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NCLT का बड़ा फैसला: Subhash Chandra की insolvency plan मंजूर; ₹22,006 करोड़ के claims पर सिर्फ ₹6.5 करोड़ का payout

नई दिल्ली: National Company Law Tribunal (NCLT) ने Zee Group के founder Subhash Chandra की personal insolvency proceedings में एक बेहद चर्चित repayment plan को मंजूरी दे दी है। मामले में creditors के ₹22,006.57 करोड़ के admitted claims हैं, जबकि approved plan के तहत creditors के लिए केवल ₹6.25 करोड़ और insolvency process cost के लिए ₹25 लाख रखे गए हैं। यानी कुल plan करीब ₹6.5 करोड़ का है। सीधे admitted claims और creditors को मिलने वाली रकम की तुलना की जाए तो recovery करीब 0.03% बैठती है और लगभग 99.97% haircut दिखाई देता है। हालांकि इस आंकड़े को समझने में एक महत्वपूर्ण distinction है—Subhash Chandra इन सभी loans के principal borrower नहीं थे; proceedings उनके personal guarantor के तौर पर liabilities को लेकर हैं। NCLT ने 25 August को मंजूर किया Repayment Plan Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) की official orders listing के मुताबिक 25 अगस्त 2026 को Indiabulls Housing Finance Limited vs Dr. Subhash Chandra मामले में repayment plan की approval का order दर्ज किया गया। मामला personal guarantor insolvency से संबंधित है। NCLT के Judicial Member Nilesh Sharma, जिन्हें split verdict के बाद third member के तौर पर मामला सौंपा गया था, ने Insolvency and Bankruptcy Code के Section 114 के तहत repayment plan को approve किया। ₹22,006.57 करोड़ Claims, लेकिन Creditors को ₹6.25 करोड़ Approved plan के figures ने पूरे मामले को national attention में ला दिया है। NCLT proceedings में creditors के admitted claims करीब: ₹22,006.57 करोड़ रहे, जबकि repayment plan में: का provision है। इन आंकड़ों के आधार पर creditors को admitted claims का करीब तीन पैसे प्रति ₹100 मिलने जैसा calculation सामने आता है। करीब 99.97% Haircut क्यों कहा जा रहा है? अगर ₹22,006.57 करोड़ के admitted claims की तुलना सीधे ₹6.25 करोड़ creditor payout से की जाए तो recovery लगभग 0.03% होती है। इसी वजह से इसे करीब 99.97% haircut कहा जा रहा है। लेकिन यहां “₹22,000 करोड़ का पूरा loan माफ हो गया” कहना technically सही नहीं होगा। Government sources ने भी इस interpretation पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मामला Chandra की personal guarantees का है, principal corporate borrowers के पूरे debt resolution का नहीं। Creditors के principal borrowing companies और secured assets के खिलाफ अलग rights बने रह सकते हैं। Subhash Chandra Borrower नहीं, Personal Guarantor थे इस case को समझने के लिए borrower और guarantor का difference जरूरी है। Loans मुख्य रूप से Essel Group-linked entities द्वारा लिए गए थे और Subhash Chandra ने अलग-अलग borrowings के लिए personal guarantees दी थीं। जब borrowers repayment obligations पूरा नहीं कर पाए, Chandra की guarantee liabilities insolvency process का हिस्सा बनीं। इसलिए approved personal repayment plan का अर्थ यह नहीं है कि सभी संबंधित companies के ₹22,006 करोड़ के underlying debts automatically समाप्त हो गए। 80.81% Voting Share ने Plan के पक्ष में Vote किया इतना छोटा repayment amount होने के बावजूद plan को creditors के जरूरी majority support मिल गया। Reports के मुताबिक creditors के करीब 80.81% voting value ने repayment plan का समर्थन किया। इसी majority के आधार पर plan statutory voting threshold पार कर गया और NCLT के सामने approval के लिए पहुंचा। IBC framework में tribunal आमतौर पर creditors की commercial wisdom की जगह अपना financial judgement substitute नहीं करता, जब तक approved plan कानून की statutory requirements को पूरा करता हो। HDFC Bank और LIC Housing Finance ने किया विरोध सभी creditors इस plan से सहमत नहीं थे। HDFC Bank और LIC Housing Finance जैसे lenders ने बेहद कम recovery को लेकर objections उठाए और plan के खिलाफ vote किया। अब दोनों financial institutions NCLT के फैसले को challenge करने की तैयारी कर रहे हैं। LIC Housing Finance ने बताया है कि उसका इस मामले में admitted claim करीब ₹1,322.39 करोड़ है, जबकि approved plan के तहत उसे लगभग ₹38.09 लाख मिलने हैं। Company ने कहा है कि वह appeal के विकल्प तलाश रही है और secured assets पर अपने rights बरकरार रखती है। HDFC Bank भी Appeal पर कर रहा विचार HDFC Bank ने भी कहा है कि वह NCLT order के खिलाफ appeal explore कर रहा है। Bank ने साथ ही clarify किया कि उसका admitted claim reported total ₹22,006.57 करोड़ का केवल करीब 3.2% है। इसका मतलब यह मामला NCLT approval के बावजूद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और आने वाले दिनों में National Company Law Appellate Tribunal यानी NCLAT के सामने legal challenge पहुंच सकता है। Subhash Chandra ने ₹22,006 करोड़ Figure पर उठाए सवाल Subhash Chandra ने भी media में चल रहे ₹22,000 करोड़ के figure पर objection जताया है। उनका कहना है कि इसे इस तरह पेश करना गलत है जैसे उन्होंने व्यक्तिगत रूप से ₹22,000 करोड़ borrow किए हों। Chandra के अनुसार जिन dissenting lenders की liabilities पर विवाद है, उनके claims की रकम करीब ₹3,992 करोड़ है, जबकि ₹22,006 करोड़ broader admitted claims का figure है। उन्होंने कहा है कि मामले में वह principal borrower नहीं बल्कि personal guarantor थे। क्या Banks के ₹22,000 करोड़ डूब गए? सीधा जवाब—ऐसा कहना misleading हो सकता है। Personal insolvency plan में Chandra से recovery बहुत कम है, लेकिन lenders के claims केवल उनकी personal guarantee तक सीमित नहीं होते। Principal borrowing companies, collateral और secured assets के खिलाफ creditors के recovery rights अलग से मौजूद हो सकते हैं। Government sources ने इसी आधार पर “banks ने ₹22,000 करोड़ पर 99.97% loss ले लिया” वाली interpretation को incomplete बताया है। Reports के मुताबिक principal borrowers से अलग से करीब ₹1,494 करोड़ की recovery envisaged है, जबकि Chandra की personal contribution ₹6.25 करोड़ है। इस Case पर इतना विवाद क्यों? इस order ने India के personal guarantor insolvency framework पर कई सवाल खड़े किए हैं। एक तरफ IBC के तहत creditors की majority ने plan approve किया और tribunal ने statutory framework के आधार पर इसे मंजूरी दी। दूसरी तरफ dissenting lenders सवाल उठा रहे हैं कि इतने बड़े admitted claims के मुकाबले इतनी कम personal recovery कैसे उचित मानी जा सकती है। Bankers ने resolution professional की भूमिका, personal assets की valuation और creditor voting…

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Nepal Floods: मृतकों की संख्या 469 पहुंची; Tibet में नई बाढ़ का खतरा, Rescue Teams को पीछे हटाया गया

