सरकार ने Cochin Shipyard में हिस्सेदारी बिक्री के लिए OFS शुरू किया, निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी

नई दिल्ली, 7 जुलाई। केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा एवं जहाज निर्माण कंपनी Cochin Shipyard Limited (CSL) में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए Offer for Sale (OFS) प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पेशकश के तहत सरकार पहले चरण में कंपनी की 2.52 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी, जबकि अधिक मांग होने पर ग्रीन-शू विकल्प के माध्यम से अतिरिक्त 2.52 प्रतिशत हिस्सेदारी भी बेची जा सकती है। इस तरह कुल 5.04 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री की संभावना है। ₹1,400 प्रति शेयर रखा गया फ्लोर प्राइस सरकार ने OFS के लिए ₹1,400 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है, जो घोषणा से पहले के बाजार भाव की तुलना में लगभग 7 प्रतिशत कम है। यह छूट निवेशकों को आकर्षित करने और हिस्सेदारी बिक्री को सफल बनाने के उद्देश्य से दी गई है। दो चरणों में होगी बोली DIPAM (Department of Investment and Public Asset Management) के अनुसार, OFS के पहले दिन गैर-खुदरा (Non-Retail) निवेशकों के लिए बोली खोली गई है, जबकि 8 जुलाई को खुदरा निवेशक और पात्र कर्मचारी इसमें भाग ले सकेंगे। सरकार के विनिवेश कार्यक्रम का हिस्सा यह हिस्सेदारी बिक्री केंद्र सरकार के चालू वित्त वर्ष के विनिवेश कार्यक्रम का हिस्सा है। सरकार सार्वजनिक उपक्रमों में हिस्सेदारी घटाकर संसाधन जुटाने और पूंजी बाजार में भागीदारी बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। Cochin Shipyard रक्षा एवं समुद्री क्षेत्र की प्रमुख सरकारी कंपनियों में शामिल है। पहले दिन निवेशकों की मजबूत प्रतिक्रिया OFS के पहले दिन गैर-खुदरा निवेशकों की ओर से अच्छी मांग देखने को मिली। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, यह निर्गम 3.5 गुना से अधिक सब्सक्राइब हुआ, जिसके बाद सरकार ने अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने के लिए ग्रीन-शू विकल्प का भी पूरा उपयोग करने का निर्णय लिया। शेयर बाजार पर असर OFS की घोषणा के बाद Cochin Shipyard के शेयरों में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट देखी गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रियायती फ्लोर प्राइस और अतिरिक्त शेयर आपूर्ति के कारण अल्पकालिक दबाव बना, हालांकि कंपनी के दीर्घकालिक व्यवसायिक दृष्टिकोण को लेकर निवेशकों का विश्वास कायम है। कंपनी की रणनीतिक भूमिका Cochin Shipyard भारत की अग्रणी जहाज निर्माण और जहाज मरम्मत कंपनियों में शामिल है। कंपनी भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल और वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए आधुनिक जहाजों का निर्माण करती है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। आगे क्या? अब बाजार की नजर खुदरा निवेशकों की भागीदारी और OFS के अंतिम परिणाम पर रहेगी। यदि खुदरा श्रेणी में भी अच्छी मांग बनी रहती है, तो सरकार को इस हिस्सेदारी बिक्री से महत्वपूर्ण राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सरकार के व्यापक विनिवेश कार्यक्रम को गति देने में सहायक होगा। स्रोत:विनिवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM), भारत सरकार। मूल रिपोर्ट:7 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी एवं विश्वसनीय वित्तीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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IMD का अलर्ट: मुंबई में ऑरेंज अलर्ट, दिल्ली-एनसीआर में बारिश और तेज़ हवाओं की चेतावनी

नई दिल्ली/मुंबई, 7 जुलाई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सक्रिय मानसून प्रणाली को देखते हुए मुंबई और आसपास के क्षेत्रों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 24 घंटों के दौरान कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं दिल्ली-एनसीआर में भी गरज-चमक, मध्यम से तेज़ बारिश और तेज़ हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। मुंबई में भारी बारिश की संभावना IMD के अनुसार मुंबई, ठाणे, रायगढ़ और पालघर के कुछ हिस्सों में लगातार बारिश का दौर जारी रह सकता है। कई स्थानों पर अल्प समय में भारी वर्षा होने की आशंका है, जिससे जलभराव और यातायात प्रभावित हो सकता है। स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है। दिल्ली-एनसीआर में बदलेगा मौसम दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद सहित पूरे एनसीआर क्षेत्र में दिनभर बादल छाए रहने, गरज-चमक के साथ बारिश और 30–50 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज़ हवाएं चलने का अनुमान है। इससे तापमान में गिरावट आने और उमस से राहत मिलने की संभावना है। प्रशासन अलर्ट मोड पर मुंबई महानगरपालिका (BMC), दिल्ली नगर निगम और संबंधित जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। जलभराव संभावित क्षेत्रों में पंपिंग स्टेशनों, राहत दलों और आपातकालीन सेवाओं को तैयार रखा गया है। रेलवे, यातायात पुलिस और नागरिक सुरक्षा एजेंसियां भी मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। लोगों के लिए IMD की सलाह मौसम विभाग ने नागरिकों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, बिजली गिरने की संभावना के समय खुले मैदानों में न रुकने तथा स्थानीय प्रशासन और IMD द्वारा जारी मौसम बुलेटिन का पालन करने की अपील की है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। किसानों के लिए भी परामर्श IMD ने किसानों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाने की सलाह दी है। भारी वर्षा की संभावना वाले क्षेत्रों में फसलों की सुरक्षा, जल निकासी और आवश्यक कृषि प्रबंधन उपाय अपनाने की सिफारिश की गई है। अन्य राज्यों में भी मानसून सक्रिय मौसम विभाग के अनुसार महाराष्ट्र के अलावा गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में भी अगले कुछ दिनों तक मानसून सक्रिय रहेगा। कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है और संबंधित राज्य सरकारों को आवश्यक तैयारियां रखने के निर्देश दिए गए हैं। आगे की स्थिति IMD ने कहा है कि मानसून की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर नए अलर्ट जारी किए जाएंगे। नागरिकों से आधिकारिक मौसम अपडेट पर ध्यान देने और अफवाहों से बचने की अपील की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई के दूसरे सप्ताह में भी देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश का दौर जारी रह सकता है। स्रोत:भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), संबंधित राज्य प्रशासन एवं आधिकारिक मौसम बुलेटिन। मूल रिपोर्ट:7 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के ‘मिसिंग लिंक’ मार्ग पर यातायात बहाल, भूस्खलन के बाद प्रशासन अलर्ट

मुंबई, 7 जुलाई। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के नए ‘मिसिंग लिंक’ (कनेक्टिंग लिंक) सेक्शन पर भारी मानसूनी बारिश के कारण हुए भूस्खलन के बाद बंद किया गया मुंबई की ओर जाने वाला मार्ग अब दोबारा खोल दिया गया है। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) ने मलबा हटाने और विस्तृत सुरक्षा निरीक्षण पूरा होने के बाद यातायात बहाल करने की अनुमति दी। टनल-2 के पास हुआ भूस्खलन अधिकारियों के अनुसार भूस्खलन टनल-2 के निकास क्षेत्र के पास हुआ, जहां भारी बारिश के कारण बड़ी मात्रा में मिट्टी और चट्टानें सड़क पर आ गईं। एहतियात के तौर पर मुंबई की ओर जाने वाला मार्ग तत्काल बंद कर दिया गया ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। 18 घंटे बाद यातायात सामान्य MSRDC, पुलिस और आपदा प्रबंधन टीमों ने युद्धस्तर पर मलबा हटाने का अभियान चलाया। सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद लगभग 18 घंटे के भीतर यातायात दोबारा शुरू कर दिया गया। हालांकि कुछ हिस्सों में वाहनों की गति नियंत्रित रखी गई है और निगरानी जारी है। मानसून के बीच बढ़ाई गई निगरानी लगातार हो रही बारिश को देखते हुए प्रशासन ने पूरे घाट क्षेत्र में अतिरिक्त निगरानी शुरू कर दी है। संवेदनशील स्थानों पर इंजीनियरों और तकनीकी टीमों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी संभावित भूस्खलन की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। यात्रियों से सावधानी बरतने की अपील अधिकारियों ने यात्रियों से मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करने की अपील की है। भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और यातायात पुलिस द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। आवश्यकता पड़ने पर वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की भी अपील की गई है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज घटना के बाद एक्सप्रेसवे परियोजना की गुणवत्ता और मानसून के लिए तैयारियों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। राज्य सरकार ने कहा है कि रिकॉर्ड बारिश के कारण यह स्थिति बनी और भविष्य में ऐसे जोखिम कम करने के लिए तकनीकी समीक्षा कराई जाएगी। भविष्य की रणनीति विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी घाट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार भू-वैज्ञानिक निगरानी, ढलानों की मजबूती और वर्षा जल निकासी व्यवस्था को और बेहतर बनाने की आवश्यकता है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मानसून के पूरे मौसम में मिसिंग लिंक सेक्शन पर 24 घंटे निगरानी रखी जाएगी ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। स्रोत:महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC), महाराष्ट्र पुलिस एवं आधिकारिक प्रशासनिक जानकारी। मूल रिपोर्ट:7 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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11 जुलाई को भारतीय नौसेना में शामिल होगी INS Mahendragiri, समुद्री शक्ति को मिलेगा बड़ा बल

