Oral Allergy Syndrome

ओरल एलर्जी सिंड्रोम क्या हैं इस बीमारी के कारण और लक्षण जो आपके खाने को बना सकती है जहर

ओरल एलर्जी सिंड्रोम (Oral allergy syndrome) का दूसरा नाम पॉलेन फ़ूड एलर्जी सिंड्रोम (Pollen Food Allergy Syndrome) हैं। यह एक तरह की फल, सब्जियों और नट्स आदि से होने वाली फूड एलर्जी है। इसके कारण रोगी के मुंह, गले और होंठों आदि में एलर्जिक रिएक्शन होता है। यह समस्या अधिकतर उन लोगों को प्रभावित करती है जिन्हें पेड़ों, घास आदि से एलर्जी होती है। तीन साल से छोटे बच्चों को यह एलर्जी होने की संभावना कम होती है क्योंकि पॉलेन एलर्जी को डेवलप होने में थोड़ा समय लगता है। अधिकतर मामलों में यह समस्या गंभीर नहीं होती है लेकिन कुछ लोग इसके कारण गंभीर एलर्जिक रिएक्शन का अनुभव कर सकते हैं, जो जानलेवा भी हो सकता है। आइए जानें ओरल एलर्जी सिंड्रोम (Oral allergy syndrome) के लक्षणों के बारे में। इससे बचाव के बारे में भी जानें। ओरल एलर्जी सिंड्रोम के लक्षण (Symptoms of Oral Allergy Syndrome) ओरल एलर्जी सिंड्रोम के लक्षण (Symptoms of Oral Allergy Syndrome) हर रोगी में अलग हो सकते हैं। लेकिन, इससे रोगी का मुंह और गला प्रभावित होता है। जब रोगी किसी ट्रिगर फूड का सेवन करता है, तो इसके लक्षण दिखाना शुरू हो जाते हैं। ओरल एलर्जी सिंड्रोम के लक्षण (Symptoms of Oral Allergy Syndrome) इस प्रकार हैं: ओरल एलर्जी सिंड्रोम (Oral allergy syndrome) के कारण हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार जब किसी को यह समस्या होती है, तो कुछ फल, सब्जियां और नट्स उनके एलर्जिक रिएक्शन को ट्रिगर कर सकते हैं। ओरल एलर्जी सिंड्रोम (Oral allergy syndrome) या पॉलेन फ़ूड एलर्जी सिंड्रोम (Pollen Food Allergy Syndrome) पराग और फल व सब्जियों की प्लांट प्रोटीन के बीच की क्रॉस रिऐक्टिविटी के कारण होती है। पॉलेन एलर्जी से पीड़ित व्यक्ति जब कच्चे फल या सब्जियों का सेवन करते हैं, तो उनका इम्यून सिस्टम इनमे समानता पाता है और इससे एलर्जी रिएक्शन होता है। लेकिन, पकाए हुए फल और सब्जियां उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाती हैं। इसे भी पढ़ें:- सिर और गर्दन के कैंसर के 5 शुरुआती संकेत जिन्हें कभी भी नहीं करना चाहिए नजरअंदाज ओरल एलर्जी सिंड्रोम का उपचार पॉलेन फ़ूड एलर्जी सिंड्रोम (Pollen Food Allergy Syndrome) का कोई खास उपचार नहीं है। ऐसा माना गया है कि एलर्जिक रिएक्शन के कारण होने वाली समस्याएं कुछ देर में ही ठीक हो जाती है, जब रोगी उन फूड्स को खाना बंद कर देते हैं। केला, संतरा, टमाटर, खीरा, गाजर, सनफ्लॉवर सीड्स आदि कुछ फूड्स हैं, जो एलर्जिक रिएक्शंस को ट्रिगर कर सकते हैं। एंटीहिस्टामिन एलर्जी मेडिकेशन लेने से रिएक्शन बंद होने में मदद मिल सकती है या इससे कंडीशन बदतर न होने में मदद मिलती है। डॉक्टर ओरल एलर्जी सिंड्रोम (Oral allergy syndrome) से राहत पाने रोगी को के लिए निम्नलिखित दवाईयों की सलाह दे सकते हैं: ओरल एलर्जी सिंड्रोम से बचाव ओरल एलर्जी सिंड्रोम (Oral allergy syndrome) से बचाव के लिए रोगी को इसे ट्रिगर करने वाले फूड्स को न खाने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा ट्रिगर फूड से रिएक्शन को कम करने के कुछ अन्य उपाय इस प्रकार हैं: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Oral allergy syndrome #oralallergysyndrome #foodallergy #oasymptoms #crossreactivity #allergyrisks #allergytreatment #healthalert

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Meera Road Slap Case

Sanjay Nirupam Demands Action in Meera Road Slap Case: मीरा रोड थप्पड़ कांड पर संजय निरुपम ने सरकार से की कार्रवाई की मांग, आखिर पुलिस क्यों नहीं ले रही है कोई एक्शन?

महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी अनिवार्यता को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच जारी घमासान है कि थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। इस बीच मुंबई के मीरा रोड में हुआ भाषा विवाद भी अब तूल पकड़ता जा रहा है। दरअसल, मनसे के कार्यकर्ताओं ने मीरा रोड स्थित जोधपुर स्वीट शॉप के 48 वर्षीय मालिक बाबूलाल खिमजी चौधरी को मराठी भाषा न आने के चलते मारापीटा (Sanjay Nirupam Demands Action in Meera Road Slap Case) था। इस घटना के विरोध में गुरुवार को मीरा भाईंदर के व्यापारियों ने दुकानें बंद रखी थी। पीड़ित बाबूभाई खिमाजी चौधरी ने मीरा भाईंदर वसई विरार के पुलिस को एक ज्ञापन भी सौंपा जिसमें मारपीट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मनसे कार्यकर्ताओं की पिटाई के बाद बाबूलाल चौधरी ने कानूनी तरीके से लड़ने का फैसला किया है ताकि इस तरह की हरकत किसी और के साथ न हो। हालांकि पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।  सीसीटीवी फुटेज के जरिए इस थप्पड़ कांड के तीन आरोपियों की पहचान (Sanjay Nirupam Demands Action in Meera Road Slap Case) हुई है दर्ज एफआईआर के मुताबिक मनसे के कार्यकर्ता पानी की बोतलें खरीदना चाहते थे, लेकिन जब उन्होंने उनसे हिंदी में बात की, तो उन्होंने मराठी में बात करने की मांग की। मैंने कहा कि “हम सभी भाषाएं बोलते हैं, इसलिए उन्होंने मुझे पीटने की धमकी दी। इसके वह आगे खड़े चौधरी के पास पहुंच गए। इसके बाद उन्होंने पूछा कि महाराष्ट्र में कौन सी भाषा बोली जाती (Sanjay Nirupam Demands Action in Meera Road Slap Case) है? तो चौधरी ने कहा कि “सभी भाषाएं बोली जाती हैं।” इसके बाद चौधरी को मनसे कार्यकर्ताओं ने पीटना शुरू कर दिया। इस मार-पिटाई का वीडियो ऑनलाइन वायरल हुआ है। खैर, इस बीच सीसीटीवी फुटेज के जरिए इस थप्पड़ कांड के तीन आरोपियों की पहचान हुई है। जिनके नाम क्रमशा: प्रमोद निलेकर, अक्षय सालवी और करन कंदानगिरे हैं। मजे की बात यह कि 72 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस ने आरोपियों गिरफ्तार नहीं किया है। मनसे का आरोप है कि बेवजह इस घटना को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस ऐसी घटनाओं का संज्ञान लें और सख्त कार्रवाई (Sanjay Nirupam Demands Action in Meera Road Slap Case) करें इस मुद्दे पर एकनाथ शिंदे की पार्टी के नेता संजय निरुपम ने मुख्यमंत्री फडणवीस से कार्रवाई की मांग की है। निरुपम ने कहा है कि “कार्रवाई नहीं हुई तो गैर मराठी भारी खतरे में आ जाएंगे।” संजय निरुपम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था कि “महाराष्ट्र में रहनेवाले सभी लोगों को मराठी में संवाद करना चाहिए। यह आग्रह उचित है, परंतु इसके लिए गुंडागर्दी और मारपीट सर्वथा अनुचित (Sanjay Nirupam Demands Action in Meera Road Slap Case) है। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस ऐसी घटनाओं का संज्ञान लें और सख्त कार्रवाई करें। वरना बीएमसी चुनाव तक मुंबई और आसपास के इलाकों में रहने वाले गरीब और कमजोर गैर मराठी भाषी लोगों की सुरक्षा लगातार खतरे में रहेगी। कृपया इसकी गंभीरता को समझें और कड़ा एक्शन लेने का आदेश जारी करें।” इसे भी पढ़ें:- कांवड़ यात्रा में दुकानों के लाइसेंस मुद्दे पर बोले ओवैसी, कहा- “क्‍या पैंट उतरवा देंगे” क्या देश के नागरिक को इस तरह भाषा न आने के नाम पर सरे आम मारा पीटा जा सकता है? हालाँकि यह पहली बार नहीं है जब मनसे के कार्यकर्ताओं ने गैर-मराठियों को मारा न (Sanjay Nirupam Demands Action in Meera Road Slap Case) हो। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या देश के नागरिक को इस तरह भाषा न आने के नाम पर सरे आम मारा पीटा जा सकता है? देश में कानून व्यवस्था है भी कि नहीं? एक तरफ बीजेपी कहती है, बाटोगे तो काटोगे तो वहीं दूसरी तरफ भाषा और प्रांत के नाम पर देश के नागरिकों को बेवजह पीटा जा रहा है। बड़ा सवाल यह कि प्रसाशन कब तक इस तरह की घटनाओं पर आँख मूंदे बैठा रहेगा? कुल-मिलाकर इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है बीएमसी चुनाव और मराठी वोटो के छिटकने के डर से प्रशासन कड़ी कार्रवाई करने से बच रहा है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Sanjay Nirupam #sanjaynirupam #meeraroadslapcase #mumbainews #viralvideo #justice #policeinaction

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National Career Service Portal

National Career Service: इस वेबसाइट पर है लाखों में है जॉब वैकेंसी, आपको भी मिल सकती है नौकरी यहां? 

भारत में नौकरी की तलाश करना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। देशभर में लाखों लोग हर साल नौकरी की तलाश में रहते हैं, चाहे वो कॉलेज से पासआउट हुए फ्रेशर हों या फिर अनुभवी प्रोफेशनल्स, जो करियर में बदलाव चाहते हैं। ऐसे ही लोगों के लिए भारत सरकार ने एक बड़ी और उपयोगी पहल की है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा लॉन्च किया गया नेशनल कैरियर सर्विस पोर्टल (National Career Service Portal) अब देशभर में नौकरी तलाशने वालों के लिए एक भरोसेमंद और प्रभावशाली मंच बन चुका है। क्या है NCS पोर्टल? NCS पोर्टल (National Career Service Portal) एक सरकारी प्लेटफ़ॉर्म है जिसे श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा विकसित और संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य देश में बेरोजगारी (Unemployment) को कम करना और युवाओं को उचित अवसर प्रदान करना है। यह पोर्टल एक ऐसा माध्यम है जहां सरकारी और निजी क्षेत्र की 33 लाख से ज्यादा नौकरियों की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध है। इस पोर्टल पर जॉब सीकर्स (नौकरी ढूंढने वाले), एंप्लॉयर्स, ट्रेनिंग प्रोवाइडर्स और करियर काउंसलर (Career Counselor) जैसी सभी के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। यह पोर्टल पारदर्शिता, पहुंच और सुविधा के तीन प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित है। National Career Service Portal पर कैसे करें रजिस्ट्रेशन? इस पोर्टल का इस्तेमाल करने के लिए आपको सबसे पहले ncs.gov.in पर जाकर खुद को रजिस्टर करना होगा। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया काफी आसान है: कैसे खोजें और अप्लाई करें नौकरी? रजिस्ट्रेशन के बाद यूजर अपनी प्रोफाइल में जाकर अपनी योग्यताओं और रुचियों के आधार पर नौकरियाँ खोज सकते हैं। पोर्टल में विभिन्न फ़िल्टर विकल्प उपलब्ध हैं जैसे: जब कोई उपयुक्त जॉब (Job vacancies) मिल जाती है, तो बस एक क्लिक में आप “Apply Now” बटन दबाकर उस नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। आपको रिज्यूमे भी पोर्टल पर अपलोड करना होता है, जिससे नियोक्ता आपसे संपर्क कर सकें। View this post on Instagram A post shared by JaiRashtra_News (@jairashtranews) NCS पोर्टल की प्रमुख सुविधाएँ: इसे भी पढ़ें:- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट कैसे बनें? किन्हें होगा सबसे ज्यादा फायदा? नेशनल कैरियर सर्विस पोर्टल (National Career Service Portal) नौकरी की तलाश में लगे लाखों युवाओं के लिए एक क्रांतिकारी पहल है। इसके माध्यम से देशभर में फैली लाखों नौकरियों की जानकारी एक ही स्थान पर मिल जाती है। यह पोर्टल न सिर्फ जॉब सर्च को आसान बनाता है, बल्कि युवाओं को सही दिशा में करियर गाइडेंस (Career Guidance) भी देता है। अगर आप भी नौकरी की तलाश में हैं या करियर में नया मुकाम पाना चाहते हैं, तो अभी ncs.gov.in पर जाकर रजिस्टर करें और अपने सपनों की नौकरी की ओर पहला कदम बढ़ाएं। Latest News in Hindi Today Hindi National Career Service #NationalCareerServicePortal #NCS #Jobs #Governmentjob #Privatejob

