प्रमुख खबरें

RBI की 19 अगस्त को आने वाली MPC मिनट्स पर बाजार की नजर, ब्याज दर और महंगाई के संकेतों का इंतजार

मुंबई: भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार की नजर अब 19 अगस्त 2026 को जारी होने वाली RBI Monetary Policy Committee (MPC) की बैठक की मिनट्स पर है। निवेशक यह समझने की कोशिश करेंगे कि केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों में ब्याज दर, महंगाई और मौद्रिक नीति को लेकर किस दिशा में आगे बढ़ सकता है। RBI ने हालिया बैठक में रेपो रेट 5.25% पर रखा RBI की 3 से 5 अगस्त को हुई MPC बैठक में समिति ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया था। MPC ने लगातार चौथी बैठक में दरों में बदलाव नहीं किया और अपना रुख Neutral बनाए रखा। अब बाजार की नजर मिनट्स पर इसलिए है क्योंकि इसमें MPC के छह सदस्यों के विचारों और भविष्य की नीति को लेकर उनके आकलन से आगे की दिशा के संकेत मिल सकते हैं। महंगाई पर भी निवेशकों की नजर जुलाई 2026 में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.45% हो गई, जो RBI के 4% मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर है। हालांकि यह अभी भी RBI की 2-6% सहनशीलता सीमा के भीतर है। खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी ने कुल CPI को ऊपर खींचा है। ऐसे में निवेशक यह देखना चाहेंगे कि MPC सदस्य महंगाई में हालिया तेजी को अस्थायी मानते हैं या आने वाले महीनों के लिए इसे बड़ा जोखिम समझते हैं। अगली ब्याज दर नीति के संकेत मिल सकते हैं हालिया बैठक में RBI ने रेपो रेट में बदलाव नहीं किया था। अब MPC मिनट्स से बाजार को यह संकेत मिलने की उम्मीद है कि मौजूदा परिस्थितियों में आगे दरों में कटौती, लंबे समय तक यथास्थिति या भविष्य में दरों में बढ़ोतरी की संभावना को लेकर सदस्यों की सोच क्या है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां आगे की नीति के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। रुपये और बॉन्ड बाजार पर भी असर MPC मिनट्स का असर केवल ब्याज दरों पर ही नहीं बल्कि रुपये और सरकारी बॉन्ड यील्ड पर भी पड़ सकता है। भारतीय रुपया हाल में डॉलर के मुकाबले दबाव में रहा है। RBI के हस्तक्षेप ने गिरावट को सीमित किया है, जबकि पश्चिम एशिया में तनाव और ऊंची तेल कीमतें रुपये के लिए चुनौती बनी हुई हैं। वहीं बॉन्ड बाजार में निवेशक यह देख रहे हैं कि RBI की नीति आगे चलकर liquidity और ब्याज दरों को किस तरह प्रभावित कर सकती है। अमेरिका-ईरान तनाव भी अहम फैक्टर बाजार के लिए RBI की नीति के साथ-साथ अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतें भी महत्वपूर्ण हैं। तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी भारत के आयात बिल और महंगाई दोनों पर दबाव डाल सकती है। इसी वजह से MPC मिनट्स में वैश्विक जोखिमों और महंगाई के बीच RBI के आकलन पर बाजार की खास नजर रहेगी। निवेशकों की नजर इन संकेतों पर 19 अगस्त को जारी होने वाली मिनट्स में बाजार मुख्य रूप से इन बातों पर ध्यान देगा: निष्कर्ष 19 अगस्त की RBI MPC मिनट्स बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत साबित हो सकती हैं। रेपो रेट फिलहाल 5.25% पर है, लेकिन जुलाई की 4.45% महंगाई और पश्चिम एशिया से जुड़े जोखिमों के बीच निवेशक यह जानना चाहते हैं कि RBI आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर कितना सतर्क रहेगा। Source: Reuters, RBI-related reports, NDTV Profit, Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

