क्या भारत को सभी बड़ी प्रवेश परीक्षाएं CBT मोड में कर देनी चाहिए?

जय राष्ट्र न्यूज़ | ओपिनियन डेस्क | 22 जून 2026 प्रस्तावना हाल के वर्षों में राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं को लेकर सुरक्षा, पारदर्शिता और संचालन संबंधी चुनौतियों पर लगातार चर्चा होती रही है। NEET, CUET और अन्य बड़ी परीक्षाओं से जुड़े विवादों के बाद यह सवाल फिर चर्चा में है कि क्या भारत को सभी प्रमुख प्रवेश परीक्षाएं पूरी तरह CBT (Computer Based Test) मोड में आयोजित कर देनी चाहिए। यह केवल तकनीकी बदलाव का मुद्दा नहीं है, बल्कि शिक्षा प्रणाली के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न भी है। CBT मोड के पक्ष में तर्क CBT परीक्षा प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ इसकी पारदर्शिता और सुरक्षा को माना जाता है। प्रश्नपत्रों की डिजिटल डिलीवरी होने से पेपर लीक की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है। इसके अलावा परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया तेज होती है और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में मानवीय त्रुटियों की संभावना भी कम रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक परीक्षा संचालन को अधिक प्रभावी और आधुनिक बना सकती है। परीक्षा प्रक्रिया में तेजी ऑनलाइन परीक्षाओं का एक महत्वपूर्ण लाभ यह भी है कि परिणाम अपेक्षाकृत जल्दी घोषित किए जा सकते हैं। इससे छात्रों को प्रवेश प्रक्रिया और काउंसलिंग के लिए अधिक समय मिलता है। कई विकसित देशों में बड़ी प्रवेश परीक्षाएं पहले से ही डिजिटल माध्यम से आयोजित की जाती हैं। चुनौतियां भी कम नहीं हालांकि CBT मोड के सामने कई व्यावहारिक चुनौतियां भी मौजूद हैं। भारत जैसे विशाल देश में अभी भी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सभी क्षेत्रों में समान रूप से उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के छात्रों को इंटरनेट, कंप्यूटर और तकनीकी संसाधनों तक समान पहुंच सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती हो सकती है। डिजिटल विभाजन का मुद्दा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सभी परीक्षाएं अचानक ऑनलाइन कर दी जाएं तो डिजिटल संसाधनों की कमी वाले छात्रों को नुकसान हो सकता है। इसलिए किसी भी बड़े बदलाव से पहले तकनीकी ढांचे को मजबूत करना और सभी छात्रों को समान अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक होगा। JEE और अन्य परीक्षाओं का अनुभव JEE Main जैसी परीक्षाएं वर्षों से CBT मोड में आयोजित की जा रही हैं। इस मॉडल ने कई सकारात्मक परिणाम दिए हैं और इसे अपेक्षाकृत सफल माना जाता है। इसी अनुभव के आधार पर कुछ विशेषज्ञ अन्य बड़ी परीक्षाओं को भी धीरे-धीरे डिजिटल मोड में स्थानांतरित करने का समर्थन करते हैं। संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता कई शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्ण बदलाव के बजाय चरणबद्ध रणनीति अपनाई जानी चाहिए। जहां संभव हो वहां CBT मोड को बढ़ावा दिया जाए और साथ ही तकनीकी पहुंच को मजबूत किया जाए। इससे छात्रों और संस्थानों दोनों को नए सिस्टम के अनुरूप ढलने का समय मिल सकेगा। निष्कर्ष CBT मोड पारदर्शिता, सुरक्षा और दक्षता के लिहाज से कई लाभ प्रदान करता है, लेकिन इसके साथ डिजिटल पहुंच और बुनियादी ढांचे की चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। भारत को सभी बड़ी प्रवेश परीक्षाओं को CBT मोड में बदलने पर विचार करते समय तकनीकी क्षमता, क्षेत्रीय असमानताओं और छात्रों की सुविधा को समान महत्व देना होगा। भविष्य की परीक्षा प्रणाली संभवतः अधिक डिजिटल होगी, लेकिन उसका क्रियान्वयन संतुलित और समावेशी होना चाहिए। स्रोत: National Testing Agency (NTA) मूल रिपोर्ट:https://nta.ac.in जय राष्ट्र न्यूज़

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NEET Re-Exam के बाद Answer Key और Counselling प्रक्रिया सबसे बड़ा शिक्षा विषय

