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IIT Kharagpur ने लॉन्च किया Free AI Tutor, GATE-JAM की तैयारी भी होगी मुफ्त; 13 करोड़ से ज्यादा Learning Resources का Access

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026: IIT Kharagpur ने छात्रों के लिए NDLI-FERMI AI Tutor और Free Online GATE-JAM Preparation Platform लॉन्च किया है। इन दोनों पहलों का उद्देश्य छात्रों को बिना महंगी कोचिंग के personalised learning support और competitive exams की तैयारी के लिए गुणवत्तापूर्ण resources उपलब्ध कराना है। National Digital Library of India (NDLI) पर मौजूद 13 करोड़ से ज्यादा digital learning resources का भी छात्रों को फायदा मिलेगा। NDLI-FERMI AI Tutor से मिलेगी Personalised Learning IIT Kharagpur ने Fermi AI के सहयोग से NDLI-FERMI AI Tutor तैयार किया है। यह सामान्य AI tools की तरह केवल सीधे जवाब देने के बजाय students को hints, guided questions और explanations के जरिए खुद problem solve करने के लिए प्रेरित करता है। यह सुविधा registered NDLI users के लिए मुफ्त उपलब्ध है। ‘Scan & Ask’ से सवाल की फोटो डालकर ले सकेंगे मदद AI Tutor में ‘Scan & Ask’ फीचर दिया गया है। इसके जरिए छात्र Physics, Chemistry, Mathematics और Biology से जुड़े सवाल या अपनी attempted solution upload करके AI से guidance ले सकते हैं। Tool गलतियों की पहचान करने, concepts को बेहतर समझने और problem-solving skills विकसित करने में मदद करेगा। GATE और JAM की तैयारी के लिए Free Online Platform इसके साथ IIT Kharagpur ने GATE और JAM aspirants के लिए अलग free online preparation platform भी शुरू किया है। इसमें syllabus mapping, NPTEL और SWAYAM lectures तथा academic notes जैसे resources उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका खास फोकस उन छात्रों पर है जो ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं या महंगी coaching afford नहीं कर सकते। NDLI पर 13 करोड़ से ज्यादा Learning Resources Ministry of Education द्वारा समर्थित National Digital Library of India के एक करोड़ से ज्यादा learners हैं और platform पर 130 million यानी 13 करोड़ से अधिक learning resources उपलब्ध हैं। नई AI-based initiative के जरिए IIT Kharagpur इस बड़े digital education ecosystem को personalised learning के साथ जोड़ रहा है। Platinum Jubilee के मौके पर हुई शुरुआत इन initiatives को 12 अक्टूबर 2026 को IIT Kharagpur के Research Park, Rajarhat, Kolkata में Union Minister of State for Education Sukanta Majumdar ने लॉन्च किया। यह कार्यक्रम IIT Kharagpur की Platinum Jubilee celebrations का हिस्सा था। source – IIT Kharagpur, NDLI जय राष्ट्र न्यूज़

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IIT JAM 2027 Registration Date बदली, अब 12 सितंबर से शुरू होंगे आवेदन; जानें पूरा Schedule

नई दिल्ली, 5 सितंबर 2026: IIT JAM 2027 की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। Indian Institute of Technology (IIT) Kharagpur ने Joint Admission Test for Masters (JAM) 2027 के registration schedule में बदलाव किया है। Online application process अब 12 सितंबर 2026 से शुरू होगा, जबकि पहले registration की तारीख 5 सितंबर घोषित की गई थी। पहले 5 सितंबर से खुलना था Portal IIT JAM 2027 की website launch होने के समय IIT Kharagpur ने registration process 5 सितंबर से शुरू करने की जानकारी दी थी। इसी वजह से कई शुरुआती reports में 5 सितंबर registration date बताई गई थी। बाद में जारी updated schedule और information brochure में इसे बदलकर 12 सितंबर कर दिया गया। 12 अक्टूबर तक कर सकेंगे आवेदन Updated schedule के मुताबिक JAM Online Application Processing System यानी JOAPS portal 12 सितंबर को खुलेगा। उम्मीदवार 12 अक्टूबर 2026 तक application form जमा कर सकेंगे। 14 फरवरी 2027 को होगी परीक्षा IIT JAM 2027 examination 14 फरवरी 2027 को Computer Based Test mode में आयोजित की जाएगी। परीक्षा दो sessions में होगी और कुल सात test papers के लिए आयोजित की जाएगी। इन सात Subjects के लिए होगा JAM JAM 2027 में Biotechnology, Chemistry, Economics, Geology, Mathematics, Mathematical Statistics और Physics के papers होंगे। Candidate एक या दो test papers चुन सकता है, लेकिन दो papers तभी लिए जा सकते हैं जब वे अलग-अलग sessions में scheduled हों। करीब 3,000 IIT Seats पर मिलेगा Admission JAM 2027 score का इस्तेमाल academic session 2027-28 के लिए IITs के postgraduate programmes में admission के लिए किया जाएगा। Official brochure के अनुसार 23 IITs में करीब 3,000 seats उपलब्ध हैं। 18 मार्च को घोषित होगा Result Official schedule के मुताबिक IIT JAM 2027 का result 18 मार्च 2027 को घोषित किया जाना है। Candidates को IIT Kharagpur की official JAM website पर ही latest notifications check करने की सलाह दी गई है। source – IIT Kharagpur / The Indian Expressजय राष्ट्र न्यूज़

