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UN में भारत का बड़ा बयान! Terror Listings में राजनीतिक दखल के खिलाफ उठाई आवाज

न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आतंकवाद से जुड़े प्रतिबंधों और terror listings की प्रक्रिया को लेकर भारत ने बुधवार को बड़ा बयान दिया। भारत ने UNSC से अपील की कि आतंकवादियों की सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और नियमों पर आधारित होनी चाहिए और किसी भी देश को परिषद की सदस्यता का इस्तेमाल आतंकवादियों को राजनीतिक संरक्षण देने के लिए नहीं करना चाहिए। आतंकियों को राजनीतिक संरक्षण देने पर भारत की आपत्ति भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि UNSC की सदस्यता का इस्तेमाल किसी आतंकवादी को “legitimise” करने या उसे राजनीतिक कारणों से संरक्षण देने के लिए नहीं होना चाहिए। भारत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों और आतंकवाद से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता तथा राजनीतिक प्रभाव को लेकर बहस चल रही है। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक व्यवस्था में objectivity और transparency को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। Terror Listing प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग भारत का कहना है कि आतंकवादी संगठनों और व्यक्तियों को UNSC sanctions lists में शामिल करने की प्रक्रिया स्पष्ट और तथ्य आधारित होनी चाहिए। इसी तरह किसी नाम को सूची से हटाने का फैसला भी राजनीतिक हितों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। UN Security Council के तहत आतंकवाद और counter-terrorism से संबंधित कई sanctions regimes पहले से लागू हैं। पाकिस्तान पर परोक्ष निशाना? भारत के बयान को पाकिस्तान के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई न करने का आरोप लगाता रहा है। हालांकि, ताजा बयान में भारत ने किसी एक देश का नाम लेकर आरोप लगाने के बजाय UN sanctions mechanism को मजबूत करने और राजनीतिक हस्तक्षेप रोकने पर जोर दिया। भारत पहले भी उठा चुका है मुद्दा आतंकवादी संगठनों की listing और delisting में राजनीतिक या धार्मिक आधार पर दोहरे मानदंडों के खिलाफ भारत पहले भी आवाज उठाता रहा है। भारत ने UN में यह रुख रखा है कि ऐसी प्रक्रिया objective होनी चाहिए और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई में किसी तरह का double standard नहीं होना चाहिए। भारत ने UNSC 1267 sanctions regime के तहत आतंकवादियों की listing को लेकर भी सक्रिय भूमिका निभाई है। संसद की विदेश मामलों की समिति के अनुसार, भारत ने कई आतंकवादियों को सूचीबद्ध कराने के लिए प्रस्ताव आगे बढ़ाए हैं। UNSC में सुधार की मांग भी तेज भारत का यह बयान व्यापक UN Security Council reforms की उसकी मांग से भी जुड़ा है। नई दिल्ली लंबे समय से UNSC को ज्यादा प्रतिनिधित्व वाला, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की मांग करती रही है। भारत का तर्क है कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए परिषद की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना जरूरी है। आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रुख भारत ने दोहराया है कि आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक, वैचारिक या अन्य आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता। नई दिल्ली का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई बिना भेदभाव और बिना राजनीतिक दबाव के होनी चाहिए। आज के बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल प्रमुख हो गया है कि UNSC की sanctions प्रक्रिया को कितना पारदर्शी बनाया जा सकता है और क्या सदस्य देश राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर आतंकवाद के खिलाफ एक समान नीति अपना पाएंगे। स्रोत: United Nations, Moneycontrol, Times of India, Indian diplomatic statements Jai Rashtra News

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वंदे मातरम् विवाद: गाजियाबाद कोर्ट में सोनिया गांधी के खिलाफ शिकायत दाखिल, 8 सितंबर को होगी सुनवाई

