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लोकसभा ने UPI लेनदेन पर संभावित MDR शुल्क का रास्ता खोलने वाला विधेयक पारित किया, डिजिटल भुगतान क्षेत्र में बड़ी बहस

नई दिल्ली: लोकसभा ने Payment and Settlement Systems (PSS) Act, 2007 में संशोधन से जुड़े प्रावधानों वाला Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 पारित कर दिया है। इस संशोधन के बाद केंद्र सरकार को भविष्य में Unified Payments Interface (UPI) सहित अधिसूचित डिजिटल भुगतान माध्यमों पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने की अनुमति देने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा। हालांकि, विधेयक पारित होने का मतलब यह नहीं है कि UPI पर तुरंत शुल्क लग गया है। क्या बदलेगा? अब तक UPI भुगतान पर उपभोक्ताओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाता था और व्यापारियों पर भी MDR लागू नहीं था। नए संशोधन के बाद सरकार आवश्यकता पड़ने पर अधिसूचना जारी करके बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को कुछ श्रेणियों के UPI लेनदेन पर MDR लगाने की अनुमति दे सकती है। यह कदम डिजिटल भुगतान ढांचे को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से उठाया गया बताया जा रहा है। क्या आम उपभोक्ता को भुगतान करना होगा? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित MDR उपभोक्ताओं पर नहीं, बल्कि व्यापारियों (Merchants) पर लागू होगा। उन्होंने कहा कि आम लोग पहले की तरह बिना किसी शुल्क के UPI का उपयोग कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य केवल भुगतान व्यवस्था के संचालन से जुड़े खर्चों के लिए कानूनी ढांचा उपलब्ध कराना है। छोटे लेनदेन पर असर नहीं सरकारी सूत्रों और उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार ₹2,000 तक के अधिकांश छोटे UPI भुगतान पहले की तरह शुल्क-मुक्त रहने की संभावना है। यदि भविष्य में MDR लागू किया भी जाता है, तो उसका दायरा मुख्यतः बड़े व्यापारी लेनदेन तक सीमित हो सकता है। अंतिम निर्णय सरकार द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद ही प्रभावी होगा। डिजिटल भुगतान उद्योग की प्रतिक्रिया बैंकिंग और फिनटेक उद्योग लंबे समय से तर्क दे रहे थे कि पूरी तरह निःशुल्क UPI मॉडल के कारण भुगतान अवसंरचना (Infrastructure) को बनाए रखने की लागत लगातार बढ़ रही है। उनका कहना है कि सीमित MDR व्यवस्था से बैंक, NPCI और भुगतान सेवा प्रदाता तकनीकी निवेश, साइबर सुरक्षा और नई सेवाओं में अधिक निवेश कर सकेंगे। दूसरी ओर कई व्यापारी संगठनों ने आशंका जताई है कि यदि MDR लागू हुआ तो छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है। राजनीतिक बहस विधेयक संसद में विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच पारित हुआ। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस तरह का महत्वपूर्ण कानून पर्याप्त चर्चा के बिना पारित किया गया, जबकि सरकार का कहना है कि यह केवल भविष्य के लिए कानूनी प्रावधान उपलब्ध कराता है और किसी प्रकार का तत्काल शुल्क लागू नहीं करता। निष्कर्ष लोकसभा द्वारा पारित संशोधन ने UPI पर संभावित MDR लागू करने का कानूनी रास्ता अवश्य खोला है, लेकिन फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए UPI भुगतान पहले की तरह मुफ्त है। भविष्य में किसी भी प्रकार का शुल्क लागू करने के लिए केंद्र सरकार को अलग से अधिसूचना जारी करनी होगी। Source: Ministry of Finance | Lok Sabha Proceedings जय राष्ट्र न्यूज़

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सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया—SC/ST आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ लागू नहीं होगी, संसद और राजनीतिक गलियारों में बहस तेज़

