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मनीला में QUAD और ASEAN बैठकों में शामिल हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग पर भारत का फोकस

नई दिल्ली/मनीला: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित QUAD Foreign Ministers’ Meeting और ASEAN से जुड़ी उच्चस्तरीय बैठकों में शामिल हुए। इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान भारत ने एक बार फिर मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। बैठकों में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain), उभरती प्रौद्योगिकियों, साइबर सुरक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। भारत ने ASEAN देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। बैठक के प्रमुख मुद्दे QUAD और ASEAN बैठकों में जिन विषयों पर प्रमुख रूप से चर्चा हुई, उनमें शामिल हैं— द्विपक्षीय बैठकों पर भी रहा फोकस मनीला दौरे के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। इन बैठकों में भारत-अमेरिका संबंध, रक्षा सहयोग, निवेश, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बैठकों से भारत की कूटनीतिक स्थिति और मजबूत होगी। भारत के लिए क्यों है महत्वपूर्ण? विशेषज्ञों के अनुसार यह बैठक कई मायनों में अहम है— भारत का संदेश विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत मुक्त, सुरक्षित और समावेशी इंडो-पैसिफिक के लिए प्रतिबद्ध है और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना भारत की विदेश नीति की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए साझेदारी और संवाद को आवश्यक बताया। निष्कर्ष मनीला में आयोजित QUAD और ASEAN बैठकों के माध्यम से भारत ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी सक्रिय कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यह यात्रा क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Source: Ministry of External Affairs (MEA) | Reuters | ASEAN Secretariat जय राष्ट्र न्यूज़

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मनीला में QUAD और ASEAN बैठकों में शामिल होंगे विदेश मंत्री एस. जयशंकर, इंडो-पैसिफिक सहयोग पर भारत का फोकस

नई दिल्ली/मनीला: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर आज फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक (Quad Foreign Ministers’ Meeting) और ASEAN से जुड़ी उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। इस दौरे को भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति और क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठकों के दौरान भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain), उभरती प्रौद्योगिकियों और आर्थिक साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही ASEAN सदस्य देशों के साथ भारत के संबंधों को और मजबूत बनाने पर भी विशेष फोकस रहेगा। बैठक का प्रमुख एजेंडा मनीला में आयोजित इन बैठकों में कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श होने की संभावना है— भारत के लिए क्यों है महत्वपूर्ण? विशेषज्ञों के अनुसार यह दौरा भारत की विदेश नीति के लिए अहम माना जा रहा है क्योंकि— द्विपक्षीय बैठकें भी संभव विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और ASEAN देशों के कई विदेश मंत्रियों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी प्रस्तावित हैं। इनमें व्यापार, रक्षा सहयोग, निवेश और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इंडो-पैसिफिक में भारत की भूमिका भारत लगातार मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का समर्थन करता रहा है। सरकार का मानना है कि क्षेत्र में शांति, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान वैश्विक आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है। निष्कर्ष मनीला में होने वाली QUAD और ASEAN बैठकों के माध्यम से भारत एक बार फिर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी सक्रिय भूमिका को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यह यात्रा क्षेत्रीय सहयोग, सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Source: Ministry of External Affairs (MEA) | Reuters | The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारतीय नौसेना की बढ़ती भूमिका और समुद्री सुरक्षा रणनीति