जय राष्ट्र न्यूज़ | शिक्षा एवं रोजगार डेस्क | 22 जून 2026 मुख्य समाचार NEET-UG 2026 री-एग्जाम के संपन्न होने के बाद अब शिक्षा जगत में सबसे ज्यादा चर्चा Answer Key, Result और Counselling प्रक्रिया को लेकर हो रही है। देशभर के लाखों अभ्यर्थी अपने संभावित स्कोर का आकलन करने और मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया के अगले चरण की तैयारी में जुट गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कुछ सप्ताह छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की आगामी घोषणाओं पर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों की नजर बनी हुई है। Answer Key का इंतजार परीक्षा समाप्त होने के बाद छात्रों की पहली प्राथमिकता आधिकारिक Answer Key होती है। Answer Key जारी होने के बाद अभ्यर्थी अपने उत्तरों का मिलान कर संभावित अंक का अनुमान लगा सकते हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोविजनल Answer Key जारी होने के बाद छात्रों को आपत्ति दर्ज कराने का अवसर भी मिल सकता है, जिसके बाद अंतिम Answer Key प्रकाशित की जाएगी। OMR शीट और Response Sheet की भूमिका Answer Key के साथ OMR शीट और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स भी छात्रों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इन दस्तावेजों की मदद से अभ्यर्थी अपने प्रदर्शन का विस्तृत विश्लेषण कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रक्रिया पारदर्शिता सुनिश्चित करने और छात्रों के विश्वास को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रिजल्ट पर टिकी निगाहें Answer Key प्रक्रिया पूरी होने के बाद छात्रों का ध्यान रिजल्ट पर केंद्रित होगा। NEET स्कोर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। लाखों छात्र अपने प्रदर्शन के आधार पर संभावित रैंक और कटऑफ का अनुमान लगाने में जुटे हुए हैं। Counselling प्रक्रिया बनेगी अगला बड़ा चरण रिजल्ट जारी होने के बाद मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) और राज्य स्तरीय काउंसलिंग प्राधिकरण प्रवेश प्रक्रिया शुरू करेंगे। MBBS, BDS और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में सीट आवंटन इसी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों को Counselling से जुड़ी सभी आधिकारिक सूचनाओं पर नियमित नजर रखनी चाहिए। छात्रों में उत्सुकता और तैयारी देशभर में कई छात्र संभावित कॉलेज विकल्पों, कटऑफ रुझानों और सीट मैट्रिक्स का अध्ययन कर रहे हैं। कोचिंग संस्थान और करियर सलाहकार भी छात्रों को प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि सही जानकारी और समय पर निर्णय छात्रों के लिए महत्वपूर्ण होंगे। मेडिकल शिक्षा का बढ़ता महत्व भारत में मेडिकल शिक्षा के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है। NEET देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में से एक है और हर वर्ष लाखों छात्र इसमें भाग लेते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं के कारण प्रतियोगिता भी लगातार बढ़ रही है। निष्कर्ष NEET-UG 2026 री-एग्जाम के बाद Answer Key, Result और Counselling प्रक्रिया शिक्षा जगत का सबसे बड़ा विषय बन चुकी है। लाखों छात्र अगले चरण का इंतजार कर रहे हैं और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की तैयारी में जुटे हैं। आने वाले दिनों में NTA और काउंसलिंग प्राधिकरणों की घोषणाएं छात्रों के भविष्य की दिशा तय करेंगी। स्रोत: National Testing Agency (NTA) मूल रिपोर्ट:https://neet.nta.nic.in जय राष्ट्र न्यूज़

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AI आधारित डेटा सेंटर निवेश में भारत की बढ़ती भूमिका

