Waqf Amendment Bill 2025

12 घंटे चली लंबी चर्चा के बाद देर रात लोकसभा में पास हुआ Waqf Amendment Bill 2025, अब राज्यसभा में होगी अग्निपरीक्षा

बुधवार को 12 घंटे चली लंबी चर्चा के बाद आखिरकार वक्फ संशोधन विधेयक-2025 (Waqf Amendment Bill 2025) लोकसभा में पास हो गया। रात दो बजे के करीब हुए मत विभाजन में इस विधेयक के पक्ष में 288 और विरोध में 232 वोट पड़े। दरअसल, बुधवार को यह बिल लोकसभा में पेश हुआ था और इस विधयेक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने 12 घंटे लंबी चर्चा की। आधी रात तक चर्चा होने के बाद इसके बाद हुए मतविभाजन में सरकार की जीत हुई और विधेयक लोकसभा में पास हो गया। बता दें कि अब यह संशोधन विधेयक पारित होने के लिए राज्यसभा में पेश किया जाएगा। राज्यसभा में इस विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार के पास जरूरी बहुमत नहीं है। इसे पारित कराने के लिए उच्च सदन में सरकार को कड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है। हालांकि जानकारों का कहना है कि यहां भी भाजपा अपने सहयोगी दलों के साथ मजबूत स्थिति में है। अन्य दलों के समर्थन से वह इस विधेयक को आसानी से पारित करा सकती है।  अगर वह वक्फ संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill 2025)  नहीं लाती तो संसद भवन समेत कई इमारतें दिल्ली वक्फ बोर्ड के पास चली जातीं बता दें कि चर्चा के दौरान विपक्ष के सांसदों ने बिल के खिलाफ 100 से अधिक संशोधन प्रस्ताव दिए, लेकिन वोटिंग के दौरान विपक्ष के सभी संशोधन गिर गए। चर्चा के दौरान सरकार ने कहा कि “अगर वह वक्फ संशोधन विधेयक नहीं लाती तो संसद भवन समेत कई इमारतें दिल्ली वक्फ बोर्ड के पास चली जातीं और कांग्रेस के शासनकाल में वक्फ संपत्तियों का सही से प्रबंधन होता तो केवल मुसलमानों की ही नहीं, बल्कि देश की तकदीर भी बदल जाती।” इस बीच केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में वक्फ संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill 2025) पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए सरकार के इस कदम को मुस्लिम विरोधी बताने के कई विपक्षी सदस्यों के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि “इस विधेयक को मुसलमानों को बांटने वाला बताया जा रहा है।” जबकि उन्होंने कहा कि “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार तो देश में सबसे छोटे अल्पसंख्यक समुदाय पारसी को भी बचाने के लिए प्रयास कर रही है।” रिजिजू ने आगे कहा कि “विपक्ष सरकार की आलोचना कर सकता है, लेकिन यह कहना कि हिंदुस्तान में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं है, सही नहीं है।” उन्होंने विपक्ष को घेरते हुए कहा कि “मैं खुद अल्पसंख्यक हूं और कह सकता हूं कि भारत से ज्यादा अल्पसंख्यक कहीं सुरक्षित नहीं हैं। हर अल्पसंख्यक समुदाय शान से इस देश में जीवन जीता है।” कांग्रेस ने साल 2013 में तुष्टिकरण के नाम पर जो गलती की उसे हमने सुधार दिया है- (Waqf Amendment Bill 2025) यही नहीं वक्फ संशोधन विधेयक-2025 (Waqf Amendment Bill 2025) के पारित होने पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि “कांग्रेस ने साल 2013 में तुष्टिकरण के नाम पर जो गलती की उसे हमने सुधार दिया है। इस विधेयक के जरिए हमने मुस्लिम महिलाओं और गरीबों को तोहफा दिया है।” गिरिराज सिंह ने आगे कहा कि “हमें उम्मीद है कि भविष्य में गरीब लोगों को उनकी जमीन का अधिकार मिलेगा।” तो वहीं तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि “मतविभाजन का अंतर केवल 50 वोटों का था। आप समझ सकते हैं कि यह विधेयक लोगों के जनादेश के कितना खिलाफ है। सरकार बहुत मुश्किल से इस विधेयक को पारित करा पाई है। भारत के धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र के लिए यह एक काला दिन है। यह विधयेक लोगों के मूलभूत अधिकारों के खिलाफ और अन्यायपूर्ण है। इस संशोधन विधेयक का मुस्लिम समाज पर बहुत गहरा असर पड़ने जा रहा है।” इसे भी पढ़ें:- नया वक़्फ़ बिल पास होने पर इन्हें होगा सबसे अधिक फायदा? इस विधेयक (Waqf Amendment Bill 2025) से वक्फ बोर्ड के कामकाज में जब पारदर्शिता आएगी तो विपक्ष को इसमें परेशानी क्या है? खैर बिल (Waqf Amendment Bill 2025) के पारित होने के बाद संसद परिसर में लोजपा रामविलास के अध्यक्ष और संसद चिराग पासवान ने कहा कि “मुस्लिम समाज की भलाई के लिए अगर कुछ संशोधन इसमें शामिल किए जाते हैं तो विपक्ष को इसमें भी सहयोग करना चाहिए। इस विधेयक से वक्फ बोर्ड के कामकाज में जब पारदर्शिता आएगी तो विपक्ष को इसमें परेशानी क्या है? यह विधेयक पीएम मोदी और एनडीए द्वारा लाया गया है, केवल इसलिए विरोध हो रहा है। विपक्ष के सभी सांसदों ने एक तरह के बयान दिए हैं। उन्होंने तथ्यों पर बात नहीं की है। ये नेता मेरे धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठा रहे हैं।” चिराग पासवान ने आगे कहा कि “वे उन लोगों का समर्थन कर रहे हैं जो सच्चर कमेटी के मुताबिक मुस्लिमों की बदहाल हालत के लिए जिम्मेदार हैं। बिहार चुनाव में सब कुछ साफ हो जाएगा।” यह भारत का कानून है, सभी को स्‍वीकारना होगा:- अमित शाह गौरतलब हो कि “इससे पहले, चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि “यह भारत सरकार का कानून है और इसे सभी को स्वीकार करना होगा। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि “वह समाज में भ्रम फैला रहे हैं और मुसलमानों को डराकर उनका वोट बैंक बनाने की कोशिश कर रहे हैं।” इस दौरान शाह ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर भी विपक्ष के दावे को खारिज करते हुए कहा कि “सीएए लागू होने के बाद किसी भी मुस्लिम की नागरिकता नहीं गई है और अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला जैसे नेता चुनाव जीतकर लौटे हैं, जो बताता है कि स्थिति में सुधार हुआ है। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद कम हुआ है और विकास और पर्यटन बढ़े हैं।” तो वहीं एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने विधेयक का विरोध किया और अपनी बात रखने के बाद अंत में विधेयक की प्रति फाड़ दी।  Latest News in Hindi Today Hindi News Waqf Amendment Bill 2025 #WaqfAmendmentBill2025 #LokSabhaPassesBill #WaqfLawChanges #IndianParliament #RajyaSabhaDebate #LegalReforms #GovtBill2025 #WaqfActAmendment #IndiaPolitics #ParliamentSession