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ओडिशा में धरोहर संरक्षण के लिए IIT खड़गपुर और SPA भोपाल से समझौता, आधुनिक तकनीक से सहेजी जाएंगी ऐतिहासिक विरासतें

भुवनेश्वर ओडिशा सरकार ने राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) भोपाल के साथ समझौता किया है, जिसके तहत आधुनिक तकनीक की मदद से ऐतिहासिक स्मारकों, मंदिरों और पुरातात्विक स्थलों का संरक्षण किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना, ऐतिहासिक संरचनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन करना और भविष्य की पीढ़ियों के लिए इन धरोहरों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है। आधुनिक तकनीक से होगा संरक्षण अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना के तहत अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इनमें 3D स्कैनिंग, LiDAR मैपिंग, डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन, जीआईएस (GIS) आधारित सर्वेक्षण और संरचनात्मक विश्लेषण जैसी तकनीकें शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन तकनीकों की मदद से स्मारकों की वर्तमान स्थिति का सटीक आकलन किया जा सकेगा और संरक्षण कार्य अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। किन धरोहरों पर रहेगा फोकस? परियोजना के तहत राज्य के प्रमुख मंदिरों, प्राचीन स्मारकों, पुरातात्विक स्थलों और सांस्कृतिक महत्व की इमारतों का अध्ययन किया जाएगा। ओडिशा अपने प्राचीन मंदिरों, कलिंग वास्तुकला और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। कोणार्क सूर्य मंदिर, लिंगराज मंदिर और कई अन्य ऐतिहासिक स्थल राज्य की पहचान माने जाते हैं। डिजिटल आर्काइव तैयार करने की योजना समझौते के तहत धरोहर स्थलों का विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इससे भविष्य में किसी भी प्रकार की क्षति होने पर मूल संरचना की जानकारी सुरक्षित रहेगी। विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल आर्काइव न केवल संरक्षण कार्यों में मदद करेगा, बल्कि शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और इतिहासकारों के लिए भी महत्वपूर्ण संसाधन साबित होगा। पर्यटन क्षेत्र को मिलेगा लाभ धरोहर संरक्षण की इस पहल से राज्य के पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बेहतर संरक्षण और डिजिटल प्रस्तुति से देश-विदेश के पर्यटकों को ऐतिहासिक स्थलों के बारे में अधिक जानकारी मिल सकेगी। पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक आधारित संरक्षण परियोजनाएं किसी भी राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को भी गति देती हैं। विशेषज्ञों ने बताया महत्वपूर्ण कदम इतिहासकारों और संरक्षण विशेषज्ञों ने इस समझौते का स्वागत किया है। उनका कहना है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक अध्ययन की मदद से धरोहर संरक्षण अधिक प्रभावी और दीर्घकालिक बनाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश के अन्य राज्यों को भी इसी प्रकार की पहल पर विचार करना चाहिए ताकि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखा जा सके। सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता ओडिशा की ऐतिहासिक धरोहरें केवल राज्य की पहचान नहीं हैं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। समय, मौसम और अन्य प्राकृतिक कारणों से इन संरचनाओं को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है। ऐसे में वैज्ञानिक संरक्षण और तकनीकी सहयोग से इन धरोहरों को सुरक्षित रखने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। निष्कर्ष ओडिशा सरकार, IIT खड़गपुर और SPA भोपाल के बीच हुआ यह समझौता राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता के सहयोग से सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के प्रयासों को नई दिशा मिलेगी। इससे न केवल धरोहर संरक्षण मजबूत होगा, बल्कि पर्यटन और शोध गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। FAQs 1. ओडिशा सरकार ने किन संस्थानों के साथ समझौता किया है? IIT खड़गपुर और SPA भोपाल के साथ। 2. इस समझौते का उद्देश्य क्या है? राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का वैज्ञानिक एवं तकनीकी संरक्षण करना। 3. कौन-सी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा? 3D स्कैनिंग, LiDAR मैपिंग, GIS सर्वेक्षण और डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन जैसी तकनीकों का। 4. इससे पर्यटन को क्या लाभ होगा? बेहतर संरक्षण और डिजिटल प्रस्तुति से पर्यटकों का अनुभव बेहतर होगा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। 5. डिजिटल आर्काइव क्यों बनाया जाएगा? धरोहर स्थलों का स्थायी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और भविष्य के संरक्षण कार्यों में सहायता के लिए।

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