रुपये पर दबाव जारी, ₹95-₹95.50 प्रति डॉलर के दायरे में रहने का अनुमान; RBI और पश्चिम एशिया संकट पर बाजार की नजर

मुंबई: भारतीय रुपया इस सप्ताह भी डॉलर के मुकाबले दबाव में रह सकता है। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि रुपया ₹95 से ₹95.50 प्रति डॉलर के सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। RBI का हस्तक्षेप, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिका-ईरान तनाव आने वाले दिनों में रुपये की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे। RBI की नजर रुपये की चाल पर भारतीय रिजर्व बैंक रुपये में तेज गिरावट को रोकने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने पिछले सप्ताह सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर की बिक्री की, जिससे रुपया ₹95.50 प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे बना रहा। बाजार में यह माना जा रहा है कि RBI रुपये में अचानक और तेज कमजोरी को रोकने के लिए आगे भी हस्तक्षेप कर सकता है। अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान तनाव रुपये के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है और भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। भारत अपनी तेल जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में महंगा कच्चा तेल डॉलर की मांग बढ़ाकर रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। RBI की नीति और बाजार की नजर RBI की अगस्त मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा गया था। अब बाजार की नजर 19 अगस्त को जारी होने वाली MPC बैठक की मिनट्स पर है। निवेशक इससे RBI की आगे की ब्याज दर नीति और महंगाई को लेकर सोच का संकेत तलाशेंगे। NRI डिपॉजिट स्कीम भी चर्चा में RBI ने FCNR(B) डिपॉजिट से जुड़े डिस्काउंटेड फॉरेक्स स्वैप सुविधा की समयसीमा को 30 सितंबर से घटाकर 31 अगस्त कर दिया है। इस योजना के जरिए 50 अरब डॉलर से अधिक का प्रवाह आने के बाद RBI ने समयसीमा पहले खत्म करने का फैसला किया। हालांकि, इस बदलाव से निकट अवधि में रुपये के लिए कुछ दबाव पैदा होने की आशंका भी बाजार विशेषज्ञ जता रहे हैं। विदेशी मुद्रा भंडार से RBI को मजबूती भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 707 अरब डॉलर के चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इससे RBI को रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने के लिए पर्याप्त गुंजाइश मिलती है। आगे क्या देखेंगे निवेशक? आने वाले दिनों में बाजार की नजर मुख्य रूप से इन संकेतकों पर रहेगी: निष्कर्ष फिलहाल रुपये के लिए तस्वीर मिश्रित है। RBI का हस्तक्षेप और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार तेज गिरावट को रोकने में मदद कर रहे हैं, लेकिन महंगा तेल और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव रुपये पर दबाव बनाए हुए हैं। Reuters के अनुसार इस सप्ताह रुपया ₹95-₹95.50 प्रति डॉलर के दायरे में रह सकता है। Source: Reuters, Economic Times, RBI-related market reports जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

आज भी ₹100 के पार पेट्रोल, दिल्ली में ₹102.12 और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर

