नई दिल्ली, 5 नवंबर 2026: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, बुधवार 4 नवंबर को दिल्ली का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 377 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। यह पिछले 288 दिनों में दिल्ली का सबसे खराब वायु गुणवत्ता स्तर रहा। इसी बीच वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में लापरवाही को लेकर पांच जिलों के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
दिल्ली के कई इलाकों में AQI 400 के पार
दिल्ली में बुधवार शाम तक प्रदूषण की स्थिति और गंभीर हो गई। राजधानी के कई निगरानी केंद्रों पर AQI 400 के पार पहुंच गया।
आईआईटी दिल्ली में AQI 455, जहांगीरपुरी में 449, पंजाबी बाग में 446 और मुंडका में 439 दर्ज किया गया।
इसके अलावा विवेक विहार में 436, रोहिणी में 432 तथा अलीपुर और नरेला में 429 AQI रिकॉर्ड हुआ।
दिल्ली से सटे नोएडा और गुरुग्राम में भी वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में रही।
पंजाब के पांच जिलों के अधिकारियों को नोटिस
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब के पांच जिलों में पराली जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण नहीं होने के कारण अधिकारियों से जवाब मांगा है।
इन जिलों में जालंधर, फरीदकोट, बठिंडा, बरनाला और फाजिल्का शामिल हैं।
आयोग ने संबंधित उपायुक्तों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
अधिकारियों को 10 नवंबर तक जवाब देने के लिए कहा गया है। आयोग ने निगरानी और नियमों के पालन में कमियों पर सवाल उठाए हैं।
चार दिनों में नौ जिलों पर कार्रवाई
CAQM ने इससे पहले 1 नवंबर को अमृतसर और तरनतारन तथा 3 नवंबर को गुरदासपुर और कपूरथला जिलों के अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की थी।
नए नोटिस के बाद पंजाब के कुल नौ जिले आयोग की सीधी निगरानी और नियामकीय कार्रवाई के दायरे में आ गए हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन को प्रभावी कदम उठाने होंगे।
पंजाब में एक दिन में पराली जलाने की 151 घटनाएं
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के उपग्रह आधारित आंकड़ों के अनुसार, 4 नवंबर को छह राज्यों में पराली जलाने की कुल 467 घटनाएं दर्ज की गईं।
इनमें मध्य प्रदेश में 157, पंजाब में 151 और राजस्थान में 111 घटनाएं सामने आईं।
पंजाब में बठिंडा में सबसे अधिक 19 घटनाएं दर्ज हुईं। इसके बाद पटियाला में 17 तथा लुधियाना और तरनतारन में 13-13 घटनाएं रिकॉर्ड की गईं।
15 सितंबर से 4 नवंबर के बीच पंजाब में कुल 2,347 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 2,839 थी।
दिल्ली के प्रदूषण में पराली का कितना योगदान?
भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) की निर्णय सहायता प्रणाली के अनुमान के अनुसार, बुधवार को दिल्ली में पीएम2.5 प्रदूषण में क्षेत्रीय पराली जलाने का योगदान लगभग 16.28 प्रतिशत रहा।
वहीं, स्थानीय परिवहन क्षेत्र का अनुमानित योगदान 18.17 प्रतिशत दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़क की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और प्रतिकूल मौसम परिस्थितियां भी प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारण हैं।
दिवाली से पहले और बिगड़ सकती है हवा
वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली के पूर्वानुमान के अनुसार, 5 नवंबर को दिल्ली की हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में रहने की संभावना जताई गई है।
वहीं, 6 और 7 नवंबर को AQI ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच सकता है।
कम हवा की गति और मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण प्रदूषक कण वातावरण में जमा हो सकते हैं, जिससे वायु गुणवत्ता और खराब होने का खतरा है।
लोगों को प्रदूषण से बचने की सलाह
खराब वायु गुणवत्ता के दौरान बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से प्रभावित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
लोगों को अनावश्यक बाहरी गतिविधियां कम करने, अधिक प्रदूषित क्षेत्रों में अच्छी फिटिंग वाले एन95 मास्क का उपयोग करने और स्थानीय वायु गुणवत्ता की जानकारी लेते रहने की सलाह दी जाती है।
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण के उपाय भी लागू हैं।
जय राष्ट्र न्यूज़

