Krishna Janmbhoomi Case HC Rejects Plea

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद: हाई कोर्ट ने हिंदू पक्ष की याचिका खारिज की, मामला सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ा

मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद (Shri Krishna Janmabhoomi and Shahi Idgah dispute) एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह बनी है इलाहाबाद हाई कोर्ट का एक महत्वपूर्ण फैसला, जिसमें अदालत ने हिंदू पक्ष की उस अर्जी को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित करने की मांग की थी। इस निर्णय से जहां मुस्लिम पक्ष को बड़ी राहत मिली है, वहीं हिंदू पक्ष अब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। यह मामला संवेदनशील धार्मिक भावनाओं और ऐतिहासिक विवाद से जुड़ा होने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा है। क्या थी याचिका? हिंदू पक्ष की ओर से यह याचिका वकील महेंद्र प्रताप सिंह ने दायर की थी, जो खुद इस मुकदमे में वादी हैं। उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) में सूट नंबर 13 के अंतर्गत एक एप्लीकेशन (A-44) दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि शाही ईदगाह मस्जिद (Shahi Idgah Mosque) को अदालत की सभी कार्यवाहियों में विवादित ढांचा के रूप में संबोधित किया जाए। इस आवेदन में कोर्ट के स्टेनोग्राफर को निर्देश देने की भी अपील की गई थी कि जब तक मुकदमे की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक मस्जिद का उल्लेख केवल विवादित ढांचे के रूप में किया जाए। लेकिन अदालत ने इस प्रार्थना पत्र को अस्वीकार कर दिया। मुस्लिम पक्ष को मिली राहत हाई कोर्ट (High Court) के इस फैसले से मुस्लिम पक्ष को बड़ी राहत मिली है। मुस्लिम पक्ष की ओर से इस आवेदन पर लिखित आपत्ति भी दायर की गई थी, जिसमें इस मांग को असंवैधानिक और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली बताया गया। अदालत ने यह स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी कि इस स्तर पर मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित करना उचित नहीं है।  अब सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी हिंदू पक्ष के वकील महेंद्र प्रताप सिंह ने फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए बताया कि वे कोर्ट के डिटेल्ड ऑर्डर का अध्ययन करने के बाद इस मामले को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में ले जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि उनका लक्ष्य केवल ऐतिहासिक तथ्यों की सत्यता को न्यायिक रूप से स्थापित करना है और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद यह विवाद भारत के सबसे पुराने और संवेदनशील धार्मिक विवादों में से एक माना जाता है। मथुरा में स्थित 11 एकड़ भूमि को लेकर यह विवाद है, जिसमें से 2.37 एकड़ जमीन पर शाही ईदगाह मस्जिद (Shahi Idgah Mosque) स्थित है और शेष हिस्सा श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के पास है। हिंदू पक्ष का दावा है कि मुगल शासक औरंगजेब ने 1669-70 में प्राचीन केशवदेव मंदिर को नष्ट कर इस मस्जिद का निर्माण करवाया था। उनका कहना है कि यही वह स्थान है जहां भगवान श्रीकृष्ण (Lord Shri Krishna) का जन्म हुआ था। इसलिए वे चाहते हैं कि मस्जिद को हटाकर उस स्थान को पूरी तरह से मंदिर के रूप में पुनर्स्थापित किया जाए। वहीं मुस्लिम पक्ष इस दावे को नकारता है। उनका कहना है कि मस्जिद का निर्माण पूरी तरह वैध और कानूनी रूप से मान्य है और वह जमीन उन्हें किसी विवाद के तहत नहीं दी गई थी। इसे भी पढ़ें:- मुखाग्नि से पहले क्यों किया जाता है सुहागिन स्त्री का सोलह श्रृंगार? ऐतिहासिक और कानूनी संदर्भ यह मामला पहली बार 1968 में सुर्खियों में आया था, जब श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट और शाही ईदगाह ट्रस्ट के बीच एक समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों ने अपने-अपने अधिकारों को मान्यता दी थी और विवाद खत्म करने का प्रयास किया गया था। लेकिन हाल के वर्षों में इस समझौते को चुनौती (Shri Krishna Janmabhoomi and Shahi Idgah dispute) दी जा रही है और कई नए मुकदमे दायर किए गए हैं। 2020 के बाद से कई नए याचिकाकर्ताओं ने अदालत में यह मांग की है कि पुराने समझौते को रद्द कर मंदिर भूमि को पूरी तरह से हिंदू ट्रस्ट (Hindi Trust) को सौंपा जाए। इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) द्वारा याचिका A-44 को खारिज किए जाने से यह स्पष्ट है कि अदालत फिलहाल कोई पूर्वग्रह या भावनात्मक आधार पर फैसला नहीं लेना चाहती। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की ओर बढ़ रहा है, जहां इसे संविधान, इतिहास और कानून के परिप्रेक्ष्य में देखा जाएगा। ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर न्यायपालिका की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यह न केवल न्याय सुनिश्चित करती है बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी बनाए रखने में अहम योगदान देती है। आने वाले समय में यह देखना रोचक होगा कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) इस ऐतिहासिक विवाद पर क्या रुख अपनाता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Shri Krishna Janmabhoomi #KrishnaJanmbhoomi #ShahiEidgah #SupremeCourt #HighCourtVerdict #HinduMuslimDispute

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Congress Sanitary Pad Scheme Sparks Controversy in Bihar Polls

बिहार चुनाव में महिलाओं को साधने की कोशिश: कांग्रेस की ‘सैनिटरी पैड स्कीम’ पर उठा विवाद

