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कन्नौज में स्कूल को लेकर छात्रों का प्रदर्शन! प्रधानाध्यापक पर दुर्व्यवहार, मारपीट और जातीय भेदभाव के आरोप

कन्नौज, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के कंपोजिट विद्यालय गुगरापुर में छात्रों और अभिभावकों ने प्रभारी प्रधानाध्यापक के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्रों ने स्कूल का बहिष्कार करते हुए प्रधानाध्यापक की गाड़ी का घेराव किया और कई गंभीर आरोप लगाए। छात्रों ने लगाए गंभीर आरोप प्रदर्शन कर रहे छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि प्रधानाध्यापक बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, भेदभाव और मारपीट करते हैं। कुछ छात्रों ने जाति और समुदाय के आधार पर भेदभाव किए जाने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, ये फिलहाल छात्रों और अभिभावकों द्वारा लगाए गए आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि या जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं। प्रदर्शन के दौरान बच्चों ने प्रधानाध्यापक को हटाने की मांग करते हुए नारेबाजी की। अभिभावक भी बच्चों के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल हुए। स्कूल का बहिष्कार और गाड़ी का घेराव रिपोर्टों के अनुसार, छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया और प्रधानाध्यापक की गाड़ी को घेर लिया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से शिकायतों पर कार्रवाई करने की मांग की। स्कूल में करीब 200 छात्र पढ़ते हैं। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें पढ़ाई के बजाय दूसरे कामों में लगाया जाता है। एक रिपोर्ट में कंप्यूटर शिक्षा को लेकर भी छात्रों की शिकायत का उल्लेख है। गणित शिक्षक की कमी का मुद्दा भी उठा प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने स्कूल में गणित शिक्षक की कमी का मुद्दा भी उठाया। छात्रों के अनुसार, विज्ञान विषय के शिक्षक द्वारा गणित पढ़ाया जा रहा है और वे गणित के लिए अलग शिक्षक की मांग कर रहे हैं। यह मुद्दा केवल प्रधानाध्यापक के खिलाफ लगाए गए आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छात्रों ने स्कूल की पढ़ाई और व्यवस्था से जुड़ी शिकायतें भी प्रशासन के सामने रखीं। शिक्षकों और अभिभावकों ने भी उठाई आवाज रिपोर्टों में दावा किया गया है कि स्कूल के कुछ शिक्षक भी प्रधानाध्यापक के खिलाफ शिकायतों को लेकर आपत्ति जता चुके हैं। अभिभावकों ने बच्चों की सुरक्षा और बेहतर शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। प्रधानाध्यापक पर स्कूल परिसर में लगे पेड़ों को कटवाने के आरोप भी प्रदर्शन के दौरान सामने आए हैं। इन आरोपों की भी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। प्रशासन की कार्रवाई पर नजर मामला सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला प्रशासन छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों की किस तरह जांच करता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी कार्रवाई कर सकते हैं, जबकि जांच पूरी होने तक आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। कन्नौज की यह घटना उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, छात्र सुरक्षा और स्कूल प्रशासन की जवाबदेही को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है। स्रोत: Careers360, Times Now Navbharat, Navbharat Times, IANS Jai Rashtra News

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TRE-4 शिक्षक भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, बिहार में 32,388 शिक्षक पदों पर भर्ती का रास्ता साफ!