काठमांडू/तिब्बत: Nepal-Tibet border पर आई विनाशकारी flash flood में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 28 अगस्त 2026 की ताजा जानकारी के मुताबिक Nepal में 469 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि China के Tibet क्षेत्र में अब तक 3 मौतें दर्ज हैं। दोनों क्षेत्रों को मिलाकर confirmed death toll कम से कम 472 हो गया है। सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं और disaster zone में नई बाढ़ का खतरा rescue operation के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सबसे गंभीर development Nepal-China border पर debris से बनी एक बड़ी barrier lake का overflow होना है। इसके कारण Chinese authorities ने Tibet में rescue personnel और vehicles को temporarily सुरक्षित स्थानों पर पीछे हटने का आदेश दिया, जबकि Nepal में भी कुछ समय के लिए search-and-rescue operation रोकना पड़ा। 469 मौतें केवल Nepal में Nepal Police ने शुक्रवार सुबह बताया कि देश में confirmed death toll एक दिन पहले के करीब 390 से बढ़कर 469 हो गया है। China की तरफ Tibet में अभी तक 3 deaths confirm की गई हैं। इसलिए अगर Nepal और Tibet दोनों को जोड़ा जाए तो कुल confirmed deaths कम से कम 472 हैं। यह संख्या आगे बढ़ सकती है क्योंकि बड़ी संख्या में लोग अभी तक लापता हैं और कई remote areas तक rescue teams पूरी तरह नहीं पहुंच पाई हैं। 1,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता Associated Press की latest update के मुताबिक Nepal और Tibet को मिलाकर 1,500 से ज्यादा लोगों के missing होने की reports हैं। Reuters के अनुसार Nepal और Tibet में लगभग 1,000 से अधिक लोग missing बताए जा रहे थे, जबकि अलग-अलग official updates में संख्या लगातार बदल रही है। Foreign tourists और pilgrims भी missing लोगों में बड़ी संख्या में शामिल हैं। Disaster के scale और communication breakdown के कारण missing-person figures में लगातार revision हो रहा है। Tibet के Gyirong में 558 लोग लापता China के Tibet Autonomous Region में सबसे ज्यादा नुकसान Gyirong County और border crossing area में हुआ है। Chinese state broadcaster CCTV के मुताबिक वहां 558 लोग missing हैं, जिनमें करीब 260 foreign nationals भी शामिल हैं। Gyirong Nepal और Tibet के बीच महत्वपूर्ण border route है और Mount Kailash तथा दूसरे Himalayan destinations जाने वाले tourists और pilgrims भी इस corridor का इस्तेमाल करते हैं। नई Barrier Lake बनी सबसे बड़ा खतरा 26 अगस्त की devastating flood के बाद पहाड़ों से आए rock, ice और mud ने river system के कुछ हिस्सों को block कर दिया। इस blockage से एक बड़ी barrier lake बन गई। Reuters के मुताबिक गुरुवार को इसमें करीब 1.5 से 2 million cubic metres पानी था, लेकिन शुक्रवार तक reservoir बढ़कर 2.5 million cubic metres से ज्यादा हो गया। पानी बढ़ने के बाद lake overflow करने लगी। Authorities को डर है कि अगर natural debris dam अचानक टूटता है तो downstream इलाकों में एक और powerful flash flood आ सकती है। Tibet में Rescue Teams को पीछे हटाया गया नई flood warning के बाद Chinese authorities ने high-risk area में काम कर रहे सभी rescue personnel और vehicles को safe location पर stand-by रहने को कहा। Reuters के मुताबिक lake के burst होने के खतरे के कारण यह preventive action लिया गया। इसलिए “Tibet में rescue operation permanently बंद” कहना सही नहीं होगा। स्थिति यह है कि कुछ high-risk zones में rescue temporarily suspend/withdraw किया गया है, ताकि rescuers खुद दूसरी flood wave की चपेट में न आएं। Nepal में भी 90 मिनट रोका गया Operation Nepal की तरफ भी authorities ने नई flood warning मिलने के बाद rescue operations को करीब 90 minutes के लिए रोकने की जानकारी दी। Rasuwa district में residents को hills और ऊंचे स्थानों की ओर जाते देखा गया, क्योंकि river level फिर बढ़ने लगा था। हालांकि Associated Press की बाद की update में Nepal Police spokesperson ने कहा कि rescue operation पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और teams high alert पर काम कर रही हैं। इसलिए situation तेजी से बदल रही है। River Level फिर बढ़ा Rasuwa district के वरिष्ठ अधिकारी Narendra Pariyar ने Reuters को बताया कि authorities को upstream lake के bank टूटने की warning मिली थी। उन्होंने कहा कि नदी में पानी का level बढ़ता दिखाई दे रहा है, हालांकि उस समय exact rise का आंकड़ा उपलब्ध नहीं था। इस warning ने पहले से devastated downstream settlements में panic बढ़ा दिया। 26 अगस्त को कैसे आई थी इतनी भयानक Flood? Initial scientific assessments के मुताबिक disaster की शुरुआत Himalayan region में बड़े glacier/ice-rock collapse से हुई। एक विशाल rock और ice mass नीचे गिरा, जिससे river temporarily block हो गई। बाद में trapped water ने debris barrier को तोड़ा और विशाल मात्रा में: तेजी से downstream areas की ओर बढ़ा। इस surge ने Nepal और Tibet के कई settlements को कुछ ही मिनटों में तबाह कर दिया। USGS ने दर्ज किया Glacier Collapse U.S. Geological Survey यानी USGS ने घटना के दौरान seismic signals का analysis किया। AP के मुताबिक agency ने इसे magnitude 5.2 के बराबर glacier collapse event के रूप में identify किया, जिसमें satellite imagery और nearby seismic stations के data का इस्तेमाल किया गया। Scientists अभी भी exact sequence की जांच कर रहे हैं। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि पहले earthquake आया और उसी ने glacier तोड़ा। मौजूदा evidence glacier collapse को primary disaster mechanism की ओर इशारा करता है। Roads और Bridges पूरी तरह तबाह Flood ने Kathmandu और Tibet के Lhasa region को जोड़ने वाले important Himalayan route को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया है। Power stations, bridges, roads और entire settlements flood और debris की चपेट में आए। कुछ areas में road connectivity पूरी तरह खत्म होने के कारण rescuers को helicopters, sniffer dogs और heavy machinery पर निर्भर रहना पड़ रहा है। Remote valleys तक पहुंच अभी भी बड़ी चुनौती है। Foreign Tourists भी बड़ी संख्या में Missing Disaster के समय Nepal-Tibet region में बड़ी संख्या में foreign trekkers, tourists और pilgrims मौजूद थे। Reuters के मुताबिक missing लोगों में कम से कम 540 foreigners शामिल हैं। अलग-अलग nationality lists में…

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Devendra Fadnavis ने Samay Raina को किया सम्मानित; Maharashtra Cyber के मंच पर ‘Latent’ विवाद पर खुद ही ली चुटकी, अब Sunil Pal ने उठाए सवाल