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Chaitra Navratri

चैत्र नवरात्रि 2025: जौ न उगने पर क्या होता है? जानें इसके पीछे छिपे शुभ-अशुभ संकेत और वैज्ञानिक कारण

चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) के पहले दिन घटस्थापना के साथ ही जौ बोने की परंपरा हिंदू धर्म में सदियों से चली आ रही है। यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि एक शुभ संकेतक भी है। मान्यता है कि नवरात्रि में बोए गए जौ के अंकुरण से घर की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और भाग्य का पता चलता है। लेकिन क्या होता है जब जौ नहीं उगते? क्या यह अशुभ संकेत देता है? आइए जानें इसके पीछे छिपे गहरे रहस्य और वैज्ञानिक व धार्मिक महत्व को। नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव नवरात्रि (Navratri) के दौरान यदि जौ ठीक से नहीं उगते हैं, तो इसका मुख्य कारण घर या पूजा स्थल पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव हो सकता है। यह नकारात्मक ऊर्जा विभिन्न कारणों से उत्पन्न हो सकती है, जैसे घर में वास्तु दोष, बुरी नजर या अन्य प्रकार की बाधाएं। जब किसी स्थान पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव होता है, तो आध्यात्मिक शक्ति कमजोर हो जाती है, जिससे जौ का अंकुरण सही तरीके से नहीं हो पाता। इस स्थिति को अशुभ संकेत के रूप में माना जाता है। आर्थिक परेशानियां जौ का अंकुरण समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक होता है। नवरात्रि के दौरान यदि जौ ठीक से नहीं उगते, तो यह आर्थिक समस्याओं का संकेत हो सकता है। मान्यता है कि जिन घरों में नवरात्रि के समय जौ सही तरीके से नहीं उगते, वहां भविष्य में आर्थिक संकट आ सकता है। यह स्थिति घर के आर्थिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है और धन संबंधी समस्याओं का जन्म ले सकती है। ग्रह दोष ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नवरात्रि में जौ का ठीक से न उगना ग्रहों के दोष के कारण हो सकता है। विशेष रूप से शनि, राहु या केतु के अशुभ प्रभाव के कारण यह स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इन ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति घर में सुख, शांति और समृद्धि की कमी ला सकती है, जिससे जौ का अंकुरण सही से नहीं हो पाता। इसके अलावा, पितृ दोष भी जौ के सही से न उगने का कारण बन सकता है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि जौ ठीक से नहीं उगते हैं, तो यह परिवार के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है। इस स्थिति को देखा गया है कि यदि जौ न उगें, तो यह परिवार के किसी सदस्य की सेहत में खराबी का संकेत हो सकता है, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जिनकी तबियत पहले से ठीक नहीं है। यह चेतावनी देता है कि परिवार के सदस्य किसी शारीरिक या मानसिक बीमारी का सामना कर सकते हैं। इसे भी पढ़ें:- चैती छठ महापर्व 2025: सूर्य देव की पूजा और उपवास का पवित्र अवसर घर में क्लेश और मानसिक तनाव नवरात्रि (Navratri) में जौ का ठीक से न उगना पारिवारिक क्लेश, मानसिक तनाव और मानसिक असंतुलन का भी संकेत हो सकता है। यह स्थिति घर में झगड़ों और समस्याओं को जन्म दे सकती है। जब जौ ठीक से अंकुरित नहीं होते, तो यह घर में नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को दर्शाता है, जो परिवार के बीच मनमुटाव और क्लेश का कारण बन सकता है। नवरात्रि में जौ न उगने पर उपाय पंडित आचार्य उदित नारायण त्रिपाठी के अनुसार, अगर नवरात्रि (Chaitra Navratri) के दौरान जौ सही से न उगें, तो कुछ उपायों को अपनाकर इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। सबसे पहले, यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि नवरात्रि के दौरान पूजा और व्रत को सही विधि से संपन्न किया जाए। इसके साथ ही, कन्या पूजन करना भी एक प्रभावी उपाय माना जाता है। कन्या पूजन से माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जो घर में सुख, शांति और समृद्धि का संचार करती है। इस विधि से न केवल जौ का अंकुरण सही से हो सकता है, बल्कि यह अन्य कई शुभ परिणाम भी ला सकता है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Chaitra Navratri #ChaitraNavratri2025 #NavratriRituals #BarleyGrowth #JauSignificance #NavratriAstrology #HinduFestivals #SpiritualMeaning #AuspiciousOmens #ScientificFacts #HinduTraditions

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Does Face Slapping Really Enhance Skin?

50 slaps for glow: क्या सच में 50 थप्पड़ खाने से आता है चेहरे पर निखार?

