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रुपये को संभालने के लिए RBI का बड़ा कदम, सरकारी तेल कंपनियों के लिए स्पेशल डॉलर विंडो; फॉरेक्स सट्टेबाजी पर भी सख्ती

मुंबई: भारतीय रुपये पर लगातार बने दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 10 अक्टूबर 2026 को कई अहम कदमों की घोषणा की है। केंद्रीय बैंक ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम की दैनिक डॉलर जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेष डॉलर विंडो शुरू करने का फैसला किया है। इसके साथ ही रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन के नियम भी सख्त किए गए हैं, ताकि डॉलर की सट्टा मांग और जरूरत से ज्यादा हेजिंग पर अंकुश लगाया जा सके। 12 अक्टूबर से शुरू होगी स्पेशल डॉलर विंडो RBI की नई सुविधा 12 अक्टूबर से प्रभावी होगी। इसके तहत तीनों सरकारी तेल विपणन कंपनियों की दैनिक डॉलर जरूरत नामित बैंकों के माध्यम से सीधे केंद्रीय बैंक पूरी करेगा। यह व्यवस्था बाजार की परिस्थितियों के आधार पर अगले आदेश तक जारी रहेगी। इस कदम का उद्देश्य तेल कंपनियों की डॉलर खरीद के कारण स्पॉट फॉरेक्स बाजार पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम करना है। किन कंपनियों को मिलेगा फायदा? RBI की इस विशेष सुविधा का लाभ फिलहाल तीन सरकारी तेल कंपनियों को मिलेगा: इन कंपनियों को कच्चे तेल के आयात का भुगतान करने के लिए बड़ी मात्रा में अमेरिकी डॉलर की जरूरत होती है। डॉलर की मांग बढ़ने पर रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। स्पॉट फॉरेक्स बाजार पर कम हो सकता है दबाव आमतौर पर तेल कंपनियां अपनी डॉलर जरूरतों को विदेशी मुद्रा बाजार से पूरा करती हैं। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने पर आयात बिल बढ़ता है और कंपनियों को अधिक डॉलर खरीदने पड़ते हैं। RBI की नई व्यवस्था से इन तीनों कंपनियों की डॉलर मांग का एक बड़ा हिस्सा सीधे केंद्रीय बैंक के जरिए पूरा होगा। इससे खुले बाजार में डॉलर की अतिरिक्त मांग कम करने और रुपये में उतार-चढ़ाव नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। डॉलर के मुकाबले रुपये पर क्यों बढ़ा दबाव? 2026 में अब तक भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 प्रतिशत से अधिक कमजोर हो चुका है। इसके पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, विदेशी निवेशकों की निकासी और आयातकों की लगातार डॉलर मांग जैसे कारक बताए जा रहे हैं। हाल के दिनों में रुपया 97 रुपये प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब पहुंच गया था। इससे आयात की लागत और विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ीं। फॉरेक्स डेरिवेटिव के नियम भी सख्त रुपये को सहारा देने के लिए RBI ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव बाजार के नियमों में भी बदलाव किए हैं। इन कदमों में रद्द किए गए कॉन्ट्रैक्ट को दोबारा बुक करने पर प्रतिबंध और बिना वास्तविक विदेशी मुद्रा जोखिम का प्रमाण दिए जाने वाले डेरिवेटिव सौदों की सीमा घटाना शामिल है। केंद्रीय बैंक का उद्देश्य वास्तविक कारोबारी जरूरतों के लिए हेजिंग की सुविधा बनाए रखते हुए सट्टेबाजी से पैदा होने वाले अतिरिक्त दबाव को सीमित करना है। 