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण पर ‘क्रीमी लेयर’ सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता। सरकार ने अदालत से कहा कि SC/ST समुदायों को मिलने वाला आरक्षण केवल आर्थिक स्थिति पर आधारित नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक और सामाजिक भेदभाव की भरपाई के उद्देश्य से संविधान में दिया गया है। इसलिए आर्थिक रूप से सक्षम होने मात्र से इन वर्गों के लोगों को आरक्षण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। सरकार ने क्या कहा? केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि क्रीमी लेयर का सिद्धांत वर्तमान में केवल अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) पर लागू होता है। SC/ST समुदायों की सामाजिक स्थिति और उनके साथ होने वाला ऐतिहासिक भेदभाव OBC से अलग प्रकृति का है। सरकार का तर्क है कि इन समुदायों के साथ होने वाला सामाजिक भेदभाव आर्थिक उन्नति के बाद भी पूरी तरह समाप्त नहीं होता, इसलिए केवल आय या आर्थिक स्थिति के आधार पर उन्हें आरक्षण से बाहर करना संविधान की भावना के विपरीत होगा। सुप्रीम कोर्ट में क्या मामला है? सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में मांग की गई है कि SC/ST आरक्षण के भीतर भी आर्थिक रूप से सक्षम वर्गों को अलग कर “क्रीमी लेयर” लागू की जाए ताकि आरक्षण का लाभ सबसे अधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुँचे। केंद्र सरकार ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि ऐसा कोई भी बड़ा बदलाव न्यायिक आदेश के बजाय विधायी और नीतिगत प्रक्रिया के माध्यम से ही किया जाना चाहिए। राजनीतिक बहस तेज़ सरकार के इस रुख के बाद संसद और राजनीतिक दलों में बहस तेज़ हो गई है। कई दलों ने सरकार के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि SC/ST आरक्षण सामाजिक न्याय का संवैधानिक अधिकार है और इसे आर्थिक आधार से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। वहीं कुछ संगठनों और विशेषज्ञों का मत है कि आरक्षण का लाभ समुदाय के सबसे वंचित वर्गों तक पहुँचाने के लिए आंतरिक सुधारों पर चर्चा होनी चाहिए। संवैधानिक और सामाजिक महत्व विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल आरक्षण नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय और समान अवसर की संवैधानिक अवधारणा से भी जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई भविष्य में आरक्षण व्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। फिलहाल केंद्र सरकार ने अपना स्पष्ट रुख रखते हुए SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने से इनकार किया है। निष्कर्ष केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दोहराया है कि SC/ST आरक्षण ऐतिहासिक सामाजिक भेदभाव को ध्यान में रखकर दिया गया संवैधानिक प्रावधान है और इस पर क्रीमी लेयर सिद्धांत लागू नहीं किया जाना चाहिए। अब इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और निर्णय पर देशभर की नज़र बनी हुई है। Source: Ministry of Social Justice & Empowerment | Supreme Court Proceedings जय राष्ट्र न्यूज़

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स्वतंत्रता दिवस और आगामी सांस्कृतिक आयोजनों की तैयारियाँ तेज़, देशभर में विशेष कार्यक्रमों की घोषणा

नई दिल्ली: आगामी 79वें स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) और उससे पहले आयोजित होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर देशभर में तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं। केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, जिला प्रशासन, शैक्षणिक संस्थान और सांस्कृतिक संगठन राष्ट्रीय उत्सव को भव्य बनाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। कई राज्यों में देशभक्ति सांस्कृतिक संध्या, तिरंगा यात्राएँ, कला एवं शिल्प प्रदर्शनियाँ, विद्यालयी कार्यक्रम, लोकनृत्य प्रस्तुतियाँ और युवा महोत्सव आयोजित किए जाने की घोषणा की गई है। लाल किले से होगा मुख्य समारोह नई दिल्ली के लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और विभिन्न एजेंसियाँ आयोजन की व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रही हैं। प्रधानमंत्री के संबोधन, ध्वजारोहण समारोह और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियाँ चल रही हैं। राज्यों में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम और अन्य राज्यों में स्थानीय प्रशासन द्वारा स्वतंत्रता दिवस सप्ताह के दौरान विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें लोक कलाकारों की प्रस्तुतियाँ, देशभक्ति गीत, नाटक, चित्रकला प्रतियोगिताएँ, हस्तशिल्प मेले और पारंपरिक कला प्रदर्शन शामिल होंगे। युवाओं और छात्रों की भागीदारी विद्यालयों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में देशभक्ति पर आधारित प्रतियोगिताएँ, भाषण, वाद-विवाद, निबंध लेखन, वृक्षारोपण अभियान और तिरंगा रैलियों की तैयारी की जा रही है। शिक्षा विभाग ने संस्थानों से अधिकाधिक छात्र भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को मिलेगा बढ़ावा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत नागरिकों से अपने घरों, कार्यालयों और संस्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने की अपील की जा रही है। प्रशासन विभिन्न स्थानों पर तिरंगा वितरण और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करेगा ताकि अधिक से अधिक लोग अभियान से जुड़ सकें। पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ स्वतंत्रता दिवस और उससे जुड़े आयोजनों के कारण पर्यटन स्थलों, संग्रहालयों, सांस्कृतिक केंद्रों और स्थानीय बाजारों में गतिविधियाँ बढ़ने की संभावना है। इससे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और छोटे व्यापारियों को भी आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। निष्कर्ष स्वतंत्रता दिवस केवल राष्ट्रीय उत्सव नहीं, बल्कि देश की संस्कृति, एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है। देशभर में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम नागरिकों, विशेषकर युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेंगे। Source: Ministry of Culture | Ministry of Home Affairs जय राष्ट्र न्यूज़

