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UPI शुल्क को लेकर Ashneer Grover का बड़ा बयान; बोले—MDR से Cash Payments की ओर लौट सकते हैं लोग

नई दिल्ली, 17 सितंबर 2026: BharatPe co-founder और entrepreneur Ashneer Grover ने ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा UPI merchant payments पर लागू होने वाले 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) की आलोचना की है। Grover का कहना है कि merchant पर लगाया गया यह charge आखिरकार consumer तक पहुंच सकता है और इससे businesses दोबारा cash payments को preference देने लग सकते हैं। ‘UPI पर Charge लगाने की जरूरत क्या है?’ Ashneer Grover ने सवाल उठाया कि जब UPI India का बेहद सफल digital payment infrastructure बन चुका है, तब इसके बड़े merchant transactions पर नया charge लगाने की जरूरत क्यों है। उनका तर्क है कि transaction की processing cost payment amount बढ़ने के साथ उसी अनुपात में नहीं बढ़ती, इसलिए ₹2,000 से ऊपर percentage-based MDR लगाने का आर्थिक आधार स्पष्ट होना चाहिए। यह Grover का अपना assessment है। Cash Economy की तरफ लौटने की चेतावनी Grover ने आशंका जताई कि merchants अगर बड़े UPI payments पर MDR का खर्च खुद नहीं उठाना चाहेंगे तो वे customers को cash payment के लिए encourage कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि consumers बड़े payments को दो या अधिक छोटे UPI transactions में split करके charge structure से बचने की कोशिश कर सकते हैं। 15 October से लागू होगा 0.4% MDR NPCI के नए framework के मुताबिक 15 October 2026 से ₹2,000 से ज्यादा के eligible Person-to-Merchant UPI transactions पर 0.4% MDR लगेगा। ₹75,000 या उससे ज्यादा के transaction पर charge अधिकतम ₹300 रहेगा। वहीं Person-to-Person UPI transfers free रहेंगे और qualifying small merchants को भी exemption दी गई है। Customers से सीधे Charge लेने की अनुमति नहीं Government और NPCI ने स्पष्ट किया है कि MDR को सीधे customers पर pass नहीं किया जाना चाहिए। UPI apps को platform fee या hidden charges लगाने से भी रोका गया है। ₹1 लाख प्रति माह तक QR-based UPI payments receive करने वाले eligible small merchants और rural तथा semi-urban QR merchants को नए MDR से exemption दी गई है। Fintech Industry में बंटी राय UPI MDR को लेकर fintech industry में अलग-अलग विचार सामने आए हैं। PhonePe CEO Sameer Nigam और Paytm founder Vijay Shekhar Sharma ने नए charge का समर्थन करते हुए कहा है कि payment infrastructure को sustainable बनाने के लिए revenue model जरूरी है। वहीं Ashneer Grover और Zerodha co-founder Nithin Kamath ने cost और rate structure को लेकर concerns उठाए हैं। Government का तर्क—UPI Infrastructure के लिए जरूरी Revenue NPCI का कहना है कि UPI के तेजी से बढ़ते scale को संभालने के लिए technology, cybersecurity, fraud prevention, reliability और customer service में लगातार investment की जरूरत है। अधिकारियों के मुताबिक MDR से मिलने वाली revenue banks, payment apps और payment service providers के बीच distribute होगी और इसका उद्देश्य UPI ecosystem को financially sustainable बनाना है। source – Reuters / Free Press Journal / ET Now जय राष्ट्र न्यूज़

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UPI पर बड़ा बदलाव; ₹2,000 से ज्यादा के Merchant Payments पर 0.4% MDR, 15 October से लागू