पटना: बिहार के लाखों शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने शिक्षक भर्ती परीक्षा के चौथे चरण यानी TRE-4.0 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती अभियान के तहत बिहार के शिक्षा विभाग में कुल 32,388 शिक्षक पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। 1 सितंबर से शुरू होंगे आवेदन BPSC के मुताबिक TRE-4.0 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 1 सितंबर 2026 से शुरू होगी। अभ्यर्थी 30 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तारीख 29 सितंबर निर्धारित की गई है। भर्ती का विस्तृत नोटिफिकेशन विज्ञापन संख्या 14/2026 के तहत जारी किया गया है। इसमें अलग-अलग शिक्षक पदों के लिए योग्यता, आयु सीमा, आरक्षण और आवेदन से जुड़ी शर्तों की जानकारी दी गई है। कक्षा 1 से 12 तक शिक्षकों की भर्ती TRE-4.0 के तहत प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक शिक्षकों के पद शामिल हैं। यानी कक्षा 1 से 12 तक पढ़ाने के इच्छुक योग्य अभ्यर्थियों के लिए सरकारी शिक्षक बनने का बड़ा अवसर सामने आया है। परीक्षा में इस बार होंगे बड़े बदलाव TRE-4.0 में परीक्षा पैटर्न को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पहली बार प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान लागू किया गया है। गलत उत्तर देने पर अंक काटे जाएंगे। इसके अलावा प्रश्नपत्र में पांचवां विकल्प भी दिया जाएगा, जिसे उत्तर नहीं देने की स्थिति में चुनना होगा। अभ्यर्थियों के लिए बड़ा मौका 32,388 पदों पर होने वाली यह भर्ती बिहार में सरकारी शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ा अवसर है। हालांकि, पदों की तुलना में अभ्यर्थियों की संख्या काफी अधिक होने की संभावना है, इसलिए प्रतियोगिता कड़ी रहने वाली है। रिपोर्टों के अनुसार TRE-4 को लेकर अभ्यर्थियों में लंबे समय से इंतजार और असंतोष भी बना हुआ था। BPSC ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि आवेदन शुरू होने से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन में अपनी पात्रता, विषय और पद से जुड़ी शर्तों को ध्यान से जांच लें। आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद उम्मीदवार निर्धारित समय सीमा के भीतर फॉर्म भर सकते हैं। TRE-4.0 नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही बिहार में 32,388 शिक्षकों की भर्ती का इंतजार खत्म हो गया है। अब लाखों अभ्यर्थियों की नजर आवेदन प्रक्रिया और परीक्षा की आगे की तैयारियों पर है। स्रोत: BPSC, NDTV, Times of India Jai Rashtra News

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संसद मार्च पर दिल्ली पुलिस का सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बयान, कहा- हालात बिगड़ने पर किया गया बल प्रयोग

नई दिल्ली: 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर निकाले गए मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। पुलिस ने अदालत में कहा कि मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी और प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ने के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बल का इस्तेमाल किया गया। दिल्ली पुलिस ने अत्यधिक बल के आरोपों को नकारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए अपने जवाब में दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से इनकार किया। पुलिस का कहना है कि अधिकारियों ने “maximum restraint” बरता और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केवल आवश्यक न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल थे और स्थिति बिगड़ने के बाद भीड़ को नियंत्रित करना जरूरी हो गया था। दिल्ली पुलिस ने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान उसके 240 से अधिक जवान घायल हुए। ‘मार्च की अनुमति नहीं थी’ दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि संसद की ओर जाने वाले इस मार्च को अनुमति नहीं दी गई थी। इससे पहले भी पुलिस ने स्पष्ट किया था कि नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू थे और बिना अनुमति मार्च या सभा की इजाजत नहीं थी। पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शन में कुछ असामाजिक तत्वों और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के शामिल होने के बाद हालात और बिगड़े। इसी आधार पर पुलिस ने अपने बल प्रयोग को उचित ठहराया है। सुप्रीम कोर्ट बनाएगा हाई-पावर कमेटी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के लिए हाई-पावर कमेटी बनाने का फैसला किया है। कमेटी में सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज, पूर्व हाई कोर्ट चीफ जस्टिस और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल किए जा सकते हैं। कमेटी पुलिस कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों की भूमिका और कथित पैलेट गन के इस्तेमाल जैसे आरोपों की भी जांच करेगी। अदालत के सामने उपलब्ध वीडियो फुटेज, CCTV और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं। अब जांच से तय होगी जिम्मेदारी संसद मार्च को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के दावों में बड़ा अंतर सामने आया है। दिल्ली पुलिस अपने बल प्रयोग को कानून-व्यवस्था की स्थिति से जोड़ रही है, जबकि प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित होने वाली कमेटी की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 20 जुलाई को हुई कार्रवाई में किस पक्ष की क्या भूमिका थी और क्या पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के दौरान तय नियमों के अनुरूप बल का इस्तेमाल किया। स्रोत: Supreme Court proceedings, Times of India, Economic Times Jai Rashtra News

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16 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने तोड़ा अनशन, सदर अस्पताल में खत्म हुई भूख हड़ताल

रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना 16 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया है। उन्होंने रांची के सदर अस्पताल में सोमवार रात भूख हड़ताल खत्म की। सरकार के फैसले के बाद खत्म हुआ अनशन देवेंद्र नाथ महतो का अनशन उस समय समाप्त हुआ जब झारखंड सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा और TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 17 अगस्त को घोषणा की कि TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं और उनसे जुड़े परिणामों एवं नियुक्ति प्रक्रियाओं को रद्द किया जाएगा। साथ ही 2014 से TDPL के जरिए हुई परीक्षाओं की जांच का फैसला भी लिया गया। सदर अस्पताल में जूस पिलाकर अनशन खत्म अनशन खत्म कराने के दौरान झारखंड सरकार के मंत्री दीपिका पांडे सिंह और इरफान अंसारी सदर अस्पताल पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार, देवेंद्र नाथ महतो ने जूस पीकर अपना अनशन समाप्त किया। इस दौरान उनके साथ मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों ने भी भूख हड़ताल समाप्त की। महतो ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए इसे छात्रों के संघर्ष की बड़ी उपलब्धि बताया। 16 दिनों तक जारी रहा संघर्ष देवेंद्र नाथ महतो ने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता की मांग को लेकर 16 दिनों तक भूख हड़ताल की। लंबे समय तक भोजन नहीं लेने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने उनके स्वास्थ्य में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन जैसी समस्याओं को लेकर चिंता जताई थी। अस्पताल में भर्ती रहने के बावजूद महतो लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने पर जोर देते रहे। JSSC-CGL रद्द होने से छात्रों में खुशी सरकार के फैसले के बाद आंदोलनकारी छात्रों में खुशी देखी गई। JSSC-CGL समेत TDPL से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने को छात्र नेताओं ने अपनी बड़ी जीत बताया है। हालांकि, आंदोलन पूरी तरह खत्म हुआ है या नहीं, इस पर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। CBI जांच की मांग अभी बाकी छात्र आंदोलन से जुड़े संगठनों की एक प्रमुख मांग CBI जांच की भी रही है। सरकार द्वारा परीक्षाएं रद्द किए जाने के बावजूद छात्र संगठनों के एक धड़े ने कहा है कि जब तक भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रह सकता है। इसलिए परीक्षा रद्द होने के बाद भी झारखंड में भर्ती व्यवस्था और जांच को लेकर राजनीतिक एवं छात्र आंदोलन जारी रहने की संभावना है। अब आगे क्या होगा? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रद्द की गई परीक्षाओं को दोबारा कब कराया जाएगा और नई परीक्षा व्यवस्था कैसी होगी। साथ ही, सरकार को उन अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था करनी होगी, जो पहले की चयन प्रक्रिया में सफल हुए थे। निष्कर्ष 16 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने रांची के सदर अस्पताल में अपना अनशन समाप्त कर दिया। यह फैसला झारखंड सरकार द्वारा JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद आया। हालांकि, CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र आंदोलन का अगला रुख महत्वपूर्ण रहेगा। Source: Hindustan Times, Indian Express, Navbharat Times, Amar Ujala जय राष्ट्र न्यूज़

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झारखंड में बड़ा फैसला! TDPL से जुड़ी परीक्षाएं, परिणाम और नियुक्तियां रद्द

