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India-Canada CEPA की पांचवीं round की बातचीत शुरू, Canada ने trade deal जल्दी आगे बढ़ने की उम्मीद जताई

नई दिल्ली/ओटावा: भारत और कनाडा के बीच Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) पर पांचवें दौर की बातचीत शुरू हो गई है। दोनों देश trade, investment और market access से जुड़े मुद्दों पर चर्चा आगे बढ़ा रहे हैं। कनाडा ने संकेत दिया है कि वह भारत के साथ trade deal को अपेक्षाकृत तेज गति से आगे बढ़ाने के पक्ष में है। पांचवें दौर की बातचीत पर फोकस नए round में दोनों देशों के negotiators goods trade, services, investment और regulatory issues से जुड़े अहम बिंदुओं पर चर्चा कर रहे हैं। बातचीत का उद्देश्य उन क्षेत्रों में सहमति बनाना है जहां दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने की पर्याप्त संभावना है। Canada ने जल्दी progress की उम्मीद जताई कनाडाई पक्ष ने कहा है कि वह CEPA negotiations में तेजी चाहता है और जहां संभव हो, जल्दी समझौते की दिशा में बढ़ना चाहता है। इससे संकेत मिलता है कि दोनों देश लंबे समय से चल रही trade discussions को अब ज्यादा concrete framework में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। Goods और services दोनों एजेंडे में बातचीत में केवल merchandise trade ही नहीं, बल्कि services sector भी प्रमुख एजेंडे में है। भारत IT, professional services और mobility जैसे मुद्दों पर बेहतर access चाहता है, जबकि Canada agriculture, food products, clean technology और investment opportunities पर ध्यान दे सकता है। Market access सबसे अहम मुद्दों में CEPA negotiations में tariff reduction और market access प्रमुख विषय बने हुए हैं। दोनों देशों को ऐसे sectors पर संतुलन बनाना होगा जहां domestic industry protection और export opportunities के बीच हित टकरा सकते हैं। Investment flows बढ़ाने पर भी जोर Trade deal का एक बड़ा उद्देश्य bilateral investment को बढ़ाना भी है। भारत और Canada के बीच pension funds, infrastructure, technology, clean energy और financial services में पहले से निवेश संबंध मौजूद हैं। CEPA इन flows को और institutional support दे सकता है। Political tensions के बाद economic engagement पर नजर भारत और कनाडा के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक तनाव देखा गया था। ऐसे में trade negotiations का आगे बढ़ना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि दोनों देश economic engagement को अलग track पर आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। Bilateral trade में growth की संभावना भारत और कनाडा के बीच merchandise और services trade में अभी भी काफी growth potential माना जाता है। CEPA के जरिए tariff barriers कम होने और business rules सरल होने पर bilateral trade में तेजी आ सकती है। भारतीय exporters को मिल सकता है फायदा अगर trade agreement आगे बढ़ता है, तो भारतीय exporters को textiles, pharmaceuticals, engineering goods, gems and jewellery और services sectors में बेहतर opportunities मिल सकती हैं। वहीं Canadian companies को agriculture, food processing, energy और advanced technology sectors में भारत के बड़े market तक बेहतर पहुंच मिल सकती है। Sensitive sectors पर होगी कठिन बातचीत हर trade agreement की तरह इस negotiation में भी कुछ sensitive sectors पर मतभेद रह सकते हैं। Agriculture, dairy, immigration-related mobility और regulatory standards जैसे मुद्दे बातचीत को चुनौतीपूर्ण बना सकते हैं। अगले rounds में बढ़ सकती है रफ्तार पांचवें round के बाद दोनों पक्ष unresolved chapters और technical issues पर काम जारी रख सकते हैं। अगर मौजूदा दौर में पर्याप्त progress होती है, तो आने वाले rounds में agreement के framework को तेजी से अंतिम रूप देने की कोशिश की जा सकती है। source – The Times of India / Canadian Government Statements / Trade Officials जय राष्ट्र न्यूज़

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Fed rate hike की उम्मीद घटने से Gold Prices में तेजी, कमजोर US Jobs Data ने बदला बाजार का मूड