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज़ हो गई हैं। सभी राजनीतिक दल अपने-अपने चुनावी वादों और अभियानों के ज़रिए जनता को लुभाने की कोशिश में लगे हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस पार्टी (Congress Party) ने राज्य की महिलाओं को साधने के लिए एक नई पहल की शुरुआत की है। पार्टी ने माई बहिन मान योजना (Maai Bahin Maan Yojana) के तहत महिलाओं के बीच 5 लाख सैनिटरी पैड (Sanitary Pads) बांटने की योजना बनाई है। हालांकि यह स्कीम अब राजनीतिक विवाद का कारण बन गई है और विपक्ष खासतौर से बीजेपी (BJP) ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। महिलाओं को जागरूक करने का दावा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार (Rajesh Kumar, State Congress President) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस योजना की घोषणा करते हुए कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता और सम्मान को ध्यान में रखते हुए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रदेश की 5 लाख महिलाओं तक मुफ्त सैनिटरी नैपकिन (Sanitary Pads) पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जो कि महिला कांग्रेस की अगुवाई में वितरित किए जाएंगे। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की महिलाओं को मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है, जो आज भी एक बड़ा सामाजिक मुद्दा बना हुआ है। विवाद की वजह: पैकेट पर राहुल गांधी की तस्वीर इस सामाजिक अभियान पर विवाद तब शुरू हुआ जब वितरित किए जाने वाले सैनिटरी पैड (Sanitary Pads) के पैकेट पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तस्वीर छपी हुई पाई (Rahul Gandhi photo on Sanitary Pads) गई। इससे इस योजना की राजनीतिक मंशा पर सवाल उठने लगे। बीजेपी (BJP) ने इसे प्रचार का एक तरीका बताया है और कांग्रेस (Congress) पर चुनावी लाभ के लिए महिलाओं की समस्याओं का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। बीजेपी प्रवक्ता कुंतल कृष्णा ने मीडिया से कहा कि यह कांग्रेस की चापलूसी की पराकाष्ठा और मानसिक दिवालियापन का प्रमाण है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की तस्वीर सैनिटरी पैड (Sanitary Pads) के पैकेट पर लगाकर कांग्रेस ने यह साबित कर दिया है कि वह अपने नेताओं को कहां स्थापित करना चाहती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर कांग्रेस केवल चुनावी स्टंट कर रही है। ‘माई बहिन मान योजना’ क्या है? कांग्रेस पार्टी की ‘माई बहिन मान योजना (Maai Bahin Maan Yojana) एक ऐसी सामाजिक और चुनावी पहल है, जिसके तहत पार्टी ने महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने का वादा किया है। यह राशि विशेष रूप से वंचित, ग्रामीण और कामकाजी महिलाओं को दी जाएगी। इस योजना को पार्टी ने महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बताया है और कहा है कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है, तो इस योजना को लागू किया जाएगा। स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी सामाजिक आवश्यकता भारत जैसे विकासशील देश में विशेषकर बिहार जैसे राज्य में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता अब भी एक वर्जित विषय बना हुआ है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) के आंकड़ों के अनुसार बिहार में केवल 30% महिलाएं ही सैनिटरी नैपकिन का नियमित इस्तेमाल करती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा और भी कम है। ऐसे में यदि कोई राजनीतिक पार्टी महिलाओं तक मुफ्त सैनिटरी नैपकिन पहुंचाने का कार्य करती है, तो वह निश्चित रूप से एक ज़रूरी सामाजिक कदम कहा जा सकता है, बशर्ते इसमें राजनीतिक लाभ की मंशा हावी न हो। क्या है विशेषज्ञों की राय? स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यों से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि मासिक धर्म से जुड़ी स्वच्छता और शिक्षा को बढ़ावा देना आवश्यक है, लेकिन इसे राजनीतिक प्रचार के औज़ार के रूप में इस्तेमाल करना निंदनीय है।  कांग्रेस की 5 लाख सैनिटरी पैड (Sanitary Pads) बांटने की योजना एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल हो सकती थी, यदि इसे केवल महिलाओं की मदद और जागरूकता तक सीमित रखा जाता। लेकिन राजनीतिक छवि निर्माण के प्रयासों ने इस योजना को विवादों में ला खड़ा किया है। यह स्पष्ट है कि बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) में महिलाएं एक बड़ा वोट बैंक बनकर उभरी हैं और सभी पार्टियां उन्हें अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही हैं। सवाल यह नहीं है कि सैनिटरी पैड (Sanitary Pads) बांटे जाएं या नहीं, सवाल यह है कि क्या महिलाओं की गरिमा को बनाए रखते हुए, उन्हें राजनीति से ऊपर रखकर सहायता प्रदान की जाएगी? चुनावी लाभ से परे जाकर महिलाओं के लिए सोचने का वक्त अब आ गया है। Latest News in Hindi Today Hindi Rahul Gandhi Sanitary Pads #BiharElections2025 #CongressScheme #SanitaryPadControversy #WomenVoters #PoliticalDebate

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A girl was brutally killed for refusing money demands;

Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter: बार-बार पैसे माँगने के चलते चाकू से रेता छात्रा का गला, पुलिस ने किया एनकाउंटर