रांची: झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई विशेष कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने TSR Data Processing Private Limited (TDPL) से जुड़ी परीक्षाओं, उनके परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का ऐलान किया है। इसमें JSSC-CGL परीक्षा भी शामिल है। 2014 से TDPL से जुड़ी परीक्षाओं की होगी जांच सरकार ने TDPL के माध्यम से 2014 से आयोजित परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा और जांच का फैसला लिया है। सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रियाओं में अगर किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। TDPL से जुड़ी परीक्षाओं में JPSC और JSSC की कई महत्वपूर्ण भर्तियां शामिल रही हैं। इनमें JSSC-CGL, फील्ड वर्कर, वनरक्षक और PGT शिक्षक भर्ती जैसी परीक्षाओं का भी उल्लेख किया गया है। JSSC-CGL भी हुई रद्द सरकार के फैसले का सबसे बड़ा असर JSSC Combined Graduate Level (JSSC-CGL) परीक्षा पर पड़ा है। परीक्षा रद्द होने से उन अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है, जिन्होंने परीक्षा पास कर चयन प्रक्रिया पूरी की थी। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 2,000 उम्मीदवारों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर आगे की प्रक्रिया तय करना होगी। छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद फैसला यह फैसला झारखंड में चल रहे लंबे छात्र आंदोलन के बीच आया है। छात्र संगठन भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे थे। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। रिपोर्ट के अनुसार, TDPL और JSSC-CGL को रद्द करने के निर्णय के बाद उन्होंने अपनी 16 दिन की भूख हड़ताल समाप्त कर दी। हालांकि, छात्रों की सभी मांगें पूरी नहीं हुई हैं। आंदोलनकारी अब भी पूरे मामले में CBI जांच की मांग पर कायम हैं। लगभग 15 बड़ी परीक्षाएं सवालों के घेरे में उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार TDPL की भूमिका JPSC और JSSC की करीब 15 बड़ी परीक्षाओं में रही है। इनमें JPSC की विभिन्न सिविल सेवा परीक्षाओं के अलावा Civil Judge, Assistant Public Prosecutor, JET और अन्य भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं। JSSC की जिन परीक्षाओं का उल्लेख किया गया है, उनमें: शामिल हैं। सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार करेगी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भर्ती परीक्षाओं में सुधार के लिए एक नई व्यवस्था की दिशा में भी कदम उठाने की बात कही है। सरकार का उद्देश्य ऐसी परीक्षा प्रणाली तैयार करना है जिसमें पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों की गुंजाइश कम से कम हो और अभ्यर्थियों का भरोसा दोबारा कायम किया जा सके। सरकार ने छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सुझाव लेने के लिए एक पोर्टल की व्यवस्था की घोषणा भी की है। आगे क्या होगा? TDPL से जुड़ी परीक्षाओं और परिणामों को रद्द किए जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल है कि प्रभावित परीक्षाओं का दोबारा आयोजन कब और किस एजेंसी के माध्यम से होगा। इसके अलावा जिन उम्मीदवारों का चयन हो चुका था या जो नियुक्त होकर सेवा में आ चुके हैं, उनके मामले में भी सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने होंगे। इस फैसले से प्रभावित उम्मीदवारों के कानूनी विकल्पों पर भी नजर रहेगी। निष्कर्ष झारखंड सरकार का TDPL से जुड़ी परीक्षाओं, परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला राज्य की भर्ती व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। JSSC-CGL के रद्द होने से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य सीधे प्रभावित हुआ है। अब निगाह इस बात पर है कि सरकार दोबारा परीक्षा और प्रभावित उम्मीदवारों के लिए क्या व्यवस्था करती है। Source: The New Indian Express, NDTV, DD India, Times of India, Prabhat Khabar जय राष्ट्र न्यूज़

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ध्वजारोहण के लिए जाते समय पुलिस ने रोका? देवेंद्रनाथ महतो ने लगाया धक्कामुक्की का आरोप

रांची: झारखंड में छात्र नेता और JLKM नेता देवेंद्रनाथ महतो को लेकर पुलिस कार्रवाई का मामला एक बार फिर चर्चा में है। महतो ने आरोप लगाया है कि उन्हें ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जाते समय पुलिस ने रोक दिया और इस दौरान उनके साथ धक्कामुक्की की गई। हालांकि, इस दावे की 14 अगस्त 2026 की स्वतंत्र और विश्वसनीय रिपोर्ट से पुष्टि नहीं हो सकी है। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में देवेंद्रनाथ महतो का नाम झारखंड के छात्र आंदोलन और JPSC/JSSC से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में सामने आया है। छात्र आंदोलनों से जुड़े रहे हैं देवेंद्रनाथ महतो देवेंद्रनाथ महतो झारखंड में छात्र और युवा आंदोलनों से जुड़े प्रमुख चेहरों में रहे हैं। हाल के दिनों में उन्होंने JPSC और JSSC परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील करते हुए कहा था कि छात्रों के आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से चलने दिया जाए और ऐसा कोई कदम न उठाया जाए जिससे छात्रों का नुकसान हो। पुलिस कार्रवाई को लेकर पहले भी विवाद देवेंद्रनाथ महतो का पुलिस के साथ टकराव का मामला नया नहीं है। दिसंबर 2024 में JSSC-CGL परीक्षा को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बल प्रयोग किया था और महतो समेत कई लोगों को हिरासत में लिया गया था। उस घटना में महतो के घायल होने के आरोप भी सामने आए थे। बाद में छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सौंपने का दावा किया था। ताजा दावे की पुष्टि जरूरी ध्वजारोहण के लिए जाते समय पुलिस द्वारा रोके जाने और धक्कामुक्की किए जाने का दावा सोशल मीडिया पर चर्चा में हो सकता है, लेकिन इसे तथ्य के रूप में प्रकाशित करने से पहले पुलिस या प्रशासन का आधिकारिक पक्ष लेना जरूरी होगा। यदि घटना का वीडियो सामने आता है, तो उसमें स्थान, समय और घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि भी महत्वपूर्ण होगी। निष्कर्ष देवेंद्रनाथ महतो झारखंड के छात्र आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं और उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। लेकिन ध्वजारोहण कार्यक्रम के लिए जाते समय रोके जाने और धक्कामुक्की की ताजा घटना की अभी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस दावे को फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। Source: उपलब्ध ताजा मीडिया रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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छात्राओं का आक्रोश! स्कूल 15 किलोमीटर दूर किया तो छात्राओं ने घेरा कलेक्टर कार्यालय

