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Operation Sindoor ने दुनिया को दिखाई IAF की तेज Combat Readiness: Air Chief Marshal AP Singh

गाजियाबाद: भारतीय वायुसेना प्रमुख Air Chief Marshal A.P. Singh ने कहा है कि Operation Sindoor ने भारतीय वायुसेना (IAF) की तेज परिचालन क्षमता और युद्ध के लिए तैयार रहने की ताकत को प्रदर्शित किया। उन्होंने 8 अक्टूबर 2026 को हिंडन एयरबेस पर वायुसेना के 94वें स्थापना दिवस के अवसर पर कहा कि बदलते सुरक्षा माहौल में एयर पावर की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है और IAF किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार है।

Operation Sindoor से मिली अहम सीख

Air Chief Marshal AP Singh के मुताबिक, पिछले वर्ष हुए Operation Sindoor ने भारतीय वायुसेना की परिचालन गति, आपसी समन्वय और combat preparedness को प्रदर्शित किया।

उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वायुसेना बेहद कम समय में अपने संसाधनों को सक्रिय कर सकती है और मिशन की आवश्यकताओं के अनुसार तेजी से कार्रवाई कर सकती है। इस ऑपरेशन से मिली सीख भविष्य की रणनीति और सैन्य तैयारियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।

हर चुनौती के लिए तैयार है IAF

वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमताएं लगातार मजबूत हो रही हैं। बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों और नई सैन्य तकनीकों के बीच वायुसेना को सतर्क और युद्ध के लिए तैयार रहना जरूरी है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी आपात स्थिति में प्रभावी प्रतिक्रिया देने के लिए प्रशिक्षण, समन्वय और संसाधनों की उपलब्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Network-centric force बन रही भारतीय वायुसेना

AP Singh ने भारतीय वायुसेना को तेजी से विकसित होती नेटवर्क-केंद्रित सैन्य शक्ति बताया। आधुनिक युद्ध में लड़ाकू विमानों के साथ सेंसर, निगरानी प्रणालियों, संचार नेटवर्क और हथियार प्लेटफॉर्म के बीच बेहतर तालमेल जरूरी हो गया है।

इन प्रणालियों का प्रभावी एकीकरण वायुसेना को तेजी से जानकारी जुटाने, परिस्थितियों का आकलन करने और सटीक निर्णय लेने में मदद करता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम है Air Power

वायुसेना प्रमुख ने कहा कि मौजूदा सुरक्षा माहौल में एयर पावर की भूमिका केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है। यह राष्ट्रीय हितों की रक्षा, संभावित विरोधियों को रोकने और संकट के समय तेजी से कार्रवाई करने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

बदलते क्षेत्रीय और वैश्विक हालात के बीच मजबूत वायु शक्ति देश की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बनी हुई है।

Operation Sindoor में IAF की भूमिका

Operation Sindoor के दौरान भारतीय वायुसेना ने अपने लड़ाकू और सहायक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हुए सैन्य अभियानों में भाग लिया था। Air Chief के अनुसार, इस ऑपरेशन से मिले अनुभव भविष्य की परिचालन योजनाओं और सैन्य आधुनिकीकरण में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

ऑपरेशन ने कम समय में तैयारी करने, विभिन्न सैन्य संसाधनों के बीच तालमेल और मिशन के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया देने की अहमियत को भी रेखांकित किया।

आधुनिक तकनीक पर बढ़ रहा फोकस

भारतीय वायुसेना पारंपरिक लड़ाकू विमानों के साथ आधुनिक तकनीकों को भी अपनी युद्ध क्षमता में शामिल करने पर जोर दे रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, उन्नत मिसाइलें, एकीकृत एयर डिफेंस नेटवर्क और स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म भविष्य के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

इन तकनीकों के प्रभावी इस्तेमाल से निगरानी, लक्ष्य की पहचान, संचार और परिचालन समन्वय को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

Fighter squadron की संख्या बनी चुनौती

भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता के बावजूद लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है। वायुसेना को अपनी आवश्यक परिचालन क्षमता बनाए रखने के लिए नए लड़ाकू विमानों की समय पर आपूर्ति और पुराने विमानों के स्थान पर आधुनिक प्लेटफॉर्म शामिल करने की जरूरत है।

Air Chief पहले भी कह चुके हैं कि आवश्यक स्तर बनाए रखने के लिए भारत को हर साल लगभग 36 से 40 लड़ाकू विमान शामिल करने की आवश्यकता है।

Tejas Mk-1A की डिलीवरी में देरी पर चिंता

Tejas Mk-1A कार्यक्रम में देरी ने वायुसेना के आधुनिकीकरण की योजनाओं पर दबाव बढ़ाया है। लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या निर्धारित स्तर से कम होने के कारण नए विमानों की समय पर डिलीवरी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आने वाले वर्षों में स्वदेशी लड़ाकू विमानों को शामिल करना वायुसेना की क्षमता बढ़ाने और परिचालन जरूरतों को पूरा करने के लिहाज से अहम होगा।

Future warfare के लिए तैयारी

Air Chief ने भविष्य के युद्धों में गति, सटीकता, खुफिया जानकारी और तकनीक की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया। वायुसेना पारंपरिक एयर पावर के साथ साइबर, अंतरिक्ष, मानवरहित प्रणालियों और नेटवर्क आधारित अभियानों पर भी ध्यान बढ़ा रही है।

आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति के अनुरूप तैयारी करना वायुसेना की दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

भारतीय वायुसेना का 94वां स्थापना दिवस

भारतीय वायुसेना ने 8 अक्टूबर 2026 को अपना 94वां स्थापना दिवस मनाया। हिंडन एयरबेस पर आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और पूर्व वायुसेना प्रमुखों सहित कई गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया।

इस अवसर पर वायुसेना की उपलब्धियों, बदलती परिचालन जरूरतों और भविष्य की चुनौतियों पर जोर दिया गया।

जवानों की ट्रेनिंग और अनुशासन को बताया ताकत

Air Chief Marshal AP Singh ने वायुसेना के कर्मियों की पेशेवर क्षमता, समर्पण और अनुशासन की सराहना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विमान और आधुनिक तकनीक महत्वपूर्ण हैं, लेकिन किसी भी सैन्य बल की वास्तविक ताकत उसके जवानों के प्रशिक्षण, अनुशासन और तैयारी में होती है।

Operation Sindoor का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वायुसेना को भविष्य में भी तेज प्रतिक्रिया और मजबूत combat readiness बनाए रखने की दिशा में काम करना होगा।

स्रोत: Hindustan Times, The Times of India, The Economic Times और Bharat Shakti

जय राष्ट्र न्यूज़

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