नई दिल्ली: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने अमेरिका में Permanent Labor Certification यानी PERM कार्यक्रम से अपने निलंबन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इससे उसकी वर्कफोर्स रणनीति और ग्राहकों के साथ चल रहे प्रोजेक्ट्स पर कोई बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। कंपनी ने यह भी दोहराया कि वह अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15,000 अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती के अपने लक्ष्य पर कायम है।
US ने TCS समेत कई टेक कंपनियों पर लगाई रोक
अमेरिकी प्रशासन ने TCS समेत कई बड़ी टेक्नोलॉजी और IT सर्विसेज कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस सूची में Infosys, Wipro, HCLTech, Cognizant, Capgemini, Microsoft और Adobe जैसी कंपनियां भी शामिल हैं।
इस कार्रवाई से संबंधित कंपनियों की नई और कुछ लंबित PERM अर्जियों की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसका असर विशेष रूप से उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के जरिए अमेरिका में स्थायी निवास पाने की प्रक्रिया में हैं।
क्या है PERM कार्यक्रम?
PERM यानी Permanent Labor Certification, अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है।
इसके तहत नियोक्ता को यह प्रमाणित करना होता है कि संबंधित पद के लिए पर्याप्त योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं और विदेशी कर्मचारी को नियुक्त करने से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन तथा कामकाजी परिस्थितियों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
PERM प्रक्रिया में रुकावट आने से उन विदेशी कर्मचारियों के स्थायी निवास की योजनाओं में देरी हो सकती है, जिनके मामले इस प्रक्रिया पर निर्भर हैं।
TCS ने कहा—वर्कफोर्स रणनीति नहीं बदलेगी
TCS का कहना है कि PERM कार्यक्रम से निलंबन के बावजूद उसकी अमेरिकी वर्कफोर्स रणनीति में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं होगी।
कंपनी के मुताबिक, उसका भर्ती मॉडल स्थानीय प्रतिभाओं और विश्वविद्यालयों से कैंपस भर्ती पर भी आधारित है। ऐसे में PERM कार्यक्रम पर उसकी निर्भरता सीमित रहने के कारण इस फैसले का तत्काल परिचालन प्रभाव कम रहने की उम्मीद है।
पिछले दो वर्षों में PERM आवेदन बेहद कम
TCS ने बताया कि पिछले दो वर्षों में उसने PERM प्रक्रिया के तहत बहुत कम आवेदन दाखिल किए थे। कंपनी का मानना है कि इसी वजह से मौजूदा निलंबन का उसके दैनिक कामकाज पर सीमित असर पड़ेगा।
हालांकि, इस फैसले से प्रभावित कर्मचारियों के व्यक्तिगत इमिग्रेशन मामलों में देरी या अनिश्चितता बनी रह सकती है।
अमेरिका में 15,000 नौकरियों का लक्ष्य बरकरार
TCS ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15,000 अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती करने की अपनी योजना दोहराई है। कंपनी स्थानीय प्रतिभाओं, विश्वविद्यालयों और अन्य भर्ती माध्यमों के जरिए अमेरिकी वर्कफोर्स का विस्तार करने पर जोर दे रही है।
यह लक्ष्य कंपनी की अमेरिकी बाजार में दीर्घकालिक मौजूदगी और स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं को नियुक्त करने की रणनीति का हिस्सा है।
Client projects पर भी असर की उम्मीद नहीं
TCS ने कहा है कि PERM निलंबन से उसके मौजूदा ग्राहक प्रोजेक्ट्स और सेवाओं पर कोई बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अमेरिकी श्रम विभाग की ओर से जारी निर्देशों का पालन करेगी।
फिलहाल कंपनी अपने परिचालन और ग्राहक सेवाओं को सामान्य रूप से जारी रखने को लेकर आश्वस्त है।
भारतीय IT कंपनियों पर क्या हो सकता है असर?
PERM निलंबन का प्रभाव कंपनियों के दैनिक कामकाज की तुलना में उन कर्मचारियों पर अधिक पड़ सकता है, जो रोजगार आधारित स्थायी निवास की प्रक्रिया में हैं।
ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में देरी होने से कुछ कुशल विदेशी कर्मचारियों के दीर्घकालिक इमिग्रेशन प्लान प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, इसका वास्तविक असर प्रत्येक कर्मचारी की मौजूदा स्थिति और उसके आवेदन के चरण पर निर्भर करेगा।
अमेरिकी सरकार ने क्यों की कार्रवाई?
रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने इमिग्रेशन कार्यक्रमों के कथित दुरुपयोग और अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंताएं जताई हैं।
अमेरिकी अधिकारियों ने कुछ कंपनियों पर विदेशी कर्मचारियों की भर्ती को प्राथमिकता देने और वेतन पर दबाव डालने से जुड़े आरोप लगाए हैं। PERM कार्यक्रम पर निलंबन इसी व्यापक इमिग्रेशन नीति से जुड़ा कदम बताया जा रहा है।
H-1B और PERM में क्या है अंतर?
PERM पर रोक का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित कंपनियों में काम कर रहे सभी H-1B वीजा धारकों की नौकरियां तुरंत प्रभावित हो जाएंगी।
H-1B एक अस्थायी रोजगार वीजा है, जबकि PERM रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का एक चरण है। हालांकि, स्थायी निवास के लिए PERM प्रक्रिया पर निर्भर कर्मचारियों को देरी और अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है।
TCS के तिमाही नतीजे भी मजबूत
इसी बीच TCS ने सितंबर तिमाही के मजबूत वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर करीब 15 प्रतिशत बढ़कर 13,884 करोड़ रुपये रहा, जबकि राजस्व लगभग 11.8 प्रतिशत बढ़कर 74,525 करोड़ रुपये पहुंच गया।
कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन को उसके कारोबार की स्थिति के महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में देखा जा रहा है।
AI कारोबार में भी तेज वृद्धि
TCS का वार्षिकीकृत AI राजस्व 3 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया है। कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय कारोबार में विस्तार पर ध्यान दे रही है।
9 अक्टूबर को कंपनी के शेयरों में भी तेजी दर्ज की गई। निवेशकों की नजर कंपनी के अंतरराष्ट्रीय कारोबार, AI से होने वाली आय और भविष्य की वृद्धि की संभावनाओं पर बनी हुई है।
फिलहाल परिचालन पर सीमित असर
TCS के बयान से संकेत मिलता है कि कंपनी फिलहाल PERM निलंबन को अपने अमेरिकी कारोबार के लिए बड़ा परिचालन झटका नहीं मान रही है। स्थानीय भर्ती और कैंपस हायरिंग के जरिए कंपनी अपने विस्तार की योजना जारी रखना चाहती है।
हालांकि, PERM प्रक्रिया पर निर्भर कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड मिलने की समयसीमा को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है।
स्रोत: Reuters, The Economic Times, The Indian Express और India Today
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