लोगबाग खूबसूरत और दमकती त्वचा पाने के लिए क्या नहीं करते। कुछ ज़माने भर की क्रीम लगाते हैं, तो कुछ हेल्दी डाइट को फॉलो करते हैं, तो वहीं कुछ कई तरह के घरेलु नुस्खों का पालन करते हैं। जिसके नुकसान और फायदे दोनों संभावित होते हैं। ऐसे में यदि आपसे कहा जाये कि एक फार्मूला ऐसा भी है जिससे आप बिना एक भी पैसा खर्च किये अपने चेहरे पर निखार ला सकते हैं? तो निश्चित ही आप उस फॉर्मूले को जानना चाहेंगे। यह तो ठीक, लेकिन यदि आपसे यह कहा जाये कि उस फॉर्मूले के तहत आपको अपना गाल लाल करना होगा। यानि कि आपको रोज एक-दो नहीं बल्कि 50 थप्पड़ खाने (50 slaps for glow) होंगे। हां, सही समझें। थप्पड़। आप कहेंगे कि क्या मजाक है? दरअसल यह मजाक नहीं बल्कि ये सच है। रोजाना थप्पड़ खाने से चेहरे पर निखार आ जाता है। अमूमन लोग थप्पड़ खाने से डरते हैं, परंतु यही थप्पड़ आप को सुंदर और निखरी हुई त्वचा दे सकता है।  थप्पड़ मारने से (50 slaps for glow) बढ़ जाता है ब्लड सरकुलेशन ये बात खासतौर पर उन लोगों को जान लेनी चाहिए जो खूबसूरत और चमकदार त्वचा के लिए तमाम तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट का यूज करते हैं। बड़ी बात यह कि जवां दिखने के लिए फेशियल ब्लीच से लेकर कई तरह के ट्रीटमेंट करवाने वाले लोग थप्पड़ वाली थेरेपी से अपने चेहरे को बिना पैसे खर्च किए ही सुंदर बना सकते हैं। इसे थप्पड़ थेरेपी कहते हैं। निश्चित ही आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये थप्पड़ थेरेपी है क्या? तो आपको बता दें कि इस थेरेपी में चेहरे की त्वचा पर हल्के हाथों से थप्पड़ मारना (50 slaps for glow) होता है। ऐसा करने से ब्लड सरकुलेशन बढ़ जाता है और त्वचा जवां और स्वस्थ होती है। अच्छी बात यह कि ये थेरेपी महिलाएं और पुरुष दोनों ही कर सकते हैं। इस थेरेपी से त्वचा में छिद्रों को सिकुड़ने में मदद मिलती है। बता दें की इस थेरेपी में आपको अपने दोनों हाथों से गालों को तेज-तेज थपथपाना होता है। इसके अलावा फाइन लाइंस से छुटकारा पाने के लिए चेहरे को थप्पड़ मारना पिंच और स्ट्रोक करना शामिल होता है।  इसे भी पढ़ें: पानी पीना ही काफी नहीं, हीटवेव्स में हाइड्रेशन से बचाव के लिए अपनाएं ये टिप्स कोरियन महिलाएं प्रतिदिन खुद को 50 थप्पड़ (50 slaps for glow) मारकर अपनी सुंदरता को रखती हैं बरकरार  दरअसल, साउथ कोरियन लोगों का मानना है कि थप्पड़ मारने से चेहरे के हर हिस्से में ब्लड का सरकुलेशन तेज हो जाता है। जिससे स्किन साफ होती है और चेहरा ग्लो करने लगता है। कारण यही जो वहां की महिलाएं प्रतिदिन खुद को 50 थप्पड़ (50 slaps for glow) मारकर अपनी सुंदरता को बरकरार रखती हैं। इसके अलावा अमेरिकन का मानना है कि थप्पड़ मारने से त्वचा के खुले छिद्रों को सिकुड़ने में मदद मिलती है। यही नहीं, इससे त्वचा को क्रीम तेल को बेहतर तरीके से ऑबजर्ब करने में मदद मिलती है। ख़ास बात यह कि यह त्वचा को चिकना बनाता है, झुर्रियों को कम करता है। Latest News in Hindi Today Hindi 50 slaps for glow #50SlapsForGlow #FaceGlowHack #BeautyMyths #SkincareRoutine #FacialMassage #NaturalGlow #GlowUp #SkinCareTips #BeautyTrends #HealthySkin

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Nurse murder case

Nurse crime story: गला रेतकर नर्स की ली गई जान, शक की सुई पति पर, दे रहा था मर्डर की धमकी