नई दिल्ली, 11 जुलाई। हिंद महासागर और व्यापक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र आज वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और सामरिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। ऐसे समय में भारतीय नौसेना केवल देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता, मानवीय सहायता, आपदा राहत, समुद्री कानूनों के पालन और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। क्यों महत्वपूर्ण है इंडो-पैसिफिक क्षेत्र? इंडो-पैसिफिक दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री संचार मार्ग (Sea Lanes of Communication) और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की सुरक्षा के लिए इस क्षेत्र की स्थिरता अत्यंत आवश्यक मानी जाती है। भारतीय नौसेना की बढ़ती जिम्मेदारियां भारतीय नौसेना आज समुद्री निगरानी, समुद्री डकैती विरोधी अभियान, खोज एवं बचाव (Search and Rescue), मानवीय सहायता (Humanitarian Assistance) और आपदा राहत (HADR) जैसे अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रही है। हिंद महासागर क्षेत्र में मित्र देशों के साथ समन्वय भी लगातार बढ़ाया जा रहा है। आधुनिक युद्धपोत और स्वदेशी क्षमता पिछले कुछ वर्षों में भारतीय नौसेना ने स्वदेशी युद्धपोत, पनडुब्बियां, मिसाइल प्रणाली, नौसैनिक हेलीकॉप्टर और समुद्री निगरानी प्रणालियों को अपनी परिचालन क्षमता का हिस्सा बनाया है। “आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे नौसेना की क्षमता और मजबूत हुई है। समुद्री सुरक्षा में तकनीक की भूमिका आधुनिक रडार, उपग्रह आधारित निगरानी, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नेटवर्क आधारित संचार और उन्नत डेटा विश्लेषण प्रणालियां भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी क्षमता को नई मजबूती प्रदान कर रही हैं। इन तकनीकों के माध्यम से समुद्री गतिविधियों पर अधिक प्रभावी निगरानी संभव हो रही है। मित्र देशों के साथ बढ़ता सहयोग भारत नियमित रूप से कई देशों के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास आयोजित करता है। इन अभ्यासों का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, आपसी समन्वय, आपदा राहत और समुद्री कानूनों के पालन को मजबूत करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी साझेदारियां क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देती हैं। SAGAR दृष्टिकोण भारत की “Security and Growth for All in the Region (SAGAR)” नीति का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में सभी देशों के साथ सहयोग बढ़ाना, समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना और साझा समृद्धि को प्रोत्साहित करना है। भारतीय नौसेना इस नीति को व्यावहारिक रूप से लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मानवीय सहायता और आपदा राहत प्राकृतिक आपदाओं, चक्रवातों, भूकंप और अन्य संकटों के दौरान भारतीय नौसेना ने कई देशों को त्वरित राहत सहायता पहुंचाई है। इससे भारत की विश्वसनीय समुद्री शक्ति और मानवीय सहयोगी की छवि मजबूत हुई है। भविष्य की दिशा रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का सामरिक महत्व और बढ़ेगा। ऐसे में भारतीय नौसेना की आधुनिक क्षमताएं, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, उन्नत तकनीक और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां भारत की समुद्री सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाएंगी। स्रोत:भारतीय नौसेना, रक्षा मंत्रालय एवं सार्वजनिक रक्षा संबंधी आधिकारिक जानकारी। मूल रिपोर्ट:रक्षा विशेषज्ञों के विश्लेषण, सार्वजनिक सरकारी जानकारी तथा समुद्री सुरक्षा से संबंधित उपलब्ध स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत और न्यूज़ीलैंड ने रणनीतिक साझेदारी को दिया नया विस्तार, रक्षा, व्यापार और समुद्री सुरक्षा सहयोग होगा मजबूत