गाजियाबाद: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के खिलाफ ‘वंदे मातरम्’ से जुड़े विवाद को लेकर गाजियाबाद की एसीजेएम-द्वितीय एमपी/एमएलए अदालत में आपराधिक शिकायत दाखिल की गई है। हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने यह शिकायत 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर राष्ट्रगीत के गायन में बाधा डालने के आरोप में दाखिल की है। अदालत ने शिकायत स्वीकार करते हुए मामले में अगली सुनवाई के लिए 8 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। 15 अगस्त के कार्यक्रम से शुरू हुआ विवाद दरअसल, 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान ‘वंदे मातरम्’ का गायन हुआ था। इस दौरान सामने आए एक वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। वीडियो में सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर इशारा करते हुए कुछ कहती हुई दिखाई देती हैं। इसी वीडियो को आधार बनाकर शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के गायन में कथित रूप से बाधा डालने की कोशिश की गई। कोर्ट में वीडियो को बनाया गया आधार हिंदू सेना अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की ओर से दाखिल शिकायत में 15 अगस्त के कार्यक्रम का वीडियो भी साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया है। शिकायतकर्ता ने अदालत से इस मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की है। कोर्ट ने शिकायत को स्वीकार करते हुए अब शिकायतकर्ता के बयान दर्ज करने के लिए 8 सितंबर की तारीख निर्धारित की है। राजनीतिक विवाद भी तेज ‘वंदे मातरम्’ को लेकर विवाद केवल अदालत तक सीमित नहीं है। घटना के बाद भाजपा नेताओं की ओर से सोनिया गांधी और कांग्रेस पर सवाल उठाए गए हैं। इससे पहले इस मामले में दिल्ली और अन्य स्थानों पर भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। दिल्ली पुलिस ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से जुड़ी एक शिकायत की जांच शुरू करने की बात कही है। वहीं, कांग्रेस की ओर से इस पूरे विवाद को लेकर अलग रुख सामने आया है और भाजपा पर राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक बहस के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया का भी हिस्सा बना रह सकता है। 8 सितंबर पर टिकी नजर गाजियाबाद कोर्ट में अब 8 सितंबर को होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। इस दौरान शिकायतकर्ता का बयान दर्ज किया जाना है, जिसके बाद अदालत आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्णय ले सकती है। फिलहाल ‘वंदे मातरम्’ विवाद ने कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव को और बढ़ा दिया है और सोनिया गांधी के खिलाफ दाखिल गाजियाबाद शिकायत पर आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। स्रोत: Jagran, Live Hindustan, ANI/India’s News Jai Rashtra News

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TRE-4 शिक्षक भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, बिहार में 32,388 शिक्षक पदों पर भर्ती का रास्ता साफ!

पटना: बिहार के लाखों शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने शिक्षक भर्ती परीक्षा के चौथे चरण यानी TRE-4.0 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती अभियान के तहत बिहार के शिक्षा विभाग में कुल 32,388 शिक्षक पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। 1 सितंबर से शुरू होंगे आवेदन BPSC के मुताबिक TRE-4.0 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 1 सितंबर 2026 से शुरू होगी। अभ्यर्थी 30 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तारीख 29 सितंबर निर्धारित की गई है। भर्ती का विस्तृत नोटिफिकेशन विज्ञापन संख्या 14/2026 के तहत जारी किया गया है। इसमें अलग-अलग शिक्षक पदों के लिए योग्यता, आयु सीमा, आरक्षण और आवेदन से जुड़ी शर्तों की जानकारी दी गई है। कक्षा 1 से 12 तक शिक्षकों की भर्ती TRE-4.0 के तहत प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक शिक्षकों के पद शामिल हैं। यानी कक्षा 1 से 12 तक पढ़ाने के इच्छुक योग्य अभ्यर्थियों के लिए सरकारी शिक्षक बनने का बड़ा अवसर सामने आया है। परीक्षा में इस बार होंगे बड़े बदलाव TRE-4.0 में परीक्षा पैटर्न को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पहली बार प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान लागू किया गया है। गलत उत्तर देने पर अंक काटे जाएंगे। इसके अलावा प्रश्नपत्र में पांचवां विकल्प भी दिया जाएगा, जिसे उत्तर नहीं देने की स्थिति में चुनना होगा। अभ्यर्थियों के लिए बड़ा मौका 32,388 पदों पर होने वाली यह भर्ती बिहार में सरकारी शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ा अवसर है। हालांकि, पदों की तुलना में अभ्यर्थियों की संख्या काफी अधिक होने की संभावना है, इसलिए प्रतियोगिता कड़ी रहने वाली है। रिपोर्टों के अनुसार TRE-4 को लेकर अभ्यर्थियों में लंबे समय से इंतजार और असंतोष भी बना हुआ था। BPSC ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि आवेदन शुरू होने से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन में अपनी पात्रता, विषय और पद से जुड़ी शर्तों को ध्यान से जांच लें। आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद उम्मीदवार निर्धारित समय सीमा के भीतर फॉर्म भर सकते हैं। TRE-4.0 नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही बिहार में 32,388 शिक्षकों की भर्ती का इंतजार खत्म हो गया है। अब लाखों अभ्यर्थियों की नजर आवेदन प्रक्रिया और परीक्षा की आगे की तैयारियों पर है। स्रोत: BPSC, NDTV, Times of India Jai Rashtra News