नई दिल्ली, 7 जुलाई। भारतीय नौसेना 11 जुलाई को विशाखापत्तनम में आयोजित एक विशेष समारोह में स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट INS Mahendragiri (F38) को आधिकारिक रूप से अपने बेड़े में शामिल करेगी। यह युद्धपोत Project 17A के तहत निर्मित छठा स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट है और भारत की समुद्री सुरक्षा तथा रक्षा आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। Project 17A का अहम पड़ाव INS Mahendragiri, भारतीय नौसेना के Warship Design Bureau (WDB) द्वारा डिजाइन किया गया है और इसका निर्माण Mazagon Dock Shipbuilders Limited (MDL), मुंबई ने किया है। यह Project 17A (Nilgiri-class) कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके तहत आधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट विकसित किए जा रहे हैं ताकि भारतीय नौसेना की बहु-भूमिका (Multi-Mission) क्षमता को और मजबूत किया जा सके। 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और प्रणालियों का उपयोग किया गया है। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। इसमें अनेक भारतीय कंपनियों द्वारा विकसित सेंसर, संचार प्रणाली और अन्य महत्वपूर्ण उपकरण लगाए गए हैं। आधुनिक हथियारों और स्टेल्थ तकनीक से लैस INS Mahendragiri को अत्याधुनिक स्टेल्थ डिजाइन के साथ विकसित किया गया है, जिससे इसकी रडार पहचान क्षमता काफी कम हो जाती है। इसमें आधुनिक मिसाइल प्रणाली, उन्नत रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, पनडुब्बी रोधी हथियार और बहु-भूमिका युद्ध क्षमता उपलब्ध है। यह सतह, वायु और पनडुब्बी—तीनों प्रकार के खतरों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम है। CODOG प्रणाली से मिलेगी तेज रफ्तार युद्धपोत में Combined Diesel or Gas (CODOG) प्रोपल्शन प्रणाली का उपयोग किया गया है, जो आवश्यकता के अनुसार उच्च गति और लंबी दूरी तक संचालन की क्षमता प्रदान करती है। यह युद्धपोत समुद्री निगरानी, एस्कॉर्ट मिशन, मानवीय सहायता, आपदा राहत और युद्ध अभियानों सहित विभिन्न प्रकार के ऑपरेशन में उपयोगी होगा। हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की क्षमता विशेषज्ञों का मानना है कि INS Mahendragiri के शामिल होने से भारतीय नौसेना की Eastern Fleet और हिंद महासागर क्षेत्र में परिचालन क्षमता और मजबूत होगी। यह जहाज समुद्री मार्गों की सुरक्षा, रणनीतिक निगरानी और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को देखते हुए इस तरह के आधुनिक युद्धपोतों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। रक्षा आत्मनिर्भरता का प्रतीक रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार INS Mahendragiri केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता, तकनीकी दक्षता और रक्षा आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने युद्धपोत निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और Project 17A इसका महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। भविष्य की दिशा 11 जुलाई को कमीशनिंग के बाद INS Mahendragiri भारतीय नौसेना की सक्रिय सेवा का हिस्सा बन जाएगी। इसके शामिल होने से नौसेना की युद्ध क्षमता, समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत अभियानों और क्षेत्रीय रणनीतिक उपस्थिति को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऐसे और स्वदेशी युद्धपोत भारतीय नौसेना की शक्ति को और बढ़ाएंगे। स्रोत:भारतीय रक्षा मंत्रालय, भारतीय नौसेना एवं आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति। मूल रिपोर्ट:Press Information Bureau (PIB), भारतीय नौसेना तथा 7 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया पहुंचे, रक्षा, व्यापार और समुद्री सहयोग को मिलेगी नई गति