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Bride Killed for Dowry

Bride Killed Over Dowry, Groom Remarried Instantly: दहेज नहीं मिला तो नई नवेली बहू की हत्या कर बेटे की करा दी दूसरी शादी

इक्कीसवीं सदी में एक तरफ जहाँ भारत विश्वगुरु बनने की और अग्रसर है, तो वहीं दूसरी ओर आज भी देश में दहेज़ लोभी दहेज के खातिर निर्दोषों को मौत के घात उतर दे रहे हैं। ताजा मामला है उत्तर प्रदेश के भदोही का जहाँ दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर शादी के महज दो महीने बाद एक नवविवाहिता की उसके ससुराल वालों ने हत्या कर (Bride Killed Over Dowry, Groom Remarried Instantly) दी। दरअसल, घटना जिले के गोपीगंज थाना क्षेत्र की है, जहां 22 वर्षीय रोशनी विश्वकर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, मृतका के ससुराल वाले इसे आत्महत्या बता रहे हैं, जबकि रोशनी के मायके वालों ने उसके पति और ससुराल पक्ष पर गला घोंटकर मारने का आरोप लगाया है। इस पूरे मामले पर गोपीगंज थाना के प्रभारी निरीक्षक अमित कुमार सिंह ने बताया कि “मृतका रोशनी विश्वकर्मा के भाई संजय कुमार विश्वकर्मा की शिकायत पर पति प्रदीप विश्वकर्मा, सास राधा देवी, ससुर बलराम और ननद पूनम विश्वकर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत  धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।” यह शादी मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत (Bride Killed Over Dowry, Groom Remarried Instantly हुई थी थाने में दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, गोपीगंज थाना के वार्ड नंबर- 4 में रहने वाली रोशनी की शादी 6 मार्च 2025 को प्रदीप विश्वकर्मा से हुई थी। प्रदीप कोइरौना थाना क्षेत्र के सदाशिव पट्टी गांव में रहा करता (Bride Killed Over Dowry, Groom Remarried Instantly) है। महत्वपूर्ण बात यह कि यह शादी मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत हुई थी। शुरू में सब ठीक था। लेकिन इस बीच देहज न मिलने की वजह से ससुराल वालों का मुंह फूला रहता था। आये दिन दहेज को लेकर ताना मारा करते थे। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि सामूहिक विवाह में कोई दहेज न मिलने पर प्रदीप के परिवार वालों ने 31 मई को धूमधाम से दूसरी शादी करने की बात कही थी। इस बीच दूसरी शादी के बाद से ही रोशनी के ससुराल वालों ने उसे परेशान करना शुरू कर दिया।  उससे लगातार सोने के जेवर और नकदी की मांग करने लगे थे। आये दिन उसे दहेज़ लाने की बात कहा करते थे।  इसे भी पढ़ें:- आरजी कर कांड के बाद अब कोलकाता के लॉ कॉलेज में छात्रा के साथ हुआ सामूहिक दुष्कर्म दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर 15 जून को ससुराल वालों ने रोशनी की हत्या कर (Bride Killed Over Dowry, Groom Remarried Instantly) दी प्राथमिकी में यह भी आरोप लगाया गया है कि दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर 15 जून को ससुराल वालों ने रोशनी की हत्या कर (Bride Killed Over Dowry, Groom Remarried Instantly) दी। इसके बाद सबूत मिटाने के इरादे से वे रोशनी के शव को ससुराल से लगभग 20 किलोमीटर दूर गोपीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लाकर लावारिस छोड़ दिया। रोशनी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उसका अपना पति उसे दहेज़ के चंद पैसों के खातिर अपने परिवार के संग मिलकर मौत के घाट उतार देगा। लेकिन, हुआ वही जो सदियों से होता आया है। दहेज़ लोभियों ने एक और निर्दोष की जान ली। थाना प्रभारी ने बताया कि “इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है और पुलिस जल्द ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।” यह हमारे समाज की बिडंबना है कि आज भी देश में बेटियों को दहेज़ के खातिर मौत के घाट उतार दिया जाता है। बेशक देश में दहेज़ विरोधी कानून हैं लेकिन धरातल पर उसका अमल होता दिखता नहीं है। यदि वाकई कानून का सख्ती से पालन हो रहा होता तो आज देश में कोई बेटी कम से कम दहेज़ के चलते अपनी जान से हाथ नहीं धोती। अब वक़्त आ गया है कि सरकार दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे ताकि कोई और दहेज़ लोभियों की भेंट न चढ़े।   Latest News in Hindi Today Hindi Bride Killed Over Dowry, Groom Remarried Instantly #bridekilled #dowrydeath #groomremarried #instantmarriage #dowryviolence #indiacrime #bridejustice #viralnews #shockingcrime #justiceforbride

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Rahul Gandhi Slams Govt Over 767 Farmer Suicides

Rahul Gandhi Slams Govt Over 767 Farmer Suicides: 767 किसानों की आत्महत्या पर भड़के राहुल गांधी, कहा “अन्नदाता की जिंदगी आधी हो रही है, तमाशा देख रहे मोदी”