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संसद मार्च पर दिल्ली पुलिस का सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बयान, कहा- हालात बिगड़ने पर किया गया बल प्रयोग

नई दिल्ली: 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर निकाले गए मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। पुलिस ने अदालत में कहा कि मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी और प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ने के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बल का इस्तेमाल किया गया। दिल्ली पुलिस ने अत्यधिक बल के आरोपों को नकारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए अपने जवाब में दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से इनकार किया। पुलिस का कहना है कि अधिकारियों ने “maximum restraint” बरता और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केवल आवश्यक न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल थे और स्थिति बिगड़ने के बाद भीड़ को नियंत्रित करना जरूरी हो गया था। दिल्ली पुलिस ने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान उसके 240 से अधिक जवान घायल हुए। ‘मार्च की अनुमति नहीं थी’ दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि संसद की ओर जाने वाले इस मार्च को अनुमति नहीं दी गई थी। इससे पहले भी पुलिस ने स्पष्ट किया था कि नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू थे और बिना अनुमति मार्च या सभा की इजाजत नहीं थी। पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शन में कुछ असामाजिक तत्वों और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के शामिल होने के बाद हालात और बिगड़े। इसी आधार पर पुलिस ने अपने बल प्रयोग को उचित ठहराया है। सुप्रीम कोर्ट बनाएगा हाई-पावर कमेटी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के लिए हाई-पावर कमेटी बनाने का फैसला किया है। कमेटी में सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज, पूर्व हाई कोर्ट चीफ जस्टिस और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल किए जा सकते हैं। कमेटी पुलिस कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों की भूमिका और कथित पैलेट गन के इस्तेमाल जैसे आरोपों की भी जांच करेगी। अदालत के सामने उपलब्ध वीडियो फुटेज, CCTV और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं। अब जांच से तय होगी जिम्मेदारी संसद मार्च को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के दावों में बड़ा अंतर सामने आया है। दिल्ली पुलिस अपने बल प्रयोग को कानून-व्यवस्था की स्थिति से जोड़ रही है, जबकि प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित होने वाली कमेटी की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 20 जुलाई को हुई कार्रवाई में किस पक्ष की क्या भूमिका थी और क्या पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के दौरान तय नियमों के अनुरूप बल का इस्तेमाल किया। स्रोत: Supreme Court proceedings, Times of India, Economic Times Jai Rashtra News

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रुपया फिर फिसला! डॉलर के मुकाबले ₹95.67 तक पहुंचा, महंगे कच्चे तेल और ईरान तनाव का दबाव

भारतीय रुपया एक बार फिर दबाव में नजर आया है। मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर ₹95.67 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया। रुपये में इस गिरावट के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव को प्रमुख कारण माना जा रहा है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है और इससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनता है। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव देखने को मिल रहा है। रुपये की गिरावट को सीमित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से बाजार में हस्तक्षेप किए जाने की भी खबर है। बाजार विशेषज्ञों की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की मजबूती और ईरान से जुड़े घटनाक्रम पर बनी हुई है। रुपये में लगातार कमजोरी का असर भारत के आयात बिल पर पड़ सकता है। खासतौर पर कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। इससे आने वाले समय में महंगाई पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है। हालांकि, कमजोर रुपये से निर्यात करने वाली कुछ कंपनियों को फायदा मिल सकता है, क्योंकि उन्हें विदेशी मुद्रा में होने वाली कमाई को रुपये में बदलने पर अधिक रकम प्राप्त होती है। फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर निर्भर करेगी। अगर तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो रुपये पर आगे भी दबाव देखने को मिल सकता है। स्रोत: Reuters Jai Rashtra News