नई दिल्ली/सिंगापुर: अमेरिकी Federal Reserve द्वारा अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना कम होने के बाद सोमवार को सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिली। कमजोर US jobs data और पिछले महीनों के payroll आंकड़ों में downward revision के बाद बाजार ने Fed के aggressive rate hike की उम्मीद घटा दी। Spot gold करीब 0.3% बढ़कर $4,153.56 प्रति ounce तक पहुंच गया, जबकि December US gold futures करीब 0.5% बढ़कर $4,181.70 पर रहे। कमजोर US Jobs Data से बदली उम्मीदें सितंबर के अमेरिकी रोजगार आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे। इसके अलावा पिछले महीनों के non-farm payroll numbers में भी downward revisions हुए, जिससे यह संकेत मिला कि US labour market की रफ्तार पहले अनुमान से कम हो सकती है। इसी वजह से traders ने अक्टूबर में Fed rate hike की संभावना कम कर दी। October rate hike की संभावना सिर्फ 18% Market pricing के मुताबिक अक्टूबर में Federal Reserve द्वारा rate hike की संभावना अब करीब 18% रह गई है। कुछ दिन पहले यह संभावना काफी ज्यादा थी। कमजोर labour-market data के बाद investors को उम्मीद है कि Fed तत्काल aggressive tightening से बच सकता है। दिसंबर में फिर बढ़ सकती हैं ब्याज दरें अक्टूबर में rate hike की संभावना कम हुई है, लेकिन market अभी Fed के tightening cycle को खत्म नहीं मान रहा। Reuters के अनुसार दिसंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 81% तक बनी हुई है। यानी सोने के लिए short-term sentiment बेहतर हुआ है, लेकिन आगे की monetary policy अभी भी महत्वपूर्ण रहेगी। हाल में Fed ने बढ़ाई थी ब्याज दर Federal Reserve ने हाल में ब्याज दरों में 25 basis points की बढ़ोतरी कर benchmark range को 3.75%-4.00% तक पहुंचाया था। यह तीन वर्षों में Fed की पहली rate hike थी। इसके बाद बाजार लगातार यह अनुमान लगाने की कोशिश कर रहा है कि अगला कदम कब उठाया जाएगा। Rate hike की उम्मीद घटे तो Gold को क्यों मिलता है फायदा? सोना खुद कोई interest नहीं देता। जब interest rates बढ़ने की संभावना कम होती है, तो bonds और अन्य interest-bearing assets की relative attractiveness कम हो सकती है। ऐसे में gold जैसे non-yielding assets की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। मजबूत Dollar ने तेजी को किया सीमित हालांकि सोने में तेजी आई, लेकिन मजबूत अमेरिकी dollar ने gains को सीमित रखा। Dollar index करीब 0.4% मजबूत हुआ। Dollar मजबूत होने से अन्य currencies इस्तेमाल करने वाले buyers के लिए gold महंगा हो जाता है, जिससे demand पर दबाव पड़ सकता है। Gold के साथ Silver और Platinum भी चढ़े Precious metals market में तेजी केवल gold तक सीमित नहीं रही। Silver करीब 1.7% बढ़कर $61.40 प्रति ounce, platinum करीब 1.1% बढ़कर $1,716.92 और palladium करीब 0.3% बढ़कर $1,165.40 तक पहुंच गया। Geopolitical tension से भी Gold को support Middle East में बढ़ते geopolitical tensions भी gold को support कर रहे हैं। Yemen में Saudi-backed government और Iran-backed Houthis के बीच तनाव बढ़ने से safe-haven assets की मांग मजबूत रह सकती है। $4,000 से ऊपर बना हुआ है Gold हाल के दिनों में US Treasury yields ऊंचे रहने के बावजूद gold $4,000 प्रति ounce से ऊपर टिके रहने में सफल रहा है। Analysts इसे central-bank buying, reserve diversification और geopolitical uncertainty से मिलने वाले structural support से जोड़ रहे हैं। Indian Markets पर भी असर Global gold prices में तेजी का असर भारतीय bullion market पर भी पड़ सकता है। भारत में घरेलू gold prices international rates के साथ-साथ rupee-dollar exchange rate, import duties और local demand से प्रभावित होती हैं। इसलिए वैश्विक तेजी और कमजोर रुपया मिलकर घरेलू सोना महंगा कर सकते हैं। आगे किन आंकड़ों पर रहेगी नजर? अब investors की नजर US inflation data, Federal Reserve officials के statements और अगले jobs reports पर रहेगी। अगर अमेरिकी economy में कमजोरी के और संकेत मिलते हैं तो अक्टूबर rate hike की संभावना और कम हो सकती है, जिससे gold को अतिरिक्त support मिल सकता है। source – Reuters / The Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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वित्त मंत्रालय ने सितंबर तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की growth 7.3% रहने का अनुमान जताया

