‘सुगम परिवहन’ पर विवाद, पुरानी बसों को लेकर उठे सवाल! नई रंगत में पुरानी बसें चलाने का आरोप
भोपाल: मध्य प्रदेश में करीब 21 साल बाद शुरू हुई मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा लॉन्च होने के एक दिन बाद ही विवादों में आ गई है। 25 सितंबर को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल से 351 बसों को हरी झंडी दिखाई थी। इनमें 180 इलेक्ट्रिक बसें हैं, जबकि 171 ऐसी बसें हैं जो पहले से अलग-अलग शहरों में सिटी बस सेवा के तहत चल रही थीं। इन्हीं पुरानी बसों को नए रंग-रूप में शामिल किए जाने को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। वीडियो वायरल होने के बाद शुरू हुआ विवाद सेवा शुरू होने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ बसों के वीडियो सामने आए। इनमें बसों पर लगाई गई नई रंगीन रेडियम स्ट्रिप उखड़ती दिखाई दे रही है, जबकि कुछ वीडियो में बसों के अंदरूनी हिस्सों की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए। इसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या पहले से चल रही पुरानी सिटी बसों को केवल रंग-रोगन कर नई योजना के तहत पेश किया गया है। 351 में से 171 बसें पहले से थीं संचालन में रिपोर्ट्स के अनुसार लॉन्च की गई 351 बसों में 180 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें पीएम ई-बस सेवा से जुड़ी हैं, जबकि बाकी 171 बसें पहले से शहरी क्षेत्रों में संचालित सिटी बसें हैं। नई व्यवस्था में इन बसों को एमपी यात्री परिवहन कंपनी के तहत लाकर एक समान branding और रंग देने का काम किया गया है। कांग्रेस ने बसों की हालत पर उठाए सवाल मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर बस की बाहरी परत उखड़ने का वीडियो शेयर करते हुए सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पुरानी बसों को नया रंग देकर योजना के तहत उतारा गया है और उनकी वास्तविक स्थिति, फिटनेस तथा यात्रियों की सुरक्षा की जांच होनी चाहिए। ये कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं; उपलब्ध रिपोर्ट्स में ऐसा कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है कि सभी पुरानी बसें असुरक्षित या अनफिट हैं। बसों की उम्र और मेंटेनेंस भी चर्चा में कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि योजना में शामिल पुरानी डीजल बसों में कई लगभग 7 से 8 वर्ष पुरानी हैं और पहले भी उनके खराब होने या रखरखाव से जुड़ी शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ बसों की सीट, हैंडल, ड्राइवर एरिया, CCTV और पैनिक बटन जैसी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि प्रत्येक बस की तकनीकी फिटनेस से जुड़ा विस्तृत सरकारी ऑडिट सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। सरकार का उद्देश्य क्या है? राज्य सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का उद्देश्य गांवों और शहरों के बीच सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना है। पहले चरण में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड को इंटरसिटी और इंट्रासिटी बस सेवाओं से जोड़ा गया है। सरकार का लक्ष्य पहले साल करीब 1,500 और 2031 तक 15 हजार बसों का नेटवर्क तैयार करना है। बसों में GPS और पैनिक बटन की भी योजना सरकार के अनुसार नई व्यवस्था में बसों की निगरानी के लिए GPS, लाइव लोकेशन ट्रैकिंग, CCTV और पैनिक बटन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। एक Command and Control Centre के जरिए बसों की लोकेशन और समय पर भी निगरानी रखने की योजना है। पुरानी बसों को नया रंग क्यों दिया गया? रिपोर्ट्स के मुताबिक पुरानी सिटी बसें पहले अलग-अलग रंग और स्थानीय व्यवस्थाओं के तहत संचालित होती थीं। नई सेवा में उन्हें एक समान पहचान देने के लिए नया रंग और branding दी गई। भोपाल स्मार्ट सिटी से जुड़ी अधिकारी अंजू अरुण कुमार के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया कि बसों को एकरूपता देने के लिए संबंधित कंपनी ने रंग और branding का काम किया है। अब फिटनेस और सुरक्षा पर जवाब का इंतजार विवाद का मुख्य सवाल यह नहीं है कि कुछ बसें पहले से चल रही थीं, बल्कि यह है कि नई व्यवस्था में शामिल करने से पहले उनकी fitness, maintenance और safety standards की जांच किस स्तर पर की गई। फिलहाल वायरल वीडियो और कांग्रेस के आरोपों के बाद यह मुद्दा चर्चा में है। सरकार की ओर से पुरानी बसों की तकनीकी स्थिति पर विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही तस्वीर और साफ होगी। source – Akashvani News / Dainik Jagran / Free Press Journal / Hindusthan Samachar जय राष्ट्र न्यूज़