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अभिजीत दीपके की डिग्री और स्कॉलरशिप पर सवाल, बोले—“मैं अपनी डिग्री दिखाने को तैयार”

नई दिल्ली: CJP संस्थापक अभिजीत दीपके की विदेश में पढ़ाई और उसकी फंडिंग को लेकर उठे सवालों के बीच विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। दीपके ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि वह अपनी डिग्री, स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन से जुड़े दस्तावेज दिखाने के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने BJP नेताओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी सवाल उठाए। Boston University की पढ़ाई पर उठे सवाल विवाद तब शुरू हुआ जब गुजरात के एक RTI कार्यकर्ता ने दीपके की विदेश में पढ़ाई के खर्च को लेकर सवाल उठाए। उनके पिता के वित्तीय मामलों की जांच की मांग भी की गई और यह सवाल उठाया गया कि अमेरिका में उनकी पढ़ाई का खर्च कैसे पूरा हुआ। दीपके ने इन सवालों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन का इस्तेमाल हुआ था। उन्होंने कहा कि उनके पास इससे संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें सार्वजनिक किया जा सकता है। “मैं अपनी डिग्री दिखाने को तैयार हूं” अभिजीत दीपके ने कहा कि अगर उनकी शिक्षा और डिग्री को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं तो वह अपनी Boston University की डिग्री दिखाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन के दस्तावेज हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दीपके ने दावा किया है कि उन्हें Boston University से Dean’s Scholarship मिली थी और पढ़ाई के बाकी खर्च के लिए एजुकेशन लोन लिया गया था। PM मोदी की डिग्री पर भी उठाया सवाल दीपके ने अपने बचाव के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री को लेकर भी सवाल खड़ा किया। उनका कहना है कि यदि उनसे उनकी शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज मांगे जा रहे हैं तो राजनीतिक नेताओं को भी अपनी डिग्रियों को सार्वजनिक करने के लिए तैयार रहना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस और तेज हो गई है। विरोधियों को भी दिया जवाब 17 अगस्त को सामने आए एक वीडियो में दीपके ने उन लोगों पर भी निशाना साधा, जो उनकी Boston University की डिग्री को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह अपनी डिग्री दिखा देंगे और साथ ही अपने आलोचकों से भी अपनी शैक्षणिक योग्यता सार्वजनिक करने की मांग की। विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बना यह मामला केवल दीपके की शिक्षा तक सीमित नहीं रहा है। उनके CJP आंदोलन और सरकार के खिलाफ उनके बयानों के कारण यह विवाद राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने भी दीपके की ओर से प्रधानमंत्री की डिग्री पर सवाल उठाने वाली टिप्पणी की आलोचना की और इसे अहंकार से जोड़कर देखा। निष्कर्ष अभिजीत दीपके की Boston University की डिग्री और विदेश में पढ़ाई की फंडिंग को लेकर उठे सवालों के बीच उन्होंने साफ कहा है कि वह अपनी डिग्री, स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन से जुड़े दस्तावेज दिखाने को तैयार हैं। वहीं प्रधानमंत्री की डिग्री को लेकर उनके सवालों ने इस विवाद को और राजनीतिक बना दिया है। फिलहाल दोनों पक्षों के बयानों के बीच यह मुद्दा सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चा में बना हुआ है। Source: PTI, India Today, ThePrint, ABP News, Navbharat Live जय राष्ट्र न्यूज़

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मुंबई के आयकर भवन के बेसमेंट में लगी आग, VIDEO आया सामने; 28 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया

मुंबई: दक्षिण मुंबई के चर्चगेट इलाके में स्थित आयकर भवन (Aayakar Bhavan) के बेसमेंट में सोमवार दोपहर आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग से निकलने वाला घना धुआं पूरी इमारत में फैल गया, जिसके बाद दमकल विभाग ने बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। करीब 2 बजे लगी आग मुंबई फायर ब्रिगेड को सोमवार दोपहर करीब 2:01 बजे आयकर भवन में आग लगने की सूचना मिली। इसके बाद दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। आग मुख्य रूप से भवन के बेसमेंट तक सीमित बताई गई, जहां बिजली की वायरिंग, इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन, रिकॉर्ड और अन्य सामान रखा था। पूरी इमारत में भर गया धुआं आग के कारण बेसमेंट से निकलने वाला धुआं केंद्रीय एयर-कंडीशनिंग सिस्टम के जरिए इमारत के दूसरे हिस्सों तक पहुंच गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि दमकलकर्मियों को धुआं बाहर निकालने के लिए कुछ खिड़कियों के शीशे तोड़ने पड़े। 28 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू दमकल विभाग ने इमारत के अलग-अलग हिस्सों से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। रिपोर्टों के अनुसार कम से कम 28 लोगों को रेस्क्यू किया गया, जिनमें ऊपरी मंजिलों और टेरेस पर फंसे लोग भी शामिल थे। कुछ लोगों को सीढ़ियों और विशेष सीढ़ियों की मदद से बाहर निकाला गया। 20 फायर टेंडर मौके पर पहुंचे आग पर काबू पाने के लिए करीब 20 फायर टेंडर और कई अन्य दमकल वाहन तैनात किए गए। राहत की बात यह रही कि अब तक किसी के घायल या हताहत होने की सूचना नहीं है। आग लगने की वजह की जांच जारी फिलहाल आग लगने का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। शुरुआती जांच में इलेक्ट्रिकल वायरिंग और उपकरणों से जुड़ी संभावना पर ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही कारण की पुष्टि होगी। VIDEO सोशल मीडिया पर वायरल आयकर भवन में लगी आग और धुएं का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में इमारत के आसपास धुआं और मौके पर मौजूद दमकल की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। निष्कर्ष चर्चगेट स्थित मुंबई के आयकर भवन के बेसमेंट में लगी आग ने कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना दिया। दमकल विभाग की तेजी से कार्रवाई के कारण 28 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और फिलहाल किसी जनहानि की खबर नहीं है। आग के कारणों और संपत्ति को हुए नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है। Source: Mumbai Fire Brigade, Mid-Day, Rediff, Free Press Journal जय राष्ट्र न्यूज़

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RBI की 19 अगस्त को आने वाली MPC मिनट्स पर बाजार की नजर, ब्याज दर और महंगाई के संकेतों का इंतजार