जकार्ता/नई दिल्ली, 7 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी आधिकारिक विदेश यात्रा के तहत सोमवार को इंडोनेशिया पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं ने रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति व्यक्त की। हालिया बैठकों के दौरान दोनों देशों ने कई क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण समझ और समझौतों को अंतिम रूप दिया। रक्षा सहयोग को नई मजबूती वार्ता में रक्षा क्षेत्र प्रमुख विषयों में शामिल रहा। दोनों देशों ने सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग सहयोग, संयुक्त अभ्यास, रक्षा प्रौद्योगिकी और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षित एवं नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धता भी दोहराई गई। व्यापार और निवेश बढ़ाने पर सहमति भारत और इंडोनेशिया ने द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। दोनों पक्षों ने निवेश को प्रोत्साहित करने, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत बनाने तथा फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, विनिर्माण, डिजिटल सेवाओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। व्यापारिक समुदाय के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए भी नई पहल पर सहमति बनी। समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक रणनीति इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों को देखते हुए दोनों देशों ने समुद्री सहयोग को प्राथमिकता देने पर बल दिया। नौवहन की स्वतंत्रता, समुद्री डकैती की रोकथाम, मानवीय सहायता, आपदा राहत और समुद्री निगरानी के क्षेत्र में सहयोग को और व्यापक बनाने की दिशा में चर्चा हुई। डिजिटल और तकनीकी सहयोग बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल भुगतान, साइबर सुरक्षा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। दोनों देशों ने नवाचार, स्टार्टअप और डिजिटल अर्थव्यवस्था में साझेदारी को भविष्य के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया। ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर चर्चा ऊर्जा सुरक्षा, हरित ऊर्जा, जैव ईंधन, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा भी वार्ता के प्रमुख विषय रहे। दोनों देशों ने दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग के लिए इन क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं और निवेश की संभावनाओं पर विचार किया। विशेषज्ञों की राय विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत की ‘Act East Policy’ और इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण को और मजबूती प्रदान करेगी। दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की बढ़ती भागीदारी से आर्थिक, सामरिक और समुद्री सहयोग के नए अवसर खुलने की संभावना है। साथ ही यह क्षेत्रीय स्थिरता और बहुपक्षीय सहयोग को भी बढ़ावा दे सकता है। आगे की राह प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान हुई सहमतियों के आधार पर दोनों देशों के संबंधित मंत्रालय अब विभिन्न परियोजनाओं और समझौतों के क्रियान्वयन पर काम करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत और इंडोनेशिया के संबंध रक्षा, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में और अधिक मजबूत होंगे। स्रोत:भारत का विदेश मंत्रालय (MEA), इंडोनेशिया सरकार की आधिकारिक जानकारी एवं संयुक्त आधिकारिक वक्तव्य। मूल रिपोर्ट:7 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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अयोध्या राम मंदिर कथित दान गबन मामला: SIT जांच तेज, ट्रस्ट में बड़े प्रशासनिक बदलाव

अयोध्या, 7 जुलाई। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के कथित गबन मामले की जांच अब और तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) वित्तीय रिकॉर्ड, दान संग्रह प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्थाओं की विस्तृत जांच कर रहा है। इस बीच मंदिर ट्रस्ट ने प्रशासनिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण बदलाव भी किए हैं। जांच में कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आए SIT की प्रारंभिक जांच में दान की गणना और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है। जांच अधिकारियों के अनुसार दान संग्रह, नकदी प्रबंधन, CCTV निगरानी और कर्मचारियों की जिम्मेदारियों से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तार से पड़ताल की जा रही है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। ट्रस्ट में प्रशासनिक बदलाव मामले के सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में महत्वपूर्ण प्रशासनिक परिवर्तन किए गए हैं। ट्रस्ट ने नए प्रशासनिक ढांचे की दिशा में कदम उठाते हुए अंतरिम व्यवस्थाएं लागू की हैं तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। सुरक्षा व्यवस्था होगी और मजबूत जांच के साथ-साथ मंदिर परिसर में दान प्रबंधन प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नई सुरक्षा व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं। नकदी गणना कक्ष की