हरियाणा के बल्लभगढ़ स्थित विष्णु कॉलोनी में बुधवार रात एक नर्स की लाश मिलती है। खून से लथपथ लाश देख परिजन सदमें में आ जाते हैं। तेज धारदार हथियार से नर्स का गला रेता (Nurse crime story) गया था। और हथियार वहीं बगल में पड़ा था। इस दरम्यान पुलिस को सूचना दी गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेज दिया। पूरे मामले पर एसीपी सिटी महेश श्यौराण ने बताया कि “इस मामले में मृतका के पिता की शिकायत पर आरोपी पति लखमीचंद, देवर भगत सिंह, सास सुनीता और पति के ममेरे भाई नीरज के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया है।” जानकारी के मुताबिक मृतक महिला की हत्या तेजधार हथियार से गर्दन रेतकर की गई है। और बड़ी बात यह की महिला का फोन भी गायब है। फिलहाल इस मामले में आस-पास लगे सीसीटीवी खंगाले जा रहे हैं। और साथ ही आरोपियों की तलाश के लिए पांच टीमें लगा दी गई हैं। खैर, अभी तक हत्या के कारणों का अभी पता नहीं चल सका है। हत्या (Nurse crime story) से एक दिन पहले ही प्रियंका की सास और देवर उसके क्लिनिक पर आए थे दरअसल, आदर्श नगर थाने में दर्ज केस के अनुसार, होडल के गढ़ी पट्टी में रहने वाले तोताराम ने दी अपनी शिकायत में बताया कि “उन्होंने अपनी दो बेटियों प्रियंका और पूजा की शादी साल 2010 में भिडूकी गांव निवासी लखमी चंद और भगत सिंह के साथ की थी। पूजा का पति भगत सिंह हरियाणा पुलिस में डायल 112 पर ड्राइवर है। जबकि प्रियंका का पति लखमीचंद ट्रक ड्राइवर है। पारिवारिक विवाद के चलते प्रियंका पिछले 4 साल से बल्लभगढ़ की विष्णु कॉलोनी के एक मकान में रहकर अपना क्लीनिक चला रही थी। प्रियंका ने सामान्य नर्सिंग और मिडवाइफरी (जीएनएम) का कोर्स किया था। वह यहां अपने 14 साल के बेटे और 10 साल की बेटी के साथ रहा करती थीं।” खबर के मुताबिक आरोप है कि प्रियंका का पति उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां दे रहा था। लगातार मिलती धमकियों की वजह से वह बहुत डरी हुई थी। हालांकि इस संबंध में उसने पुलिस से शिकायत भी की थी। कहा तो यह भी जा रहा है कि प्रियंका की हत्या पूरी योजना के तहत की गई थी। हत्या (Nurse crime story) से एक दिन पहले ही प्रियंका की सास और देवर उसके क्लिनिक पर आए थे। और दोनों बच्चों को जबरन अपने साथ ले गए थे। इस दौरान प्रियंका के साथ मारपीट भी की गई थी।  इसे भी पढ़ें:–चीन के इशारे पर नॉर्थईस्ट का कार्ड खेल दबाव बना रहा बांग्लादेश, पीएम मोदी से द्विपक्षीय बैठक को क्यों बेचैन युनूस पूरे कमरे में खून बिखरा हुआ (Nurse crime story) था मृतका के पिता ने बताया कि “उन्होंने प्रियंका से बुधवार सुबह 11 बजे आखिरी बार फोन पर बात की थी। इसके बाद बार-बार कॉल करने पर भी फोन बंद मिला। अमूमन ऐसा कभी होता नहीं था। यह पहली बार था जब ऐसा हो रहा था। इससे परेशान होकर वह बल्लभगढ़ पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही टीम क्लिनिक पर पहुंची। कुछ देर मुआयना करने के बाद पुलिस चली गई। इस बीच उसने ऊपर बने कमरे में जाकर देखना भी जरुरी नहीं समझा। पुलिस के जाने के बाद रात 9 बजे परिजन खुद क्लिनिक पहुंचे और ऊपर जाकर देखा, तो उन्हें प्रियंका का शव बेड के किनारे पड़ा मिला। पूरे कमरे में खून बिखरा हुआ (Nurse crime story) था। शव को देख परिजनों को चीखें निकल गई। परिजनों ने हत्या का आरोप नर्स के पति, देवर, सास पर लगाया। पुलिस ने इस मामले में मृतका के पिता की शिकायत पर हत्या का केस दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। इसके लिए पांच टीमें लगाई गई हैं। आरोपियों में महिला का देवर हरियाणा पुलिस का जवान भी है।  Latest News in Hindi Today Hindi news  Nurse crime story #NurseMurderCase #CrimeNews #HusbandUnderSuspicion #ShockingMurder #JusticeForNurse #CrimeInvestigation #BreakingNews #DomesticViolence #MurderMystery #LatestNews

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Chaiti Chhath Puja

चैती छठ पूजा: इन आवश्यक सामग्रियों के बिना अधूरी है व्रत की पूर्णता

भारत में हर एक त्यौहार का महत्व होता है और उसे बड़ी श्रद्धा और विधिपूर्वक मनाया जाता है। इसी तरह चैती छठ पूजा (Chaiti Chhath Puja), जो विशेष रूप से उत्तर भारत, खासकर बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और मध्य प्रदेश में बड़े धूमधाम से मनाई जाती है, बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह पर्व खासकर सूर्य देवता (Lord Sun) की पूजा के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें व्रति 36 घंटे का उपवास रखते हुए सूर्यास्त और सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इस पूजा के दौरान कुछ विशेष पूजा सामग्री का होना जरूरी है, बिना इन चीजों के छठ पूजा का व्रत अधूरा माना जाता है। आइए जानते हैं वह कौन सी सामग्री है, जो इस पूजा के लिए आवश्यक होती है और बिना जिनके यह व्रत पूरा नहीं होता। चैती छठ पूजा की विशेष पूजा सामग्री चैती छठ पूजा (Chaiti Chhath Puja) में व्रति विशेष रूप से सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य देवता (Lord Sun) को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इसके लिए कुछ खास पूजा सामग्री का होना अनिवार्य है। इन चीजों को एक विशेष टोकरी (ठीया) में सजाया जाता है, जिसमें व्रति सूरज देवता को अर्पित करते हैं। चैती छठ पूजा (Chaiti Chhath Puja) को विधिपूर्वक संपन्न करने के लिए कुछ विशेष पूजा सामग्री की आवश्यकता होती है, जिसे पूजा स्थल पर सुसज्जित किया जाता है। सबसे पहले, पूजा सामग्री रखने के लिए एक साफ थाली का होना जरूरी है। पूजा स्थल पर दीपक जलाने के लिए मिट्टी के दीए लगाए जाते हैं, जो पूजा की पवित्रता को बढ़ाते हैं। साथ ही, खाजा, गुड़, और अदरक का पौधा भी पूजा में शामिल किया जाता है। चावल, आटा, और जल पूजा के दौरान अर्पित किए जाते हैं। इसके अलावा, शहद, गंगाजल, और चंदन का भी विशेष महत्व होता है। सिंदूर, धूपबत्ती, कुमकुम, और कपूर का उपयोग वातावरण को शुद्ध और पूजा को विशेष बनाता है। बांस या पीतल का सूप और दूध तथा जल के लिए गिलास पूजा में जरूरी होते हैं। ऋतुफल, कलावा, सुपारी, फूल, और माला भी पूजा में अर्पित किए जाते हैं। अंत में, तांबे का कलश और बड़ी टोकरी का उपयोग प्रसाद रखने के लिए किया जाता है। इन सभी सामग्रियों का उपयोग पूजा की विधि के अनुसार सूर्य देवता (Lord Sun) की पूजा में किया जाता है। प्रसाद की सामग्री चैती छठ पूजा (Chaiti Chhath Puja) के दौरान विशेष प्रसाद तैयार किया जाता है, जो सूर्य देवता को अर्पित किया जाता है। इस प्रसाद में कुछ खास चीजें शामिल होती हैं, जो पूजा की पवित्रता और नियमों के अनुरूप होती हैं। प्रसाद में आमतौर पर लड्डू, हल्दी, नाशपाती, और पत्ते लगे हुए ईख शामिल होते हैं। इसके अलावा, दूध, तेल, बाती, नारियल, शरीफा, और दूध से बनी मिठाइयाँ भी प्रमुख रूप से रखी जाती हैं। इसके साथ ही, बड़ा नींबू, सिंघाड़ा, सुथनी, शकरकंदी, मूली, बैंगन, केले, और गेहूं को भी प्रसाद के रूप में उपयोग किया जाता है। इन सभी चीजों का विशेष महत्व होता है और ये सूर्य देवता के आशीर्वाद को प्राप्त करने में मदद करती हैं। इसे भी पढ़ें:- चैती छठ महापर्व 2025: सूर्य देव की पूजा और उपवास का पवित्र अवसर चैती छठ पूजा के दौरान इन नियमों का पालन करें चैती छठ पूजा के दौरान सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए और व्रत के सभी नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए, ताकि पूजा सही तरीके से संपन्न हो सके। पूजा के समय घर के सभी सदस्य सात्विक आहार ग्रहण करें। नहाय-खाय के दिन से लेकर सूर्योदय के अर्घ्य तक लहसुन और प्याज का सेवन पूरी तरह से मना है। व्रति को प्रसाद खुद बनाना चाहिए, यदि वह इसे बनाने में सक्षम नहीं हैं, तो किसी न किसी रूप में मदद अवश्य करें। प्रसाद तैयार करते समय स्वच्छता और शुद्धता का खास ध्यान रखें। यह सुनिश्चित करें कि छठ पूजा से जुड़े सभी प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर ही तैयार किए जाएं। पूजा के दौरान सुई का उपयोग कपड़ों में नहीं करना चाहिए और पूजा में बांस से बनी सूप और टोकरी का ही प्रयोग करें। इसके अलावा, व्रति पूजा के समय जमीन पर चटाई बिछाकर ही सोएं। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Chaiti Chhath Puja #ChaitiChhath #ChhathPuja2024 #ChhathVrat #SunGodWorship #ChhathFestivals #HinduRituals #ChhathSamagri #ChhathPujaItems #ChhathMahima #FestiveRituals