मुंबई: भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार की नजर अब 19 अगस्त 2026 को जारी होने वाली RBI Monetary Policy Committee (MPC) की बैठक की मिनट्स पर है। निवेशक यह समझने की कोशिश करेंगे कि केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों में ब्याज दर, महंगाई और मौद्रिक नीति को लेकर किस दिशा में आगे बढ़ सकता है। RBI ने हालिया बैठक में रेपो रेट 5.25% पर रखा RBI की 3 से 5 अगस्त को हुई MPC बैठक में समिति ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया था। MPC ने लगातार चौथी बैठक में दरों में बदलाव नहीं किया और अपना रुख Neutral बनाए रखा। अब बाजार की नजर मिनट्स पर इसलिए है क्योंकि इसमें MPC के छह सदस्यों के विचारों और भविष्य की नीति को लेकर उनके आकलन से आगे की दिशा के संकेत मिल सकते हैं। महंगाई पर भी निवेशकों की नजर जुलाई 2026 में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.45% हो गई, जो RBI के 4% मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर है। हालांकि यह अभी भी RBI की 2-6% सहनशीलता सीमा के भीतर है। खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी ने कुल CPI को ऊपर खींचा है। ऐसे में निवेशक यह देखना चाहेंगे कि MPC सदस्य महंगाई में हालिया तेजी को अस्थायी मानते हैं या आने वाले महीनों के लिए इसे बड़ा जोखिम समझते हैं। अगली ब्याज दर नीति के संकेत मिल सकते हैं हालिया बैठक में RBI ने रेपो रेट में बदलाव नहीं किया था। अब MPC मिनट्स से बाजार को यह संकेत मिलने की उम्मीद है कि मौजूदा परिस्थितियों में आगे दरों में कटौती, लंबे समय तक यथास्थिति या भविष्य में दरों में बढ़ोतरी की संभावना को लेकर सदस्यों की सोच क्या है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां आगे की नीति के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। रुपये और बॉन्ड बाजार पर भी असर MPC मिनट्स का असर केवल ब्याज दरों पर ही नहीं बल्कि रुपये और सरकारी बॉन्ड यील्ड पर भी पड़ सकता है। भारतीय रुपया हाल में डॉलर के मुकाबले दबाव में रहा है। RBI के हस्तक्षेप ने गिरावट को सीमित किया है, जबकि पश्चिम एशिया में तनाव और ऊंची तेल कीमतें रुपये के लिए चुनौती बनी हुई हैं। वहीं बॉन्ड बाजार में निवेशक यह देख रहे हैं कि RBI की नीति आगे चलकर liquidity और ब्याज दरों को किस तरह प्रभावित कर सकती है। अमेरिका-ईरान तनाव भी अहम फैक्टर बाजार के लिए RBI की नीति के साथ-साथ अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतें भी महत्वपूर्ण हैं। तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी भारत के आयात बिल और महंगाई दोनों पर दबाव डाल सकती है। इसी वजह से MPC मिनट्स में वैश्विक जोखिमों और महंगाई के बीच RBI के आकलन पर बाजार की खास नजर रहेगी। निवेशकों की नजर इन संकेतों पर 19 अगस्त को जारी होने वाली मिनट्स में बाजार मुख्य रूप से इन बातों पर ध्यान देगा: निष्कर्ष 19 अगस्त की RBI MPC मिनट्स बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत साबित हो सकती हैं। रेपो रेट फिलहाल 5.25% पर है, लेकिन जुलाई की 4.45% महंगाई और पश्चिम एशिया से जुड़े जोखिमों के बीच निवेशक यह जानना चाहते हैं कि RBI आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर कितना सतर्क रहेगा। Source: Reuters, RBI-related reports, NDTV Profit, Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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बिहार के अशोक धाम मंदिर में भगदड़ जैसी स्थिति, कम से कम 6 श्रद्धालुओं की मौत; कई घायल

लखीसराय: बिहार के लखीसराय जिले के अशोक धाम मंदिर में सोमवार सुबह श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। शुरुआती आधिकारिक जानकारी के अनुसार कम से कम 6 श्रद्धालुओं की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद मंदिर परिसर में अफरा-तफरी मच गई। श्रावण के तीसरे सोमवार पर उमड़ी थी भारी भीड़ बताया जा रहा है कि श्रावण के तीसरे सोमवार के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव को जल चढ़ाने के लिए अशोक धाम मंदिर पहुंचे थे। इसी दौरान मंदिर परिसर में भीड़ अचानक बढ़ गई और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। बैरिकेडिंग टूटने की भी बात सामने आई लखीसराय के जिलाधिकारी के अनुसार सुबह करीब 6:30 से 6:45 बजे के बीच भीड़ काफी बढ़ गई थी। शुरुआती जानकारी में मंदिर की एक तरफ की बैरिकेडिंग टूटने के बाद कई लोगों के एक-दूसरे पर गिरने की बात सामने आई है। प्रशासन ने तत्काल मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस अधिकारी ने यह भी कहा कि बिजली का खंभा गिरने और करंट लगने की बात सामने आई है, लेकिन घटना की सही वजह की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। प्रशासन ने शुरू किया राहत और बचाव कार्य घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें मंदिर पहुंचीं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा है और मौके पर भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटना पर दुख जताते हुए घायलों के समुचित और त्वरित इलाज के लिए प्रशासन को निर्देश दिए हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका घटना अभी विकासशील स्थिति में है। शुरुआती रिपोर्टों में 6 मौतों की पुष्टि हुई थी, जबकि बाद की कुछ रिपोर्टों में 7 मौतों का भी उल्लेख आया है। इसलिए फिलहाल मृतकों की संख्या को लेकर आधिकारिक अपडेट का इंतजार किया जा रहा है। निष्कर्ष लखीसराय के अशोक धाम मंदिर में श्रावण सोमवार के दौरान भारी भीड़ के बीच हुई इस त्रासदी ने मंदिरों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भगदड़ जैसी स्थिति की वास्तविक वजह क्या थी। Source: PTI, The New Indian Express, The Indian Express, Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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बाबा रामदेव का सरकार पर निशाना? सरकारी नौकरियों में ‘90-99% घोटाले’ का दावा, बोले—सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन करना पड़ेगा