जय राष्ट्र न्यूज़ | टेक्नोलॉजी डेस्क | 22 जून 2026 मुख्य समाचार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं की तेजी से बढ़ती मांग के बीच भारत वैश्विक डेटा सेंटर निवेश का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार, इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की बढ़ती संख्या और AI आधारित सेवाओं की मांग ने अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों का ध्यान आकर्षित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र के सबसे बड़े डेटा सेंटर बाजारों में शामिल हो सकता है। AI क्रांति से बढ़ी मांग AI मॉडल, मशीन लर्निंग प्लेटफॉर्म और बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग के लिए अत्यधिक कंप्यूटिंग क्षमता की आवश्यकता होती है। इसी वजह से दुनिया भर में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ रहा है। भारत में भी AI आधारित सेवाओं के विस्तार के साथ हाई-परफॉर्मेंस डेटा सेंटर की मांग लगातार बढ़ रही है। बड़ी टेक कंपनियों की रुचि वैश्विक तकनीकी कंपनियां भारत में डेटा स्टोरेज, क्लाउड सेवाओं और AI इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए निवेश बढ़ा रही हैं। मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु और दिल्ली-एनसीआर जैसे शहर डेटा सेंटर विकास के प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि भारत का विशाल डिजिटल बाजार निवेशकों के लिए आकर्षण का बड़ा कारण है। डिजिटल अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ डेटा सेंटर उद्योग के विस्तार से डिजिटल सेवाओं, ई-कॉमर्स, फिनटेक, हेल्थटेक और सरकारी डिजिटल परियोजनाओं को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार मजबूत डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर डिजिटल इंडिया अभियान और AI आधारित नवाचारों को नई गति प्रदान कर सकता है। रोजगार के नए अवसर डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते निवेश से तकनीकी क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। क्लाउड इंजीनियर, साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ, नेटवर्क इंजीनियर और AI प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बढ़ रही है। उद्योग जगत का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर पैदा कर सकता है। ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस डेटा सेंटर उद्योग के विकास के साथ ऊर्जा दक्षता और हरित तकनीकों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कई कंपनियां नवीकरणीय ऊर्जा आधारित डेटा सेंटर विकसित करने की दिशा में काम कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि टिकाऊ विकास इस क्षेत्र की दीर्घकालिक सफलता के लिए आवश्यक होगा। वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत भारत की रणनीतिक स्थिति, तेजी से बढ़ता डिजिटल उपभोक्ता आधार और तकनीकी प्रतिभा उसे वैश्विक डेटा सेंटर निवेश के लिए प्रतिस्पर्धी बनाते हैं। कई अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारत को भविष्य के प्रमुख टेक हब के रूप में देख रहे हैं। विश्लेषकों के अनुसार AI और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को और मजबूत कर सकता है। निष्कर्ष AI आधारित डेटा सेंटर निवेश में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। डिजिटल सेवाओं की मांग, तकनीकी नवाचार और वैश्विक निवेशकों की रुचि देश को इस क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है। आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के महत्वपूर्ण केंद्रों में शामिल हो सकता है। स्रोत: NASSCOM मूल रिपोर्ट:https://nasscom.in जय राष्ट्र न्यूज़

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वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और मध्य पूर्व हालात पर दुनिया की नजर

जय राष्ट्र न्यूज़ | इंटरनेशनल डेस्क | 22 जून 2026 मुख्य समाचार मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनावों और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच दुनिया की नजर क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर बनी हुई है। वैश्विक तेल बाजार, ऊर्जा आयातक देश और अंतरराष्ट्रीय निवेशक स्थिति का लगातार आकलन कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व की स्थिति का असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। हालिया घटनाओं के बाद कई देशों ने ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार मार्गों की स्थिति पर विशेष निगरानी बढ़ा दी है। ऊर्जा बाजार में बढ़ी सतर्कता दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा प्रभाव ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। इसी कारण निवेशक और नीति निर्माता तेल कीमतों तथा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े संकेतों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है। तेल कीमतों पर असर की आशंका कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण संकेतक मानी जाती हैं। मध्य पूर्व से जुड़े घटनाक्रमों के कारण तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव लंबा खिंचता है तो ऊर्जा लागत में वृद्धि का असर विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। कूटनीतिक प्रयास जारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देश तनाव कम करने और स्थिरता बनाए रखने के लिए कूटनीतिक प्रयासों में जुटे हुए हैं। वैश्विक समुदाय क्षेत्र में शांति और संवाद को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। राजनयिक विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव ऊर्जा आपूर्ति और तेल कीमतों में बदलाव का असर परिवहन, विनिर्माण, व्यापार और उपभोक्ता बाजारों पर भी पड़ सकता है। इसी कारण कई अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। विश्लेषकों के अनुसार ऊर्जा बाजार की स्थिरता वैश्विक आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। भारत सहित आयातक देशों की चिंता भारत जैसे प्रमुख ऊर्जा आयातक देश भी स्थिति का लगातार आकलन कर रहे हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि तेल कीमतों में लंबे समय तक बढ़ोतरी से आयात बिल और आर्थिक योजनाओं पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि कई देशों ने ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और रणनीतिक भंडारण के माध्यम से जोखिम कम करने की दिशा में कदम उठाए हैं। निवेशकों की नजर शेयर बाजार, मुद्रा बाजार और कमोडिटी बाजार में निवेशक मध्य पूर्व से आने वाले हर संकेत पर नजर बनाए हुए हैं। वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेश रणनीतियों में भी सतर्कता देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर निर्भर कर सकती है। निष्कर्ष वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और मध्य पूर्व की स्थिति इस समय दुनिया के लिए प्रमुख चिंता का विषय बनी हुई है। ऊर्जा सुरक्षा, तेल कीमतें और वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर इसके संभावित प्रभावों को देखते हुए सरकारें, निवेशक और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं लगातार स्थिति की निगरानी कर रही हैं। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर दुनिया की नजर बनी रहेगी। स्रोत: Reuters मूल रिपोर्ट:https://www.reuters.com जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत ए बनाम श्रीलंका ए सीरीज में युवा खिलाड़ियों का प्रदर्शन चर्चा में