नई दिल्ली: देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर आज, 11 अगस्त 2026 को भी लोगों की नजर बनी हुई है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹95.20 प्रति लीटर बनी हुई है। मंगलवार को प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं हुआ। दिल्ली में पेट्रोल ₹102 के पार राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल लगातार ₹100 प्रति लीटर से ऊपर बना हुआ है। आज दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर पर बिक रहा है, जबकि डीजल की कीमत ₹95.20 प्रति लीटर है। उपलब्ध ताजा आंकड़ों के अनुसार दोनों दरों में आज कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹100 के पार पहुंचने के बाद वाहन चालकों पर ईंधन खर्च का दबाव बढ़ा है। रोजाना वाहन इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए पेट्रोल की कीमत में मामूली बदलाव भी मासिक बजट पर असर डाल सकता है। मुंबई में पेट्रोल ₹111 के पार मुंबई में ईंधन की कीमत दिल्ली की तुलना में और ज्यादा है। मंगलवार को मुंबई में पेट्रोल ₹111.18 प्रति लीटर और डीजल करीब ₹99.82 प्रति लीटर पर रहा। महानगरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अंतर मुख्य रूप से स्थानीय टैक्स और अन्य शुल्कों के कारण देखने को मिलता है। अन्य बड़े शहरों में भी ईंधन के दाम ऊंचे 11 अगस्त को देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग-अलग स्तर पर बनी हुई हैं। दिल्ली के अलावा मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और अन्य बड़े शहरों में भी वाहन चालकों की नजर रोजाना के ईंधन रेट पर है। शहरों के बीच कीमतों में अंतर राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले VAT और स्थानीय करों के कारण होता है। कच्चे तेल की कीमतों पर भी नजर ईंधन कीमतों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी चर्चा में है। मंगलवार की रिपोर्टों के मुताबिक Brent crude करीब 5% बढ़कर $87.72 प्रति बैरल तक पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में लगातार तेजी रहने पर आगे ईंधन बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। आज पेट्रोल-डीजल के दाम क्यों नहीं बदले? अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद 11 अगस्त को प्रमुख भारतीय शहरों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर रहीं। इसका मतलब यह है कि आज कच्चे तेल की तेजी का सीधा असर घरेलू पेट्रोल-डीजल के दामों में दिखाई नहीं दिया है। सुबह 6 बजे जारी होते हैं नए रेट भारत में सरकारी तेल कंपनियां आम तौर पर पेट्रोल और डीजल के दैनिक रेट सुबह 6 बजे अपडेट करती हैं। इसलिए वाहन चालकों के लिए रोजाना नए रेट की जांच करना महत्वपूर्ण है। अगर किसी शहर में टैक्स या अन्य स्थानीय स्तर पर बदलाव होता है तो संबंधित क्षेत्र में पेट्रोल-डीजल की कीमत अलग हो सकती है। आम आदमी की जेब पर असर पेट्रोल की कीमत ₹100 से ऊपर बने रहने का सीधा असर निजी वाहन इस्तेमाल करने वाले लोगों के बजट पर पड़ता है। लंबी दूरी की यात्रा, रोजाना ऑफिस आने-जाने और व्यावसायिक वाहनों के खर्च में भी ईंधन की कीमत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डीजल की कीमतें भी परिवहन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि माल ढुलाई और कई व्यावसायिक वाहनों में डीजल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। आगे क्या रहेगा नजर में? आने वाले दिनों में बाजार की नजर कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव, रुपये की डॉलर के मुकाबले स्थिति और तेल की वैश्विक आपूर्ति पर रहेगी। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो भारतीय ईंधन बाजार पर भी दबाव बना रह सकता है। हालांकि घरेलू पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों का अगला बदलाव तेल कंपनियों के दैनिक मूल्य निर्धारण पर निर्भर करेगा। निष्कर्ष 11 अगस्त 2026 को दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पर स्थिर है। मुंबई में पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹99.82 प्रति लीटर के आसपास है। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent crude की कीमतों में तेजी के बीच घरेलू ईंधन दरों में आज बड़ा बदलाव नहीं हुआ। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। Source: Business Today / NDTV Profit / Indian fuel price data जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

रुपया शुरुआती कारोबार में 8 पैसे कमजोर होकर ₹95.38 प्रति डॉलर पर पहुंचा, कच्चे तेल की कीमतों से दबाव