हरिद्वार: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर योग गुरु बाबा रामदेव ने सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया, शिक्षा व्यवस्था और देश में कथित भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सरकारी नौकरी के इंटरव्यू में बड़े स्तर पर गड़बड़ी का दावा करते हुए कहा कि अगर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो देश में बड़े आंदोलन की स्थिति बन सकती है। सरकारी नौकरी के इंटरव्यू पर गंभीर आरोप रामदेव ने दावा किया कि सरकारी नौकरियों के इंटरव्यू में 90 से 99 प्रतिशत तक घोटाला होता है। उनके मुताबिक, कई मामलों में पहले से तय कर लिया जाता है कि किस उम्मीदवार को नौकरी देनी है और बाद में चयन प्रक्रिया उसी के अनुसार आगे बढ़ती है। उन्होंने पैसे लेकर भर्ती और पक्षपात के भी आरोप लगाए। हालांकि, 90-99 प्रतिशत के इस आंकड़े के समर्थन में रामदेव ने कोई आधिकारिक आंकड़ा या दस्तावेज पेश नहीं किया है। इसलिए इसे उनके द्वारा लगाया गया आरोप/दावा ही माना जाना चाहिए। जाति और विचारधारा को लेकर भी सवाल रामदेव ने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर भर्ती में योग्यता के बजाय संगठन, विचारधारा, जाति और वर्ग जैसे कारकों का प्रभाव पड़ता है। उन्होंने ऐसी व्यवस्था को युवाओं के साथ अन्याय बताते हुए भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की जरूरत पर जोर दिया। ‘नहीं सुधरे तो आंदोलन करना पड़ेगा’ रामदेव ने व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताते हुए आंदोलन की चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि वह अराजकता या हिंसक आंदोलन के समर्थक नहीं हैं, लेकिन अगर कथित गड़बड़ियों को दूर नहीं किया गया तो लोगों और युवाओं में असंतोष बढ़ सकता है और उन्हें दोबारा आंदोलन के लिए उतरना पड़ सकता है। शिक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल रामदेव ने सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की व्यवस्थाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बुनियादी सुविधाओं जैसे शिक्षक, पानी, बिजली, शौचालय और किताबों की उपलब्धता को लेकर शिकायतों का जिक्र किया। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किए बिना युवाओं के भविष्य को बेहतर नहीं बनाया जा सकता। राजनीति में संवाद की अपील रामदेव ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से राजनीतिक मतभेदों को दुश्मनी में नहीं बदलने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की अपनी जिम्मेदारी है और देशहित में आपसी संवाद तथा सम्मान जरूरी है। क्या यह सीधे मोदी सरकार पर हमला था? रामदेव के बयान में सरकारी व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया पर तीखे सवाल जरूर उठाए गए, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उनका मुख्य फोकस सरकारी नौकरी, इंटरव्यू, शिक्षा व्यवस्था और कथित भ्रष्टाचार पर था। इसलिए इसे सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्यक्तिगत हमला बताने के बजाय सरकारी व्यवस्था पर रामदेव की आलोचना के रूप में देखना ज्यादा सटीक होगा। निष्कर्ष स्वतंत्रता दिवस पर बाबा रामदेव के बयान ने सरकारी भर्ती और शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। 90-99% घोटाले के उनके दावे और आंदोलन की चेतावनी ने राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को तेज कर दिया है। हालांकि, उनके लगाए गए प्रतिशत संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या आधिकारिक आंकड़ों से पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। Source: ABP News, NewsTak, Peoples Update जय राष्ट्र न्यूज़

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