नई दिल्ली: वित्त मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक GDP growth करीब 7.3% रहने का अनुमान जताया है। मंत्रालय के Monthly Economic Review में कहा गया कि पहली तिमाही की तुलना में growth थोड़ी धीमी हो सकती है, लेकिन घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियां अभी भी मजबूत बनी हुई हैं। पहली तिमाही में रही थी 7.8% growth अप्रैल-जून 2026 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.8% की वास्तविक GDP growth दर्ज की थी। वित्त मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक दूसरी तिमाही में growth 7.3% रह सकती है, यानी गति कुछ कम होगी लेकिन expansion मजबूत स्तर पर बनी रहेगी। Nowcasting model से आया अनुमान वित्त मंत्रालय ने दूसरी तिमाही की growth का आकलन अपने nowcasting model के आधार पर किया है। इस मॉडल को इस साल के Economic Survey में पेश किया गया था और इसका इस्तेमाल उपलब्ध high-frequency indicators के आधार पर GDP growth का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है। सितंबर में manufacturing activity रही मजबूत सितंबर 2026 में भारत की factory activity सात महीने के उच्च स्तर पर पहुंची। एक निजी सर्वे के अनुसार मजबूत घरेलू और विदेशी मांग की वजह से manufacturing sector में नई तेजी देखने को मिली और hiring तथा business confidence में भी सुधार हुआ। GST collection ₹2 लाख करोड़ के पार सितंबर में GST collection सालाना आधार पर 14.7% बढ़कर ₹2 लाख करोड़ से ऊपर पहुंच गया। Auto dispatch, UPI transactions और private equity तथा venture capital investments में भी मजबूती दर्ज की गई, जिससे घरेलू आर्थिक गतिविधियों में momentum का संकेत मिला। वैश्विक जोखिम अभी भी बने हुए वित्त मंत्रालय ने मजबूत growth outlook के साथ कई जोखिमों की ओर भी ध्यान दिलाया है। भू-राजनीतिक तनाव, महंगा crude oil, वैश्विक financial conditions में tightening और imported inflation भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बने हुए हैं। रुपये और महंगाई पर भी नजर ऊंची crude oil prices और मजबूत डॉलर के कारण रुपये तथा inflation पर दबाव बढ़ सकता है। मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया कि बाहरी झटकों के बावजूद services exports, remittances और विदेशी मुद्रा भंडार भारतीय अर्थव्यवस्था को कुछ सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं। दूसरी तिमाही के आधिकारिक GDP आंकड़े बाद में 7.3% का आंकड़ा फिलहाल वित्त मंत्रालय का अनुमान है, आधिकारिक GDP growth figure नहीं। सांख्यिकी मंत्रालय के release calendar के मुताबिक जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के आधिकारिक GDP estimates 30 नवंबर 2026 को जारी किए जाने हैं। मजबूत घरेलू मांग से मिल रहा सहारा सरकार का मानना है कि consumption, manufacturing और services में activity के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था की underlying momentum मजबूत बनी हुई है। हालांकि आने वाले महीनों में crude prices, inflation, global interest rates और external demand growth की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। source – Ministry of Finance / Ministry of Statistics & Programme Implementation / Reuters / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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‘1947 में हम अमेरिका के बराबर थे, फिर गड़बड़ी कहां हुई?’ दावे पर बहस; आंकड़ों में क्या है सच्चाई

नई दिल्ली: भारत की आजादी के समय आर्थिक स्थिति की तुलना अमेरिका से करने वाला दावा एक बार फिर चर्चा में है। “1947 में हम अमेरिका के बराबर थे, फिर गड़बड़ी कहां हुई?” जैसे दावे सोशल मीडिया और राजनीतिक-आर्थिक बहसों में सामने आते रहे हैं, लेकिन ऐतिहासिक आर्थिक आंकड़े बताते हैं कि स्वतंत्रता के समय भारत और अमेरिका आर्थिक रूप से बराबर स्थिति में नहीं थे। अमेरिका की अर्थव्यवस्था पहले से थी कहीं बड़ी द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका दुनिया की सबसे मजबूत औद्योगिक और वित्तीय शक्तियों में शामिल था। इसके विपरीत भारत 1947 में औपनिवेशिक शासन से बाहर आया था और देश के सामने गरीबी, कम औद्योगिक उत्पादन, सीमित बिजली व्यवस्था, कमजोर स्वास्थ्य सुविधाएं और कम साक्षरता जैसी बड़ी चुनौतियां थीं। प्रति व्यक्ति आय में भी था बड़ा अंतर भारत और अमेरिका के बीच अंतर केवल कुल अर्थव्यवस्था का नहीं था। प्रति व्यक्ति आय और उत्पादकता के मामले में भी अमेरिका भारत से काफी आगे था। इसलिए दोनों देशों को 1947 में आर्थिक रूप से बराबर बताना ऐतिहासिक आंकड़ों का सरलीकरण माना जाएगा। रुपये और डॉलर की बराबरी का दावा भी विवादित सोशल मीडिया पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि 1947 में एक रुपया और एक डॉलर बराबर थे। लेकिन ऐतिहासिक विनिमय दर से जुड़े उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि ऐसा सीधा 1:1 संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता। उस समय भारतीय रुपया ब्रिटिश पाउंड से जुड़ी मौद्रिक व्यवस्था के तहत चलता था। फिर भारत पीछे क्यों दिखाई दिया? आजादी के बाद भारत ने नियोजित अर्थव्यवस्था, सार्वजनिक क्षेत्र और आयात नियंत्रण आधारित मॉडल अपनाया। इस मॉडल के समर्थकों का कहना है कि इससे औद्योगिक आधार और सार्वजनिक संस्थान खड़े करने में मदद मिली, जबकि आलोचकों का तर्क है कि लाइसेंस-परमिट व्यवस्था, सीमित प्रतिस्पर्धा और धीमे सुधारों ने कई दशकों तक आर्थिक वृद्धि को सीमित किया। 