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महाराष्ट्र UCC समिति में विवाद के बीच जस्टिस आरसी चव्हाण का इस्तीफा, पब्लिक फीडबैक प्रक्रिया पर उठाए सवाल

मुंबई: महाराष्ट्र में Uniform Civil Code (UCC) के लिए नियम और सिफारिशें तैयार करने वाली समिति से बॉम्बे हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस आरसी चव्हाण ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने जनता की राय लेने के लिए तैयार की जा रही प्रश्नावली, समिति में पर्याप्त चर्चा न होने और 19 सितंबर की बैठक में एक गैर-सदस्य की मौजूदगी पर सवाल उठाए। चव्हाण ने 19 सितंबर को इस्तीफा भेजा, जिसे महाराष्ट्र सरकार ने 21 सितंबर को स्वीकार कर लिया।

‘हां या ना’ वाले सवालों पर जताई आपत्ति

जस्टिस चव्हाण की प्रमुख आपत्ति UCC को लेकर जनता से फीडबैक लेने के तरीके पर थी। समिति की योजना कई जटिल सामाजिक और वैवाहिक मुद्दों पर लोगों से मुख्य रूप से ‘हां’ या ‘ना’ में जवाब लेने की थी।

चव्हाण का मानना था कि विवाह, पारिवारिक संबंध और विवाद समाधान जैसे विषयों पर विस्तृत राय लेने की जरूरत है और केवल दो विकल्पों में जवाब सीमित करने से लोगों के विचार पूरी तरह सामने नहीं आ पाएंगे।

प्रश्नावली पहले ही फाइनल होने का किया दावा

19 सितंबर को समिति की दूसरी ऑनलाइन बैठक हुई थी। चव्हाण ने अपने इस्तीफे में कहा कि कुछ सदस्यों ने प्रश्नावली में बदलाव और विशेषज्ञों से उसकी समीक्षा कराने का सुझाव दिया था।

लेकिन उनके मुताबिक समिति की अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई पहले ही एक प्रश्नावली तैयार कर सदस्यों को भेज चुकी थीं और वेबसाइट तैयार होने के बाद उसे अपलोड करने की बात कही गई थी। यह चव्हाण द्वारा अपने इस्तीफे में व्यक्त किया गया पक्ष है।

‘गैर-सदस्य’ की मौजूदगी पर भी सवाल

चव्हाण ने बैठक में सेवानिवृत्त IAS अधिकारी शत्रुघ्न सिंह की मौजूदगी और उनकी भूमिका पर भी सवाल उठाया था। उस समय सिंह मूल सात सदस्यीय समिति में शामिल नहीं थे।

चव्हाण के अनुसार सिंह ने UCC की वेबसाइट में बदलाव को लेकर सुझाव दिए और उसके बाद समिति अध्यक्ष ने अधिकारियों को आवश्यक बदलाव करने के निर्देश दिए। चव्हाण ने सवाल किया कि जब वह औपचारिक सदस्य नहीं थे तो बैठक में उनकी भूमिका किस आधार पर तय हुई थी।

दो दिन बाद शत्रुघ्न सिंह समिति में शामिल

इस पूरे विवाद में एक नया घटनाक्रम 21 सितंबर को सामने आया। The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र सरकार ने शत्रुघ्न सिंह को UCC समिति में Member-cum-Senior Adviser नियुक्त कर दिया।

यानी जिस अधिकारी की 19 सितंबर की बैठक में मौजूदगी पर जस्टिस चव्हाण ने सवाल उठाया था, उन्हें दो दिन बाद औपचारिक रूप से समिति से जोड़ दिया गया। सिंह इससे पहले उत्तराखंड की UCC समिति में भी जस्टिस रंजना देसाई के साथ काम कर चुके हैं।

उत्तराखंड UCC में भी काम कर चुके हैं शत्रुघ्न सिंह

शत्रुघ्न सिंह उत्तराखंड में UCC तैयार करने वाली पांच सदस्यीय समिति का हिस्सा थे। वह कानून का मसौदा तैयार करने और विभिन्न पक्षों से बातचीत करने वाली टीम में शामिल रहे।

उत्तराखंड विधानसभा ने फरवरी 2024 में UCC विधेयक पारित किया था और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 27 जनवरी 2025 से वहां समान नागरिक संहिता लागू हुई।

UCC के विरोधी नहीं हैं जस्टिस चव्हाण

इस्तीफे के बाद जस्टिस चव्हाण ने स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति UCC की अवधारणा से नहीं, बल्कि समिति में अपनाई जा रही प्रक्रिया से है।

उन्होंने कहा कि वह करीब दस वर्षों से इस विषय पर काम कर रहे हैं और UCC लागू किया जा सकता है, लेकिन ऐसा करते समय अलग-अलग समुदायों के बीच टकराव नहीं होना चाहिए। उन्होंने व्यक्तिगत स्वतंत्रता, gender neutrality और न्यूनतम सरकारी हस्तक्षेप पर जोर दिया।

जुलाई में बनाई गई थी सात सदस्यीय समिति

महाराष्ट्र सरकार ने जुलाई 2026 में UCC का मसौदा और सिफारिशें तैयार करने के लिए सात सदस्यीय समिति बनाई थी। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना देसाई कर रही हैं।

समिति को विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और अन्य व्यक्तिगत कानूनों से संबंधित कानूनी, सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन कर छह महीने के भीतर रिपोर्ट देने का जिम्मा दिया गया है।

सरकार ने आरोपों पर नहीं दी विस्तृत प्रतिक्रिया

Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार के एक मंत्री ने कहा कि सरकार जस्टिस चव्हाण की ओर से उठाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया नहीं देगी और समिति अपना काम जारी रखेगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि चव्हाण की जगह अलग से नया सदस्य नियुक्त नहीं किया जाएगा।

हालांकि इसके साथ ही 21 सितंबर को शत्रुघ्न सिंह को Member-cum-Senior Adviser नियुक्त किए जाने की खबर भी सामने आई है। फिलहाल समिति UCC को लेकर जनता से राय लेने और आगे की सिफारिशें तैयार करने की प्रक्रिया में है।

source – The Indian Express / Hindustan Times / Times of India / Bar & Bench

जय राष्ट्र न्यूज़

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