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Who Benefits Most from the New Waqf Act Amendments

Waqf Act amendments: नया वक़्फ़ बिल पास होने पर इन्हें होगा सबसे अधिक फायदा?

लोकसभा में आज वक्फ बिल को नए स्वरूप (Waqf Act amendments) में पेश कर दिया गया है। फ़िलहाल बिल चर्चा जारी है। संसद में वक्फ बिल को पास कराने के लिए सरकार को लोकसभा और राज्यसभा में वोटिंग के जरिए बहुमत की जरूरत है। इसमें सरकार को इस बिल को पास कराने हेत लोकसभा के 543 में से 272 और राज्यसभा के 245 में से 123 सांसदों का समर्थन जरूरी है। बात करें राज्यसभा के सांसदों की संख्या की राज्यसभा में अभी 9 सीटें खाली हैं। तो ऐसे में मौजूदा 236 में से 119 सांसदों का समर्थन जरूरी है। बीजेपी के पास 96 सांसद हैं। वहीं एनडीए की सहयोगी पार्टियों के पास 19 सांसद हैं। ऐसे में सरकार को 6 नॉमिनेट सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। ऐसे में यदि यह विधेयक संसद से पास हो जाता है तो यह बिल कानून बन जाएगा। साल 2006 की जस्टिस सच्चर कमेटी की रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर ही एक्ट (Waqf Act amendments) में किए जा रहे हैं बदलाव  हालांकि वक्फ बिल पर केंद्र सरकार का कहना है कि “साल 2006 की जस्टिस सच्चर कमेटी की रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर ही एक्ट (Waqf Act amendments) में बदलाव किए जा रहे हैं।” बता दें कि 8 अगस्त को लोकसभा में बिल पेश करते हुए संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि “इस बिल का उद्देश्य धार्मिक संस्थाओं के कामकाज में दखलंदाजी करना नहीं है। बिल मुस्लिम महिलाओं और पिछड़े मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में हिस्सेदारी देने के लिए लाया गया है। अहम बात यह कि इसमें वक्फ प्रॉपर्टीज के विवाद 6 महीने के भीतर निपटाने का प्रावधान है। इससे वक्फ में भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों का हल निकलेगा।” जानकारी के मुताबिक नए बिल के कानून बन जाने के बाद वक्फ की संपत्ति का विवाद सुलझाने में राज्य सरकारों को पहले से अधिक शक्तियां मिल जाएँगी। ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि प्रस्तावित कानून का असर दरगाहों या मुसलमानों के धार्मिक संस्थानों और पुरानी मस्जिदों पर नहीं होगा, लेकिन बिल में किए गए परिवर्तनों में वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की संख्या में वृद्धि हो जरूर हो सकती है। नए बिल के मुताबि वक्फ बोर्ड के सदस्यों के अलावे अब बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति अनिवार्य होगी। मौजूदा सरकार अपने सहयोगी दलों की मांग को स्वीकार करते हुए नए बिल में कई परिवर्तन किए हैं। जैसे कि  अलग-अलग हाईकोर्ट में वक्फ एक्ट (Waqf Act amendments) से जुड़ी तकरीबन 120 याचिकाएं की गईं हैं दायर  बता दें कि साल 2022 से अब तक देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में वक्फ एक्ट (Waqf Act amendments) से जुड़ी तकरीबन 120 याचिकाएं दायर की गईं थीं। जिसमें मौजूदा वक्फ कानून में कई खामियां बताई गईं। इनमें से तकरीबन15 याचिकाएं तो खुद मुस्लिमों ने दायर कर रखी है। इन याचिकाओं में सबसे बड़ा तर्क यह कि वक़्फ़ एक्ट के सेक्शन 40 के मुताबिक, वक्फ किसी भी प्रॉपर्टी को अपनी प्रॉपर्टी घोषित कर सकता है। इसके खिलाफ कोई शिकायत भी वक्फ बोर्ड ट्रिब्यूनल में ही की जा सकती है और इस पर अंतिम फैसला ट्रिब्यूनल का ही होता है। ऐसे में एक आम इंसान के लिए वक्फ के फैसले के कोर्ट में चैलेंज करना आसान नहीं है। इसे भी पढ़ें:- मुंबई में हिंदू युवकों की पिटाई पर मचा बवाल, बजरंग दल ने दी यह चेतावनी वक़्फ़ का इतिहास (Waqf Act amendments) ऐसे में सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि वक्फ (Waqf Act amendments) कहते किसे हैं। दरअसल, वक्फ अरबी भाषा के वकुफा शब्द से बना है। जिसका अर्थ होता है, ठहरना या रोकना। कानूनी शब्दों में समझने की कोशिश करें तो वक्फ उसे कहते हैं, इस्लाम में कोई व्यक्ति जब धार्मिक वजहों से या ईश्वर के नाम पर अपनी प्रॉपर्टी दान करता है, तो इसे प्रॉपर्टी को वक्फ कर देना यानी रोक देना कहते हैं। फिर वो चाहे कुछ रुपये हों या संपत्ति हो या फिर चाहे बहुमूल्य धातु हो, घर मकान ही या जमीन ही क्यों न हो? बता दें कि दान की गई ऐसी प्रॉपर्टी को अल्लाह की संपत्ति कहते हैं। और अपनी प्रॉपर्टी वक्फ को देने वाले इंसान को वकिफा कहा जाता है। गौर करने वाली बात यह कि वकिफा द्वारा दान की गई या वक्फ की संपत्तियों को बेचा नहीं जा सकता। इसका उपयोग सिर्फ धर्म के लिए ही जा सकता। रही बात भारत में वक्फ के परंपरा की, तो बता दें कि इसका इतिहास 12वीं सदी में दिल्ली सल्तनत के समय से जुड़ा है। भारत में आजादी के बाद साल 1954 में पहली बार वक्फ एक्ट बना था। फिर साल 1995 में इस एक्ट में कुछ संशोधन किए गए थे। और फिर संशोधन करने के बाद नया वक्फ एक्ट बना। इसके अलावा साल 2013 में भी इसमें कई बदलाव किए गए। Latest News in Hindi Today Hindi News Waqf Act amendments #WaqfAct #WaqfBill2024 #WaqfProperty #WaqfBoard #IndianLaw #MuslimCommunity #LegalReforms #IndiaNews #GovtPolicy #WaqfRights