जय राष्ट्र न्यूज़ | स्पोर्ट्स डेस्क | 22 जून 2026 मुख्य समाचार भारत ए और श्रीलंका ए के बीच जारी सीरीज में युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। दोनों टीमों के कई उभरते खिलाड़ियों ने बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण में प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। क्रिकेट विशेषज्ञों और चयनकर्ताओं की नजर विशेष रूप से उन खिलाड़ियों पर बनी हुई है जो भविष्य में राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बन सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी सीरीज युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा का अनुभव प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। युवा बल्लेबाजों का दमदार प्रदर्शन सीरीज के दौरान कई युवा बल्लेबाजों ने जिम्मेदारी के साथ रन बनाए हैं। कुछ खिलाड़ियों ने दबाव की परिस्थितियों में परिपक्व बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया, जबकि कई ने आक्रामक अंदाज में विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाया। विशेषज्ञों का कहना है कि निरंतर प्रदर्शन करने वाले बल्लेबाज भविष्य में भारतीय टीम के लिए मजबूत विकल्प बन सकते हैं। गेंदबाजों ने भी छोड़ी छाप सीरीज में युवा गेंदबाजों का प्रदर्शन भी चर्चा का विषय बना हुआ है। तेज गेंदबाजों और स्पिनरों दोनों ने महत्वपूर्ण मौकों पर विकेट लेकर अपनी उपयोगिता साबित की है। क्रिकेट विश्लेषकों के अनुसार ऐसी परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद करता है। चयनकर्ताओं की विशेष नजर भारत ए टीम को लंबे समय से राष्ट्रीय टीम के संभावित खिलाड़ियों की तैयारी का मंच माना जाता है। इस कारण चयनकर्ता सीरीज के प्रत्येक मैच और खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आने वाले समय में बड़े अवसर मिल सकते हैं। भविष्य के सितारों की पहचान भारत ए और श्रीलंका ए जैसी सीरीज को अक्सर भविष्य के अंतरराष्ट्रीय सितारों की पहचान का मंच माना जाता है। कई वर्तमान भारतीय खिलाड़ी भी अपने करियर के शुरुआती दौर में ऐसी टीमों का हिस्सा रह चुके हैं। युवा खिलाड़ियों के लिए यह सीरीज अपनी क्षमता साबित करने का महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। प्रशंसकों में उत्साह क्रिकेट प्रेमी भी इस सीरीज को लेकर उत्साहित हैं। सोशल मीडिया पर युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन, आंकड़ों और संभावनाओं को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। कई प्रशंसकों का मानना है कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य मजबूत हाथों में दिखाई दे रहा है। भारतीय क्रिकेट की मजबूत बेंच स्ट्रेंथ विशेषज्ञों के अनुसार भारत ए स्तर पर लगातार उभर रही प्रतिभाएं भारतीय क्रिकेट की मजबूत बेंच स्ट्रेंथ को दर्शाती हैं। घरेलू क्रिकेट और ए टीम स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी भविष्य में राष्ट्रीय टीम के लिए विकल्प तैयार करते हैं। यह प्रक्रिया भारतीय क्रिकेट को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करने में सहायक मानी जाती है। निष्कर्ष भारत ए बनाम श्रीलंका ए सीरीज में युवा खिलाड़ियों का प्रदर्शन क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों ने प्रभावशाली खेल दिखाकर चयनकर्ताओं और प्रशंसकों का ध्यान आकर्षित किया है। आने वाले मैचों में भी इन उभरती प्रतिभाओं पर सभी की नजर बनी रहेगी। स्रोत: ESPNcricinfo मूल रिपोर्ट:https://www.espncricinfo.com जय राष्ट्र न्यूज़

