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MP में अवैध रेत खनन पर NGT पैनल की गंभीर टिप्पणी, स्थानीय अधिकारियों और सैंड माफिया के बीच संभावित गठजोड़ की आशंका

भोपाल, 19 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश में अवैध रेत खनन को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से जुड़ी एक जांच समिति ने गंभीर सवाल उठाए हैं। पैनल ने संकेत दिया है कि लगातार कार्रवाई और निगरानी के दावों के बावजूद अवैध खनन जारी रहना स्थानीय अधिकारियों और सैंड माफिया के बीच संभावित गठजोड़ की आशंका पैदा करता है। स्पेशल टास्क फोर्स के बावजूद जारी है अवैध खनन रिपोर्ट के मुताबिक, अवैध रेत खनन पर रोक लगाने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया गया था। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में कार्रवाई प्रभावी नहीं रही। पैनल ने सवाल उठाया कि लगातार शिकायतों और कार्रवाई के दावों के बावजूद अवैध खनन पर पूरी तरह रोक क्यों नहीं लग पा रही है। अधिकारियों की भूमिका की जांच की सिफारिश पैनल ने प्रवर्तन व्यवस्था में सामने आ रही कमियों की जांच करने और जहां कर्तव्य में लापरवाही साबित हो, वहां जिम्मेदारी तय करने की सिफारिश की है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि अवैध खनन पर नियंत्रण में नाकामी प्रशासनिक कमजोरियों के कारण है या कहीं जानबूझकर संरक्षण दिए जाने की आशंका भी है। नियमित निगरानी समिति बनाने का सुझाव NGT पैनल ने अवैध खनन पर लगातार नजर रखने के लिए एक नियमित निगरानी समिति गठित करने की सलाह दी है। इसके साथ ही हर महीने कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट तैयार करने की सिफारिश भी की गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही बढ़ाना और कार्रवाई की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करना है। अधिकारियों से संभावित गठजोड़ अभी जांच का विषय पैनल की टिप्पणी में संभावित गठजोड़ और कार्रवाई में कमियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं, लेकिन किसी विशिष्ट अधिकारी को दोषी घोषित नहीं किया गया है। अधिकारियों की मिलीभगत को स्थापित तथ्य तभी माना जा सकता है, जब आगे की जांच में इसके समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य सामने आएं। पर्यावरण पर भी पड़ सकता है गंभीर असर अवैध रेत खनन से नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र, भूजल पुनर्भरण और आसपास के प्राकृतिक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में पैनल ने केवल छापेमारी और जब्ती तक सीमित रहने के बजाय निरंतर निगरानी, प्रभावी कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया है। Source: The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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ग्वालियर में भीषण सड़क हादसा: मौत का आंकड़ा बढ़कर 15, दर्जनों घायल; 9 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई

ग्वालियर, 19 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण सड़क हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। हादसे में कई अन्य लोग घायल हुए हैं। शुरुआती रिपोर्ट्स में 13 लोगों की मौत की जानकारी दी गई थी, लेकिन बाद में यह आंकड़ा बढ़कर 15 हो गया। घायलों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग रिपोर्ट्स सामने आई हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में 33, जबकि आकाशवाणी की रिपोर्ट में 42 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है। कैसे हुआ हादसा? रिपोर्ट्स के मुताबिक, हादसा रात करीब 1:30 बजे हुआ। धान से लदा एक ट्रक उस ढलान वाले रास्ते पर पहुंच गया, जहां भारी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित थी। बताया जा रहा है कि ट्रक ने बैरिकेड्स तोड़ दिए और चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। इसके बाद ट्रक मंदिर की ओर जा रहे श्रद्धालुओं को कुचलते हुए बाहरी दीवार और गेट से जा टकराया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। शुरुआती 13 मौतों से बढ़कर 15 हुआ आंकड़ा हादसे के तुरंत बाद सामने आई खबरों में 13 लोगों की मौत की जानकारी दी गई थी। बाद में अस्पतालों और प्रशासन से मिली अपडेट के आधार पर मृतकों की संख्या 15 बताई गई। हादसे की गंभीरता को देखते हुए राहत और बचाव कार्य किए गए। 33 या 42 घायल? रिपोर्ट्स में अलग-अलग आंकड़े हादसे में घायल लोगों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग जानकारी सामने आई है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में 33 घायलों का उल्लेख है, जबकि 19 अक्टूबर की आकाशवाणी न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, 42 लोग घायल हुए हैं। घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है और कुछ की हालत गंभीर बताई गई है। 9 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंधित मार्ग पर भारी वाहन पहुंचने को लेकर सवाल उठे हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने कार्रवाई करते हुए एक सीएसपी को पद से हटा दिया और आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। इस तरह कुल नौ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जिला प्रशासन ने हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच रिपोर्ट सात दिनों के भीतर सौंपने को कहा गया है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि प्रतिबंधित मार्ग पर ट्रक कैसे पहुंचा, बैरिकेड्स के बावजूद उसे क्यों नहीं रोका जा सका और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई। ट्रक चालक और मालिक हिरासत में मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रक चालक और मालिक को हिरासत में लिया गया है। वाहन की तकनीकी जांच भी की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ब्रेक में खराबी, ओवरलोडिंग या किसी अन्य तकनीकी समस्या की हादसे में कोई भूमिका थी या नहीं। इन पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। प्रधानमंत्री और राज्य सरकार ने मुआवजे की घोषणा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों के लिए ₹2 लाख और घायलों के लिए ₹50,000 की सहायता की घोषणा की है। वहीं, मध्य प्रदेश सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख, गंभीर रूप से घायल लोगों को ₹2 लाख और अन्य घायलों को ₹50,000 की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। Source – India Today, Akashvani News, The New Indian Express, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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इंदौर जल त्रासदी के बाद सवालों में रहे Rohit Sisodia बने Raisen Collector, नियुक्ति पर सियासी विवाद तेज

भोपाल, 16 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश सरकार ने 2017 बैच के IAS अधिकारी Rohit Sisodia को रायसेन का कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है, क्योंकि इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से जुड़ी त्रासदी की न्यायिक जांच के दौरान उनके खिलाफ प्रशासनिक चूक को लेकर गंभीर टिप्पणियां सामने आने की खबरें थीं। रायसेन जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उन्हें कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। क्यों उठ रहे हैं नियुक्ति पर सवाल? रिपोर्टों के मुताबिक, इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी की त्रासदी में 36 लोगों की मौत हुई थी। इस मामले में प्रशासनिक व्यवस्था और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठे थे। Rohit Sisodia के खिलाफ भी कार्रवाई किए जाने और उन्हें निलंबित किए जाने की खबरें सामने आई थीं। अब कुछ ही महीनों बाद उन्हें रायसेन जिले की जिम्मेदारी सौंपे जाने पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि जांच में सामने आए निष्कर्षों और जवाबदेही से जुड़े सवालों के बीच उनकी नई नियुक्ति का आधार क्या है। Congress ने सरकार को घेरा मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Jitu Patwari और अन्य विपक्षी नेताओं ने इस नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि न्यायिक जांच की रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई हुई और प्रशासनिक चूक को लेकर सवालों के घेरे में आए अधिकारी को जिला कलेक्टर नियुक्त करने का आधार क्या है। पार्टी ने इस फैसले को त्रासदी से प्रभावित परिवारों के प्रति अन्याय बताते हुए सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। सरकार के IAS Reshuffle का हिस्सा है नियुक्ति Rohit Sisodia की नई पोस्टिंग मध्य प्रदेश में हुए व्यापक IAS फेरबदल का हिस्सा है। इस प्रशासनिक बदलाव के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारियों के विभागों, अतिरिक्त प्रभार और जिला स्तर की जिम्मेदारियों में परिवर्तन किया गया। हालांकि, उनकी नियुक्ति को लेकर उठे सवालों के कारण यह फैसला राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। Official Website पर Collector के रूप में दर्ज नाम रायसेन जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के ‘Who’s Who’ सेक्शन में Rohit Sisodia को Collector & DM के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इससे उनकी नई पोस्टिंग की पुष्टि होती है। हालांकि, नियुक्ति की आधिकारिक पुष्टि और इंदौर त्रासदी से संबंधित जांच में उठाए गए सवाल अलग-अलग विषय हैं, जिन पर संबंधित दस्तावेजों और सरकार के रुख के आधार पर विचार किया जाना जरूरी है। विवाद के बीच जांच की कार्रवाई पर नजर Rohit Sisodia की नियुक्ति के बाद अब ध्यान इस बात पर है कि इंदौर जल त्रासदी की जांच में सामने आए निष्कर्षों और सिफारिशों पर आगे क्या कार्रवाई होती है। साथ ही, राज्य सरकार प्रशासनिक जवाबदेही और नई नियुक्ति को लेकर विपक्ष के सवालों का क्या जवाब देती है, इस पर भी नजर बनी हुई है। स्रोत: Raisen District Administration, Indian Masterminds, IANS जय राष्ट्र न्यूज़