मुंबई: Stand-up comedian Samay Raina एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई विवादित comedy show नहीं बल्कि Maharashtra Cyber का cyber-awareness campaign है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में Samay Raina को cybercrime awareness initiative में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया। यह कार्यक्रम 26 अगस्त 2026 को आयोजित हुआ था। इस कार्यक्रम में Maharashtra Cyber ने cyber fraud को लेकर awareness बढ़ाने के उद्देश्य से short film ‘Digital Arrest’ और ‘1930 Maharashtra Cyber Anthem’ लॉन्च किया। Samay Raina समेत entertainment industry के कई कलाकार इस initiative से जुड़े थे और उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया गया। अब 28 अगस्त 2026 को इस सम्मान पर comedian Sunil Pal की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद मामला फिर social media पर चर्चा में है। Sunil Pal ने Samay Raina को सम्मानित किए जाने पर सवाल उठाते हुए इसे गलत संदेश देने वाला बताया है। आखिर Samay Raina को क्यों किया गया सम्मानित? Samay Raina को उनकी comedy career या किसी particular show के लिए यह सम्मान नहीं दिया गया। Reports के मुताबिक उन्हें Maharashtra Cyber द्वारा चलाए जा रहे cybercrime awareness campaign में योगदान के लिए felicitate किया गया। इस campaign में ‘Digital Arrest’ नाम की awareness short film और 1930 cyber helpline को promote करने वाला Maharashtra Cyber Anthem शामिल है। Digital arrest scams पिछले कुछ वर्षों में cybercrime का बड़ा तरीका बनकर सामने आए हैं। इसमें fraudsters खुद को police, CBI, customs या दूसरी investigating agency का अधिकारी बताकर victim को डराते हैं और video call या phone के जरिए पैसे transfer करने का दबाव बनाते हैं। इसी तरह के scams को लेकर public awareness बढ़ाने के लिए Maharashtra Cyber ने celebrities को campaign में शामिल किया। मंच पर Samay Raina ने खुद Cyber Cell पर किया Joke सम्मान लेने के बाद Samay Raina ने अपने पुराने Maharashtra Cyber experience को लेकर मजाक किया, जिससे कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis और दूसरे celebrities हंस पड़े। Raina ने कहा कि Maharashtra Cyber के साथ उनका “पुराना रिश्ता” है और 1930 उनके लिए जाना-पहचाना number है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि Maharashtra Cyber इतनी active है कि कोई व्यक्ति India में हो या America में, agency उसे ढूंढ लेगी। उन्होंने अपने पिछले summons का जिक्र करते हुए यह भी मजाक किया कि इस बार Cyber Cell का officer उन्हें लेकर आया और परिणाम interrogation नहीं बल्कि felicitation निकला। इस comment पर CM Fadnavis समेत मंच पर मौजूद कई लोगों की हंसी छूट गई। CM Fadnavis से मांग लिया Biscuit कार्यक्रम का एक और clip social media पर तेजी से viral हुआ। सम्मान लेने के दौरान Samay Raina ने मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis से मजाकिया अंदाज में पास रखा biscuit लेने की अनुमति मांगी। उनके अचानक किए गए सवाल से मंच पर मौजूद लोग हंसने लगे और formal cyber-awareness programme कुछ देर के लिए stand-up comedy जैसे माहौल में बदल गया। Raina ने बाद में कार्यक्रम का video अपने social media account पर भी साझा किया। कार्यक्रम में Pankaj Tripathi समेत कई Celebrities Maharashtra Cyber के इस programme में Samay Raina अकेले entertainment personality नहीं थे। Reports के मुताबिक कार्यक्रम में: समेत कई जाने-माने कलाकार मौजूद थे। इन personalities को cyber-awareness film और anthem के जरिए लोगों तक cyber safety का message पहुंचाने में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। Fadnavis ने Cybercrime Awareness पर दिया जोर CM Devendra Fadnavis ने कार्यक्रम में cybercrime के बढ़ते खतरे को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि actors, singers और दूसरे लोकप्रिय चेहरे awareness messages को आम लोगों तक ज्यादा प्रभावी तरीके से पहुंचा सकते हैं। सरकार और cyber authorities का focus खास तौर पर digital arrest जैसे scams से लोगों को बचाना है। Cyber fraud की स्थिति में national cybercrime helpline 1930 पर शिकायत की जा सकती है। क्यों चर्चा में है Samay Raina और Maharashtra Cyber का ‘पुराना रिश्ता’? इस felicitation को लेकर social media पर सबसे ज्यादा चर्चा इसलिए हुई क्योंकि लगभग डेढ़ साल पहले Samay Raina का Maharashtra Cyber के साथ रिश्ता बिल्कुल अलग परिस्थिति में सामने आया था। February 2025 में उनके comedy show ‘India’s Got Latent’ के एक episode में YouTuber और podcaster Ranveer Allahbadia की एक sexually explicit टिप्पणी पर बड़ा विवाद हुआ था। उसके बाद अलग-अलग जगह complaints और FIRs दर्ज हुईं और Samay Raina समेत show से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की गई। Maharashtra Cyber ने भेजे थे Summons India’s Got Latent controversy के दौरान Maharashtra Cyber ने Samay Raina को questioning के लिए बुलाया था। उस समय Raina विदेश में थे और उन्होंने video conferencing के जरिए अपना statement दर्ज कराने की अनुमति मांगी थी, लेकिन Maharashtra Cyber ने personal appearance पर जोर दिया। बाद में Samay Raina मुंबई में agency के सामने पेश हुए थे। इसी background के कारण अब उसी Maharashtra Cyber के awareness programme में उन्हें सम्मानित किए जाने को social media users “full circle moment” बता रहे हैं। आज Sunil Pal ने क्यों किया विरोध? 28 अगस्त की fresh development में comedian Sunil Pal ने Samay Raina की felicitation को लेकर नाराजगी जताई है। Sunil Pal ने अपने video की शुरुआत “घोर कलयुग आ गया है” कहते हुए की और सवाल उठाया कि past controversies से जुड़े entertainer को government-linked मंच पर सम्मानित करना युवा comedians को क्या message देगा। Pal का तर्क था कि controversial या abusive content के बाद publicity हासिल करने और फिर public recognition मिलने से गलत precedent बन सकता है। यह Sunil Pal की व्यक्तिगत राय और आलोचना है; इसे Maharashtra government या किसी authority की official assessment नहीं माना जाना चाहिए। Sunil Pal ने नए Comedians को लेकर जताई चिंता Sunil Pal ने कहा कि उनके हिसाब से young performers को ऐसा impression नहीं मिलना चाहिए कि controversy और police cases popularity या recognition पाने का रास्ता हैं। उन्होंने Samay Raina और India’s Got Latent के past content को लेकर भी अपनी असहमति दोहराई। खबर लिखे जाने तक Samay Raina की ओर से Sunil Pal की इस fresh criticism पर कोई verified detailed response सामने नहीं…

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बारिश में धंसा ₹36,000 करोड़ का गंगा एक्सप्रेसवे? उन्नाव में Repair के बाद फिर पड़ी बड़ी दरारें, Akhilesh ने सरकार को घेरा

उन्नाव: उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद एक बार फिर सड़क में दरारें सामने आने से निर्माण और drainage व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। 27 अगस्त 2026 को उन्नाव के आसपास repaired stretch पर fresh cracks की तस्वीरें और वीडियो सामने आए। रिपोर्ट्स के मुताबिक बशीरतगंज क्षेत्र में किलोमीटर 421 से 422 के बीच करीब 25 मीटर लंबी दरार देखी गई है। हालांकि सोशल मीडिया पर इसे पूरे ₹36,230 करोड़ के एक्सप्रेसवे के “धंस जाने” के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक damage एक सीमित stretch पर है और expressway पर traffic जारी है। आज क्या हुआ? आज सामने आई reports के मुताबिक उन्नाव में पहले repair किए गए हिस्से पर फिर cracks दिखाई दीं। Times Now Navbharat ने बशीरटगंज के पास kilometre 421-422 के बीच करीब 25 metre लंबी और लगभग 3 inch चौड़ी दरार report की है। आसपास slope protection और मिट्टी वाले हिस्से में भी rainwater erosion का असर बताया गया है। Maintenance team ने प्रभावित स्थान पर barricading और corrective work शुरू किया है। फिलहाल traffic को पूरी तरह बंद किए जाने की सूचना नहीं है। एक सप्ताह पहले बना था 10 मीटर गहरा Crater मौजूदा controversy इसलिए ज्यादा गंभीर हो गई क्योंकि इसी महीने गंगा एक्सप्रेसवे पर एक और बड़ा damage सामने आया था। 17-18 अगस्त के आसपास उन्नाव क्षेत्र में kilometre 421 के पास भारी बारिश के बाद road और adjoining embankment का हिस्सा प्रभावित हुआ और करीब 10 metre गहरा crater बनने की reports आई थीं। उस समय UPEIDA और project agency की teams ने मौके पर repair work किया था। 19 अगस्त तक संबंधित अधिकारियों ने बताया था कि प्रभावित section को repair कर दिया गया है और traffic normal तरीके से चल रहा है। अब उसी broader area में fresh cracks सामने आने से repair की durability को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्या आज पूरा Expressway धंस गया? नहीं। यह खबर publish करते समय यह distinction बेहद जरूरी है। 594-km लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का पूरा हिस्सा collapse नहीं हुआ है। Fresh damage उन्नाव के एक specific stretch में report हुआ है। इसलिए headline: “₹36,000 करोड़ का गंगा एक्सप्रेसवे धंस गया” अपने आप में misleading impression दे सकती है। बेहतर framing होगी: “₹36,230 करोड़ के गंगा एक्सप्रेसवे पर फिर दरारें; बारिश के बाद उन्नाव में repaired stretch प्रभावित” बारिश के पानी से Soil Erosion की बात Reports में damage के पीछे heavy rainfall, soil settlement और embankment erosion को प्रमुख factors के रूप में बताया गया है। 19 अगस्त को project head R.K. Mishra ने पहले damage पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि नई construction में पहली बारिश के दौरान बड़े स्तर पर भरी गई मिट्टी के settlement से ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा था कि sensitive sections की monitoring और patrolling बढ़ाई गई है। लेकिन 27 अगस्त की fresh cracks का final technical cause अभी किसी विस्तृत independent investigation से establish नहीं हुआ है। इसलिए construction corruption या substandard material को proven cause के तौर पर लिखना अभी सही नहीं होगा। July में भी उन्नाव में हुआ था नुकसान गंगा एक्सप्रेसवे पर monsoon-related damage की यह पहली report नहीं है। July में भी Unnao के Sonic Toll Plaza को expressway से जोड़ने वाली करीब 7-metre approach road heavy rainfall के बाद प्रभावित हुई थी। Embankment की मिट्टी बहने और carriageway के हिस्से को नुकसान पहुंचने की reports सामने आई थीं। इसके बाद repair work कराया गया था। यानी July, mid-August और अब 27 August—तीनों developments ने monsoon के दौरान कुछ sections की drainage और slope stability पर ध्यान खींचा है। Hardoi में भी सामने आया था Subsidence July में Hardoi के Mallawan क्षेत्र में भी heavy rainfall के बाद Ganga Expressway के करीब 60 metre हिस्से में subsidence की report सामने आई थी। Technical team ने वहां repair शुरू किया और अधिकारियों ने उस समय लगातार 48 घंटे हुई rainfall को संभावित कारण बताया था। इन घटनाओं को देखते हुए expressway के अलग-अलग vulnerable stretches की long-term durability अब scrutiny में है। कितना बड़ा है Ganga Expressway? UPEIDA की official information के मुताबिक Ganga Expressway की लंबाई करीब 594 kilometres है। यह: Prime Minister Narendra Modi ने इसका उद्घाटन 29 अप्रैल 2026 को Hardoi जिले में किया था। Current media reports project cost को करीब ₹36,230 करोड़ बताती हैं। उद्घाटन के चार महीने के भीतर सवाल Expressway को शुरू हुए अभी करीब चार महीने ही हुए हैं। इतने कम समय में अलग-अलग जगहों पर soil erosion, approach-road damage, crater और cracks जैसी reports आने के कारण इसकी construction quality और drainage planning पर public scrutiny बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि हर incident का cause समान हो, यह जरूरी नहीं है। किसी location पर drainage, दूसरी पर soil settlement और किसी अन्य जगह embankment erosion जिम्मेदार हो सकता है। Technical audit के बिना सभी घटनाओं को एक ही construction defect से जोड़ना जल्दबाजी होगी। Akhilesh Yadav ने सरकार पर लगाया Corruption का आरोप Fresh cracks सामने आने के बाद Samajwadi Party प्रमुख Akhilesh Yadav ने social media पर एक video share करते हुए BJP सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने cracks को corruption से जोड़ते हुए commuters की safety पर सवाल उठाए। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि corruption का आरोप Akhilesh Yadav का राजनीतिक दावा है। उपलब्ध reports में fresh cracks को corruption का परिणाम साबित करने वाली कोई final technical inquiry सामने नहीं आई है। Traffic बंद हुआ या जारी है? Latest reports के अनुसार affected portion की सुरक्षा के लिए barricading और corrective work किया जा रहा है, लेकिन पूरे Ganga Expressway का traffic बंद नहीं हुआ है। 27 अगस्त की दोपहर तक वाहनों का आवागमन जारी बताया गया। इसलिए social media पर “expressway बंद” या “पूरा highway collapse” जैसे claims को official confirmation के बिना publish नहीं करना चाहिए। UPEIDA ने पहले Damage पर क्या कहा था? पिछले week’s crater के बाद UPEIDA और project team ने affected section को तेजी से repair करने की बात कही थी। Project management ने दावा किया था कि rain-sensitive stretches की regular patrolling और…