1991 के बाद बदली आर्थिक दिशा 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद भारत ने उदारीकरण, निजी निवेश और वैश्विक व्यापार के लिए अर्थव्यवस्था को ज्यादा खोला। इसके बाद सेवा क्षेत्र, IT, विनिर्माण, विदेशी निवेश और निर्यात में तेजी आई और भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ। सवाल तुलना का नहीं, विकास की गति का विशेषज्ञों के अनुसार असली सवाल यह नहीं है कि भारत 1947 में अमेरिका के बराबर था या नहीं, बल्कि यह है कि अलग-अलग दशकों में भारत की विकास दर, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और उत्पादकता कैसे बदली। भारत ने स्वतंत्रता के बाद बुनियादी ढांचे, कृषि, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सेवा क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय और मानव विकास के कई संकेतकों में अभी भी विकसित अर्थव्यवस्थाओं से अंतर बना हुआ है। ऐतिहासिक तुलना में संदर्भ जरूरी 1947 के भारत की तुलना आज के भारत या तत्कालीन अमेरिका से करते समय जनसंख्या, युद्धोत्तर आर्थिक संरचना, औपनिवेशिक विरासत और अलग-अलग विकास मॉडल को ध्यान में रखना जरूरी है। बिना इन संदर्भों के “भारत अमेरिका के बराबर था” जैसा दावा अधूरा और भ्रामक तस्वीर पेश कर सकता है। source – भारत सरकार के संसदीय रिकॉर्ड / ऐतिहासिक आर्थिक आंकड़े / World Bank संदर्भ जय राष्ट्र न्यूज़

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रुपये पर फिर दबाव, डॉलर के मुकाबले 96 के करीब पहुंचने की आशंका; कच्चे तेल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का असर

मुंबई: भारतीय रुपया एक बार फिर दबाव में है और 1 अक्टूबर 2026 के कारोबार में डॉलर के मुकाबले 95.96 से 95.98 के आसपास खुलने का अनुमान जताया गया। एक दिन पहले रुपया 95.83 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। ऊंची कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेजी और मजबूत डॉलर रुपये पर दबाव बढ़ा रहे हैं। बाजार की नजर इस बात पर भी है कि Reserve Bank of India यानी RBI 96 के स्तर के आसपास कितनी मजबूती से हस्तक्षेप करता है। 96 के स्तर के करीब पहुंच सकता है रुपया फॉरेक्स बाजार के अनुमान के अनुसार गुरुवार को रुपया 95.96 से 95.98 प्रति डॉलर के दायरे में खुल सकता है। बुधवार को भारतीय मुद्रा ने कुछ सुधार दिखाते हुए 95.83 पर कारोबार बंद किया था, लेकिन वैश्विक संकेत फिर इसके खिलाफ जाते दिखाई दे रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतें बनी सबसे बड़ी चिंता भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर डॉलर की मांग और रुपये पर पड़ता है। Brent crude में बुधवार को करीब 2 फीसदी की तेजी आई, जबकि सितंबर में तेल की कीमतों में लगभग 14 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऊंचा तेल आयात बिल रुपये पर अतिरिक्त दबाव पैदा करता है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल अमेरिका की 10 साल की Treasury yield 2007 के बाद के उच्च स्तरों के करीब पहुंच गई है। ऊंची अमेरिकी यील्ड से डॉलर आधारित assets निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं, जिससे emerging markets की currencies पर दबाव बढ़ता है। डॉलर इंडेक्स भी तीन महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। Fed से राहत की उम्मीद भी रुपये को नहीं संभाल पा रही अमेरिकी Federal Reserve द्वारा अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना पिछले एक सप्ताह में घटी है। इसके बावजूद रुपये को ज्यादा राहत नहीं मिली क्योंकि बाजार का फोकस फिलहाल तेल की कीमतों और लंबी अवधि की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर अधिक है। 29 सितंबर को 96 के पार गया था रुपया भारतीय मुद्रा हाल ही में 96 प्रति डॉलर का स्तर पार कर चुकी है। 