ऑकलैंड, 11 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आधिकारिक न्यूज़ीलैंड यात्रा के दौरान भारत और न्यूज़ीलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के उद्देश्य से व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों देशों के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ताओं में रक्षा सहयोग, व्यापार, निवेश, समुद्री सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा, कृषि और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समन्वय को भविष्य की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया। रणनीतिक संबंधों में नया अध्याय प्रधानमंत्री मोदी और न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हुई बैठक में दोनों नेताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों, नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था और मुक्त एवं सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों ने नियमित उच्चस्तरीय संवाद जारी रखने और दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग को संस्थागत रूप देने पर सहमति जताई। रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर विशेष जोर बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता, आपदा प्रबंधन और समुद्री कानूनों के पालन को लेकर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। दोनों देशों ने रक्षा संस्थानों के बीच संपर्क बढ़ाने, संयुक्त अभ्यासों की संभावनाओं और समुद्री सुरक्षा से जुड़े अनुभव साझा करने पर भी चर्चा की। व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा भारत और न्यूज़ीलैंड ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को नई गति देने के लिए आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश के अवसरों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया। दोनों पक्षों ने निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने और व्यापारिक प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बनाने पर भी जोर दिया। विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शिक्षा में सहयोग दोनों देशों ने अनुसंधान, नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल तकनीक, उच्च शिक्षा और छात्र विनिमय कार्यक्रमों में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया। विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के बीच साझेदारी को मजबूत करने तथा संयुक्त परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने पर सहमति बनी। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर साझा दृष्टिकोण वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और आर्थिक समृद्धि के लिए सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी क्षेत्रीय संतुलन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भारतीय समुदाय की सराहना प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूज़ीलैंड में भारतीय समुदाय की भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रवासी भारतीय दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों के मजबूत सेतु हैं। उन्होंने समुदाय के योगदान को द्विपक्षीय संबंधों की बड़ी ताकत बताया। भविष्य की संभावनाएं विदेश नीति विशेषज्ञों के अनुसार भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच यह विस्तारित रणनीतिक साझेदारी आने वाले वर्षों में रक्षा, व्यापार, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा करेगी। दोनों देशों ने नियमित वार्ताओं और साझा परियोजनाओं के माध्यम से सहयोग को और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। स्रोत:भारत का विदेश मंत्रालय (MEA), न्यूज़ीलैंड सरकार तथा दोनों देशों द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी। मूल रिपोर्ट:11 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक संयुक्त वक्तव्य एवं विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रधानमंत्री मोदी की न्यूज़ीलैंड यात्रा में भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों को मिली नई दिशा, रणनीतिक साझेदारी और व्यापार सहयोग पर बड़ा जोर

ऑकलैंड, 11 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक न्यूज़ीलैंड यात्रा के दौरान भारत और न्यूज़ीलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) के स्तर तक पहुंचाने की घोषणा की। यह लगभग चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूज़ीलैंड की पहली आधिकारिक यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी और न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हुई व्यापक वार्ता में व्यापार, निवेश, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति बनी। रणनीतिक साझेदारी को मिला नया विस्तार दोनों देशों ने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और मुक्त एवं सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। नेताओं ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच घनिष्ठ सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण होगा। व्यापार और निवेश पर विशेष जोर बैठक में दोनों पक्षों ने व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए नई पहल पर चर्चा की। कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने निजी क्षेत्र की भागीदारी और निवेश को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग भारत और न्यूज़ीलैंड ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समन्वय बढ़ाने के लिए नए ढांचे पर काम करने का निर्णय लिया। दोनों देशों ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नई पहल बैठकों में उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग, छात्र विनिमय कार्यक्रम, संयुक्त अनुसंधान और नवाचार परियोजनाओं को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। डिजिटल प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), विज्ञान और स्टार्टअप सहयोग को भविष्य की साझेदारी के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया। भारतीय समुदाय की भूमिका प्रधानमंत्री मोदी ने ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और न्यूज़ीलैंड के संबंध केवल सरकारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे विश्वास और सांस्कृतिक जुड़ाव पर आधारित हैं। उन्होंने भारतीय समुदाय की भूमिका की सराहना करते हुए उसे दोनों देशों के बीच मजबूत सेतु बताया। इंडो-पैसिफिक पर साझा दृष्टिकोण दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था, स्वतंत्र नौवहन, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भारत की व्यापक इंडो-पैसिफिक रणनीति को और मजबूती देगी। भविष्य की दिशा विश्लेषकों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है। रणनीतिक साझेदारी के नए चरण से व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा, विज्ञान और तकनीकी सहयोग के क्षेत्रों में दीर्घकालिक अवसर पैदा होने की उम्मीद है। दोनों देशों ने नियमित उच्चस्तरीय संवाद जारी रखने और साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। स्रोत:भारत का विदेश मंत्रालय (MEA), न्यूज़ीलैंड सरकार तथा दोनों देशों की आधिकारिक जानकारी। मूल रिपोर्ट:11 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक वक्तव्यों एवं विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई गति, निवेश और शिक्षा साझेदारी पर विशेष जोर