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तिब्बत सीमा से आई अचानक बाढ़ ने नेपाल में मचाई तबाही; 160 से ज्यादा मौतें, सैकड़ों लापता, भारतीय तीर्थयात्रियों की भी तलाश

काठमांडू/रसुवा: Nepal-Tibet border के पास हिमालयी इलाके में हुए भीषण glacial ice-rock collapse के बाद आई flash flood ने नेपाल में बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। 27 अगस्त 2026 की ताजा जानकारी के मुताबिक नेपाल में कम से कम 162 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि Tibet की तरफ भी तीन लोगों की मौत दर्ज की गई है। दोनों ओर मिलाकर सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं और rescue operation युद्धस्तर पर जारी है। नेपाल के Rasuwa और Dhading जिले सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। पानी, कीचड़, बड़े पत्थरों और बर्फ के मलबे की तेज लहर ने गांवों, सड़कों, पुलों, hydropower projects और वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। कई इलाकों में electricity और communication network भी ठप हो गया है। 26 अगस्त की सुबह अचानक आया सैलाब यह आपदा बुधवार, 26 अगस्त की सुबह सामने आई। Nepal के Rasuwa जिले में Bhote Koshi river system में अचानक पानी का स्तर बेहद तेजी से बढ़ा। कुछ ही समय में पानी के साथ भारी मात्रा में mud, rock और debris नीचे की तरफ आया और Timure तथा Syafrubesi जैसे इलाकों में विनाश मचा दिया। Reuters के मुताबिक flood wave इतनी तेज थी कि river level downstream इलाकों में लगभग आधे घंटे के अंदर 9 metres तक बढ़ गया। क्या सच में Tibet से आई बाढ़? Geographically देखा जाए तो disaster का शुरुआती source Nepal-Tibet border के उत्तर-पूर्वी Himalayan क्षेत्र में था। Nepal की disaster authority द्वारा satellite images के शुरुआती analysis में पाया गया कि Rasuwagadhi border crossing से करीब 20 km northeast में Lhende river valley के ऊपर ice और rock का एक विशाल हिस्सा टूटकर नीचे गिरा। इस collapse ने नदी के flow को अचानक प्रभावित किया और फिर बड़ी मात्रा में पानी, बर्फ, चट्टान तथा sediment downstream Nepal की तरफ बढ़ गया। इसी वजह से इसे कई reports में “Tibet-origin flood” कहा जा रहा है। Glacier का बड़ा हिस्सा टूटकर गिरा Planet Labs की satellite imagery का analysis करने वाले experts के मुताबिक करीब 5,200 metre की ऊंचाई पर स्थित glacier का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे की valley में गिरा। Ice-rock mass ने लगभग 1,200 metre नीचे गिरते हुए भारी debris avalanche पैदा की। यह debris नदी में पहुंचा और उसके साथ मिलकर बेहद शक्तिशाली flash flood में बदल गया। Experts इसे सामान्य monsoon flood के बजाय ice-rock avalanche triggered flood मान रहे हैं। पहले Earthquake समझा गया, फिर तस्वीर बदली Disaster के शुरुआती घंटों में इलाके में दर्ज seismic signal को लगभग 4.4 magnitude earthquake माना गया था। लेकिन बाद की geological analysis में यह संभावना मजबूत हुई कि seismic signal खुद massive glacier और rock collapse के कारण पैदा हुआ हो सकता है। इसलिए अभी यह निश्चित रूप से कहना सही नहीं होगा कि earthquake ने glacier तोड़ा। Scientists अभी exact sequence और trigger की जांच कर रहे हैं। नेपाल में 162 लोगों की मौत 27 August की latest Reuters update के मुताबिक Nepal में कम से कम 162 लोगों की मौत हो चुकी है। Tibet की तरफ तीन मौतें confirm की गई हैं, जिससे दोनों क्षेत्रों में confirmed death toll कम से कम 165 हो जाता है। Casualty figures अभी भी लगातार बदल रहे हैं क्योंकि कई दूरदराज इलाके पूरी तरह accessible नहीं हैं। Authorities को आशंका है कि search operation आगे बढ़ने के साथ death toll बढ़ सकता है। करीब 1,000 लोग दोनों ओर लापता इस disaster का सबसे चिंताजनक पहलू missing persons की संख्या है। Associated Press की latest reporting के मुताबिक: बताए गए हैं। यानी combined figure करीब 1,000 लोगों तक पहुंच रहा है। हालांकि disaster के शुरुआती दौर में duplicate registrations और communication breakdown के कारण missing figures में बदलाव संभव है। भारतीय तीर्थयात्री भी लापता इस tragedy में बड़ी संख्या में foreign tourists और pilgrims भी फंसे हैं। यह इलाका Mount Kailash और Mansarovar जाने वाले कई यात्रियों के transit route से जुड़ा है। Nepal Tourism Board से जुड़ी reports में कम से कम 133 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। भारतीय authorities नेपाल सरकार के साथ उनकी पहचान और location verify करने में जुटी हैं। अलग-अलग reports में Indian missing count में कुछ अंतर है, इसलिए final number अभी बदल सकता है। India ने भेजी 10 Ton Relief Material आपदा के तुरंत बाद भारत ने Nepal को humanitarian assistance भेजना शुरू कर दिया। External Affairs Minister S. Jaishankar के मुताबिक India ने 10 tonnes Humanitarian Assistance and Disaster Relief material तथा essential medicines Nepal भेजे हैं। पहली खेप Indian Air Force के C-130J aircraft के जरिए Kathmandu भेजी गई। 27 अगस्त की सुबह relief material Nepal पहुंचने और वहां authorities को hand over किए जाने की पुष्टि भी हुई। PM Modi ने Nepal को दिया मदद का भरोसा Prime Minister Narendra Modi ने Nepal के Prime Minister Balendra Shah से बातचीत कर इस tragedy पर संवेदना व्यक्त की और भारत की तरफ से हर संभव सहायता देने का भरोसा दिया। India ने rescue teams और additional assistance को भी standby पर रखा है। नेपाल भारत का करीबी पड़ोसी होने के साथ खुली सीमा साझा करता है, इसलिए इस तरह की Himalayan disaster का असर भारत की disaster preparedness पर भी पड़ता है। गांव, घर और गाड़ियां मलबे में दबीं Verified footage में पहाड़ों से आती mud और debris की विशाल लहर को buildings तथा vehicles को बहाते देखा गया है। Reuters के मुताबिक कई स्थानों पर: Survivors ने बताया कि पानी के साथ इतना ज्यादा mud और rock आ रहा था कि flood सामान्य नदी के पानी की बजाय moving concrete जैसी दिखाई दे रही थी। 40 KM से ज्यादा Road Network प्रभावित Latest international reports के मुताबिक disaster में करीब 40 kilometres road और कम से कम 19 bridges को नुकसान पहुंचने की सूचना है। इससे rescue teams के लिए remote areas तक पहुंचना और भी मुश्किल हो गया है। कई जगह helicopters ही survivors तक पहुंचने का मुख्य जरिया बने हुए हैं। Hydropower Projects को भारी नुकसान Nepal की economy में hydropower की बड़ी भूमिका है और प्रभावित Himalayan river belt में कई power projects…