मुंबई: भारतीय रुपया मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 8 पैसे कमजोर होकर ₹95.38 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। वैश्विक बाजारों में जारी अनिश्चितता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच रुपये पर दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में रुपये पर दबाव इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया कमजोर स्तर पर खुला और शुरुआती कारोबार में ₹95.38 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में रुपया करीब ₹95.30 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। मंगलवार की शुरुआत में रुपये की कमजोरी के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक बताए जा रहे हैं। West Asia संकट का बाजार पर असर West Asia में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक निवेशकों की चिंता बनी हुई है। क्षेत्र में शांति वार्ता को लेकर स्पष्ट प्रगति नहीं होने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इससे देश का आयात बिल बढ़ने और डॉलर की मांग बढ़ने की संभावना रहती है, जिसका दबाव रुपये पर पड़ता है। महंगा कच्चा तेल बना बड़ी चिंता अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ाया है। रिपोर्टों के मुताबिक Brent crude में भी तेजी देखने को मिली है और बाजार की नजर West Asia से जुड़े घटनाक्रम पर बनी हुई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर देश को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। शेयर बाजार में कमजोरी का भी असर रुपये पर दबाव का एक कारण घरेलू शेयर बाजार में शुरुआती कमजोरी भी रही। मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक शुरुआती कारोबार में दबाव में नजर आए। Reuters के अनुसार शुरुआती कारोबार में Nifty करीब 0.43% और Sensex करीब 0.48% नीचे थे। वित्तीय और बैंकिंग शेयरों में कमजोरी ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। RBI की भूमिका से बड़ी गिरावट पर रोक रुपये में कमजोरी के बावजूद बाजार में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की संभावित दखलंदाजी पर भी नजर बनी हुई है। बाजार सूत्रों के मुताबिक सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर की बिक्री से रुपये को कुछ समर्थन मिला, जिससे शुरुआती गिरावट सीमित रही। विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी रुपये की दिशा के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। महंगाई पर भी पड़ सकता है असर रुपये में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर आने वाले समय में महंगाई पर भी पड़ सकता है। अगर आयातित तेल महंगा होता है, तो परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ सकती है। इसका असर पेट्रोलियम उत्पादों के अलावा कई अन्य वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से पड़ सकता है। निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों पर अब बाजार की नजर कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर है। खासतौर पर West Asia संकट, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां रुपये की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। इसके अलावा अमेरिकी महंगाई के आंकड़े और भारत के आगामी आर्थिक आंकड़े भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। रुपये के लिए आगे की चुनौती रुपया पिछले कुछ समय से डॉलर के मुकाबले कमजोर स्तरों के आसपास कारोबार कर रहा है। सोमवार को भी शुरुआती कारोबार में रुपया 8 पैसे कमजोर होकर ₹95.25 प्रति डॉलर पर पहुंचा था। ऐसे में अगर कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आती है या वैश्विक तनाव बढ़ता है, तो रुपये पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है। वहीं RBI की कार्रवाई और विदेशी पूंजी प्रवाह रुपये को समर्थन दे सकते हैं। निष्कर्ष 11 अगस्त 2026 को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया 8 पैसे कमजोर होकर ₹95.38 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। West Asia संकट के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी ने रुपये पर दबाव बढ़ाया। हालांकि RBI की संभावित दखलंदाजी और विदेशी पूंजी प्रवाह से गिरावट को सीमित करने में मदद मिल रही है। आने वाले कारोबार में कच्चे तेल, डॉलर इंडेक्स, विदेशी निवेश और West Asia से जुड़ी खबरें रुपये की दिशा के लिए सबसे अहम संकेतक रहेंगे। Source: PTI / Reuters / Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

बिजनेस | Gold Rate Today: 8 अगस्त को सोने के भाव में तेजी, 18K, 22K और 24K गोल्ड के रेट पर निवेशकों की नजर

