राष्ट्रीय | छात्र आंदोलन, NEET और सरकार पर विशाल ददलानी का व्यंग्यात्मक वीडियो; सोशल मीडिया पर तेज़ बहस

मशहूर गायक और संगीतकार विशाल ददलानी का एक व्यंग्यात्मक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्होंने छात्र आंदोलन, NEET पेपर लीक और सरकार की भूमिका पर अपनी टिप्पणी की है। विशाल ददलानी ने कहा कि छात्रों पर कथित लाठीचार्ज, आंसू गैस के इस्तेमाल और कार्रवाई से ज्यादा चर्चा छात्रों द्वारा इस्तेमाल किए गए अपशब्दों पर हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि NEET पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर अधिक गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए, क्योंकि इससे हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है। इसके साथ ही उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा, “अहंकार कम कीजिए, पीआर कम कीजिए और खराब रील्स बनाना बंद कीजिए।” इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों ने छात्रों के मुद्दों पर आवाज़ उठाने क�

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भारत सरकार ने Meta की ग्लोबल टीम को तलब किया, PM मोदी की पोस्ट और ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी पर होगी जवाबदेही तय

नई दिल्ली: भारत सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी Meta (Facebook और Instagram) की वैश्विक टीम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Facebook पोस्ट के अस्थायी रूप से हटाए जाने और ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी (Child Safety) से जुड़े मामलों पर स्पष्टीकरण देने के लिए नई दिल्ली तलब किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों के साथ होने वाली इस बैठक में कंटेंट मॉडरेशन, बच्चों की सुरक्षा, AI आधारित निगरानी और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। PM मोदी की पोस्ट पर उठा विवाद हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक Facebook पोस्ट कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं रही थी। Meta ने बाद में इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए पोस्ट को बहाल कर दिया और खेद भी व्यक्त किया। हालांकि, सरकार का मानना है कि इस तरह की घटनाएँ सार्वजनिक संवाद और डिजिटल प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता से जुड़ी हैं, इसलिए कंपनी से विस्तृत स्पष्टीकरण लिया जाना आवश्यक है। ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी पर सरकार सख्त बैठक का दूसरा प्रमुख मुद्दा प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा है। सरकार Meta से यह जानना चाहती है कि बच्चों के खिलाफ यौन शोषण संबंधी सामग्री (CSAM), फर्जी अकाउंट, ऑनलाइन ग्रूमिंग और आपत्तिजनक कंटेंट को रोकने के लिए कंपनी कौन-कौन से तकनीकी और प्रशासनिक कदम उठा रही है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय उपयोगकर्ताओं, विशेषकर बच्चों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म सुरक्षित बने रहें। AI और कंटेंट मॉडरेशन पर भी चर्चा सूत्रों के अनुसार बैठक में AI आधारित कंटेंट मॉडरेशन, डीपफेक सामग्री, फर्जी सूचनाओं की रोकथाम और Verified Accounts की सुरक्षा व्यवस्था पर भी चर्चा होगी। सरकार चाहती है कि Meta भारतीय कानूनों और आईटी नियमों के अनुरूप अपनी नीतियों को और अधिक पारदर्शी बनाए तथा शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करे। डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर जोर भारत सरकार लगातार यह स्पष्ट कर रही है कि देश में कार्यरत सभी डिजिटल प्लेटफॉर्मों को स्थानीय कानूनों का पालन करना होगा। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी केवल कंटेंट होस्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उपयोगकर्ता सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उनकी जिम्मेदारी है। निष्कर्ष Meta की वैश्विक टीम के साथ होने वाली यह बैठक भारत सरकार और बड़ी टेक कंपनियों के बीच डिजिटल सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार का लक्ष्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भारतीय कानूनों के अनुरूप बनाना है, ताकि उपयोगकर्ताओं का भरोसा मजबूत हो सके। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Meta जय राष्ट्र न्यूज़

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Meta की ग्लोबल टीम को भारत सरकार का समन, PM मोदी की Facebook पोस्ट और चाइल्ड सेफ्टी पर होगी जवाबदेही तय

नई दिल्ली: भारत सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी Meta (Facebook और Instagram) की वैश्विक टीम को 5 और 6 अगस्त को नई दिल्ली में होने वाली उच्चस्तरीय बैठक के लिए तलब किया है। सरकार इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Facebook पोस्ट को अस्थायी रूप से ब्लॉक किए जाने, प्लेटफॉर्म पर Child Sexual Abuse Material (CSAM) से जुड़े मामलों, AI आधारित कंटेंट मॉडरेशन और सत्यापित (Verified) अकाउंट्स की सुरक्षा व्यवस्था पर जवाब मांगेगी। PM मोदी की पोस्ट पर उठे सवाल सरकार की नाराज़गी उस समय सामने आई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक Facebook पोस्ट कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंधित हो गई थी। Meta ने बाद में इसे तकनीकी त्रुटि (Technical Error) बताते हुए पोस्ट को बहाल कर दिया और खेद भी जताया। हालांकि, सरकार का कहना है कि केवल “तकनीकी गलती” का स्पष्टीकरण पर्याप्त नहीं है और इस मामले में विस्तृत जवाबदेही तय की जाएगी। चाइल्ड सेफ्टी और CSAM पर सख्त रुख बैठक में सरकार Meta से यह भी पूछेगी कि उसके प्लेटफॉर्म पर Child Sexual Exploitative and Abuse Material (CSAM) से जुड़े कंटेंट और विज्ञापनों को रोकने के लिए कौन-सी सुरक्षा व्यवस्थाएँ लागू हैं। हाल ही में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने भी Meta के प्लेटफॉर्म पर कथित CSAM विज्ञापनों को लेकर जांच शुरू की है। सरकार चाहती है कि कंपनी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर अधिक प्रभावी तकनीकी उपाय अपनाए। AI कंटेंट और Verified Accounts पर भी चर्चा सूत्रों के अनुसार बैठक में AI द्वारा तैयार किए गए कंटेंट, डीपफेक सामग्री, Verified Accounts की सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन की पारदर्शिता जैसे मुद्दे भी प्रमुख रहेंगे। सरकार का कहना है कि बड़ी डिजिटल कंपनियों को भारत के कानूनों और उपयोगकर्ता सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करना होगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर सरकार का जोर आईटी मंत्रालय का मानना है कि करोड़ों भारतीय उपयोगकर्ताओं वाले डिजिटल प्लेटफॉर्मों की जिम्मेदारी केवल कंटेंट होस्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें उपयोगकर्ता सुरक्षा, बाल संरक्षण और निष्पक्ष कंटेंट मॉडरेशन भी सुनिश्चित करना होगा। इसी उद्देश्य से Meta के वरिष्ठ वैश्विक अधिकारियों को सीधे नई दिल्ली बुलाकर विस्तृत चर्चा की जा रही है। निष्कर्ष Meta की वैश्विक टीम के साथ होने वाली यह बैठक भारत सरकार और बड़ी टेक कंपनियों के बीच डिजिटल सुरक्षा, कंटेंट मॉडरेशन और जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि भारत में संचालन करने वाले सभी डिजिटल प्लेटफॉर्मों को स्थानीय कानूनों, उपयोगकर्ता सुरक्षा और बच्चों के संरक्षण से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Meta जय राष्ट्र न्यूज़

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