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Karnataka के मंत्री B Nagendra ने इस्तीफे की पेशकश की; ₹89.63 करोड़ Valmiki Corporation मामले को लेकर BJP का दबाव

बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में Maharshi Valmiki Scheduled Tribes Development Corporation से जुड़े कथित ₹89 करोड़ के फंड diversion मामले ने एक बार फिर बड़ा मोड़ ले लिया है। राज्य के Planning and Statistics Minister B Nagendra ने बुधवार, 26 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री D.K. Shivakumar की Cabinet से इस्तीफा देने की पेशकश की है। विपक्षी BJP पिछले कई दिनों से Nagendra को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रही है। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री D.K. Shivakumar ने फिलहाल Nagendra को इस्तीफा देने से रोकते हुए कहा है कि वह पहले Congress high command से इस मुद्दे पर बातचीत करेंगे। यानी Nagendra ने इस्तीफे की पेशकश की है, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ है। आज सुबह सामने आया बड़ा Political Development 26 अगस्त की सुबह करीब 9:30 बजे यह जानकारी सामने आई कि BJP के बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच Nagendra ने पद छोड़ने की पेशकश की है। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री ने उनसे फिलहाल पद पर बने रहने को कहा है, जब तक पार्टी नेतृत्व से चर्चा पूरी नहीं हो जाती। इसलिए headline में “इस्तीफा दे दिया” लिखना अभी गलत होगा। सही स्थिति यह है कि उन्होंने resignation offer किया है। क्या है ₹89.63 करोड़ Valmiki Corporation मामला? यह मामला Karnataka Maharshi Valmiki Scheduled Tribes Development Corporation के सरकारी फंड से जुड़ा है। CBI की chargesheet के मुताबिक करीब ₹89.63 करोड़ सरकारी रकम कथित रूप से forged cheques और RTGS transactions के जरिए divert की गई। जांच एजेंसी ने दावा किया कि यह पैसा लगभग 600 bank accounts के जरिए layer किया गया और बाद में cash, bullion तथा luxury vehicles में बदला गया। CBI ने जून 2026 में Nagendra समेत कुल 30 लोगों को आरोपी बनाया था। ये आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और conviction नहीं हुई है। Nagendra को Chargesheet में बनाया गया आरोपी CBI का आरोप है कि B Nagendra और उनके कथित करीबी सहयोगी Nekkanti Nagaraj समेत अन्य लोगों ने सरकारी funds के diversion में भूमिका निभाई। Agency ने यह भी आरोप लगाया कि Nagendra को एक private firm को ₹13.95 करोड़ का tender दिलाने के बदले ₹1.20 करोड़ की कथित रिश्वत मिली। यह CBI की chargesheet का आरोप है, जिसे अदालत में साबित किया जाना बाकी है। CBI ने Nagendra को तीन अलग-अलग chargesheets में आरोपी बनाया है। Governor से Prosecution Sanction भी मांगा मामले में हाल ही में एक और महत्वपूर्ण development सामने आया था। CBI ने Karnataka Governor Thaawarchand Gehlot से Nagendra के खिलाफ prosecution शुरू करने की अनुमति मांगी है। एक sitting minister के खिलाफ कुछ परिस्थितियों में prosecution आगे बढ़ाने के लिए ऐसी sanction महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती है। इसी development के बाद BJP ने Nagendra के खिलाफ अपना आंदोलन और तेज कर दिया। BJP ने Assembly में किया लगातार Protest Karnataka BJP पिछले कई दिनों से Legislative Assembly में Nagendra के resignation की मांग को लेकर विरोध कर रही है। BJP और JD(S) के विधायकों ने Assembly proceedings बाधित कीं और आरोप लगाया कि chargesheet में नाम आने के बाद Nagendra का मंत्री पद पर बने रहना उचित नहीं है। Opposition ने Vidhana Soudha के बाहर भी प्रदर्शन किया और कई BJP नेताओं को protest के दौरान हिरासत में लिया गया। Vidhana Soudha में जबरन घुसने की कोशिश तक पहुंचा Protest विवाद ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब BJP कार्यकर्ताओं और नेताओं ने Vidhana Soudha की ओर march किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक security personnel के साथ धक्का-मुक्की हुई और कुछ प्रदर्शनकारियों ने अंदर प्रवेश करने की कोशिश की। BJP की मांग थी कि Nagendra को तुरंत Cabinet से हटाया जाए। लगातार protests के चलते राज्य की monsoon session की proceedings भी प्रभावित हुईं। 2024 में भी इसी मामले पर दे चुके हैं इस्तीफा Nagendra के लिए यह विवाद नया नहीं है। जब 2024 में Valmiki Corporation fund diversion मामला सामने आया था, उस समय वह Tribal Welfare Minister थे। बढ़ते दबाव के बीच उन्होंने June 2024 में Cabinet से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद Enforcement Directorate ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था। बाद में उन्हें bail मिली। August 2026 में दोबारा Cabinet में हुई थी Entry राजनीतिक समीकरण बदलने के बाद B Nagendra को 3 अगस्त 2026 को D.K. Shivakumar की Cabinet में फिर शामिल किया गया। उन्हें Planning and Statistics portfolio दिया गया। लेकिन re-induction के कुछ ही दिनों बाद BJP ने CBI chargesheet और ED case को लेकर उनकी नियुक्ति का विरोध शुरू कर दिया। अब तीन सप्ताह से भी कम समय में Nagendra ने फिर पद छोड़ने की पेशकश की है। BJP पर Nagendra का पलटवार Nagendra पहले resignation की मांग को खारिज करते रहे थे। 19 अगस्त को उन्होंने BJP पर आरोप लगाया था कि विपक्ष उन्हें इसलिए निशाना बना रहा है क्योंकि वह tribal community से आते हैं। उन्होंने कहा था कि अगर अदालत उन्हें दोषी पाती है तो वह सजा स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। Nagendra ने केंद्रीय जांच एजेंसियों के आरोपों को भी राजनीतिक साजिश बताया था। हालांकि उनके इन दावों का BJP ने विरोध किया और कहा कि मुद्दा जाति नहीं बल्कि corruption allegations और accountability का है। मामला सामने कैसे आया था? Valmiki Corporation मामला 2024 में उस समय चर्चा में आया जब corporation से जुड़े Accounts Officer P Chandrashekaran की मौत हुई। उनके कथित suicide note में corporation के funds के unauthorized transfer और वरिष्ठ अधिकारियों पर दबाव जैसे आरोप लगाए गए थे। इसके बाद मामले की जांच अलग-अलग agencies तक पहुंची। Union Bank of India की complaint के आधार पर CBI ने भी investigation शुरू की। ₹187 करोड़ Pool हुआ, ₹89.63 करोड़ कथित तौर पर Divert CBI के मुताबिक corporation और संबंधित departments से लगभग ₹187 करोड़ Union Bank of India के account में pool किए गए थे। Agency का आरोप है कि इसमें से ₹89.63 करोड़ कथित तरीके से divert किए गए। CBI ने bank officials, corporation officers, government officials, private persons और middlemen समेत कई लोगों की भूमिका जांचने का दावा किया है। Congress के लिए बढ़ी राजनीतिक मुश्किल…

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नए संसद भवन के बाहर जलभराव! अंदर पानी टपकने वाला वीडियो निकला पुराना, Congress-BJP में छिड़ी जुबानी जंग