[स्थान]: स्कूल को करीब 15 किलोमीटर दूर स्थानांतरित किए जाने के विरोध में छात्राओं ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। छात्राओं ने प्रशासन से स्कूल को पहले की तरह नजदीक रखने या उनके लिए सुविधाजनक वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की। स्कूल दूर होने से बढ़ी परेशानी छात्राओं का कहना है कि स्कूल को 15 किलोमीटर दूर किए जाने से रोजाना आने-जाने में काफी परेशानी होगी। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं के लिए लंबी दूरी तय करना सुरक्षा, समय और परिवहन से जुड़े सवाल खड़े करता है। प्रदर्शनकारी छात्राओं ने कहा कि स्कूल की दूरी बढ़ने से कई विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है और कुछ छात्राओं को शिक्षा छोड़ने जैसी स्थिति का भी सामना करना पड़ सकता है। कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन अपनी मांगों को लेकर छात्राएं कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं और प्रशासन के सामने अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने स्कूल को दूर किए जाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। छात्राओं ने अधिकारियों से कहा कि शिक्षा तक पहुंच आसान होना चाहिए, न कि विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त मुश्किलें पैदा करने वाला। परिवहन सुविधा की मांग प्रदर्शन के दौरान छात्राओं और उनके परिवारों की ओर से उचित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई। उनका कहना है कि यदि स्कूल को दूर रखना प्रशासनिक रूप से जरूरी है, तो विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और नियमित बस या अन्य परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। सुरक्षा को लेकर भी चिंता 15 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी को लेकर छात्राओं ने सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि रोजाना लंबी दूरी तय करने के दौरान विशेष रूप से सुबह और शाम के समय सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। अभिभावकों ने भी प्रशासन से छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की अपील की। शिक्षा पर पड़ सकता है असर प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्कूल की दूरी बढ़ने का असर केवल आने-जाने की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा। यात्रा में अधिक समय लगने से छात्राओं के पढ़ाई, आराम और परिवार के साथ समय पर भी प्रभाव पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन की सीमित उपलब्धता इस समस्या को और गंभीर बना सकती है। प्रशासन से फैसले पर पुनर्विचार की मांग छात्राओं ने प्रशासन से स्कूल को पहले के स्थान पर संचालित करने या ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की जिससे किसी विद्यार्थी को लंबी दूरी के कारण पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर न होना पड़े। उन्होंने अधिकारियों से मामले की समीक्षा कर जल्द समाधान निकालने की अपील की। छात्राओं की मांग पर अब प्रशासन की नजर कलेक्टर कार्यालय के घेराव के बाद यह मामला प्रशासन के सामने प्रमुखता से पहुंच गया है। अब देखना होगा कि अधिकारियों की ओर से स्कूल की दूरी, परिवहन और छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर क्या निर्णय लिया जाता है। छात्राओं का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि शिक्षा को सुलभ और सुरक्षित बनाए रखने की मांग को लेकर है। Source: छात्राओं, अभिभावकों और स्थानीय प्रशासन से संबंधित जानकारी। Original Report: स्कूल को 15 किलोमीटर दूर किए जाने के विरोध में छात्राओं ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और फैसले पर पुनर्विचार की मांग की। Jai Rashtra News

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विशेष विद्यार्थियों की आवाज़; शिक्षा के अधिकार के लिए चंडीगढ़ में आंदोलन!

