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16 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने तोड़ा अनशन, सदर अस्पताल में खत्म हुई भूख हड़ताल

रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना 16 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया है। उन्होंने रांची के सदर अस्पताल में सोमवार रात भूख हड़ताल खत्म की। सरकार के फैसले के बाद खत्म हुआ अनशन देवेंद्र नाथ महतो का अनशन उस समय समाप्त हुआ जब झारखंड सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा और TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 17 अगस्त को घोषणा की कि TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं और उनसे जुड़े परिणामों एवं नियुक्ति प्रक्रियाओं को रद्द किया जाएगा। साथ ही 2014 से TDPL के जरिए हुई परीक्षाओं की जांच का फैसला भी लिया गया। सदर अस्पताल में जूस पिलाकर अनशन खत्म अनशन खत्म कराने के दौरान झारखंड सरकार के मंत्री दीपिका पांडे सिंह और इरफान अंसारी सदर अस्पताल पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार, देवेंद्र नाथ महतो ने जूस पीकर अपना अनशन समाप्त किया। इस दौरान उनके साथ मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों ने भी भूख हड़ताल समाप्त की। महतो ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए इसे छात्रों के संघर्ष की बड़ी उपलब्धि बताया। 16 दिनों तक जारी रहा संघर्ष देवेंद्र नाथ महतो ने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता की मांग को लेकर 16 दिनों तक भूख हड़ताल की। लंबे समय तक भोजन नहीं लेने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने उनके स्वास्थ्य में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन जैसी समस्याओं को लेकर चिंता जताई थी। अस्पताल में भर्ती रहने के बावजूद महतो लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने पर जोर देते रहे। JSSC-CGL रद्द होने से छात्रों में खुशी सरकार के फैसले के बाद आंदोलनकारी छात्रों में खुशी देखी गई। JSSC-CGL समेत TDPL से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने को छात्र नेताओं ने अपनी बड़ी जीत बताया है। हालांकि, आंदोलन पूरी तरह खत्म हुआ है या नहीं, इस पर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। CBI जांच की मांग अभी बाकी छात्र आंदोलन से जुड़े संगठनों की एक प्रमुख मांग CBI जांच की भी रही है। सरकार द्वारा परीक्षाएं रद्द किए जाने के बावजूद छात्र संगठनों के एक धड़े ने कहा है कि जब तक भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रह सकता है। इसलिए परीक्षा रद्द होने के बाद भी झारखंड में भर्ती व्यवस्था और जांच को लेकर राजनीतिक एवं छात्र आंदोलन जारी रहने की संभावना है। अब आगे क्या होगा? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रद्द की गई परीक्षाओं को दोबारा कब कराया जाएगा और नई परीक्षा व्यवस्था कैसी होगी। साथ ही, सरकार को उन अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था करनी होगी, जो पहले की चयन प्रक्रिया में सफल हुए थे। निष्कर्ष 16 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने रांची के सदर अस्पताल में अपना अनशन समाप्त कर दिया। यह फैसला झारखंड सरकार द्वारा JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद आया। हालांकि, CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र आंदोलन का अगला रुख महत्वपूर्ण रहेगा। Source: Hindustan Times, Indian Express, Navbharat Times, Amar Ujala जय राष्ट्र न्यूज़

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झारखंड में बड़ा फैसला! TDPL से जुड़ी परीक्षाएं, परिणाम और नियुक्तियां रद्द