रायबरेली सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मोदी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए जमकर निशाना साधा है। पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा कि “महाराष्ट्र में सिर्फ 3 महीनों में 767 किसानों ने आत्महत्या कर ली (Rahul Gandhi Slams Govt Over 767 Farmer Suicides) है।” दरअसल, महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के चौंकाने वाले मामले सामने आए है। महाराष्ट्र विधानसभा में सरकार की ओर से पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से मार्च 2025 के बीच केवल तीन महीनों में 767 किसानों ने आत्महत्या की। इनमें से सबसे अधिक मामले विदर्भ क्षेत्र से दर्ज हुए हैं। इन आंकड़ों पर राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर धावा बोल दिया। उन्होंने कहा कि “वे तमाशा देख रहे हैं।” इस दौरान उन्होंने यह दावा भी किया कि “उनका यह “सिस्टम” किसानों को मार रहा है, लेकिन पीएम नरेन्द्र मोदी अपने पीआर का तमाशा देख रहे हैं। इस मुद्दे पर बात करते हुए राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट किया। अपने पोस्ट में उन्होंने महाराष्ट्र में पिछले तीन महीनों में हुए किसानों की आत्महत्या के आंकड़ें बताते हुए, इस स्थिति को चिंताजनक बताया। सोचिए.. सिर्फ 3 महीनों में महाराष्ट्र में 767 किसानों ने आत्महत्या कर ली, (Rahul Gandhi Slams Govt Over 767 Farmer Suicides) क्या ये सिर्फ एक आंकड़ा है?  किसानों की आत्महत्या पर पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल (Rahul Gandhi) ने अपने पोस्ट में लिखा कि “सोचिए.. सिर्फ 3 महीनों में महाराष्ट्र में 767 किसानों ने आत्महत्या कर ली। क्या ये सिर्फ एक आंकड़ा है? नहीं। ये 767 उजड़े हुए घर (Rahul Gandhi Slams Govt Over 767 Farmer Suicides) हैं। 767 परिवार जो कभी नहीं संभल पाएंगे। और सरकार? चुप है। बेरुख़ी से देख रही है। किसान हर दिन कर्ज़ में और गहराई तक डूब रहा है, बीज महंगे हैं, खाद महंगी है, डीजल महंगा है लेकिन एमएसपी की कोई गारंटी नहीं।” यही नहीं, उन्होंने ने सिस्टम पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब वो कर्ज़ माफ़ी की मांग करते हैं, तो उन्हें नजरअंदाज़ कर दिया जाता है। लेकिन जिनके पास करोड़ों हैं? उनके लोन मोदी सरकार आराम से माफ कर देती है। आज की ही खबर देख लीजिए, अनिल अंबानी का ₹48,000 करोड़ का एसबीआई फ्रॉड। मोदी जी ने कहा था, किसान की आमदनी दोगुनी करेंगे, आज हाल ये है कि अन्नदाता की ज़िंदगी ही आधी हो रही है। ये सिस्टम किसानों को मार रहा है, चुपचाप, लेकिन लगातार और मोदी जी अपने ही PR का तमाशा देख रहे हैं।”  सरकार किसानों की आत्महत्या को लेकर चुप्पी साधी हुए है और (Rahul Gandhi Slams Govt Over 767 Farmer Suicides) बरत रही है बेरुखी  बता दें कि कांग्रेस के पूर्व राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार पर जमकर निशाना (Rahul Gandhi Slams Govt Over 767 Farmer Suicides) साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार किसानों की आत्महत्या को लेकर चुप्पी साधी हुए है और बेरुखी बरत रही है। कहने की जरूरत नहीं महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या का मामला किसी से छुपा नहीं हैं। अब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाया है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गाँधी पर पलटवार किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक चार्ट शेयर कर दावा किया गया कि “कांग्रेस सरकार के 15 साल के कार्यकाल के दौरान महाराष्ट्र में 55,928 किसानों ने आत्महत्या की।” कांग्रेस को घेरते हुए मालवीय ने कहा कि “मृतकों को गिनने की राजनीति घृणित है, लेकिन राहुल गांधी जैसे लोगों को आईना दिखाना जरूरी है।”  इसे भी पढ़ें:- कांवड़ यात्रा में दुकानों के लाइसेंस मुद्दे पर बोले ओवैसी, कहा- “क्‍या पैंट उतरवा देंगे” चुनावों के दौरान बीजेपी ने कर्जमाफी का किया (Rahul Gandhi Slams Govt Over 767 Farmer Suicides) था वादा  गौरतलब हो कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान बीजेपी ने कर्जमाफी का वादा किया (Rahul Gandhi Slams Govt Over 767 Farmer Suicides) था। सरकार गठन के 6 महीने बाद भी सरकार अपने इस वादे को पूरा नहीं कर पाई है। हालांकि इस मुद्दे पर डिप्ट सीएम अजीत पवार ने कहा कि “किसान सरकार की ऋणमाफी की घोषणा का इतंजार करने की बजाय समय पर अपने फसल ऋण की किस्तें चुकाए”, तो वहीं एकनाथ शिंदे ने कहा कि “सरकार घोषणा पत्र के वादों को पूरा करने को लेकर सजग है। कर्जमाफी ही नहीं हर वादा पूरा किया जाएगा।” Latest News in Hindi Today Hindi news Rahul Gandhi #RahulGandhi #FarmerSuicides #ModiGovernment #767Farmers #FarmersProtest #IndiaPolitics #RahulVsModi #FarmerCrisis

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AAP to Contest Bihar Election 2025 Alone

Bihar Assembly Election 2025: आम आदमी पार्टी अकेले लड़ेगी चुनाव, अरविंद केजरीवाल ने किया बड़ा ऐलान

बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) होने वाला है। और चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज़ हो चुकी हैं। सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीतियां बना चुकी हैं और चुनाव में विजय होने के लिए अपनी-अपनी स्ट्रेटजी पर काम भी कर रही है। इस बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। गुरुवार को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने साफ ऐलान किया कि उनकी पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Assembly Election 2025) में सभी 243 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी यानी किसी भी दूसरी पार्टी के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा। AAP लड़ेगी बिना किसी गठबंधन के चुनाव अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि आम आदमी पार्टी (AAP) अब किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा है कि INDIA गठबंधन सिर्फ लोकसभा चुनाव तक सीमित था। बिहार विधानसभा चुनाव अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) में हम किसी दल से गठबंधन नहीं करेंगे और अपने दम पर मैदान में उतरेंगे। अब इससे ये साफ हो गया है कि आम आदमी पार्टी बिहार की राजनीति में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने की तैयारी में है। दिल्ली और पंजाब में सत्ता में रह चुकी AAP अब दूसरे राज्यों में भी अपने पांव जमाने की कोशिश कर रही है। भाजपा नेता अजय आलोक ने कसा तंज AAP के इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। BJP नेता अजय आलोक (Ajay Alok) ने अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) पर तंज कस्ते हुए कहा है कि कपटीवाल जी बिहार में 243 सीटों पर लड़ने की बात कर रहे हैं, जबकि दिल्ली में ही जनता ने उन्हें नकार दिया। दिल्ली और पंजाब की जनता केजरीवाल की सच्चाई जान चुकी है। अब बिहार में भी उन्हें अपनी औकात का अंदाजा हो जाएगा। अजय आलोक ने AAP की पंजाब सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि तीन साल में पंजाब पर डेढ़ लाख करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ चुका है और केजरीवाल सरकार वहां की संपत्ति को ATM की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा है कि आइए बिहार में चुनाव (Bihar Election) लड़िए, आपको आपकी राजनीतिक हैसियत का अंदाजा खुद ही हो जाएगा। बिहार चुनाव: सियासी जमीन तैयार बिहार में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) को लेकर राज्य की राजनीति बेहद गर्म है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD), जनता दल (JDU), भाजपा (BJP) और कांग्रेस (Congress) के साथ-साथ अब आम आदमी पार्टी और जन सुराज जैसे नए दल भी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। चुनाव आयोग ने हाल ही में जन सुराज पार्टी को स्कूल बैग (School Bag) चुनाव चिन्ह आवंटित किया है। यह प्रतीक शिक्षा और प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है, जो पार्टी की विचारधारा के अनुरूप है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (Prashant Kishor), जिन्हें देश के प्रमुख चुनावी रणनीतिकारों में गिना जाता है, अब स्वयं सक्रिय राजनीति में उतर चुके हैं और बिहार की सियासत में नई ऊर्जा लाने का दावा कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें:- कांवड़ यात्रा में दुकानों के लाइसेंस मुद्दे पर बोले ओवैसी, कहा- “क्‍या पैंट उतरवा देंगे” आम आदमी पार्टी (AAP) की चुनौती और रणनीति दिल्ली और पंजाब में अपने प्रदर्शन के दम पर AAP अब बिहार में भी बदलाव की राजनीति का संदेश देना चाहती है। पार्टी शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी नीति को बिहार में भी दोहराने की तैयारी में है। हालांकि राज्य की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियां दिल्ली या पंजाब से अलग हैं, जहां जातीय समीकरण और क्षेत्रीय मुद्दे निर्णायक भूमिका निभाते हैं। AAP के लिए सबसे बड़ी चुनौती जमीनी स्तर पर संगठन खड़ा करना और विश्वसनीय स्थानीय नेतृत्व तैयार करना होगी। फिलहाल बिहार में AAP की कोई मजबूत उपस्थिति नहीं रही है, लेकिन पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि दिल्ली मॉडल और केजरीवाल की लोकप्रियता के दम पर वो जनता को आकर्षित कर सकते हैं। अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) का बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) में अकेले उतरने का फैसला राज्य की राजनीति को एक नया मोड़ दे सकता है। जहां एक ओर यह फैसला विपक्षी एकता को झटका दे सकता है, वहीं दूसरी ओर AAP के लिए यह एक बड़ा जोखिम भी है। पार्टी को बिहार जैसे राज्य में अपना आधार बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी, क्योंकि यहां की राजनीति पुराने और गहरे जमीनी समीकरणों पर आधारित है। आने वाले महीनों में AAP की रणनीति, उम्मीदवार चयन और प्रचार अभियान यह तय करेंगे कि क्या पार्टी बिहार की राजनीति में कोई निर्णायक भूमिका निभा सकती है या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि केजरीवाल के इस ऐलान ने बिहार चुनाव (Bihar Election) की बहस को और गर्म कर दिया है। Latest News in Hindi Today Hindi news AAP #biharelection2025 #aap #arvindkejriwal #biharpolitics #aapbihar

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iPhone 17 delay

Foxconn Move May Delay iPhone 17 Production Timeline: Foxconn के इस कदम से iPhone 17 के प्रोडक्शन में हो सकती है देरी