100 मिलियन डॉलर की सीमा घटाकर 5 मिलियन डॉलर रिपोर्टों के अनुसार, कंपनियां अब वास्तविक विदेशी मुद्रा जोखिम का प्रमाण दिए बिना अधिकतम 5 मिलियन डॉलर तक की फॉरेक्स डेरिवेटिव पोजिशन ले सकेंगी। पहले यह सीमा 100 मिलियन डॉलर थी। इस बदलाव से बिना अंतर्निहित कारोबारी जरूरत के बड़े डेरिवेटिव सौदे करना अधिक सीमित होगा। RBI को उम्मीद है कि इससे रुपये के खिलाफ सट्टा पोजिशन बनाने की गुंजाइश कम होगी। बड़े विदेशी मुद्रा सौदों पर 20 प्रतिशत रिजर्व की शर्त RBI ने कुछ बड़े विदेशी मुद्रा लेनदेन के लिए 20 प्रतिशत नकद रिजर्व की आवश्यकता भी लागू की है। इस कदम का उद्देश्य आक्रामक डॉलर खरीद और सट्टा कारोबार की लागत बढ़ाना है। हालांकि, इस प्रावधान का वास्तविक असर संबंधित नियमों के दायरे और बाजार में कारोबार करने वाली संस्थाओं की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। आयातकों की हेजिंग में तेज बढ़ोतरी रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में भारतीय आयातकों ने करीब 77 अरब डॉलर की हेजिंग की, जो एक साल पहले की तुलना में 80 प्रतिशत से अधिक थी। वहीं, निर्यातकों की हेजिंग लगभग 41 अरब डॉलर रही। आयातकों और निर्यातकों की हेजिंग में इस अंतर को विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग बढ़ने और रुपये पर दबाव के प्रमुख कारकों में से एक माना जा रहा है। कच्चे तेल की कीमतें बनीं बड़ी चिंता भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने से देश का आयात बिल बढ़ जाता है और डॉलर की अधिक जरूरत पड़ती है। मध्य पूर्व में तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत हाल में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थी। महंगा तेल भारत के व्यापार संतुलन और रुपये, दोनों के लिए चुनौती पैदा कर सकता है। RBI पहले भी कर चुका है डॉलर बाजार में हस्तक्षेप रुपये को समर्थन देने के लिए RBI पिछले कुछ हफ्तों में स्पॉट डॉलर बिक्री और विदेशी मुद्रा स्वैप जैसे उपायों का इस्तेमाल करता रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, सितंबर में अपने उच्च स्तर से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 50 अरब डॉलर घटकर 734.6 अरब डॉलर रह गया। विदेशी मुद्रा बाजार में केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप को इस गिरावट के संभावित कारणों में शामिल किया गया है। रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद भी दबाव बरकरार 7 अक्टूबर को RBI ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, यह लगभग चार वर्षों में पहली दर वृद्धि थी। हालांकि, ब्याज दर बढ़ाने के बावजूद रुपये पर दबाव पूरी तरह कम नहीं हुआ। इसके बाद केंद्रीय बैंक ने डॉलर की मांग और विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव गतिविधियों को सीधे प्रभावित करने वाले उपायों की घोषणा की। क्या अब मजबूत होगा रुपया? विश्लेषकों के मुताबिक, RBI के नए कदम निकट अवधि में डॉलर की मांग को नियंत्रित करने और रुपये में तेज उतार-चढ़ाव कम करने में मदद कर सकते हैं। सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर जरूरतों को सीधे पूरा करने से स्पॉट बाजार पर दबाव भी घट सकता है। हालांकि, रुपये की दीर्घकालिक दिशा कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेश के प्रवाह, वैश्विक ब्याज दरों और भारत के व्यापार संतुलन जैसे कारकों पर निर्भर करेगी। इसलिए इन उपायों से रुपये में तत्काल और स्थायी मजबूती की…

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रुपये पर फिर दबाव, डॉलर के मुकाबले 96 के करीब पहुंचने की आशंका; कच्चे तेल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का असर