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वैश्विक तनाव के बीच तेल कीमतों और बाजारों पर निवेशकों की नजर

जय राष्ट्र न्यूज़ | बिजनेस डेस्क | 22 जून 2026 मुख्य समाचार दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच वैश्विक निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों और वित्तीय बाजारों पर बनी हुई है। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के कारण बाजारों में सतर्कता का माहौल देखा जा रहा है। निवेशक यह आकलन करने में जुटे हैं कि मौजूदा हालात वैश्विक अर्थव्यवस्था और निवेश प्रवाह को किस प्रकार प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल बाजार में किसी भी बड़े बदलाव का असर दुनिया भर के शेयर बाजारों और मुद्राओं पर दिखाई दे सकता है। तेल कीमतों में बढ़ी अस्थिरता हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ा है। ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिमों और वैश्विक अनिश्चितताओं ने बाजार को संवेदनशील बना दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि आपूर्ति संबंधी चुनौतियां बढ़ती हैं तो तेल की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है, जिसका असर आयातक देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। भारतीय बाजारों पर प्रभाव भारत दुनिया के प्रमुख तेल आयातक देशों में शामिल है। इसलिए तेल कीमतों में वृद्धि का असर महंगाई, परिवहन लागत और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों पर पड़ सकता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय निवेशक भी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के संकेतों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। शेयर बाजार में सतर्क माहौल वैश्विक तनावों के कारण कई निवेशक जोखिम वाले निवेशों में सावधानी बरत रहे हैं। बैंकिंग, ऊर्जा, परिवहन और विनिर्माण क्षेत्रों के शेयरों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का असर बाजार की दिशा और निवेशकों की रणनीति दोनों पर पड़ सकता है। विदेशी निवेशकों की भूमिका विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की गतिविधियां भी इस समय बाजार के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख कर सकते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी निवेश प्रवाह का असर भारतीय बाजारों की चाल पर भी दिखाई दे सकता है। ऊर्जा सुरक्षा बनी बड़ी चिंता ऊर्जा आपूर्ति और तेल परिवहन मार्गों की सुरक्षा को लेकर कई देशों ने चिंता जताई है। ऊर्जा सुरक्षा अब केवल आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि रणनीतिक विषय भी बन चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में ऊर्जा बाजार से जुड़े फैसले वैश्विक आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। निवेशकों के लिए सलाह वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों को संतुलित और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। बाजार की अस्थिरता के दौरान विविधीकृत निवेश रणनीति महत्वपूर्ण मानी जाती है। विशेषज्ञ निवेशकों को केवल अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के आधार पर निर्णय लेने से बचने की सलाह दे रहे हैं। निष्कर्ष वैश्विक तनावों और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच तेल कीमतें और वित्तीय बाजार निवेशकों के लिए प्रमुख फोकस बने हुए हैं। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल निवेशक सतर्कता के साथ हर नए संकेत पर नजर बनाए हुए हैं। स्रोत: Reuters मूल रिपोर्ट:https://www.reuters.com जय राष्ट्र न्यूज़

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राजस्थान और अन्य राज्यों की राज्यसभा सीटों पर आज राजनीतिक नजरें