आईफोन 17 का बेसब्री से इंतजार कर रहे लोगों के लिए बुरी खबर है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में आईफोन के प्रोडक्शन को तगड़ा झटका लगा है। दरअसल, आईफोन बनाने वाली बड़ी कंपनी फॉक्सकॉन (Foxconn) ने 300 से अधिक चीनी इंजीनियर्स और टेक्नीशियंस से भारत छोड़ने को कहा है। गौरतलब फॉक्सकॉन,आईफोन बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है। जानकारी के मुताबिक ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका और चीन के बीच चल रही तनातनी को देखते हुए यह फैसला लिया गया (Foxconn Move May Delay iPhone 17 Production Timeline) है। गौर करनेवाली बात यह है कि यह सब उस समय हो रहा है जब ऐपल भारत में अपना बिजनेस बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। ऐसे में भारत में आईफोन को असेंबल करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। खबर तो यह भी है कि पिछले कई महीनों में चीनी कर्मचारी अपनी नौकरी छोड़कर चीन वापिस लौट चुके हैं।  अमेरिका और चीन के बीच आए व्यापारिक तनाव के बाद आईफोन के कारोबार को वहां से शिफ्ट होने से रोकने की एक बड़ी (Foxconn Move May Delay iPhone 17 Production Timeline) कोशिश है बता दें कि चीन की तरफ से लगातार इस बात का दबाव बनाया जा रहा था कि वे भारत और दक्षिण एशिया में आईफोन के प्रोडक्शन से जुड़े टेक्नोलॉजी को न भेजे और न ही प्रशिक्षित स्टाफ को ही वहां से (Foxconn Move May Delay iPhone 17 Production Timeline) भेजे। ऐसा अमेरिका और चीन के बीच आए व्यापारिक तनाव के बाद आईफोन के कारोबार को वहां से शिफ्ट होने से रोकने की एक बड़ी कोशिश है। वर्तमान में एपल के कुल उत्पादन का पांचवां हिस्सा भारत में प्रोडक्शन हो रहा है। और ये सिर्फ चार साल के अंदर हुआ है। एपल की कोशिश थी कि अमेरिका में बिकने वाले ज्यादातर फोन का 2026 के आखिर तक भारत में ही प्रोडक्शन हो, लेकिन टेक्निकल स्टॉक की भारी कमी की वजह से अब इसके प्रोडक्शन में देरी हो सकती है।  चीनी कर्मचारी सबसे बड़ी मजबूरी (Foxconn Move May Delay iPhone 17 Production Timeline) हैं क्योंकि दोनों में टेक्निकल स्किल गैप पैदा हो सकता है। फॉक्सकॉन के अनुभवी चीनी टेक्नीशियंस न सिर्फ प्रोडक्शन को मैनेज करते थे, बल्कि साथ ही वो लोकल वर्कफोर्स को ट्रेनिंग देते थे। अब उनकी गैरमौजूदगी में आईफोन जैसे हाई-एंड प्रोडक्ट्स को असेंबल करना चुनौतियों भरा हो सकता है। महत्वपूर्ण बात यह कि लंबे समय से आईफोन चीन में ही बनते आए हैं, ऐसे में चीनी कर्मचारी उनकी सबसे बड़ी मजबूरी (Foxconn Move May Delay iPhone 17 Production Timeline) हैं। बेशक आईफोन बनाने का जितना अनुभव है चीनी कर्मचारियों के पास उतना भारतीयों के पास नहीं है। इससे प्रोडक्शन की स्पीड प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में जब तक भारत में उतनी ही अनुभवी लोकल टीम तैयार नहीं हो जाती, तब तक फॉक्सकॉन को कई ऑपरेशनल दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। कहने की जरूरत नहीं चीनी इंजीनियरों की वापसी से भारत की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स प्रभावित हो सकती है। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव के चलते फॉक्सकॉन के इस कदम से भारत में आईफोन का निर्माण प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। और इसकी वजह से iPhone 17 के उत्पादन में देरी संभव है। इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले फॉक्सकॉन और ऐपल आईफोन 17 की ज्यादा से ज्यादा यूनिट बनाने की तैयारी कर रहे हैं इस पूरे मामले पर विशेषज्ञों का कहना है कि “भारत में आईफोन 17 लाइनअप के प्रोडक्शन में देरी हो सकती है। ताइवान की कंपनी फॉक्सकॉन तमिलनाडु के ओरागदम में ईएसआर (ESR) इंडस्ट्रियल पार्क में एक नई यूनिट स्थापित की (Foxconn Move May Delay iPhone 17 Production Timeline) है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने भारत और साउथ-ईस्ट एशिया में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने और इंजीनियरों को भेजने पर रोक के लिए एजेंसियों और स्थानीय सरकारों पर दबाव बनाया है। जानकारों के मुताबिक, फॉक्सकॉन और ऐपल आईफोन 17 की ज्यादा से ज्यादा यूनिट बनाने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में अगर अनुभवी चीनी कर्मचारियों को प्रोडक्शन के काम से वापिस बुलाया जाता है, तो नए मॉडल्स की प्रोडक्शन बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है। Latest News in Hindi Today Hindi  Foxconn #Foxconn #iPhone17 #AppleNews #iPhoneDelay #TechUpdate #AppleLeak #iPhone17Launch

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Thailand scam 2025

कंबोडियाई अंकल की धोखेबाजी में थाई प्रधानमंत्री सस्पेंड, किस विवाद से चर्चा में भारतीयों का ड्रीम डेस्टिनेशन थाईलैंड?