मुंबई: भारतीय रुपया एक बार फिर दबाव में है और 1 अक्टूबर 2026 के कारोबार में डॉलर के मुकाबले 95.96 से 95.98 के आसपास खुलने का अनुमान जताया गया। एक दिन पहले रुपया 95.83 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। ऊंची कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेजी और मजबूत डॉलर रुपये पर दबाव बढ़ा रहे हैं। बाजार की नजर इस बात पर भी है कि Reserve Bank of India यानी RBI 96 के स्तर के आसपास कितनी मजबूती से हस्तक्षेप करता है। 96 के स्तर के करीब पहुंच सकता है रुपया फॉरेक्स बाजार के अनुमान के अनुसार गुरुवार को रुपया 95.96 से 95.98 प्रति डॉलर के दायरे में खुल सकता है। बुधवार को भारतीय मुद्रा ने कुछ सुधार दिखाते हुए 95.83 पर कारोबार बंद किया था, लेकिन वैश्विक संकेत फिर इसके खिलाफ जाते दिखाई दे रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतें बनी सबसे बड़ी चिंता भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर डॉलर की मांग और रुपये पर पड़ता है। Brent crude में बुधवार को करीब 2 फीसदी की तेजी आई, जबकि सितंबर में तेल की कीमतों में लगभग 14 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऊंचा तेल आयात बिल रुपये पर अतिरिक्त दबाव पैदा करता है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल अमेरिका की 10 साल की Treasury yield 2007 के बाद के उच्च स्तरों के करीब पहुंच गई है। ऊंची अमेरिकी यील्ड से डॉलर आधारित assets निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं, जिससे emerging markets की currencies पर दबाव बढ़ता है। डॉलर इंडेक्स भी तीन महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। Fed से राहत की उम्मीद भी रुपये को नहीं संभाल पा रही अमेरिकी Federal Reserve द्वारा अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना पिछले एक सप्ताह में घटी है। इसके बावजूद रुपये को ज्यादा राहत नहीं मिली क्योंकि बाजार का फोकस फिलहाल तेल की कीमतों और लंबी अवधि की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर अधिक है। 29 सितंबर को 96 के पार गया था रुपया भारतीय मुद्रा हाल ही में 96 प्रति डॉलर का स्तर पार कर चुकी है। 29 सितंबर को रुपया कारोबार के दौरान 96.1450 प्रति डॉलर तक गिरा था, जो लगभग दो महीने का निचला स्तर था। बाद में RBI के संभावित हस्तक्षेप से नुकसान कुछ कम हुआ। RBI के हस्तक्षेप पर बाजार की नजर मार्केट डीलर्स के अनुसार सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर की बिक्री को RBI के संभावित हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है। हाल के सत्रों में 96 के आसपास रुपये की गिरावट सीमित होती दिखाई दी है, जिससे बाजार में धारणा बनी है कि केंद्रीय बैंक इस स्तर पर अत्यधिक उतार-चढ़ाव नहीं चाहता। हालांकि RBI आमतौर पर किसी निश्चित exchange-rate level को आधिकारिक लक्ष्य घोषित नहीं करता। एक दिन पहले रुपये ने की थी वापसी 30 सितंबर को रुपये ने कमजोरी से वापसी करते हुए 95.83 प्रति डॉलर पर कारोबार बंद किया था। उस दिन कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, एशियाई मुद्राओं में सुधार और संभावित RBI intervention ने भारतीय मुद्रा को समर्थन दिया था। विदेशी निवेश की निकासी भी बढ़ा रही दबाव भारतीय बाजारों से विदेशी पूंजी की निकासी भी रुपये के लिए चुनौती बनी हुई है। तेल की ऊंची कीमतें, मजबूत डॉलर और वैश्विक बॉन्ड बाजार में बढ़ती यील्ड विदेशी निवेशकों के risk appetite को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे emerging markets से पूंजी बाहर जाने का खतरा बढ़ता है। भारत के आयात बिल पर पड़ सकता है असर अगर रुपया कमजोर रहता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो भारत का आयात बिल महंगा हो सकता है। इसका असर पेट्रोलियम उत्पादों, औद्योगिक कच्चे माल और डॉलर में भुगतान किए जाने वाले अन्य आयात पर पड़ सकता है। इससे महंगाई और चालू खाते पर भी दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। RBI की अगली मौद्रिक नीति भी अहम बाजार की नजर अब RBI की आगामी Monetary Policy Committee बैठक पर भी