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रुपये पर फिर दबाव, डॉलर के मुकाबले 96 के करीब पहुंचने की आशंका; कच्चे तेल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का असर

मुंबई: भारतीय रुपया एक बार फिर दबाव में है और 1 अक्टूबर 2026 के कारोबार में डॉलर के मुकाबले 95.96 से 95.98 के आसपास खुलने का अनुमान जताया गया। एक दिन पहले रुपया 95.83 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। ऊंची कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेजी और मजबूत डॉलर रुपये पर दबाव बढ़ा रहे हैं। बाजार की नजर इस बात पर भी है कि Reserve Bank of India यानी RBI 96 के स्तर के आसपास कितनी मजबूती से हस्तक्षेप करता है।

96 के स्तर के करीब पहुंच सकता है रुपया

फॉरेक्स बाजार के अनुमान के अनुसार गुरुवार को रुपया 95.96 से 95.98 प्रति डॉलर के दायरे में खुल सकता है।

बुधवार को भारतीय मुद्रा ने कुछ सुधार दिखाते हुए 95.83 पर कारोबार बंद किया था, लेकिन वैश्विक संकेत फिर इसके खिलाफ जाते दिखाई दे रहे हैं।

कच्चे तेल की कीमतें बनी सबसे बड़ी चिंता

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर डॉलर की मांग और रुपये पर पड़ता है।

Brent crude में बुधवार को करीब 2 फीसदी की तेजी आई, जबकि सितंबर में तेल की कीमतों में लगभग 14 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऊंचा तेल आयात बिल रुपये पर अतिरिक्त दबाव पैदा करता है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल

अमेरिका की 10 साल की Treasury yield 2007 के बाद के उच्च स्तरों के करीब पहुंच गई है।

ऊंची अमेरिकी यील्ड से डॉलर आधारित assets निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं, जिससे emerging markets की currencies पर दबाव बढ़ता है। डॉलर इंडेक्स भी तीन महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया।

Fed से राहत की उम्मीद भी रुपये को नहीं संभाल पा रही

अमेरिकी Federal Reserve द्वारा अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना पिछले एक सप्ताह में घटी है।

इसके बावजूद रुपये को ज्यादा राहत नहीं मिली क्योंकि बाजार का फोकस फिलहाल तेल की कीमतों और लंबी अवधि की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर अधिक है।

29 सितंबर को 96 के पार गया था रुपया

भारतीय मुद्रा हाल ही में 96 प्रति डॉलर का स्तर पार कर चुकी है।

29 सितंबर को रुपया कारोबार के दौरान 96.1450 प्रति डॉलर तक गिरा था, जो लगभग दो महीने का निचला स्तर था। बाद में RBI के संभावित हस्तक्षेप से नुकसान कुछ कम हुआ।

RBI के हस्तक्षेप पर बाजार की नजर

मार्केट डीलर्स के अनुसार सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर की बिक्री को RBI के संभावित हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।

हाल के सत्रों में 96 के आसपास रुपये की गिरावट सीमित होती दिखाई दी है, जिससे बाजार में धारणा बनी है कि केंद्रीय बैंक इस स्तर पर अत्यधिक उतार-चढ़ाव नहीं चाहता। हालांकि RBI आमतौर पर किसी निश्चित exchange-rate level को आधिकारिक लक्ष्य घोषित नहीं करता।

एक दिन पहले रुपये ने की थी वापसी

30 सितंबर को रुपये ने कमजोरी से वापसी करते हुए 95.83 प्रति डॉलर पर कारोबार बंद किया था।

उस दिन कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, एशियाई मुद्राओं में सुधार और संभावित RBI intervention ने भारतीय मुद्रा को समर्थन दिया था।

विदेशी निवेश की निकासी भी बढ़ा रही दबाव

भारतीय बाजारों से विदेशी पूंजी की निकासी भी रुपये के लिए चुनौती बनी हुई है।

तेल की ऊंची कीमतें, मजबूत डॉलर और वैश्विक बॉन्ड बाजार में बढ़ती यील्ड विदेशी निवेशकों के risk appetite को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे emerging markets से पूंजी बाहर जाने का खतरा बढ़ता है।

भारत के आयात बिल पर पड़ सकता है असर

अगर रुपया कमजोर रहता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो भारत का आयात बिल महंगा हो सकता है।

इसका असर पेट्रोलियम उत्पादों, औद्योगिक कच्चे माल और डॉलर में भुगतान किए जाने वाले अन्य आयात पर पड़ सकता है। इससे महंगाई और चालू खाते पर भी दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।

RBI की अगली मौद्रिक नीति भी अहम

बाजार की नजर अब RBI की आगामी Monetary Policy Committee बैठक पर भी है।

कुछ वित्तीय संस्थानों का अनुमान है कि ऊंची तेल कीमतों और महंगाई जोखिम को देखते हुए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों पर सख्त रुख अपना सकता है। हालांकि अंतिम फैसला RBI की MPC ही करेगी।

रुपये की आगे की चाल इन संकेतों पर निर्भर

आने वाले दिनों में रुपये की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर इंडेक्स, विदेशी निवेश प्रवाह और RBI की बाजार में गतिविधियों पर निर्भर करेगी।

फिलहाल 96 प्रति डॉलर का स्तर बाजार के लिए अहम बना हुआ है और इसमें होने वाली हलचल पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।

source – Reuters / The Economic Times / Financial Times

जय राष्ट्र न्यूज़

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