नई दिल्ली: सोने की कीमतों में शनिवार, 8 अगस्त 2026 को तेजी देखने को मिली। देश में 24 कैरेट सोने का औसत भाव करीब ₹14,970 प्रति ग्राम, 22 कैरेट सोना करीब ₹13,712 प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोना करीब ₹11,227 प्रति ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, शहर और स्थानीय बाजार के अनुसार कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिल सकता है। सोने की कीमतों में हालिया तेजी के बीच निवेशकों और ज्वेलरी खरीदारों की नजर घरेलू बुलियन मार्केट के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों और रुपये-डॉलर की चाल पर बनी हुई है। आज 18K, 22K और 24K सोने का भाव क्या है? 8 अगस्त को राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध रिटेल गोल्ड रेट के अनुसार 24K सोना लगभग ₹14,970 प्रति ग्राम, 22K सोना ₹13,712 प्रति ग्राम और 18K सोना करीब ₹11,227 प्रति ग्राम रहा। ये दरें प्रति ग्राम हैं और ज्वेलरी खरीदते समय अंतिम कीमत इससे अलग हो सकती है। 24 कैरेट सोना सबसे अधिक शुद्धता वाला होता है, जबकि 22 कैरेट का इस्तेमाल पारंपरिक भारतीय आभूषणों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। 18 कैरेट सोना आमतौर पर डायमंड, व्हाइट गोल्ड और रोज गोल्ड जैसे आभूषणों में इस्तेमाल होता है। देश के अलग-अलग शहरों में क्यों बदलता है सोने का भाव? सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत लगभग समान आधार देती है, लेकिन भारत के अलग-अलग शहरों में अंतिम भाव अलग हो सकता है। इसके पीछे स्थानीय मांग, परिवहन और इंश्योरेंस लागत, ज्वेलर्स के मार्जिन और स्थानीय बाजार की परिस्थितियां प्रमुख कारण हैं। उदाहरण के तौर पर 8 अगस्त को अमरावती में 24K सोने का भाव ₹15,235 प्रति ग्राम, 22K ₹13,965 प्रति ग्राम और 18K ₹11,426 प्रति ग्राम दर्ज किया गया। इससे साफ है कि शहर के हिसाब से सोने की कीमत में अंतर हो सकता है। दिल्ली में आज का गोल्ड रेट दिल्ली में 8 अगस्त के लिए 22K और 24K सोने की कीमतों को लेकर ताजा बाजार आंकड़े उपलब्ध हैं। Forbes Advisor के अनुसार दिल्ली के रेट को दिन के दौरान अपडेट किया गया और शहर में 22K तथा 24K सोने के भाव की अलग-अलग निगरानी की जा रही है। दिल्ली जैसे बड़े बुलियन बाजार में अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमत, रुपये की चाल और स्थानीय मांग का असर रिटेल कीमतों पर पड़ता है। सोने की कीमतों में तेजी के पीछे क्या कारण हैं? सोने की कीमत कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों से प्रभावित होती है। इनमें अंतरराष्ट्रीय बुलियन कीमतें, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, ब्याज दरों की उम्मीदें, महंगाई, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग शामिल हैं। जब वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक अक्सर सोने को अपेक्षाकृत सुरक्षित परिसंपत्ति के रूप में देखते हैं। इससे मांग बढ़ने पर कीमतों को समर्थन मिल सकता है। अगस्त में सोने ने पकड़ी तेजी NDTV के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अगस्त की शुरुआत से सोने के भाव में बढ़त दर्ज की गई है। 1 अगस्त को 24K सोना करीब ₹14,306 प्रति ग्राम था, जो 7 अगस्त तक बढ़कर ₹14,868 प्रति ग्राम पहुंच गया। इसी अवधि में 22K सोना ₹13,106 से बढ़कर ₹13,617 और 18K सोना ₹10,730 से बढ़कर ₹11,148 प्रति ग्राम हुआ। इससे अगस्त के शुरुआती दिनों में सोने के बाजार में सकारात्मक रुझान दिखाई देता है। ज्वेलरी खरीदते समय सिर्फ गोल्ड रेट न देखें ज्वेलरी खरीदते समय केवल 18K, 22K या 24K के प्रति ग्राम भाव को देखना पर्याप्त नहीं है। अंतिम बिल में मेकिंग चार्ज, वेस्टेज/डिजाइन चार्ज और GST जैसी लागतें भी शामिल हो सकती हैं। इसी वजह से ऑनलाइन दिखने वाला गोल्ड रेट और ज्वेलरी दुकान पर मिलने वाली अंतिम कीमत अलग हो सकती है। खरीदारों को खरीदारी से पहले प्रति ग्राम रेट और सभी अतिरिक्त शुल्क की जानकारी लेनी चाहिए। हॉलमार्क और HUID जरूर जांचें सोने की ज्वेलरी खरीदते समय BIS हॉलमार्क, शुद्धता का निशान जैसे 22K 916 या 18K 750 और HUID की जांच करना महत्वपूर्ण है। इससे खरीदार को सोने की घोषित शुद्धता की पुष्टि करने में मदद मिलती है। निवेशकों की नजर बुलियन मार्केट पर सोने में हालिया तेजी के बीच निवेशकों की नजर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट पर बनी हुई है। सोने की कीमतों में आगे की दिशा तय करने में ग्लोबल मार्केट, रुपये की चाल, ब्याज दरों और आर्थिक परिस्थितियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। हालांकि, केवल एक दिन की कीमत देखकर निवेश का फैसला करना उचित नहीं माना जाता। निवेशकों को अपने निवेश लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए। निष्कर्ष 8 अगस्त 2026 को सोने के भाव में तेजी का रुख बना हुआ है और 18K, 22K तथा 24K गोल्ड की कीमतों पर खरीदारों और निवेशकों की नजर है। अगस्त की शुरुआत से घरेलू सोने की कीमतों में बढ़त दर्ज हुई है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार, रुपये की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां सोने की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। Source: NDTV Gold Rate, Forbes Advisor India, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

