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“प्रमाण दो या रावण दहन बंद करो!” महाकाल मंदिर के पुजारी के नोटिस से उज्जैन में नई बहस

उज्जैन, 18 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश के उज्जैन में दशहरे से पहले रावण दहन की परंपरा को लेकर बहस तेज हो गई है। महाकाल मंदिर से जुड़े पुजारी महेश पुजारी ने शहर की चार प्रमुख दशहरा आयोजन समितियों को कानूनी नोटिस भेजकर सवाल उठाया है कि रावण दहन का उल्लेख किस वेद, पुराण या धार्मिक ग्रंथ में मिलता है। उन्होंने आयोजकों से सात दिनों के भीतर शास्त्रीय प्रमाण देने या इस परंपरा को बंद करने की मांग की है।

चार दशहरा समितियों को भेजा गया कानूनी नोटिस

अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज की ओर से चार प्रमुख दशहरा आयोजन समितियों को नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई है। आयोजकों से धार्मिक ग्रंथों के आधार पर जवाब मांगा गया है। नोटिस में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर न्यायालय का रुख करने की चेतावनी भी दी गई है।

महेश पुजारी का क्या है तर्क?

महेश पुजारी का कहना है कि वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में रावण वध का वर्णन मिलता है, लेकिन उनके अनुसार इन ग्रंथों में रावण के पुतले को सार्वजनिक रूप से जलाने की परंपरा का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। उनका तर्क है कि धार्मिक परंपराओं के शास्त्रीय आधार पर चर्चा होनी चाहिए।

हालांकि, यह महेश पुजारी का धार्मिक और वैचारिक पक्ष है। रावण दहन की ऐतिहासिक उत्पत्ति और विभिन्न क्षेत्रों में इसके प्रचलन को समझने के लिए धार्मिक ग्रंथों के साथ-साथ लोक परंपराओं और ऐतिहासिक संदर्भों का अध्ययन भी महत्वपूर्ण है।

“प्रमाण मिला तो विरोध वापस ले लूंगा”

महेश पुजारी ने आयोजन समितियों को शास्त्रार्थ की चुनौती भी दी है। उनके मुताबिक, यदि कोई समिति धार्मिक ग्रंथों के आधार पर रावण दहन का स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत करती है, तो वह अपना विरोध वापस लेने के लिए तैयार हैं। वहीं, प्रमाण नहीं मिलने की स्थिति में उन्होंने इस परंपरा को बंद करने की मांग की है।

रावण के विद्वान ब्राह्मण होने का भी दिया हवाला

महेश पुजारी ने रावण को विद्वान और ब्राह्मण बताते हुए उसके पुतले के सार्वजनिक दहन पर आपत्ति जताई है। दूसरी ओर, दशहरे पर रावण दहन देश के कई हिस्सों में भगवान राम की विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में किया जाता है। इस परंपरा के धार्मिक, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय स्वरूप अलग-अलग हो सकते हैं।

उज्जैन में पोस्टर अभियान

रावण दहन के विरोध में उज्जैन में पोस्टर भी लगाए गए हैं। महेश पुजारी ने अपने अभियान को विभिन्न राज्यों और समुदायों से समर्थन मिलने का दावा किया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।

अब आयोजन समितियों के जवाब पर नजर

कानूनी नोटिस के बाद उज्जैन में धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या, परंपराओं के आधार और दशहरे के आयोजन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब आयोजन समितियों के जवाब और आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी। फिलहाल, नोटिस भेजे जाने से रावण दहन पर कोई प्रतिबंध स्वतः लागू नहीं होता; आगे की स्थिति संबंधित पक्षों की कार्रवाई और किसी संभावित न्यायिक आदेश पर निर्भर करेगी।

स्रोत: NDTV, Amar Ujala, Navbharat

जय राष्ट्र न्यूज़

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