लोग चंद पैसों के खातिर किसी का खून करने से भी बाज नहीं आते। ताजा मामला है उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के मिर्जामुराद थाना क्षेत्र का जहाँ, बुधवार को रूपापुर में हाईवे किनारे स्थित विधान बसेरा ढाबा के कमरे में कंबल में लिपटा एक शव मिला था। शव की पहचान मिर्जामुराद थाना क्षेत्र के मेंहदीगंज की रहने वाली 22 वर्षीय अलका बिंद के रूप में (Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter) हुई। शव मिलने से हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस को सूचना दी गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने ढाबा में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को कब्जे में ले कर फुटेज खंगाल रही है। जानकारी के मुताबिक अलका बिंद रूपापुर (खोचवां) स्थित महाविद्यालय में एमएससी प्रथम वर्ष की छात्रा थी। रोज की तरह घर से महाविद्यालय जाने के लिए सुबह नौ बजे निकली। महाविद्यालय न जाकर विधान बसेरा ढाबा पर चली गई। वहां वो पहले से मौजूद युवक से मिली। दोनों ने साथ में नाश्ता किया। इसके बाद युवक ने ढाबा के कर्मचारी झल्लर यादव से एक रूम का इंतजाम करने के लिए कहा। उसने ढाबा परिसर में बने कमरे की चाभी उसे दे दिया।  शव का गला धारदार हथियार से रेता गया था और बिस्तर पर व कमरे में खून फैला हुआ (Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter) था इस बीच शाम को जब सफाईकर्मी प्रदीप कमरे की सफाई करने पहुंचा तब उसने युवती का शव कंबल में लिपटा देखा। शव का गला धारदार हथियार से रेता गया था। बिस्तर पर व कमरे में खून फैला हुआ (Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter) था। शव देखकर वो डर गया। ढाबा मालिक की सूचना पर डीसीपी आकाश पटेल, एसीपी  अजय श्रीवास्तव, थाना प्रभारी प्रमोद पांडेय, फोरेंसिक टीम व डाग स्क्वायड मौके पर पहुंचे शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और पूछताछ के लिए ढाबा के कर्मचारी को हिरासत में लिया। खैर, इस बीच पौधों की नर्सरी चलाने वाले चंद्रशेखर बिंद बेटी अलका के देर तक घर नहीं लौटने पर चिंतित हो उठे। इस बीच वो अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ उसकी तलाश करने लगे। हर जगह थक हारकर जब कहीं कुछ पता नहीं चला तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सोची। बेटी की गुमशुदगी की दर्ज कराने जब मिर्जामुराद थाना गए तो वहां उन्हें एक युवती का शव ढाबा में मिलने की सूचना मिली। आनन-फानन में वो उस ढाबे पर भी गये जहाँ शव होने की बात पता चली थी। उन्होंने उस कमरे में भी जाने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें मना कर दिया। इस बीच मोबाइल कवर व बैग से युवती की पहचान अलका के रूप में हुई। देखते ही देखते ढाबा पर ग्रामीणों के भीड़ जमा हो गई। शव न दिखाए जाने पर स्वजन ने हंगामा भी किया।  चाकू से गला रेतकर हत्या करने के बाद उसे आत्महत्या देने का रूप देने की कोशिश (Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter) की  युवती की हत्या के मामले में पुलिस ने ढाबा पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला। सीसीटवी में पुलिस देखा कि एक युवक आटो में सवार होकर सुबह 9.08 बजे ढाबा पर (Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter) पहुंचा। युवती भी आटो से 9.23 आई थी। फुटेज में दोनों आते दिखाई दे रहे हैं लेकिन जाते हुए नजर नहीं आ रहा है। फुटेज में उसका चेहरा भी स्पष्ट नहीं हो रहा है। पुलिस ढाबा संचालक व एक कर्मचारी को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस को कमरे में सब्जी काटने वाला चाकू मिला। पंखे की कुंडी से बंधा हुआ दुपट्टा का फंदा था। पुलिस को आशंका है कि युवक ने अलका की चाकू से गला रेतकर हत्या करने के बाद उसे आत्महत्या देने का रूप देने की कोशिश किया होगा। काशी-प्रयागराज हाइवे किनारे संचालित होने वाले कई ढाबों पर इसी तरह बिना किसी जांच-परख के युवक-युवतियों को कमरा दिया (Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter) जाता है इस बीच हैरत की बात यह कि अलका और उसके साथ आए युवक को कमरे देने के दौरान ढाबा के कर्मचारी ने उनसे कोई आइ़़डी नहीं ली। उनका नाम-पता भी किसी रजिस्टर में दर्ज नहीं किया (Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter) था। इसकी वजह से पुलिस को युवक के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली पा रही थी। एसीपी अजय श्रीवास्तव ने आशंका व्यक्त किया है कि “ढाबा में बिना किसी रिकार्ड के कमरे दिए जाने की जानकारी अलका के साथ आए युवक को रही होगी। उसीने साजिश के तहत घटना को अंजाम दिया होगा।” स्थानीय लोगों की माने तो काशी-प्रयागराज हाइवे किनारे संचालित होने वाले कई ढाबों पर इसी तरह बिना किसी जांच-परख के युवक-युवतियों को कमरा दिया जाता है। बदले में उनसे मोटी रकम वसूली जाती है। शव के पास से चाकू, मोबाइल कवर, चप्पल, हेयर क्लचर, ब्लड स्वैब, लैपटॉप बैग, डायरी एवं अन्य वस्तुएं मौके से बरामद किये (Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter) गए  शव के पास से चाकू, मोबाइल कवर, चप्पल, हेयर क्लचर, ब्लड स्वैब, लैपटॉप बैग, डायरी एवं अन्य वस्तुएं मौके से बरामद कर विधिक रूप से सील की गईं। इस बीच घटना के संबंध में मृतका के पिता द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं में एफआईआर (Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter) दर्ज कर ली गई। घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, होटल रजिस्टर में दर्ज विवरण, तकनीकी सर्विलांस व मृतका के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल्स के आधार पर आरोपी साहब बिंद पुत्र डंगर बिंद, निवासी ग्राम बरैनी, थाना कछवा बाजार, जनपद मिर्जापुर को इस हत्याकांड में नामजद कर उसकी तलाश शुरू कर दी। अभियुक्त की लोकेशन भदोही में स्थित अपनी बहन के घर पाई गई, जहां से उसे आज 03 जुलाई 2025 को मिर्जामुराद पुलिस टीम द्वारा हिरासत में लिया गया। इसे भी पढ़ें:- आरजी कर कांड के बाद अब कोलकाता के लॉ कॉलेज में छात्रा के साथ हुआ सामूहिक दुष्कर्म दोनों के मध्य प्रेम संबंध स्थापित हो (Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter) गए थे   गिरफ्तारी के बाद अभियुक्त से… Read More

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CM Yogi Adityanath approves 'UPCOS'

उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स भर्ती के लिए नया नियम: मुख्यमंत्री योगी ने दिया ‘UPCOS’ को मंजूरी

उत्तर प्रदेश सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्तियों और उनके हितों की रक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाते हुए एक अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (Universal Pharma-Coding System {UPCOS}) के गठन को मंजूरी दे दी गई है। यह निगम कंपनी एक्ट के तहत गठित किया जाएगा और इसका उद्देश्य न केवल आउटसोर्स भर्ती में पारदर्शिता लाना है, बल्कि कर्मचारियों के अधिकारों और सुरक्षा को भी सुनिश्चित करना है। क्या है यूपीकॉस (UPCOS)? UPCOS यानी Uttar Pradesh Corporation for Outsourced Services राज्य का एक नया सरकारी निकाय होगा, जो अब राज्य में होने वाली सभी आउटसोर्स भर्तियों की निगरानी और काम-काज की देखभाल करेगा। यह निगम कंपनी एक्ट के अंतर्गत रजिस्टरकिया जाएगा और एक स्वतंत्र नियामक संस्था (Independent Regulatory Body) की तरह काम करेगा। इसकी स्थापना से पहले आउटसोर्स भर्तियाँ निजी एजेंसियों के माध्यम से की जाती थीं, जिन पर कई बार पारदर्शिता और शोषण के आरोप लगे हैं। भर्ती प्रक्रिया में आएगा बदलाव अब यूपी में आउटसोर्स के ज़रिए की जाने वाली सभी नियुक्तियाँ UPCOS के माध्यम से ही होंगी। इसमें खास बात यह है कि भर्ती में SC, ST, OBC, EWS, महिलाओं, दिव्यांगजनों और पूर्व सैनिकों को आरक्षण का लाभ मिलेगा। इतना ही नहीं तलाकशुदा महिलाओं को भी प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे सामाजिक रूप से पिछड़े और हाशिए पर खड़े वर्गों को समान अवसर मिल सके। मुख्य सचिव होंगे अध्यक्ष UPCOS की प्रशासनिक संरचना भी काफी स्पष्ट है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार निगम के अध्यक्ष उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव होंगे। इसके साथ ही एक बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और एक डायरेक्टर की नियुक्ति की जाएगी। राज्य स्तर पर ही नहीं, मंडल और जिला स्तर पर भी भर्ती समितियों का गठन किया जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर भर्ती की प्रक्रिया सुचारु रूप से हो सके। भर्ती के लिए निजी एजेंसियों का चयन GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल के जरिए किया जाएगा और ये एजेंसियाँ 3 साल की अवधि के लिए नियुक्त की जाएंगी। भर्ती में अनुभव को भी प्राथमिकता दी जाएगी। UPCOS की एक खास भूमिका यह भी होगी कि यह रेगुलेटरी बॉडी की तरह काम करेगा। इसका मतलब है कि यह निगम केवल भर्ती ही नहीं करेगा, बल्कि भर्ती एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी नजर रखेगा। यदि कोई एजेंसी नियमों का उल्लंघन करती है, तो निगम उन्हें ब्लैकलिस्ट, डिबार या दंडित कर सकेगा। इस कदम से एजेंसियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी और कर्मचारियों के साथ शोषण या भेदभाव की घटनाओं पर अंकुश लगेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह भी स्पष्ट निर्देश दिया है कि नियमित पदों पर आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की जाएगी, ताकि सरकारी ढांचे की स्थिरता बनी रहे और नियमित नियुक्तियाँ बाधित न हों। इसे भी पढ़ें:-  क्या बिहार चुनाव में ओवैसी को गठंबंधन का हिस्सा न बनाना लालू को पड़ सकता है भारी? क्यों जरूरी था UPCOS का गठन? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने बताया कि पिछले काफी समय से आउटसोर्स कर्मियों की शिकायतें सामने आ रही थीं। वेतन कटौती, EPF/ESI का लाभ न मिलना, ओवरटाइम के बावजूद भुगतान न होना और अनुचित कार्य-घंटों जैसी समस्याएं आम थीं। इन समस्याओं के पीछे मुख्य रूप से भर्ती एजेंसियों की लापरवाही और मनमानी थी। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया कि एक केंद्रीकृत और पारदर्शी प्रणाली बनाई जाए जो कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा कर सके।  सामाजिक न्याय की दिशा में कदम UPCOS सामाजिक न्याय की दिशा में एक बेहतर निर्णय माना जा रहा है । इसमें वंचित वर्गों को न केवल भागीदारी दी गई है, बल्कि उन्हें प्राथमिकता भी दी गई है। इस तरह राज्य सरकार यह संदेश देना चाहती है कि विकास और अवसर सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध होने चाहिए। उत्तर प्रदेश में UPCOS का गठन आउटसोर्स भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इससे न केवल आउटसोर्स कर्मियों को अधिकार मिलेगा, बल्कि भर्ती प्रणाली में अनुशासन और स्थिरता भी आएगी। यह योजना सामाजिक समानताऔर श्रमिक हितों की रक्षा का एक संतुलित मॉडल पेश करती है, जो अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Yogi Adityanath #UPCOS #YogiAdityanath #UttarPradeshJobs #OutsourcingRecruitment #UPJobs #UPNews #GovernmentJobs