कैनबरा, 10 जुलाई। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच जारी उच्चस्तरीय वार्ताओं में दोनों देशों ने आर्थिक, रणनीतिक और शैक्षणिक सहयोग को नई गति देने पर विशेष जोर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के नेतृत्व में हुई बैठकों में व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को भविष्य की साझेदारी का प्रमुख आधार बताया गया। व्यापार और निवेश पर बढ़ेगा सहयोग दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निवेश के अवसरों का विस्तार करने पर सहमति व्यक्त की। बुनियादी ढांचे, हरित ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), डिजिटल अर्थव्यवस्था, विनिर्माण और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया। शिक्षा और कौशल विकास बने प्रमुख विषय बैठकों में उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच साझेदारी, छात्र एवं शोधार्थी विनिमय कार्यक्रमों और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। दोनों देशों का मानना है कि शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग भविष्य की आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण भारत और ऑस्ट्रेलिया ने स्वतंत्र, सुरक्षित और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। समुद्री सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, साइबर सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। रक्षा सहयोग को मिलेगा विस्तार दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा उद्योग सहयोग, समुद्री निगरानी और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत बनाने की इच्छा व्यक्त की। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन को भी मजबूती देगा। स्वच्छ ऊर्जा और तकनीकी सहयोग वार्ता के दौरान हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, डिजिटल अवसंरचना और उभरती प्रौद्योगिकियों में संयुक्त निवेश और अनुसंधान पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। भारतीय समुदाय की अहम भूमिका ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के योगदान की दोनों नेताओं ने सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के लोग शिक्षा, विज्ञान, उद्योग और व्यापार सहित अनेक क्षेत्रों में दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भविष्य की दिशा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ता सहयोग केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह रक्षा, शिक्षा, तकनीक और क्षेत्रीय स्थिरता के क्षेत्रों में भी दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देगा। दोनों देशों ने नियमित उच्चस्तरीय संवाद जारी रखने और सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने पर सहमति व्यक्त की। स्रोत:भारत सरकार, ऑस्ट्रेलिया सरकार तथा दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के आधिकारिक वक्तव्य। मूल रिपोर्ट:10 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी एवं विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा में रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती, कई अहम द्विपक्षीय बैठकों पर रहा फोकस

मेलबर्न, 10 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी आधिकारिक ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान लगातार उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकों और विभिन्न कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। यात्रा का प्रमुख उद्देश्य भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) को और मजबूत करना, व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा देना तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देना है। प्रधानमंत्री अल्बनीज़ के साथ व्यापक वार्ता प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी प्रयास, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। दोनों पक्षों ने नियमित उच्चस्तरीय संवाद जारी रखने और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। व्यापार और निवेश पर विशेष जोर वार्ता के दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने तथा निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कई पहल पर चर्चा की। ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों ने भारत के बुनियादी ढांचा, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्रों में बढ़ती संभावनाओं में रुचि दिखाई। दोनों सरकारों ने व्यापारिक समुदाय के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग भारत और ऑस्ट्रेलिया ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त, सुरक्षित और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था के समर्थन को दोहराया। दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा उद्योग सहयोग, समुद्री निगरानी और सूचना साझाकरण को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। शिक्षा और सांस्कृतिक संबंध बैठक में उच्च शिक्षा, विश्वविद्यालयों के बीच साझेदारी, छात्र विनिमय कार्यक्रम तथा संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने लोगों के बीच संपर्क (People-to-People Connectivity) को भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बताया। उद्योग जगत से संवाद प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ भी बैठक की। उन्होंने भारत में तेज़ी से विकसित हो रहे विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), फिनटेक और डिजिटल अवसंरचना क्षेत्रों में निवेश के अवसरों को रेखांकित किया। इंडो-पैसिफिक सहयोग पर साझा दृष्टिकोण दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाए रखने के महत्व पर सहमति व्यक्त की। समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग को भविष्य की रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। विशेषज्ञों की राय विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। रक्षा, व्यापार, शिक्षा, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग में हुई प्रगति दोनों देशों के दीर्घकालिक रणनीतिक हितों को और मजबूत करेगी। स्रोत:भारत सरकार, ऑस्ट्रेलिया सरकार तथा दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के आधिकारिक वक्तव्य। मूल रिपोर्ट:10 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी एवं विश्वसनीय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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PM मोदी और ऑस्ट्रेलियाई PM एंथनी अल्बनीज़ की बैठक, रक्षा, व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर कई अहम समझौते

