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भारत में प्रदर्शनों पर कथित ‘Excessive Force’ के आरोप, UN experts ने स्वतंत्र जांच की मांग की

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2026: संयुक्त राष्ट्र (UN) के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भारत में हालिया विरोध प्रदर्शनों से निपटने के दौरान सुरक्षा बलों पर लगे कथित अत्यधिक बल प्रयोग और बड़े पैमाने पर हिरासत में लेने के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। विशेषज्ञों ने अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने के अधिकार का सम्मान करने और अहिंसक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अनावश्यक बल प्रयोग से बचने की अपील की है।

UN experts ने क्या चिंताएं जताईं?

Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने ऐसी खबरों पर चिंता जताई है जिनमें प्रदर्शनकारियों के घायल होने, कथित दुर्व्यवहार, लाठीचार्ज और प्रदर्शनों तक पहुंच सीमित किए जाने के आरोप शामिल हैं।

विशेषज्ञों ने इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने पर जोर दिया है, ताकि घटनाओं की परिस्थितियों का पता लगाया जा सके और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया पारदर्शी हो।

किन प्रदर्शनों का है जिक्र?

हाल के विरोध प्रदर्शनों में विपक्षी दलों और छात्र एवं युवा संगठनों के प्रदर्शन शामिल रहे हैं। इनमें निर्वाचन आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision यानी SIR) से जुड़े मुद्दों पर विरोध भी शामिल है।

अक्टूबर में दिल्ली में हुए कुछ प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या और पुलिस प्रतिबंधों को लेकर भी सवाल उठे थे। इन घटनाओं के संदर्भ में प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन पर बहस तेज हुई है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर प्रतिबंधों को लेकर सवाल

UN experts ने प्रदर्शन पर रोक, एहतियाती हिरासत और डिजिटल निगरानी के कथित दुरुपयोग को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लागू अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप होने चाहिए।

ऐसे प्रतिबंधों का कानूनी आधार स्पष्ट होना चाहिए और वे आवश्यक तथा परिस्थितियों के अनुपात में होने चाहिए। विशेषज्ञों ने शांतिपूर्ण असहमति जताने वालों के अधिकारों की रक्षा के महत्व पर जोर दिया है।

भारत सरकार और निर्वाचन आयोग का पक्ष

भारतीय अधिकारियों का पक्ष है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की जाने वाली कार्रवाई कानूनी प्रावधानों और सार्वजनिक सुरक्षा की जरूरतों के तहत होती है। वहीं, निर्वाचन आयोग मतदाता सूची के पुनरीक्षण को चुनावी रिकॉर्ड की सटीकता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया बताता रहा है।

मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की चिंताओं तथा आयोग के पक्ष के बीच मतभेद बने हुए हैं। इन राजनीतिक और प्रशासनिक दावों का आकलन संबंधित तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना जरूरी है।

आरोपों और स्थापित तथ्यों में अंतर जरूरी

प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग, दुर्व्यवहार और अधिकारों के उल्लंघन से जुड़े आरोपों को जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इन मामलों में स्वतंत्र जांच का उद्देश्य घटनाओं की पुष्टि करना, जिम्मेदारी निर्धारित करना और यदि उल्लंघन साबित हों तो उचित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

Protest policing पर अंतरराष्ट्रीय नजर

भारत में हालिया विरोध प्रदर्शनों के बाद पुलिस की रणनीति, हिरासत में लेने की प्रक्रिया, बैरिकेडिंग और बल प्रयोग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हुई है। Reuters की रिपोर्टिंग में प्रदर्शन प्रबंधन से जुड़े नियमों और पुलिस की कार्रवाई के तरीकों पर सवालों का उल्लेख किया गया है।

इस मामले में आगे की जांच और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन भी चर्चा का प्रमुख विषय बना रहेगा।

Source: Reuters, UN Human Rights Office (OHCHR)

जय राष्ट्र न्यूज़

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