़ती कार्रवाई का हिस्सा माना जा रहा है। उपभोक्ताओं के लिए भी यह जरूरी है कि packaged paneer खरीदते समय ingredients और label की जांच करें और restaurant में संदेह होने पर इस्तेमाल किए जा रहे product के बारे में जानकारी मांगें। स्रोत – कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, FSSAI, इंडिया टुडे, मनीकंट्रोल जय राष्ट्र न्यूज़

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Zepto और Blinkit पर खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ी कार्रवाई, बेंगलुरु में वेयरहाउस सील और मुंबई में लाइसेंस निलंबित

नई दिल्ली: देश के तेजी से बढ़ते क्विक-कॉमर्स सेक्टर में खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। कर्नाटक में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने बेंगलुरु के होस्कोटे स्थित Zepto के एक वेयरहाउस को सील कर दिया, जबकि महाराष्ट्र FDA ने मुंबई के मलाड वेस्ट स्थित Blinkit के एक डार्क स्टोर का खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिया। दोनों मामलों में अधिकारियों ने स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी गंभीर कमियां पाए जाने की जानकारी दी है। बेंगलुरु में Zepto वेयरहाउस पर कार्रवाई कर्नाटक खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बेंगलुरु के होस्कोटे तालुक में Zepto के एक वेयरहाउस का निरीक्षण किया। अधिकारियों के मुताबिक, वहां खाद्य पदार्थों के रखरखाव और स्वच्छता से जुड़ी कई गंभीर कमियां सामने आईं। निरीक्षण के दौरान परिसर में गंदगी, फर्श पर जमा कचरा और खाद्य सामग्री के भंडारण से जुड़ी समस्याएं पाए जाने की बात सामने आई है। अधिकारियों ने परिस्थितियों को बेहद अस्वच्छ बताया और इसके बाद वेयरहाउस को सील कर दिया। लेबलिंग और स्टोरेज को लेकर भी सवाल जांच में केवल साफ-सफाई ही नहीं, बल्कि खाद्य उत्पादों की लेबलिंग और मैन्युफैक्चरिंग संबंधी जानकारी को लेकर भी आपत्तियां सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक, अधिकारियों ने कुछ उत्पादों में अनुचित लेबलिंग और मिसब्रांडिंग से जुड़े उल्लंघन पाए। खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत ऐसी कमियां उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं क्योंकि पैकेज पर सही जानकारी उपलब्ध होना जरूरी है। मुंबई में Blinkit के डार्क स्टोर पर FDA की कार्रवाई दूसरी ओर, महाराष्ट्र के Food and Drug Administration (FDA) ने मुंबई के मलाड वेस्ट स्थित Blinkit के एक डार्क स्टोर का खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिया। अधिकारियों के निरीक्षण में परिसर में कॉकरोच की मौजूदगी और अस्वच्छ परिस्थितियां पाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा कुछ खाद्य उत्पादों की वैधता और स्टोरेज को लेकर भी गंभीर सवाल उठे। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने क्या पाया? मुंबई के मामले में अधिकारियों ने डार्क स्टोर की स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर आपत्ति जताई। रिपोर्टों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान कॉकरोच का संक्रमण और खाद्य सामग्री के आसपास अस्वच्छ स्थिति पाई गई। ऐसी परिस्थितियां खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं। इसी वजह से FDA ने संबंधित खाद्य लाइसेंस को निलंबित करने की कार्रवाई की। क्विक-कॉमर्स कंपनियों पर बढ़ी निगरानी Zepto और Blinkit पर हुई ताजा कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब देश में क्विक-कॉमर्स कंपनियों के डार्क स्टोर्स और वेयरहाउस में खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर नियामक निगरानी बढ़ रही है। इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए किराना, पैकेज्ड फूड, डेयरी और अन्य खाद्य उत्पाद कुछ ही मिनटों में ग्राहकों तक पहुंचाए जाते हैं। ऐसे में स्टोरेज, तापमान, एक्सपायरी और स्वच्छता का पालन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। ग्राहकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला? ऑनलाइन ऑर्डर करते समय ग्राहक अक्सर केवल पैकेज और डिलीवरी पर ध्यान देते हैं, लेकिन खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता इस बात पर भी निर्भर करती है कि उसे वेयरहाउस या डार्क स्टोर में किस तरह रखा गया था। अगर खाद्य उत्पाद गलत तापमान पर रखे जाएं, एक्सपायरी के बाद भी स्टॉक में मौजूद हों या अस्वच्छ वातावरण में रखे जाएं, तो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से खाद्य सुरक्षा विभागों की ऐसी जांच को क्विक-कॉमर्स इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Zepto और Blinkit पर कार्रवाई से क्या संदेश? ताजा कार्रवाई से साफ है कि तेज डिलीवरी के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन भी कंपनियों के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है। वेयरहाउस और डार्क स्टोर में नियमों का पालन नहीं होने पर कंपनियों को लाइसेंस निलंबन या परिसर सील किए जाने जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। निष्कर्ष बेंगलुरु में Zepto के वेयरहाउस को खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों के चलते सील किए जाने और मुंबई में Blinkit के डार्क स्टोर का खाद्य लाइसेंस निलंबित किए जाने से क्विक-कॉमर्स कंपनियों में खाद्य सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक तरफ ग्राहक कुछ ही मिनटों में सामान पाने की सुविधा चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ खाद्य उत्पादों की स्वच्छता, सही स्टोरेज और एक्सपायरी की जांच भी उतनी ही जरूरी है। अब देखना होगा कि संबंधित कंपनियां इन कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाती हैं। Source: Karnataka Food Safety Department / Maharashtra FDA / Latest Reports जय राष्ट्र न्यूज़

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