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ट्रंप बोले—चीन और रूस ईरान की मदद नहीं कर रहे; अमेरिकी खुफिया आकलन से अलग बयान

वॉशिंगटन, 14 अक्टूबर 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि चीन और रूस ईरान के साथ जारी युद्ध में किसी महत्वपूर्ण तरीके से उसकी मदद कर रहे हैं। उनका यह बयान अमेरिकी खुफिया आकलनों से अलग है, जिनमें बीजिंग और मॉस्को की ओर से ईरान को सैन्य सहायता दिए जाने की बात कही गई है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका, चीन और रूस के बीच ईरान को लेकर कूटनीतिक तनाव बना हुआ है और क्षेत्र में जारी संघर्ष के अंतरराष्ट्रीय प्रभावों पर नजर रखी जा रही है। ट्रंप ने क्या कहा? ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि उन्हें नहीं लगता कि चीन या रूस ईरान की किसी महत्वपूर्ण तरीके से मदद कर रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि ऐसी सहायता दी जा रही होती, तो अमेरिकी प्रशासन को इसकी जानकारी मिल जाती। ट्रंप का यह बयान दोनों देशों की भूमिका को लेकर उनके सार्वजनिक आकलन को दर्शाता है। हालांकि, इससे यह स्वतंत्र रूप से साबित नहीं होता कि ईरान को किसी भी प्रकार की बाहरी सहायता नहीं मिल रही है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में क्या दावा किया गया? रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया ब्रीफिंग में चीन और रूस की ओर से ईरान को सहायता मिलने की बात सामने आई है। रिपोर्टों में कथित तौर पर उपग्रह तस्वीरों, हथियारों के कलपुर्जों और अन्य सैन्य सहायता का उल्लेख किया गया है। इस तरह ट्रंप के सार्वजनिक बयान और रिपोर्ट किए गए खुफिया आकलनों के बीच अंतर दिखाई देता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर सहायता की पूरी मात्रा, स्वरूप और दोनों देशों की प्रत्यक्ष भूमिका के सभी विवरण स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं किए जा सकते। शी जिनपिंग से बातचीत का भी किया गया था जिक्र ट्रंप पहले भी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत के दौरान ईरान को चीन की संभावित सहायता का मुद्दा उठा चुके हैं। सितंबर में अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि ट्रंप ने चीन की ओर से ईरान की मदद किए जाने पर आपत्ति जताई थी। अमेरिकी पक्ष के अनुसार, इस बातचीत में ईरान को समर्थन देने के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। हालांकि, किसी कूटनीतिक आश्वासन और जमीन पर वास्तविक गतिविधियों के बीच अंतर हो सकता है। चीन और रूस का अलग-अलग रुख चीन ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन के रूप में प्रस्तुत किया है। वहीं, रूस ने मध्य पूर्व में जारी युद्ध के व्यापक सुरक्षा प्रभावों को लेकर चिंता जताई है और चेतावनी दी है कि क्षेत्रीय संघर्ष परमाणु हथियारों की प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दे सकता है। ट्रंप इससे पहले भी शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को ईरान संघर्ष के संदर्भ में तटस्थ बताया चुके हैं। दोनों देशों के सार्वजनिक बयानों और उनकी कथित सहायता से जुड़े खुफिया आकलनों को अलग-अलग संदर्भों में देखना जरूरी है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच बयान के मायने ईरान से जुड़े संघर्ष के बीच चीन और रूस की भूमिका अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का अहम मुद्दा बनी हुई है। वॉशिंगटन के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि तेहरान को बाहरी सैन्य या तकनीकी सहायता किस स्तर पर मिल रही है, जबकि बीजिंग और मॉस्को इस संकट को लेकर अपने-अपने कूटनीतिक रुख रखते हैं। ट्रंप के ताजा बयान और अमेरिकी खुफिया आकलनों के बीच अंतर इस बात को रेखांकित करता है कि संघर्ष में बाहरी देशों की भूमिका को लेकर सार्वजनिक बयानों और सुरक्षा एजेंसियों के आकलनों में भिन्नता हो सकती है। फिलहाल, चीन और रूस की ओर से ईरान को कथित सहायता के दावों तथा इस संबंध में अमेरिकी आकलनों पर अंतरराष्ट्रीय नजर बनी हुई है। Source: Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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BRICS Summit 2026 में PM Modi और World Leaders ने किया वृक्षारोपण, Bharat Mandapam में लगाए Banyan Saplings