जय राष्ट्र न्यूज़ | स्टेट्स डेस्क | 22 जून 2026 मुख्य समाचार राजस्थान सहित कई राज्यों की राज्यसभा सीटों को लेकर आज राजनीतिक गतिविधियां तेज बनी हुई हैं। विभिन्न राजनीतिक दल आगामी संसदीय समीकरणों और अपने रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए स्थिति पर करीबी नजर रख रहे हैं। हालिया राज्यसभा चुनावों और बदलते राजनीतिक गणित ने इन सीटों को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा में संख्या बल आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण विधायी और राजनीतिक निर्णयों को प्रभावित कर सकता है। राजस्थान बना चर्चा का केंद्र राजस्थान की राज्यसभा सीटों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों विशेष रुचि दिखा रहे हैं। राज्य की राजनीतिक स्थिति और विधानसभा में दलों की संख्या को देखते हुए यहां के परिणाम राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि राजस्थान में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम संसद के ऊपरी सदन की तस्वीर को प्रभावित कर सकते हैं। अन्य राज्यों में भी सक्रियता राजस्थान के अलावा कई अन्य राज्यों में भी राज्यसभा सीटों को लेकर राजनीतिक दलों की रणनीतिक बैठकें और चर्चा जारी हैं। विभिन्न दल अपने समर्थन आधार को मजबूत करने और भविष्य के समीकरणों को साधने में जुटे हुए हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार क्षेत्रीय दलों की भूमिका भी कई राज्यों में निर्णायक साबित हो सकती है। संसद के समीकरणों पर असर राज्यसभा की सीटें केवल राज्यों तक सीमित मुद्दा नहीं हैं, बल्कि उनका सीधा प्रभाव राष्ट्रीय राजनीति और संसद की कार्यवाही पर पड़ता है। ऊपरी सदन में संख्या बल किसी भी सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कारण विभिन्न दल राज्यसभा के गणित को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहे हैं। राजनीतिक रणनीतियां तेज सूत्रों के अनुसार कई दल आगामी संसद सत्र और भविष्य के चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। राजनीतिक दलों के बीच संपर्क और संवाद का दौर भी जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताहों में राज्यसभा से जुड़ी राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। क्षेत्रीय दलों की भूमिका राज्यसभा चुनावों और सीटों के समीकरण में क्षेत्रीय दल अक्सर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई मामलों में उनकी स्थिति सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संतुलन बनाने वाली साबित होती है। विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले समय में क्षेत्रीय दलों का समर्थन कई महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसलों को प्रभावित कर सकता है। राष्ट्रीय राजनीति पर नजर राज्यसभा की सीटों को लेकर चल रही गतिविधियों पर राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक दल भी नजर बनाए हुए हैं। संसद के आगामी सत्र और संभावित विधायी एजेंडे को देखते हुए यह मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा का गणित अगले कुछ महीनों तक राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना रह सकता है। निष्कर्ष राजस्थान और अन्य राज्यों की राज्यसभा सीटों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज बनी हुई है। सत्ता पक्ष, विपक्ष और क्षेत्रीय दल सभी आगामी राजनीतिक समीकरणों पर नजर रखे हुए हैं। राज्यसभा में संख्या बल का महत्व देखते हुए यह मुद्दा आने वाले दिनों में भी राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख विषय बना रह सकता है। स्रोत: Election Commission of India मूल रिपोर्ट:https://eci.gov.in जय राष्ट्र न्यूज़

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NEET सुरक्षा ऑपरेशन के बाद पेपर लीक नेटवर्क की जांच जारी