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मध्य प्रदेश में आदिवासी छात्रों से कथित अभद्रता का वीडियो वायरल, पुलिस इंस्पेक्टर सस्पेंड; CM मोहन यादव ने दिए जांच के आदेश

भोपाल, 15 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्रता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस विभाग ने कार्रवाई की है। मामले में मिसरोद थाना प्रभारी इंस्पेक्टर रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी घटना का संज्ञान लेते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। प्रदर्शन के दौरान हुआ विवाद यह घटना 13 अक्टूबर को भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर आदिवासी छात्रों और युवाओं के प्रदर्शन के दौरान हुई। प्रदर्शनकारी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की छात्र इकाई से जुड़े थे और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विरोध जता रहे थे। पुलिस के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार कर मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। ‘जय जोहार’ के नारों के बीच कथित अभद्र टिप्पणी रिपोर्ट्स के अनुसार, हिरासत में लिए गए छात्र पुलिस वाहन में ‘जय जोहार’ के नारे लगा रहे थे। इसी दौरान वायरल वीडियो में इंस्पेक्टर रतन सिंह परिहार कथित तौर पर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणियां करते दिखाई दे रहे हैं। आदिवासी संगठनों ने इन कथित टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इससे समुदाय की गरिमा और पहचान का अपमान हुआ है। हालांकि, घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस इंस्पेक्टर निलंबित भोपाल पुलिस के डीसीपी जोन-2 ने 14 अक्टूबर को इंस्पेक्टर के निलंबन का आदेश जारी किया। आदेश के अनुसार, वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा व्यवहार प्रथम दृष्टया पुलिसकर्मियों से अपेक्षित आचरण के अनुरूप नहीं है और इससे विभाग की छवि प्रभावित हो सकती है। CM मोहन यादव ने दिए जांच के निर्देश मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं, राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि जांच के दौरान यदि अन्य पुलिसकर्मी भी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। आदिवासी संगठनों ने FIR की मांग की कांग्रेस नेताओं और आदिवासी संगठनों ने इंस्पेक्टर के निलंबन को पर्याप्त नहीं बताते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। जय आदिवासी युवा शक्ति (JAYS) से जुड़े नेताओं ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी SC/ST Act के तहत भी कार्रवाई की मांग उठाई है। फिलहाल, मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। Source – The Indian Express, Times of India, Free Press Journal जय राष्ट्र न्यूज़

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अमित शाह का बड़ा ऐलान: 2029 तक नशामुक्त भारत का लक्ष्य, न्याय व्यवस्था में 3 साल की समयसीमा पर जोर