जुलाई में FPI निवेश ₹42,000 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा, बाजार की नजर अब कॉर्पोरेट नतीजों पर

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (Foreign Portfolio Investors – FPI) का भरोसा लगातार मजबूत होता दिख रहा है। जुलाई 2026 में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) ₹42,000 करोड़ के पार पहुंच गया है, जो इस वर्ष का सबसे बड़ा मासिक निवेश माना जा रहा है। मजबूत आर्थिक संकेतकों, स्थिर घरेलू मांग और वैश्विक निवेशकों के बढ़ते विश्वास ने भारतीय बाजार को आकर्षक बनाया है। (timesofindia.indiatimes.com) विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार विदेशी निवेश से बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। हालांकि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अब Q1 (पहली तिमाही) के कॉर्पोरेट नतीजों पर रहेगी, जो बाजार की अगली दिशा तय कर सकते हैं। क्यों बढ़ा विदेशी निवेश? विश्लेषकों का मानना है कि FPI निवेश बढ़ने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं— इन कारणों से विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। अब कॉर्पोरेट नतीजों पर नजर जुलाई के अंतिम सप्ताह में कई बड़ी सूचीबद्ध कंपनियां अपने पहली तिमाही (Q1 FY27) के वित्तीय परिणाम घोषित करेंगी। निवेशक विशेष रूप से इन क्षेत्रों के प्रदर्शन पर नजर रख रहे हैं— यदि कंपनियों के नतीजे बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहते हैं, तो निवेशकों का विश्वास और मजबूत हो सकता है। बाजार के लिए आगे क्या? बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेश का मजबूत प्रवाह भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि वैश्विक ब्याज दरों, कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाक्रमों पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी। निवेशकों के लिए सलाह विशेषज्ञ निवेशकों को केवल अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के आधार पर निर्णय लेने के बजाय कंपनियों के मूलभूत प्रदर्शन, आय वृद्धि और दीर्घकालिक संभावनाओं को ध्यान में रखकर निवेश करने की सलाह दे रहे हैं। निष्कर्ष जुलाई में ₹42,000 करोड़ से अधिक का विदेशी निवेश भारतीय अर्थव्यवस्था और पूंजी बाजार में वैश्विक भरोसे का संकेत है। अब बाजार की अगली चाल काफी हद तक Q1 कॉर्पोरेट नतीजों और कंपनियों के भविष्य के मार्गदर्शन पर निर्भर करेगी। Source: National Securities Depository Limited (NSDL) | Times of India | Market Experts जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