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Bidi vs cigarette health risk: सेहत के लिए बीड़ी पीना अधिक खतरनाक या सिगरेट, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट? 

देश में ऐसे करोड़ों लोग हैं जो रोजाना बेख़ौफ़ होकर सिगरेट और बीड़ी पीते हैं। वो इस बात को जानते भी हैं कि इसे पीने से कैंसर जैसी जानलेवा घातक बीमारी हो सकती है। कमाल की बात यह कि यह जानते-बुझते हुए भी कि इससे जान जा सकती है, फिर भी धड़ल्ले से लोग सुट्टा मरते हैं। सुबह आँख खुलने से लेकर रात को सोने से पहले तक लोग सिगरेट पीते हैं। वो तो भला हो नींद का, जो 6-7 घंटे के लिए आ जाती है, जिसके चलते कम से कम वो समय बच जाता है। अन्यथा लोगों की सिगरेट के प्रति दीवानगी इस कदर है कि वो सोते-सोते भी पिएं। खैर, कहने की जरूरत नहीं कि वो चाहे बीड़ी हो या सिगरेट, दोनों का सेवन करने से जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं। खैर, अक्सर इस बात को लेकर बड़ी चर्चा होती है कि बीड़ी ज्यादा खतरनाक होती है या सिगरेट (Bidi vs cigarette health risk)? बीड़ी पीने वाले सिगरेट को अधिक नुकसानदायक मानते हैं और सिगरेट पीने वाले बीड़ी को अधिक खतरनाक मानते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि बीड़ी और सिगरेट में से कौन सी चीज शरीर के लिए अधिक नुकसानदायक हो सकती है?  बीड़ी और सिगरेट दोनों का इस्तेमाल हर हाल में सेहत के लिए नुकसानदायक (Bidi vs cigarette health risk) होता है स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक बीड़ी और सिगरेट दोनों का इस्तेमाल हर हाल में सेहत के लिए नुकसानदायक (Bidi vs cigarette health risk) होता है। बात करें सिगरेट और बीड़ी के अंतर की, तो बीड़ी का धुआं सिगरेट के धुएं की तुलना में कहीं ज्यादा जहरीला और नुकसानदायक होता है। ऐसा इसलिए कि बीड़ी में मौजूद तंबाकू और अन्य हानिकारक तत्व जलते ही धुएं में घुलमिल जाते हैं। इसके चलते शरीर में कार्सिनोजिक यानी कैंसर पैदा करने वाले तत्वों की मात्रा अधिक हो जाती है। और फिर लगातार सेवन के चलते मुंह,फेफड़ों और गले के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अब इसका अर्थ यह नहीं ही है कि सिगरेट पीने से कुछ नहीं होता। एक्सपर्ट की मानें तो सिगरेट के धुएं में भी ऐसे हानिकारक रसायन होते हैं जो कैंसर, दिल की बीमारियों और फेफड़ों की समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। एक्सपर्ट की मानें तो सिगरेट के धुएं में निकोटीन नामक पदार्थ होता है। इसी निकोटीन की वजह से लोगों को सिगरेट पीने की लत लग जाती है। बता दें कि इसमें कार्बन मोनोऑक्साइड और टार जैसी हानिकारक सामग्री भी होती है, जो फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं।  इसे भी पढ़ें: पानी पीना ही काफी नहीं, हीटवेव्स में हाइड्रेशन से बचाव के लिए अपनाएं ये टिप्स बीड़ी और सिगरेट का लगातार सेवन करना होता है सेहत के लिए बेहद खतरनाक (Bidi vs cigarette health risk)  कुल-मिलाकर बीड़ी और सिगरेट दोनों में ही निकोटीन की मात्रा बहुत होती है। दोनों के सेवन से फेफड़ों में खतरनाक तत्व जमा होते जाते हैं। आग चलकर इसका परिणाम यह होता है कि सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं। नलियां सिकुड़ने से ऑब्सट्रक्टिव डिजीज और कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। बीड़ी और सिगरेट के सेवन से फेफड़े कमजोर हो जाते हैं और श्वसन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। यही नहीं, कई रिसर्च में तो 1 बीड़ी को 2 सिगरेट के बराबर खतरनाक बताया गया है। ऐसे में बीड़ी और सिगरेट का लगातार सेवन करना सेहत के लिए बेहद खतरनाक (Bidi vs cigarette health risk) होता है। इन दोनों का सेवन करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं। विशेषकर फेफड़ों के लिए इन चीजों को ज्यादा घातक माना जाता है। आपको बता दें कि बीड़ी पत्तियों से बनाई जाती है। इस दौरान इसमें तंबाकू और कुछ अन्य पदार्थ भरे जाते हैं। रही बात सिगरेट की तो सिगरेट में तंबाकू को कागज की परत में लपेटा जाता है। तंबाकू के साथ-साथ इसमें कई अन्य रसायन और प्रिजर्वेटिव्स भी होते हैं। ध्यान देने वाली बात यह कि सिगरेट को मशीन से तैयार किया जाता है, जबकि बीड़ी को हाथों से तैयार किया जाता है। दोनों ही उत्पादों में तंबाकू और अन्य खतरनाक तत्व होते हैं। और यही खतरनाक तत्व स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi Bidi vs cigarette health risk #BidiVsCigarette #SmokingRisks #HealthHazards #TobaccoDangers #LungHealth #QuitSmoking #BidiSmoke #CigaretteAddiction #ExpertOpinion #HealthyLiving