भोपाल: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नशे के खिलाफ केंद्र सरकार की मुहिम और नए आपराधिक कानूनों को लेकर बड़ा बयान दिया है। भोपाल में उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश को 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि नए criminal laws के पूरी तरह लागू होने के बाद FIR दर्ज होने से लेकर Supreme Court के फैसले तक न्याय प्रक्रिया को करीब तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है। 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त मध्य प्रदेश का लक्ष्य अमित शाह ने कहा कि मध्य प्रदेश में narcotics के खिलाफ अभियान को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने लक्ष्य रखा कि 31 दिसंबर 2029 तक राज्य में नशीले पदार्थों के कारोबार और उनकी उपलब्धता को खत्म करने की दिशा में कठोर कार्रवाई की जाए। केंद्र का लक्ष्य 2029 तक ‘नशामुक्त भारत’ मध्य प्रदेश के लक्ष्य के साथ केंद्र सरकार ने देशव्यापी स्तर पर भी 2029 तक नशामुक्त भारत के लिए एक roadmap तैयार किया है। इस roadmap में जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक का तीन वर्षीय action plan शामिल है, जिसमें enforcement, drug supply chains, demand reduction, rehabilitation और inter-agency coordination पर जोर दिया गया है। 200 से ज्यादा action points पर काम केंद्र सरकार के Vision Document 2026-29 में 200 से ज्यादा action points तय किए गए हैं। इनमें drug sources और trafficking routes की पहचान, synthetic drugs पर नियंत्रण, money trails की जांच, rehabilitation capacity बढ़ाना और राज्यों की anti-narcotics machinery मजबूत करना शामिल है। युवाओं को नशे से बचाने पर खास जोर अमित शाह ने कहा कि drug abuse का सबसे गंभीर असर युवा पीढ़ी पर पड़ता है। सरकार का कहना है कि enforcement के साथ-साथ awareness, treatment और rehabilitation भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। ‘तारीख पर तारीख’ वाली व्यवस्था बदलने का दावा न्याय व्यवस्था पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि देश की पुरानी criminal justice system को अक्सर ‘तारीख पर तारीख’ से जोड़ा जाता था। उनका दावा है कि नए आपराधिक कानूनों के पूर्ण implementation के बाद criminal cases में अधिक स्पष्ट और समयबद्ध प्रक्रिया लागू होगी। FIR से Supreme Court तक तीन साल का लक्ष्य शाह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य FIR दर्ज होने से लेकर Supreme Court के अंतिम फैसले तक criminal justice process को तीन साल के भीतर पूरा करना है। उन्होंने इसे नए criminal laws के बड़े objectives में से एक बताया। BNS, BNSS और BSA पर भरोसा नई न्याय व्यवस्था भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत संचालित हो रही है। सरकार का कहना है कि इन कानूनों में investigation, forensic evidence, digital procedures और trial timelines को ज्यादा व्यवस्थित करने की कोशिश की गई है। ‘मूल मंत्र न्याय है, दंड नहीं’ अमित शाह ने कहा कि नए कानूनों का उद्देश्य सिर्फ punishment देना नहीं, बल्कि समय पर न्याय सुनिश्चित करना है। उनके मुताबिक दंड का प्रावधान अपराध रोकने के लिए है, जबकि पूरी व्यवस्था का केंद्रीय उद्देश्य न्याय है। Anti-Narcotics Task Force को मजबूत करने की योजना राष्ट्रीय roadmap के तहत प्रत्येक राज्य में मार्च 2027 तक fully equipped Anti-Narcotics Task Force तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ drug samples की forensic testing reports 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। केंद्र और राज्यों के coordination पर जोर नशे के खिलाफ अभियान में केंद्र सरकार राज्यों के साथ coordination बढ़ाने की तैयारी कर रही है। Home Ministry quarterly reviews के जरिए progress monitor करने और measurable targets के आधार पर accountability तय करने की योजना पर काम कर रहा है। बड़े reform agenda का हिस्सा अमित शाह के ये दोनों संदेश—नशामुक्त भारत और समयबद्ध न्याय—केंद्र सरकार के broader governance reform agenda का हिस्सा हैं। हालांकि तीन साल में FIR से Supreme Court तक न्याय का लक्ष्य व्यवहार में कितना सफल होगा, यह courts, police, prosecution, forensic infrastructure और pending cases की स्थिति पर निर्भर करेगा। source – PIB / Hindustan Times / The Times of India / The Indian Express / Live Hindustan जय राष्ट्र न्यूज़