29 सितंबर को रुपया कारोबार के दौरान 96.1450 प्रति डॉलर तक गिरा था, जो लगभग दो महीने का निचला स्तर था। बाद में RBI के संभावित हस्तक्षेप से नुकसान कुछ कम हुआ। RBI के हस्तक्षेप पर बाजार की नजर मार्केट डीलर्स के अनुसार सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर की बिक्री को RBI के संभावित हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है। हाल के सत्रों में 96 के आसपास रुपये की गिरावट सीमित होती दिखाई दी है, जिससे बाजार में धारणा बनी है कि केंद्रीय बैंक इस स्तर पर अत्यधिक उतार-चढ़ाव नहीं चाहता। हालांकि RBI आमतौर पर किसी निश्चित exchange-rate level को आधिकारिक लक्ष्य घोषित नहीं करता। एक दिन पहले रुपये ने की थी वापसी 30 सितंबर को रुपये ने कमजोरी से वापसी करते हुए 95.83 प्रति डॉलर पर कारोबार बंद किया था। उस दिन कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, एशियाई मुद्राओं में सुधार और संभावित RBI intervention ने भारतीय मुद्रा को समर्थन दिया था। विदेशी निवेश की निकासी भी बढ़ा रही दबाव भारतीय बाजारों से विदेशी पूंजी की निकासी भी रुपये के लिए चुनौती बनी हुई है। तेल की ऊंची कीमतें, मजबूत डॉलर और वैश्विक बॉन्ड बाजार में बढ़ती यील्ड विदेशी निवेशकों के risk appetite को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे emerging markets से पूंजी बाहर जाने का खतरा बढ़ता है। भारत के आयात बिल पर पड़ सकता है असर अगर रुपया कमजोर रहता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो भारत का आयात बिल महंगा हो सकता है। इसका असर पेट्रोलियम उत्पादों, औद्योगिक कच्चे माल और डॉलर में भुगतान किए जाने वाले अन्य आयात पर पड़ सकता है। इससे महंगाई और चालू खाते पर भी दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। RBI की अगली मौद्रिक नीति भी अहम बाजार की नजर अब RBI की आगामी Monetary Policy Committee बैठक पर भी है। कुछ वित्तीय संस्थानों का अनुमान है कि ऊंची तेल कीमतों और महंगाई जोखिम को देखते हुए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों पर सख्त रुख अपना सकता है। हालांकि अंतिम फैसला RBI की MPC ही करेगी। रुपये की आगे की चाल इन संकेतों पर निर्भर आने वाले दिनों में रुपये की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर इंडेक्स, विदेशी निवेश प्रवाह और RBI की बाजार में गतिविधियों पर निर्भर करेगी। फिलहाल 96 प्रति डॉलर का स्तर बाजार के लिए अहम बना हुआ है और इसमें होने वाली हलचल पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। source – Reuters / The Economic Times / Financial Times जय राष्ट्र न्यूज़

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6 महीने के निचले स्तर के करीब शेयर बाजार, महंगे कच्चे तेल से Sensex-Nifty पर दबाव

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार पर महंगे कच्चे तेल, US-Iran तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का दबाव बना हुआ है। सोमवार की भारी गिरावट के बाद Sensex और Nifty करीब छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए। 29 सितंबर को भी बाजार की शुरुआत से पहले संकेत कमजोर रहे, जबकि Brent crude करीब $106-$107 प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। Sensex में 1,124 अंकों की बड़ी गिरावट 28 सितंबर को BSE Sensex 1,124.02 अंक यानी 1.52% गिरकर 72,771.72 पर बंद हुआ। दिनभर बाजार में बिकवाली का दबाव रहा और बैंकिंग, फाइनेंशियल, इंफ्रा, एनर्जी और रियल्टी समेत लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। Nifty 22,800 के नीचे बंद NSE Nifty 50 भी 360.25 अंक यानी 1.56% टूटकर 22,780.25 पर बंद हुआ। इस गिरावट के साथ Nifty करीब छह महीने के निचले स्तर के आसपास पहुंच गया। बाजार पिछले सात सप्ताह से लगातार दबाव में बना हुआ है। महंगा कच्चा तेल बना सबसे बड़ी चिंता भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की तेजी से आ रहा है। Brent crude सोमवार को एक समय $108 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था। 29 सितंबर के शुरुआती कारोबार में भी Brent करीब $106.7 प्रति बैरल पर बना रहा। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमत बढ़ने से देश के import bill, inflation और कंपनियों की लागत पर दबाव पड़ सकता है। US-Iran तनाव का बाजार पर असर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। Strait of Hormuz की स्थिति और दोनों देशों के बीच बातचीत में गतिरोध के कारण निवेशक जोखिम वाले assets से दूरी बना रहे हैं। इसका असर भारत समेत एशियाई शेयर बाजारों पर दिखाई दे रहा है। सभी प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली सोमवार के कारोबार में सभी प्रमुख sectoral indices गिरावट के साथ बंद हुए। PSU Bank index में करीब 3%, Telecom में लगभग 2.3% की गिरावट दर्ज हुई। Energy, Infrastructure, FMCG, Realty, Private Bank, Metal और Oil & Gas indices भी 1% से ज्यादा कमजोर हुए। Midcap-Smallcap पर भी दबाव बिकवाली केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। Nifty Midcap index करीब 1.6% और Smallcap index लगभग 1.8% गिरा। 190 से ज्यादा शेयरों ने 52-week low को छुआ, जिससे broader market में भी कमजोरी साफ दिखाई दी। विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी Foreign Institutional Investors यानी FIIs की बिकवाली भी बाजार पर दबाव बढ़ा रही है। 