चंडीगढ़: विशेष जरूरतों वाले विद्यार्थियों की शिक्षा और उनके अधिकारों को लेकर चंडीगढ़ में आंदोलन ने प्रशासन और शिक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि दिव्यांग और विशेष जरूरतों वाले विद्यार्थियों को समान, सुरक्षित और सुलभ शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। शिक्षा के अधिकार को लेकर उठी आवाज़ आंदोलन के दौरान विद्यार्थियों और उनके परिवारों से जुड़े लोगों ने शिक्षा व्यवस्था में मौजूद चुनौतियों को सामने रखा। उनका कहना है कि विशेष विद्यार्थियों के लिए केवल स्कूल में प्रवेश सुनिश्चित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें पढ़ाई के दौरान आवश्यक सहायक सुविधाएं, प्रशिक्षित शिक्षक और अनुकूल वातावरण भी मिलना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि विशेष जरूरतों वाले बच्चों को शिक्षा के अधिकार से किसी भी स्तर पर वंचित न होना पड़े। सुविधाओं की कमी पर सवाल प्रदर्शनकारियों ने स्कूलों में विशेष विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं को लेकर भी चिंता जताई। इनमें स्कूल भवनों तक आसान पहुंच, रैंप, सुलभ शौचालय, आवश्यक शिक्षण सामग्री और विद्यार्थियों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार सहायता जैसे मुद्दे शामिल हैं। उनका कहना है कि इन सुविधाओं की कमी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और उनके आत्मविश्वास पर पड़ता है। अभिभावकों की भी प्रमुख भूमिका आंदोलन में अभिभावकों की चिंताएं भी प्रमुखता से सामने आईं। परिवारों का कहना है कि विशेष जरूरतों वाले बच्चों की शिक्षा के लिए उन्हें कई अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अभिभावकों ने मांग की कि प्रशासन ऐसी व्यवस्था तैयार करे जिसमें परिवारों को बार-बार अलग-अलग विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें और बच्चों को आवश्यक शैक्षणिक सहायता समय पर मिल सके। प्रशिक्षित शिक्षकों की जरूरत प्रदर्शनकारियों ने विशेष शिक्षा के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों और विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ाने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि प्रत्येक विद्यार्थी की जरूरत अलग हो सकती है। इसलिए शिक्षकों को विशेष शिक्षा और समावेशी शिक्षण पद्धतियों का पर्याप्त प्रशिक्षण मिलना जरूरी है। समावेशी शिक्षा पर जोर आंदोलन का एक प्रमुख संदेश समावेशी शिक्षा को मजबूत करना रहा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विशेष जरूरतों वाले विद्यार्थी भी अन्य बच्चों के साथ सम्मानजनक और समान वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर सकें। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि किसी विद्यार्थी की दिव्यांगता उसकी शिक्षा और भविष्य के अवसरों में बाधा नहीं बननी चाहिए। प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से केवल आश्वासन के बजाय समयबद्ध कार्रवाई और स्पष्ट व्यवस्था की मांग की है। उनका कहना है कि विशेष विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर नियमित निगरानी होनी चाहिए और शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी तंत्र बनाया जाना चाहिए। शिक्षा से आगे भविष्य का सवाल विशेष विद्यार्थियों के लिए शिक्षा केवल स्कूल तक सीमित मुद्दा नहीं है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उनके आगे के रोजगार, आत्मनिर्भरता और सामाजिक भागीदारी के अवसरों से सीधे जुड़ी है। इसी वजह से आंदोलनकारियों का कहना है कि विशेष विद्यार्थियों के शिक्षा अधिकार को प्राथमिकता देना सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आंदोलन ने खींचा प्रशासन का ध्यान चंडीगढ़ में हुए इस आंदोलन ने विशेष विद्यार्थियों की शिक्षा से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है। अब निगाहें प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर हैं। यदि उठाई गई मांगों पर ठोस कदम उठाए जाते हैं, तो इससे चंडीगढ़ में विशेष जरूरतों वाले विद्यार्थियों के लिए शिक्षा व्यवस्था को अधिक सुलभ और समावेशी बनाने में मदद मिल सकती है। Source: प्रदर्शनकारियों, अभिभावकों और संबंधित प्रशासनिक पक्षों के बयान। Original Report: चंडीगढ़ में विशेष जरूरतों वाले विद्यार्थियों के शिक्षा अधिकार और आवश्यक सुविधाओं को लेकर आंदोलन। Jai Rashtra News

