मुंबई में 14 फीट से ऊंची झोपड़ियों पर BMC की कार्रवाई! 39 हजार से ज्यादा निर्माण रडार पर
मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने शहर की झोपड़पट्टियों में 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाले अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है। यह कार्रवाई 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक चलेगी। BMC के मुताबिक पूरे मुंबई में ऐसे 39,111 ढांचे चिन्हित किए गए हैं। कार्रवाई के ऐलान के बाद झोपड़ीवासियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों की ओर से विरोध भी शुरू हो गया है। 1 अक्टूबर से शुरू होगा तीन महीने का अभियान BMC ने 19 सितंबर को घोषणा की कि झोपड़पट्टी क्षेत्रों में किए गए अनधिकृत अतिरिक्त निर्माण और 14 फीट या उससे अधिक ऊंचे ढांचों के खिलाफ विशेष कार्रवाई शुरू की जाएगी। महानगरपालिका ने प्रभावित लोगों से अपील की है कि वे अनधिकृत हिस्से खुद हटा लें। ऐसा नहीं करने पर नागरिक निकाय की टीम कार्रवाई करेगी। यह अभियान 31 दिसंबर तक जारी रहने वाला है। 39,111 निर्माणों की पहचान BMC के आंकड़ों के मुताबिक शहर और उपनगरों में कुल 39,111 ऐसी झोपड़ी संरचनाएं चिन्हित की गई हैं जिनकी ऊंचाई 14 फीट या उससे अधिक है। इनमें लगभग 3,348 संरचनाएं मुंबई शहर, 4,536 पश्चिमी उपनगरों और 31,227 पूर्वी उपनगरों में स्थित हैं। BMC के अनुसार मुंबई में कुल करीब 2.23 लाख झोपड़ी संरचनाएं दर्ज हैं। 14 फीट की सीमा पर उठे सवाल BMC के फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठा है कि कार्रवाई के लिए 14 फीट की ऊंचाई को ही आधार क्यों बनाया गया। 24 सितंबर को BMC की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में अलग-अलग दलों के पार्षदों ने प्रशासन से इस सीमा का आधार स्पष्ट करने को कहा। कई सदस्यों ने यह भी सवाल किया कि इतना बड़ा फैसला लेने से पहले निर्वाचित प्रतिनिधियों से चर्चा क्यों नहीं की गई। पुनर्वास के बिना कार्रवाई का विरोध समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि इससे हजारों परिवारों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने मांग की कि किसी भी तरह की तोड़फोड़ से पहले प्रभावित लोगों के पुनर्वास की स्पष्ट योजना बनाई जाए। कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड समेत कुछ विपक्षी नेताओं ने भी “पहले पुनर्वास, फिर कार्रवाई” की मांग की है। ये संबंधित नेताओं के राजनीतिक रुख हैं। BJP पार्षद ने भी नोटिस रोकने की मांग की BMC के फैसले पर विरोध केवल विपक्ष तक सीमित नहीं है। BJP पार्षद और BMC हाउस के नेता गणेश खनकर ने भी नगर आयुक्त अश्विनी भिड़े को पत्र लिखकर कार्रवाई और नोटिस प्रक्रिया रोकने की मांग की। उन्होंने कहा कि झोपड़पट्टियों में बड़ी आबादी रहती है और किसी भी कार्रवाई से पहले उनके पुनर्वास व वैकल्पिक आवास को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए। कानूनी नोटिस भी भेजा गया गोवंडी के New Sangam Welfare Society की ओर से BMC कमिश्नर, SRA, MMRDA और महाराष्ट्र सरकार के हाउसिंग विभाग को कानूनी नोटिस भेजा गया है। नोटिस में कार्रवाई की प्रक्रिया और प्रभावित निवासियों के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। रईस शेख का दावा है कि इस अभियान से लगभग 34 हजार निवासियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। यह संख्या उनका दावा है, BMC का आधिकारिक प्रभावित-जनसंख्या आंकड़ा नहीं। कुछ इलाकों में नोटिस भेजे जाने शुरू मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार BMC ने कुछ झोपड़ी धारकों को कार्रवाई से जुड़े नोटिस जारी करना भी शुरू कर दिया है। इन रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कुछ कोलीवाड़ा और गांवठाण क्षेत्रों में भी नोटिस मिलने से स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ी है। क्यों शुरू की गई कार्रवाई? BMC का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य झोपड़पट्टी क्षेत्रों में किए गए अनधिकृत अतिरिक्त निर्माणों को हटाना और सुरक्षा जोखिम कम करना है। हाल में कुर्ला समेत कुछ पहाड़ी और भूस्खलन-प्रभावित इलाकों में जोखिम सामने आने के बाद प्रशासन ने ऐसी ऊंची और अनधिकृत संरचनाओं पर कार्रवाई की जरूरत बताई है। कार्रवाई से पहले बढ़ा सियासी और कानूनी दबाव अभियान शुरू होने में कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन इससे पहले ही BMC पर राजनीतिक और कानूनी दबाव बढ़ गया है। जहां महानगरपालिका इसे सुरक्षा और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई बता रही है, वहीं कई पार्षद और नेता पुनर्वास, 14 फीट की सीमा के आधार और प्रभावित परिवारों के अधिकारों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि BMC 1 अक्टूबर से तय योजना के मुताबिक अभियान शुरू करती है या विरोध के बाद इसमें कोई बदलाव किया जाता है। source – The Indian Express / Hindustan Times / Times of India / Mid-Day जय राष्ट्र न्यूज़