मेलबर्न, 9 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने मेलबर्न में आयोजित भारत–ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन में व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक में रक्षा सहयोग, व्यापार एवं निवेश, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), स्वच्छ ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को नई गति देने पर सहमति बनी। रक्षा सहयोग को मिलेगा नया विस्तार दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा उद्योग सहयोग और रक्षा तकनीक के आदान-प्रदान को और मजबूत करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही Maritime Security Collaboration Roadmap पर भी सहमति बनी, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों का रणनीतिक समन्वय और मजबूत होगा। व्यापार और निवेश पर बड़ा फोकस बैठक के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया ने द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने तथा व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। ऑस्ट्रेलिया ने भारत में 500 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के नए निवेश की घोषणा की, जिसका उपयोग बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में किया जाएगा। साथ ही दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटल अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) सहयोग को भी प्राथमिकता देने पर सहमति जताई। यूरेनियम और स्वच्छ ऊर्जा में नई साझेदारी शिखर वार्ता की प्रमुख उपलब्धियों में शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के लिए ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम आपूर्ति समझौता शामिल रहा। इसके अलावा हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा और कम-कार्बन तकनीकों में संयुक्त निवेश एवं अनुसंधान बढ़ाने पर भी सहमति बनी। AI और उन्नत तकनीकों पर सहयोग दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक और उभरती डिजिटल तकनीकों में संयुक्त अनुसंधान तथा औद्योगिक सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की तेज़ी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों के लिए दीर्घकालिक निवेश के बड़े अवसर प्रदान करती है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण दोनों नेताओं ने स्वतंत्र, सुरक्षित और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के समर्थन को दोहराया। उन्होंने समुद्री मार्गों की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। व्यापारिक समुदाय से भी संवाद शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने Australia–India CEOs Forum को भी संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने विनिर्माण, अवसंरचना, स्वच्छ ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, AI, फिनटेक, खाद्य प्रसंस्करण और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में निवेश के व्यापक अवसरों को रेखांकित किया। रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा विशेषज्ञों का मानना है कि इस वार्षिक शिखर सम्मेलन से भारत और ऑस्ट्रेलिया की Comprehensive Strategic Partnership को नई मजबूती मिलेगी। रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, तकनीक और निवेश जैसे क्षेत्रों में हुए समझौते आने वाले वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक और सामरिक संबंधों को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. स्रोत:भारत सरकार, ऑस्ट्रेलिया सरकार एवं दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के आधिकारिक कार्यालय। मूल रिपोर्ट:9 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी, प्रेस विज्ञप्तियों तथा विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया पहुंचे, रक्षा, व्यापार और समुद्री सहयोग को मिलेगी नई गति

