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Hospitals में Syringes के भारी Margins पर Maharashtra FDA सख्त, 747% तक का अंतर मिला; Price Control का Proposal

मुंबई, 7 सितंबर 2026: महाराष्ट्र Food and Drug Administration (FDA) ने hospitals में इस्तेमाल होने वाली syringes, IV sets, nebuliser masks और दूसरे medical consumables की कीमतों में भारी अंतर को लेकर चिंता जताई है। FDA Commissioner Tukaram Mundhe ने बताया कि विभाग की जांच में कई products की hospital purchase price और Maximum Retail Price (MRP) के बीच सैकड़ों से लेकर हजारों प्रतिशत तक का अंतर मिला है। ₹6.75 की Syringe, MRP ₹57.20 FDA की study में 10 ml Lifelong Meditech syringe की purchase price ₹6.75 पाई गई, जबकि उस पर MRP ₹57.20 दर्ज थी। यानी purchase price और MRP के बीच करीब 747% का अंतर था। IV Set में 2,841% तक Margin एक Medifusion IV set की खरीद कीमत ₹11.05 बताई गई, जबकि उसका MRP ₹325 था। FDA Commissioner के मुताबिक यह करीब 2,841% का margin बनता है। इसी तरह एक autofusion set की purchase price ₹70 और MRP ₹393 मिली, जो लगभग 461% का अंतर है। Oxygen और Nebuliser Masks में भी बड़ा अंतर जांच में nebuliser और oxygen masks की purchase price करीब ₹40–₹45 पाई गई, जबकि उनकी MRP ₹650 से ₹715 तक थी। इस हिसाब से price gap लगभग 1,300% से 1,600% तक पहुंच रहा था। NPPA को भेजा Price Regulation Proposal Maharashtra FDA ने इस समस्या को लेकर National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) को policy proposal भेजा है। FDA चाहता है कि hospitals में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख devices और consumables को Drug Price Control Order, 2013 की Section 4 के तहत price regulation के दायरे में लाया जाए। Affordable Healthcare पर FDA का जोर Tukaram Mundhe ने कहा कि medicines और medical consumables की affordability public health का बड़ा मुद्दा है। उनके मुताबिक कई essential products ऐसे हैं जिन पर केवल MRP declaration की requirement है, लेकिन effective price control नहीं है। इससे patient और hospital के बीच information asymmetry पैदा होती है। Pharma Sector में पहले से तेज कार्रवाई FDA ने पिछले तीन महीनों में pharmaceutical manufacturers, blood centres, storage facilities और laboratories की 2,485 inspections की हैं। इनमें 230 establishments के licences suspend और 38 licences cancel किए गए। इसके अलावा medical shops और pharmacies की 11,780 inspections हुईं, जिनमें 2,075 licences suspend और 394 cancel किए गए। अभी Final Price Cap नहीं Patients के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि syringes या दूसरे hospital consumables पर अभी कोई नया final price cap लागू नहीं हुआ है। FDA ने फिलहाल NPPA के सामने regulatory proposal रखा है। आगे price control लागू होगा या नहीं, इसका फैसला केंद्रीय pricing authority की प्रक्रिया के बाद होगा। source – The Indian Express / Maharashtra FDAजय राष्ट्र न्यूज़

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Zepto और Blinkit पर खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ी कार्रवाई, बेंगलुरु में वेयरहाउस सील और मुंबई में लाइसेंस निलंबित