थाईलैंड…यह नाम सुनते ही ज्यादातर भारतीयों को नीले समुद्र तट, नाइट लाइफ और स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड की याद आने लगती है। क्योंकि थाईलैंड छुट्टियां बिताने के लिए भारतीयों का पसंदीदा डेस्टिनेशन है। एक तो यह भारत से ज्यादा दूर नहीं और दूसरा यहां आने-जाने और रहने का खर्च कम। इसलिए थाइलैंड मिडिल क्लास भारतीयों का ड्रीम डेस्टिनेशन बन चुका है, लेकिन यह खूबसूरत देश इस समय अपने राजनीतिक उथल-पुथल और क्षेत्रीय तनाव के कारण चर्चा में है।  थाईलैंड की सबसे युवा प्रधानमंत्री पेटोंगटार्न शिनावात्रा (Patongtarn Shinawatra) को वहां की संवैधानिक कोर्ट ने एक लीक फोन कॉल विवाद के कारण सस्पेंड कर दिया है। दुनिया के किसी भी देश में कोर्ट द्वारा एक प्रधानमंत्री को ही सस्पेंड कर देना अपने आप में अभूतपूर्व उदाहरण है। कोर्ट के इस कार्रवाई के बाद फुमथम वेचायचाई (Phumtham Wechayachai) आज थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ले रहे हैं। इसकी जानकारी देते हुए थाईलैंड सरकार के प्रवक्ता जीरायु होंगसुब ने बताया कि फुमथम वेचायचाई (Phumtham Wechayachai) को महामहिम राजा शपथ दिलाएंगे। जिसके बाद वे कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर कार्य करेंगे आइए अब उस पूरे विवाद के बारे में जानते हैं, जिससे थाईलैंड की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है और पेटोंगटार्न शिनावात्रा का पीएम पद से सेस्पेंड कर दिया गया।  कंबोडियाई सीनेट अध्यक्ष ने कर ली फोन कॉल रिकॉर्ड  बता दें कि पेटोंगटार्न शिनावात्रा (Patongtarn Shinawatra) का जो फोन कॉल लीक हुआ है उसमें व कंबोडियाई सीनेट के अध्यक्ष हुन सेन (Hun Sen) बातचीत करते हुए अपने ही देश के सेना और सैन्य जनरलों की आलोचना करती सुनी जा सकती है। दोनों के बीच यह बातचीत 15 जून को हुआ था, जिसे अब लीक किया गया। हुन सेन (Hun Sen) ने अपने एक फेसबुक पोस्ट में इसकी जानकारी देते हुए बतया की उन्होंने इस बातचीत को रिकॉर्ड कर लिया था। जिसे अब 80 से ज्यादा लोगों के साथ शेयर किया है। इस लीक कॉल रिकॉर्ड में सुना जा सकता है कि पेटोंगटार्न शिनावात्रा (Patongtarn Shinawatra) और हुन सेन एक ट्रांसलेटर के माध्यम से थाईलैंड-कंबोडिया बॉर्डर पर हुई सैन्य झड़प पर चर्चा कर रहे हैं। ये दोनों नेता बातचीत से घातक झड़प के बाद दोनों देशों की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों को हटाना पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। पेटोंगटार्न इस कॉल में हुन सेन (Hun Sen) को अंकल संबोधित करते हुए कहती हैं कि वे थाईलैंड के सेना कमांडर की बात को न सुनें। थाई कमांडर ने सीमा विवाद को लेकर सार्वजनिक रूप से कंबोडिया की आलोचना करते हुए उन्हें “विरोधी” कहा था। इस दौरान पेटोंगटार्न ने हुन सेन से यह भी कहा कि वह उन्हें बताएं कि वे इस समस्या के समाधान के लिए क्या चाहते हैं और वे उसका समाधान करेंगी। गौरतलब है कि हुन सेन को पेटोंगटार्न के पिता और थाईलैंड के पूर्व पीएम थाकसिन शिनावात्रा का बेहद पुराना मित्र कहा जाता है। हुन सेन के बेटे हुन मानेत इस समय कंबोडिया के पीएम हैं।  इसे भी पढ़ें:-ट्रंप का ऐलान, गाजा में 60 दिन का युद्धविराम होगा, इजरायल तैयार लेकिन हमास थाईलैंड-कंबोडिया सीमा झड़प में एक सैनिक की मौत  बता दें कि दोनों देश बौद्ध धर्म को मानने वाले हैं और यहां की रहन सहन और खान पान लगभग एक जैसी है, लेकिन सीमा विवाद के कारण दोनों देशों के बीच तनातनी हमेशा बनी रहती है। बीते मई माह में इन दो पड़ोसियों के बीच उस समय विवाद चरम पर पहुंच गया, जब एक थाई सैनिक की फायरिंग में कंबोडिया के एक सैनिक की मौत हो गई। इस विवाद को लेकर कंबोडिया की सेना ने बयान जारी कर कहा था कि बॉर्डर पर रुटीन पेट्रोलिंग कर रहे उनके जवानों पर थाईलैंड के सैनिकों ने फायरिंग कर दी थी। इस घटना में उसके एक जवान की मौत हो गई। वहीं थाई सेना का कहना है कि कंबोडिया के सैनिक पेट्रोलिंग के दौरान विवादित क्षेत्र में जबरदन घुस आए थे। थाईलैंड के जवान बातचीत के माध्यम से इस विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहे थे, तभी कंबोडियाई सैनिकों ने गोली चला दी। जवाब में थाईलैंड आर्मी ने भी गोली चलाई। इस सैन्य झड़प के बाद दोनों देशों ने अपनी सीमा पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिससे दोनों देशों के नागरिकों का एक दूसरे के देश में आना-जाना लगभग बंद है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Patongtarn Shinawatra #thailandscam #thaipmsuspended #cambodianuncle #indiantravel #thailandcontroversy #travelnews2025 #tourismalert #thaipolitics

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Owaisi Slams UP Govt Over Kawad Yatra

Owaisi Questions UP Govt Over Kawad Yatra Shop Licenses: कांवड़ यात्रा में दुकानों के लाइसेंस मुद्दे पर बोले ओवैसी, कहा- “क्‍या पैंट उतरवा देंगे”

एक बार फिर कांवड़ यात्रा से पहले उत्तर प्रदेश में सियासत गरमा गई है। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने कुछ सख्त नियम जारी किए हैं। इसमें खाने-पीने की दुकानों पर मालिक के नाम की अनिवार्यता के साथ ही लाइसेंस और पहचान पत्र जरूरी कर दिया गया है। गौरतलब हो कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने कहा है कि ढाबा और रेस्टोरेंट में मालिक और मैनेजर का नेमप्लेट जरूरी है। खैर, पिछले साल की तरह इस बार भी कांवड़ यात्रा के दौरान यूपी में बवाल मचा हुआ है। दरअसल, यूपी में उन दुकानों को बंद कराने की खबरें आ रही हैं, जिनके पास नाम और लाइसेंस नहीं हैं। इस मुद्दे पर एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी सरकार को आड़े हाथों लिया। ओवैसी ने कांवड़ यात्रा को लेकर यूपी की योगी सरकार पर निशाना साधते हुए (Owaisi Questions UP Govt Over Kawad Yatra Shop Licenses) कहा कि “मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा मार्ग पर भोजनालय चलाने वाले दुकानदारों को बेवजह परेशान किया जा रहा है।”  बीजेपी पर तंज करते हुए ओवैसी ने कहा कि “ये अफसोस की बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल साफ तौर पर निर्देश दिए थे, फिर भी यूपी सरकार ऐसे विजिलेंटे ग्रुप्स को खुली छूट दे रही है। आखिर इनको रोका क्यों नहीं जा रहा?” सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए उन्‍होंने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल ऐसे फैसलों पर राज्य सरकार को फटकार लगाई थी, लेकिन इसके बावजूद ऐसा रवैया है, जो कि प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल है।” बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर खुले में मांस बिक्री ना होने के साथ ही ओवररेटिंग पर सख्ती के निर्देश और संचालक को अपना नाम लिखे होने के निर्देश दिए हैं। पहले कांवड़ यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण होती थी, लोग श्रद्धालुओं का स्वागत करते थे, चाहे वे किसी भी धर्म के क्यों (Owaisi Questions UP Govt Over Kawad Yatra Shop Licenses) न हों सूबे की सरकार पर सवाल खड़ा करते हुए ओवैसी ने कहा कि “पहले कांवड़ यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण होती थी, लोग श्रद्धालुओं का स्वागत करते थे, चाहे वे किसी भी धर्म के क्यों न हों, लेकिन अब कुछ तत्व संगठित होकर यात्रा के बहाने अराजकता फैला रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि “मुजफ्फरनगर में बाईपास के पास पहले ऐसी कोई दिक्कत नहीं होती (Owaisi Questions UP Govt Over Kawad Yatra Shop Licenses) थी। अब कोई ग्रुप बनाकर होटल वालों से आधार कार्ड मांगा जाता है। अरे तुम कौन होते हो पूछने वाले? न तुम एसपी हो, न आरडीओ, न एसडीएम।” इस बीच ओवैसी ने एक मामले का हवाला देते हुए कहा कि “एक युवक से आधार कार्ड मांगने के बाद जब उसने नहीं दिखाया, तो उसका कपड़ा उतार दिया गया। बाद में पता चला कि उसका नाम गोपाल था।” इस कृत्य की आलोचना करते हुए ओवैसी ने कहा कि वो चाहे वो गोपाल हो या कोई और हो, किसी को ये अधिकार नहीं कि वो इस तरह की गुंडागर्दी करे।”  इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  पुलिस ने भले ही नोटिस दिया हो, लेकिन क्या वह इन लोगों को गिरफ्तार (Owaisi Questions UP Govt Over Kawad Yatra Shop Licenses) करेगी? यही नहीं उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि “पुलिस ने भले ही नोटिस दिया हो, लेकिन क्या वह इन लोगों को गिरफ्तार (Owaisi Questions UP Govt Over Kawad Yatra Shop Licenses) करेगी? क्या बुलडोजर का डर दिखाया जाएगा? सरकार की मंशा पर शक जताते हुए उन्होंने कहा कि “अगर सरकार की नीयत कमजोर है तो ये लोग खुद को सत्ता के संरक्षित मानकर जो चाहें करेंगे।” बता दें कि उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के दौरान बिना लाइसेंस वाले दुकानों को बंद करने की बात एक बार फिर उठ रही है। इस मुद्दे पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार और प्रशासन पर करारा हमला किया। सरकार को आड़े हाथों लेते हुए ओवैसी ने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद यूपी सरकार कार्रवाई नहीं कर रही। उन्होंने प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए अराजकता फैलाने वाले तत्वों की कड़ी आलोचना की।” खैर, देखना दिलचस्प होगा कि आगे यह बवाल शांत होता है या फिर इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर इसे और तूल दिया जाता है? Latest News in Hindi Today Hindi news Owaisi #Owaisi #KawadYatra #UPGovt #ShopLicense #PoliticalNews #IndiaNews #Controversy