नई दिल्ली, 17 सितंबर 2026: India के digital payment ecosystem में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 15 October 2026 से ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI transactions पर 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) लागू होगा। हालांकि यह charge customer से नहीं लिया जाएगा; इसे merchant payment ecosystem में banks, payment service providers और UPI apps के बीच distribute किया जाएगा। ₹2,000 तक के UPI Merchant Payments रहेंगे Free Government के मुताबिक ₹2,000 तक के सभी P2M transactions पर zero MDR जारी रहेगा। इसके अलावा सभी Person-to-Person यानी P2P UPI transfers—चाहे amount कितना भी हो—पूरी तरह free रहेंगे। Finance Ministry का कहना है कि करीब 96% merchant transactions नए MDR framework से प्रभावित नहीं होंगे। ₹2,000 से ऊपर 0.4% MDR Standard merchant transactions में ₹2,000 से ऊपर payment पर 0.4% MDR लगेगा। उदाहरण के तौर पर: Customer से नहीं लिया जाएगा Charge Finance Ministry ने स्पष्ट किया है कि MDR UPI user पर transaction fee नहीं है। Customer को merchant को payment करते समय अलग से MDR नहीं देना होगा। Government ने banks और payment providers से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि यह cost सीधे consumers पर pass न की जाए। Small Merchants को मिली बड़ी राहत UPI QR के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक payment receive करने वाले eligible small merchants और street vendors zero-MDR framework में बने रहेंगे। यानी किसी small merchant को एक transaction ₹2,000 से ऊपर मिलने मात्र से MDR automatically लागू नहीं होगा, अगर वह exempted merchant category में आता है। Railways, Fuel और Insurance पर सिर्फ ₹5 MDR Essential sectors के लिए अलग concessional rate रखा गया है। Railways, telecom, insurance, fuel और agricultural inputs जैसे sectors में ₹2,000 से ज्यादा के transactions पर percentage-based MDR की जगह flat ₹5 charge लागू होगा। Capital Market Payments पर 0.02% Mutual funds, securities, stockbrokers और dealers से जुड़े UPI payments पर MDR 0.02% रहेगा और maximum charge ₹300 तक सीमित होगा। Government ने क्यों बदला Zero-MDR Model? Government और NPCI का कहना है कि नया framework UPI infrastructure, cybersecurity, innovation और customer service पर होने वाले खर्च को sustainable बनाने के लिए लाया गया है। UPI ने August 2026 में करीब 2,451 करोड़ transactions worth ₹29.9 lakh crore process किए थे। करीब छह वर्षों से merchant UPI payments पर zero-MDR व्यवस्था लागू थी। 15 October से लागू होगा नया Framework Revised MDR structure 15 October 2026 से लागू होगा। तब तक existing payment mechanism जारी रहेगा। Government ने यह भी साफ किया है कि MDR कोई government tax नहीं है, बल्कि payment ecosystem के participants के बीच distribute होने वाला merchant processing charge है। source – Ministry of Finance / NPCI / Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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UPI लेनदेन पर शुल्क लगेगा? संजय सिंह का मोदी सरकार पर हमला, बिल वापस लेने की मांग

