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IIT Bombay छात्र Sahil Wakode Death Case में प्रोफेसर Suryanarayana Doolla से Crime Branch ने करीब 8 घंटे पूछताछ की

मुंबई: IIT Bombay के छात्र Sahil Wakode की मौत के मामले में मुंबई Crime Branch ने प्रोफेसर Suryanarayana Doolla से करीब आठ घंटे तक पूछताछ की। जांच एजेंसी ने छात्र और प्रोफेसर के बीच शैक्षणिक संबंध, कथित विवाद और मृतक द्वारा पहले लगाए गए आरोपों से जुड़े सवाल पूछे। प्रोफेसर ने पूछताछ के दौरान जातिगत टिप्पणी या उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया है।

करीब आठ घंटे चली पूछताछ

Crime Branch की टीम ने प्रोफेसर Doolla को पूछताछ के लिए बुलाया और उनसे कई घंटे तक सवाल किए। रिपोर्टों के अनुसार पूछताछ करीब आठ घंटे चली, जिसमें Sahil Wakode के academic record, supervision और दोनों के बीच हुई बातचीत के बारे में जानकारी ली गई।

जातिगत टिप्पणी के आरोप से प्रोफेसर का इनकार

जांच के दौरान प्रोफेसर से उन आरोपों के बारे में भी सवाल किए गए जिनमें कथित तौर पर casteist remarks का जिक्र था। प्रोफेसर ने ऐसे किसी भी बयान या भेदभाव से इनकार किया और कहा कि उनका छात्र के साथ व्यवहार अकादमिक दायरे तक सीमित था।

Sahil Wakode की मौत के बाद शुरू हुई जांच

IIT Bombay के छात्र Sahil Wakode की मौत के बाद परिवार और छात्र संगठनों ने मामले की गहराई से जांच की मांग की थी। इसके बाद पुलिस और Crime Branch ने कॉलेज प्रशासन, faculty members और अन्य संबंधित लोगों से जानकारी जुटानी शुरू की।

Academic pressure और कथित harassment भी जांच के दायरे में

जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि Sahil पर किसी तरह का academic pressure, harassment या discrimination था या नहीं। इन सभी पहलुओं की जांच statements, electronic records और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर की जा रही है। अभी किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं हुई है।

परिवार ने उठाए थे गंभीर सवाल

Sahil के परिवार ने पहले आरोप लगाया था कि छात्र मानसिक दबाव में था और उसे संस्थान में कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। परिवार की शिकायतों के बाद मामले ने व्यापक ध्यान खींचा और छात्र संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की।

IIT Bombay प्रशासन से भी जानकारी ली जा रही

Crime Branch संस्थान से संबंधित records और communication भी देख रही है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि Sahil ने किसी औपचारिक grievance mechanism का इस्तेमाल किया था या नहीं और क्या संस्थान को पहले किसी शिकायत की जानकारी थी।

छात्र संगठनों का प्रदर्शन भी जारी

मामले के बाद कई छात्र संगठनों ने campus में प्रदर्शन किए और पारदर्शी जांच की मांग उठाई। छात्र समूहों का कहना है कि academic institutions में grievance redressal और anti-discrimination mechanisms को मजबूत किया जाना चाहिए। ये छात्र संगठनों के दावे और मांगें हैं।

Crime Branch आगे और लोगों से कर सकती है पूछताछ

जांच एजेंसी मामले में अन्य faculty members, छात्रों और प्रशासनिक अधिकारियों से भी सवाल कर सकती है। अधिकारियों का कहना है कि सभी उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मौत के पीछे किन परिस्थितियों की भूमिका थी।

अंतिम निष्कर्ष अभी बाकी

फिलहाल प्रोफेसर से पूछताछ जांच का हिस्सा है और इसे दोष सिद्धि नहीं माना जा सकता। मामले में लगाए गए आरोपों और अलग-अलग पक्षों के दावों की सत्यता पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से तय होगी।

Source – India Today / The Indian Express / Mumbai Police

जय राष्ट्र न्यूज़

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