नई दिल्ली, 5 नवंबर 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 4 नवंबर को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। केंद्र सरकार ने लिथियम और निकेल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए ₹2,814 करोड़ की योजना स्वीकृत की है। इसके साथ ही महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों की तेज सुनवाई के लिए 850 फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों की योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने का फैसला किया गया है।
₹2,814 करोड़ से स्थापित होंगे चार खनिज प्रसंस्करण संयंत्र
केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी।
योजना के तहत देश में चार नए प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिनमें दो लिथियम और दो निकेल के होंगे।
सरकार पात्र निवेश पर 30% तक पूंजीगत सब्सिडी प्रदान करेगी। लिथियम परियोजना के लिए अधिकतम ₹500 करोड़ और निकेल परियोजना के लिए ₹900 करोड़ तक सहायता दी जा सकेगी।
इस योजना का उद्देश्य विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना और देश में महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करना है।
इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
लिथियम और निकेल का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, ऊर्जा भंडारण प्रणालियों और रक्षा क्षेत्र में किया जाता है।
भारत वर्तमान में इन खनिजों से तैयार उच्च शुद्धता वाली सामग्री के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।
सरकार को उम्मीद है कि घरेलू प्रसंस्करण क्षमता विकसित होने से बैटरी निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहन और अन्य तकनीकी उद्योगों को फायदा मिलेगा।
850 फास्ट-ट्रैक अदालतों के लिए ₹3,788 करोड़ मंजूर
केंद्रीय कैबिनेट ने बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों की योजना को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी है।
इस योजना पर कुल ₹3,788.04 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी ₹2,353.15 करोड़ और राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों की हिस्सेदारी ₹1,434.89 करोड़ होगी।
केंद्र का हिस्सा निर्भया फंड से उपलब्ध कराया जाएगा।
779 से बढ़ाकर 850 की जाएंगी विशेष अदालतें
सरकार की योजना मौजूदा 779 फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों की संख्या बढ़ाकर 850 करने की है।
प्रत्येक अदालत में एक समर्पित न्यायिक अधिकारी, विशेष लोक अभियोजक और छह सहायक कर्मचारियों की व्यवस्था होगी।
अदालतों का विस्तार लंबित मामलों की संख्या के आधार पर किया जाएगा, ताकि बलात्कार और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों का जल्द निपटारा हो सके।
अर्थव्यवस्था और न्याय व्यवस्था पर पड़ेगा असर
केंद्र सरकार के इन फैसलों का उद्देश्य दो अलग-अलग क्षेत्रों में सुधार करना है।
महत्वपूर्ण खनिज योजना से भारत की औद्योगिक आत्मनिर्भरता बढ़ने और विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता घटने की उम्मीद है।
वहीं, फास्ट-ट्रैक अदालतों के विस्तार से महिलाओं और बच्चों से जुड़े यौन अपराधों के लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी लाने का लक्ष्य रखा गया है।
दोनों योजनाओं का वास्तविक प्रभाव उनके समयबद्ध क्रियान्वयन और राज्यों के सहयोग पर निर्भर करेगा।
जय राष्ट्र न्यूज़