जय राष्ट्र न्यूज़ | क्राइम डेस्क | 22 जून 2026 मुख्य समाचार NEET-UG 2026 री-एग्जाम के सफल आयोजन के बाद अब जांच एजेंसियों का फोकस कथित पेपर लीक नेटवर्क की पड़ताल पर बना हुआ है। परीक्षा से पहले और दौरान चलाए गए व्यापक सुरक्षा अभियान के बाद विभिन्न एजेंसियां उन व्यक्तियों और समूहों की जांच कर रही हैं जिन पर परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने का संदेह है। अधिकारियों के अनुसार परीक्षा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रही, लेकिन कथित अनियमितताओं से जुड़े पुराने मामलों और संदिग्ध नेटवर्क की जांच अभी भी जारी है। बहुस्तरीय जांच अभियान जांच एजेंसियां विभिन्न राज्यों में मिले इनपुट्स, डिजिटल रिकॉर्ड और संदिग्ध संपर्कों की जांच कर रही हैं। कई मामलों में साइबर विशेषज्ञों की सहायता भी ली जा रही है ताकि ऑनलाइन माध्यमों से फैलाए गए कथित प्रश्नपत्र और संदेशों की सत्यता का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जांच का उद्देश्य केवल दोषियों की पहचान करना ही नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना भी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म की निगरानी जांच का एक बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और अन्य डिजिटल माध्यमों पर केंद्रित है। एजेंसियां उन समूहों और चैनलों की गतिविधियों की समीक्षा कर रही हैं जहां परीक्षा से संबंधित सामग्री साझा किए जाने के दावे सामने आए थे। साइबर विशेषज्ञ संदिग्ध डिजिटल ट्रेल और संचार नेटवर्क का विश्लेषण कर रहे हैं। राज्यों के बीच समन्वय कई राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां मिलकर जानकारी साझा कर रही हैं। जांच में अंतरराज्यीय नेटवर्क की संभावित भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार विभिन्न राज्यों से प्राप्त सूचनाओं को एकीकृत कर व्यापक जांच की जा रही है। परीक्षा सुरक्षा पर बढ़ा फोकस NEET री-एग्जाम के दौरान लागू की गई कड़ी सुरक्षा व्यवस्था को जांच एजेंसियां एक महत्वपूर्ण कदम मान रही हैं। CCTV निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन, विशेष नियंत्रण कक्ष और अतिरिक्त पुलिस बल जैसी व्यवस्थाओं ने परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने में मदद की। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की राष्ट्रीय परीक्षाओं में भी ऐसे सुरक्षा उपायों का विस्तार किया जा सकता है। छात्रों और अभिभावकों की अपेक्षाएं लाखों छात्रों और अभिभावकों ने मांग की है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि निष्पक्ष जांच परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने के लिए आवश्यक है। भविष्य के लिए सबक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता को दर्शाता है। तकनीकी निगरानी, साइबर इंटेलिजेंस और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कई विशेषज्ञ परीक्षा सुरक्षा के लिए उन्नत डिजिटल तंत्र अपनाने की वकालत कर रहे हैं। निष्कर्ष NEET-UG 2026 री-एग्जाम के बाद कथित पेपर लीक नेटवर्क की जांच जारी है और विभिन्न एजेंसियां मामले के हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं। जांच का उद्देश्य न केवल संभावित दोषियों तक पहुंचना है बल्कि भविष्य में परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना भी है। आने वाले दिनों में जांच से जुड़े नए तथ्य सामने आ सकते हैं। स्रोत: National Testing Agency (NTA) मूल रिपोर्ट:https://nta.ac.in जय राष्ट्र न्यूज़

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NDA राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के करीब, राजनीतिक हलचल तेज

जय राष्ट्र न्यूज़ | पॉलिटिक्स डेस्क | 22 जून 2026 मुख्य समाचार हालिया राज्यसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के और करीब पहुंच गया है। NDA ने हाल में संपन्न चुनावों में 26 में से 19 सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी स्थिति मजबूत की है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ऊपरी सदन में बढ़ती ताकत आने वाले संसदीय सत्रों और महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों के लिए NDA को रणनीतिक बढ़त दे सकती है। राज्यसभा चुनावों ने बदला समीकरण हालिया चुनावों में NDA के मजबूत प्रदर्शन ने राज्यसभा के राजनीतिक गणित को बदल दिया है। कांग्रेस नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन को कुछ सीटों पर सफलता मिली, लेकिन कुल मिलाकर NDA का पलड़ा भारी रहा। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार इन परिणामों ने संसद में शक्ति संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। क्यों महत्वपूर्ण है दो-तिहाई बहुमत? राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत कई महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और विशेष विधायी प्रक्रियाओं के लिए अहम माना जाता है। इसी कारण NDA की बढ़ती संख्या पर राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि गठबंधन आगे भी अपनी संख्या बढ़ाने में सफल रहता है तो संसद में उसका प्रभाव और मजबूत हो सकता है। विपक्ष की बढ़ी चिंता NDA की बढ़ती ताकत के बीच विपक्षी दल भी अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। INDIA गठबंधन के नेताओं का मानना है कि संसद में प्रभावी भूमिका बनाए रखने के लिए विपक्षी एकजुटता आवश्यक होगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार आगामी संसद सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है। क्षेत्रीय दलों की भूमिका अहम राज्यसभा के वर्तमान समीकरण में कई क्षेत्रीय दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संसद में किसी भी बड़े विधायी कदम के दौरान इन दलों का रुख निर्णायक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में क्षेत्रीय राजनीति राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर सकती है। संसद के आगामी सत्र पर नजर राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि संसद के आगामी सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। ऐसे में राज्यसभा की संख्या शक्ति एक महत्वपूर्ण कारक बनकर उभर सकती है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना राज्यसभा गणित राज्यसभा में NDA की बढ़ती ताकत को लेकर मीडिया, राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों के बीच लगातार चर्चा हो रही है। संसद के दोनों सदनों में संख्या बल को लेकर नए आकलन सामने आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में राज्यसभा का गणित राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना रह सकता है। निष्कर्ष राज्यसभा चुनावों में मजबूत प्रदर्शन के बाद NDA दो-तिहाई बहुमत के और करीब पहुंच गया है। इस घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और संसद के आगामी सत्र को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले महीनों में संसद का राजनीतिक समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ता है। स्रोत: Times of India मूल रिपोर्ट:https://timesofindia.indiatimes.com/india/nda-bags-19-out-of-26-how-close-is-the-ruling-coalition-to-rajya-sabha-two-third-majority/articleshow/131853587.cms जय राष्ट्र न्यूज़