निगरानी, CCTV कवरेज, कर्मचारियों की जांच और दान प्रक्रिया में अतिरिक्त नियंत्रण जैसे उपायों पर काम चल रहा है। आठ आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी पुलिस इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसियां आरोपियों के बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं। साथ ही कथित गबन की वास्तविक राशि और पूरे नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच जांच एजेंसियों ने मंदिर ट्रस्ट के पिछले पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड और बैंकिंग दस्तावेजों की दोबारा समीक्षा का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं पहले भी किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता तो नहीं हुई। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज मामले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। वहीं ट्रस्ट ने भरोसा दिलाया है कि जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा और यदि किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। जांच पूरी होने तक किसी भी व्यक्ति को दोषी मानना उचित नहीं होगा। आगे की राह SIT आने वाले दिनों में अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकती है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित अनियमितताओं की वास्तविक प्रकृति क्या थी और यदि किसी स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी हुई है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है। फिलहाल जांच जारी है और संबंधित एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। स्रोत:उत्तर प्रदेश पुलिस, विशेष जांच दल (SIT), श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट तथा आधिकारिक सार्वजनिक जानकारी। मूल रिपोर्ट:7 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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AICTE रिपोर्ट: एक वर्ष में 50 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज बंद, उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर नई बहस

नई दिल्ली, 6 जुलाई। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार पिछले एक वर्ष में देशभर में 50 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हुए हैं। इस घटनाक्रम ने तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता, छात्रों की बदलती पसंद, रोजगार के अवसरों और इंजीनियरिंग शिक्षा की प्रासंगिकता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। बदल रही है छात्रों की पसंद शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में छात्रों की रुचि केवल पारंपरिक इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं रही है। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग और अन्य उभरती तकनीकों से जुड़े विशेषीकृत पाठ्यक्रमों की मांग तेजी से बढ़ रही है। गुणवत्ता और रोजगार पर बढ़ा फोकस विशेषज्ञों का कहना है कि विद्यार्थी अब ऐसे संस्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं जहां बेहतर फैकल्टी, आधुनिक प्रयोगशालाएं, उद्योगों के साथ साझेदारी, इंटर्नशिप और मजबूत प्लेसमेंट की सुविधाएं उपलब्ध हों। इसी कारण गुणवत्ता आधारित शिक्षा पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। AICTE का सुधार पर जोर AICTE लगातार तकनीकी शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता सुधार, उद्योग-उन्मुख पाठ्यक्रम, डिजिटल लर्निंग और नई तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। परिषद का उद्देश्य इंजीनियरिंग शिक्षा को बदलती औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक उपयोगी और रोजगारोन्मुख बनाना है। उद्योग की बदलती जरूरतें उद्योग जगत अब ऐसे इंजीनियरों की मांग कर रहा है जिनके पास तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल, समस्या समाधान क्षमता और नई तकनीकों का अनुभव हो। इसी वजह से कई संस्थान अपने पाठ्यक्रमों में AI, मशीन लर्निंग, ऑटोमेशन और इंडस्ट्री 4.0 जैसे विषय शामिल कर रहे हैं। विशेषज्ञों की राय शिक्षा विश्लेषकों का मानना है कि कुछ इंजीनियरिंग कॉलेजों का बंद होना केवल सीटों की संख्या का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह गुणवत्ता, बुनियादी ढांचे, फैकल्टी, शोध और रोजगार क्षमता को लेकर व्यापक सुधार की आवश्यकता का संकेत भी है। उनका मानना है कि भविष्य में तकनीकी शिक्षा अधिक कौशल-आधारित और उद्योग-केंद्रित होगी। आगे की राह विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में इंजीनियरिंग संस्थानों को नई तकनीकों, अनुसंधान, नवाचार और उद्योगों के साथ सहयोग पर अधिक ध्यान देना होगा। इससे छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे और भारत की तकनीकी शिक्षा प्रणाली वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप और मजबूत बन सकेगी। स्रोत:अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE), सार्वजनिक शिक्षा संबंधी रिपोर्टें एवं उच्च शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का विश्लेषण। मूल रिपोर्ट:6 जुलाई 2026 तक उपलब्ध AICTE आंकड़ों और विश्वसनीय शिक्षा समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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गगनयान मिशन की तैयारियों को मिली रफ्तार, उन्नत अंतरिक्ष तकनीकों पर भारत का बढ़ता फोकस