रांची: झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई विशेष कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने TSR Data Processing Private Limited (TDPL) से जुड़ी परीक्षाओं, उनके परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का ऐलान किया है। इसमें JSSC-CGL परीक्षा भी शामिल है। 2014 से TDPL से जुड़ी परीक्षाओं की होगी जांच सरकार ने TDPL के माध्यम से 2014 से आयोजित परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा और जांच का फैसला लिया है। सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रियाओं में अगर किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। TDPL से जुड़ी परीक्षाओं में JPSC और JSSC की कई महत्वपूर्ण भर्तियां शामिल रही हैं। इनमें JSSC-CGL, फील्ड वर्कर, वनरक्षक और PGT शिक्षक भर्ती जैसी परीक्षाओं का भी उल्लेख किया गया है। JSSC-CGL भी हुई रद्द सरकार के फैसले का सबसे बड़ा असर JSSC Combined Graduate Level (JSSC-CGL) परीक्षा पर पड़ा है। परीक्षा रद्द होने से उन अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है, जिन्होंने परीक्षा पास कर चयन प्रक्रिया पूरी की थी। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 2,000 उम्मीदवारों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर आगे की प्रक्रिया तय करना होगी। छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद फैसला यह फैसला झारखंड में चल रहे लंबे छात्र आंदोलन के बीच आया है। छात्र संगठन भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे थे। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। रिपोर्ट के अनुसार, TDPL और JSSC-CGL को रद्द करने के निर्णय के बाद उन्होंने अपनी 16 दिन की भूख हड़ताल समाप्त कर दी। हालांकि, छात्रों की सभी मांगें पूरी नहीं हुई हैं। आंदोलनकारी अब भी पूरे मामले में CBI जांच की मांग पर कायम हैं। लगभग 15 बड़ी परीक्षाएं सवालों के घेरे में उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार TDPL की भूमिका JPSC और JSSC की करीब 15 बड़ी परीक्षाओं में रही है। इनमें JPSC की विभिन्न सिविल सेवा परीक्षाओं के अलावा Civil Judge, Assistant Public Prosecutor, JET और अन्य भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं। JSSC की जिन परीक्षाओं का उल्लेख किया गया है, उनमें: शामिल हैं। सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार करेगी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भर्ती परीक्षाओं में सुधार के लिए एक नई व्यवस्था की दिशा में भी कदम उठाने की बात कही है। सरकार का उद्देश्य ऐसी परीक्षा प्रणाली तैयार करना है जिसमें पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों की गुंजाइश कम से कम हो और अभ्यर्थियों का भरोसा दोबारा कायम किया जा सके। सरकार ने छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सुझाव लेने के लिए एक पोर्टल की व्यवस्था की घोषणा भी की है। आगे क्या होगा? TDPL से जुड़ी परीक्षाओं और परिणामों को रद्द किए जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल है कि प्रभावित परीक्षाओं का दोबारा आयोजन कब और किस एजेंसी के माध्यम से होगा। इसके अलावा जिन उम्मीदवारों का चयन हो चुका था या जो नियुक्त होकर सेवा में आ चुके हैं, उनके मामले में भी सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने होंगे। इस फैसले से प्रभावित उम्मीदवारों के कानूनी विकल्पों पर भी नजर रहेगी। निष्कर्ष झारखंड सरकार का TDPL से जुड़ी परीक्षाओं, परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला राज्य की भर्ती व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। JSSC-CGL के रद्द होने से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य सीधे प्रभावित हुआ है। अब निगाह इस बात पर है कि सरकार दोबारा परीक्षा और प्रभावित उम्मीदवारों के लिए क्या व्यवस्था करती है। Source: The New Indian Express, NDTV, DD India, Times of India, Prabhat Khabar जय राष्ट्र न्यूज़

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रांची में छात्रों के प्रदर्शन पर वाटर कैनन का इस्तेमाल, पुलिस कार्रवाई का वीडियो वायरल