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Owaisi's Absence

Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?: क्या बिहार चुनाव में ओवैसी को गठंबंधन का हिस्सा न बनाना लालू को पड़ सकता है भारी?

साल के अंत में बिहार में चुनाव होने हैं। चुनाव भले ही साल के अंत में होने हैं लेकिन सरगर्मियां अभी से गई हैं। सभी राजनीतिक दल अभी से अपना-अपना नफा नुकसान देखने लगे हैं। इसी कड़ी में हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम असदुद्दीन ओवैसी भी अपनी पैठ जमाने के लिए इंडिया गठबंधन में शामिल होना चाहते (Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) हैं। इसके चलते एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने बाकायदा लालू यादव को पत्र लिखा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि आखिर ऐसी कौन सी वजह है जो ओवैसी लालू के साथ हाथ मिलाना चाहते हैं? ओवैसी इंडिया गठबंधन में इसलिए भी शामिल होना हैं क्योंकि उनकी नजर मुस्लिम वोटों पर है। वैसे तो बिहार में हर बार की तरह इस बार भी सभी की नजर मुस्लिम वोटो पर है। हो भी क्यों न, बिहार में 50 से अधिक सीटों पर मुस्लिम वोटर्स काबिज जो हैं। बता दें कि मुस्लिम बिहार की कुल आबादी का 17 प्रतिशत है। ध्यान देने वाली बात यह कि बिहार में कभी भी मुस्लिम वोटर एकतरफा वोट कास्ट नहीं करते हैं। बिहार में मुस्लिम जेडीयू, आरजेडी को वोट करते रहे हैं। 2020 के विधानसभा में 76 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स इंडिया गठबंधन के साथ (Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) थे आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक इंडिया गठबंधन को मुस्लिम वोट सबसे ज्यादा मिलता रहा है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन को 87 प्रतिशत मुस्लिमों ने वोट किया था। जबकि 2020 के विधानसभा में 76 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स इंडिया गठबंधन के साथ (Will Owaisi’‘s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) थे। बात करें साल 2020 में हुए विधानसभा चुनाव की तो इस चुनाव में आरजेडी को ओवैसी की पार्टी ने काफी नुकसान पहुंचाया था। जिसका सीधा फायदा जेडीयू को हुआ था। जेडीयू पिछले चुनाव में मात्र 43 सीटों पर सिमट कर रह गई थी। जिसके लिए वे चिराग पासवान की पार्टी को जिम्मेदार मानते हैं। हालांकि उनको जो सीटें मिली हैं उसमें सीमांचल का योगदान अधिक है। इसकी सबसे बड़ी वजह ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम थी। वैसे भी जिस राज्य में मुस्लिम आबादी अधिक होती है, वहां पर ओवैसी पहुंच जाते हैं और विपक्षी पार्टियों को जबरदस्त नुकसान पहुंचाते हैं। कारण यही जो विरोधी दल उन्हें बीजेपी की बी भी कहते हैं। हालांकि ओवैसी और बीजेपी दोनों इसे सिरे से ख़ारिज करते हैं।  चुनाव के कुछ समय बाद ही ओवैसी के 5 में से 4 विधायक आरजेडी में शामिल हो गए (Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) थे कहने की जरूरत नहीं, साल 2020 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटों के बिखरने से एनडीए को फायदा हुआ था। हालांकि ये बात आरजेडी ख़ारिज करती है। ऐसा इसलिए कि आरजेडी के मुखिया लालू यादव को लगता है कि बिहार में अमूमन अधिकतर मुस्लिम वोटर्स उन्हीं की पार्टी को वोट करता है। दरअसल, लंबे समय से लालू यादव बिहार में एमवाई समीकरण को साधे हुए (Will Owaisi’‘s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) हैं। बड़ा कारण यही जो बिहार में उन्हें मुस्लिम वोटर्स के लिए किसी अन्य पार्टी से गठबंधन की जरूरत नहीं है। वो बात और है कि पिछली बार उन्हें कुछ सीटों का नुकसान हुआ था, लेकिन चुनाव के कुछ समय बाद ही ओवैसी के 5 में से 4 विधायक आरजेडी में शामिल हो गए थे। एक बड़ी वजह यह भी जो लालू यादव ओवैसी को बिहार में बड़ी चुनौती नहीं मानते।  इसे भी पढ़ें:-  मीरा रोड थप्पड़ कांड पर संजय निरुपम ने सरकार से की कार्रवाई की मांग, आखिर पुलिस क्यों नहीं ले रही है कोई एक्शन? ओवैसी यदि इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनते हैं तो मुस्लिम वोटर एक मुस्त होकर इंडिया गठबंधन को वोट (Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) करेंगे वैसे भी बीजेपी कभी नहीं चाहेगी कि ओवैसी कभी इंडिया गठबंधन में शामिल हों। क्योंकि ओवैसी यदि इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनते हैं तो मुस्लिम वोटर एक मुस्त होकर इंडिया गठबंधन को वोट करेंगे। इसमें नुकसान बीजेपी का (Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) होगा। इसके अलावा बीजेपी के सहयोगी दल जेडीयू ने वक्फ बिल का सपोर्ट किया था। ऐसे में इस बार उससे मुस्लिम वोटर्स के छिटकने का भी डर है। इसके बावजूद दोनों पार्टियों ने मुस्लिम वोटर्स को रिझाने की रणनीति बना ली है। दरअसल, बिहार की 17 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स की आबादी में से 10 प्रतिशत पसमांदा यानी अति पिछड़े मुस्लिम हैं। जेडीयू का मानना है कि नए वक्फ कानून से पसमांदा मुस्लिमों को फायदा होगा। अब देखना दिलचस्प होगा कि जेडीयू और बीजेपी का यह पैंतरा इंडिया गठबंधन के खिलाफ कितना कारगर सिद्ध होगा। Latest News in Hindi Today Hindi news Owaisi’ #Owaisi #LaluYadav #BiharElections2025 #AIMIM #BiharPolitics #Mahagathbandhan #MuslimVotes #PoliticalAnalysis