नई दिल्ली, 6 जुलाई। भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ की तैयारियां लगातार आगे बढ़ रही हैं। मिशन से जुड़े विभिन्न तकनीकी परीक्षण, सुरक्षा प्रणालियों का सत्यापन और अंतरिक्ष उड़ान से संबंधित महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं पर काम जारी है। इसके साथ ही भारत के तेजी से विकसित हो रहे स्पेस सेक्टर पर उद्योग जगत और निवेशकों की भी विशेष नजर बनी हुई है। गगनयान मिशन की तैयारियां जारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) गगनयान मिशन के लिए आवश्यक प्रणालियों के परीक्षण और मिशन से जुड़े विभिन्न चरणों की तैयारी कर रहा है। मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए सुरक्षा, विश्वसनीयता और तकनीकी दक्षता सुनिश्चित करना इस मिशन की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्नत अंतरिक्ष तकनीकों पर बढ़ा जोर मानव अंतरिक्ष मिशन के साथ-साथ पुनःप्रवेश (Re-entry) तकनीक, जीवन समर्थन प्रणाली (Life Support System), अंतरिक्ष यान सुरक्षा, संचार नेटवर्क और मिशन नियंत्रण जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के विकास पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। निजी स्पेस सेक्टर को मिल रहा बढ़ावा भारत में निजी अंतरिक्ष कंपनियों की बढ़ती भागीदारी से स्पेस इकोसिस्टम को नई गति मिली है। सैटेलाइट निर्माण, लॉन्च सेवाएं, अंतरिक्ष डेटा, पृथ्वी अवलोकन और स्पेस टेक स्टार्टअप्स में निवेश लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नवाचार और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे। निवेशकों की बढ़ी रुचि स्पेस टेक्नोलॉजी को भविष्य के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में माना जा रहा है। उद्योग विश्लेषकों के अनुसार अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते सरकारी और निजी निवेश से भारतीय एयरोस्पेस एवं स्पेस उद्योग को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों की राय तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि गगनयान मिशन केवल मानव अंतरिक्ष उड़ान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भारत की अनुसंधान क्षमता, उच्च प्रौद्योगिकी निर्माण, रक्षा, संचार और औद्योगिक विकास को भी नई दिशा मिलेगी। यह मिशन भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्तियों की अग्रिम पंक्ति में और मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भविष्य की राह आने वाले महीनों में गगनयान मिशन से जुड़े कई महत्वपूर्ण परीक्षण और तकनीकी गतिविधियां होने की संभावना है। यदि सभी चरण सफलतापूर्वक पूरे होते हैं, तो भारत अपने पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की दिशा में एक और बड़ा कदम आगे बढ़ाएगा। साथ ही देश का स्पेस सेक्टर वैश्विक निवेश और तकनीकी सहयोग का प्रमुख केंद्र बन सकता है। स्रोत:भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), भारत सरकार की सार्वजनिक अंतरिक्ष संबंधी जानकारी एवं आधिकारिक अपडेट। मूल रिपोर्ट:6 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय अंतरिक्ष क्षेत्र से संबंधित सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत को इज़राइल का प्रमुख मित्र बताया, द्विपक्षीय संबंधों की सराहना की

यरुशलम, 6 जुलाई। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत को इज़राइल का एक प्रमुख और विश्वसनीय मित्र बताते हुए दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत हो रहे संबंधों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत और इज़राइल के बीच सहयोग पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक विस्तारित हुआ है और दोनों देश साझा हितों के आधार पर मिलकर आगे बढ़ रहे हैं। रणनीतिक साझेदारी पर जोर नेतन्याहू ने कहा कि भारत और इज़राइल के बीच रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, नवाचार, साइबर सुरक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को नई गति मिली है। भारत के साथ सहयोग को बताया महत्वपूर्ण इज़राइली प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण साझेदार है और दोनों देशों