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लगातार बारिश के बीच स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, डेंगू, चिकनगुनिया और वायरल बुखार की रोकथाम के लिए राज्यों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश

नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में जारी मानसूनी बारिश के बीच स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया और अन्य मौसमी वायरल बुखारों की रोकथाम के लिए निगरानी और तैयारियाँ बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने कहा है कि बारिश के मौसम में मच्छरों के प्रजनन की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए सभी राज्यों को सर्विलांस, अस्पतालों की तैयारी, समय पर जांच और जन-जागरूकता अभियानों को और मजबूत करना चाहिए. अस्पतालों और स्वास्थ्य एजेंसियों को विशेष निर्देश स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से कहा है कि सरकारी और निजी अस्पतालों में बुखार के मरीजों की समय पर जांच, पर्याप्त बेड, आवश्यक दवाइयाँ और लैब सुविधाएँ उपलब्ध रखी जाएँ। संदिग्ध मामलों की शीघ्र पहचान कर उन्हें एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) के माध्यम से रिपोर्ट करने पर भी जोर दिया गया है. मच्छर नियंत्रण अभियान तेज़ राज्यों को घरों, सार्वजनिक स्थानों और निर्माण स्थलों पर जमा पानी हटाने, फॉगिंग, लार्वा नियंत्रण और स्वच्छता अभियान तेज़ करने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने स्थानीय निकायों से सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने और लोगों को मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करने के लिए जागरूक करने को कहा है. कुछ क्षेत्रों में मामले बढ़ने से सतर्कता हाल के दिनों में देश के कुछ हिस्सों में डेंगू के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। उदाहरण के तौर पर पुणे और तिरुवनंतपुरम में स्वास्थ्य अधिकारियों ने निगरानी बढ़ाने और मच्छर नियंत्रण अभियान तेज़ करने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण मच्छरों के पनपने की स्थिति अनुकूल हो जाती है, इसलिए शुरुआती रोकथाम सबसे प्रभावी उपाय है. लोगों के लिए सलाह स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे घरों के आसपास पानी जमा न होने दें, पूरी बाजू के कपड़े पहनें, मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग करें तथा तेज़ बुखार, सिरदर्द, शरीर दर्द या त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। स्वयं दवा लेने से बचने और समय पर जांच कराने की भी सलाह दी गई है. निष्कर्ष मानसून के दौरान डेंगू, चिकनगुनिया और अन्य वेक्टर जनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है। केंद्र और राज्य सरकारें निगरानी, अस्पतालों की तैयारी और जन-जागरूकता के माध्यम से संभावित प्रकोप को रोकने के प्रयास तेज़ कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि नागरिकों की सतर्कता और सामुदायिक सहयोग संक्रमण की रोकथाम में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. Source: Ministry of Health & Family Welfare | National Centre for Vector Borne Diseases Control (NCVBDC) जय राष्ट्र न्यूज़

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DU PG CSAS Spot Round-1 की समयसीमा बढ़ी, छात्रों को आवेदन और सीट स्वीकार करने के लिए मिला अतिरिक्त समय