28 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने करीब ₹5,353 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग ₹5,189 करोड़ की खरीदारी की। घरेलू निवेशकों की खरीदारी के बावजूद विदेशी फंडों की लगातार निकासी बाजार की धारणा को कमजोर कर रही है। बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयर टूटे सोमवार की गिरावट में banking और financial stocks का बड़ा योगदान रहा। Bank Nifty करीब 1,108 अंक गिरकर 54,471 के आसपास बंद हुआ। HDFC Bank, ICICI Bank और दूसरे heavyweight शेयरों में कमजोरी से प्रमुख indices पर दबाव बढ़ा। रुपया भी ₹96 प्रति डॉलर के करीब कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय रुपये पर भी दिखाई दिया। सोमवार को रुपया कमजोर होकर करीब ₹95.98 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। डॉलर की मजबूती और महंगा crude भारतीय मुद्रा के लिए दोहरी चुनौती बन रहे हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने भी बढ़ाई चिंता US Treasury yields में तेजी से emerging markets पर दबाव बढ़ा है। अमेरिकी 10-year Treasury yield 5.2% से ऊपर पहुंच गई है। ऊंची bond yields के कारण विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी assets ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं, जिससे भारत जैसे emerging markets से capital outflow बढ़ने का खतरा रहता है। 29 सितंबर को भी सतर्क शुरुआत के संकेत 29 सितंबर की सुबह GIFT Nifty ने भारतीय बाजार के लिए लगभग सपाट से कमजोर शुरुआत के संकेत दिए। विश्लेषकों की नजर Nifty के 22,700-22,800 के दायरे पर बनी हुई है। इस स्तर से नीचे कमजोरी बढ़ने पर बाजार में आगे और बिकवाली देखने को मिल सकती है। आगे किन चीजों पर रहेगी नजर? शेयर बाजार की आगे की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमत, US-Iran तनाव, विदेशी निवेशकों की गतिविधि और अमेरिकी bond yields पर निर्भर करेगी। यदि Brent crude लंबे समय तक $100 से ऊपर बना रहता है तो भारतीय बाजार के लिए inflation और corporate margins से जुड़ी चिंताएं बनी रह सकती हैं। source – Reuters / Moneycontrol Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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आज Petrol-Diesel Rates ज्यादातर शहरों में स्थिर; Brent Crude $104 से नीचे आने से Fuel Market को राहत

नई दिल्ली, 20 सितंबर 2026: India में आज petrol और diesel के rates ज्यादातर major cities में स्थिर बने हुए हैं। Delhi, Mumbai, Kolkata और Chennai समेत बड़े शहरों में पिछले दिन के मुकाबले कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा। वहीं global market में Brent crude $104 प्रति barrel से नीचे आने से fuel market पर कुछ दबाव कम हुआ है। Delhi में Petrol ₹102.12, Diesel ₹95.20 आज के latest city-wise rates के मुताबिक: इन cities में rates broadly stable बने हुए हैं। Brent Crude $103–104 Range में Friday के global trading session में Brent crude करीब $103.87 per barrel पर था। इससे पहले Middle East tensions के कारण crude $105–107 range तक पहुंच गया था। Oil prices में हालिया नरमी Saudi Arabia की ओर से additional crude supply और Middle East supply disruptions को लेकर कुछ easing expectations से जुड़ी है। Retail Fuel Prices में अभी बड़ा Cut नहीं Brent crude नीचे आने के बावजूद India में petrol-diesel retail rates में आज कोई major nationwide reduction नहीं हुआ है। Retail prices पर global crude के अलावा rupee-dollar exchange rate, central और state taxes, transportation cost और oil marketing companies की pricing strategy का भी असर पड़ता है। Rupee की कमजोरी अभी भी चिंता India अपनी crude oil जरूरतों का बड़ा हिस्सा imports से पूरा करता है। ऐसे में Rupee कमजोर होने पर imported crude की landed cost बढ़ जाती है। हाल के sessions में Rupee ₹96 प्रति Dollar के आसपास दबाव में रहा है, जिससे crude prices में गिरावट का पूरा फायदा domestic fuel prices तक पहुंचने में समय लग सकता है। Middle East Tension अभी खत्म नहीं Crude prices में फिलहाल कुछ नरमी आई है, लेकिन Strait of Hormuz, Saudi oil infrastructure और Houthi attacks को लेकर geopolitical risks अभी बने हुए हैं। इसलिए global oil prices में आगे भी volatility देखने को मिल सकती है। Consumers को फिलहाल राहत आज के rates में major hike नहीं होने से daily commuters को immediate राहत है। हालांकि Hyderabad, Kolkata और Mumbai जैसे cities में petrol अभी भी ₹110 प्रति litre से ऊपर बना हुआ है। source – Business Today / Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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CBDT ने Tax Recovery Rules से ‘Arrest और Detention’ के Provisions हटाए; अब Property-Based Recovery पर जोर