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नन्हे कदम, बड़ा सवाल! सड़क की मांग लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे बच्चे

सोलापुर: महाराष्ट्र के सोलापुर में सड़क की खराब स्थिति को लेकर कुछ स्कूली बच्चों का जिला प्रशासन के कार्यालय पहुंचना चर्चा का विषय बन गया। बच्चों ने अधिकारियों के सामने अपने इलाके की सड़क से जुड़ी समस्या रखी और बेहतर सड़क निर्माण की मांग की। बच्चों के इस कदम ने स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ लोगों का भी ध्यान खींचा है। सड़क की समस्या लेकर बच्चों ने उठाई आवाज जानकारी के मुताबिक, बच्चों का कहना था कि उनके इलाके में सड़क की स्थिति खराब होने के कारण उन्हें स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है। बारिश के दौरान समस्या और बढ़ जाती है, जिससे रास्ते पर कीचड़ और पानी जमा होने से आवाजाही मुश्किल हो जाती है। बच्चों ने इसी समस्या को लेकर प्रशासन के सामने अपनी बात रखने का फैसला किया। जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे बच्चे बच्चे अपनी मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। उनका उद्देश्य अधिकारियों तक यह संदेश पहुंचाना था कि सड़क की समस्या का जल्द समाधान किया जाए। बच्चों के इस कदम को देखकर कार्यालय में मौजूद लोगों का भी ध्यान उनकी ओर गया। इतनी कम उम्र में अपनी बुनियादी जरूरत के लिए प्रशासन के सामने आवाज उठाने की तस्वीरें और वीडियो चर्चा में हैं। बारिश में बढ़ जाती है परेशानी स्थानीय लोगों के अनुसार, खराब सड़क की समस्या बारिश के दौरान और गंभीर हो जाती है। पानी जमा होने और सड़क पर कीचड़ होने के कारण पैदल चलने वाले बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए रोजाना इस रास्ते से गुजरना मजबूरी है। ऐसे में सड़क की स्थिति में सुधार की मांग लंबे समय से उठती रही है। बच्चों ने प्रशासन के सामने रखा सवाल बच्चों का जिला प्रशासन तक पहुंचना सिर्फ सड़क निर्माण की मांग नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं को लेकर एक बड़ा सवाल भी माना जा रहा है। जब स्कूली बच्चों को खुद अपनी समस्या लेकर सरकारी कार्यालय पहुंचना पड़े, तो यह स्थानीय स्तर पर सड़क और नागरिक सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों को कार्रवाई की उम्मीद बच्चों की शिकायत सामने आने के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन सड़क की स्थिति का निरीक्षण कराकर जल्द जरूरी कदम उठाएगा। लोगों का कहना है कि सड़क की मरम्मत या निर्माण होने से बच्चों के साथ-साथ आसपास रहने वाले सभी लोगों को राहत मिलेगी। बच्चों की पहल बनी चर्चा का विषय अपनी समस्या को लेकर सीधे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचने वाले बच्चों की पहल ने यह संदेश दिया है कि अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए आवाज उठाने की कोई उम्र नहीं होती। बच्चों की मांग अब प्रशासन के सामने है और लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग सड़क की समस्या के समाधान के लिए कब तक कार्रवाई करता है। निष्कर्ष सोलापुर में सड़क की समस्या को लेकर बच्चों का जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचना चर्चा में है। बच्चों ने प्रशासन के सामने खराब सड़क और स्कूल आने-जाने में होने वाली परेशानी को रखा और सड़क सुधार की मांग की। अब उम्मीद है कि प्रशासन इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण करेगा और सड़क की समस्या का स्थायी समाधान निकालेगा। Source: स्थानीय रिपोर्ट्स / जिला प्रशासन से संबंधित जानकारी जय राष्ट्र न्यूज़