नई दिल्ली: UPI भुगतान को लेकर संसद में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित व्यवस्था से UPI के जरिए होने वाले भुगतान पर कारोबारियों पर टैक्स का बोझ बढ़ सकता है, जिसका असर आगे चलकर आम लोगों पर पड़ सकता है। आम आदमी पार्टी ने सरकार से इस प्रावधान को वापस लेने की मांग की है। संजय सिंह ने संसद में उठाया UPI का मुद्दा राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान संजय सिंह ने UPI लेनदेन से जुड़े प्रस्ताव पर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि एक तरफ डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया जा रहा है और दूसरी तरफ ऐसे प्रावधान लाए जा रहे हैं जिनसे छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। संजय सिंह ने इस मुद्दे को आम आदमी और छोटे कारोबारियों से जोड़ते हुए सरकार से बिल वापस लेने की मांग की। “व्यापारियों से टैक्स लिया तो जनता पर पड़ेगा बोझ” AAP की ओर से जारी बयान के मुताबिक संजय सिंह का कहना है कि अगर UPI से होने वाले भुगतान पर कारोबारियों से अतिरिक्त शुल्क या टैक्स लिया जाता है, तो उसका बोझ अंततः ग्राहकों तक पहुंच सकता है। उनका तर्क है कि छोटे दुकानदार और कारोबारी अपनी अतिरिक्त लागत को वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों पर अप्रत्यक्ष रूप से असर पड़ने की आशंका जताई गई है। सरकार का जवाब—आम यूजर से UPI चार्ज नहीं लिया जाएगा हालांकि इस मामले में सरकार की ओर से महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी सामने आया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में कहा कि आम UPI यूजर्स से किसी तरह का UPI चार्ज नहीं लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छोटे व्यापारियों पर MDR (Merchant Discount Rate) लगाने की बात नहीं है। संसद ने Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 को मंजूरी भी दे दी है। तो क्या UPI से पैसे भेजने पर लगेगा चार्ज? इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि आम लोगों के UPI भुगतान पर सीधे कोई नया शुल्क लगाए जाने की घोषणा नहीं हुई है। यानी अगर कोई व्यक्ति दुकान पर QR Code स्कैन करके ₹500 या ₹1,000 का भुगतान करता है, तो सरकार के मौजूदा स्पष्टीकरण के अनुसार ग्राहक से अलग से UPI चार्ज वसूलने की व्यवस्था नहीं है। संजय सिंह का विरोध मुख्य रूप से विधेयक में टैक्स से जुड़े प्रावधानों और उनके संभावित प्रभाव को लेकर है। छोटे कारोबारियों को लेकर AAP की चिंता AAP का कहना है कि छोटे व्यापारियों पर किसी भी अतिरिक्त लागत का प्रभाव व्यापक हो सकता है। पार्टी ने इसे छोटे कारोबारियों और आम जनता के हित से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी का दावा है कि डिजिटल इंडिया और कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देने के बाद UPI से जुड़े लेनदेन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना विरोधाभासी होगा। मोदी सरकार पर संजय सिंह का राजनीतिक हमला संजय सिंह ने इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर भी राजनीतिक हमला बोला। AAP के मुताबिक उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का फायदा बड़े और विदेशी निवेशकों को मिल रहा है, जबकि छोटे कारोबारियों पर बोझ बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने सरकार से इस प्रावधान को वापस लेने की मांग की है। Taxation Bill 2026 को संसद की मंजूरी इस पूरे विवाद के बीच Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 संसद से पारित हो चुका है। रिपोर्ट के अनुसार राज्यसभा ने चर्चा के बाद Money Bill को लोकसभा को लौटाया और बाद में विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गई। वित्त मंत्री ने इस दौरान UPI यूजर्स और छोटे व्यापारियों को लेकर आश्वासन दिया कि उन पर सीधे UPI/MDR चार्ज नहीं लगाया जाएगा। UPI भुगतान करने वालों के लिए क्या बदलेगा? फिलहाल आम UPI यूजर्स के लिए सबसे अहम बात यह है कि UPI से पैसे भेजने या QR Code के जरिए भुगतान करने पर कोई नया सीधा शुल्क लागू होने की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि टैक्स व्यवस्था में बदलाव और उसके कारोबारी प्रभाव को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। इसलिए भविष्य में नियमों में कोई बदलाव होता है तो उसके आधिकारिक विवरण को देखना जरूरी होगा। निष्कर्ष UPI को लेकर संसद में जारी बहस के बीच संजय सिंह ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए Taxation Bill 2026 के प्रावधानों का विरोध किया है और इसे वापस लेने की मांग की है। AAP का दावा है कि व्यापारियों पर टैक्स या अतिरिक्त लागत बढ़ने से इसका असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। वहीं, सरकार की ओर से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि आम UPI यूजर्स और छोटे व्यापारियों से नया UPI/MDR चार्ज नहीं लिया जाएगा। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि UPI से भुगतान करने वाले आम लोगों पर नया शुल्क लगा दिया गया है। Source: Aam Aadmi Party / Indian Express / The Statesman / Live Hindustan जय राष्ट्र न्यूज़

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