नई दिल्ली, 12 सितंबर 2026: New Delhi में आयोजित 18th BRICS Summit के पहले दिन Prime Minister Narendra Modi और BRICS देशों के कई नेताओं ने Bharat Mandapam के lawns में संयुक्त वृक्षारोपण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। Leaders ने Banyan यानी बरगद के पौधे लगाए और environmental sustainability तथा साझा जिम्मेदारी का संदेश दिया। Putin और Xi Jinping भी हुए शामिल Tree plantation programme में PM Modi के साथ Russian President Vladimir Putin, Chinese President Xi Jinping और अन्य BRICS leaders भी शामिल हुए। Modi समेत कुल 10 leaders Bharat Mandapam की backdrop में एक साथ खड़े हुए और सभी ने एक-एक sapling लगाया। Bharat Innovates Exhibition भी देखा वृक्षारोपण से पहले BRICS leaders ने Bharat Mandapam में आयोजित Bharat Innovates Exhibition का दौरा किया। इसके बाद leaders ने official family photograph में हिस्सा लिया और शाम को joint tree plantation ceremony आयोजित की गई। Sustainability का दिया संदेश Banyan tree plantation को sustainable development और environmental cooperation के प्रतीक के रूप में देखा गया। कार्यक्रम के जरिए BRICS देशों ने climate और ecological challenges से निपटने के लिए collective responsibility और cooperation का संदेश दिया। New Delhi Declaration भी हुआ Adopt Summit के पहले दिन BRICS member countries ने New Delhi Declaration को consensus से adopt किया। Declaration में global governance, multilateral cooperation और international challenges से निपटने के लिए collective approach पर जोर दिया गया। 12–13 September को BRICS Summit India 12 और 13 September को New Delhi के Bharat Mandapam में 18th BRICS Summit की मेजबानी कर रहा है। Summit में Russia, China, South Africa, Iran, Egypt, Ethiopia, Indonesia और UAE समेत BRICS member nations के leaders हिस्सा ले रहे हैं। source – PIB / The New Indian Express / Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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BRICS Summit से पहले Delhi में करीब 30,000 Security Personnel तैनात, NSG और Anti-Drone Systems भी Active

नई दिल्ली, 10 सितंबर 2026: 18th BRICS Summit से पहले राष्ट्रीय राजधानी Delhi में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। करीब 25,000 security personnel और 4,800 traffic police personnel को summit और VVIP movement के लिए लगाया जा रहा है। इसके साथ 100 से ज्यादा NSG commandos और anti-drone systems भी security grid का हिस्सा हैं। 12–13 सितंबर को Bharat Mandapam में Summit India अपनी BRICS Chairship के तहत 12 और 13 सितंबर 2026 को New Delhi के Bharat Mandapam में 18th BRICS Summit की मेजबानी करेगा। VVIP Routes पर कड़ी सुरक्षा Visiting heads of state और delegations के movement को देखते हुए airport, diplomatic enclave, summit venue और प्रमुख hotels के आसपास multi-layer security लगाई गई है। Delhi Traffic Police ने 35 से ज्यादा महत्वपूर्ण routes पर restrictions और diversions की तैयारी की है। 100 से ज्यादा NSG Commandos तैनात Summit की security में 100 से अधिक NSG commandos, anti-drone systems और specialised security teams को शामिल किया गया है। VIP convoys की monitoring के लिए GPS tracking और sensitive locations पर enhanced surveillance का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। Putin के लिए Special Security Arrangements Russian President Vladimir Putin के 11 सितंबर को India पहुंचने की उम्मीद है। उनके hotel और travel routes पर additional senior police officers तैनात किए गए हैं। Russian security teams भी पहले ही Delhi पहुंच चुकी हैं। Xi Jinping की संभावित यात्रा पर भी नजर Chinese President Xi Jinping के भी summit में शामिल होने की व्यापक उम्मीद है और Delhi Police Special Cell उनकी संभावित यात्रा के लिए security arrangements संभाल रही है। हालांकि Reuters के मुताबिक Beijing ने 10 सितंबर तक Xi की यात्रा की औपचारिक पुष्टि नहीं की थी। Hotels के Staff का Background Verification जिन hotels में international leaders और delegations रुकेंगे, वहां कर्मचारियों का detailed background verification किया गया है। Security personnel hotels के ground floor से rooftops तक तैनात किए गए हैं, जबकि sensitive zones में surveillance बढ़ा दी गई है। Anti-Drone और AI Surveillance भी इस्तेमाल Possible aerial threats को देखते हुए anti-drone technology लगाई जा रही है। Reports के मुताबिक AI-enabled cameras और facial recognition systems का भी इस्तेमाल security monitoring के लिए किया जाएगा। Delhi में आने वाले दो दिनों में international delegations और heads of state के arrival के साथ VVIP movement बढ़ने की संभावना है, इसलिए traffic restrictions और security checks भी बढ़ सकते हैं। source – The Indian Express / PIB / Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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US-China के बीच AI Safety पर बड़ी बातचीत की तैयारी, Cyberattacks और Frontier AI Models पर हो सकती है चर्चा