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Owaisi Slams EC

Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar: बिहार में चुनाव आयोग के इस प्रोसेस पर भड़के ओवैसी, कहा- “करोड़ों वोटर्स नहीं डाल सकेंगे वोट”

इस साल के अंत में बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनावी माहौल के मद्देनजर राजनीतिक हलकों में हलचल मची हुई है। यहाँ सबसे बड़ी चर्चा यहां पर वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चर्चा जोरों पर है। अमूमन सभी विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। इस कड़ी में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग की बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की योजना कर विरोध किया (Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar) है। न सिर्फ विरोध किया है बल्कि इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए ओवैसी ने कहा कि “बूथ स्तर के अधिकारियों के लिए इतने कम समय में करोड़ों वोटर्स के रिकॉर्ड को अपडेट करना करीब-करीब असंभव है।” उन्होंने कहा, “आप चाहते हैं कि यह प्रक्रिया एक महीने में निपटा ली जाए। यह कैसे संभव है? आप इसे महज एक महीने में कैसे कर सकते हैं? इसके पीछे क्या तर्क है?” करोड़ों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब हो (Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar) जाएंगे और वे वोट डालने के अपने अधिकार से वंचित हो जाएंगे एक निजी चैनल को दिए साक्षात्कार में ओवैसी ने यह चेतावनी भी दी कि इस संशोधन की वजह से वोटिंग लिस्ट से करोड़ों नाम छूट सकते हैं। ओवैसी ने कहा, “आप जल्दबाजी करके इन चीजों को रद्द नहीं कर सकते। अगर कल चुनाव होते हैं तो मुझे पूरा यकीन है कि इसमें कई नाम छूट जाएंगे। इसका दोष कौन लेगा? ऐसा करना अभी असंभव है और मेरी आशंका है कि हजारों नहीं, बल्कि लाखों, शायद करोड़ों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब हो (Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar) जाएंगे और वे वोट डालने के अपने अधिकार से वंचित हो जाएंगे।” खैर, इस बीच एआईएमआईएम चीफ ने लाल बाबू हुसैन केस का भी हवाला दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि जिस व्यक्ति का नाम पहले से ही वोटर लिस्ट में है, उसे बिना नोटिस और उचित प्रक्रिया के हटाया नहीं जा सकता।  इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  बीएलए के लिए एक महीने में इसे कर पाना कैसे संभव (Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar) होगा गौरतलब हो कि चुनाव आयोग की तरफ से एसआईआर की प्रक्रिया 24 जून को अधिसूचित की गई थी। इसकी कड़ी आलोचना करते हुए एआईएमआईएम चीफ ओवैसी ने कहा कि “इसमें वोटर्स को नुकसान (Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar) होगा। बिहार के ज्यादातर युवा पलायन कर चुके हैं। वे आर्थिक और अन्य वजहों से केरल, मुंबई, हैदराबाद, पंजाब और दिल्ली आदि राज्यों में चले जाते हैं, इसी तरह सीमांचल का अधिकांश क्षेत्र बाढ़ की वजह से करीब छह महीने तक कटा रहता है। अब, आप इसे एक महीने में करना चाहते हैं।” यही नहीं, चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करते हुए ओवैसी ने कहा कि “बीएलए आपके घर कितनी बार आएगा? शायद वह एक बार, दो बार और तीन बार आएगा। यह काफी चौंकाने वाला है कि चुनाव आयोग ऐसा कर रहा है।” उन्होंने कहा कि बिहार में करीब 8 करोड़ वोटर्स हैं। बीएलए के लिए एक महीने में इसे कर पाना कैसे संभव होगा? यह मानवीय रूप से असंभव है।” ऐसा ही नहीं है कि ओवैसी ही नहीं बल्कि अन्य राजनीतिक दल भी इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन के घटक दलों के नेताओं ने कल बुधवार को चुनाव आयोग से मुलाकात कर इस प्रक्रिया को कराने के समय से जुड़ी अपनी चिंताओं से अवगत कराया। उनका आरोप है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कराई जा रही इस कवायद की वजह से राज्य के 2 करोड़ लोग वोट डालने का अधिकार खो सकते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Owaisi #Owaisi #BiharElections #ElectionCommission #VotingRights #AIMIM #BiharNews #IndianPolitics

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