महंगाई में नरमी और स्थिर ईंधन कीमतों से बाजार में सकारात्मक संकेत

जय राष्ट्र न्यूज़ पर ताजा व्यापार अपडेट दिनांक: 14 जून 2026 मुख्य समाचार मुंबई: देश में महंगाई दर में नरमी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता ने बाजार में सकारात्मक माहौल पैदा किया है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में अपेक्षाकृत नियंत्रण और ऊर्जा लागत में स्थिरता से अर्थव्यवस्था को राहत मिल रही है। इसका असर शेयर बाजार, निवेश गतिविधियों और उपभोक्ता विश्वास पर भी दिखाई दे रहा है। हाल के आर्थिक संकेतकों ने यह उम्मीद बढ़ाई है कि आने वाले महीनों में आर्थिक गतिविधियां और मजबूत हो सकती हैं। निवेशक भी अब केंद्रीय बैंक की आगामी नीतियों और विकास से जुड़े आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं। निवेशकों का बढ़ा भरोसा मुंबई: महंगाई के दबाव में कमी आने से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार स्थिर आर्थिक संकेतक शेयर बाजार के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करते हैं और निवेशकों को दीर्घकालिक निवेश के लिए प्रोत्साहित करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि महंगाई नियंत्रित दायरे में बनी रहती है तो वित्तीय बाजारों को अतिरिक्त मजबूती मिल सकती है। उपभोक्ताओं को राहत नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्थिरता का सीधा लाभ आम उपभोक्ताओं को मिल रहा है। परिवहन लागत में अचानक बढ़ोतरी न होने से कई वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर दबाव कम बना हुआ है। आर्थिक जानकारों के अनुसार इससे घरेलू खर्च क्षमता बेहतर होती है और उपभोक्ता मांग को समर्थन मिलता है। RBI की अगली नीति बैठक पर नजर मुंबई: बाजार की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आगामी मौद्रिक नीति बैठक पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई के ताजा रुझान केंद्रीय बैंक के निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं। यदि मूल्य स्थिरता बनी रहती है तो आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने वाले कदमों पर चर्चा तेज हो सकती है। उद्योग और व्यापार जगत में उत्साह नई दिल्ली: उद्योग जगत ने भी महंगाई में नरमी का स्वागत किया है। कारोबारियों का कहना है कि लागत पर नियंत्रण और बाजार में स्थिरता से व्यापारिक गतिविधियों को गति मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार विनिर्माण, उपभोक्ता वस्तु और सेवा क्षेत्र को इसका लाभ मिलने की संभावना है। वैश्विक परिस्थितियों पर भी नजर मुंबई: हालांकि घरेलू आर्थिक संकेतक सकारात्मक दिखाई दे रहे हैं, लेकिन वैश्विक बाजारों में होने वाले उतार-चढ़ाव और कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें अब भी महत्वपूर्ण कारक बनी हुई हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती बनाए रखने के लिए घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर संतुलन आवश्यक होगा। निष्कर्ष मुंबई: महंगाई में नरमी और ईंधन कीमतों की स्थिरता ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, उपभोक्ताओं को राहत मिली है और बाजार में आशावाद का माहौल बना है। आने वाले समय में RBI की नीतियां और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां इस सकारात्मक रुझान की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। जय राष्ट्र न्यूज़ के साथ जुड़े रहें व्यापार, अर्थव्यवस्था और बाजार की हर बड़ी खबर के लिए।

आगे और पढ़ें
Translate »