है। कुछ वित्तीय संस्थानों का अनुमान है कि ऊंची तेल कीमतों और महंगाई जोखिम को देखते हुए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों पर सख्त रुख अपना सकता है। हालांकि अंतिम फैसला RBI की MPC ही करेगी। रुपये की आगे की चाल इन संकेतों पर निर्भर आने वाले दिनों में रुपये की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर इंडेक्स, विदेशी निवेश प्रवाह और RBI की बाजार में गतिविधियों पर निर्भर करेगी। फिलहाल 96 प्रति डॉलर का स्तर बाजार के लिए अहम बना हुआ है और इसमें होने वाली हलचल पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। source – Reuters / The Economic Times / Financial Times जय राष्ट्र न्यूज़

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Crude Oil महंगा होने से Rupee 95.80/$ के करीब; RBI Intervention पर नजर, Brent $107 के आसपास

मुंबई, 15 सितंबर 2026: Indian Rupee पर मंगलवार को फिर दबाव बढ़ गया है। Rising crude oil prices, मजबूत US Dollar और higher US Treasury yields के बीच Rupee 95.80 प्रति Dollar के महत्वपूर्ण स्तर के करीब पहुंचने की आशंका है। Currency traders की नजर Reserve Bank of India (RBI) पर है, जिसने हाल के sessions में इसी zone के आसपास dollar selling के जरिए Rupee की तेज गिरावट को रोकने की कोशिश की थी। 95.80 बना Rupee के लिए Critical Level Forex market participants के मुताबिक ₹95.80/$ Rupee के लिए महत्वपूर्ण technical level माना जा रहा है। अगर currency इस level के पार लगातार कमजोर रहती है, तो Dollar demand बढ़ सकती है और Rupee ₹96 प्रति Dollar की ओर जा सकता है। RBI इससे पहले 95.70–95.80 zone में market intervention करता रहा है। 95.79 का Level Friday को छुआ था 11 September को Rupee 95.70 पर open हुआ था और intraday 95.79/$ तक गिरा, लेकिन suspected RBI intervention और crude prices में कुछ नरमी से losses कम हुए। उस session के अंत में currency करीब 95.55–95.57/$ के स्तर पर बंद हुई थी। Brent Crude करीब $107 प्रति Barrel Tuesday Asian trade में Brent crude करीब $106.93–$107.20 प्रति barrel तक पहुंच गया। Saudi Arabia के energy infrastructure पर attacks और East-West oil pipeline में disruption से global crude supply को लेकर चिंता बढ़ी है। महंगा Crude Rupee के लिए क्यों है चिंता? India अपनी crude oil जरूरतों का बड़ा हिस्सा imports के जरिए पूरा करता है। Oil prices बढ़ने पर Indian refiners और importers को ज्यादा Dollars खरीदने पड़ते हैं। इससे Dollar demand बढ़ती है और Rupee पर depreciation pressure आता है। महंगा crude India के import bill और domestic inflation को भी प्रभावित कर सकता है। RBI पहले कर चुका है Dollar Selling Recent sessions में traders ने RBI की ओर से spot market में Dollar sales और forex swaps की सूचना दी थी। इन interventions का उद्देश्य Rupee में disorderly volatility को रोकना और market liquidity manage करना था। हालांकि RBI आम तौर पर daily forex intervention की तत्काल आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है। US Fed Decision पर भी नजर Currency market की नजर अब US Federal Reserve की 15–16 September meeting पर है। Markets में 25 basis points rate hike की संभावना काफी मजबूत हो गई है। Higher US interest rates Dollar को और मजबूत कर सकते हैं, जिससे emerging-market currencies including Rupee पर अतिरिक्त pressure पड़ सकता है। source – Reuters / Business Standard / RBI Market Data जय राष्ट्र न्यूज़

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