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Chaiti Chhath Mahaparv 2025

चैती छठ महापर्व 2025: सूर्य देव की पूजा और उपवास का पवित्र अवसर

भारत में छठ पूजा (Chhath Puja) का महत्व अत्यधिक है, और इसे विशेष रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, और देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। हालांकि, छठ पूजा का मुख्य पर्व कार्तिक मास में मनाया जाता है, वहीं चैती छठ पूजा भी बहुत श्रद्धा और धूमधाम से मनाई जाती है। चैती छठ विशेष रूप से वसंत ऋतु में मनाई जाती है, और यह खासकर उत्तर भारत में मनाई जाती है। इस साल चैती छठ महापर्व (Chhath Puja) का आयोजन 2025 में बहुत धूमधाम से होने जा रहा है। इस लेख में हम चैती छठ पूजा की तिथियों, महत्व, और मुहूर्त के बारे में विस्तार से जानेंगे। चैती छठ पूजा का महत्व चैती छठ पूजा (Chhath Puja) का आयोजन मुख्य रूप से सूर्य देव (Lord Sun) की पूजा के लिए किया जाता है। यह पूजा विशेष रूप से व्रति द्वारा सूर्यदेव और चंद्रदेव की आराधना के रूप में की जाती है। यह पर्व विशेष रूप से महिलाएँ अपने परिवार की सुख-समृद्धि, संतान सुख, और अपने घर के सभी सदस्य की भलाई के लिए करती हैं। चैती छठ का आयोजन वसंत ऋतु में होता है और यह हिंदू पंचांग के चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन व्रति अपने परिवार के सुख और समृद्धि के लिए सूर्योदय से पहले उबटन, स्नान, और फिर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। चैती छठ 2025 की तिथियाँ चैती छठ पूजा 2025: महत्वपूर्ण तिथियां और मुहूर्त चैती छठ (Chaiti Chhath) महापर्व 2025 का आयोजन मंगलवार, 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है। पंचांग के अनुसार, यह पर्व चैत्र शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से प्रारंभ होकर सप्तमी तिथि को समाप्त होता है। इस दिन से व्रति अपने घरों में नहाय-खाय का आयोजन करते हैं, जिसमें कद्दू, चना दाल और अरवा चावल का सात्विक भोजन तैयार किया जाता है। आइए जानते हैं चैती छठ की महत्वपूर्ण तिथियां और मुहूर्त: 1. खरना (Kharna) – 2 अप्रैल 2025 (बुधवार) खरना पूजा चैती छठ के दूसरे दिन होती है। यह दिन व्रति के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन से छठ पूजा की मुख्य शुरुआत होती है। खरना के दिन व्रति दिनभर उपवासी रहते हैं और शाम को गुड़ की खीर का प्रसाद बनाते हैं। इसके बाद व्रति संतान सुख और परिवार की समृद्धि के लिए सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। खरना के साथ ही 36 घंटे के निर्जला उपवास की शुरुआत हो जाती है, जो अगले दिन सूर्यास्त और फिर सूर्योदय अर्घ्य तक जारी रहता है। इसे भी पढ़ें:- प्रेमानंद जी महाराज: गुरु दक्षिणा का सही अर्थ और महत्व 2. सूर्यास्त अर्घ्य – 3 अप्रैल 2025 (शुक्रवार) सूर्यास्त के समय सूर्य देवता (Lord Sun) को अर्घ्य अर्पित करना एक अहम हिस्सा होता है। इस दिन व्रति नदी या जलाशय के किनारे जाकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। यह समय विशेष रूप से परिवार के लिए सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना का होता है। 3. सूर्योदय अर्घ्य – 4 अप्रैल 2025 (शनिवार) चैती छठ (Chaiti Chhath) का मुख्य दिन सूर्योदय अर्घ्य का होता है। इस दिन व्रति सूर्योदय से पहले नदी या तालाब के किनारे जाकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। व्रति इस दिन अपने 36 घंटे के उपवास का समापन करते हैं और परिवार की भलाई के लिए सूर्य देव (Lord Sun) का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह दिन विशेष रूप से सूर्य पूजा और परिवार के लिए आशीर्वाद लेने का होता है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Chhath Puja #ChaitiChhath2025 #ChhathPuja #SunGodWorship #ChhathFestival #ChhathVrat #SuryaPuja #ChhathRituals #ChhathMahaparv #Devotion #FestivalsOfIndia

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US Reciprocal Tariffs May Cost India ₹26,000 Crore

US reciprocal tax impact on India: अमेरिका के रेसिप्रोकल टैक्स के चलते भारत को हो सकता है 26000 करोड़ का नुकसान