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NEET Re-Exam के बाद Answer Key और Result Timeline पर छात्रों की नजर

जय राष्ट्र न्यूज़ | शिक्षा एवं रोजगार डेस्क | 22 जून 2026 मुख्य समाचार देशभर में आयोजित NEET-UG 2026 री-एग्जाम के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद अब लाखों अभ्यर्थियों की नजर Answer Key, OMR शीट और रिजल्ट टाइमलाइन पर टिकी हुई है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने परीक्षा का आयोजन कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच किया और अधिकारियों के अनुसार परीक्षा प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अब छात्रों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरण Answer Key जारी होने और उसके बाद रिजल्ट की घोषणा का है। जल्द जारी हो सकती है प्रोविजनल Answer Key मीडिया रिपोर्टों के अनुसार NTA जल्द ही प्रोविजनल Answer Key जारी कर सकता है। इसके साथ अभ्यर्थियों को OMR शीट और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स देखने की सुविधा भी दी जा सकती है। Answer Key जारी होने के बाद छात्रों को निर्धारित समय के भीतर आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार यही चरण अंतिम परिणाम से पहले सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। आपत्ति दर्ज कराने का मिलेगा अवसर प्रोविजनल Answer Key जारी होने के बाद अभ्यर्थी उन प्रश्नों पर आपत्ति दर्ज करा सकेंगे जिन पर उन्हें संदेह है। NTA द्वारा प्राप्त आपत्तियों की समीक्षा विशेषज्ञों की समिति करेगी। इसके बाद अंतिम Answer Key जारी की जाएगी, जिसके आधार पर रिजल्ट तैयार किया जाएगा। कब आ सकता है रिजल्ट? NTA ने अभी तक रिजल्ट की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है। हालांकि विभिन्न शिक्षा रिपोर्टों में अनुमान लगाया गया है कि Answer Key प्रक्रिया पूरी होने के बाद जुलाई में परिणाम जारी किए जा सकते हैं। लाखों छात्र और अभिभावक रिजल्ट की संभावित तारीख को लेकर लगातार अपडेट पर नजर बनाए हुए हैं। काउंसलिंग प्रक्रिया होगी अगला चरण रिजल्ट जारी होने के बाद मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) और संबंधित राज्य प्राधिकरणों द्वारा काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू की जाएगी। MBBS, BDS और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए NEET स्कोर ही मुख्य आधार रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार काउंसलिंग प्रक्रिया पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। परीक्षा रही चर्चा में री-एग्जाम देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में से एक रहा। परीक्षा लगभग 5,400 से अधिक केंद्रों पर आयोजित की गई और लाखों अभ्यर्थियों ने इसमें भाग लिया। NTA ने दावा किया है कि परीक्षा के दौरान पेपर लीक से संबंधित कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई। कई राज्यों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था और लाइव निगरानी प्रणाली भी लागू की गई थी। छात्रों में उत्सुकता परीक्षा समाप्त होने के बाद छात्र अपने संभावित स्कोर का अनुमान लगाने में जुट गए हैं। कई कोचिंग संस्थानों ने अनौपचारिक Answer Key जारी कर दी हैं, लेकिन अंतिम गणना NTA की आधिकारिक Answer Key के आधार पर ही होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों को केवल आधिकारिक अपडेट पर भरोसा करना चाहिए। निष्कर्ष NEET-UG 2026 री-एग्जाम के सफल आयोजन के बाद अब पूरा फोकस Answer Key, OMR शीट और रिजल्ट टाइमलाइन पर आ गया है। लाखों अभ्यर्थी NTA की अगली घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में प्रोविजनल Answer Key जारी होने के साथ प्रवेश प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण चरण शुरू हो जाएगा। स्रोत: National Testing Agency (NTA) मूल रिपोर्ट:https://neet.nta.nic.in जय राष्ट्र न्यूज़

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