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने Common Seat Allocation System (CSAS-PG) 2026 के तहत Spot Round-1 की प्रक्रिया में संशोधित कार्यक्रम जारी करते हुए छात्रों को आवेदन और सीट स्वीकार करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। विश्वविद्यालय का कहना है कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के अनुरोध और प्रवेश प्रक्रिया को अधिक सुचारु बनाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। संशोधित कार्यक्रम आधिकारिक CSAS-PG पोर्टल पर उपलब्ध करा दिया गया है। संशोधित शेड्यूल के अनुसार आगे बढ़ेगी प्रक्रिया दिल्ली विश्वविद्यालय ने रिक्त सीटों की सूची जारी करने के बाद Spot Round-1 के लिए आवेदन, सीट आवंटन, दस्तावेज़ सत्यापन और शुल्क भुगतान की समय-सीमा में बदलाव किया है। जिन अभ्यर्थियों ने अभी तक आवेदन नहीं किया था या अपनी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए थे, उन्हें अब अतिरिक्त समय का लाभ मिलेगा। विश्वविद्यालय ने सभी उम्मीदवारों से निर्धारित नई समय-सीमा के भीतर आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी करने की अपील की है। सीट स्वीकार करने और शुल्क जमा करने का अवसर संशोधित कार्यक्रम के तहत सीट आवंटित होने वाले छात्रों को ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी सीट स्वीकार करनी होगी। इसके बाद संबंधित विभाग या कॉलेज दस्तावेज़ों का सत्यापन करेगा और स्वीकृति मिलने पर अभ्यर्थियों को निर्धारित समय के भीतर ऑनलाइन प्रवेश शुल्क जमा करना होगा। समय-सीमा के भीतर शुल्क जमा न करने पर आवंटित सीट स्वतः निरस्त हो सकती है। रिक्त सीटों को भरने का उद्देश्य विश्वविद्यालय का उद्देश्य Spot Round के माध्यम से रिक्त रह गई सीटों को भरना और अधिक से अधिक योग्य छात्रों को प्रवेश का अवसर देना है। अधिकारियों के अनुसार संशोधित कार्यक्रम से प्रवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से पूरी की जा सकेगी। छात्रों के लिए महत्वपूर्ण सलाह DU प्रशासन ने छात्रों से कहा है कि वे केवल आधिकारिक CSAS-PG पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी पर भरोसा करें और समय-समय पर वेबसाइट पर जारी होने वाले नोटिस देखते रहें। किसी भी प्रकार की त्रुटि या विलंब से बचने के लिए आवेदन, दस्तावेज़ और शुल्क भुगतान समय रहते पूरा करना आवश्यक है। निष्कर्ष Spot Round-1 की समय-सीमा बढ़ने से उन छात्रों को राहत मिली है जो किसी कारणवश निर्धारित अवधि में आवेदन या प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए थे। विश्वविद्यालय का मानना है कि संशोधित कार्यक्रम से रिक्त सीटों को भरने और प्रवेश प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी. Source: University of Delhi (CSAS-PG) जय राष्ट्र न्यूज़

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नई दिल्ली में BWF World Championships 2026 की तैयारियाँ अंतिम चरण में, आयोजकों ने विश्वस्तरीय सुविधाओं का भरोसा दिया