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में हुई भारी बारिश के बाद नए संसद भवन के आसपास जलभराव की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इसी बीच संसद भवन के अंदर छत से पानी टपकने का एक वीडियो भी शेयर किया गया, जिसके बाद केंद्र सरकार और नई संसद की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे। लेकिन इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। संसद के अंदर पानी टपकने वाला वायरल वीडियो मौजूदा 25 अगस्त 2026 की बारिश का नहीं, बल्कि अगस्त 2024 का है। हालांकि 25 अगस्त की भारी बारिश के दौरान Parliament Street और संसद के आसपास के इलाकों में वास्तविक रूप से waterlogging दर्ज हुई थी। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और BJP के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गया है। Renuka Chowdhury ने शेयर किए Videos Congress MP Renuka Chowdhury ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कुछ videos शेयर करते हुए केंद्र सरकार पर तंज कसा। उन्होंने लिखा: “New Parliament of New India — Requires boats not votes.” उनके द्वारा शेयर किए गए visuals में संसद परिसर के आसपास पानी जमा दिखने के साथ एक वीडियो में Parliament building के अंदर पानी टपकता दिखाई दे रहा था। पोस्ट वायरल होने के बाद यह दावा तेजी से फैलने लगा कि नई संसद की छत से एक बार फिर बारिश का पानी अंदर आ गया है। लेकिन अंदर पानी टपकने वाला Video 2024 का Times of India की 26 अगस्त की fact-checking report के मुताबिक Renuka Chowdhury द्वारा शेयर किए गए videos में से संसद भवन के अंदर पानी टपकने वाला वीडियो अगस्त 2024 का है। यानी उसे 25 अगस्त 2026 की बारिश से जोड़ना सही नहीं है। 2024 में भी भारी बारिश के दौरान New Parliament Building के lobby area में minor leakage हुई थी। तब Lok Sabha Secretariat ने बताया था कि lobby के ऊपर लगे glass dome को fix करने वाला adhesive material भारी बारिश में थोड़ा खिसक गया था, जिससे मामूली leakage हुई। बाद में corrective action किए जाने की बात कही गई थी। इसलिए 2024 की उस घटना के video को 2026 की बारिश का fresh visual बताना तथ्यात्मक रूप से गलत होगा। Parliament के आसपास Waterlogging जरूर हुआ हालांकि पूरी कहानी को fake कहना भी सही तस्वीर नहीं दिखाएगा। 25 अगस्त 2026 को Parliament Street और संसद क्षेत्र के आसपास वास्तविक जलभराव दर्ज किया गया था। Hindustan Times की live weather coverage में सुबह करीब 9:30 बजे Parliament area में heavy rain के बाद waterlogging की जानकारी दी गई। दिल्ली के कई अन्य प्रमुख इलाकों में भी पानी जमा हुआ, जिनमें: शामिल थे। इसलिए यह कहना सही होगा कि नई संसद के आसपास बारिश का पानी जमा हुआ, लेकिन संसद के अंदर fresh leakage की पुष्टि वायरल पुराने वीडियो से नहीं होती। BJP ने कहा- ‘Fake News’ BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता Pradeep Bhandari ने Congress के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे fake news बताया। उन्होंने viral video पर कहा कि यह मौजूदा Parliament leakage का वीडियो नहीं है और Congress पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। हालांकि BJP की प्रतिक्रिया मुख्य रूप से संसद के अंदर leakage दिखाने वाले video पर थी। बाहर Parliament area में waterlogging होने की बात अलग-अलग मीडिया reports और rain coverage में दर्ज है। दिल्ली में कितनी हुई बारिश? 25 अगस्त को Delhi में बेहद तेज monsoon spell देखने को मिला। IMD के आंकड़ों के मुताबिक शहर के कई हिस्सों में 7 से 11 सेंटीमीटर तक भारी बारिश दर्ज की गई। ABP की 26 अगस्त की सुबह की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 24 घंटे में Safdarjung weather station पर 99.1 mm rainfall दर्ज हुई। Aya Nagar में 101.9 mm, Ridge में करीब 100 mm और Lodhi Road पर 98.3 mm बारिश दर्ज की गई। इतनी तेज बारिश के कारण राजधानी के drainage systems पर दबाव बढ़ा और कई इलाकों में सड़कों पर पानी जमा हो गया। AIIMS और Safdarjung Hospital के बाहर भी पानी New Parliament area ही नहीं, दिल्ली के प्रमुख hospitals के आसपास भी गंभीर waterlogging देखने को मिला। AIIMS flyover loop और Safdarjung Hospital के आसपास पानी जमा होने के visuals सामने आए। कश्मीरी गेट क्षेत्र में भारी बारिश के बाद एक building की wall गिरने की घटना भी रिपोर्ट हुई। यानी Delhi में हुई बारिश का असर काफी व्यापक था और Parliament area का waterlogging उसी बड़े weather event का हिस्सा था। Social Media पर क्यों फैला Confusion? पूरे विवाद में दो अलग-अलग videos और घटनाएं आपस में जुड़ गईं। पहला—25 अगस्त 2026 का Parliament area waterlogging, जो वास्तविक और current था। दूसरा—August 2024 का Parliament lobby leakage video, जिसे मौजूदा बारिश के साथ फिर शेयर किया गया। दोनों को एक साथ पोस्ट किए जाने के कारण social media users के बीच यह impression बना कि 25 अगस्त 2026 को नई संसद के अंदर भी पानी टपकने लगा। लेकिन उपलब्ध रिपोर्ट्स इस दावे की पुष्टि नहीं करतीं। 2024 में क्या हुआ था New Parliament में? नई संसद की इमारत का उद्घाटन 28 मई 2023 को किया गया था। इसके करीब एक साल बाद 31 जुलाई 2024 को दिल्ली में हुई भारी बारिश के दौरान Parliament lobby में पानी टपकने का video सामने आया था। Lok Sabha Secretariat ने तब बयान जारी कर कहा था कि Green Parliament concept के तहत building में natural light के लिए glass domes लगाए गए हैं। भारी बारिश में एक glass dome को fix करने वाला adhesive थोड़ा displaced हो गया था, जिसकी वजह से minor leakage हुई। यही पुराना video अब दो साल बाद एक बार फिर मौजूदा Delhi rains के दौरान viral हुआ। Opposition ने Infrastructure पर उठाए सवाल Congress समेत विपक्ष के नेताओं ने Parliament area में waterlogging को लेकर केंद्र सरकार और civic infrastructure पर सवाल उठाए हैं। Renuka Chowdhury का “boats not votes” वाला बयान भी इसी राजनीतिक हमले का हिस्सा था। वहीं BJP ने पुराना video शेयर किए जाने को मुद्दा बनाया और विपक्ष पर misinformation फैलाने का आरोप लगाया। इस तरह वास्तविक waterlogging और पुराने leakage video के बीच political debate और तेज हो गई। Delhi का Drainage फिर सवालों में…

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आरक्षण आंदोलन पर चर्चा के दौरान डॉ. आंबेडकर और चंद्रशेखर आजाद पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी; अजीत भारती पर FIR, कोर्ट पहुंचे YouTuber