नई दिल्ली: देश के तेजी से बढ़ते क्विक-कॉमर्स सेक्टर में खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। कर्नाटक में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने बेंगलुरु के होस्कोटे स्थित Zepto के एक वेयरहाउस को सील कर दिया, जबकि महाराष्ट्र FDA ने मुंबई के मलाड वेस्ट स्थित Blinkit के एक डार्क स्टोर का खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिया। दोनों मामलों में अधिकारियों ने स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी गंभीर कमियां पाए जाने की जानकारी दी है। बेंगलुरु में Zepto वेयरहाउस पर कार्रवाई कर्नाटक खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बेंगलुरु के होस्कोटे तालुक में Zepto के एक वेयरहाउस का निरीक्षण किया। अधिकारियों के मुताबिक, वहां खाद्य पदार्थों के रखरखाव और स्वच्छता से जुड़ी कई गंभीर कमियां सामने आईं। निरीक्षण के दौरान परिसर में गंदगी, फर्श पर जमा कचरा और खाद्य सामग्री के भंडारण से जुड़ी समस्याएं पाए जाने की बात सामने आई है। अधिकारियों ने परिस्थितियों को बेहद अस्वच्छ बताया और इसके बाद वेयरहाउस को सील कर दिया। लेबलिंग और स्टोरेज को लेकर भी सवाल जांच में केवल साफ-सफाई ही नहीं, बल्कि खाद्य उत्पादों की लेबलिंग और मैन्युफैक्चरिंग संबंधी जानकारी को लेकर भी आपत्तियां सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक, अधिकारियों ने कुछ उत्पादों में अनुचित लेबलिंग और मिसब्रांडिंग से जुड़े उल्लंघन पाए। खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत ऐसी कमियां उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं क्योंकि पैकेज पर सही जानकारी उपलब्ध होना जरूरी है। मुंबई में Blinkit के डार्क स्टोर पर FDA की कार्रवाई दूसरी ओर, महाराष्ट्र के Food and Drug Administration (FDA) ने मुंबई के मलाड वेस्ट स्थित Blinkit के एक डार्क स्टोर का खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिया। अधिकारियों के निरीक्षण में परिसर में कॉकरोच की मौजूदगी और अस्वच्छ परिस्थितियां पाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा कुछ खाद्य उत्पादों की वैधता और स्टोरेज को लेकर भी गंभीर सवाल उठे। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने क्या पाया? मुंबई के मामले में अधिकारियों ने डार्क स्टोर की स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर आपत्ति जताई। रिपोर्टों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान कॉकरोच का संक्रमण और खाद्य सामग्री के आसपास अस्वच्छ स्थिति पाई गई। ऐसी परिस्थितियां खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं। इसी वजह से FDA ने संबंधित खाद्य लाइसेंस को निलंबित करने की कार्रवाई की। क्विक-कॉमर्स कंपनियों पर बढ़ी निगरानी Zepto और Blinkit पर हुई ताजा कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब देश में क्विक-कॉमर्स कंपनियों के डार्क स्टोर्स और वेयरहाउस में खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर नियामक निगरानी बढ़ रही है। इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए किराना, पैकेज्ड फूड, डेयरी और अन्य खाद्य उत्पाद कुछ ही मिनटों में ग्राहकों तक पहुंचाए जाते हैं। ऐसे में स्टोरेज, तापमान, एक्सपायरी और स्वच्छता का पालन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। ग्राहकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला? ऑनलाइन ऑर्डर करते समय ग्राहक अक्सर केवल पैकेज और डिलीवरी पर ध्यान देते हैं, लेकिन खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता इस बात पर भी निर्भर करती है कि उसे वेयरहाउस या डार्क स्टोर में किस तरह रखा गया था। अगर खाद्य उत्पाद गलत तापमान पर रखे जाएं, एक्सपायरी के बाद भी स्टॉक में मौजूद हों या अस्वच्छ वातावरण में रखे जाएं, तो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से खाद्य सुरक्षा विभागों की ऐसी जांच को क्विक-कॉमर्स इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Zepto और Blinkit पर कार्रवाई से क्या संदेश? ताजा कार्रवाई से साफ है कि तेज डिलीवरी के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन भी कंपनियों के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है। वेयरहाउस और डार्क स्टोर में नियमों का पालन नहीं होने पर कंपनियों को लाइसेंस निलंबन या परिसर सील किए जाने जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। निष्कर्ष बेंगलुरु में Zepto के वेयरहाउस को खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों के चलते सील किए जाने और मुंबई में Blinkit के डार्क स्टोर का खाद्य लाइसेंस निलंबित किए जाने से क्विक-कॉमर्स कंपनियों में खाद्य सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक तरफ ग्राहक कुछ ही मिनटों में सामान पाने की सुविधा चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ खाद्य उत्पादों की स्वच्छता, सही स्टोरेज और एक्सपायरी की जांच भी उतनी ही जरूरी है। अब देखना होगा कि संबंधित कंपनियां इन कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाती हैं। Source: Karnataka Food Safety Department / Maharashtra FDA / Latest Reports जय राष्ट्र न्यूज़

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