नई दिल्ली: अगस्त में आयोजित होने वाली BWF World Championships 2026 की तैयारियाँ अंतिम चरण में पहुँच गई हैं। टूर्नामेंट 17 से 23 अगस्त तक नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित होगा। आयोजन से पहले बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI), स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) और बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) ने संयुक्त रूप से तैयारियों की समीक्षा की है। आयोजकों ने भरोसा दिलाया है कि इस बार खिलाड़ियों और दर्शकों को विश्वस्तरीय सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। इंडिया ओपन की कमियों को किया गया दूर इस वर्ष जनवरी में आयोजित इंडिया ओपन के दौरान खिलाड़ियों ने स्टेडियम की स्वच्छता, एयर क्वालिटी, पक्षियों की आवाजाही और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें की थीं। इन अनुभवों को ध्यान में रखते हुए आयोजन स्थल में व्यापक सुधार किए गए हैं। स्टेडियम की छत को पूरी तरह वॉटरप्रूफ बनाया गया है, एयर कंडीशनिंग और लाइटिंग सिस्टम को अपग्रेड किया गया है तथा पक्षियों और अन्य जानवरों के प्रवेश को रोकने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। भारतीय खिलाड़ियों से बड़ी उम्मीदें इस विश्व चैंपियनशिप में भारत की ओर से पी.वी. सिंधु, सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी–चिराग शेट्टी, आयुष शेट्टी सहित कई खिलाड़ी चुनौती पेश करेंगे। हाल ही में घोषित ड्रॉ के अनुसार आयुष शेट्टी का पहले ही दौर में विश्व नंबर-1 शी यूकी से मुकाबला होगा, जबकि पी.वी. सिंधु एक बार फिर विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने की कोशिश करेंगी। भारत के लिए ऐतिहासिक अवसर लगभग 17 वर्षों बाद भारत को बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप की मेज़बानी का अवसर मिला है। BAI का कहना है कि यह आयोजन भारतीय बैडमिंटन के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है और इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर अनुभव देने के साथ भारत की आयोजन क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करना है। दर्शकों के लिए बेहतर अनुभव आयोजकों ने टिकटिंग, सुरक्षा, प्रवेश व्यवस्था, दर्शक सुविधाओं और डिजिटल सेवाओं में भी सुधार किए हैं। स्टेडियम परिसर में अतिरिक्त स्वयंसेवकों की तैनाती, बेहतर मार्गदर्शन प्रणाली और आधुनिक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है ताकि खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों को सहज अनुभव मिल सके। निष्कर्ष नई दिल्ली में आयोजित होने वाली BWF World Championships 2026 के लिए तैयारियाँ लगभग पूरी हो चुकी हैं। आयोजन समिति का दावा है कि पिछली कमियों को दूर कर इस बार खिलाड़ियों और दर्शकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव दिया जाएगा। भारतीय बैडमिंटन प्रेमियों की निगाहें अब विश्व चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर टिकी हैं। Source: Badminton World Federation (BWF) | Badminton Association of India (BAI) जय राष्ट्र न्यूज़

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IMD ने कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया, दिल्ली-NCR समेत कई क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ की आशंका

नई दिल्ली: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय मानसून को देखते हुए कई राज्यों के लिए भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, केरल, कर्नाटक, असम, मेघालय और पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में अगले 24–48 घंटों के दौरान तेज बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव, शहरी बाढ़ और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। दिल्ली-NCR में बारिश और ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका IMD के अनुसार दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रुक-रुक कर तेज बारिश होने की संभावना है। इससे कई निचले इलाकों में जलभराव, यातायात बाधित होने और कार्यालय समय के दौरान लंबा जाम लगने की आशंका जताई गई है। नगर निगम और संबंधित एजेंसियों को जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विशेष सतर्कता उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर के राज्यों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन, चट्टानें खिसकने और नदी-नालों के जलस्तर में तेज़ बढ़ोतरी की संभावना है। प्रशासन ने पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करने वाले लोगों को मौसम अपडेट पर नज़र रखने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। प्रशासन और राहत एजेंसियाँ अलर्ट पर राज्य सरकारों और जिला प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों में राहत एवं बचाव दल तैनात रखने, बाढ़ संभावित इलाकों की निगरानी बढ़ाने और आवश्यक संसाधन तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें भी कई संवेदनशील क्षेत्रों में तैयार रखी गई हैं। मछुआरों और किसानों के लिए सलाह मौसम विभाग ने समुद्र में तेज़ हवाओं और ऊँची लहरों की संभावना को देखते हुए तटीय राज्यों के मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है। किसानों को भी खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करने और मौसम विभाग द्वारा जारी स्थानीय सलाह का पालन करने को कहा गया है। नागरिकों के लिए सावधानी IMD ने लोगों से अपील की है कि वे भारी बारिश के दौरान जलभराव वाले क्षेत्रों, नदी-नालों और कमजोर ढांचों से दूर रहें। बिजली गिरने की आशंका वाले क्षेत्रों में खुले स्थानों पर खड़े होने से बचें और यात्रा से पहले स्थानीय मौसम अपडेट अवश्य देखें। निष्कर्ष देश के कई हिस्सों में मानसून फिर से सक्रिय हो गया है और आने वाले दिनों में भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने नागरिकों से सतर्क रहने, प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने और केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर भरोसा करने की अपील की है। Source: India Meteorological Department (IMD) जय राष्ट्र न्यूज़

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने Africa Day कार्यक्रम में भारत–अफ्रीका साझेदारी पर दिया जोर, व्यापार और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की अपील