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SSC JE 2025

SSC Junior Engineer Recruitment 2025: इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स के लिए सुनहरा अवसर

अगर आपने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे हैं, तो आपके लिए यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है। स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) ने जूनियर इंजीनियर (JE) के पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। SSC जूनियर इंजीनियर रिक्रूटमेंट 2025 (SSC Junior Engineer Recruitment 2025) भर्ती सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के डिप्लोमा या डिग्री होल्डर्स के लिए सुनहरा मौका लेकर आई है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार SSC की आधिकारिक वेबसाइट ssc.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 21 जुलाई 2025 निर्धारित की गई है, इसलिए उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। पदों की संख्या SSC की इस भर्ती प्रक्रिया (SSC Recruitment Process) के तहत कुल 1340 पदों के लिए वैकेंसी आई है। ये सभी पद जूनियर इंजीनियर (Junior Engineer) के हैं और इनका वर्गीकरण सिविल, मैकेनिकल तथा इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के अनुसार किया गया है। यह संख्या अस्थायी है और आवश्यकता के अनुसार इसमें बदलाव भी किये जा सकते हैं।  कौन कर सकता है आवेदन? इस भर्ती के लिए वे सभी उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से सिविल, मैकेनिकल या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा या डिग्री प्राप्त की हो। इसके साथ ही उम्मीदवारों की आयु सीमा और अन्य पात्रता मापदंडों की विस्तृत जानकारी के लिए आयोग द्वारा जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन को ध्यानपूर्वक पढ़ना आवश्यक है। आवेदन प्रक्रिया – स्टेप बाय स्टेप गाइड SSC JE भर्ती के लिए आवेदन ऑनलाइन मोड में किया जा सकता है। यहां नीचे बताए गए स्टेप्स को फॉलो करके उम्मीदवार आसानी से आवेदन कर सकते हैं: आवेदन शुल्क चयन प्रक्रिया SSC JE भर्ती की चयन प्रक्रिया में मुख्यतः दो चरण होते हैं: इसे भी पढ़ें:- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट कैसे बनें? क्यों है SSC JE एक बेहतर करियर विकल्प? SSC JE सरकारी क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित पद है। इसमें न सिर्फ स्थिरता मिलती है, बल्कि अच्छी सैलरी, प्रमोशन की संभावना, और विभिन्न भत्तों का भी लाभ मिलता है। यह पद तकनीकी पृष्ठभूमि से आने वाले युवाओं को देश की आधारभूत संरचना के विकास में योगदान देने का अवसर प्रदान करता है। सरकारी नौकरी (Government Jobs) की तैयारी कर रहे इंजीनियरिंग स्नातकों के लिए SSC JE 2025 भर्ती (SSC Junior Engineer Recruitment 2025) एक सुनहरा अवसर है। भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और मेरिट-आधारित होती है, जिससे योग्य उम्मीदवारों को उनकी मेहनत का पूरा फल मिलता है। इच्छुक उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पूरी जानकारी प्राप्त करें और अंतिम तिथि से पहले आवेदन कर दें। Latest News in Hindi Today Hindi SSC Junior Engineer Recruitment 2025 #SSCJE2025 #SSCRecruitment #JuniorEngineer #EngineeringJobs #GovernmentJobs #SSCJEVacancy #JE2025

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PM Shehbaz’s Advisor Reveals 30-45 Sec Response Window

हमारे पास 30 से 45 सेकंड थे’, भारत के ब्रह्मोस मिसाइल हमले पर PM शहबाज के सलाहकार का बड़ा खुलासा

ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान भारत ने पाकिस्तान पर ब्रह्मोस मिसाइलें दागी (Brahmos Missile Attack On Pakistan) थी, जिसने पाकिस्तान घुटनों पर आकर सीजफायर की भीख मांगने लगा था। हालांकि सीजफायर होने के बाद पाकिस्तान अपने इस नाकामी को छुपाने में जुट गया, लेकिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) के प्रमुख सलाहकार राणा सनाउल्लाह (Rana Sanaullah) ने ही इस झूठ की पोल खोल दी है। राणा सनाउल्लाह (Rana Sanaullah) ने पाकिस्तानी मीडिया को दिए अपने एक इंटरव्यू में कहा, ”भारत ने जब हम पर ब्रह्मोस मिसाइल दागी, तो हमारे नेतृत्व के पास ये तय करने के लिए सिर्फ 30 से 45 सेकंड ही थे कि यह इन मिसाइलों में परमाणु हथियार है कि नहीं।  राणा सनाउल्लाह (Rana Sanaullah) ने इंटरव्यू के दौरान बताया कि, भारत ने जब ब्रह्मोस मिसाइल (Brahmos Missile Attack On Pakistan) रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस पर दागी, तो हमारे एयर डिफेंस सिस्टम हाई अलर्ट का संकेत भेजने लगा। जिसने पाकिस्तान के पूरे रक्षा तंत्र को ही हिलाकर रख दिया था। उस समय हमारे नेतृत्व के पास सिर्फ 30 से 45 सेकेंड यह तय करने के लिए थे कि इस मिसाइल में परमाणु हथियार है कि नहीं। यहां पर एक चूक महाविनाश ला सकती थी। सनाउल्लाह ने कहा कि, ”मैं यह नहीं कह रहा हूं कि भारत ने परमाणु हथियार का इस्तेमाल न करके अच्छा किया, लेकिन पाकिस्तान के लोग अगर गलति से इसे परमाणु हमला समझ लेते तो परमाणु युद्ध छिड़ सकता था।” ट्रंप ने निभाई युद्ध रूकवाने में अहम भूमिका- सनाउल्लाह    इंटरव्यू के दौरान राण सनाउल्लाह भले ही अपने डर को जाहिर करते हुए सच्चाई स्वीकार्य कर गए हों, लेकिन वो पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा फैलाने से नहीं चकू। अपने पाकिस्तानी आकाओं की तरह   सनाउल्लाह ने भी सीजफायर का क्रेडिट डोनाल्ड ट्रंप को देते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने और युद्ध रोकने में ट्रंप ने अहम भूमिका निभाई। ट्रंप ने अगर परमाणु युद्ध टालने में भूमिका निभा कर दुनिया को बड़े विनाश से बचाया है, तो दुनिया को भी उनके इस  भूमिका का निष्पक्ष आंकना कर उनकी सराहना करनी चाहिए। सनाउल्लाह (Rana Sanaullah) ने कहा कि इस बात को पाकिस्तान अच्छे से समझता है और इसीलिए पीएम शहबाज शरीफ ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार देने के लिए नामित किया है। हालांकि, भारत ने सीजफायर में ट्रंप के किसी भी तरह के भूमिका से इंकार करते हुए कहा है कि सीजफायर के लिए पाकिस्तान ने अनुरोध किया था। भारत ने अपने लक्ष्य को हासिल कर लिया था, इसलिए पाकिस्तान की तरफ से फोन कॉल आने के बाद युद्ध को रोका गया। इसे भी पढ़ें:-  मीरा रोड थप्पड़ कांड पर संजय निरुपम ने सरकार से की कार्रवाई की मांग, आखिर पुलिस क्यों नहीं ले रही है कोई एक्शन? भारत के हमले से खौफ में था पाकिस्तान नेतृत्व  बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान भारत ने 10 मई को ब्रह्मोस मिसाइलों से पाकिस्तान के कई एयरबेस पर हमला किया था। भारत के हमले में नूर खान एयरबेस समेत पाकिस्तान के कई एयरबेस के रनवे, बंकर और हैंगर को भारी नुकसान हुआ। भारत के इस हमले से पाकिस्तान की सैन्य क्षमता बुरी तरह से प्रभावित हुई और पाकिस्तान के फाइटर जेट उड़ान तक नहीं भर पाए। सनाउल्लाह ने इंटरव्यू के दौरान भारत के इसी हमले का जिक्र करते हुए स्वीकार किया कि भारत के तरफ से हुए इस भीषण हमले से पाकिस्तान को दहशत फैल गया था। इसकी वजह से परमाणु संघर्ष की आशंका बढ़ गई थी।  पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने भी कुछ दिन पहले मीडिया से बातचीत में यह स्वीकार किया था कि भारत के हमले में पाकिस्तान के एयरबेस को बड़ा नुकसान हुआ था। भारत ने जब हमला किया तो हम भारत पर हमला करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन भारत ने चौकानें वाला हमला करके हमारी योजना को ध्वस्त कर दिया। पाकिस्तान की तरफ से एक के बाद एक इस तरह के बयान तब आ रहे हैं, जब पाकिस्तानी सेना इस युद्ध में अपनी जीत का दावा करते हुए किसी भी तरह के क्षति से इनकार कर चुकी है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Rana Sanaullah #IndiaBrahMos #PakistanReaction #ShehbazSharif #BrahMosMissile #DefenseAlert #IndiaPakistanTensions #MissileStrike

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PM Modi praises Bihar’s rich heritage

PM Modi Hails Bihar’s Heritage in Trinidad and Tobago: त्रिनिदाद और टोबैगो के दौरे पर पीएम मोदी ने बिहार की विरासत को बताया भारत और दुनिया का गौरव

इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी त्रिनिदाद और टोबैगो के दौरे पर हैं। इस बीच वहां भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि “मैं कुछ समय पहले ही पक्षियों की इस खूबसूरत भूमि पर आया हूं। और मेरा पहला जुड़ाव यहां के भारतीय समुदाय के साथ (PM Modi Hails Bihar’s Heritage in Trinidad and Tobago) है। यह पूरी तरह से स्वाभाविक लगता है, क्योंकि हम एक परिवार का हिस्सा हैं।” पीएम मोदी ने कहा कि “जब मैं पिछली बार आया था, तब से लेकर अब तक 25 साल हो चुके हैं। हमारी दोस्ती और भी मजबूत हुई है। बनारस, पटना, कोलकाता और दिल्ली भले ही भारत के शहर हों, लेकिन यहां की सड़कों के नाम भी हैं। नवरात्रि, महाशिवरात्रि और जन्माष्टमी यहां हर्ष, उल्लास और गर्व के साथ मनाई जाती है। चौताल और भिटक गण यहां पर पनपते रहते हैं। मैं यहां कई जाने-पहचाने चेहरों की गर्मजोशी देख सकता हूं। मैं युवा पीढ़ी की चमकीली आंखों में जिज्ञासा देख सकता हूं, जो एक साथ जानने और बढ़ने के लिए उत्सुक हैं। हमारे रिश्ते भूगोल और पीढ़ियों से कहीं आगे तक फैले हुए हैं।” प्रधानमंत्री कमला जी के पूर्वज बिहार के बक्सर में रहा (PM Modi Hails Bihar’s Heritage in Trinidad and Tobago) करते थे इस बीच पीएम मोदी ने त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर को महाकुंभ के संगम और सरयू नदी का पवित्र जल भी दिया। इसके साथ ही उन्हें श्री राम मंदिर की प्रतिकृति भी भेंट की। पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि “आप सभी जानते हैं कि इस वर्ष की शुरुआत में दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक समागम महाकुंभ हुआ (PM Modi Hails Bihar’s Heritage in Trinidad and Tobago) था। मुझे महाकुंभ का जल अपने साथ ले आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। मैं कमला जी से अनुरोध करता हूं कि वे सरयू नदी और महाकुंभ का पवित्र जल यहां गंगा धारा में अर्पित करें।” इसके बाद लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि “प्रधानमंत्री कमला जी के पूर्वज बिहार के बक्सर में रहा करते थे। कमला जी स्वयं वहां जाकर भी आई हैं। लोग इन्हें बिहार की बेटी मानते हैं। यहां उपस्थित अनेक लोगों के पूर्वज बिहार से ही आए हैं। बिहार की विरासत भारत के साथ ही दुनिया का भी गौरव है। लोकतंत्र हो, राजनीति हो, कूटनीति हो, उच्च शिक्षा हो, बिहार ने सदियों पहले दुनिया को ऐसे अनेक विषयों में नई दिशा दिखाई थी। मुझे विश्वास है कि 21वीं सदी की दुनिया के लिए भी बिहार की धरती से नई प्रेरणाएं और नए अवसर निकलेंगे।” मुझे यकीन है कि आप सभी ने 500 साल बाद अयोध्या में रामलला की वापसी का स्वागत (PM Modi Hails Bihar’s Heritage in Trinidad and Tobago) किया होगा- पीएम मोदी  इस बीच रामचरित मानस का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, मैं प्रभु श्री राम में आपकी गहरी आस्था से अवगत हूं। यहां की राम लीलाएं वास्तव में अनूठी हैं। रामचरितमानस में कहा गया है कि प्रभु श्री राम की पवित्र नगरी इतनी सुंदर है कि इसकी महिमा का गुणगान दुनिया भर में होता (PM Modi Hails Bihar’s Heritage in Trinidad and Tobago) है। मुझे यकीन है कि आप सभी ने 500 साल बाद अयोध्या में रामलला की वापसी का स्वागत किया होगा। आपने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए पवित्र जल और शिलाएं भेजी थीं। मैं भी इसी तरह की भक्ति भावना के साथ यहां कुछ लाया हूं। राम मंदिर की प्रतिकृति और पवित्र सरयू से कुछ जल लाना मेरे लिए सम्मान की बात है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि वो समय अब दूर नहीं है कि जब कोई भारतीय चंद्रमा पर पहुंचेगा और भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन होगा। हम अब तारों को सिर्फ गिनते नहीं हैं, आदित्य मिशन के रूप में उनके पास जाने का प्रयास करते हैं। हमारे लिए अब चंदा मामा दूर के नहीं है। हम अपनी मेहनत से असंभव को भी संभव बना रहे हैं। इसे भी पढ़ें:-  मीरा रोड थप्पड़ कांड पर संजय निरुपम ने सरकार से की कार्रवाई की मांग, आखिर पुलिस क्यों नहीं ले रही है कोई एक्शन? आपके पूर्वजों ने गंगा और यमुना को पीछे छोड़ दिया, लेकिन अपने दिल में रामायण को ले (PM Modi Hails Bihar’s Heritage in Trinidad and Tobago) गए पीएम मोदी ने आगे कहा, त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय समुदाय की यात्रा साहस के बारे में है। आपके पूर्वजों ने जिन परिस्थितियों का सामना किया, उसने सबसे मजबूत आत्माओं को भी तोड़ दिया होगा, लेकिन उन्होंने उम्मीद के साथ कठिनाइयों का सामना (PM Modi Hails Bihar’s Heritage in Trinidad and Tobago) किया। उन्होंने समस्याओं का डटकर सामना किया। उन्होंने गंगा और यमुना को पीछे छोड़ दिया, लेकिन अपने दिल में रामायण को ले गए। उन्होंने अपनी मिट्टी छोड़ी, लेकिन अपना नमक नहीं। वे केवल प्रवासी नहीं थे, वे एक शाश्वत सभ्यता के दूत थे। उनके योगदान ने इस देश को सांस्कृतिक, आर्थिक और आध्यात्मिक रूप से लाभान्वित किया है। Latest News in Hindi Today Hindi news PM Modi #PMModi #BiharHeritage #TrinidadVisit #GlobalPride #IndiaCulture #ModiAbroad #BiharPride #IndianDiaspora #ModiSpeech #IndianCulture

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US House passes 'Big Beautiful Bill'

अमेरिक के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पास हुआ ‘बिग ब्यूटीफुल बिल’, ट्रंप बोले-  लाखों लोगों को मिलेगा ‘डेथ टैक्स’ से आजादी 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने को अपने देश में बड़ी राजनीतिक जीत हासिल की है। ट्रंप का बहुचर्चित ”बिग ब्यूटीफुल बिल” (Big Beautiful Bill) हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से 218-214 के अंतर से पास हो गया। ट्रंप की रिपब्लिकन के दो सदस्य इस बिल के खिलाफ वोट किया, हालांकि ये दोनों पहले से ही बिल का विरोध कर रहे थे। अब इस बिल पर सिर्फ ट्रंप के हस्ताक्षर की जरूरत है, जिसके बाद यह लागू हो जाएगा।  अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में बिल पास होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इसकी घोषणा करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अभी-अभी रिपब्लिकन ने बिग ब्यूटीफुल बिल (Big Beautiful Bill) को पास कर दिया है, जो दिखाता है कि हमारी पार्टी अब पहले से कहीं ज्यादा एकजुट है। इस बिल पर मैं अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस (4 जुलाई) के खास मौके पर हस्ताक्षर करूंगा। बता दें कि अमेरिकी सीनेट ने भी इसी सप्ताह मंगलवार को इस बिल को पारित किया था।  बिल पर हस्ताक्षर के लिए ट्रंप करेंगे भव्य समारोह का आयोजन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अपने एक दूसरे पोस्ट में बिल पास होने पर खुशी जताते हुए कहा, ‘यह अमेरिका के लिए बेहद ऐतिहासिक दिन है। अमेरिका का दिशा और दशा बदलने वाले इस बिल पर हस्ताक्षर करने के लिए 4 जुलाई को शाम 4 बजे (अमेरिकी समयानुसार) व्हाइट हाउस में हस्ताक्षर समारोह का आयोजन किया जाएगा। इस समारोह में अमेरिकी कांग्रेस के सभी सदस्यों और सभी सीनेटर को आमंत्रित किया गया है। हम सभी एकजुट होकर अमेरिका की स्वतंत्रता और इस बिल के पास होने का जश्न मनाएंगे। अमेरिका के लोग अब पहले से ज्यादा समृद्ध, सुरक्षित और गौरवान्वित महसूस कर रहे  होंगे।’ बिग ब्यूटीफुल बिल क्या है? डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अपने इस बिल को अमेरिका की किस्मत बदलने वाला ड्रीम बिल बता चुके हैं। यह 869 पन्नों का बिल है और इसमें ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान लगाए गए टैक्स कटौती को और भी व्यापक तरीके से शामिल किया गया है। अमेरिकी लोगों को मिलने वाली आयकर छूट जारी रहेगी, साथ ही होटल टिप्स और ओवरटाइम वेतन पर लगने वाला टैक्स भी खत्म कर दिया गया है। लोगों को टैक्स में यह छूट 2028 तक मिलेगी। इसके अलावा बिल में कर्ज लेने की की सीमा बढ़ाकर 50 लाख डॉलर तक कर दिया गया है।  वहीं अवैध प्रवासियों को देश से बाहर निकालने और सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए भी बिल में कई गुना ज्यादा बजट का प्रावधान किया गया है। बिल में गोल्डन डोम मिसाइल शील्ड के लिए 25 अरब डॉलर का बजट रखा गया है। इससे अमेरिका का एयर डिफेंस सिस्टम मजबूत होगा। इसके अलावा मंगल मिशन के लिए 10 अरब डॉलर, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को रिटायर करने के लिए 32.5 करोड़ डॉलर रखे गए हैं। इसे भी पढ़ें:-ट्रंप का ऐलान, गाजा में 60 दिन का युद्धविराम होगा, इजरायल तैयार लेकिन हमास डेमोक्रेट्स ने बिल को बताया गरीब अमेरिकियों पर जानलेवा हमला डेमोक्रेट्स इस बिल का शुरूआत से विरोध कर रहे हैं। डेमोक्रेट्स का कहना है कि ट्रंप का यह  बिल देश के लाखों गरीब अमेरिकियों पर जानलेवा हमला है। इस बिल की वजह से मेडिकेड पर कई नए प्रतिबंध लगेंगे, जो फ्री स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। डेमोक्रेट्स का यह भी कहना है कि इस भारी भरकम बिल की वजह से अमेरिका पर कर्ज कई गुना बढ़ जाएगा। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलॉन मस्क (Elon Musk) भी इस बिल के विरोध में हैं। उन्होंने इस बिल को ‘बेहूदा’ बताते हुए कह चुके हैं कि अगर यह बिल पास हुआ तो वह अगल दिन ही नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे। अब देखना यह होगा कि एलॉन मस्क (Elon Musk) कब नई पार्टी की घोषणा करते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Donald Trump #Trump #BigBeautifulBill #DeathTax #USPolitics #HouseBill2025 #TaxReform #EstateTax #TrumpSpeech