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर जाति-आधारित आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर हुए ‘Reservation Hatao Andolan’ के बाद विवाद अब कानूनी लड़ाई में बदल गया है। YouTuber और commentator अजीत भारती के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एक FIR दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने YouTube कार्यक्रम में नागीना सांसद चंद्रशेखर आजाद और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर को लेकर जातिगत, अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। मामले की जांच जारी है और आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं। FIR दिल्ली के North Avenue Police Station में 23 अगस्त को दर्ज की गई। शिकायत Azad Samaj Party (Kanshi Ram) की ओर से दी गई थी। पुलिस ने SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के साथ Bharatiya Nyaya Sanhita और Information Technology Act की धाराएं भी लगाई हैं। क्या Jantar Mantar के मंच पर हुई थी कथित टिप्पणी? इस मामले में सबसे जरूरी clarification यही है। 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोग caste-based reservation system में बदलाव की मांग को लेकर जुटे थे। आंदोलन में अजीत भारती ने भी हिस्सा लिया और reservation system की समीक्षा, white paper तथा economic criteria जैसे मुद्दे उठाए थे। लेकिन डॉ. आंबेडकर और चंद्रशेखर आजाद को लेकर जिस कथित आपत्तिजनक भाषा पर FIR हुई, वह शिकायत के मुताबिक 22 अगस्त को जारी YouTube show ‘SB79: Reservation Hatao Andolan Nautanki & More | Saptahik Bakaiti’ से संबंधित है। इसलिए इसे सीधे “जंतर-मंतर के मंच पर आंबेडकर पर टिप्पणी” कहना अभी उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक सही नहीं होगा। शिकायत में क्या आरोप लगाए गए? Indian Express द्वारा देखी गई FIR के मुताबिक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि YouTube video में चंद्रशेखर आजाद और डॉ. बी.आर. आंबेडकर को लेकर कथित तौर पर caste-based, abusive और humiliating statements की गईं। शिकायत में महिलाओं को लेकर कथित रूप से sexually degrading language और कुछ statements को inflammatory तथा threatening बताने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की सत्यता अभी investigation और judicial process में तय होनी है। इसलिए कथित आपत्तिजनक शब्दों को बिना जरूरत दोहराना उचित नहीं है। किसकी शिकायत पर दर्ज हुई FIR? मामला Balakram Bauddh, Delhi State President, Azad Samaj Party (Kanshi Ram) की शिकायत पर दर्ज हुआ। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और Nagina MP Chandrashekhar Azad हैं। शिकायत के साथ कथित video और social-media screenshots को electronic evidence के रूप में पुलिस को दिया गया। शिकायतकर्ता ने investigating agency से original platform data, video URL, upload details, metadata, views, comments और reposts जैसी digital information हासिल करने की भी मांग की। किन धाराओं में दर्ज हुआ Case? रिपोर्ट्स के मुताबिक FIR में: समेत संबंधित प्रावधान लगाए गए हैं। Police investigation के बाद ही यह साफ होगा कि उपलब्ध evidence के आधार पर कौन-सी धाराएं आगे कायम रहती हैं। Ajeet Bharti ने आरोपों को किया खारिज अजीत भारती ने सार्वजनिक रूप से इन आरोपों का विरोध किया है। उन्होंने FIR को pressure-driven बताया और दावा किया कि उनके खिलाफ SC/ST Act के तहत मामला नहीं बनता। उनका कहना है कि उनके statements को context से अलग करके पेश किया गया और वे अपने video पर आई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का जवाब दे रहे थे। यह उनका पक्ष है; अदालत और जांच एजेंसी अभी इसकी जांच कर रही हैं। गिरफ्तारी की आशंका के बीच Court पहुंचे इस मामले में 25 अगस्त को अजीत भारती ने Delhi के Patiala House Court में anticipatory bail petition दाखिल की। उनके वकीलों ने दलील दी कि FIR में बताए गए facts के आधार पर SC/ST Act का offence prima facie नहीं बनता। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने अभी BNSS की Section 35(3) के तहत appearance notice जारी नहीं किया है। Additional Sessions Judge Saurabh Pratap Singh Laler ने मामले की सुनवाई की। Court ने Police को क्या कहा? Court ने कहा कि अगर investigating officer अजीत भारती को BNSS Section 35(3) के तहत कोई notice जारी करता है, तो उसकी copy Court के सामने भी रखी जाए। अदालत उस notice की तारीख और SC/ST Act के alleged offence के prima facie ingredients को देखते हुए anticipatory bail application पर विचार करेगी। Court ने investigating officer को notice जारी किया है और मामले को आगे की arguments के लिए 31 अगस्त 2026 को listed किया है। इसका मतलब अभी anticipatory bail पर final फैसला नहीं हुआ है। Jantar Mantar पर क्या था Reservation Hatao Andolan? 21 अगस्त को दिल्ली के Jantar Mantar पर बड़ी संख्या में लोग reservation policy में reform की मांग को लेकर पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में caste-based quota की समीक्षा, economic condition को greater weight देने, reservation पर white paper जारी करने और UGC equity rules पर पुनर्विचार जैसी बातें शामिल थीं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने SC/ST Act में बदलाव या इसे समाप्त करने की मांग भी उठाई। यह मांग विवाद का बड़ा कारण बनी। Police Permission को लेकर भी हुआ विवाद Delhi Police ने शुरुआत में स्पष्ट किया था कि Jantar Mantar पर उस protest के लिए permission नहीं दी गई थी। बाद में Ramlila Maidan में सीमित संख्या में लोगों के लिए peaceful protest की NOC जारी किए जाने की रिपोर्ट सामने आई, लेकिन प्रदर्शनकारी Jantar Mantar से हटने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई और अलग-अलग दिनों में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की घटनाएं भी हुईं। Chandrashekhar Azad ने भी आंदोलन पर साधा निशाना Nagina MP और Bhim Army प्रमुख Chandrashekhar Azad ने anti-reservation protest की आलोचना की और आंदोलन के उद्देश्य पर सवाल उठाए। इसके बाद social media और political discourse में reservation के पक्ष और विरोध में बहस और तेज हो गई। इसी broader controversy के बीच अजीत भारती का YouTube programme सामने आया और उसके बाद Azad Samaj Party की शिकायत पर FIR दर्ज हुई। यह मामला क्यों Sensitive है? यह मामला तीन बेहद संवेदनशील मुद्दों को एक साथ जोड़ता है: पहला, भारत की reservation policy और social justice debate। दूसरा, SC/ST Act और caste-based speech से जुड़े criminal-law provisions। तीसरा, public figures और historical personalities पर online speech की कानूनी सीमाएं। ऐसे मामलों में किसी statement के words,…

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Ram Rahim फिर जेल से बाहर; 21 दिन की Furlough पर सुबह 6:05 बजे रिहा, 17वीं बार मिली Temporary Release

रोहतक/सिरसा: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह मंगलवार, 25 अगस्त 2026 की सुबह एक बार फिर रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आ गया। उसे 21 दिन की furlough दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह सुबह करीब 6:05 बजे जेल से निकला और सुरक्षा व्यवस्था के बीच काफिले के साथ सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय के लिए रवाना हुआ। ताजा अस्थायी रिहाई के साथ, 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद राम रहीम की यह 17वीं parole या furlough release है। वह दो महिला अनुयायियों से बलात्कार के मामलों में 20 साल की सजा काट रहा है। सुबह 6:05 बजे Sunaria Jail से निकला आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार सुबह करीब 6 बजकर 5 मिनट पर राम रहीम रोहतक की high-security Sunaria Jail से बाहर निकला। इसके बाद वह वाहनों के काफिले के साथ सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय के लिए रवाना हुआ। जेल से निकलने के दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार इस बार उसे furlough की अवधि के दौरान Sirsa headquarters में रहने की अनुमति दी गई है। हाल की उसकी temporary releases में भी उसे सिरसा जाने की अनुमति दी गई थी। 17वीं बार जेल से बाहर राम रहीम को अक्टूबर 2020 से अगस्त 2026 तक parole और furlough मिलाकर 17 बार अस्थायी रूप से जेल से बाहर आने की अनुमति मिल चुकी है। इन releases की अवधि अलग-अलग मौकों पर एक दिन से लेकर 50 दिन तक रही है। इस वजह से उसकी बार-बार होने वाली temporary release लगातार सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का विषय बनती रही है। हालांकि parole या furlough का अर्थ सजा खत्म होना या दोषसिद्धि रद्द होना नहीं होता। तय अवधि पूरी होने के बाद कैदी को जेल लौटना होता है और प्रत्येक release सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी तथा निर्धारित शर्तों के अधीन होती है। 2026 में तीसरी बार Temporary Release राम रहीम को इस साल 2026 में ही तीसरी बार जेल से बाहर आने की अनुमति मिली है। जनवरी 2026 में उसे 40 दिन की parole मिली थी। इसके बाद मई में वह 30 दिन की parole पर बाहर आया। वह 26 जून को वापस Sunaria Jail लौटा था। अब करीब दो महीने बाद उसे 21 दिन की furlough मिली है। यानी 2026 में अब तक: मिल चुकी है। Parole और Furlough में क्या अंतर? राम रहीम की रिहाई को लेकर अलग-अलग शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में कहीं parole और कहीं furlough शब्द इस्तेमाल किया गया है। नवीनतम रिपोर्ट्स इसे 21 दिन की furlough बता रही हैं। Parole आमतौर पर किसी विशेष परिस्थिति या जरूरत के आधार पर दी जाने वाली temporary release होती है, जबकि furlough लंबे समय से सजा काट रहे पात्र कैदी को नियमों के तहत निश्चित अवधि की छुट्टी के रूप में मिल सकती है। Haryana prison rules के तहत पात्र कैदियों के लिए parole और furlough की अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं और दोनों के लिए सक्षम प्रशासनिक अधिकारियों की मंजूरी जरूरी होती है। किस मामले में जेल में है Ram Rahim? गुरमीत राम रहीम को 2017 में Panchkula की विशेष CBI अदालत ने दो महिला अनुयायियों से बलात्कार के दो मामलों में दोषी ठहराया था। अदालत ने उसे प्रत्येक मामले में 10-10 साल की सजा सुनाई थी। दोनों सजाएं लगातार चलने के कारण कुल अवधि 20 वर्ष है। वह अगस्त 2017 से जेल में सजा काट रहा है। उसकी दोषसिद्धि के बाद पंचकूला और हरियाणा के कुछ अन्य हिस्सों में बड़े पैमाने पर हिंसा भी हुई थी। Murder Cases में क्या स्थिति है? राम रहीम को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और पूर्व डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह से जुड़े हत्या मामलों में भी निचली अदालत से दोषी ठहराया गया था। हालांकि बाद में Punjab and Haryana High Court ने उसे इन दोनों मामलों में अलग-अलग फैसलों में बरी कर दिया। मौजूदा समय में वह मुख्य रूप से दो महिला अनुयायियों से बलात्कार के मामलों में मिली 20 साल की सजा काट रहा है। इसलिए खबर में उसे murder cases में वर्तमान दोषी बताना सही नहीं होगा। बार-बार Parole-Furlough पर उठते रहे सवाल राम रहीम को लगातार मिलती अस्थायी रिहाई पहले भी राजनीतिक विवाद पैदा करती रही है। विशेष रूप से कुछ releases के चुनावों या डेरा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के आसपास होने को लेकर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं। हालांकि Haryana government और prison authorities का रुख रहा है कि उसे मिलने वाली राहत जेल नियमों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत दी जाती है। किसी कैदी को parole या furlough मिलना अपने आप में असाधारण रूप से स्थायी कानूनी राहत नहीं है और उसे तय शर्तों का पालन करना होता है। इस बार Sirsa Dera में रहेगा Ram Rahim ताजा furlough की खास बात यह है कि राम रहीम को सिरसा स्थित Dera Sacha Sauda headquarters जाने की अनुमति दी गई है। पहले उसकी कई temporary releases के दौरान उसे उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित Barnawa Ashram में रहने की अनुमति दी जाती थी। लेकिन हाल की releases में वह सिरसा headquarters भी जा चुका है। सिरसा डेरा उसके संगठन का मुख्य केंद्र है और बड़ी संख्या में अनुयायी इससे जुड़े हैं। Furlough खत्म होने पर लौटना होगा जेल 21 दिन की furlough पूरी होने के बाद राम रहीम को दोबारा Sunaria Jail लौटना होगा, जब तक कि किसी अन्य वैधानिक आदेश से स्थिति में बदलाव न हो। Furlough उसकी मूल सजा को खत्म नहीं करती और न ही बलात्कार के मामलों में उसकी conviction पर कोई असर डालती है। फिलहाल 25 अगस्त 2026 की सबसे बड़ी ताजा अपडेट यही है कि गुरमीत राम रहीम सुबह 6:05 बजे के आसपास जेल से बाहर आया है और यह उसकी अब तक की 17वीं temporary release है। स्रोत – आजतक, एनडीटीवी, टाइम्स ऑफ इंडिया, लाइव हिन्दुस्तान जय राष्ट्र न्यूज़