नई दिल्ली: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में आयोजित Africa Day समारोह को संबोधित करते हुए भारत और अफ्रीकी देशों के बीच व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, रक्षा और रणनीतिक सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और अफ्रीका के संबंध केवल आर्थिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और विकास साझेदारी पर आधारित हैं, जिन्हें आने वाले वर्षों में और मजबूत किया जाएगा। भारत–अफ्रीका संबंधों को बताया रणनीतिक साझेदारी अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि अफ्रीका आज वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। भारत अफ्रीकी देशों के साथ समानता, आपसी सम्मान और साझा विकास के सिद्धांत पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राथमिकता अफ्रीका के साथ दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदारी विकसित करना है। व्यापार और निवेश बढ़ाने पर फोकस विदेश मंत्री ने दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार बढ़ाने, नई निवेश परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने और डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा तथा बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियाँ अफ्रीका में निवेश बढ़ा रही हैं और आने वाले वर्षों में दोनों पक्षों के बीच आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे। तकनीक और क्षमता निर्माण पर जोर जयशंकर ने कहा कि भारत अफ्रीकी देशों के साथ डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक, स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और आईटी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि हजारों अफ्रीकी पेशेवरों को भारत में प्रशिक्षण दिया जा चुका है और यह सहयोग आगे भी जारी रहेगा। रक्षा और सुरक्षा सहयोग होगा मजबूत विदेश मंत्री ने समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, रक्षा प्रशिक्षण और शांति अभियानों में भारत और अफ्रीकी देशों के बीच बढ़ते सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा दोनों पक्षों की साझा प्राथमिकता है। Global South की आवाज़ मजबूत करने की अपील जयशंकर ने कहा कि भारत और अफ्रीका वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विकासशील देशों के हितों की रक्षा के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। निष्कर्ष Africa Day कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का संदेश स्पष्ट था कि भारत और अफ्रीका के संबंध भविष्य की वैश्विक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बनेंगे। व्यापार, निवेश, तकनीक, रक्षा और विकास सहयोग को नई गति देकर दोनों पक्ष साझा समृद्धि और स्थायी विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। Source: Ministry of External Affairs (MEA) जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत सरकार ने Meta की ग्लोबल टीम को तलब किया, PM मोदी की पोस्ट और ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी पर होगी जवाबदेही तय

नई दिल्ली: भारत सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी Meta (Facebook और Instagram) की वैश्विक टीम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Facebook पोस्ट के अस्थायी रूप से हटाए जाने और ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी (Child Safety) से जुड़े मामलों पर स्पष्टीकरण देने के लिए नई दिल्ली तलब किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों के साथ होने वाली इस बैठक में कंटेंट मॉडरेशन, बच्चों की सुरक्षा, AI आधारित निगरानी और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। PM मोदी की पोस्ट पर उठा विवाद हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक Facebook पोस्ट कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं रही थी। Meta ने बाद में इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए पोस्ट को बहाल कर दिया और खेद भी व्यक्त किया। हालांकि, सरकार का मानना है कि इस तरह की घटनाएँ सार्वजनिक संवाद और डिजिटल प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता से जुड़ी हैं, इसलिए कंपनी से विस्तृत स्पष्टीकरण लिया जाना आवश्यक है। ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी पर सरकार सख्त बैठक का दूसरा प्रमुख मुद्दा प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा है। सरकार Meta से यह जानना चाहती है कि बच्चों के खिलाफ यौन शोषण संबंधी सामग्री (CSAM), फर्जी अकाउंट, ऑनलाइन ग्रूमिंग और आपत्तिजनक कंटेंट को रोकने के लिए कंपनी कौन-कौन से तकनीकी और प्रशासनिक कदम उठा रही है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय उपयोगकर्ताओं, विशेषकर बच्चों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म सुरक्षित बने रहें। AI और कंटेंट मॉडरेशन पर भी चर्चा सूत्रों के अनुसार बैठक में AI आधारित कंटेंट मॉडरेशन, डीपफेक सामग्री, फर्जी सूचनाओं की रोकथाम और Verified Accounts की सुरक्षा व्यवस्था पर भी चर्चा होगी। सरकार चाहती है कि Meta भारतीय कानूनों और आईटी नियमों के अनुरूप अपनी नीतियों को और अधिक पारदर्शी बनाए तथा शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करे। डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर जोर भारत सरकार लगातार यह स्पष्ट कर रही है कि देश में कार्यरत सभी डिजिटल प्लेटफॉर्मों को स्थानीय कानूनों का पालन करना होगा। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी केवल कंटेंट होस्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उपयोगकर्ता सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उनकी जिम्मेदारी है। निष्कर्ष Meta की वैश्विक टीम के साथ होने वाली यह बैठक भारत सरकार और बड़ी टेक कंपनियों के बीच डिजिटल सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार का लक्ष्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भारतीय कानूनों के अनुरूप बनाना है, ताकि उपयोगकर्ताओं का भरोसा मजबूत हो सके। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Meta जय राष्ट्र न्यूज़