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Jamun Seed Powder

जामुन बीज का पाउडर: एक प्राकृतिक उपाय जो करेगा इन 6 बीमारियों को दूर और रखेगा आपको स्वस्थ

फलों में कई न्यूट्रिएंट्स होते हैं और हेल्थ के लिए इनका सेवन बेहतरीन माना गया है। ऐसा ही एक फल है जामुन (Jamun), जो गर्मियों में आता है। इसका रंग ही नहीं बल्कि स्वाद भी सबसे अलग होता है। इस फल को खाना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है इसीलिए इसे सुपरफूड भी कहा जाता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि जामुन की गुठली यानी बीज भी इस फल के जितना ही फायदेमंद होता है? ऐसा माना जाता है कि जामुन बीज का पाउडर (Jamun Seed Powder) का रोजाना खाली पेट सेवन करना बहुत लाभदायक है। आइए जानें जामुन बीज पाउडर के बेनिफिट्स (Benefits of Jamun Seed Powder) के बारे में। जामुन बीज पाउडर के बेनिफिट्स (Benefits of Jamun Seed Powder) नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (NLM) के अनुसार जामुन (Jamun) में एंटीऑक्सीडेंट्स के साथ-साथ फ्लेवोनोइड्स, पॉलीफेनोल्स आयरन और विटामिन सी आदि भी होते हैं। इससे शरीर का फ्री रेडिकल्स से बचाव होता है और इसके कई अन्य बेनिफिट्स भी हैं। आइए जानें जामुन बीज पाउडर के बेनिफिट्स (Benefits of Jamun Seed Powder) के बारे में।  डायबिटीज के रोगियों के लिए बेहतरीन जामुन के बीज के पाउडर का इस्तेमाल ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करने के लिए मदद कर सकता है। इसलिए, डायबिटीज के रोगियों के लिए इसे खासतौर पर फायदेमंद माना गया है। इन बीजों में कुछ कंपाउंड्स पाए जाते हैं जैसे जाम्बोलिन और जाम्बोसाइन। यह कंपाउंड इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारते हैं और इंसुलिन सेक्रेशन को स्टिमुलेट करते हैं। जामुन (Jamun) के फल को भी डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद माना गया है।  पाचन को सुधारे जामुन (Jamun) और जामुन के बीजों में फाइबर होता है, जो पेट के लिए फायदेमंद है। इससे पाचन क्रिया सही रहती है और कई समस्याओं से भी राहत मिल सकती है जैसे एसिडिटी और गैस आदि। वजन को रखे रही अगर आप वजन को मैनेज करना चाहते हैं तो आपको जामुन बीज का पाउडर (Jamun Seed Powder) रोजाना सुबह खाली पेट लेना चाहिए। इससे मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है और भूख कम लगती है। इससे वजन कम होने और इसे सही बनाए रखने में मदद मिलती है। दिल के लिए फायदेमंद जामुन बीज का पाउडर (Jamun Seed Powder) खाने से ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल लेवल सही रहने में मदद मिलती है। इससे हार्ट हेल्थ में सुधार होता है और दिल की समस्याओं से बचाव हो सकता है। दिल ही नहीं बल्कि मुंह, स्किन और लिवर के स्वास्थ्य के लिए भी जामुन के बीज को लाभदायक पाया गया है। इम्युनिटी को करे बूस्ट इम्युनिटी को मजबूत करने के लिए इस प्राकृतिक कंपाउंड का इस्तेमाल किया जा सकता है। इम्युनिटी के मजबूत होने से शरीर का कई बीमारियों और इंफेक्शंस से बचाव होता है।  इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले आर्थराइटिस में फायदेमंद जामुन (Jamun) और जामुन बीज का पाउडर (Jamun Seed Powder) एंटी-अर्थरिटिक इफेक्ट युक्त होता है। इनके सेवन से ब्लड में रेड ब्लड सेल्स की संख्या, हीमोग्लोबिन लेवल और एरिथ्रोसाइट सेडीमेंटेशन रेट में सुधार होता है।  इससे जॉइंट्स में सूजन और दर्द कम होने में मदद मिलती है। यानी अर्थराइटिस के रोगियों के लिए यह फायदेमंद है।  हालांकि इसके बारे में अधिक शोध करना अभी जरूरी है।  यह तो थी जानकारी जामुन बीज पाउडर के बेनिफिट्स (Benefits of Jamun Seed Powder) के बारे में। लेकिन, अपनी डायट में इसे शामिल करने से पहले डॉक्टर से बात अवश्य करें, खासतौर पर अगर आपको कोई हेल्थ प्रॉब्लम है या आप किसी तरह की दवाईयां ले रहे हैं। अगर बात की इसके साइड-इफेक्ट्स के बारे में तो इसमें फाइबर बहुत अधिक होता ,है ऐसे में इसे लेने के बाद लोग गैस या ब्लोटिंग की समस्या अनुभव कर सकते हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Jamun Seed Powder #jamunseedpowder #naturalremedy #ayurvedichealth #immunitybooster #diabetescontrol #jamunbenefits

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