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Kuno में बड़ी Cheetah Update; India में जन्मी मादा ने 4 Cubs को दिया जन्म, कुल Population 56 पहुंची

श्योपुर, 18 सितंबर 2026: Madhya Pradesh के Kuno National Park से Project Cheetah के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। India में जन्मी female cheetah KGP12 ने चार cubs को जन्म दिया है। KGP12 South Africa से लाई गई female cheetah Gamini की बेटी है। नए cubs के जन्म के साथ India में cheetahs की कुल संख्या बढ़कर 56 हो गई है। Project Cheetah के 4 साल पूरे होने के अगले दिन खुशखबरी Project Cheetah ने 17 सितंबर को India में अपने चार साल पूरे किए थे और इसके ठीक अगले दिन Kuno में चार नए cubs के जन्म की जानकारी सामने आई। Union Environment Minister Bhupender Yadav ने इसे Project Cheetah के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए Kuno और conservation team को बधाई दी। South African Cheetah Gamini की बेटी है KGP12 KGP12 का जन्म India में हुआ था और उसकी mother Gamini को South Africa से फरवरी 2023 में India लाया गया था। इस वजह से नए cubs को Project Cheetah के तहत India में आगे बढ़ रही नई generation का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। दूसरी बार मां बनी KGP12 KGP12 इससे पहले April 2026 में भी चार cubs को जन्म दे चुकी थी। उस समय उसने Kuno के wild area में बच्चों को जन्म दिया था। हालांकि करीब एक महीने बाद उसके पहले litter के चारों cubs leopard attack में मारे गए थे। अब KGP12 ने secured enclosure में दूसरी बार चार cubs को जन्म दिया है। India में Cheetahs की संख्या 56 चार नए cubs के जन्म के बाद India की total cheetah population अब 56 हो गई है। इनमें: मौजूद हैं। कुल cheetahs में से 36 का जन्म India में हुआ है। Forest Team कर रही Cubs की Monitoring Kuno National Park के field staff नए cubs और उनकी mother की लगातार monitoring कर रहे हैं। Officials के मुताबिक mother और cubs को disturb न करने के लिए निगरानी दूरी से की जा रही है। इस birth को Project Cheetah के breeding programme और Indian conditions में cheetahs के adaptation के लिए positive development माना जा रहा है। 2022 में शुरू हुआ था Project Cheetah Project Cheetah की शुरुआत 17 September 2022 को Namibia से आठ cheetahs लाकर की गई थी। इसके बाद South Africa और Botswana से भी cheetahs India लाए गए। अब programme का focus imported animals के साथ-साथ India में जन्मी नई generations को sustainable population में बदलने पर है। source – Ministry of Environment / The Indian Express / The New Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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आदिवासी बस्तियों में पेयजल व्यवस्था पर सवाल, CJP ने दिखाई जमीनी हकीकत