वॉशिंगटन, 5 सितंबर 2026: अमेरिका और चीन तेजी से विकसित हो रही Artificial Intelligence technology से जुड़े सुरक्षा जोखिमों पर mid-September में bilateral dialogue आयोजित करने की तैयारी कर रहे हैं। प्रस्तावित बातचीत में AI-driven cyberattacks, advanced frontier models और दोनों देशों के AI labs के बीच safety information sharing जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। हालांकि बैठक की तारीख, स्थान और final agenda अभी officially तय नहीं हुए हैं। Trump के दूसरे कार्यकाल में पहली dedicated AI वार्ता यदि यह dialogue होता है, तो Donald Trump के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और चीन के बीच AI safety पर exclusively focused पहली official bilateral discussion होगी। यह ऐसे समय प्रस्तावित है जब दोनों देश frontier AI development में एक-दूसरे के प्रमुख प्रतिस्पर्धी बने हुए हैं। AI से होने वाले Cyberattacks पर US की चिंता Reuters के अनुसार Washington चाहता है कि दोनों देश AI-directed cyberattacks की monitoring को लेकर किसी तरह का cooperation विकसित करें। एक प्रस्ताव में अमेरिकी और चीनी AI laboratories से संभावित cyber threats की जानकारी साझा करने और AI-linked attacks को रोकने के लिए safeguards मजबूत करने की बात शामिल है। Frontier AI Models भी रहेंगे केंद्र में वार्ता में ऐसे frontier AI models और autonomous agents से पैदा होने वाले risks पर भी चर्चा हो सकती है, जो सीमित human supervision के साथ complex cyber operations कर सकते हैं। हाल के autonomous AI agent incidents ने global AI safety concerns को और बढ़ाया है। Scott Bessent कर सकते हैं US पक्ष का नेतृत्व सूत्रों के अनुसार अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व Treasury Secretary Scott Bessent कर सकते हैं। चीन की ओर से Vice Premier He Lifeng या senior leader Ding Xuexiang संभावित प्रतिनिधि हो सकते हैं। हालांकि participants की final list अभी तय नहीं है। Treasury ने कहा- अभी कोई Meeting तय नहीं इस पूरी development में महत्वपूर्ण बात यह है कि Reuters को U.S. Treasury spokesperson ने बताया कि फिलहाल ऐसी कोई meeting formally planned नहीं है। White House और संबंधित Chinese ministries ने भी proposed talks की official confirmation नहीं की है। इसलिए फिलहाल इसे proposed dialogue के रूप में देखा जा रहा है। Trump-Xi Summit से पहले महत्वपूर्ण पहल प्रस्तावित AI dialogue का समय इसलिए भी अहम है क्योंकि Donald Trump और Chinese President Xi Jinping की 24 सितंबर को Washington में summit होने वाली है। Chinese officials AI safety dialogue को leaders’ summit के संभावित deliverables में से एक मान रहे हैं। source – Reutersजय राष्ट्र न्यूज़

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