जकार्ता/नई दिल्ली, 7 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी आधिकारिक विदेश यात्रा के तहत सोमवार को इंडोनेशिया पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं ने रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति व्यक्त की। हालिया बैठकों के दौरान दोनों देशों ने कई क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण समझ और समझौतों को अंतिम रूप दिया। रक्षा सहयोग को नई मजबूती वार्ता में रक्षा क्षेत्र प्रमुख विषयों में शामिल रहा। दोनों देशों ने सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग सहयोग, संयुक्त अभ्यास, रक्षा प्रौद्योगिकी और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षित एवं नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धता भी दोहराई गई। व्यापार और निवेश बढ़ाने पर सहमति भारत और इंडोनेशिया ने द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। दोनों पक्षों ने निवेश को प्रोत्साहित करने, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत बनाने तथा फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, विनिर्माण, डिजिटल सेवाओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। व्यापारिक समुदाय के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए भी नई पहल पर सहमति बनी। समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक रणनीति इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों को देखते हुए दोनों देशों ने समुद्री सहयोग को प्राथमिकता देने पर बल दिया। नौवहन की स्वतंत्रता, समुद्री डकैती की रोकथाम, मानवीय सहायता, आपदा राहत और समुद्री निगरानी के क्षेत्र में सहयोग को और व्यापक बनाने की दिशा में चर्चा हुई। डिजिटल और तकनीकी सहयोग बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल भुगतान, साइबर सुरक्षा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। दोनों देशों ने नवाचार, स्टार्टअप और डिजिटल अर्थव्यवस्था में साझेदारी को भविष्य के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया। ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर चर्चा ऊर्जा सुरक्षा, हरित ऊर्जा, जैव ईंधन, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा भी वार्ता के प्रमुख विषय रहे। दोनों देशों ने दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग के लिए इन क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं और निवेश की संभावनाओं पर विचार किया। विशेषज्ञों की राय विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत की ‘Act East Policy’ और इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण को और मजबूती प्रदान करेगी। दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की बढ़ती भागीदारी से आर्थिक, सामरिक और समुद्री सहयोग के नए अवसर खुलने की संभावना है। साथ ही यह क्षेत्रीय स्थिरता और बहुपक्षीय सहयोग को भी बढ़ावा दे सकता है। आगे की राह प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान हुई सहमतियों के आधार पर दोनों देशों के संबंधित मंत्रालय अब विभिन्न परियोजनाओं और समझौतों के क्रियान्वयन पर काम करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत और इंडोनेशिया के संबंध रक्षा, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में और अधिक मजबूत होंगे। स्रोत:भारत का विदेश मंत्रालय (MEA), इंडोनेशिया सरकार की आधिकारिक जानकारी एवं संयुक्त आधिकारिक वक्तव्य। मूल रिपोर्ट:7 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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विदेश मंत्री की बहुदेशीय कूटनीतिक यात्रा से इंडो-पैसिफिक रणनीति पर भारत का बढ़ता फोकस

नई दिल्ली, 6 जुलाई। विदेश मंत्री की बहुदेशीय कूटनीतिक यात्रा के बीच भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति एक बार फिर वैश्विक चर्चा का विषय बन गई है। क्षेत्रीय सहयोग, समुद्री सुरक्षा, आर्थिक संपर्क, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और रणनीतिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर भारत की सक्रिय भूमिका लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का बढ़ता महत्व विशेषज्ञों का मानना है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री मार्गों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी कारण भारत अपनी विदेश नीति में इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग को लगातार प्राथमिकता दे रहा है। समुद्री सुरक्षा पर विशेष जोर भारत हिंद महासागर और व्यापक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षित एवं नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था का समर्थक रहा है। समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता, आपदा राहत, समुद्री निगरानी और नौवहन की स्वतंत्रता भारत की रणनीतिक नीति के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा भारत विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मंचों के माध्यम से इंडो-पैसिफिक देशों के साथ सहयोग को मजबूत कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस नीति का उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक विकास और साझा सुरक्षा चुनौतियों से मिलकर निपटना है। व्यापार और निवेश पर भी फोकस रणनीतिक सहयोग के साथ-साथ भारत इंडो-पैसिफिक देशों के साथ व्यापार, निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था, हरित ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज और उन्नत तकनीकों में साझेदारी को भी आगे बढ़ा रहा है। इससे आर्थिक संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों की राय विदेश नीति विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की सक्रिय कूटनीति उसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित कर रही है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में बहुपक्षीय सहयोग और संतुलित विदेश नीति भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत कर सकती है। भविष्य की दिशा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के देशों के साथ रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, व्यापार और कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर और अधिक ध्यान देगा। इससे क्षेत्रीय स्थिरता के साथ-साथ भारत की वैश्विक रणनीतिक भूमिका भी और मजबूत होने की संभावना है। स्रोत:विदेश मंत्रालय (MEA), भारत सरकार की सार्वजनिक विदेश नीति संबंधी जानकारी एवं आधिकारिक वक्तव्य। मूल रिपोर्ट:6 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय मामलों के समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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