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सोलापुर में जिला परिषद स्कूल का स्लैब गिरा, 13 छात्र और 2 शिक्षक घायल

सोलापुर: महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के अक्कलकोट तालुका के बबलाद गांव में जिला परिषद स्कूल के पोर्च का स्लैब अचानक गिर गया। हादसे में 13 छात्र घायल हो गए। कुछ रिपोर्टों में 2 शिक्षकों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और घायल बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। अचानक गिरा स्लैब, बच्चों में मची अफरा-तफरी जानकारी के अनुसार, हादसा 10 अगस्त 2026 को दोपहर के समय हुआ। स्कूल के पोर्च की छत की एक परत अचानक नीचे गिर गई और मलबा छात्रों के ऊपर जा गिरा। मलबा गिरते ही स्कूल में चीख-पुकार मच गई। मौजूद शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने तुरंत बच्चों को मलबे से बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। 13 छात्र घायल, 2 शिक्षकों के घायल होने की भी खबर हादसे में कुल 13 छात्रों के घायल होने की पुष्टि कई रिपोर्टों में हुई है। वहीं, कुछ रिपोर्टों और वीडियो रिपोर्ट में 2 शिक्षकों के भी घायल होने की जानकारी दी गई है। घायल छात्रों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक किसी भी बच्चे को गंभीर चोट नहीं आई और उपचार के बाद घायल छात्रों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। सभी बच्चों की हालत स्थिर बताई गई है। करीब 25 साल पुरानी है स्कूल की इमारत बताया जा रहा है कि यह स्कूल भवन करीब 25 साल पुराना है। यह सोलापुर जिला परिषद द्वारा संचालित कन्नड़ माध्यम का स्कूल है, जिसमें पहली से सातवीं कक्षा तक पढ़ाई होती है। स्कूल में करीब 250 छात्र पढ़ते हैं। ऐसे में स्कूल भवन के एक हिस्से का अचानक गिरना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर संभाला मोर्चा घटना की जानकारी मिलते ही एंबुलेंस के साथ जिला परिषद के अधिकारी मौके पर पहुंचे। घायल बच्चों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। प्रशासन की ओर से स्कूल भवन की स्थिति का जायजा लेने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि स्लैब गिरने की वास्तविक वजह क्या थी। जर्जर स्कूल भवन को लेकर उठे सवाल हादसे के बाद स्थानीय स्तर पर स्कूल की पुरानी इमारत को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पुरानी इमारत को गिराकर नई स्कूल बिल्डिंग बनाने की मांग उठाई है। सवाल यह भी है कि यदि भवन पहले से कमजोर था तो वहां बच्चों की कक्षाएं क्यों संचालित की जा रही थीं। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों के पुराने सरकारी स्कूल भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान खींचा है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता स्कूल में बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे में भवन के किसी हिस्से का गिरना गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय है। अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता अब यह है कि स्कूल की इमारत की पूरी तरह जांच कराई जाए और जब तक भवन सुरक्षित घोषित न हो, तब तक बच्चों की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। प्रशासन के सामने अब बड़ी चुनौती हादसे के बाद प्रशासन के सामने स्कूल भवन की संरचनात्मक सुरक्षा की जांच और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की चुनौती है। यदि भवन के अन्य हिस्से भी कमजोर पाए जाते हैं, तो उनकी मरम्मत या पुनर्निर्माण की जरूरत पड़ सकती है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुराने स्कूल भवनों का नियमित निरीक्षण भी जरूरी माना जा रहा है। निष्कर्ष सोलापुर के बबलाद गांव में जिला परिषद स्कूल के पोर्च का स्लैब गिरने से 13 छात्र घायल हो गए। कुछ रिपोर्टों में 2 शिक्षकों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। राहत की बात यह है कि किसी गंभीर जनहानि की सूचना नहीं है और घायल छात्रों की स्थिति स्थिर बताई गई है। लेकिन इस हादसे ने करीब 25 साल पुराने स्कूल भवन की सुरक्षा और सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब प्रशासन की जांच और स्कूल भवन की आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी। Source: ABP News / TV9 Bharatvarsh / स्थानीय प्रशासन से संबंधित रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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