नई दिल्ली, 19 सितंबर 2026: Central Board of Direct Taxes (CBDT) ने tax arrears की recovery से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। Income-tax Rules, 2026 के Rule 225 से arrest और detention in prison को prescribed recovery mechanism के रूप में हटा दिया गया है। संशोधन 17 सितंबर को notify किया गया था और इसे 1 April 2026 से retrospective effect दिया गया है। Tax Default पर अब Arrest Prescribed Recovery Route नहीं Rule 225 में पहले tax defaulter की गिरफ्तारी और civil prison में detention से जुड़े provisions मौजूद थे। CBDT ने अब arrest से संबंधित provision और उससे जुड़े procedural clauses को delete कर दिया है। इसका मतलब है कि इन Rules के तहत outstanding tax recover करने के लिए personal arrest अब prescribed route नहीं रहेगा। Property Attach और Sell करने की Power रहेगी Tax authorities के पास recovery के दूसरे mechanisms अभी भी उपलब्ध रहेंगे। इनमें: जैसे measures शामिल हैं। इसलिए tax dues की recovery बंद नहीं हुई है; केवल prescribed recovery framework से arrest और detention को हटाया गया है। सभी Arrest Powers खत्म नहीं हुईं एक जरूरी clarification यह है कि यह amendment Income-tax Act के तहत कहीं और मौजूद किसी अलग statutory arrest power को अपने आप खत्म नहीं करता। बदलाव खास तौर पर Rule 225 के prescribed tax recovery process से arrest और detention को हटाता है। Valuers और Tax Practitioners को 6 महीने की राहत CBDT ने valuers और authorised income-tax practitioners के नए registration framework में transition के लिए deadline भी बढ़ा दी है। पहले deadline 30 September 2026 थी, जिसे अब 31 March 2027 तक बढ़ा दिया गया है। Valuers के लिए Form 169 में ज्यादा Disclosure Revised Form 169 में valuers को educational qualification, professional experience, previous employment और पिछले तीन वर्षों में किए गए valuation assignments की विस्तृत जानकारी देनी होगी। Registration अलग-अलग asset classes के लिए किया जाएगा, जिसमें land, buildings, securities, machinery, jewellery और works of art जैसी categories शामिल हैं। Income-Tax Practitioners के लिए भी नया Form CBDT ने Form 171 को भी revise किया है। Authorised income-tax practitioner बनने वाले applicants को qualifications और existing professional registration समेत additional details देनी होंगी। Applicants को यह certify करना होगा कि उन्होंने income-tax authorities के सामने कम से कम एक वर्ष तक practice की है। Electronic Communication को भी बढ़ावा नए Income-tax (Fourth Amendment) Rules, 2026 में Rule 176 में भी बदलाव किया गया है। कुछ communications को “digital signature affix” करके serve करने की पुरानी wording की जगह अब electronic communication के जरिए service का provision रखा गया है। source – CBDT / Business Standard / The Economic Times / The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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UPI और ATM Charges को लेकर बहस तेज; ₹2,000 से ऊपर Merchant Payments पर MDR बना मुद्दा

नई दिल्ली, 19 सितंबर 2026: UPI transactions और banking charges को लेकर social media पर बहस तेज हो गई है। 15 October से चुनिंदा ₹2,000 से ज्यादा के Person-to-Merchant UPI payments पर 0.4% MDR लागू होने वाला है। हालांकि Finance Ministry ने स्पष्ट किया है कि सामान्य consumers के Person-to-Person UPI transfers free रहेंगे और करीब 96% merchant transactions नए charge से प्रभावित नहीं होंगे। Customer को सीधे नहीं देना होगा UPI Charge Government के मुताबिक MDR कोई consumer transaction fee नहीं है। इसे merchant payment ecosystem के participants—banks, payment apps और service providers—के बीच distribute किया जाएगा। हालांकि retailers और industry associations ने चिंता जताई है कि merchants इस अतिरिक्त cost को prices में जोड़ सकते हैं या cash payments को बढ़ावा दे सकते हैं। ₹2,000 से ऊपर के Payments पर 0.4% MDR New framework में specified merchant transactions पर 0.4% MDR लगाया जाएगा। ₹2,000 तक के merchant payments, Person-to-Person transfers