के बीच विश्वास, आपसी सम्मान तथा साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। उन्होंने भारत के साथ विभिन्न क्षेत्रों में जारी सहयोग की भी सराहना की। आर्थिक और तकनीकी संबंधों का विस्तार विशेषज्ञों के अनुसार भारत और इज़राइल के बीच व्यापार, स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक, कृषि नवाचार और निवेश के क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दोनों देश नई तकनीकों और अनुसंधान परियोजनाओं पर भी मिलकर काम कर रहे हैं। रक्षा सहयोग बना मजबूत आधार भारत और इज़राइल लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार रहे हैं। रक्षा उपकरण, आधुनिक तकनीक, संयुक्त अनुसंधान और सुरक्षा सहयोग दोनों देशों के संबंधों का अहम हिस्सा माने जाते हैं। विशेषज्ञों की राय विदेश नीति विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और इज़राइल के बीच मजबूत होते संबंध दोनों देशों के रणनीतिक हितों के अनुरूप हैं। बदलते वैश्विक परिदृश्य में यह साझेदारी रक्षा, तकनीक, व्यापार और नवाचार जैसे क्षेत्रों में और अधिक मजबूत हो सकती है। आगे की राह विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद, निवेश, व्यापार और तकनीकी सहयोग को और विस्तार मिलने की संभावना है। इससे भारत-इज़राइल रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिल सकती है। स्रोत:इज़राइल सरकार, भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) तथा आधिकारिक सार्वजनिक बयान। मूल रिपोर्ट:6 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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विश्व बैडमिंटन दिवस पर इतिहास रचने के करीब पी. वी. सिंधु, छठे विश्व चैंपियनशिप पदक पर नजर

नई दिल्ली, 6 जुलाई। विश्व बैडमिंटन दिवस के अवसर पर भारत की स्टार शटलर पी. वी. सिंधु एक बार फिर इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ी हैं। आगामी BWF विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप 2026 में यदि सिंधु पदक जीतने में सफल रहती हैं, तो वह महिला एकल वर्ग में छह विश्व चैंपियनशिप पदक जीतने वाली पहली खिलाड़ी बन जाएंगी। पहले ही बना चुकी हैं कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड पी. वी. सिंधु भारतीय बैडमिंटन इतिहास की सबसे सफल खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं। वह 2019 में विश्व चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय बनी थीं। इसके अलावा उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में अब तक एक स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य सहित कुल पांच पदक अपने नाम किए हैं। छठे पदक से बन सकता है नया विश्व रिकॉर्ड वर्तमान में सिंधु महिला एकल वर्ग में पांच विश्व चैंपियनशिप पदक जीतने वाली चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं। यदि वह इस वर्ष नई दिल्ली में होने वाली विश्व चैंपियनशिप में एक और पदक जीतती हैं, तो इस प्रतियोगिता के इतिहास में सबसे अधिक छह पदक जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बन जाएंगी। भारत में होगा विश्व चैंपियनशिप का आयोजन इस वर्ष BWF विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप का आयोजन नई दिल्ली में होगा। लगभग 17 वर्षों बाद यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता भारत लौट रही है। घरेलू दर्शकों के सामने खेलने का अवसर भारतीय खिलाड़ियों, विशेषकर सिंधु, के लिए बेहद खास माना जा रहा है। युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा विशेषज्ञों का मानना है कि पी. वी. सिंधु की उपलब्धियों ने भारत में बैडमिंटन को नई पहचान दिलाई है। उनकी सफलता से बड़ी संख्या में युवा खिलाड़ी इस खेल की ओर आकर्षित हुए हैं और भारत लगातार विश्व स्तर के बैडमिंटन खिलाड़ी तैयार कर रहा है। विशेषज्ञों की राय खेल विश्लेषकों का कहना है कि बड़े टूर्नामेंटों में लगातार शानदार प्रदर्शन करना सिंधु की सबसे बड़ी ताकत रही है। अनुभव, मानसिक मजबूती और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निरंतर प्रदर्शन उन्हें विश्व बैडमिंटन की सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल करता है. आगे की राह अब सभी की नजरें अगस्त में नई दिल्ली में आयोजित होने वाली BWF विश्व चैंपियनशिप पर होंगी। यदि सिंधु एक और पदक जीतने में सफल रहती हैं, तो वह भारतीय ही नहीं बल्कि विश्व बैडमिंटन इतिहास में भी एक नया अध्याय जोड़ देंगी। स्रोत:बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI), BWF एवं विश्वसनीय खेल समाचार रिपोर्टें। मूल रिपोर्ट:6 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय खेल समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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