रांची: झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा वाटर कैनन के इस्तेमाल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। घटना के वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। छात्रों के प्रदर्शन के दौरान बढ़ा तनाव रांची में बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार और प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखी गईं। प्रदर्शन के दौरान भीड़ बढ़ने और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी। स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की प्रदर्शन स्थल पर पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए गए थे। जब प्रदर्शनकारी बैरिकेड के करीब पहुंचे तो पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन चलाया। वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारियों पर पानी की तेज धार छोड़े जाने का दृश्य दिखाई दे रहा है। पुलिस कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से शेयर किए जा रहे हैं। वीडियो में पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल करते हुए देखा जा सकता है। हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो के संदर्भ और पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। इसलिए किसी वीडियो के आधार पर पूरे घटनाक्रम का निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है। छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन पर अड़े प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि उनकी मांगों को सरकार और प्रशासन को गंभीरता से सुनना चाहिए। छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है। प्रदर्शनकारियों की ओर से प्रशासन से बातचीत और उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई की मांग की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुलिस की कार्रवाई प्रदर्शन को देखते हुए रांची में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई। पुलिस और प्रशासन की ओर से भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए बैरिकेडिंग समेत अन्य व्यवस्थाएं की गईं। वाटर कैनन का इस्तेमाल पुलिस की ओर से भीड़ को तितर-बितर करने और स्थिति को नियंत्रण में रखने की कार्रवाई के तौर पर किया गया। वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर बहस वाटर कैनन की कार्रवाई का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग पुलिस की कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी बता रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगे की कार्रवाई पर नजर घटना के बाद अब छात्रों और प्रशासन के बीच बातचीत तथा प्रदर्शन की आगे की स्थिति पर नजर बनी हुई है। यदि छात्रों की मांगों को लेकर कोई बातचीत या प्रशासन की ओर से कोई निर्णय सामने आता है, तो उससे आंदोलन की दिशा स्पष्ट हो सकती है। निष्कर्ष रांची में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा वाटर कैनन के इस्तेमाल का वीडियो वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछार की, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे हैं। फिलहाल मामले में प्रदर्शनकारियों की मांगों, पुलिस कार्रवाई और प्रशासन के आधिकारिक पक्ष पर नजर बनी हुई है। वायरल वीडियो के आधार पर किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि किए बिना उन्हें अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं होगा। Source: स्थानीय रिपोर्ट्स / वायरल वीडियो / पुलिस-प्रशासन से संबंधित जानकारी जय राष्ट्र न्यूज़

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रामगढ़ सड़क हादसे के बाद राहत एवं बचाव अभियान जारी, प्रशासन ने जांच के दिए आदेश

रामगढ़, 27 जून। झारखंड के रामगढ़ जिले में हुए भीषण सड़क हादसे के बाद प्रशासन ने राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्र में राहत कार्य में जुटी हुई हैं। हादसे में घायल लोगों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जबकि गंभीर रूप से घायल मरीजों को बेहतर इलाज के लिए उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफर किया गया है। घटना की विस्तृत जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। राहत एवं बचाव अभियान जारी हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंच गईं। बचाव दल ने क्षतिग्रस्त वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। प्रशासन का कहना है कि राहत कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया गया और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। घायलों का इलाज जारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार हादसे में घायल कई लोगों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। डॉक्टरों की विशेष टीम मरीजों की निगरानी कर रही है। गंभीर रूप से घायल लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। प्रशासन ने अस्पतालों को सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। जांच के आदेश जिला प्रशासन ने दुर्घटना के कारणों की जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों की जांच कर रही है और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल इस दुर्घटना के बाद क्षेत्र में सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाना आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। सरकार ने सहायता का भरोसा दिलाया राज्य सरकार ने हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिलाया है। अधिकारियों को राहत कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतने और घायलों के उपचार में पूरी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। प्रशासन लगातार कर रहा निगरानी जिला प्रशासन ने बताया कि राहत एवं बचाव अभियान की लगातार निगरानी की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारी समय-समय पर स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं ताकि प्रभावित लोगों को समय पर सहायता मिल सके। घटना की जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी। स्रोत:झारखंड पुलिस, रामगढ़ जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग मूल रिपोर्ट:जिला प्रशासन की आधिकारिक जानकारी तथा विभिन्न राष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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