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मराठी भाषा नियम के विरोध में मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों की 3 दिन की हड़ताल, यात्रियों की बढ़ी परेशानी

मुंबई: महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और app-based cab drivers के लिए कामचलाऊ मराठी का ज्ञान अनिवार्य किए जाने के विरोध में मुंबई के कुछ हिस्सों में ऑटो-टैक्सी चालकों ने तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल 24 अगस्त 2026 से शुरू हुई और 25 अगस्त को भी इसका असर कई इलाकों में देखने को मिला। यात्रियों को ऑटो और टैक्सी मिलने में दिक्कत हुई और कई जगह 40 से 50 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। प्रदर्शनकारी चालकों का कहना है कि उन्हें मराठी सीखने से आपत्ति नहीं है, बल्कि उनकी नाराजगी language test के तरीके, कम समय और कथित रूप से training से बाहर पूछे जा रहे सवालों को लेकर है। दूसरी तरफ महाराष्ट्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि drivers को मराठी का expert नहीं बनना है, बल्कि काम के दौरान यात्रियों से बातचीत करने लायक basic Marathi आनी चाहिए। कांदिवली में सड़क पर उतरे चालक हड़ताल का सबसे ज्यादा असर मुंबई के Kandivali क्षेत्र में देखने को मिला। सोमवार सुबह Laljipada के पास Kandivali Link Road पर दर्जनों drivers ने रास्ता-रोको प्रदर्शन किया। कुछ समय के लिए traffic भी प्रभावित हुआ और मौके पर पुलिस बल तैनात करना पड़ा। Kandivali के अलावा Malad West, Santacruz, Dahisar और Andheri समेत कुछ अन्य इलाकों में भी demonstrations की खबरें सामने आईं। कई चालकों ने काम बंद करके दूसरे drivers से भी protest में शामिल होने की अपील की। क्यों हो रहा है विरोध? महाराष्ट्र Transport Department ने passenger vehicles चलाने वाले drivers के लिए working knowledge of Marathi की शर्त को सख्ती से लागू करना शुरू किया है। RTO अधिकारी drivers से बातचीत कर यह जांच रहे हैं कि वे दैनिक कामकाज के लिए जरूरी मराठी समझ और बोल सकते हैं या नहीं। Assessment process को video-record भी किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह शर्त नई नहीं है। Transport Minister Pratap Sarnaik के मुताबिक practical Marathi knowledge से जुड़ी requirement महाराष्ट्र में 1989 से मौजूद है, लेकिन अब इसे ज्यादा सख्ती से लागू किया जा रहा है। Drivers बोले- Marathi सीखने से आपत्ति नहीं प्रदर्शनकारी drivers का कहना है कि उनका विरोध मराठी भाषा से नहीं है। उनका आरोप है कि RTO assessment में ऐसे सवाल पूछे जा रहे हैं जो उन्हें दी गई training का हिस्सा नहीं थे। कई drivers ने यह भी कहा कि वे मराठी समझते हैं और टूटी-फूटी भाषा में बातचीत कर सकते हैं, लेकिन fluency हासिल करने के लिए उन्हें ज्यादा समय चाहिए। कुछ drivers ने यह भी कहा कि वे रोज की कमाई पर निर्भर हैं और language classes के लिए काम छोड़ना उनके लिए आर्थिक नुकसान का कारण बनता है। पहले Notice, फिर हो सकती है कार्रवाई सरकार के नियम के मुताबिक किसी driver में पर्याप्त working knowledge नहीं मिलने पर तत्काल licence cancel नहीं किया जाएगा। पहले उसे एक महीने का notice दिया जाएगा ताकि वह मराठी सीख सके। अगर एक महीने के बाद भी वह requirement पूरी नहीं करता, तो उसका badge तीन महीने के लिए suspend किया जा सकता है। इसके बाद भी जानबूझकर भाषा नहीं सीखने की स्थिति में badge और permit cancellation जैसी कार्रवाई हो सकती है। यानी किसी driver के language test में कमजोर पाए जाने भर से तुरंत permanent licence cancellation का नियम नहीं है। ₹5,000 से ₹25,000 Fine की खबरों पर सरकार की सफाई प्रदर्शन के दौरान drivers में यह डर भी फैला कि मराठी नहीं आने पर ₹5,000 से ₹20,000 या उससे ज्यादा का fine लगाया जा रहा है। Borivali RTO के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक ऐसी भारी penalty को लेकर misinformation फैलने की बात सामने आई है। Transport Minister Pratap Sarnaik ने कहा कि एक महीने की notice period पूरी होने से पहले अगर कोई RTO अधिकारी गलत तरीके से fine लगाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य drivers को परेशान करना नहीं है, बल्कि उन्हें practical Marathi सीखने का मौका देना है। Fadnavis बोले- Marathi Expert बनाना मकसद नहीं मामला बढ़ने के बाद Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis ने भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि सरकार किसी हिंदीभाषी या गैर-मराठी driver को Marathi language expert नहीं बनाना चाहती। उनके मुताबिक driver को केवल इतनी मराठी आनी चाहिए कि वह अपने काम से जुड़े सामान्य सवाल और यात्रियों से basic बातचीत कर सके। फडणवीस ने यह भी कहा कि drivers को भाषा सीखने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है और अभी तक किसी licence को केवल इस आधार पर cancel नहीं किया गया है। पहले दिन 8,217 Drivers की हुई जांच Transport Department के आंकड़ों के मुताबिक शुरुआती verification drive में पूरे महाराष्ट्र में 8,217 auto-rickshaw और taxi drivers की जांच की गई। इनमें 1,268 drivers को notice जारी किया गया। Mumbai Metropolitan Region में 3,995 drivers की जांच की गई, जिनमें 604 drivers working Marathi requirement पूरी नहीं कर पाए। बाकी जिलों में 4,222 drivers की जांच हुई और 664 को notice मिला। महाराष्ट्र में कुल करीब 9.65 लाख auto-rickshaw और taxi permits/badges बताए गए हैं। 1.65 लाख से ज्यादा Drivers ने ली Marathi Training सरकार के मुताबिक करीब 1.65 लाख non-Marathi auto और taxi drivers अब तक Marathi language classes में शामिल हो चुके हैं और कई को certificates भी दिए गए हैं। सरकार का तर्क है कि training programme drivers को basic conversation सीखने के लिए पर्याप्त अवसर देता है। वहीं विरोध कर रहे चालकों का कहना है कि इतनी बड़ी workforce के लिए training और assessment process को ज्यादा practical और flexible बनाने की जरूरत है। Bombay High Court पहुंचा मामला इस विवाद में 25 अगस्त को एक नया कानूनी मोड़ भी सामने आया। चार app-based cab drivers की ओर से Bombay High Court में PIL दायर किए जाने की प्रक्रिया सामने आई है, जिसमें Maharashtra government के 12 August notification को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि Marathi language requirement Articles 14, 19 और 21 के तहत उनके fundamental rights को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने यह भी तर्क दिया है कि Motor Vehicles Act, 1988 में driving licence रखने के लिए किसी खास भाषा की…

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