और eligible small merchants के transactions free रहेंगे। ATM Charges अलग मामला ATM withdrawal charges UPI MDR से अलग हैं। Banks अपने customers को निर्धारित free ATM transactions देते हैं और limit खत्म होने के बाद applicable bank/ATM charges वसूल सकते हैं। इसलिए UPI के नए merchant charge और ATM withdrawal fees को एक ही नई policy बताना सही नहीं होगा। Banking customers पहले से ATM, debit card, SMS और कुछ अन्य services पर अलग-अलग charges दे सकते हैं। Traders में भी बढ़ रहा विरोध आज Ghaziabad में कुछ traders ने नए MDR के विरोध में दुकानों के बाहर UPI payment स्वीकार नहीं करने के notices लगाने शुरू किए हैं। वहीं Maharashtra के fuel dealers 27 September को meeting करके तय करेंगे कि UPI payments जारी रखे जाएं या नहीं। Supreme Court में भी पहुंचा मामला UPI MDR framework को Supreme Court में चुनौती दी गई है। Petition में तर्क दिया गया है कि merchant पर लगने वाला अतिरिक्त खर्च अंततः consumers तक पहुंच सकता है। Court ने अभी इस challenge पर कोई final फैसला नहीं दिया है। Dhruv Rathee वाला हिस्सा: अगर आप उनका video/reel/X post link या screenshot भेज दें, तो मैं उनके exact statement को verify करके इसी news में जोड़ दूँगा। source – Finance Ministry / Reuters / The Indian Express / Aaj Tak जय राष्ट्र न्यूज़

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मुख्यमंत्री विजय का UK दौरा; ₹15,300 करोड़ के निवेश समझौते, 10,000 से ज्यादा रोजगार की उम्मीद

चेन्नई, 17 सितंबर 2026: Tamil Nadu के Chief Minister C. Joseph Vijay छह दिन के अपने पहले आधिकारिक United Kingdom दौरे के बाद Chennai लौट आए। Tamil Nadu Government के मुताबिक इस यात्रा के दौरान राज्य को करीब ₹15,300 करोड़ के investment commitments मिले हैं, जिनसे 10,000 से ज्यादा direct और indirect jobs पैदा होने की उम्मीद है। 14 September को London में हुए प्रमुख Agreements Government के मुताबिक Guidance Tamil Nadu और अलग-अलग global companies के बीच 14 September को London में MoUs और Letters of Intent formalise किए गए। ये investments auto components, research and development, renewable energy, power-grid equipment और Global Capability Centres (GCCs) जैसे sectors से जुड़े हैं। Motherson का ₹11,000 करोड़ का बड़ा Investment सबसे बड़ा commitment Samvardhana Motherson International और उसकी European-UK joint venture companies की ओर से आया है। Company ने design, engineering, manufacturing, assembly और logistics से जुड़े projects में करीब ₹11,000 करोड़ निवेश करने का agreement किया है। इससे लगभग 7,000 jobs बनने की उम्मीद है। EY का Chennai में ₹1,000 करोड़ GCC Ernst & Young (EY) ने Chennai के proposed Mount-Poonamallee GCC corridor में करीब ₹1,000 करोड़ का Global Capability Centre स्थापित करने के लिए MoU किया है। State government के मुताबिक इससे 2,000 से ज्यादा high-value jobs पैदा हो सकती हैं। Tiruvallur में ₹300 करोड़ का Transformer Plant UK-based Wilson Power Solutions ने Tiruvallur district में energy-efficient transformer manufacturing facility के लिए करीब ₹300 करोड़ के investment का agreement किया है। इस project से लगभग 400 रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। Sigma Technology करेगी Chennai-Trichy में Expansion Sweden की Sigma Technology Group, अपनी Indian arm Sriya Solutions के जरिए Chennai और Tiruchirappalli में GCC operations expand करेगी। इस expansion से embedded systems, electrification और industrial digitalisation में करीब 600 high-value jobs बनने का अनुमान है। India-UK Trade Opportunities पर भी हुई चर्चा UK दौरे के दौरान CM Vijay ने Indian High Commissioner Kumaran Periasamy से भी मुलाकात की। दोनों के बीच India-UK Comprehensive Economic and Trade Agreement से Tamil Nadu के लिए पैदा होने वाले trade और investment opportunities पर चर्चा हुई। Opposition ने दौरे पर उठाए थे सवाल Vijay के UK दौरे को लेकर Tamil Nadu में राजनीतिक विवाद भी हुआ। BJP और DMK के कुछ नेताओं ने इसे लेकर सवाल उठाए, जबकि ruling TVK और state government ने ₹15,300 करोड़ के investment commitments की विस्तृत जानकारी जारी की। ये राजनीतिक दावे और प्रतिक्रियाएं संबंधित दलों के अपने आकलन हैं। source – Tamil Nadu Government / PTI / The Economic Times / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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