बालाघाट, 14 सितंबर 2026: Madhya Pradesh के Balaghat जिले की आदिवासी बस्तियों में पेयजल, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक Abhijeet Dipke ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रभावित गांवों के दौरे के बाद social media पर videos और तस्वीरें साझा करते हुए स्थानीय पानी की quality और tribal families को मिल रही basic facilities पर सरकार से जवाब मांगा। यह मामला ऐसे समय उठा है जब जिले में 30 से ज्यादा बच्चों की मौत की reports पहले ही प्रशासनिक और judicial scrutiny के दायरे में हैं। नल के पानी का Video Share कर उठाया सवाल Abhijeet Dipke ने एक tribal village में उपलब्ध tap water का video share करते हुए सवाल किया कि क्या राज्य के मंत्री और विधायक अपने बच्चों को ऐसा पानी पिलाना चाहेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित drinking water जैसी basic facility भी पर्याप्त रूप से नहीं मिल रही है। कुछ tribal families के अब भी river water पर निर्भर होने का दावा भी उन्होंने किया। Handpump से पीला पानी आने का भी दावा Balaghat child deaths से जुड़ी PIL में भी प्रभावित इलाकों के handpumps से पीले रंग का पानी निकलने की शिकायत सामने आई है। हालांकि बच्चों की मौतों को केवल contaminated water से जोड़ने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। Centre की investigation में measles, malaria, co-infections, respiratory distress, dehydration, malnutrition, anaemia और shock समेत कई clinical causes सामने आए हैं। Schools और ASHA Workers की स्थिति पर भी सवाल Dipke ने tribal children के एक school का दौरा कर उसकी infrastructure condition पर भी सवाल उठाए। उन्होंने school में बच्चों को दिए जा रहे food और उपलब्ध basic facilities का जायजा लिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इलाके की ASHA workers को पिछले छह महीने से salary नहीं मिली है, जिससे ग्रामीण health system की स्थिति को लेकर नई चिंता पैदा हुई है। 30 से ज्यादा बच्चों की मौत के बाद बढ़ी चिंता Balaghat के remote tribal villages, खासकर Baiga community से जुड़े इलाकों में पिछले कुछ समय में 30 से ज्यादा बच्चों की मौत की reports सामने आई हैं। इन मौतों की एक single confirmed वजह अभी तय नहीं हुई है और जांच जारी है। कई बच्चों को hospitals में भर्ती भी कराया गया है। High Court ने सरकार से मांगा जवाब Madhya Pradesh High Court की Jabalpur Bench ने मामले में state government, Health Department, Women and Child Development Department और Balaghat Collector समेत संबंधित authorities को notices जारी किए हैं। PIL में आरोप लगाया गया है कि करीब 400 बच्चों का इलाज 50-bed capacity वाले hospital में किया जा रहा था और प्रभावित क्षेत्रों में nutrition तथा drinking water की स्थिति भी खराब है। सरकार ने परिवारों को दी आर्थिक सहायता Balaghat administration के मुताबिक अब तक 24 मृत बच्चों के परिवारों को ₹4-4 लाख की financial assistance दी जा चुकी है और बाकी eligible families को सहायता देने की प्रक्रिया जारी है। source – Times of India / Jansatta / Madhya Pradesh High Court Proceedings जय राष्ट्र न्यूज़

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IMD ने मध्य प्रदेश, असम और केरल के लिए रेड अलर्ट जारी किया, कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी

नई दिल्ली: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई हिस्सों में मानसून की तेज़ गतिविधियों को देखते हुए मध्य प्रदेश, असम और केरल के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार इन राज्यों में अगले 24 घंटों के दौरान भारी से अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना है। इसके साथ ही कई अन्य राज्यों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट भी जारी किए गए हैं। किन राज्यों में भारी बारिश की संभावना IMD के अनुसार मध्य प्रदेश, असम और केरल के अलावा मेघालय, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भी भारी बारिश, गरज-चमक और तेज़ हवाओं की संभावना है। कुछ स्थानों पर जलभराव, बाढ़ और भूस्खलन जैसी स्थिति भी बन सकती है। प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश मौसम विभाग ने राज्य सरकारों और जिला प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों में राहत एवं बचाव दल तैयार रखने, निचले इलाकों पर विशेष निगरानी रखने और लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह देने को कहा है। नदी किनारे रहने वाले लोगों और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वालों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की गई है। मछुआरों और यात्रियों के लिए चेतावनी IMD ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में तेज़ हवाओं और ऊँची लहरों की चेतावनी जारी करते हुए मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है। कई तटीय क्षेत्रों में भी मौसम खराब रहने की संभावना जताई गई है। लोगों से सावधानी बरतने की अपील मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें, मौसम से जुड़े आधिकारिक अपडेट पर नज़र रखें और भारी बारिश के दौरान जलभराव वाले क्षेत्रों तथा नदी-नालों के पास जाने से बचें। निष्कर्ष देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मध्य प्रदेश, असम और केरल के लिए जारी रेड अलर्ट को देखते हुए प्रशासन और नागरिकों दोनों को सतर्क रहने की आवश्यकता है, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके। Source: India Meteorological Department (IMD) जय राष्ट्र न्यूज़

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