जब से डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं तब से दुनिया भर को उन्होंने अपने फैसलों से चौंका दिया है। कनाडा, चीन और भारत समेत सभी देशों को टेरिफ का टेरर दिखा रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप आज यानी, 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैक्स लगाने जा रहे हैं। इस टैक्स का खामियाजा सभी को भुगतना पड़ सकता है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। जानकारी के मुताबिक रेसिप्रोकल टैक्स से भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर बड़ा असर (US reciprocal tax impact on India) पड़ सकता है। केयरएज रेटिंग्स की नई रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के नए टैरिफ के चलते उत्तर अमेरिकी देश को होने वाले निर्यात पर भारत को तक़रीबन 3.1 बिलियन डॉलर (26000 करोड़ रुपये से ज्यादा) का नुकसान हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 1 अप्रैल को केयरएज रेटिंग्स की निदेशक स्मिता राजपुरकर ने मुंबई में रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि “हालांकि इसका प्रत्यक्ष प्रभाव भारत के सकल घरेलू उत्पाद के 0.1 प्रतिशत (3.1 बिलियन डॉलर) पर सीमित है, लेकिन फिर भी इस जोखिमों को लेकर चिंता बनी हुई हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि आखिर ये क्या है रेसिप्रोकल टैक्स? तो आपको बता दें कि रेसिप्रोकल का शाब्दिक अर्थ है आप जैसा करोगे, वैसा ही हम करेंगे।   सभी देश टैरिफ (US reciprocal tax impact on India) के रूप में एक तरह से बॉर्डर शुल्क लगाते हैं बता दें कि ट्रंप ने पहले ही कई टैरिफ उपायों की घोषणा कर दी है, जिसमें चीन से आयातित सभी वस्तुओं पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ तो मैक्सिको और कनाडा से आयातित वस्तुओं पर 25 प्रतिशत टैरिफ शामिल है, जबकि कनाडाई तेल पर 10 प्रतिशत की कम दर लागू होगी। दरअसल, प्रेसिडेंट ट्रंप का मानना है कि चीन, भारत, कनाडा और मैक्सिको, अमेरिका पर अधिक टैक्स लगाते हैं। कारण यही जो अब हम भी उन पर अधिक टैरिफ लगाएंगे। बता दें कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में हर देश एक-दूसरे से पेट्रोल-डीजल, गैस समेत अन्य वस्तुओं का आयात-निर्यात करते हैं। इस दौरान सभी देश टैरिफ (US reciprocal tax impact on India) के रूप में एक तरह से बॉर्डर शुल्क लगाते हैं।  इसे भी पढ़ें:– भारत के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं करोड़ों अवैध बांग्लादेशी मुसलमान, इस तरह करते हैं घुसपैठ भारत सरकार जवाबी कदमों पर विचार कर रही है (US reciprocal tax impact on India) बात करें भारत रेसिप्रोकल टैक्स से होने वाले नुकसान की तो भारतीय निर्यात पर 8 प्रतिशत डिफरेंशियल टैरिफ और डॉलर के मुकाबले रुपये में 4 प्रतिशत एक्सचेंज रेट डेप्रिशिएशन के अनुमान के परिणामस्वरूप, करेंसी में उतार-चढ़ाव को एडजस्ट करते हुए, 4 बिलियन डॉलर का शुद्ध निर्यात प्रभाव देखने को मिलेगा। इस तरह सभी निर्यात श्रेणी में एक समान अतिरिक्त टैरिफ को ध्यान में रखते हुए तक़रीबन 3.1 बिलियन डॉलर (US reciprocal tax impact on India) होने का अनुमान है। अमेरिकी टैरिफ से भारत के ऑटो और फार्मा जैसे सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इसके अलावा सेक्टर स्पेसिफिक टैरिफ भी लागू किए गए हैं, जैसे सभी स्टील और एल्युमीनियम आयातों पर 25 प्रतिशत टैरिफ और ऑटोमोबाइल व कुछ ऑटोमोबाइल पार्ट्स पर 25 प्रतिशत टैरिफ, साथ ही सेमीकंडक्टर और फार्मास्यूटिकल्स सहित अन्य उद्योग भी रडार पर हैं। ऐसा नहीं कि भारत सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। भारत सरकार जवाबी कदमों पर विचार कर रही है। गौरतलब हो कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। पिछले साल भारत ने वहां 78 अरब डॉलर का निर्यात किया था, जो कुल निर्यात व्यापार का 18 प्रतिशत है।   Latest News in Hindi Today Hindi news US reciprocal tax impact on India #USReciprocalTariffs #IndiaExportLoss #TradeDeficit #ReciprocalTaxImpact #IndiaUSTradeRelations #ExportSectorsAffected #JewelryExports

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Chaitra Navratri

चैत्र नवरात्रि में इन 7 दिव्य मंत्रों से होगी धन की प्राप्ति

चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) का पावन पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह समय मां दुर्गा (Maa Durga) की आराधना और आशीर्वाद पाने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस दौरान कुछ विशेष मंत्रों का जाप करने से धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं वे 7 चमत्कारी मंत्र जो आपको जीवनभर धनवान और खुशहाल बनाए रखेंगे। ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा।बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति॥  दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेष जन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।दारिद्र्य दुःख भयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकार करणाय सदार्द्रचित्ता॥ सर्वमङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥ शरणागत दीनार्तपरित्राण परायणे।सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते।भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥ रोगानशेषानपहंसि तुष्टारुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।त्वामाश्रितानां न विपन्नराणांत्वामाश्रिता हि आश्रयतां प्रयान्ति॥ सर्वबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।एवमेव त्वया कार्यम् अस्मद् वैरि विनाशनम्॥ इसे भी पढ़ें:- प्रेमानंद जी महाराज: गुरु दक्षिणा का सही अर्थ और महत्व नवरात्रि में 9 देवियों के विशेष बीज मंत्र इस प्रकार हैं: दुर्गा सप्तशती पाठ चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इस पवित्र ग्रंथ में 13 अध्याय और 700 श्लोक शामिल हैं, जो माता दुर्गा (Maa Durga) के तीन प्रमुख स्वरूपों का विवरण प्रस्तुत करते हैं। यदि कोई व्यक्ति नवरात्रि में संपूर्ण दुर्गा सप्तशती का पाठ करने में असमर्थ हो, तो केवल 7 विशेष मंत्रों का जाप करके भी मां दुर्गा की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi News Chaitra Navratri #ChaitraNavratri #Navratri2024 #DurgaPuja #DivineFeminine #ShaktiPower #SacredMantras #MantraMeditation #VedicWisdom #SpiritualGrowth

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