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भारत की पहली वंदे भारत फ्रेट ट्रेन ने ट्रायल रन में 145 किमी/घंटा की रफ्तार हासिल की, तेज माल परिवहन की दिशा में बड़ी छलांग

कोटा: भारतीय रेलवे ने माल परिवहन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश की पहली वंदे भारत फ्रेट (Freight EMU) ट्रेन का सफल ट्रायल पूरा किया। राजस्थान के कोटा मंडल में हुए शुरुआती परीक्षण के दौरान ट्रेन ने 145 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार हासिल की। यह भारत की अब तक की सबसे तेज मालगाड़ी परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है और इसका उद्देश्य ई-कॉमर्स, एक्सप्रेस पार्सल तथा कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स को नई गति देना है। यह अत्याधुनिक फ्रेट ट्रेन चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा विकसित की गई है। इसमें 16 कोच हैं और लगभग 397 टन तक माल ढोने की क्षमता है। ट्रायल के दौरान रिसर्च डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) ने ट्रेन की गति, ब्रेकिंग सिस्टम, स्थिरता और भार वहन क्षमता का परीक्षण किया। ई-कॉमर्स और कोल्ड-चेन को मिलेगा बड़ा लाभ भारतीय रेलवे के अनुसार यह ट्रेन विशेष रूप से ई-कॉमर्स कंपनियों, एक्सप्रेस कार्गो, दवाइयों, कृषि उत्पादों और कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स के लिए तैयार की गई है। तेज गति के कारण समय-संवेदनशील सामान देश के विभिन्न हिस्सों तक पहले की तुलना में काफी कम समय में पहुँचाया जा सकेगा। इससे सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होगी और लॉजिस्टिक्स लागत में भी कमी आने की उम्मीद है। आधुनिक तकनीक से लैस वंदे भारत फ्रेट EMU में आधुनिक इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (EMU) तकनीक का उपयोग किया गया है। यह पारंपरिक मालगाड़ियों की तुलना में तेज़ एक्सेलेरेशन, बेहतर ऊर्जा दक्षता और कम परिचालन समय प्रदान करेगी। भविष्य में इसका लक्ष्य उच्च गति वाले माल परिवहन नेटवर्क का हिस्सा बनना है। रेलवे की बड़ी योजना भारतीय रेलवे की योजना आने वाले वर्षों में ऐसी कई हाई-स्पीड फ्रेट ट्रेनों को नेटवर्क में शामिल करने की है। सरकार का लक्ष्य PM Gati Shakti और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के तहत रेल के माध्यम से माल परिवहन की हिस्सेदारी बढ़ाना है। इससे उद्योगों को तेज़ और भरोसेमंद परिवहन सुविधा मिलेगी तथा देश की सप्लाई चेन और अधिक मजबूत होगी। ट्रायल के बाद आगे की प्रक्रिया RDSO द्वारा सभी तकनीकी और सुरक्षा परीक्षण पूरे होने के बाद ट्रेन को अंतिम स्वीकृति दी जाएगी। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से व्यावसायिक संचालन में शामिल किया जा सकता है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना भारत के माल परिवहन क्षेत्र में एक नई क्रांति साबित हो सकती है। निष्कर्ष 145 किमी/घंटा की सफल ट्रायल स्पीड हासिल करने के साथ भारत की पहली वंदे भारत फ्रेट ट्रेन ने रेलवे के आधुनिकीकरण और तेज़ माल परिवहन की दिशा में एक नया अध्याय शुरू किया है। यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो देश में लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला को बड़ा लाभ मिलेगा। Source: Research Designs & Standards Organisation (RDSO) | Indian Railways | Integral Coach Factory (ICF) जय राष्ट्र न्यूज़

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लगातार बारिश से लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर असर, उद्योग जगत हालात पर रखे हुए है नजर

नई दिल्ली, 5 जुलाई। देश के विभिन्न हिस्सों में जारी भारी बारिश और प्रतिकूल मौसम का असर अब लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन गतिविधियों पर भी दिखाई देने लगा है। कई राज्यों में जलभराव, सड़क अवरोध और परिवहन में देरी के कारण माल की आवाजाही प्रभावित हुई है। उद्योग जगत और परिवहन कंपनियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। परिवहन सेवाओं पर बढ़ा दबाव लगातार वर्षा के कारण कई राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर यातायात धीमा पड़ा है। कुछ क्षेत्रों में जलभराव और भूस्खलन जैसी परिस्थितियों के चलते मालवाहक वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे डिलीवरी समय पर असर पड़ रहा है। सप्लाई चेन की निगरानी तेज लॉजिस्टिक्स कंपनियां आवश्यक वस्तुओं, खाद्य सामग्री, दवाइयों और औद्योगिक उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक मार्गों और अतिरिक्त परिवहन संसाधनों का उपयोग कर रही हैं। उद्योग जगत स्थिति के अनुसार अपनी वितरण रणनीतियों में आवश्यक बदलाव कर रहा है। उद्योगों की बढ़ी चिंता विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रतिकूल मौसम लंबे समय तक बना रहता है, तो विनिर्माण, खुदरा व्यापार, ई-कॉमर्स और कृषि आधारित उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखला पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सामान्य बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। बंदरगाह और गोदाम संचालन पर नजर कुछ तटीय क्षेत्रों में खराब मौसम के कारण बंदरगाह गतिविधियों और माल ढुलाई की गति पर भी प्रभाव पड़ सकता है। लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर गोदामों में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने और समय पर वितरण सुनिश्चित करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों की राय उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और वैकल्पिक परिवहन नेटवर्क जैसी व्यवस्थाएं मौसम संबंधी व्यवधानों के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। मजबूत सप्लाई चेन प्रबंधन से आवश्यक सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलती है। प्रशासन भी कर रहा समन्वय राज्य सरकारें और स्थानीय प्रशासन प्रभावित मार्गों पर यातायात सामान्य करने, जल निकासी में तेजी लाने और आवश्यक सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए हुए हैं। आगे की राह विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम की स्थिति में जल्द सुधार होता है, तो लॉजिस्टिक्स संचालन भी सामान्य होने लगेगा। फिलहाल उद्योग जगत और परिवहन क्षेत्र मौसम संबंधी आधिकारिक अपडेट पर लगातार नजर रखते हुए आवश्यक एहतियाती कदम उठा रहे हैं। स्रोत:उद्योग विशेषज्ञों, लॉजिस्टिक्स क्षेत्र से संबंधित सार्वजनिक जानकारी एवं मौसम संबंधी आधिकारिक अपडेट। मूल रिपोर्ट:5 जुलाई 2026 तक उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं और उद्योग विश्लेषण के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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