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Q1 Earnings Season अपने चरम पर, कई बड़ी कंपनियों के वित्तीय नतीजों पर निवेशकों की नज़र

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में पहली तिमाही (Q1 FY2026–27) के नतीजों का सीज़न अपने चरम पर पहुँच गया है। इस सप्ताह कई बड़ी सूचीबद्ध कंपनियाँ अपने अप्रैल–जून तिमाही के वित्तीय परिणाम जारी कर रही हैं। निवेशकों की नज़र विशेष रूप से कंपनियों की आय (Revenue), शुद्ध लाभ (Net Profit), मार्जिन, भविष्य के कारोबार (Guidance) और प्रबंधन की टिप्पणियों पर बनी हुई है, क्योंकि इन्हीं के आधार पर आने वाले महीनों में बाजार की दिशा तय होने की संभावना है। आज कई दिग्गज कंपनियों के नतीजे आज बाजार बंद होने के बाद और दिनभर के दौरान कई प्रमुख कंपनियाँ अपने Q1 परिणाम घोषित कर रही हैं। इनमें Siemens, Bata India, Honasa Consumer, Gland Pharma सहित विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियाँ शामिल हैं। इसके अलावा बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, आईटी, एफएमसीजी और फार्मा सेक्टर की कंपनियों के नतीजों पर भी निवेशकों की विशेष नजर बनी हुई है। बाजार की दिशा तय करेंगे कॉर्पोरेट नतीजे विश्लेषकों का मानना है कि इस तिमाही के नतीजे केवल कंपनियों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि घरेलू मांग, उपभोक्ता खर्च, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और ब्याज दरों के प्रभाव का भी संकेत देंगे। जिन कंपनियों के नतीजे अनुमान से बेहतर रहेंगे, उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। आईटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर फोकस आईटी कंपनियों के लिए विदेशी ऑर्डर, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और AI आधारित सेवाओं की मांग महत्वपूर्ण बनी हुई है। वहीं मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए घरेलू निवेश, सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएँ और निर्यात के आंकड़े निवेशकों के लिए प्रमुख संकेतक होंगे। FMCG कंपनियों के नतीजों से ग्रामीण और शहरी मांग की स्थिति का भी अंदाज़ा लगाया जाएगा। विदेशी निवेशकों की भी नज़र विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) और घरेलू निवेशक (DIIs) दोनों ही कॉर्पोरेट नतीजों का बारीकी से विश्लेषण कर रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यदि कंपनियों के परिणाम उम्मीद से बेहतर रहते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बना रह सकता है। निवेशकों के लिए सलाह विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी है कि केवल तिमाही लाभ पर नहीं, बल्कि कंपनी की भविष्य की रणनीति, नकदी प्रवाह, कर्ज की स्थिति और प्रबंधन के दृष्टिकोण को भी ध्यान में रखकर निवेश संबंधी निर्णय लें। Q1 नतीजे पूरे वित्तीय वर्ष के संभावित प्रदर्शन का शुरुआती संकेत माने जाते हैं। निष्कर्ष Q1 Earnings Season भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण चरण में पहुँच चुका है। आने वाले दिनों में घोषित होने वाले प्रमुख कंपनियों के परिणाम बाजार की चाल, निवेशकों की धारणा और विभिन्न सेक्टरों के प्रदर्शन पर सीधा प्रभाव डाल सकते हैं। Source: National Stock Exchange (NSE) | Bombay Stock Exchange (BSE) | Company Filings जय राष्ट्र न्यूज़

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