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छात्र आंदोलन के बीच नेहा बोरा को जान से मारने की धमकी का आरोप; AISA ने सुरक्षा और FIR की मांग की

लखनऊ, 16 सितंबर 2026: All India Students’ Association (AISA) ने अपनी राष्ट्रीय अध्यक्ष Neha Bora को कथित तौर पर जान से मारने की धमकियां मिलने का आरोप लगाया है। संगठन ने Uttar Pradesh के Director General of Police (DGP) को शिकायत भेजकर FIR दर्ज करने, धमकी देने वाले व्यक्ति की पहचान करने और Bora की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। Official Number पर आए Threat Messages का दावा AISA की शिकायत के मुताबिक organisation के एक official contact number पर कई abusive और threatening messages आए। संगठन का आरोप है कि sender ने कई voice notes भी भेजे, जिनमें violence की धमकी दी गई। एक voice message में कथित तौर पर Bora की मौत को लेकर धमकी दी गई थी। 15 September को DGP को भेजी Complaint AISA General Secretary Prasenjeet Kumar की ओर से 15 September को UP DGP को complaint भेजी गई। Organisation ने मांग की है कि संबंधित phone number को trace किया जाए, messages और voice notes के records preserve किए जाएं और applicable law के तहत action लिया जाए। ‘GenZ Rising’ Campaign के दौरान सामने आया मामला Neha Bora इन दिनों Uttar Pradesh में AISA के ‘GenZ Rising’ / ‘Gen-Z Mahajutan Yatra’ campaign के तहत अलग-अलग शहरों का दौरा कर रही हैं। इस campaign में unemployment, recruitment delays, scholarships, hostel facilities, paper leaks और education system से जुड़े मुद्दे उठाए जा रहे हैं। AISA ने मांगी सुरक्षा Student organisation ने कहा है कि लगातार यात्रा कर रहीं Bora की सुरक्षा को देखते हुए authorities को preventive measures लेने चाहिए। AISA ने धमकियों को student mobilisation को intimidate करने की कोशिश बताया है। यह organisation का आरोप है और धमकी भेजने वाले व्यक्ति की identity या motive की independent confirmation अभी सामने नहीं आई है। Neha Bora को लेकर पहले भी हुआ विवाद हाल के दिनों में Bora की Uttar Pradesh यात्रा को लेकर राजनीतिक विवाद भी हुआ है। Gorakhpur में CM Yogi Adityanath को लेकर उनकी कथित टिप्पणी के बाद अलग-अलग police stations में उनके खिलाफ complaints देकर FIR की मांग की गई थी। FIR दर्ज होने की पुष्टि नहीं Latest available reports में AISA की ओर से FIR की मांग की पुष्टि होती है, लेकिन धमकी मामले में FIR दर्ज होने या किसी आरोपी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है। इसलिए फिलहाल मामले को complaint और alleged threats के रूप में ही देखा जा रहा है। source – The Hindu / PTI / Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली पुलिस ने छात्र प्रदर्शन से जुड़े 13 मामलों पर कार्रवाई की समीक्षा शुरू की, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को राहत देने की पहल

नई दिल्ली: छात्र आंदोलनों और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े हालिया प्रदर्शनों के बाद दिल्ली सरकार ने छात्र प्रदर्शनकारियों को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि जंतर-मंतर और संसद मार्च से जुड़े छात्र प्रदर्शनों में दर्ज 13 मामलों (FIRs) की समीक्षा की जाए और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई न की जाए। हालांकि जिन लोगों के खिलाफ गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि या हिंसा के आरोप हैं, उनके मामलों में कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। यह निर्णय उस समय आया है जब प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में देशभर के छात्रों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए थे। दिल्ली में हुए “चलो संसद” मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी, जिसके बाद कई एफआईआर दर्ज की गई थीं। सरकार का क्या कहना है? दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के खिलाफ कठोर कार्रवाई उचित नहीं है। इसलिए पुलिस को निर्देश दिया गया है कि प्रत्येक मामले की समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाए कि निर्दोष और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अनावश्यक कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े। वहीं जिन मामलों में हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान या गंभीर अपराध के आरोप हैं, उनमें कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी। 13 मामलों की होगी समीक्षा दिल्ली पुलिस ने छात्र प्रदर्शनों से जुड़े 13 मामले दर्ज किए थे। सरकार के निर्देश के बाद अब इन सभी मामलों की अलग-अलग समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तारी, हिरासत और एफआईआर से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी ताकि किसी निर्दोष छात्र के साथ अन्याय न हो। छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया छात्र संगठनों ने सरकार के फैसले का स्वागत किया, लेकिन उनका कहना है कि केवल कार्रवाई रोकना पर्याप्त नहीं है। कई संगठनों ने मांग की है कि दर्ज एफआईआर को औपचारिक रूप से वापस लिया जाए ताकि भविष्य में छात्रों को नौकरी, पासपोर्ट या अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। कुछ संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि मामलों को पूरी तरह समाप्त नहीं किया गया तो आंदोलन फिर से शुरू किया जा सकता है। विपक्ष ने भी उठाए सवाल विपक्षी नेताओं ने छात्र आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं की आवाज़ को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और युवाओं के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने की मांग दोहराई। परीक्षा सुधार से जुड़ा मुद्दा छात्र आंदोलन मुख्य रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर शुरू हुआ था। इसके बाद सरकार ने परीक्षा सुधारों की घोषणा की और एंटी-पेपर लीक कानून को भी आगे बढ़ाया। अब प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा को उसी सुधार प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। निष्कर्ष दिल्ली सरकार द्वारा छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामलों की समीक्षा का निर्णय लोकतांत्रिक विरोध और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि समीक्षा के बाद कितने मामलों में राहत मिलती है और क्या दर्ज एफआईआर को औपचारिक रूप से वापस लिया जाता है। Source: Delhi Government | Delhi Police | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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