रुपया शुरुआती कारोबार में 8 पैसे कमजोर होकर ₹95.38 प्रति डॉलर पर पहुंचा, कच्चे तेल की कीमतों से दबाव
मुंबई: भारतीय रुपया मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 8 पैसे कमजोर होकर ₹95.38 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। वैश्विक बाजारों में जारी अनिश्चितता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच रुपये पर दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में रुपये पर दबाव इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया कमजोर स्तर पर खुला और शुरुआती कारोबार में ₹95.38 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में रुपया करीब ₹95.30 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। मंगलवार की शुरुआत में रुपये की कमजोरी के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक बताए जा रहे हैं। West Asia संकट का बाजार पर असर West Asia में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक निवेशकों की चिंता बनी हुई है। क्षेत्र में शांति वार्ता को लेकर स्पष्ट प्रगति नहीं होने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इससे देश का आयात बिल बढ़ने और डॉलर की मांग बढ़ने की संभावना रहती है, जिसका दबाव रुपये पर पड़ता है। महंगा कच्चा तेल बना बड़ी चिंता अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ाया है। रिपोर्टों के मुताबिक Brent crude में भी तेजी देखने को मिली है और बाजार की नजर West Asia से जुड़े घटनाक्रम पर बनी हुई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर देश को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। शेयर बाजार में कमजोरी का भी असर रुपये पर दबाव का एक कारण घरेलू शेयर बाजार में शुरुआती कमजोरी भी रही। मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक शुरुआती कारोबार में दबाव में नजर आए। Reuters के अनुसार शुरुआती कारोबार में Nifty करीब 0.43% और Sensex करीब 0.48% नीचे थे। वित्तीय और बैंकिंग शेयरों में कमजोरी ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। RBI की भूमिका से बड़ी गिरावट पर रोक रुपये में कमजोरी के बावजूद बाजार में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की संभावित दखलंदाजी पर भी नजर बनी हुई है। बाजार सूत्रों के मुताबिक सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर की बिक्री से रुपये को कुछ समर्थन मिला, जिससे शुरुआती गिरावट सीमित रही। विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी रुपये की दिशा के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। महंगाई पर भी पड़ सकता है असर रुपये में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर आने वाले समय में महंगाई पर भी पड़ सकता है। अगर आयातित तेल महंगा होता है, तो परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ सकती है। इसका असर पेट्रोलियम उत्पादों के अलावा कई अन्य वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से पड़ सकता है। निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों पर अब बाजार की नजर कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर है। खासतौर पर West Asia संकट, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां रुपये की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। इसके अलावा अमेरिकी महंगाई के आंकड़े और भारत के आगामी आर्थिक आंकड़े भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। रुपये के लिए आगे की चुनौती रुपया पिछले कुछ समय से डॉलर के मुकाबले कमजोर स्तरों के आसपास कारोबार कर रहा है। सोमवार को भी शुरुआती कारोबार में रुपया 8 पैसे कमजोर होकर ₹95.25 प्रति डॉलर पर पहुंचा था। ऐसे में अगर कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आती है या वैश्विक तनाव बढ़ता है, तो रुपये पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है। वहीं RBI की कार्रवाई और विदेशी पूंजी प्रवाह रुपये को समर्थन दे सकते हैं। निष्कर्ष 11 अगस्त 2026 को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया 8 पैसे कमजोर होकर ₹95.38 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। West Asia संकट के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी ने रुपये पर दबाव बढ़ाया। हालांकि RBI की संभावित दखलंदाजी और विदेशी पूंजी प्रवाह से गिरावट को सीमित करने में मदद मिल रही है। आने वाले कारोबार में कच्चे तेल, डॉलर इंडेक्स, विदेशी निवेश और West Asia से जुड़ी खबरें रुपये की दिशा के लिए सबसे अहम संकेतक रहेंगे। Source: PTI / Reuters / Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़
